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  • अखिलेश यादव ने अमित शाह के संसद में जवाब देने के बयान पर साधा निशाना, कहा देश भाषण सुनने के मूड में नहीं

    अखिलेश यादव ने अमित शाह के संसद में जवाब देने के बयान पर साधा निशाना, कहा देश भाषण सुनने के मूड में नहीं


    नई दिल्ली ।
    समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बुधवार को सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार की ओर से जवाब देने के लिए समय सीमा तय करना अपने आप में अलोकतांत्रिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक जवाब देने के बजाय सत्र समाप्त करने की जल्दबाजी में है।

    अमित शाह ने कहा था कि यदि विपक्ष छात्र आंदोलन से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार होता है तो वह संसद में उठाए जाने वाले हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और चर्चा के दौरान स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

    इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि संसद में जवाब देने के लिए सरकार द्वारा समय-सीमा तय करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार जवाब केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि उसमें सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए।

    अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि सरकार जिस समय सीमा में जवाब देने की बात कर रही है, वह वास्तविक उत्तर देने के बजाय एक बयान तक सीमित रह सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी नहीं चाहती कि विपक्ष के सवालों का विस्तृत जवाब दिया जाए और वह संसद के मौजूदा सत्र को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

    समाजवादी पार्टी प्रमुख ने अपने बयान में जिम्मेदारी और जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि किसी सरकार की जवाबदेही समय की शर्त से नहीं, बल्कि उसके उत्तरदायित्व और तर्क से तय होती है। उन्होंने छात्र आंदोलन से जुड़े पूरे मामले को गंभीर बताते हुए विस्तृत जवाब की मांग दोहराई।

    दरअसल, 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से सवाल कर रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पैलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता सरकार से स्पष्टीकरण की मांग कर चुके हैं।

    विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा जा रहा है। इसी बीच सरकार की ओर से संसद में चर्चा और जवाब देने की बात कही गई है। अमित शाह ने संकेत दिया है कि यदि विपक्ष छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होता है तो वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

    संसद के मौजूदा मानसून सत्र की निर्धारित अवधि 13 अगस्त तक है। ऐसे में विपक्ष के सवालों और सरकार के जवाब को लेकर समय को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि, सदन की कार्यवाही की आवश्यकता होने पर समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना की भी चर्चा है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच अखिलेश यादव का बयान विपक्ष की ओर से सरकार पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और उसके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होती है या नहीं और अमित शाह विपक्ष के आरोपों पर किस तरह जवाब देते हैं।

  • JPSC-JSSC विवाद: लाठीचार्ज के विरोध में आज झारखंड बंद, 17वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन

    JPSC-JSSC विवाद: लाठीचार्ज के विरोध में आज झारखंड बंद, 17वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन


    रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन 17वें दिन भी जारी है। सोमवार को विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद विवाद और बढ़ गया। छात्रों के समर्थन में बीजेपी ने मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का आह्वान किया है। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से शांति बनाए रखने और सरकार पर भरोसा रखने की अपील की है।

    आंदोलन के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते की गिरफ्तारी, तीन भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की ED जांच को मंजूरी जैसे कदम भी सामने आए हैं। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।

    विधानसभा घेराव में पुलिस से भिड़े छात्र
    JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा का घेराव करने पहुंचे थे। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन कई छात्र विधानसभा के गेट तक पहुंच गए। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

    घटना के दौरान कई छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई। तनाव के चलते विधानसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई। बाद में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया। अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की देर शाम तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    छात्र नेता रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि छात्र पूरे दिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन शाम को पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ छात्रों के साथ मारपीट भी हुई। पासवान के मुताबिक, आंदोलन अब सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जन आंदोलन का रूप ले चुका है।

    सीएम सोरेन ने की शांति की अपील
    घटनाक्रम के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी बात रखने का अधिकार है और सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से सुन रही है। मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वरिष्ठ मंत्री लगातार छात्रों से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, सोरेन ने कुछ विपक्षी नेताओं पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप भी लगाया और छात्रों से किसी के बहकावे में नहीं आने की अपील की।

    लाठीचार्ज के खिलाफ बीजेपी का आज बंद
    10 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद बीजेपी ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में मंगलवार, 11 अगस्त को झारखंड बंद का ऐलान किया। रांची में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और बाबूलाल मरांडी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए था। पार्टी ने प्रदेश के लोगों से बंद को समर्थन देने की अपील की है।

    राहुल गांधी ने भी उठाया लाठीचार्ज का मुद्दा
    छात्रों का आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग पर सवाल उठाते हुए झारखंड सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील की। उनके बयान पर बीजेपी ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में छात्रों के मुद्दे उठाते हैं, जबकि सहयोगी दलों की सरकार वाले राज्यों में उनका रुख अलग होता है।

    कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि झारखंड सरकार में कांग्रेस भागीदार है, लेकिन JPSC-JSSC मामले में पार्टी किसी भी तरह से शामिल नहीं है। उन्होंने परीक्षाओं में गड़बड़ी की बात स्वीकार करते हुए छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया और लाठीचार्ज व आंसू गैस के इस्तेमाल को गलत बताया।

    अंबा प्रसाद ने मामले की CBI जांच की मांग की। उनका तर्क है कि शिक्षा, गृह और पुलिस विभाग मुख्यमंत्री के अधीन हैं और JPSC का गठन भी सरकार की सिफारिश पर होता है। ऐसे में CID की जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

    सरकार तीन परीक्षाएं कर चुकी है रद्द
    सरकार JPSC-JSSC विवाद के बीच तीन भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का फैसला पहले ही ले चुकी है। इनमें 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी शामिल है। सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने की मांग भी स्वीकार कर ली है। हालांकि, छात्र संगठन अभी भी CBI जांच की मांग पर कायम हैं।

    पूर्व JPSC चेयरमैन एल खियांग्ते गिरफ्तार
    विवाद के बीच JPSC के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले 3 अगस्त को उनसे करीब 7 घंटे तक पूछताछ की गई थी। यह कार्रवाई JPSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत हुई। इसी मामले में CID ने राज्यभर में 18 स्थानों पर छापेमारी भी की थी।

    22 जुलाई 2026 को CID की छापेमारी के बाद खियांग्ते ने JPSC चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि निष्पक्ष जांच के लिए पद छोड़ना उचित है। खियांग्ते पर JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा के लिए पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी TSR Data Processing Limited (TDPL) को काम देने का आरोप है। प्रदर्शनकारी छात्र TDPL से जुड़ी सभी परीक्षाओं को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। रविवार को JPSC के तीन सदस्यों ने भी इस्तीफा दिया था।

    मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद बने थे चेयरमैन
    एल खियांग्ते राज्य के मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पिछले साल फरवरी में JPSC के चेयरमैन नियुक्त हुए थे। उन पर झारखंड में कई परीक्षाओं के संचालन का ठेका TDPL को देने का आरोप है। TDPL को JSSC ने कथित अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद एजेंसी को परीक्षा संबंधी काम दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने आरोप लगाया था कि खियांग्ते ने ठेका देने के बदले 2 करोड़ रुपये और सभी भुगतानों पर 20 फीसदी कमीशन की मांग की थी। हालांकि, ये आरोप हैं और झारखंड CID की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

    अभय तिवारी के पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र
    विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के हाथों में अभय तिवारी के पोस्टर भी नजर आए। छात्र उनके खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। CID के अनुसार, अभय तिवारी पहले TDPL में मार्केटिंग मैनेजर था और बाद में गोड्डा जिले में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर बना। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में उसका नाम सामने आया है।

    अभय तिवारी पर आरोप है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘गारंटीड सिलेक्शन’ का दावा कर अभ्यर्थियों से 25 से 40 लाख रुपये तक मांगता था। हालांकि, इन आरोपों की जांच अभी जारी है। प्रदर्शनकारियों के पोस्टरों में उसके कथित रिश्तेदारों के अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में चयन और रैंक का भी दावा किया गया।

    अब बातचीत से निकलेगा रास्ता या बढ़ेगा आंदोलन?
    JPSC-JSSC विवाद को लेकर छात्र अभी भी CBI जांच समेत अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। सरकार बातचीत और परीक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा दे रही है, जबकि बीजेपी ने लाठीचार्ज के विरोध में बंद का ऐलान कर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे में मंगलवार के झारखंड बंद और सरकार-छात्र संगठनों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर सबकी नजर रहेगी। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार की ओर से उठाए गए कदम आंदोलन को शांत कर पाते हैं या छात्रों का प्रदर्शन और व्यापक रूप लेता है।

  • झारखंड छात्र आंदोलन में पुष्पा राज और स्पाइडरमैन से लेकर तिरंगा मार्च तक, रांची प्रदर्शन के प्रमुख दृश्य चर्चा में

    झारखंड छात्र आंदोलन में पुष्पा राज और स्पाइडरमैन से लेकर तिरंगा मार्च तक, रांची प्रदर्शन के प्रमुख दृश्य चर्चा में

    नई दिल्ली । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को राजधानी रांची में बड़े प्रदर्शन में बदल गया। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव मार्च के लिए पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच कई जगह टकराव की स्थिति बनी और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिशों के बीच पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए।

    विधानसभा मार्च के दौरान प्रदर्शन का तरीका भी कई जगह अलग-अलग नजर आया। कुछ छात्रों ने पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ते दिखाई दिए। कई स्थानों पर कंटीले तार लगाए गए थे, लेकिन आंदोलनकारी छात्रों ने उन्हें भी पार करने का प्रयास किया। प्रदर्शन के बीच बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।

    प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने अपनी बात रखने के लिए अलग-अलग प्रतीकों और तरीकों का इस्तेमाल किया। एक छात्र हाथ में गुलाब और तिरंगा लेकर पहुंचा और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का संदेश देता दिखाई दिया। दूसरी ओर कुछ प्रदर्शनकारियों ने लोकप्रिय फिल्मों और किरदारों से प्रेरित अंदाज अपनाकर भी अपनी बात लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की।

    प्रदर्शन के दौरान एक युवक पुष्पा राज के अंदाज में नजर आया। बताया गया कि वह महाराष्ट्र से कुल्हाड़ी लेकर प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचा था। इसके अलावा एक छात्र स्पाइडरमैन की पोशाक में दिखाई दिया। इन अलग-अलग रूपों ने प्रदर्शन के दृश्य को चर्चा का विषय बना दिया।

    छात्रों ने अपनी नाराजगी जताने के लिए रचनात्मक तरीकों का भी सहारा लिया। परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मुद्दे को उजागर करने के लिए कुछ प्रदर्शनकारी नौकरी को तौलकर बेचने जैसी प्रस्तुति करते दिखाई दिए। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों की नाराजगी और सवालों को प्रतीकात्मक तरीके से सामने रखना था।

    पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया। इसके बावजूद कुछ छात्र पानी की बौछार के बीच नाचते और विरोध जताते दिखाई दिए। इस दौरान प्रदर्शन का माहौल कुछ समय के लिए अलग रूप लेता नजर आया, लेकिन छात्रों की मुख्य मांगें भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई से जुड़ी रहीं।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। बैरिकेडिंग तोड़े जाने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की। बाद में लाठीचार्ज की कार्रवाई किए जाने और कुछ छात्रों को पुलिस द्वारा वहां से ले जाने की जानकारी सामने आई।

    छात्रों ने कई जगह फ्लैश लाइट और तिरंगा मार्च भी निकाला। भारत माता की जय के नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। कुछ छात्र भगत सिंह के पोस्टर लेकर भी आंदोलन में शामिल हुए। इन गतिविधियों के जरिए प्रदर्शनकारियों ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर अपनी मांगों को व्यापक स्तर पर सामने रखने का प्रयास किया।

    JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। रांची में हुए विधानसभा मार्च के दौरान सामने आए अलग-अलग दृश्य यह दिखाते हैं कि छात्रों ने अपनी नाराजगी दर्ज कराने के लिए पारंपरिक विरोध के साथ कई रचनात्मक तरीकों का भी इस्तेमाल किया।

  • झारखंड में जेपीएससी जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, बैरिकेड तोड़ विधानसभा की ओर बढ़े आंदोलनकारी

    झारखंड में जेपीएससी जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, बैरिकेड तोड़ विधानसभा की ओर बढ़े आंदोलनकारी

    नई दिल्ली । झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन सोमवार को उस समय तेज हो गया, जब बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने प्रशासन की ओर से लगाए गए बैरिकेड पार किए और कई जगह उन्हें हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए।

    आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक आठ बैरिकेड तोड़ दिए। मुख्य सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किए जाने के बाद कई छात्र कच्चे और पहाड़ी रास्तों से विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड खींचकर रास्ते से हटाए और फिर समूह के साथ आगे बढ़ते रहे।

    आंदोलन की अगुवाई जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मोर्चा के स्वयंसेवकों ने की। मोर्चा के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा के गेट की तरफ आगे नहीं बढ़ने की अपील की। उन्होंने छात्रों से जगन्नाथ मंदिर तक मार्च करने और वहीं धरना जारी रखने का आग्रह किया। भीड़ में किसी असामाजिक तत्व की मौजूदगी की जानकारी देने की अपील भी की गई।

    प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान मोर्चा के प्रतिनिधियों और कुछ छात्रों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। इसके बाद आंदोलनकारियों को नियंत्रित करने के लिए तीन स्तर की मानव शृंखला बनाई गई। बड़ी संख्या में छात्र सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शन स्थल पर वंदे मातरम और भारत माता की जय के नारे भी सुनाई दिए।

    इस आंदोलन में नौ दिनों से अनशन कर रहे जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो की मौजूदगी भी खास रही। जयपाल सिंह स्टेडियम में अनशन पर बैठे महतो को उनके समर्थक कपड़े और डंडों से तैयार पालकी में कंधों पर लेकर विधानसभा के करीब पहुंचे। इससे पहले एंबुलेंस से विधानसभा की ओर जाते समय उन्हें जगन्नाथ मंदिर के पास रोक दिया गया था।

    रोक दिए जाने के बाद समर्थकों ने महतो को कंधों पर उठा लिया और कुछ दूरी तक उन्हें इसी तरह आगे ले गए। बाद में वह पालकी पर बैठकर धरना स्थल तक पहुंचे। इस दौरान उनके हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर भी दिखाई दी। महतो की मौजूदगी ने छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन का भी संकेत दिया।

    सदन की कार्यवाही में हिस्सा लेने के बाद जेएलकेएम के विधायक भी प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों से विधानसभा के गेट तक नहीं जाने और उससे पहले ही रुकने की अपील की। विधायक ने आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखने का आग्रह किया और प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने को कहा।

    प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तर पर बैरिकेडिंग की थी। वाटर कैनन के इस्तेमाल के बावजूद आंदोलनकारी अपनी मांगों पर कायम रहे। पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई और ड्रोन के जरिए प्रदर्शन की निगरानी तथा रिकॉर्डिंग भी की गई।

    प्रदर्शन के दौरान विरोध का अलग अंदाज भी देखने को मिला। कुछ छात्र स्पाइडरमैन और वनमानुष की वेशभूषा में पहुंचे और अपने हाथों में संदेश लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया। भीड़ में फिल्म पुष्पा के किरदार जैसी वेशभूषा में भी एक प्रदर्शनकारी नजर आया।

    छात्रों का यह आंदोलन अब विधानसभा के आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। प्रदर्शनकारी जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामलों को लेकर अपनी मांगों पर कायम हैं। वहीं प्रशासन प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर की ओर आगे बढ़ने से रोकने और स्थिति को नियंत्रित रखने में जुटा है।

  • छात्र आंदोलन पर लोकसभा में चर्चा को सरकार तैयार, किरन रिजिजू बोले गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब

    छात्र आंदोलन पर लोकसभा में चर्चा को सरकार तैयार, किरन रिजिजू बोले गृह मंत्री अमित शाह देंगे जवाब

    नई दिल्ली । मानसून सत्र के दौरान छात्र आंदोलन को लेकर लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए अपनी सहमति जताई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों से जुड़े विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब देंगे।

    रिजिजू ने कहा कि सरकार की ओर से चर्चा से पीछे हटने का सवाल नहीं है। छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर सदन में विस्तार से बातचीत होगी और उठाए जाने वाले सवालों का जवाब दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब गृह मंत्री सदन में सरकार का पक्ष रखेंगे तो विपक्षी सांसदों को उनका जवाब सुनना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष से सदन की कार्यवाही के दौरान व्यवधान पैदा नहीं करने की अपील की। उनका कहना था कि सरकार जवाब देने के लिए तैयार है, इसलिए चर्चा को हंगामे में बदलने के बजाय संसदीय तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार चाहती है कि मुद्दे पर पूरी चर्चा हो और सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले।

    वहीं विपक्ष ने छात्र आंदोलन के साथ अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी उठाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि गृह मंत्री छात्रों के मामले में सदन में बयान देने के लिए तैयार हैं, तो राम मंदिर से जुड़े मामले पर भी उन्हें अपना पक्ष रखना चाहिए। विपक्ष ने दोनों मुद्दों पर जवाब की मांग को संसद में जारी गतिरोध से जोड़ दिया है।

    संसद के मानसून सत्र में पिछले कई दिनों से विपक्षी दल अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। सोमवार को भी सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई तथा राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े आरोपों को लेकर गृह मंत्री से जवाब देने की मांग की।

    हंगामे के कारण प्रश्नकाल भी प्रभावित हुआ। विपक्षी सांसदों ने सदन के भीतर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और कार्यवाही सामान्य तरीके से चलाने में बाधा आई। इससे पहले विपक्षी दल संसद परिसर में भी अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन करते रहे हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद सोमवार को पानी और दूध लेकर परिसर में पहुंचे और सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।

    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने भी कहा है कि जब तक गृह मंत्री दोनों प्रमुख मुद्दों पर सदन में जवाब नहीं देते, तब तक गतिरोध समाप्त होने की संभावना कम है। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि सरकार संसद के भीतर इन मामलों पर स्पष्ट स्थिति रखे।

    अब सरकार की ओर से छात्र आंदोलन पर चर्चा के लिए सहमति जताए जाने के बाद सदन की अगली कार्यवाही पर सभी की नजरें हैं। हालांकि विपक्ष की दूसरी मांग को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या इन मुद्दों पर संसद में टकराव आगे भी जारी रहता है।

  • JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, रांची में पुलिस ने कई बार बल प्रयोग किया

    JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, रांची में पुलिस ने कई बार बल प्रयोग किया


    नई दिल्ली । झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन सोमवार को विधानसभा मार्च तक पहुंच गया। राज्य के अलग अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे और विधानसभा घेराव के लिए मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी।

    सुबह से ही विधानसभा की ओर जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। पुलिस की ओर से छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे। प्रदर्शनकारी लगातार अपनी मांगों को लेकर नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। छात्रों का कहना था कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और वे सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाना चाहते हैं।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर बैरिकेड टूटने की स्थिति भी सामने आई। बताया गया कि प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड पार कर लिए और नई विधानसभा की दिशा में बढ़ने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

    वॉटर कैनन के इस्तेमाल के दौरान भी कुछ छात्रों ने विरोध जारी रखा। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने नाचते और गाते हुए पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। कुछ समय बाद पुलिस और छात्रों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाठीचार्ज किया।

    लाठीचार्ज के बाद छात्रों में नाराजगी दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वे शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे थे और इसके बावजूद उन पर लाठियां बरसाई गईं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि चोटें हाथ, सिर और चेहरे पर भी लगी हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की।

    पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। भारतीय जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य सरकार पर निशाना साधा और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है।

    इस बीच डुमरी के विधायक जयराम महतो भी विधानसभा से बाहर निकलकर प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों के समर्थन की बात कही और कहा कि उनकी आवाज को विधानसभा के भीतर और सड़क पर भी उठाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने जयराम महतो का समर्थन करते हुए उन्हें अपने बीच शामिल किया।

    छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और अब सरकार को उनकी शिकायतों पर स्पष्ट कार्रवाई करनी चाहिए। छात्रों ने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से यह भी कहा गया कि यदि पुलिस उन्हें विधानसभा जाने से रोकती है तो वे शांतिपूर्वक वहीं रुकने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि बल प्रयोग की जरूरत नहीं है और वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी बीजेपी नेताओं ने कथित भर्ती अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कुछ बीजेपी नेताओं को हिरासत में लिया। इस तरह छात्रों के विधानसभा मार्च के साथ राजनीतिक विरोध भी तेज दिखाई दिया।

    फिलहाल रांची में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। छात्रों की मुख्य मांग JPSC-JSSC भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों पर कार्रवाई से जुड़ी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

  • JPSC विवाद के बीच झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन परीक्षाओं पर संकट और जांच को लेकर सामने आया नया अपडेट

    JPSC विवाद के बीच झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन परीक्षाओं पर संकट और जांच को लेकर सामने आया नया अपडेट


    नई दिल्ली । 
    झारखंड में JPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सरकार और अभ्यर्थियों के बीच बातचीत के महत्वपूर्ण दौर में पहुंच गया है। रांची में सरकार और आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच तीसरे दौर की बैठक हुई, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, पुरानी परीक्षाओं और भर्ती व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किए जाने के संकेत मिले हैं।

    बैठक में सबसे अहम मुद्दा परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच का रहा। सरकार वित्तीय लेनदेन की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से कराने के लिए तैयार बताई जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी सामने आई है।

    छात्रों की प्रमुख मांगों में कुछ पुरानी परीक्षाओं को रद्द करना भी शामिल रहा है। बातचीत के दौरान JPSC बैकलॉग 2023, JPSC बैकलॉग 2025 और 14वीं प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द करने की बात रखी गई। इन परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बना हुआ है। सरकार की ओर से इन तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति की बात सामने आने के बाद बातचीत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके अलावा परीक्षा आयोजित कराने वाली TDPL एजेंसी की भूमिका को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से TDPL एजेंसी द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं की जांच करने की बात कही गई है। इससे परीक्षा संचालन की प्रक्रिया, उससे जुड़े निर्णयों और संभावित अनियमितताओं की व्यापक समीक्षा का रास्ता खुल सकता है।

    छात्रों की मांग केवल मौजूदा परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग भी कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार JPSC और JSSC की परीक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में बदलाव की दिशा में भी काम करने की तैयारी में है।

    सरकार की ओर से भर्ती व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसके लिए IIM और XISS जैसे संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग किए जाने की संभावना बताई गई है। इसका उद्देश्य परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, ताकि भविष्य में अभ्यर्थियों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी युवाओं की चिंताओं को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं की समस्याओं को समझती है और सरकारी व्यवस्था से जुड़ी वजहों के कारण ही युवा आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी को सरकार ने संज्ञान में लिया है और गलत काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे छात्रों से अपनी बात बिना किसी डर के सरकार तक पहुंचाने की अपील की है। सरकार और छात्रों के बीच हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित फैसलों को किस रूप में लागू किया जाता है। तीन परीक्षाओं को रद्द करने, वित्तीय लेनदेन की जांच और भर्ती व्यवस्था में बदलाव को लेकर सरकार की अगली कार्रवाई छात्र आंदोलन की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।

  • JPSC-JSSC विवाद में सरकार का पांच सूत्री फॉर्मूला, 14वीं परीक्षा रद्द होने से लेकर जांच तक क्या बदलेगा?

    JPSC-JSSC विवाद में सरकार का पांच सूत्री फॉर्मूला, 14वीं परीक्षा रद्द होने से लेकर जांच तक क्या बदलेगा?

    नई दिल्ली । रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत का दौर जारी है। सूत्रों के मुताबिक, वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनने की संभावना है। हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर सरकार की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। बातचीत के बीच 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किए जाने की संभावना भी सामने आई है।

    सरकार और छात्र संगठनों के बीच संभावित सहमति के तहत 2023 और 2025 की बैकलॉग सीटों को नहीं भरने का प्रस्ताव भी शामिल है। परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सरकार की ओर से जांच और व्यवस्था में सुधार से जुड़े कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।

    प्रस्तावित फॉर्मूले में CID जांच को 90 दिनों के भीतर पूरा करने की बात कही गई है। जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित किए जाने की संभावना भी जताई गई है। इससे परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।

    परीक्षा व्यवस्था में तकनीकी सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों के साथ प्रमुख संस्थानों के इंजीनियरों को शामिल किए जाने की संभावना है। इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए तकनीकी स्तर पर जरूरी बदलावों की पहचान करना होगा।

    इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL की ओर से कराई गई परीक्षाओं से जुड़े पैसों के लेनदेन की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए IIT, IIM और XLRI जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने पर भी विचार किया जा सकता है।

    इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों के प्रदर्शन और मौजूदा परिस्थितियों को लेकर बयान दिया है। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जा सकता है और सरकार युवाओं की समस्याओं को समझती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वह ज्यादा उम्र के नहीं हैं और युवाओं की परेशानियों को समझते हैं। उन्होंने उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि सीमा पर गोलियों की जरूरत हो सकती है, लेकिन यहां उसकी जरूरत नहीं है। उनका संकेत था कि युवाओं से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए।

    हेमंत सोरेन ने यह भी कहा कि देशभर में अलग-अलग राजनीतिक दल विभिन्न तरीकों से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार, सच और झूठ को मिलाकर युवाओं को गुमराह करने की रणनीति अपनाई जा रही है और इस प्रक्रिया में पढ़े-लिखे तथा जानकार लोग भी शामिल हो सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे युवाओं के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि सरकार की कार्रवाई के कारण युवाओं में गलत काम को सामने लाने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का साहस आया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि युवाओं को न्याय मिलेगा और परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल छात्र संगठनों और सरकार के बीच बातचीत जारी है। 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा, बैकलॉग पदों, जांच की समयसीमा और परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

  • झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन में शामिल हुए अभिनेता पीयूष मिश्रा, दिया समर्थन

    झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी छात्र आंदोलन में शामिल हुए अभिनेता पीयूष मिश्रा, दिया समर्थन

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का विरोध प्रदर्शन लगातार गहराता जा रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्र अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। इस बीच, प्रसिद्ध अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा ने आंदोलन स्थल पहुंचकर प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों का प्रत्यक्ष समर्थन किया।

    रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में एकत्र हुए अभ्यर्थियों के बीच पहुंचे पीयूष मिश्रा ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले युवाओं के संघर्ष और पीड़ा को देखकर वे उनके साथ खड़े होने आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विशेष एजेंडे के तहत नहीं, बल्कि छात्रों की तकलीफों और उनके आंसुओं को देखकर वे इस आंदोलन से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ एकजुटता दर्शाने के लिए वे अपनी ओर से हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के दौरान अभिनेता ने अपनी चर्चित फिल्म का क्रांतिकारी गीत ‘आरंभ है प्रचंड’ भी गाया, जिससे पूरे प्रदर्शन स्थल पर मौजूद युवाओं में भारी उत्साह देखा गया। यह गीत अपने प्रेरणादायक और संघर्षशील बोलों के लिए जाना जाता है। पीयूष मिश्रा ने बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के लिए भोजन, तिरपाल और अन्य आवश्यक सामग्रियां उपलब्ध कराने के प्रयास किए गए हैं, ताकि उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा किया जा सके।

    उल्लेखनीय है कि झारखंड में वर्ष 2019 के बाद आयोजित हुई कई प्रमुख भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र बेहद असंतोष व्यक्त कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जेएसएससी सीजीएल, जेएसएससी जेई और पीजीटी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में व्यापक पैमाने पर धांधली और लीक के मामले सामने आए हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक गया है।

    प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांगों में विवादित परीक्षाओं को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाना, पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो से निष्पक्ष जांच कराया जाना और इसमें संलिप्त दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई किया जाना शामिल है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।

    प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन को अब विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक वर्गों का भी समर्थन मिलने लगा है। युवाओं के इस विरोध-प्रदर्शन ने राज्य में प्रशासनिक एवं परीक्षा प्रणाली में सुधारों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

  • उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के नारे मामले में सात छात्रों को जमानत, दो पर कोर्ट की सख्ती

    उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के नारे मामले में सात छात्रों को जमानत, दो पर कोर्ट की सख्ती


    नई दिल्ली ।
    टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस से जुड़े एक मामले में मुंबई की अदालत ने नौ आरोपी छात्रों में से सात को अग्रिम जमानत दे दी, जबकि दो छात्रों की याचिकाएं खारिज कर दी गईं। मामला पिछले वर्ष संस्थान परिसर में हुई एक सभा के दौरान कथित तौर पर उमर खालिद और शरजील इमाम की रिहाई के समर्थन में नारे लगाए जाने से जुड़ा है।

    मुंबई सेशंस कोर्ट के न्यायाधीश वीबी बोहरा ने दो छात्रों को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि छात्र होने के नाते आरोपियों से देश के कानून का सम्मान करने की अपेक्षा की जाती है। जिन दो छात्रों की याचिकाएं खारिज हुई हैं, उनमें एक 32 वर्षीय गोवंडी निवासी और दूसरा 23 वर्षीय देवनार निवासी बताया गया है।

    मामला 12 अक्टूबर 2025 को TISS में आयोजित एक सभा से जुड़ा है। यह कार्यक्रम दिवंगत पूर्व प्रोफेसर और मानवाधिकार कार्यकर्ता जीएन साईबाबा को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया गया था। सभा के दौरान छात्रों ने उनकी तस्वीर लगाई, मोमबत्तियां जलाईं और उनकी कविताएं पढ़ीं। कुछ प्लेकार्ड पर रेस्ट इन पावर जैसे संदेश भी लिखे थे।

    अदालत ने माना कि जीएन साईबाबा को श्रद्धांजलि देना अपने आप में कोई गैरकानूनी गतिविधि नहीं है। विशेष रूप से अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि उन्हें 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिल चुकी थी। हालांकि, अदालत के अनुसार सभा के दौरान कथित तौर पर लगाए गए कुछ नारे इसे केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखते।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, सभा में करीब 10 से 12 छात्र शामिल हुए थे और आरोप है कि वहां उमर खालिद तथा शरजील इमाम की रिहाई की मांग को लेकर नारे लगाए गए। पुलिस के अनुसार, इस सभा के लिए संस्थान प्रशासन से पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। शुरुआती प्राथमिकी में नौ लोगों के नाम दर्ज किए गए थे और बाद में जांच ट्रॉम्बे पुलिस से अपराध जांच विभाग को सौंप दी गई।

    मामले की जांच के दौरान कुछ आरोपियों के लैपटॉप और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। अभियोजन पक्ष का दावा है कि इन उपकरणों में माओवादी संगठनों से संबंधित किताबें और अन्य सामग्री मिली। जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ डिजिटल जानकारी हटाई गई थी।

    अदालत ने जांच में मिली सामग्री के आधार पर कहा कि आरोपियों में से कुछ के माओवादी विचारधारा से प्रभावित होने के संकेत मिलते हैं। अदालत ने यह संभावना भी जताई कि सभा के जरिए संस्थान के अन्य छात्रों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया हो सकता है। हालांकि, न्यायाधीश ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की कि केवल माओवादी संगठनों का साहित्य डाउनलोड करना अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने यह भी कहा कि कैंपस में बिना अनुमति रेस्ट इन पावर जैसे शब्दों का इस्तेमाल अकेले कोई अपराध नहीं है। लेकिन कथित नारे, सभा की परिस्थितियां और जांच के दौरान सामने आई सामग्री को एक साथ देखने पर आरोपियों के कथित इरादों की जांच जरूरी हो जाती है।

    जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आपराधिक कार्रवाई में हुई देरी का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत ने कहा कि मुकदमों में देरी के पीछे कई प्रशासनिक और न्यायिक कारण हो सकते हैं, जिनमें लंबित मामलों की संख्या और न्यायाधीशों की उपलब्धता शामिल है। न्यायाधीश ने कहा कि इन अर्जियों पर भी दाखिल होने के नौ महीने से अधिक समय बाद आदेश दिया जा रहा है।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है। सात छात्रों को अग्रिम जमानत मिलने से उन्हें अंतरिम कानूनी राहत मिली है, जबकि दो छात्रों को अदालत से यह संरक्षण नहीं मिला। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और मामले की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।