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  • तमिलनाडुः पोल्लाची के पास खड़े ट्रक से टकराई कार, एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत

    तमिलनाडुः पोल्लाची के पास खड़े ट्रक से टकराई कार, एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत


    कोयंबटूर।
    तमिलनाडु के कोयंबटूर जिले में पोल्लाची के निकट सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से कार की जोरदार टक्कर होने से एक ही परिवार के पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार किसी भी व्यक्ति को बचाया नहीं जा सका।

    पुलिस के अनुसार, कोयंबटूर जिले के मदुक्करई एमएलए स्ट्रीट निवासी कनकराज एक निजी कंपनी में कार्यरत थे। उनके परिवार में पत्नी उमा महेश्वरी, बड़ी बेटी आरती और छोटी बेटी नर्मदा थीं। रविवार को कनकराज अपने परिवार तथा दूर के रिश्तेदार रामन के साथ कार से उदुमलपेट स्थित अपने कुलदेवता मंदिर में दर्शन कर वापस घर लौट रहे थे। कार कनकराज स्वयं चला रहे थे।

    दोपहर के समय जब उनकी कार पोल्लाची के पास नल्लाम्पल्ली इलाके से गुजर रही थी, तभी वह अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे में कनकराज, उनकी पत्नी उमा महेश्वरी, दोनों बेटियां आरती और नर्मदा तथा रिश्तेदार रामन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

    घटना की सूचना मिलते ही गोमंगलम पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की सहायता से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद क्षतिग्रस्त कार में फंसे शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए पोल्लाची सरकारी अस्पताल भेजा गया।

    प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला है कि सड़क के बीच बने डिवाइडर पर लगे पौधों में पानी देने के लिए ट्रक सड़क किनारे खड़ा किया गया था। इसी दौरान कार अनियंत्रित होकर ट्रक से टकरा गई। हालांकि दुर्घटना की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए पुलिस सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

    एन्नोर में ट्रेन की चपेट में आने से व्यक्ति की मौत

    इधर, चेन्नई के एन्नोर रेलवे स्टेशन के पास भी रविवार को एक हादसा हुआ। रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान कन्नन नामक व्यक्ति ट्रेन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने शोक व्यक्त करते हुए बताया कि इस क्षेत्र में रेलवे ट्रैक पार करते समय होने वाले हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लोगों ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यहां जल्द से जल्द फुटओवर ब्रिज या अन्य सुरक्षित पारपथ का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

  • 3 दशक बाद कावेरी जल विवाद पर चर्चा की तैयारी…..तमिलनाडु-कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों के बीच जल्द होगी बैठक

    3 दशक बाद कावेरी जल विवाद पर चर्चा की तैयारी…..तमिलनाडु-कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों के बीच जल्द होगी बैठक


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) और कर्नाटक (Karnataka) के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार (Chief Minister D.K. Shivakumar) के बीच जल्द ही एक बैठक हो सकती है। कावेरी जल विवाद (Kaveri Water Dispute) को लेकर बुलाई गई यह बैठक काफी चर्चा में है। दरअसल मुख्यमंत्री थलपति विजय का यह कदम तमिलनाडु के तीन दशक पुराने रुख से बिल्कुल अलग है। इससे पहले तमिलनाडु हमेशा से बातचीत के बजाय अदालती फैसलों और ट्रिब्यूनल पर भरोसा करता आया है और राज्य के मुख्यमंत्री सीधी बातचीत से दूर ही रहे हैं। लेकिन अब विजय लीक से हटकर राह पकड़ रहे हैं। तमिलनाडु का मानना रहा है कि कावेरी विवाद दो मुख्यमंत्रियों की मेज पर बैठकर नहीं सुलझ सकता। हालांकि सीएम विजय सीधे संवाद का रास्ता अपना रहे हैं।

    विजय ने पानी के संकट को हल करने के लिए शिवकुमार के साथ 31 जुलाई से 3 अगस्त के बीच सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा है। अगर यह मुलाकात होती है, तो पिछले 14 सालों में यह पहला मौका होगा जब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री कावेरी मुद्दे पर आमने-सामने बैठकर द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।


    लीक से हटकर चल रहे विजय

    इससे पहले पिछले 30 से अधिक सालों से चेन्नई का मानना रहा है कि यह विवाद इतिहास, फसलों और चुनावी भावनाओं जैसे जटिल मुद्दों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसे किसी बैठक में सुलझाने के बजाय कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA), ट्रिब्यूनल के फैसले और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के जरिए ही लागू किया जाना चाहिए। वहीं विजय कानूनी अधिकारों को छेड़े बिना, दोनों राज्यों के बीच संवाद का रास्ता खोलना चाहते हैं ताकि संकट की स्थिति में पानी की आपूर्ति जारी रहे।


    क्यों पड़ी बातचीत की जरूरत?

    तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा के किसानों के सामने इस समय संकट बेहद गंभीर है। ट्रिब्यूनल के आदेश के तहत 1 जून से 23 जुलाई के बीच तमिलनाडु को लगभग 32 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी मिलना चाहिए था। लेकिन उसे केवल 3.5 TMC पानी ही मिला है। तमिलनाडु का मानना है कि कमजोर मॉनसून के बावजूद, कर्नाटक को कम से कम 3 TMC अतिरिक्त पानी तुरंत छोड़ना चाहिए था। पानी की कमी के कारण कावेरी डेल्टा में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर हैं।


    क्यों उठ रहे सवाल?

    विजय की इस सीधी बातचीत की पहल पर विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने कुछ चिंताएं जताई हैं। आलोचकों को डर है कि सीधी बातचीत से कर्नाटक को ‘कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण’ को दरकिनार करने का मौका मिल सकता है। यह शक भी है कि कर्नाटक पानी छोड़ने के बदले तमिलनाडु पर मेकेदातु में प्रस्तावित डैम के निर्माण पर विरोध वापस लेने का दबाव बना सकता है। इस मामले पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के कन्नन का कहना है कि मुख्यमंत्रियों की बातचीत आपसी सहयोग का माहौल बना सकती है, लेकिन यह ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए अधिकारों की जगह नहीं ले सकती।


    क्या है राजनीतिक समीकरण?

    राजनीतिक रूप से विजय के पास एक फायदा यह है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है, जो तमिलनाडु में विजय की सरकार की सहयोगी भूमिका में है। राहुल गांधी विजय के शपथ ग्रहण में शामिल हुए थे और डीके शिवकुमार से भी उनके मधुर संबंध हैं। ऐसे में विजय के लिए राह आसान हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जल विवादों में पार्टी लाइनें अक्सर बेअसर हो जाती हैं, क्योंकि दोनों राज्यों के नेताओं को अपने-अपने किसानों और स्थानीय जनता को जवाब देना होता है। अगर विजय बेंगलुरु में वार्ता से अपने राज्य के लिए तुरंत कावेरी का पानी लाने में सफल रहते हैं और मेकेदातु पर तमिलनाडु के रुख से समझौता नहीं करते, तो यह उनकी बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी। वहीं, अगर यह बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म होती है, तो आलोचक इसे राजनीतिक अपरिपक्वता करार देंगे।

  • तमिलनाडुः 5 अगस्त को अपना पहला पूर्ण बजट पेश करेगी TVK सरकार…6 को आएगा कृषि बजट

    तमिलनाडुः 5 अगस्त को अपना पहला पूर्ण बजट पेश करेगी TVK सरकार…6 को आएगा कृषि बजट


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में टीवीके सरकार (TVK Government) अपना पहला पूर्ण बजट (First full Budget) पेश करने जा रही है। विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर (JCD Prabhakar) के अनुसार, पांच अगस्त को आम बजट पेश होगा। इसके ठीक अगले दिन 6 अगस्त को अलग से कृषि बजट पेश किया जाएगा। इस विशेष कृषि बजट में किसानों के लिए लक्षित सब्सिडी और नए विकास कार्यों का पूरा खाका तैयार किया जाएगा।

    क्या होगी अलग कृषि बजट की मुख्य रणनीति?
    कृषि मंत्री आर विनोद छह अगस्त को सदन में राज्य का पृथक कृषि बजट पेश करेंगे। सूत्रों की मानें तो इस बजट का पूरा ध्यान किसानों की सीधी आर्थिक मदद पर होगा। सरकार का मकसद खेती की लागत को घटाना है। इसके साथ ही कृषि उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई तकनीक और लक्षित सब्सिडी की योजना बनाई गई है। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा।


    भारी कर्ज के बीच कृषि विकास के लिए पैसा कहां से आएगा?

    राज्य सरकार ने हाल ही में एक श्वेत पत्र जारी किया था। इसमें बताया गया कि तमिलनाडु पर करीब 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। राज्य की कुल देनदारियां 13.18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। इतने बड़े वित्तीय संकट के बावजूद, मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने साफ कर दिया है कि किसान कल्याण और जनकल्याण की योजनाएं किसी भी कीमत पर नहीं रुकेंगी। सरकार का दावा है कि भ्रष्टाचार रोककर बचाई गई राशि का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र के विकास में किया जाएगा।


    कृषि बजट से जुड़ी सात अहम बातें

    छह अगस्त को पेश होगा अलग कृषि बजट।
    किसानों के लिए जरूरत के मुताबिक लक्षित सब्सिडी की तैयारी।
    सिंचाई और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फंड मिलने की संभावना।
    विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण किया जाएगा।
    बजट पर किसानों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी।
    चुनावी वादों को लागू करने की दिशा में नई योजनाओं का एलान संभव।
    आर्थिक दबाव के बावजूद किसान कल्याण योजनाएं जारी रखने का सरकार का दावा।


    मुख्यमंत्री विजय के सामने बड़ी परीक्षा

    टीवीके सरकार के लिए यह सिर्फ पहला कृषि बजट नहीं, बल्कि चुनावी वादों को जमीन पर उतारने की पहली बड़ी परीक्षा भी है। सत्ता में आने से पहले जोसेफ विजय ने पिछली सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन के आरोप लगाए थे। अब लोगों की नजर इस बात पर होगी कि उनकी सरकार सीमित संसाधनों के बावजूद किसानों के लिए कितनी प्रभावी योजनाएं लेकर आती है।

  • तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन

    तमिलनाडु में बदले सियासी समीकरण: DMK से अलग हुई MDMK, विजय की TVK को दिया समर्थन


    चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डीएमके (DMK) की लंबे समय से सहयोगी रही मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कषगम (MDMK) ने डीएमके के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) से अलग होने की घोषणा कर दी है। पार्टी ने डीएमके पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हुए गठबंधन से बाहर निकलने का फैसला किया है। साथ ही अभिनेता और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय को आगामी उपचुनावों और स्थानीय निकाय चुनावों में समर्थन देने का भी ऐलान किया है।

    शनिवार को चेन्नई में आयोजित एमडीएमके की सामान्य परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया। पार्टी की ओर से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि चुनाव पूर्व गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा, लेकिन फिलहाल एमडीएमके डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी।

    DMK पर लगाए गंभीर आरोप

    पार्टी प्रमुख वाइको ने आरोप लगाया कि डीएमके ने हिंदुत्व समर्थक ताकतों के साथ मिलकर एआईएडीएमके (AIADMK) के नेतृत्व वाली सरकार बनाने की कोशिश की थी। उनका कहना था कि यह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा और इस घटनाक्रम के बाद सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस के अस्तित्व का उद्देश्य ही समाप्त हो गया।

    पार्टी के प्रस्ताव में कहा गया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए गठबंधन में बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह गया था, इसलिए कार्यकर्ताओं की राय के आधार पर यह निर्णय लिया गया।

    विजय की पार्टी को समर्थन

    एमडीएमके ने अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के प्रति खुला समर्थन जताया। वाइको ने कहा कि टीवीके भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे, दो-भाषा नीति और सी.एन. अन्नादुरै के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का दावा करती है। उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में दोनों दलों के बीच राजनीतिक सहयोग और मजबूत हो सकता है।

    विधायकों के इस्तीफे को लेकर दावा

    वाइको ने यह भी दावा किया कि विजय ने एमडीएमके के दोनों विधायकों को इस्तीफा देकर दोबारा चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने की पेशकश भी की थी। हालांकि दोनों विधायकों ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।

    एमडीएमके के विधायक आर. सेंथिलसेल्वन और टी.एम. राजेंद्रन वर्ष 2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके के ‘राइजिंग सन’ चुनाव चिह्न पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। उस चुनाव में एमडीएमके ने गठबंधन के तहत चार सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें दो पर जीत हासिल की थी।

    ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों पर जवाब

    विजय पर लगाए जा रहे ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों का जवाब देते हुए वाइको ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी के विधायकों को डीएमके में शामिल कराने की कोशिश होती है, तो उसे क्या कहा जाएगा।

    एमडीएमके वर्ष 2017 से डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों से दोनों दलों के रिश्तों में लगातार खटास देखने को मिल रही थी। विजय और वाइको की हालिया मुलाकात तथा एमडीएमके नेताओं की नाराजगी के बाद अब गठबंधन टूटने से तमिलनाडु की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना बढ़ गई है।

  • तमिनाडु: BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई के नए आंदोलन को जबदस्त समर्थन, 10 घंटे में जुड़े लाख से अधिक लोग

    तमिनाडु: BJP छोड़ने के बाद अन्नामलाई के नए आंदोलन को जबदस्त समर्थन, 10 घंटे में जुड़े लाख से अधिक लोग


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) भाजपा (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई (K. Annamalai) के इस्तीफा देने के बाद नए राजनीतिक आंदोलन ‘इधु नम्मा इयक्कम’ (New Political Movement ‘Idhu Namma Iyakkam’) (यह हमारा आंदोलन है) को जबरदस्त जनसमर्थन मिल रहा है। भाजपा से इस्तीफा देने के बाद शुरू किए गए इस अभियान में सिर्फ 10 घंटे के भीतर 10 लाख से अधिक लोगों जुड़ चुके हैं। अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए इसे अपने आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया।

    अन्नामलाई ने लिखा कि यह समर्थन उनके साझा विजन और मिशन में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने सभी समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि यह आंदोलन जनता की भागीदारी से और मजबूत हो रहा है।


    पार्टी छोड़ने के बाद नई राजनीतिक दिशा

    भाजपा से इस्तीफा देने के बाद अन्नामलाई ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि वह एक नए और समावेशी राजनीतिक मंच की शुरुआत कर रहे हैं, जो आगे चलकर एक पूर्ण राजनीतिक पार्टी का रूप ले सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने दिसंबर 2025 में ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे की जानकारी दे दी थी।

    अन्नामलाई ने अपने इस्तीफे में कहा कि तमिलनाडु को लेकर उनके और भाजपा नेतृत्व के दृष्टिकोण में अंतर था, जिसके चलते उन्होंने यह निर्णय लिया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को धन्यवाद देते हुए कहा कि वर्षों तक उन्हें जो समर्थन मिला, वह उनके लिए महत्वपूर्ण रहा।


    दिल्ली दौरे के बाद बढ़ी थीं अटकलें

    हाल ही में अन्नामलाई ने दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, संगठन महासचिव बी.एल. संतोष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। पार्टी को मात्र 3 प्रतिशत वोट शेयर मिला था, जिसके बाद राज्य इकाई में बदलाव और नए नेतृत्व की चर्चा शुरू हो गई थी।


    इस्तीफे के पीछे राजनीतिक समीकरण भी अहम

    उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब 2026 विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और एआईएडीएमके के बीच गठबंधन दोबारा सक्रिय हुआ है। इसके बाद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। अन्नामलाई के एआईएडीएमके के कुछ नेताओं के साथ संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। उनके विवादित बयानों और वैचारिक मतभेदों के कारण कई बार राजनीतिक विवाद भी उत्पन्न हुए। हाल ही में कुछ नेताओं के इस्तीफे के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में कई कार्यकर्ता उनके नए राजनीतिक आंदोलन से जुड़ सकते हैं।


    क्या बनेगा नई ताकत का केंद्र?

    राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अन्नामलाई का यह नया आंदोलन तमिलनाडु में एक मजबूत विकल्प बन सकता है। उनके सोशल मीडिया दावे और शुरुआती समर्थन को देखते हुए यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस नए राजनीतिक प्रयोग का असर राज्य की राजनीति पर दिखाई दे सकता है।

  • दिल्ली में मोदी–विजय बैठक, मेकेदातु विवाद के बीच तमिलनाडु सीएम की पीएम से पहली औपचारिक भेंट

    दिल्ली में मोदी–विजय बैठक, मेकेदातु विवाद के बीच तमिलनाडु सीएम की पीएम से पहली औपचारिक भेंट

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री Vijay ने बुधवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसे दोनों नेताओं के बीच पिछले एक दशक से अधिक समय के बाद हुई महत्वपूर्ण राजनीतिक भेंट माना जा रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी प्रधानमंत्री से पहली औपचारिक मुलाकात रही, जिससे राजनीतिक हलकों में इस बैठक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस मुलाकात की जानकारी साझा की गई, जिसमें इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया। हालांकि आधिकारिक बयान में विस्तृत एजेंडा सामने नहीं आया, लेकिन माना जा रहा है कि बातचीत का केंद्र तमिलनाडु से जुड़े विकास मुद्दे, केंद्र प्रायोजित योजनाएं और राज्य में चल रही परियोजनाएं रहीं।

    यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब दक्षिण भारत की राजनीति में कावेरी जल विवाद से जुड़े मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रही है और मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। राज्य सरकार का कहना है कि कावेरी नदी पर किसी भी नए बांध या परियोजना से तमिलनाडु के हिस्से के जल प्रवाह पर असर पड़ सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र और किसानों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसी पृष्ठभूमि में यह मुलाकात राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

    मुख्यमंत्री विजय का राजनीतिक सफर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाते हुए राज्य में नई पार्टी का गठन किया और धीरे-धीरे जनाधार मजबूत किया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने युवा मतदाताओं और शहरी क्षेत्रों में प्रभावशाली समर्थन हासिल किया, जिससे पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी यह दिल्ली यात्रा पहली बड़ी औपचारिक राजनीतिक मुलाकातों में से एक मानी जा रही है।

    जानकारी के अनुसार, विजय और प्रधानमंत्री मोदी की यह मुलाकात लगभग 12 साल बाद हुई है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कोयंबटूर में हुई थी, जब विजय एक अभिनेता के रूप में राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अब दोनों नेताओं का मिलना पूरी तरह से अलग राजनीतिक संदर्भ में हुआ है, जहां एक तरफ प्रधानमंत्री देश के शीर्ष नेतृत्व में हैं और दूसरी ओर विजय एक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में केंद्र से संवाद कर रहे हैं।

    बैठक के दौरान प्रशासनिक सहयोग, विकास योजनाओं और केंद्र-राज्य समन्वय से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। तमिलनाडु सरकार का जोर राज्य में बुनियादी ढांचे, औद्योगिक निवेश और कृषि क्षेत्र के विकास पर है, जिसके लिए केंद्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल को जरूरी माना जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा को भी संकेत देती है। विशेषकर मेकेदातु जैसे संवेदनशील मुद्दे और राज्य-केंद्र संबंधों की पृष्ठभूमि में यह बैठक आने वाले समय में नीतिगत फैसलों पर असर डाल सकती है। फिलहाल दोनों पक्षों ने इसे सकारात्मक और औपचारिक बातचीत बताया है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थों पर नजर बनी हुई है।

  • तमिलनाडु में तेज हुई सियासी हलचल: AIADMK में टूट के संकेत, तीन विधायकों के इस्तीफे से बदले राजनीतिक समीकरण

    तमिलनाडु में तेज हुई सियासी हलचल: AIADMK में टूट के संकेत, तीन विधायकों के इस्तीफे से बदले राजनीतिक समीकरण

    नई दिल्ली। तमिलनाडु की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब विधानसभा चुनाव परिणाम आने के महज 21 दिनों के भीतर AIADMK के तीन विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। खास बात यह रही कि इस्तीफा देने के तुरंत बाद तीनों नेताओं ने TVK का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित बदलावों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।

    बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले तीनों विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले नेता माने जाते हैं और पार्टी के भीतर एक खास गुट से जुड़े हुए थे। उनके अचानक लिए गए फैसले ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। चुनाव के इतने कम समय बाद पार्टी छोड़ना केवल सामान्य राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे संगठन के भीतर चल रहे असंतोष और आंतरिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, तीनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद नई राजनीतिक दिशा चुनने का फैसला लिया। इसके तुरंत बाद वे TVK नेतृत्व के संपर्क में आए और पार्टी में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम ने राज्य की सत्तारूढ़ और विपक्षी राजनीति दोनों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले समय में कुछ और नेता भी इसी राह पर चल सकते हैं।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम AIADMK के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं और नेतृत्व को लेकर मतभेदों की चर्चा पहले से चल रही थी। ऐसे में तीन विधायकों का पार्टी छोड़ना संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है। इससे पार्टी के अंदर मौजूद गुटबाजी की चर्चाओं को भी और बल मिला है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति में नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। चुनाव परिणामों के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर लगातार बदलती दिखाई दे रही है और दलों के बीच समर्थन तथा रणनीति को लेकर नए समीकरण उभरते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बदलाव का असर राज्य की राजनीति पर कितना व्यापक पड़ता है और क्या यह राजनीतिक फेरबदल किसी बड़े बदलाव की शुरुआत साबित होता है।

  • पेपर लीक बवाल के बीच तमिलनाडु के CM विजय बोले- 'NEET बंद हो… 12वीं के नंबर पर मिले एडमिशन

    पेपर लीक बवाल के बीच तमिलनाडु के CM विजय बोले- 'NEET बंद हो… 12वीं के नंबर पर मिले एडमिशन


    नई दिल्ली।
    नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा को लेकर देशभर में बवाल मचा है. पेपर लीक (Paper Leak) के आरोपों ने सबको परेशान कर दिया है. इसी बीच तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) ने बुधवार को अपनी बात मजबूती से रखी है. विजय ने साफ कहा है कि ‘मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए नीट परीक्षा बंद होनी चाहिए’. उनका कहना है कि ‘छात्रों को 12वीं के नंबरों के आधार पर ही मेडिकल में एडमिशन मिले’. इससे हर बच्चे को आगे बढ़ने का बराबर मौका मिलेगा।

    मुख्यमंत्री विजय ने सोशल मीडिया (X) पर परीक्षा के पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि पेपर लीक की खबरों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है. विजय ने याद दिलाया कि साल 2024 में भी पेपर लीक हुआ था और 6 राज्यों में एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसकी जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई. उन्होंने आगे कहा कि इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की कमेटी ने सुधार के लिए 95 सुझाव भी दिए थे, लेकिन हैरानी की बात है कि महज दो साल के भीतर ही फिर से पेपर लीक हो गया और परीक्षा रद्द करनी पड़ी. ऐसे में सीएम विजय का मानना है कि इस तरह की घटनाएं उन लाखों बच्चों का भरोसा तोड़ देती हैं, जो डॉक्टर बनने का सपना लिए दिन-रात मेहनत में जुटे रहते हैं।

    तमिलनाडु काफी समय से नीट का विरोध कर रहा है. मुख्यमंत्री का कहना है कि जब इतने सुधारों के बाद भी सिस्टम सुरक्षित नहीं हो पा रहा, तो राज्यों को यह छूट मिलनी चाहिए कि वे 12वीं की मेरिट के आधार पर अपने यहां की सीटें भर सकें. साफ है कि अगर परीक्षा का सिस्टम ही सुरक्षित नहीं होगा, तो छात्रों का भविष्य खतरे में बना रहेगा।


    पेपर लीक मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई?

    नीट परीक्षा को लेकर विवाद तब और बढ़ गया जब धांधली की खबरों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा रद्द कर दी. अब इस पूरे मामले की जांच CBI कर रही है. सीबीआई और राजस्थान पुलिस ने मिलकर कई राज्यों में छापेमारी की है. इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. जांच में पता चला है कि परीक्षा से पहले ही एक ‘गेस पेपर’ सोशल मीडिया और कोचिंग सेंटरों के जरिए छात्रों तक पहुंच गया था.

    जांच एजेंसियों ने जयपुर, गुरुग्राम और नासिक जैसे शहरों में एक्शन लेते हुए आरोपियों को पकड़ा है.आरोपियों को पकड़ने के साथ ही पुलिस ने उनके ठिकानों से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस भी अपने कब्जे में लिए हैं. कोशिश यह है कि इस पूरे नेटवर्क और पेपर लीक की जड़ तक पहुंचा जा सके. जांच टीम अब इन डिवाइसों की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक का यह खेल कहां से शुरू हुआ और इसके तार किन-किन लोगों से जुड़े हैं. मकसद सिर्फ आरोपियों को पकड़ना नहीं, बल्कि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है, ताकि आगे चलकर किसी भी परीक्षा में ऐसी धांधली न हो और बच्चों का भरोसा बना रहे.

    इस पूरे घोटाले को लेकर देशभर के छात्रों में भारी गुस्सा है. कई शहरों में छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि परीक्षा के इस सिस्टम को सुधारा जाए. छात्रों का कहना है कि ऐसी धांधली से मेहनत करने वाले बच्चों का करियर बर्बाद होता है. फिलहाल 22 लाख से ज्यादा मेडिकल छात्र इस विवाद की वजह से परेशान हैं. वे बस इस इंतजार में हैं कि आगे क्या होगा और उन्हें इंसाफ कब मिलेगा।

  • नई सरकार का पहला बड़ा कदम: तमिलनाडु में 717 शराब दुकानें बंद करने का आदेश जारी

    नई सरकार का पहला बड़ा कदम: तमिलनाडु में 717 शराब दुकानें बंद करने का आदेश जारी


    नई दिल्ली ।
    तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक फैसलों की तेज़ी ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद जिस तरह से निर्णायक कदम उठाए हैं, वह उनकी कार्यशैली की स्पष्ट झलक देता है। इसी क्रम में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्कूलों, कॉलेजों, पूजा स्थलों और बस स्टैंडों के आसपास स्थित 717 शराब दुकानों को बंद करने का निर्णय लिया है। यह फैसला अगले दो सप्ताह के भीतर लागू किया जाएगा।

    सरकार के इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा और सामाजिक वातावरण को बेहतर बनाना बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे राज्य में एक विशेष जांच अभियान चलाया गया, जिसमें यह पता लगाने की कोशिश की गई कि कौन सी शराब दुकानें ऐसे स्थानों के नजदीक संचालित हो रही हैं जहां बच्चों, श्रद्धालुओं और यात्रियों की आवाजाही अधिक रहती है। जांच के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने सरकार को इस दिशा में कड़ा कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

    रिपोर्ट के अनुसार 717 शराब दुकानें ऐसे स्थानों के बेहद करीब पाई गईं, जिन्हें संवेदनशील क्षेत्र माना गया है। इनमें से कई दुकानें धार्मिक स्थलों के पास स्थित थीं, जहां दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। वहीं एक बड़ा हिस्सा शैक्षणिक संस्थानों के पास पाया गया, जिससे छात्रों की सुरक्षा और वातावरण पर सवाल उठते रहे हैं। इसके अलावा कई दुकानें बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर भी मौजूद थीं, जहां हर समय यात्रियों का आवागमन रहता है।

    इन निष्कर्षों के आधार पर सरकार ने यह स्पष्ट किया कि अब ऐसे सभी स्थानों पर शराब बिक्री को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी चिन्हित दुकानों को बंद किया जाए और किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    इस निर्णय ने राज्य में एक नई चर्चा को जन्म दिया है। जहां एक ओर बड़ी संख्या में लोग इस कदम को सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक हलकों में इसे एक चुनौतीपूर्ण कार्य के रूप में भी माना जा रहा है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां ये दुकानें लंबे समय से संचालित हो रही थीं, वहां बदलाव को लागू करना आसान नहीं होगा।

    मुख्यमंत्री विजय की यह नीति उनकी सरकार के शुरुआती और सख्त फैसलों में से एक मानी जा रही है। यह संकेत भी दिया जा रहा है कि आने वाले समय में सार्वजनिक हित और सामाजिक अनुशासन से जुड़े ऐसे और भी निर्णय देखने को मिल सकते हैं। सरकार का यह रुख राज्य में कानून व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों की गरिमा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।

    फिलहाल, पूरे राज्य में इस आदेश के बाद प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और संबंधित विभागों को कार्रवाई पूरी करने के लिए समयबद्ध लक्ष्य दिए गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह निर्णय जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ लागू होता है।

  • तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश

    तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ लेते ही सी जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने बड़ा आदेश देते हुए कहा है कि पूजा के स्थलों, स्कूलों और बस अड्डों के आसपास 500 मीटर के दायरे में सभी शराब की सरकारी दुकानें तत्काल बंद कर दी जाएं। सख्त आदेश जारी करते हुए विजय ने कहा है कि यह फैसला दो हफ्ते के अंदर ही लागू होगा।

    बता दें कि मुख्यमंत्री बनते ही मंच पर ही उन्होंने अपने वादों को पूरा करने के लिए तीन फैसलों पर साइन कर दिए थे। पहला आदेश 200 यूनिट फ्री बिजली देने को लेकर था। दूसरा आदेश महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने और तीसरा नशे की सस्या से निपटने के लिए हर जिले में विशेष फोर्स का गठन करना था।

    सोमवार को ही सीएम विजय समेत सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने विधानसभा में शपथ ली है। सबसे पहले मुख्यमंत्री विजय ने विधायक के रूप में शपथ ली और मंत्रियों में एन आनंद, आधव अर्जुन, केजी अरुणराज, केए सेनगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन और टीके प्रभु ने भी शपथ ली। इसके बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक दल के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम तथा अन्य विधायकों ने पद की शपथ ली।

    विजय, उदयनिधि और पनीरसेल्वम उन विधायकों में शामिल थे जिन्होंने “पूर्ण निष्ठा” के नाम पर शपथ ली। पलानीस्वामी और पीएमके की सौम्या अंबुमणि उन विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। महिला मंत्री कीर्तना शुरुआत में अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं और उन्हें इसे लाने के लिए वापस जाना पड़ा।

    जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम शपथ लेने के लिए पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं। विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक कार्यवाहक अध्यक्ष की ओर मुख करके खड़े होते हैं। जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाण-पत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं। श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है।

    बाद में, कीर्तना प्रमाण-पत्र सदन में लेकर आईं और अधिकारी को सौंप दिया तथा ईश्वर के नाम पर शपथ ली। वेलाचेरी से ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) के विधायक आर. कुमार जब अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र जमा करने के बाद शपथ लेने ही वाले थे, तभी अधिकारी श्रीनिवासन ने उन्हें रोक दिया। श्रीनिवासन ने कुमार का ध्यान इस ओर दिलाया कि उनके द्वारा जमा किए गए प्रमाण-पत्र पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज है।