Tag: Tamil Nadu

  • तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन


    चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डीएमके (DMK) की लंबे समय से सहयोगी रही मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK) ने डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने की घोषणा कर दी है। पार्टी ने डीएमके पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया है। साथ ही अभिनेता और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय को आगामी उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों में समर्थन देने का भी ऐलान किया है।

    शनिवार को चेन्नई में आयोजित एमडीएमके की सामान्य परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। पार्टी की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि चुनाव पूर्व गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा, लेकिन फिलहाल एमडीएमके डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी।

    DMK पर लगाए गंभीर आरोप

    पार्टी प्रमुख वाइको ने आरोप लगाया कि डीएमके ने हिंदुत्व समर्थक ताकतों के साथ मिलकर एआईएडीएमके (AIADMK) के नेतृत्व वाली सरकार बनाने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि यह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा और इस घटनाक्रम के बाद सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के अस्तित्व का उद्देश्य ही समाप्त हो गया।

    पार्टी के प्रस्ताव में कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए गठबंधन में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया था, इसलिए कार्यकर्ताओं की राय के आधार पर यह निर्णय लिया गया।

    विजय की पार्टी को समर्थन

    एमडीएमके ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के प्रति खुला समर्थन जताया। वाइको ने कहा कि टीवीके भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे, दो-भाषा नीति और सी.एन. अन्नादुरै के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का दावा करती है। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में दोनों दलों के बीच राजनीतिक सहयोग और मजबूत हो सकता है।

    विधायकों के इस्तीफे को लेकर दावा

    वाइको ने यह भी दावा किया कि विजय ने एमडीएमके के दोनों विधायकों को इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने की पेशकश भी की थी। हालांकि दोनों विधायकों ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।

    एमडीएमके के विधायक आर. सेंथिलसेल्वन और टी.एम. राजेंद्रन वर्ष 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके के ‘राइजिंग सन’ चुनाव चिह्न पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में एमडीएमके ने गठबंधन के तहत चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें दो पर जीत हासिल की थी।

    ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों पर जवाब

    विजय पर लगाए जा रहे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों का जवाब देते हुए वाइको ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी के विधायकों को डीएमके में शामिल कराने की कोशिश होती है, तो उसे क्या कहा जाएगा।

    एमडीएमके वर्ष 2017 से डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों से दोनों दलों के रिश्तों में लगातार खटास देखने को मिल रही थी। विजय और वाइको की हालिया मुलाकात तथा एमडीएमके नेताओं की नाराजगी के बाद अब गठबंधन टूटने से तमिलनाडु की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।

  • तमिनाडु: BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई के नए आंदोलन को जबदस्त समर्थन, 10 घंटे में जुड़े लाख से अधिक लोग

    तमिनाडु: BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई के नए आंदोलन को जबदस्त समर्थन, 10 घंटे में जुड़े लाख से अधिक लोग


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) भाजपा (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई (K. Annamalai) के इस्तीफा देने के बाद नए राजनीतिक आंदोलन ‘इधु नम्मा इयक्कम’ (New Political Movement ‘Idhu Namma Iyakkam’) (यह हमारा आंदोलन है) को जबरदस्त जनसमर्थन मिल रहा है। भाजपा से इस्तीफा देने के बाद शुरू किए गए इस अभियान में सिर्फ 10 घंटे के भीतर 10 लाख से अधिक लोगों जुड़ चुके हैं। अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए इसे अपने आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया।

    अन्नामलाई ने लिखा कि यह समर्थन उनके साझा विजन और मिशन में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने सभी समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि यह आंदोलन जनता की भागीदारी से और मजबूत हो रहा है।


    पार्टी छोड़ने के बाद नई राजनीतिक दिशा

    भाजपा से इस्तीफा देने के बाद अन्नामलाई ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि वह एक नए और समावेशी राजनीतिक मंच की शुरुआत कर रहे हैं, जो आगे चलकर एक पूर्ण राजनीतिक पार्टी का रूप ले सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने दिसंबर 2025 में ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे की जानकारी दे दी थी।

    अन्नामलाई ने अपने इस्तीफे में कहा कि तमिलनाडु को लेकर उनके और भाजपा नेतृत्व के दृष्टिकोण में अंतर था, जिसके चलते उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को धन्यवाद देते हुए कहा कि वर्षों तक उन्हें जो समर्थन मिला, वह उनके लिए महत्वपूर्ण रहा।


    दिल्ली दौरे के बाद बढ़ी थीं अटकलें

    हाल ही में अन्नामलाई ने दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महासचिव बी.एल. संतोष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। पार्टी को मात्र 3 प्रतिशत वोट शेयर मिला था, जिसके बाद राज्य इकाई में बदलाव और नए नेतृत्व की चर्चा शुरू हो गई थी।


    इस्तीफे के पीछे राजनीतिक समीकरण भी अहम

    उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब 2026 विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन दोबारा सक्रिय हुआ है। इसके बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। अन्नामलाई के एआईएडीएमके के कुछ नेताओं के साथ संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। उनके विवादित बयानों और वैचारिक मतभेदों के कारण कई बार राजनीतिक विवाद भी उत्पन्न हुए। हाल ही में कुछ नेताओं के इस्तीफे के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में कई कार्यकर्ता उनके नए राजनीतिक आंदोलन से जुड़ सकते हैं।


    क्या बनेगा नई ताकत का केंद्र?

    राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अन्नामलाई का यह नया आंदोलन तमिलनाडु में एक मजबूत विकल्प बन सकता है। उनके सोशल मीडिया दावे और शुरुआती समर्थन को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस नए राजनीतिक प्रयोग का असर राज्य की राजनीति पर दिखाई दे सकता है।

  • दिल्ली में मोदी–विजय बैठक, मेकेदातु विवाद के बीच तमिलनाडु सीएम की पीएम से पहली औपचारिक भेंट

    दिल्ली में मोदी–विजय बैठक, मेकेदातु विवाद के बीच तमिलनाडु सीएम की पीएम से पहली औपचारिक भेंट

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री Vijay ने बुधवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसे दोनों नेताओं के बीच पिछले एक दशक से अधिक समय के बाद हुई महत्वपूर्ण राजनीतिक भेंट माना जा रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी प्रधानमंत्री से पहली औपचारिक मुलाकात रही, जिससे राजनीतिक हलकों में इस बैठक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस मुलाकात की जानकारी साझा की गई, जिसमें इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया। हालांकि आधिकारिक बयान में विस्तृत एजेंडा सामने नहीं आया, लेकिन माना जा रहा है कि बातचीत का केंद्र तमिलनाडु से जुड़े विकास मुद्दे, केंद्र प्रायोजित योजनाएं और राज्य में चल रही परियोजनाएं रहीं।

    यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब दक्षिण भारत की राजनीति में कावेरी जल विवाद से जुड़े मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रही है और मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। राज्य सरकार का कहना है कि कावेरी नदी पर किसी भी नए बांध या परियोजना से तमिलनाडु के हिस्से के जल प्रवाह पर असर पड़ सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र और किसानों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसी पृष्ठभूमि में यह मुलाकात राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

    मुख्यमंत्री विजय का राजनीतिक सफर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाते हुए राज्य में नई पार्टी का गठन किया और धीरे-धीरे जनाधार मजबूत किया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने युवा मतदाताओं और शहरी क्षेत्रों में प्रभावशाली समर्थन हासिल किया, जिससे पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी यह दिल्ली यात्रा पहली बड़ी औपचारिक राजनीतिक मुलाकातों में से एक मानी जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, विजय और प्रधानमंत्री मोदी की यह मुलाकात लगभग 12 साल बाद हुई है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कोयंबटूर में हुई थी, जब विजय एक अभिनेता के रूप में राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अब दोनों नेताओं का मिलना पूरी तरह से अलग राजनीतिक संदर्भ में हुआ है, जहां एक तरफ प्रधानमंत्री देश के शीर्ष नेतृत्व में हैं और दूसरी ओर विजय एक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में केंद्र से संवाद कर रहे हैं।

    बैठक के दौरान प्रशासनिक सहयोग, विकास योजनाओं और केंद्र-राज्य समन्वय से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। तमिलनाडु सरकार का जोर राज्य में बुनियादी ढांचे, औद्योगिक निवेश और कृषि क्षेत्र के विकास पर है, जिसके लिए केंद्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल को जरूरी माना जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा को भी संकेत देती है। विशेषकर मेकेदातु जैसे संवेदनशील मुद्दे और राज्य-केंद्र संबंधों की पृष्ठभूमि में यह बैठक आने वाले समय में नीतिगत फैसलों पर असर डाल सकती है। फिलहाल दोनों पक्षों ने इसे सकारात्मक और औपचारिक बातचीत बताया है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थों पर नजर बनी हुई है।

  • तमिलनाडु में तेज हुई सियासी हलचल: AIADMK में टूट के संकेत, तीन विधायकों के इस्तीफे से बदले राजनीतिक समीकरण

    तमिलनाडु में तेज हुई सियासी हलचल: AIADMK में टूट के संकेत, तीन विधायकों के इस्तीफे से बदले राजनीतिक समीकरण

    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब विधानसभा चुनाव परिणाम आने के महज 21 दिनों के भीतर AIADMK के तीन विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। खास बात यह रही कि इस्तीफा देने के तुरंत बाद तीनों नेताओं ने TVK का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित बदलावों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।

    बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले तीनों विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले नेता माने जाते हैं और पार्टी के भीतर एक खास गुट से जुड़े हुए थे। उनके अचानक लिए गए फैसले ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। चुनाव के इतने कम समय बाद पार्टी छोड़ना केवल सामान्य राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संगठन के भीतर चल रहे असंतोष और आंतरिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, तीनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद नई राजनीतिक दिशा चुनने का फैसला लिया। इसके तुरंत बाद वे TVK नेतृत्व के संपर्क में आए और पार्टी में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम ने राज्य की सत्तारूढ़ और विपक्षी राजनीति दोनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले समय में कुछ और नेता भी इसी राह पर चल सकते हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम AIADMK के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं और नेतृत्व को लेकर मतभेदों की चर्चा पहले से चल रही थी। ऐसे में तीन विधायकों का पार्टी छोड़ना संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है। इससे पार्टी के अंदर मौजूद गुटबाजी की चर्चाओं को भी और बल मिला है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। चुनाव परिणामों के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर लगातार बदलती दिखाई दे रही है और दलों के बीच समर्थन तथा रणनीति को लेकर नए समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बदलाव का असर राज्य की राजनीति पर कितना व्यापक पड़ता है और क्या यह राजनीतिक फेरबदल किसी बड़े बदलाव की शुरुआत साबित होता है।

  • पेपर लीक बवाल के बीच तमिलनाडु के CM विजय बोले- 'NEET बंद हो… 12वीं के नंबर पर मिले एडमिशन

    पेपर लीक बवाल के बीच तमिलनाडु के CM विजय बोले- 'NEET बंद हो… 12वीं के नंबर पर मिले एडमिशन


    नई दिल्ली।
    नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा को लेकर देशभर में बवाल मचा है. पेपर लीक (Paper Leak) के आरोपों ने सबको परेशान कर दिया है. इसी बीच तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) ने बुधवार को अपनी बात मजबूती से रखी है. विजय ने साफ कहा है कि ‘मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए नीट परीक्षा बंद होनी चाहिए’. उनका कहना है कि ‘छात्रों को 12वीं के नंबरों के आधार पर ही मेडिकल में एडमिशन मिले’. इससे हर बच्चे को आगे बढ़ने का बराबर मौका मिलेगा।

    मुख्यमंत्री विजय ने सोशल मीडिया (X) पर परीक्षा के पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि पेपर लीक की खबरों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. विजय ने याद दिलाया कि साल 2024 में भी पेपर लीक हुआ था और 6 राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसकी जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई. उन्होंने आगे कहा कि इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की कमेटी ने सुधार के लिए 95 सुझाव भी दिए थे, लेकिन हैरानी की बात है कि महज दो साल के भीतर ही फिर से पेपर लीक हो गया और परीक्षा रद्द करनी पड़ी. ऐसे में सीएम विजय का मानना है कि इस तरह की घटनाएं उन लाखों बच्चों का भरोसा तोड़ देती हैं, जो डॉक्टर बनने का सपना लिए दिन-रात मेहनत में जुटे रहते हैं।

    तमिलनाडु काफी समय से नीट का विरोध कर रहा है. मुख्यमंत्री का कहना है कि जब इतने सुधारों के बाद भी सिस्टम सुरक्षित नहीं हो पा रहा, तो राज्यों को यह छूट मिलनी चाहिए कि वे 12वीं की मेरिट के आधार पर अपने यहां की सीटें भर सकें. साफ है कि अगर परीक्षा का सिस्टम ही सुरक्षित नहीं होगा, तो छात्रों का भविष्य खतरे में बना रहेगा।


    पेपर लीक मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई?

    नीट परीक्षा को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब धांधली की खबरों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी. अब इस पूरे मामले की जांच CBI कर रही है. सीबीआई और राजस्थान पुलिस ने मिलकर कई राज्यों में छापेमारी की है. इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जांच में पता चला है कि परीक्षा से पहले ही एक ‘गेस पेपर’ सोशल मीडिया और कोचिंग सेंटरों के जरिए छात्रों तक पहुंच गया था.

    जांच एजेंसियों ने जयपुर, गुरुग्राम और नासिक जैसे शहरों में एक्शन लेते हुए आरोपियों को पकड़ा है.आरोपियों को पकड़ने के साथ ही पुलिस ने उनके ठिकानों से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस भी अपने कब्जे में लिए हैं. कोशिश यह है कि इस पूरे नेटवर्क और पेपर लीक की जड़ तक पहुंचा जा सके. जांच टीम अब इन डिवाइसों की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक का यह खेल कहां से शुरू हुआ और इसके तार किन-किन लोगों से जुड़े हैं. मकसद सिर्फ आरोपियों को पकड़ना नहीं, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है, ताकि आगे चलकर किसी भी परीक्षा में ऐसी धांधली न हो और बच्चों का भरोसा बना रहे.

    इस पूरे घोटाले को लेकर देशभर के छात्रों में भारी गुस्सा है. कई शहरों में छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि परीक्षा के इस सिस्टम को सुधारा जाए. छात्रों का कहना है कि ऐसी धांधली से मेहनत करने वाले बच्चों का करियर बर्बाद होता है. फिलहाल 22 लाख से ज्यादा मेडिकल छात्र इस विवाद की वजह से परेशान हैं. वे बस इस इंतजार में हैं कि आगे क्या होगा और उन्हें इंसाफ कब मिलेगा।

  • नई सरकार का पहला बड़ा कदम: तमिलनाडु में 717 शराब दुकानें बंद करने का आदेश जारी

    नई सरकार का पहला बड़ा कदम: तमिलनाडु में 717 शराब दुकानें बंद करने का आदेश जारी


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक फैसलों की तेज़ी ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद जिस तरह से निर्णायक कदम उठाए हैं, वह उनकी कार्यशैली की स्पष्ट झलक देता है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्कूलों, कॉलेजों, पूजा स्थलों और बस स्टैंडों के आसपास स्थित 717 शराब दुकानों को बंद करने का निर्णय लिया है। यह फैसला अगले दो सप्ताह के भीतर लागू किया जाएगा।

    सरकार के इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और सामाजिक वातावरण को बेहतर बनाना बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे राज्य में एक विशेष जांच अभियान चलाया गया, जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कौन सी शराब दुकानें ऐसे स्थानों के नजदीक संचालित हो रही हैं जहां बच्चों, श्रद्धालुओं और यात्रियों की आवाजाही अधिक रहती है। जांच के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने सरकार को इस दिशा में कड़ा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

    रिपोर्ट के अनुसार 717 शराब दुकानें ऐसे स्थानों के बेहद करीब पाई गईं, जिन्हें संवेदनशील क्षेत्र माना गया है। इनमें से कई दुकानें धार्मिक स्थलों के पास स्थित थीं, जहां दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। वहीं एक बड़ा हिस्सा शैक्षणिक संस्थानों के पास पाया गया, जिससे छात्रों की सुरक्षा और वातावरण पर सवाल उठते रहे हैं। इसके अलावा कई दुकानें बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर भी मौजूद थीं, जहां हर समय यात्रियों का आवागमन रहता है।

    इन निष्कर्षों के आधार पर सरकार ने यह स्पष्ट किया कि अब ऐसे सभी स्थानों पर शराब बिक्री को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी चिन्हित दुकानों को बंद किया जाए और किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    इस निर्णय ने राज्य में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। जहां एक ओर बड़ी संख्या में लोग इस कदम को सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक हलकों में इसे एक चुनौतीपूर्ण कार्य के रूप में भी माना जा रहा है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां ये दुकानें लंबे समय से संचालित हो रही थीं, वहां बदलाव को लागू करना आसान नहीं होगा।

    मुख्यमंत्री विजय की यह नीति उनकी सरकार के शुरुआती और सख्त फैसलों में से एक मानी जा रही है। यह संकेत भी दिया जा रहा है कि आने वाले समय में सार्वजनिक हित और सामाजिक अनुशासन से जुड़े ऐसे और भी निर्णय देखने को मिल सकते हैं। सरकार का यह रुख राज्य में कानून व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों की गरिमा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।

    फिलहाल, पूरे राज्य में इस आदेश के बाद प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और संबंधित विभागों को कार्रवाई पूरी करने के लिए समयबद्ध लक्ष्य दिए गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह निर्णय जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ लागू होता है।

  • तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश

    तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ लेते ही सी जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने बड़ा आदेश देते हुए कहा है कि पूजा के स्थलों, स्कूलों और बस अड्डों के आसपास 500 मीटर के दायरे में सभी शराब की सरकारी दुकानें तत्काल बंद कर दी जाएं। सख्त आदेश जारी करते हुए विजय ने कहा है कि यह फैसला दो हफ्ते के अंदर ही लागू होगा।

    बता दें कि मुख्यमंत्री बनते ही मंच पर ही उन्होंने अपने वादों को पूरा करने के लिए तीन फैसलों पर साइन कर दिए थे। पहला आदेश 200 यूनिट फ्री बिजली देने को लेकर था। दूसरा आदेश महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने और तीसरा नशे की सस्या से निपटने के लिए हर जिले में विशेष फोर्स का गठन करना था।

    सोमवार को ही सीएम विजय समेत सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने विधानसभा में शपथ ली है। सबसे पहले मुख्यमंत्री विजय ने विधायक के रूप में शपथ ली और मंत्रियों में एन आनंद, आधव अर्जुन, केजी अरुणराज, केए सेनगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन और टीके प्रभु ने भी शपथ ली। इसके बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक दल के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम तथा अन्य विधायकों ने पद की शपथ ली।

    विजय, उदयनिधि और पनीरसेल्वम उन विधायकों में शामिल थे जिन्होंने “पूर्ण निष्ठा” के नाम पर शपथ ली। पलानीस्वामी और पीएमके की सौम्या अंबुमणि उन विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। महिला मंत्री कीर्तना शुरुआत में अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं और उन्हें इसे लाने के लिए वापस जाना पड़ा।

    जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम शपथ लेने के लिए पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं। विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक कार्यवाहक अध्यक्ष की ओर मुख करके खड़े होते हैं। जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाण-पत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं। श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है।

    बाद में, कीर्तना प्रमाण-पत्र सदन में लेकर आईं और अधिकारी को सौंप दिया तथा ईश्वर के नाम पर शपथ ली। वेलाचेरी से ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) के विधायक आर. कुमार जब अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र जमा करने के बाद शपथ लेने ही वाले थे, तभी अधिकारी श्रीनिवासन ने उन्हें रोक दिया। श्रीनिवासन ने कुमार का ध्यान इस ओर दिलाया कि उनके द्वारा जमा किए गए प्रमाण-पत्र पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज है।

  • तमिलनाडु नए सीएम के शपथ समारोह में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के बजा राज्य गीत, मचा सियासी संग्राम

    तमिलनाडु नए सीएम के शपथ समारोह में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान के बजा राज्य गीत, मचा सियासी संग्राम


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) के नए मुख्यमंत्री (New Chief Minister) और टीवीके चीफ जोसेफ विजय (TVK Chief Joseph Vijay) के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान तमिलनाडु के राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ (Tamil Thai Vazhthu) को देश के राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बाद तीसरे स्थान पर गाए जाने को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता हमेशा से बेहद संवेदनशील मुद्दे रहे हैं, ऐसे में इस घटनाक्रम ने राज्य के सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

    चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में रविवार को आयोजित भव्य समारोह में टीवीके प्रमुख जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. शपथ ग्रहण समारोह के शुरुआत में ‘वंदे मातरम्’ और ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया गया, जबकि परंपरागत रूप से राज्य के सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में गाए जाने वाले ‘तमिल थाई वजथु’ को वरीयता क्रम में तीसरे स्थान पर रखा गया।

    इसी बात को लेकर विपक्षी दलों और टीवीके को समर्थन देने वाले सहयोगी दलों ने कड़ी नाराजगी जताई है. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) के तमिलनाडु राज्य सचिव एम वीरपांडियन ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि ‘तमिल थाई वजथु’ को हमेशा सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में सम्मानपूर्वक गाया जाता रहा है और उसे उसका उचित स्थान मिलना चाहिए. उन्होंने टीवीके प्रमुख विजय के नेतृत्व वाली नई सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होनी चाहिए।


    TVK के सहयोगी दलों ने जताई नाराजगी

    सीपीआई के साथ-साथ सीपीएम, वीसीके और आईयूएमएल जैसी पार्टियों ने भी टीवीके सरकार को समर्थन दिया है, इसलिए सहयोगी दलों की ओर से उठी यह नाराजगी राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है. पीएमके संस्थापक एस रामदास ने भी बयान जारी कर कहा कि राज्य सरकार को सभी सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘तमिल थाई वजथु’ को उचित सम्मान और प्राथमिकता सुनिश्चित करनी चाहिए. वहीं वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि तमिल पहचान और संस्कृति से जुड़े प्रतीकों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।

    विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा. टीवीके विधायक एम वी करुप्पैया के प्रोटेम स्पीकर के रूप में शपथ ग्रहण समारोह में भी ‘तमिल थाई वजथु’ को वरीयता क्रम में तीसरे स्थान पर रखा गया था. इसके बाद यह मुद्दा और ज्यादा तूल पकड़ने लगा है. तमिलनाडु की राजनीति में भाषा और सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा लंबे समय से बेहद संवेदनशील रहा है. द्रविड़ राजनीति की पूरी विचारधारा ही तमिल भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता के इर्द-गिर्द विकसित हुई है. ऐसे में मुख्यमंत्री विजय के शपथ ग्रहण समारोह में राज्य गीत ‘तमिल थाई वजथु’ को प्राथमिकता नहीं दिए जाने को विपक्ष और सहयोगी दल तमिल पहचान की उपेक्षा के तौर पर पेश कर रहे हैं।


    विवाद पर टीवीके सरकार ने दी सफाई

    हालांकि, विवाद बढ़ने पर टीवीके सरकार में मंत्री आधव अर्जुन स्पष्टीकरण जारी किया. उन्होंने कहा, ‘नीरारुम कदलुथुदा… से शुरू होने वाला तमिल वंदना गीत तमिल समाज की 100 साल से अधिक पुरानी सांस्कृतिक विरासत और गौरव का प्रतीक है. तमिलनाडु सरकार ने इसे राज्य गीत का दर्जा दिया है और परंपरा के अनुसार राज्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत इसी गीत से होती है, जबकि अंत में राष्ट्रगान बजाया जाता है. हालांकि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह में पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम्, फिर राष्ट्रगान जन मन गण और उसके बाद तमिल थाई वजथु प्रस्तुत किया गया।

    आधव अर्जुन ने आगे कहा, ‘टीवीके सरकार इस नई व्यवस्था से सहमत नहीं है. राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की ओर से बताया गया कि केंद्र सरकार के नए सर्कुलर के कारण ऐसा करना पड़ा. टीवीके सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में पुरानी परंपरा ही लागू रहेगी, यानी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत ‘तमिल थाई वजथु’ से होगी और अंत राष्ट्रगान से किया जाएगा. पार्टी ने यह भी कहा कि देश के सभी राज्यों में राज्य भाषा के वंदना गीत को कार्यक्रम की शुरुआत में सम्मानपूर्वक स्थान मिलना चाहिए।

  • तमिलनाडु में विजय सरकार की सबसे बड़ी चुनौती, चुनावी वादों पर खर्च कैसे उठाएगा कर्ज में डूबा राज्य?

    तमिलनाडु में विजय सरकार की सबसे बड़ी चुनौती, चुनावी वादों पर खर्च कैसे उठाएगा कर्ज में डूबा राज्य?


    नई दिल्ली।
    तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने विजय ने शानदार चुनावी सफलता हासिल कर सत्ता तक पहुंचने का रास्ता बना लिया है। लेकिन अब उनकी असली परीक्षा सरकार चलाने और जनता से किए गए बड़े चुनावी वादों को पूरा करने की होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव जीतने से ज्यादा कठिन काम आर्थिक दबावों के बीच वादों को जमीन पर उतारना होगा।

    चुनाव प्रचार के दौरान विजय और उनकी पार्टी टीवीके ने कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं की थीं। इनमें महिलाओं को हर महीने ₹2500 सहायता राशि, गरीब महिलाओं के विवाह के लिए 8 ग्राम सोना और सिल्क साड़ी, स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक की मदद और हर साल 6 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर जैसी योजनाएं शामिल हैं। इन वादों ने महिला मतदाताओं पर बड़ा असर डाला।

    युवाओं के लिए भी पार्टी ने बड़े ऐलान किए थे। बेरोजगार ग्रेजुएट्स को ₹4000 मासिक भत्ता देने और छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए ₹20 लाख तक का बिना गारंटी वाला शिक्षा ऋण देने का वादा किया गया। इसके अलावा किसानों के लिए कृषि ऋण माफी और धान-गन्ने पर कानूनी एमएसपी लागू करने की बात भी कही गई।

    सरकारी कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि और अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने जैसे वादों ने भी चुनाव में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, अब सबसे बड़ा सवाल इन सभी योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने का है।

    तमिलनाडु देश के औद्योगिक रूप से मजबूत राज्यों में गिना जाता है, लेकिन राज्य पर पहले से भारी कर्ज़ का बोझ है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार राज्य का कर्ज लगातार बढ़ रहा है, जिसकी बड़ी वजह कल्याणकारी योजनाओं, सब्सिडी, इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं और ब्याज भुगतान को माना जा रहा है।

    ऐसे में नई सरकार के सामने दोहरी चुनौती होगी। एक ओर जनता से किए गए वादों को पूरा करने का दबाव रहेगा, वहीं दूसरी ओर वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खर्च और राजस्व के बीच संतुलन नहीं बना, तो राज्य की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

    विजय की सबसे बड़ी ताकत उनकी लोकप्रियता और मजबूत जनाधार है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आने के कारण उनके पास बड़ी संख्या में समर्थक हैं, लेकिन प्रशासन चलाने के लिए केवल लोकप्रियता काफी नहीं मानी जाती। शासन में आर्थिक प्रबंधन, नीतिगत फैसले और प्रशासनिक अनुभव की भी अहम भूमिका होती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि विजय सरकार विकास और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन कैसे बनाती है। तमिलनाडु की जनता ने नई उम्मीदों के साथ उन्हें मौका दिया है, लेकिन अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उन उम्मीदों को हकीकत में बदलने की होगी।

  • फर्जी समर्थन पत्र विवाद के बाद थलपति विजय की सरकार गठन कोशिशों पर उठे बड़े सवाल

    फर्जी समर्थन पत्र विवाद के बाद थलपति विजय की सरकार गठन कोशिशों पर उठे बड़े सवाल

    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थलपति विजय की पार्टी सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने में लगातार सक्रिय है, लेकिन इसी बीच एक नए विवाद ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा उलझा दिया है। एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने विजय की पार्टी पर फर्जी समर्थन पत्र तैयार कर राज्यपाल को सौंपने का गंभीर आरोप लगाया है। इस दावे के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया और मामला अब कानूनी दायरे तक पहुंच चुका है।

    दिनाकरन ने चेन्नई के गुइंडी थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि उनकी पार्टी के विधायक एस कामराज के नाम का गलत इस्तेमाल किया गया। उनका आरोप है कि विजय की पार्टी ने ऐसा दस्तावेज पेश किया जिसमें यह दिखाने की कोशिश की गई कि एएमएमके विधायक सरकार गठन के लिए टीवीके का समर्थन कर रहे हैं। दिनाकरन के अनुसार, जब मूल पत्र प्रस्तुत करने की बात आई तब उन्होंने खुद राज्यपाल से मुलाकात कर असली दस्तावेज सौंपा, जिसमें उनकी पार्टी का समर्थन किसी और गठबंधन के पक्ष में बताया गया था। उन्होंने इस पूरे मामले को लोकतंत्र के खिलाफ साजिश बताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    इस विवाद के केंद्र में मौजूद विधायक एस कामराज को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ समय पहले दिनाकरन ने दावा किया था कि उनके विधायक संपर्क से बाहर हैं और उन पर दबाव बनाया जा रहा है। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गई थीं। हालांकि बाद में विजय की पार्टी की तरफ से एक वीडियो सामने आया जिसमें विधायक कामराज यह कहते दिखाई दिए कि उन्होंने अपनी मर्जी और सहमति से समर्थन देने का फैसला लिया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद मामला और ज्यादा उलझ गया क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर कायम हैं।

    थलपति विजय की पार्टी लगातार यह कह रही है कि उन्हें सरकार बनाने के लिए किसी प्रकार की खरीद-फरोख्त या दबाव की राजनीति की जरूरत नहीं है। पार्टी का दावा है कि उन्हें विधायकों का समर्थन स्वाभाविक रूप से मिल रहा है और विरोधी दल केवल भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर दिनाकरन इस पूरे मामले को गंभीर आपराधिक साजिश बता रहे हैं और उनका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गलत असर पड़ेगा।

    तमिलनाडु में इस समय सरकार गठन का गणित बेहद दिलचस्प स्थिति में पहुंच चुका है। हर राजनीतिक दल अपने समर्थन के आंकड़े मजबूत दिखाने में जुटा हुआ है। राजभवन में लगातार बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों का दौर जारी है। ऐसे माहौल में यह विवाद सत्ता की तस्वीर बदल सकता है। अगर जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो इसका सीधा असर सरकार गठन की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

    राज्य की जनता अब पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए है। राजनीतिक आरोपों, समर्थन पत्रों और कानूनी शिकायतों के बीच तमिलनाडु की राजनीति में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि बहुमत का दावा किसके पक्ष में जाता है और क्या यह विवाद राज्य की नई सरकार बनने की राह में बड़ी बाधा साबित होगा।