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  • रांची में JPSC-JSSC छात्रों और सरकार के बीच बातचीत सकारात्मक, मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला

    रांची में JPSC-JSSC छात्रों और सरकार के बीच बातचीत सकारात्मक, मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला

    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन शनिवार को 15वें दिन भी जारी रहा। जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। शुक्रवार रात से शुरू हुई बातचीत शनिवार को भी आगे बढ़ी। छात्रों ने बैठक को सकारात्मक बताया, लेकिन साफ कर दिया कि अभी उनकी किसी प्रमुख मांग पर ठोस फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में आंदोलन समाप्त करने का निर्णय नहीं लिया गया है।

    देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले JPSC-JSSC न्याय गुट के आठ छात्रों ने राज्य अतिथि गृह में सरकार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। जानकारी के अनुसार बैठक शनिवार सुबह करीब 11 बजकर 20 मिनट पर शुरू हुई। बातचीत के बाद छात्र वापस प्रदर्शन स्थल पर लौट आए। छात्र नेताओं ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत का माहौल सकारात्मक रहा और उनकी बातों को सुना गया, लेकिन केवल बातचीत से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि उन्हें आश्वासन के बजाय अपनी मांगों पर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई चाहिए।

    छात्रों की प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी परीक्षा को लेकर है। प्रदर्शनकारी इस परीक्षा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्रों ने जांच के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी या राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीशों की समिति गठित करने की मांग रखी है। इसके अलावा जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग भी आंदोलन का अहम हिस्सा है।

    बातचीत के बाद झारखंड सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार अलग-अलग छात्र समूहों और संबंधित लोगों से लगातार बातचीत करेगी। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों के सुझाव लिए जाएंगे ताकि मामले को समझकर आगे की कार्रवाई की जा सके। सरकार की ओर से लोगों से अपनी बात और सुझाव साझा करने के लिए ईमेल के माध्यम से जानकारी देने की व्यवस्था भी किए जाने की बात सामने आई है।

    छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता उनके भविष्य से सीधे जुड़ी हुई है। इसलिए वे कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और परीक्षा प्रणाली में सुधार के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।

    आंदोलनकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि रविवार तक उनकी मांगों पर संतोषजनक फैसला नहीं लिया गया, तो 10 अगस्त को विधानसभा की ओर मार्च किया जाएगा। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना बनी हुई है। हालांकि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत शुरू होने से समाधान की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के बीच प्रमुख मांगों को लेकर गतिरोध कायम है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या बातचीत के जरिए आंदोलन को समाप्त करने का रास्ता निकल पाता है।

  • पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले तीन हजार से अधिक छात्रों को संबोधित किया और उन्हें जीवन की नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने वास्तविक दुनिया की ऐसी चुनौतियां आएंगी, जिनका सामना करने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सोच, मेहनत, रचनात्मकता और नए विचारों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    पीएम मोदी ने कहा कि कॉलेज और बाहर की दुनिया में काफी अंतर होता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को यह मालूम होता है कि उन्हें कौन सा विषय पढ़ना है और परीक्षा में किस तरह के सवाल सामने आ सकते हैं। लेकिन नौकरी, व्यवसाय या रोजमर्रा की जिंदगी में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं। कई बार अचानक कोई नई समस्या सामने आती है और उस समय यह भी स्पष्ट नहीं होता कि असल समस्या क्या है। ऐसे अवसरों पर व्यक्ति को खुद स्थिति को समझना पड़ता है और समाधान तलाशना होता है। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि उन्हें भविष्य की ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों के भविष्य के सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज समारोह में मौजूद हर विद्यार्थी के मन में आने वाले कल की अपनी अलग तस्वीर होगी। कोई पहली नौकरी और पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, तो कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा। कुछ विद्यार्थी अपना पहला स्टार्टअप शुरू करने का सपना भी देख रहे होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी का रास्ता और सपना अलग हो सकता है, लेकिन दीक्षांत समारोह का यह अवसर सभी के लिए समान रूप से विशेष है।

    समारोह में पीएम मोदी ने IIT दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन पहलों के लिए संस्थान और छात्रों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संकेत दिया कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकों को समझना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अपनी मौलिक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में संवाद करते हुए उनके मन में चल रहे विचारों का जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन कुछ तो पता चलता होगा कि विद्यार्थियों के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने IIT दिल्ली में छात्रों के पहले दिन से लेकर दीक्षांत समारोह तक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि ओरिएंटेशन से कनवोकेशन तक की यात्रा पूरी करना उनके लिए संतोष का विषय होगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि IIT दिल्ली से निकलने वाले छात्र केवल डिग्री लेकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना भी लेकर जा रहे हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनकी नई यात्रा के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल समाज तथा देश की प्रगति में करेंगे। उन्होंने छात्रों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने और हर चुनौती को सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखने का संदेश दिया।

  • राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर सरकारों से सुधार की मांग की

    राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर सरकारों से सुधार की मांग की

    नई दिल्ली । कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का शिक्षा तंत्र पूरी तरह से कमजोर हो चुका है और छात्रों को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि देशभर में छात्रों के बीच उठ रही आवाज मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ है और सरकारों को उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से Gen-Z और छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षा अब काफी महंगी हो गई है, जिसके कारण बड़ी संख्या में छात्रों के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि ठोस नीतियों और प्रभावी कदमों की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह छात्रों की समस्याओं को समझे और उनकी मांगों पर ध्यान दे। राहुल गांधी ने कहा कि चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो, छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले देहरादून और कोटा जैसे स्थानों पर छात्रों से जुड़े मुद्दे उठाए हैं और अब प्रयागराज में भी इसी विषय को लेकर बात करेंगे। उनके मुताबिक, देश के युवा भविष्य की दिशा तय करते हैं, इसलिए उनकी समस्याओं को समझना और समाधान निकालना जरूरी है।

    राहुल गांधी के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन पर निशाना साधा है। भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी युवाओं और छात्रों के मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष के नेता युवाओं के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और एक अलग राजनीतिक नैरेटिव तैयार करना चाहते हैं।

    भाजपा की ओर से कहा गया कि छात्रों से जुड़े मामलों पर सरकार लगातार काम कर रही है और शिक्षा क्षेत्र में कई सुधार किए जा रहे हैं। पार्टी ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि युवाओं के मुद्दों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।

    यह विवाद उस समय सामने आया है जब देश के कई हिस्सों में छात्र परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं। छात्रों की ओर से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, रोजगार के अवसर और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है।

    राहुल गांधी ने इससे पहले भी छात्र आंदोलनों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने छात्रों के साथ संवाद को जरूरी बताते हुए कहा है कि युवाओं की समस्याओं को समझे बिना शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं बनाया जा सकता।

    वहीं, भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां कांग्रेस शिक्षा व्यवस्था की कमियों और छात्रों की परेशानियों को प्रमुख मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बता रही है। आने वाले दिनों में शिक्षा और छात्र मुद्दे उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    झारखंड भर्ती परीक्षा विवाद में 14वें दिन भी छात्रों का आंदोलन जारी, अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली । झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शुक्रवार को आंदोलन का 14वां दिन रहा। बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कई छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इसी बीच अनशन कर रहे छात्र राहुल क्रांति की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत ज्यादा खराब होने पर उन्हें रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम से तत्काल सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद आंदोलन कर रहे छात्रों में चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर, भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर झारखंड विधानसभा के बाहर और सदन के भीतर भी राजनीतिक माहौल गरम रहा।

    भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। बताया गया कि राज्य में छह छात्र अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि लंबे समय से प्रदर्शन और अनशन के बावजूद सरकार की ओर से उनकी मांगों पर बातचीत के लिए कोई आधिकारिक बुलावा नहीं भेजा गया है। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा तक मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    छात्रों की सबसे प्रमुख मांग 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की है। प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्रों की मांग है कि मामले की जांच सीबीआई या राज्य के बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की टीम से कराई जाए। इसके अलावा छात्र झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कार्यप्रणाली में बड़े सुधार की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना जरूरी है।

    भर्ती परीक्षा विवाद का असर झारखंड विधानसभा में भी दिखाई दिया। विपक्षी विधायकों ने छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और जोरदार विरोध किया। विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग करने लगे। विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई गई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और पूरे मामले में उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

    वहीं सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया गया। सरकार ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों को गंभीरता से देखा जा रहा है। साथ ही सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि पहले से सामने आए पुरानी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों पर भी जवाब दिया जाना चाहिए। कांग्रेस ने कहा कि सरकार छात्रों के मुद्दे को गंभीरता से देख रही है।

    फिलहाल छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और आंदोलन समाप्त करने के संकेत नहीं दिए हैं। अनशनकारी राहुल क्रांति की तबीयत बिगड़ने से आंदोलन का मामला और संवेदनशील हो गया है। अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से होने वाली किसी औपचारिक बातचीत पर है। वहीं सरकार के सामने भी छात्रों की मांगों और लगातार बढ़ते आंदोलन के बीच समाधान निकालने की चुनौती है। आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और छात्र आंदोलन दोनों के और तेज होने की संभावना बनी हुई है।

  • युवा भारत पर मोहन भागवत का फोकस, जेनरेशन Z के साथ शिक्षा और नेतृत्व पर करेंगे खुला संवाद

    युवा भारत पर मोहन भागवत का फोकस, जेनरेशन Z के साथ शिक्षा और नेतृत्व पर करेंगे खुला संवाद


    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत आज मुंबई में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में जेन-जी और जेन-अल्फा पीढ़ी के दो हजार से अधिक विद्यार्थियों से सीधा संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस यानी आईआईएमयूएन की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश के सौ से अधिक शहरों से आए 11 से 19 वर्ष आयु वर्ग के छात्र शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के विचारों को समझना नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देना और शिक्षा तथा समाज से जुड़े विषयों पर खुला संवाद स्थापित करना है।

    यह कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब हाल के महीनों में देश में शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस देखने को मिली। छात्र आंदोलनों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों के बाद युवाओं के साथ यह संवाद काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मंच पर नई पीढ़ी की अपेक्षाओं चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर खुलकर चर्चा होगी।

    मोहन भागवत इससे पहले भी कई बार युवाओं से संवाद के महत्व पर जोर दे चुके हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि आज की नई पीढ़ी सवाल पूछती है और उसे आदेश देने के बजाय बातचीत के माध्यम से समझना चाहिए। उनके अनुसार बदलते समय में संवाद ही सबसे प्रभावी माध्यम है जिसके जरिए समाज और युवा एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी पर अपनी बात थोपने के बजाय विचारों का आदान प्रदान होना चाहिए ताकि सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सके।

    कार्यक्रम के आयोजक आईआईएमयूएन के संस्थापक ऋषभ शाह के अनुसार यह मंच पिछले 15 वर्षों से छात्रों के बीच नेतृत्व संवाद और बहस की संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। संगठन भारत के 108 शहरों और 15 देशों में अपनी गतिविधियां संचालित करता है तथा अब तक करोड़ों छात्रों तक पहुंच बना चुका है। ऋषभ शाह ने बताया कि मोहन भागवत इससे पहले भी दो बार इस मंच पर छात्रों से संवाद कर चुके हैं और इस बार का निमंत्रण कई महीने पहले भेजा गया था जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।

    कार्यक्रम में शामिल छात्र विभिन्न सामाजिक शैक्षणिक और राष्ट्रीय विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं भी रख सकते हैं। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को केवल सुनना नहीं बल्कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देना भी है। आयोजकों का कहना है कि नेतृत्व तभी विकसित होता है जब युवाओं को खुलकर सोचने और अपनी राय व्यक्त करने का मंच मिले।

    इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भाजपा नेताओं ने इसे वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा बताया है और कहा है कि संघ लंबे समय से युवाओं के बीच संवाद और व्यक्तित्व निर्माण के कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। वहीं आयोजन में कुछ अन्य सार्वजनिक हस्तियों की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा हुई लेकिन आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं बल्कि छात्रों के लिए आयोजित एक स्वतंत्र मंच है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते दौर में युवाओं से सीधे संवाद की पहल समाज और संस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शिक्षा तकनीक रोजगार और सामाजिक मूल्यों जैसे विषयों पर खुली बातचीत नई पीढ़ी के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने में मदद करती है। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी सोच साझा करने का अवसर मिलता है और समाज को उनकी अपेक्षाओं को समझने का नया दृष्टिकोण भी प्राप्त होता है।

  • MP के सरकारी स्कूल में पढ़ाई छोड़ छात्रों को दिखाई गई 'धुरंधर' फिल्म, वीडियो वायरल, प्रिंसिपल को नोटिस

    MP के सरकारी स्कूल में पढ़ाई छोड़ छात्रों को दिखाई गई 'धुरंधर' फिल्म, वीडियो वायरल, प्रिंसिपल को नोटिस


    मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले के कठहा शासकीय विद्यालय में पढ़ाई के समय छात्रों को फिल्म दिखाने का मामला सामने आया है। कक्षा 11वीं के विज्ञान संकाय के छात्र-छात्राओं को एलईडी टीवी पर ‘धुरंधर’ फिल्म दिखाई गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, फिल्म प्रदर्शन के दौरान विद्यालय में अतिथि शिक्षक हंसराज पटेल भी मौजूद थे। वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए कि अध्ययन-अध्यापन के समय छात्रों को फिल्म क्यों दिखाई गई और शैक्षणिक गतिविधियां क्यों बाधित की गईं।

    मामले को लेकर सीएम हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    घटना ने सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक अनुशासन और शिक्षण व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि कक्षा के समय फिल्म प्रदर्शन जैसे मामलों पर स्पष्ट जवाबदेही तय होनी चाहिए।

    वीडियो वायरल होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सलोनी शर्मा ने मामले का संज्ञान लेते हुए विद्यालय की प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही संबंधित ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) से विस्तृत प्रतिवेदन भी तलब किया गया है।

    डीईओ सलोनी शर्मा ने कहा, “कठहा स्थित स्कूल का वीडियो हमारे संज्ञान में आया है, जिसमें छात्र ‘धुरंधर’ फिल्म देखते दिखाई दे रहे हैं। मामले की तत्काल जांच कराई जा रही है। संबंधित बीईओ से रिपोर्ट मांगी गई है और विद्यालय की प्राचार्य से स्पष्टीकरण भी तलब किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

  • राहुल गांधी के साथ सामने आए प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज, पैलेट गन और अभद्र व्यवहार के लगाए आरोप

    राहुल गांधी के साथ सामने आए प्रदर्शनकारी छात्र, लाठीचार्ज, पैलेट गन और अभद्र व्यवहार के लगाए आरोप


    नई दिल्ली ।
    कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े छात्र-छात्राओं के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने वाले युवाओं के साथ कथित रूप से बल प्रयोग किया गया और उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास किया गया। राहुल गांधी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और छात्रों के साथ हुई कथित घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए पुलिस कार्रवाई को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। एक छात्रा ने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने के बावजूद उन्हें देशद्रोही कहा गया। उनका आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान बिना किसी उकसावे के बल प्रयोग किया गया और उन्हें शारीरिक चोटें भी आईं। छात्रा ने कहा कि वे केवल अपनी मांगों को शांतिपूर्ण ढंग से रखना चाहते थे।

    राहुल गांधी ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने कोई गैरकानूनी कार्य नहीं किया और वे केवल शिक्षा व्यवस्था तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को उठा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल युवाओं पर दबाव बनाने और उन्हें माफी मांगने के लिए मजबूर करने जैसी घटनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश को ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है जिसमें परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष हो और युवाओं का भविष्य सुरक्षित रहे।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी अपनी आपबीती सुनाई। एक छात्रा ने दावा किया कि प्रदर्शन के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार आपत्तिजनक टिप्पणियों और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि उन्होंने इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सोशल मीडिया पर महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की।

    एक अन्य छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिससे उन्हें चोट लगी। वहीं एक अन्य प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि हिरासत के दौरान उनके नाम और पहचान के आधार पर अलग व्यवहार किया गया। इन सभी आरोपों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।

    जंतर-मंतर प्रदर्शन और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया है, जबकि इस पूरे मामले पर आगे संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई और आधिकारिक पक्ष का भी इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

  • एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश

    एयरफोर्स बाल भारती स्कूल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, छात्रों से संवाद कर शिक्षा और नैतिक मूल्यों का दिया संदेश


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को नई दिल्ली के लोदी रोड स्थित एयरफोर्स बाल भारती स्कूल का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उन्हें शिक्षा, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। स्कूल प्रशासन ने इस दौरे को संस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक अवसर बताया। राष्ट्रपति की मौजूदगी से विद्यार्थियों और शिक्षकों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

    स्कूल पहुंचने पर राष्ट्रपति का स्वागत भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और एयर फोर्स फैमिलीज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष सरिता सिंह ने किया। विद्यालय परिसर में उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। विद्यार्थियों ने पारंपरिक तरीके से उनका अभिनंदन किया और पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन तथा उत्साह का परिचय दिया।

    दौरे की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति पर आधारित रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विभिन्न प्रस्तुतियों में छात्रों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मक क्षमता की झलक दिखाई दी। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना की और उनके प्रयासों की प्रशंसा की।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों से सीधे संवाद भी किया। उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, भविष्य की योजनाओं, रुचियों और जीवन के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से हासिल होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने सपनों को पूरा करने के लिए समर्पण और ईमानदारी के साथ प्रयास करने की प्रेरणा दी।

    उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और जागरूक नागरिक तैयार करना भी है। राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से अच्छे नैतिक मूल्यों को अपनाने, समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और देश के विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उनके अनुसार शिक्षा और चरित्र निर्माण साथ-साथ आगे बढ़ने चाहिए, तभी व्यक्ति और राष्ट्र दोनों मजबूत बनते हैं।

    अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति ने स्कूल परिसर में आयोजित कला प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में जूनियर और सीनियर वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई चित्रकृतियों और विभिन्न रचनात्मक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया था। उन्होंने छात्रों की कल्पनाशीलता, कलात्मक अभिव्यक्ति और सृजनात्मक सोच की सराहना करते हुए कहा कि कला व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है और शिक्षा के साथ इसका संतुलित विकास आवश्यक है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्कूल के आधुनिक बुनियादी ढांचे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय आगे भी शिक्षा, अनुशासन और उत्कृष्टता के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा तथा विद्यार्थियों को देश और समाज की सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

  • CJP ने सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई रोकने और रिहाई की दोहराई मांग

    CJP ने सरकार को दिया नया अल्टीमेटम, प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई रोकने और रिहाई की दोहराई मांग

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार से एक बार फिर अपनी मांगें दोहराई हैं। पार्टी ने कहा है कि जिन आश्वासनों के आधार पर विरोध प्रदर्शन स्थगित किए गए थे, उनका समयबद्ध पालन किया जाना चाहिए। संगठन ने विशेष रूप से छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई रोकने और हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

    पार्टी के अनुसार उसे अलग-अलग राज्यों से ऐसी रिपोर्टें प्राप्त हो रही हैं जिनमें प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है। CJP ने विशेष रूप से असम, पश्चिम बंगाल और बिहार का उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों में प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने की खबरों पर गंभीर चिंता है। संगठन का कहना है कि यदि ऐसी घटनाएं हो रही हैं तो संबंधित मामलों पर तत्काल ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

    CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया के माध्यम से जारी अपने बयान में कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा तथा उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने की मांग पहले भी उठाई गई थी। उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शन समाप्त करने का निर्णय सरकार की ओर से मिले आश्वासनों पर विश्वास करते हुए लिया गया था। ऐसे में अब उन आश्वासनों का पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

    पार्टी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि हिरासत में लिए गए सभी लोगों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि देश के किसी भी हिस्से में शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना नागरिकों का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।

    CJP ने यह भी कहा कि उसकी कानूनी टीम हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। पार्टी का दावा है कि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को न्यायिक प्रक्रिया में हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। संगठन ने प्रदर्शनकारियों से संयम बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा रखने की भी अपील की है।

    अपने बयान में CJP ने केंद्रीय नेतृत्व से पूर्व में दिए गए आश्वासनों का सम्मान करने का आग्रह किया है। पार्टी का कहना है कि सरकार को 28 जुलाई तक इस संबंध में लिखित रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि प्रदर्शनकारियों और छात्रों के बीच उत्पन्न अनिश्चितता समाप्त हो सके। संगठन का मानना है कि स्पष्ट और औपचारिक आश्वासन से तनाव कम करने में मदद मिलेगी और संवाद का वातावरण मजबूत होगा।

    फिलहाल सरकार की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार का रुख और संभावित कदम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ता है तो स्थिति सामान्य होने की संभावना बन सकती है। वहीं यदि मांगों और सरकारी रुख के बीच मतभेद बने रहते हैं तो यह विषय राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।

  • NEET विवाद पर दीया मिर्जा ने उठाए सवाल, प्रधानमंत्री के बयान में छात्रों के दर्द और परिवारों की पीड़ा का जिक्र न होने पर जताई नाराजगी

    NEET विवाद पर दीया मिर्जा ने उठाए सवाल, प्रधानमंत्री के बयान में छात्रों के दर्द और परिवारों की पीड़ा का जिक्र न होने पर जताई नाराजगी

    नई दिल्ली । NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए छात्रों और उनके परिवारों की पीड़ा को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद में प्रभावित छात्रों और उनके परिजनों के दर्द के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखाई जानी चाहिए थी। सोशल मीडिया पर साझा की गई उनकी टिप्पणी के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

    दीया मिर्जा ने अपनी पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन में उन परिवारों के लिए पर्याप्त सहानुभूति दिखाई नहीं दी, जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों और उनके समर्थन में आवाज उठाने वाले लोगों की भावनाओं का भी उल्लेख होना चाहिए था। उनके अनुसार, ऐसे मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ मानवीय संवेदना भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

    अभिनेत्री ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार की ओर से प्रतिक्रिया आने में काफी समय लगा। उनका कहना था कि इतने दिनों बाद जारी संदेश में ऐसी बातें अपेक्षित थीं, जो छात्रों और अभिभावकों के मन में पैदा हुई चिंता और निराशा को कुछ हद तक कम कर सकें। उन्होंने इस मुद्दे को केवल परीक्षा प्रणाली का संकट नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और विश्वास से जुड़ा विषय बताया।

    दीया मिर्जा की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों का समर्थन करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। इस तरह सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के विचार सामने आए।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने वीडियो संदेश में कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों के लिए बेहद पीड़ादायक हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस तरह के मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कानूनी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़े कानूनी प्रावधानों की दिशा में कदम उठाने की भी जानकारी दी थी।

    इसी बीच शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अपने अनशन को समाप्त करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि विभिन्न पक्षों के साथ बातचीत और व्यापक अपील के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। उनके अनशन की समाप्ति के बावजूद परीक्षा सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और छात्रों के हितों की सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक बहस जारी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, समयबद्ध जांच, कठोर कानूनी कार्रवाई और छात्रों का विश्वास बनाए रखना भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती होगी। वहीं सार्वजनिक जीवन से जुड़े विभिन्न व्यक्तियों की प्रतिक्रियाएं यह भी दर्शाती हैं कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं।