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  • 2021 नंदीग्राम चुनाव में ममता बनर्जी की पैर की चोट पर फिर विवाद, सुवेंदु अधिकारी ने जांच कराने की बात कही

    2021 नंदीग्राम चुनाव में ममता बनर्जी की पैर की चोट पर फिर विवाद, सुवेंदु अधिकारी ने जांच कराने की बात कही

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम में ममता बनर्जी ने पैर की चोट को लेकर गलत दावा किया था। अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले की जांच शुरू करेगी। उन्होंने एक मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि उसमें पैर में फ्रैक्चर या हड्डी खिसकने का कोई सबूत नहीं मिला था। अधिकारी ने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण वह फिलहाल मामले से जुड़ी पूरी जानकारी साझा नहीं करेंगे और 9 अक्टूबर के बाद अपने आरोपों के बारे में विस्तार से बताएंगे। नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनावों के चलते फिलहाल आदर्श आचार संहिता लागू है।

    अधिकारी के अनुसार, नंदीग्राम में 2021 के चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी के पैर में चोट लगी थी और बाद में उन्हें व्हीलचेयर पर प्रचार करते हुए देखा गया था। उन्होंने कहा कि उनके पास उस समय की मेडिकल रिपोर्ट है, जिसमें फ्रैक्चर या हड्डी खिसकने का प्रमाण नहीं होने की बात दर्ज है। अधिकारी ने इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर मामले की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर के बाद वह अपने आरोपों और मामले से जुड़ी अन्य जानकारी सामने रखेंगे।

    वहीं, तृणमूल कांग्रेस विधायक कुणाल घोष ने सुवेंदु अधिकारी के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि चोट लगने की स्थिति में पट्टी या अन्य उपचार की जरूरत केवल फ्रैक्चर होने पर ही नहीं होती। उनके अनुसार, किसी गंभीर चोट या फ्रैक्चर जैसी चोट में भी पट्टी की जरूरत हो सकती है। उन्होंने अधिकारी के इस दावे पर भी सवाल उठाया कि उन्हें कैसे पता है कि उस समय फ्रैक्चर नहीं हुआ था। इस तरह 2021 में हुई चोट को लेकर मुख्यमंत्री के आरोप और तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया सामने आई है।

    दरअसल, 10 मार्च 2021 को नंदीग्राम के बिरुलिया इलाके के रेयापारा में चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी के बाएं पैर में चोट लगी थी। उस समय उन्होंने शुरुआत में दावा किया था कि कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें धक्का दिया, जिससे वह अपनी कार के खुले दरवाजे से टकरा गईं और उनके बाएं पैर में चोट लगी। बाद में उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा था कि चुनाव प्रचार के दौरान भारी भीड़ ने उन्हें धक्का दिया था। उन्हें इलाज के लिए एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां जांच के बाद उनके बाएं टखने और पैर की हड्डी तथा लिगामेंट में गंभीर चोटें होने की जानकारी सामने आई थी।

    घटना के बाद ममता बनर्जी को व्हीलचेयर पर चुनाव प्रचार करते देखा गया था। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 210 से अधिक सीटें जीती थीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी को 77 सीटों पर जीत मिली थी। अब सुवेंदु अधिकारी ने उस समय पैर में लगी चोट से जुड़े मामले की जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि 9 अक्टूबर के बाद वह इस मामले से संबंधित और जानकारी सामने रखेंगे। वहीं, तृणमूल कांग्रेस की ओर से अधिकारी के आरोपों को खारिज किया गया है।

  • बंगाल में माहौल को लेकर शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान बोले माता पिता को ओडिशा भेजने का था प्लान

    बंगाल में माहौल को लेकर शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान बोले माता पिता को ओडिशा भेजने का था प्लान


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक माहौल को लेकर अपने पुराने अनुभव का जिक्र किया है। कोलकाता की नेशनल लाइब्रेरी में आयोजित राम-शरद कोठारी प्रतिभा सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय उन्हें अपने बुजुर्ग माता पिता को ओडिशा भेजने की तैयारी तक करनी पड़ी थी। अधिकारी ने कहा कि उस दौरान उन्हें आशंका थी कि राजनीतिक संघर्ष के बीच उन्हें जेल जाना पड़ सकता है और परिस्थितियां उनके परिवार के लिए मुश्किल हो सकती हैं।

    शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक उनके पिता की उम्र करीब 90 वर्ष है जबकि उनकी मां भी 80 वर्ष से अधिक उम्र की हैं। उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि उन्होंने यह सोच लिया था कि अगर राजनीतिक संघर्ष के दौरान उन्हें जेल जाना पड़े या कोई दूसरी परिस्थिति पैदा हो तो अपने माता पिता को ओडिशा भेज देंगे। उन्होंने कहा कि उस समय पश्चिम बंगाल में जिस तरह का माहौल बना हुआ था उसे देखते हुए उन्हें इस तरह की तैयारी करनी पड़ी थी।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जनता ने इस बार पश्चिम बंगाल को बचा लिया। उनके इस बयान का संदर्भ राज्य में हुए हालिया राजनीतिक बदलाव से था। उन्होंने यह भी कहा कि अभी राज्य में काफी काम बाकी है और सरकार को आगे कई क्षेत्रों में काम करना है। उनके बयान में राजनीतिक संघर्ष के साथ साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख रहा।

    यह कार्यक्रम राम कोठारी और शरद कोठारी की स्मृति में आयोजित किया गया था। दोनों को राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े कारसेवकों के रूप में याद किया जाता है। शुभेंदु अधिकारी ने उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार उनकी स्मृति में कई योजनाओं और पहलों पर काम करेगी। इनमें पश्चिम बंगाल में किसी सड़क का नाम उनके नाम पर रखने और विश्वविद्यालयों तथा कॉलेजों में उनके नाम से पुरस्कार शुरू करने की पहल शामिल है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने सनातन परंपराओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े स्थलों के विकास की बात कही। अधिकारी ने कहा कि राज्य में विकास कार्य जरूरी हैं लेकिन इसके साथ विरासत को सुरक्षित रखना भी महत्वपूर्ण है।

    कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गौ संरक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में गौशालाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है और इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों तथा संगठनों से आगे आने की अपील की। उन्होंने पुरुलिया कोलकाता और खड़गपुर में संचालित छोटी गौशालाओं का उल्लेख करते हुए राज्य के दूसरे हिस्सों में भी ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने की बात कही।

    बकरीद के दौरान पशु वध को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अपना रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कानून के तहत कार्रवाई करेगी और गौ संरक्षण से जुड़े संगठनों को गौशाला स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे पहले 2026 में पश्चिम बंगाल सरकार ने बकरीद के दौरान पशु वध से जुड़े नियमों को लेकर दिशा निर्देश जारी किए थे। इस मुद्दे पर कलकत्ता हाई कोर्ट में भी याचिकाएं पहुंची थीं और अदालत ने सार्वजनिक स्थानों पर गोवंश वध पर रोक से जुड़े प्रावधानों को बरकरार रखा था।

    शुभेंदु अधिकारी ने इसके साथ तारापीठ तारकेश्वर और मदनमोहनजी को जोड़ने वाले प्रस्तावित तीर्थयात्रा सर्किट का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसकी अनुमानित लागत करीब 2000 करोड़ रुपये बताई। मुख्यमंत्री के मुताबिक विकास और विरासत संरक्षण को साथ लेकर चलना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

  • बंगाल: CM शुभेंदु अधिकारी ने राष्ट्रपति द्वारा एंटी-गुंडा बिल लौटाने की खबरों का किया खंडन…?

    बंगाल: CM शुभेंदु अधिकारी ने राष्ट्रपति द्वारा एंटी-गुंडा बिल लौटाने की खबरों का किया खंडन…?


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) ने शुक्रवार को उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने ‘गुंडा रोधी विधेयक’ को पुनर्विचार के लिए राज्य सरकार को वापस भेज दिया है। शुभेंदु ने कहा कि प्रस्तावित कानून फिलहाल गृह मंत्रालय के विचाराधीन है। मीडिया के एक वर्ग में खबर आई थी कि राष्ट्रपति ने विधेयक के एक प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए इसे लौटा दिया है, जो केंद्र के एक मादक पदार्थ रोधी कानून के साथ ओवरलैप कर सकता है।

    शुभेंदु ने देर शाम राज्य सचिवालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह फर्जी खबर है। इसका कोई आधार नहीं है। यह विधेयक अभी राष्ट्रपति तक नहीं पहुंचा है और विचार-विमर्श के लिए गृह मंत्रालय के पास ही है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूद मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक पूर्ण रूप से स्पष्ट है और उन्होंने इसके राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई।

    जून में पारित हुए इस विधेयक का उद्देश्य संगठित अपराध, बार-बार अपराध करने वालों और सार्वजनिक अव्यवस्था पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार को व्यापक अधिकार प्रदान करना है। इस कानून के माध्यम से निवारक हिरासत और संपत्ति जब्ती जैसे उपायों के जरिए सिंडिकेट, जबरन वसूली रैकेट, भूमि कब्जा, अवैध खनन और राजनीतिक हिंसा पर लगाम लगाने का प्रयास किया गया है।

    इससे पहले खबरें आई थीं कि राष्ट्रपति ने एंटी-गुंडा विधेयक राष्ट्रपति द्वारा बिना मंजूरी के वापस लौटा दिया है। ऐसी भी खबरें आई थीं कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बयान दिया है कि अब इसके कानूनी प्रावधानों की जांच करेगी और नए मसौदे पर काम करेगी। इसमें कहा गया था कि एंटी-गुंडा कानून चार अन्य राज्यों में अस्तित्व में है। हम कानूनी तरीकों से काम करेंगे। कोई कठिनाई नहीं होगी।

  • बंगाल में BJP ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई, सामने आई जमीन विवाद की कहानी

    बंगाल में BJP ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई, सामने आई जमीन विवाद की कहानी


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान उत्तर दिनाजपुर जिले के हेमताबाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय कार्यालय से जुड़ा एक दिलचस्प मामला सामने आया है। सरकारी जमीन की मापी के दौरान पता चला कि पार्टी कार्यालय का एक हिस्सा निर्धारित सरकारी भूमि के दायरे में आ रहा है। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुद आगे बढ़कर उस हिस्से को हटाने का फैसला किया।
    मामले की शुरुआत तब हुई जब हेमताबाद के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) Biswajit Dutta ने सरकारी जमीनों पर बने अवैध निर्माणों को हटाने का निर्देश जारी किया। प्रशासन की ओर से इलाके में मापी कराई गई, जिसमें शालबागान के पास राज्य राजमार्ग किनारे स्थित भाजपा ब्लॉक कार्यालय का बरामदा सरकारी जमीन पर पाया गया।

    प्रशासन के आने से पहले खुद शुरू कर दी कार्रवाई
    जांच रिपोर्ट सामने आते ही स्थानीय भाजपा नेताओं ने प्रशासन की ओर से बुलडोजर चलाए जाने का इंतजार नहीं किया। भाजपा के प्रखंड अध्यक्ष Biplab Sarkar की मौजूदगी में कार्यकर्ता हथौड़े और अन्य उपकरण लेकर कार्यालय पहुंचे और अवैध हिस्से को स्वयं तोड़ना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में कार्यालय के उस हिस्से को पूरी तरह हटा दिया गया, जो सरकारी भूमि की सीमा के भीतर पाया गया था। यह कदम स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि आमतौर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान विरोध, धरना या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं।

    सड़क चौड़ीकरण अभियान से जुड़ा मामला
    प्रशासन के अनुसार, कालियागंज से दक्षिण दिनाजपुर को जोड़ने वाले राज्य राजमार्ग के दोनों ओर 15 फीट के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
    भाजपा नेता बिप्लव सरकार ने कहा कि जब पार्टी कार्यालय का बरामदा भी चिन्हित क्षेत्र में पाया गया तो कानून का सम्मान करते हुए उसे हटाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी मांग की कि अभियान से प्रभावित छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए।

    दुकानदारों ने भी दिखाई पहल
    भाजपा कार्यालय पर हुई कार्रवाई का असर आसपास के व्यापारियों पर भी देखने को मिला। रायगंज-बालुरघाट राज्य राजमार्ग के किनारे स्थित कई दुकानदारों ने प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किए बिना अपने अतिक्रमण वाले हिस्सों को स्वयं हटाना शुरू कर दिया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अभियान शुरू होने से पहले लगातार मुनादी, लाउडस्पीकर घोषणाओं और नोटिसों के माध्यम से लोगों को सरकारी भूमि खाली करने के लिए आगाह किया गया था।

    BDO बिस्वजीत दत्ता ने स्पष्ट किया कि अब आधिकारिक बेदखली अभियान शुरू हो चुका है और भविष्य में सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण मिलने पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।

  • पश्चिम बंगाल में ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में 30 लाख फर्जी लाभार्थी, CM शुभेंदु अधिकारी का दावा

    पश्चिम बंगाल में ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में 30 लाख फर्जी लाभार्थी, CM शुभेंदु अधिकारी का दावा

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि योजना के लगभग 30 लाख लाभार्थी अपात्र पाए गए हैं। इनमें कथित तौर पर गैर-भारतीय, मृतक और वोटर लिस्ट से स्थायी रूप से हटाए गए लोगों के नाम शामिल हैं।

    कोलकाता स्थित राज्य सचिवालय नबन्ना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने नई ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना के आवेदन फॉर्म जारी किए। उन्होंने बताया कि नई योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। आवेदन पत्रों का सत्यापन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया जाएगा।

    2.20 करोड़ लाभार्थियों में 30 लाख पर सवाल
    मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्तमान में ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के करीब 2.20 करोड़ लाभार्थी हैं, लेकिन इनमें से लगभग 30 लाख नाम संदिग्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि कई लाभार्थी गैर-भारतीय, मृतक या फर्जी हैं। सत्यापन के बाद ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना में लगभग 2 करोड़ वास्तविक लाभार्थियों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत आवेदन किया है या SIR से जुड़े ट्रिब्यूनल में वोटर सूची में शामिल होने की अपील की है, वे इस योजना के पात्र माने जाएंगे।

    पुरानी योजना से दोगुनी सहायता
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी ने चुनावी घोषणा पत्र में ‘अन्नपूर्णा भंडार’ योजना शुरू करने का वादा किया था, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना की जगह लेगी। पुरानी योजना में सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये और SC/ST वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये प्रति माह दिए जाते थे। नई योजना में सभी पात्र महिलाओं को 3,000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे।

    पारदर्शिता के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार को ऐसी शिकायतें मिली थीं कि जिन लोगों के नाम वोटर सूची से हट चुके हैं और जिन्होंने ट्रिब्यूनल या CAA के तहत आवेदन नहीं किया, वे भी योजना का लाभ उठा रहे थे। इसी कारण लाभार्थियों का दोबारा सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल का विभाग इस योजना का नोडल विभाग होगा। इसके साथ ही मुख्य सचिव, वित्त विभाग, जिला मजिस्ट्रेट, बीडीओ, नगर निगम आयुक्त, गृह विभाग और आधार नामांकन से जुड़े विभाग भी इस प्रक्रिया में शामिल रहेंगे।

    नई योजना लागू होने तक जारी रहेगी पुरानी सहायता
    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक मौजूदा ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का लाभ बंद नहीं किया जाएगा। सरकार 1 जून से 90 दिनों तक ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से नामांकन अभियान चलाएगी। पंचायत क्षेत्रों में घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने की व्यवस्था भी की जाएगी।

    उन्होंने दावा किया कि सत्यापन की कमी के कारण कुछ पुरुषों के नाम भी लाभार्थियों की सूची में शामिल हो गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2 जून तक सफलतापूर्वक नामांकन कराने वाली महिलाओं को अगली कैबिनेट बैठक के बाद DBT के जरिए राशि भेज दी जाएगी।

    इसके अलावा उन्होंने घोषणा की कि सोमवार से महिलाओं को राज्य परिवहन की बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा मिलेगी। वहीं आयुष्मान भारत योजना के कार्ड जुलाई से वितरित किए जा सकते हैं। केंद्र सरकार के साथ इस संबंध में 8 जून को MoU पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

  • पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा फैसला, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ी

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा फैसला, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ी

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में दो सीटों से जीत दर्ज करने वाले शुभेंदु अधिकारी ने अब भवानीपुर सीट को अपने राजनीतिक केंद्र के रूप में बनाए रखने का फैसला किया है। उनके इस निर्णय के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं और सियासी हलचल तेज हो गई है।

    विधानसभा चुनावों में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह बड़ी जीत हासिल की थी। चुनावी नियमों के अनुसार किसी भी उम्मीदवार को दो सीटों पर जीत के बाद एक सीट छोड़नी होती है। इसी प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दिया और नंदीग्राम सीट खाली कर दी। अब वह भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे।

    नंदीग्राम सीट का राजनीतिक महत्व लंबे समय से बेहद खास माना जाता रहा है। यह वही क्षेत्र है जिसने पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई बड़े बदलावों की नींव रखी थी। इस सीट पर चुनावी मुकाबला हमेशा से बेहद चर्चित और प्रतिष्ठा से जुड़ा माना जाता रहा है। हाल के चुनावों में भी यहां मुकाबला काफी हाई प्रोफाइल रहा और पूरे देश की नजरें इस सीट पर टिकी हुई थीं। शुभेंदु अधिकारी ने इस सीट पर शानदार जीत दर्ज करते हुए अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया था।

    वहीं भवानीपुर सीट भी राज्य की राजनीति में बेहद अहम मानी जाती है। दक्षिण कोलकाता स्थित यह क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक दृष्टि से प्रभावशाली माना जाता रहा है। शुभेंदु अधिकारी द्वारा इस सीट को बरकरार रखने के फैसले को राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजधानी क्षेत्र में सक्रिय उपस्थिति बनाए रखने के लिए भवानीपुर सीट उनके लिए अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    इस चुनाव में पश्चिम बंगाल की राजनीति ने ऐतिहासिक बदलाव देखा। भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार राज्य में स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए सरकार बनाई। लंबे समय तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा। चुनावी नतीजों ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी और भाजपा ने पश्चिम बंगाल में मजबूत पकड़ बना ली।

    मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी लगातार राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में बने हुए हैं। उनकी छवि एक आक्रामक और मजबूत नेता के रूप में उभरी है, जिसने चुनावी अभियान के दौरान भी बड़ी भूमिका निभाई थी। नंदीग्राम से इस्तीफा देने के बावजूद इस क्षेत्र में उनकी राजनीतिक पकड़ कमजोर होने की संभावना नहीं मानी जा रही है, क्योंकि यह सीट उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है।

    अब नंदीग्राम सीट खाली होने के बाद वहां उपचुनाव की संभावना भी तेज हो गई है। राजनीतिक दलों की नजरें इस सीट पर टिक गई हैं क्योंकि आने वाला उपचुनाव राज्य की नई राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। माना जा रहा है कि सभी प्रमुख दल इस सीट पर पूरी ताकत झोंक सकते हैं।

    कुल मिलाकर, शुभेंदु अधिकारी का यह फैसला केवल एक औपचारिक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर राज्य की सियासी रणनीतियों और सत्ता संतुलन पर भी देखने को मिल सकता है।

  • इतिहास रचते हुए नई शुरुआत,पश्चिम बंगाल में पहली बार BJP सरकार, शपथ समारोह बना राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन

    इतिहास रचते हुए नई शुरुआत,पश्चिम बंगाल में पहली बार BJP सरकार, शपथ समारोह बना राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन


    नई दिल्ली ।
    पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन पूरी तरह ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक बन गया, जब राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी और सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सत्ता की बागडोर संभाली। कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित इस विशाल और भव्य समारोह में बड़ी संख्या में लोग और देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरे मौजूद रहे। जैसे ही सुवेंदु अधिकारी ने बांग्ला भाषा में शपथ ग्रहण की, पूरा वातावरण उत्साह, तालियों और नारों से भर गया, जिसने इस पल को ऐतिहासिक बना दिया।

    शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सुवेंदु अधिकारी ने मंच पर मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन किया। कार्यक्रम के दौरान कई ऐसे क्षण देखने को मिले जिन्होंने पूरे समारोह को भावनात्मक और यादगार बना दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता की ओर झुककर अभिवादन किया और उपस्थित लोगों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इसी दौरान उन्होंने 98 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान करते हुए उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया, जो पूरे समारोह का सबसे चर्चित और भावुक दृश्य बन गया।

    राज्यपाल आर.एन. रवि ने मुख्यमंत्री के साथ पांच अन्य नेताओं को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई। नई कैबिनेट में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक शामिल किए गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मंत्रिमंडल का विस्तार भी किया जा सकता है ताकि प्रशासनिक और सामाजिक संतुलन को मजबूत किया जा सके। इस नई सरकार को लेकर समर्थकों में भारी उत्साह और उम्मीदें देखने को मिल रही हैं।

    समारोह में देश के कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ राजनीतिक नेता शामिल हुए। पूरे आयोजन को बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक परिवर्तन के संगम के रूप में प्रस्तुत किया गया। मंच पर बंगाली लोकसंस्कृति की झलक भी देखने को मिली, जिसने आयोजन को और विशेष बना दिया। साथ ही, राजनीतिक संघर्ष में जान गंवाने वाले कार्यकर्ताओं की स्मृति में विशेष श्रद्धांजलि स्थल भी तैयार किया गया, जहां नेताओं ने उन्हें नमन किया।

    यह शपथ ग्रहण समारोह एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अवसर के साथ भी जुड़ा रहा, क्योंकि यह गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के आसपास आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने टैगोर को श्रद्धांजलि दी और उनके विचारों को भारत की सांस्कृतिक चेतना का आधार बताया।

    नई सरकार के गठन के बाद अब राज्य में विकास, रोजगार, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं। यह सत्ता परिवर्तन केवल राजनीतिक जीत नहीं बल्कि लंबे संघर्ष का परिणाम माना जा रहा है। आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण और नई दिशा देखने को मिल सकती है, जहां विकास और शासन की दिशा राज्य की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहेगी।

  • शुभेंदु अधिकारी बनेंगे नए मुख्यमंत्री, ब्रिगेड ग्राउंड में भव्य शपथ ग्रहण..

    शुभेंदु अधिकारी बनेंगे नए मुख्यमंत्री, ब्रिगेड ग्राउंड में भव्य शपथ ग्रहण..


    नई दिल्ली । 
    पश्चिम बंगाल की राजनीति आज एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ तौर पर दिखाई दे रही है। लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक संघर्ष और तीखे चुनावी मुकाबलों के बाद अब राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो रही है। इसी कड़ी में शुभेंदु अधिकारी आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड इस महत्वपूर्ण आयोजन का केंद्र बना हुआ है, जहां सुबह से ही उत्साह और हलचल का माहौल देखने को मिल रहा है।

    शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान उन्होंने मजबूत राजनीतिक पकड़ और प्रभावशाली नेतृत्व के जरिए अपनी स्थिति को और मजबूत किया। अब उनके सामने राज्य को नई दिशा देने और जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की बड़ी जिम्मेदारी है। भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में इस बदलाव को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है, जिसे वे एक नए युग की शुरुआत मान रहे हैं।

    शपथ ग्रहण समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। पूरे आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमुख राजनीतिक चेहरे, सामाजिक प्रतिनिधि और अन्य क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां इस अवसर का हिस्सा बनेंगी। शहर में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को भी विशेष रूप से मजबूत किया गया है ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

    ब्रिगेड ग्राउंड और उसके आसपास का इलाका सुबह से ही लोगों की भीड़ से भरा हुआ है। समर्थकों में जोश और उत्साह का माहौल है और कई जगहों पर जश्न जैसा वातावरण दिखाई दे रहा है। लोग इस क्षण को ऐतिहासिक मानते हुए इसे अपनी राजनीतिक उम्मीदों से जोड़कर देख रहे हैं। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए कोलकाता पहुंचे हैं।

    नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना है। चुनावी समय में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई थी, जैसे रोजगार, विकास, कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सुधार, अब उन्हें धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी सरकार के कंधों पर है। लोगों को उम्मीद है कि नई नेतृत्व व्यवस्था राज्य में स्थिरता और विकास का नया अध्याय शुरू करेगी।

    राज्य के आर्थिक और सामाजिक ढांचे में भी आने वाले समय में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। उद्योग जगत से जुड़े लोग नई सरकार से बेहतर निवेश माहौल और रोजगार के अवसरों की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं युवा वर्ग भी अपने भविष्य को लेकर नई उम्मीदें देख रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकता है।

    आज का यह शपथ ग्रहण समारोह केवल सत्ता परिवर्तन का औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा और जनता की उम्मीदों का प्रतीक बन गया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार अपने शुरुआती फैसलों के जरिए जनता का भरोसा कितनी जल्दी जीत पाती है और राज्य को किस दिशा में आगे ले जाती है।

  • बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को ही क्यों चुना बंगाल का मुख्‍यमंत्री ? जाने किन कारणों से लेना पड़ा फैसला

    बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को ही क्यों चुना बंगाल का मुख्‍यमंत्री ? जाने किन कारणों से लेना पड़ा फैसला

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना है। कभी ममता बनर्जी के बेहद करीबी और टीएमसी के मजबूत रणनीतिकार माने जाने वाले शुभेंदु अब बीजेपी का सबसे बड़ा बंगाली चेहरा बनकर उभरे हैं। विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 293 में से 207 सीटों पर जीत मिली है, जबकि एक सीट पर मतदान 21 मई को होना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शुभेंदु अधिकारी की जमीनी पकड़, टीएमसी की अंदरूनी रणनीति की समझ और हिंदुत्व के मुद्दों पर उनकी आक्रामक छवि ने उन्हें इस पद तक पहुंचाया है।

    ममता बनर्जी को उनके गढ़ में दी चुनौती

    शुभेंदु अधिकारी ने बंगाल की राजनीति में खुद को उस नेता के रूप में स्थापित किया, जो सीधे ममता बनर्जी को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने नंदीग्राम सीट पर 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराया था। बाद में ममता को भवानीपुर सीट से चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को उसके मजबूत गढ़ में हराना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है और इसी ने शुभेंदु को बीजेपी के लिए सबसे मजबूत विकल्प बना दिया।

    बीजेपी के एजेंडे के लिए फिट चेहरा

    विशेषज्ञों का कहना है कि बीजेपी को बंगाल में ऐसा नेता चाहिए था, जो असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की तरह आक्रामक और संगठनात्मक रूप से मजबूत हो। पार्टी पहले ही यह संकेत दे चुकी थी कि बंगाल का मुख्यमंत्री ऐसा व्यक्ति होगा, जिसका राज्य से गहरा जुड़ाव हो। बीजेपी ने चुनावी घोषणापत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने और बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ कार्रवाई जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी थी। ऐसे में शुभेंदु अधिकारी पार्टी की रणनीति के अनुरूप सबसे उपयुक्त चेहरे के तौर पर सामने आए।

    प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव भी बना आधार

    शुभेंदु अधिकारी को सरकार चलाने का अनुभव भी है। टीएमसी सरकार में वह मंत्री रह चुके हैं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को करीब से समझते हैं। बीजेपी नेताओं का मानना है कि नई सरकार बनने के बाद वे ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल को लेकर श्वेतपत्र जारी कर सकते हैं और विभिन्न मामलों की जांच के लिए आयोग भी गठित किया जा सकता है।

    हिंदुत्व की छवि से RSS का समर्थन

    राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी की हिंदुत्व समर्थक छवि भी उनके पक्ष में गई। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ उन्होंने खुलकर आवाज उठाई थी। नंदीग्राम क्षेत्र में उन्हें हिंदुत्व के मजबूत चेहरे के तौर पर पेश किया गया। यही वजह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के भीतर भी उन्हें लेकर सकारात्मक रुख बताया जा रहा है।

    छात्र राजनीति से बंगाल की सत्ता तक का सफर

    शुभेंदु अधिकारी राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और बंगाल की राजनीति में प्रभावशाली नेता माने जाते थे। शुभेंदु ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस की छात्र इकाई से की थी। बाद में, जब बंगाल में वामपंथ का दबदबा था, तब उन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर टीएमसी को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। पूर्व मेदिनीपुर में उन्होंने वाम दलों को कड़ी चुनौती दी। वर्ष 2020 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया और इसके बाद से वे पार्टी के सबसे प्रभावशाली बंगाली नेताओं में शामिल हो गए।

  • बंगाल राजनीति पर बड़ा बयान,अमित शाह बोले-सुवेंदु दा ने इस बार ‘दीदी’ को उनके ही गढ़ में हराया”

    बंगाल राजनीति पर बड़ा बयान,अमित शाह बोले-सुवेंदु दा ने इस बार ‘दीदी’ को उनके ही गढ़ में हराया”

    नई दिल्ली ।
    पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति को लेकर आयोजित एक बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने राज्य की हालिया चुनावी परिस्थितियों और जनादेश पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जनता ने इस बार जिस तरह से मतदान किया है, वह राजनीतिक बदलाव और नए भरोसे का संकेत है।

    अपने भाषण में उन्होंने राज्य की राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से यहां जिस तरह की राजनीतिक परिस्थितियों की चर्चा होती रही है, उसमें अब बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जनता ने इस बार विकास और स्थिरता के पक्ष में निर्णय दिया है और यही लोकतंत्र की असली ताकत है।

    इसी दौरान उन्होंने नेता Suvendu Adhikari का नाम लेते हुए कहा कि चुनावी परिणामों में उनकी भूमिका अहम रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार मुकाबला कई मायनों में अलग था और कई ऐसे क्षेत्र भी सामने आए जहां राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए।

    अमित शाह ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि पार्टी का उद्देश्य केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि राज्य के विकास को आगे बढ़ाना है। उन्होंने संगठन के कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर जनता से जुड़े रहने और उनके मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।

    उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और हर चुनाव नए संदेश लेकर आता है। इस बार के परिणामों को उन्होंने एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें जनता की सोच और अपेक्षाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने यह संकेत भी दिया कि आने वाले समय में राज्य में विकास, सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा, ताकि जनता की अपेक्षाओं को पूरा किया जा सके और राजनीतिक स्थिरता को मजबूत किया जा सके।