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  • Tamilnadu : SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी… 97 लाख से ज्यादा नाम हटाए

    Tamilnadu : SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी… 97 लाख से ज्यादा नाम हटाए


    चेन्नई।
    चुनाव आयोग (Election Commission) ने तमिलनाडु (Tamilnadu) में विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Voter Revision- SIR) के बाद अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) प्रकाशित कर दी है। राज्य की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक ने सोमवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की, जिसके मुताबिक विभिन्न श्रेणियों के तहत 97.37 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कि राज्य में अब 5.67 करोड़ (5,67,07,380) मतदाता बचे हैं। इसमें 2,77,38,925 पुरुष, 2,89,60,838 महिलाएं और 7,617 तृतीय लिंग (थर्ड जेंडर) मतदाता शामिल हैं। चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हटाए गए नामों में एक महत्वपूर्ण हिस्सा मृत मतदाताओं का है।

    पटनायक ने चेन्नई में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करने से पहले राज्य में मतदाताओं की संख्या 6.41 करोड़ थी। उन्होंने बताया कि नयी सूची में 18-19 आयु वर्ग के 7.40 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया है जबकि विभिन्न श्रेणियों के तहत कुल 97.37 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। पटनायक ने कहा कि निरंतर अद्यतन करने की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से शुरू की जाएगी।


    SC के आदेश के अनुसार लिस्ट जारी

    संशोधन प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग के 30 जनवरी के उस निर्देश का भी पालन किया गया, जो उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार जारी किया गया था। इस निर्देश में यह अनिवार्य किया गया था कि ‘तार्किक विसंगतियों’ की श्रेणी में हटाए गए नामों को हटाने के कारणों के साथ सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए। ये सूचियाँ ग्राम पंचायत कार्यालयों, सार्वजनिक स्थानों, तालुकों, उप-मंडल कार्यालयों और शहरी क्षेत्रों में वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित की गईं। प्रभावित व्यक्तियों को आपत्ति दर्ज करने या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया था। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलेक्टरों) ने अपने-अपने जिलों में अंतिम मतदाता सूची जारी की।


    लगभग आठ प्रतिशत मतदाताओं को हटाया गया

    इस बीच, विशेष गहन पुनरीक्षण के दूसरे चरण के दौरान नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग आठ प्रतिशत मतदाताओं को हटाया गया है। पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में, कुछ दिन पहले प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, कुल मतदाताओं की संख्या 9,44,211 है। वहीं शोलिंगनल्लूर में कुल 5,36,991 मतदाता हैं जिनमें से 2,62,621 पुरुष मतदाता, 2,74,254 महिला मतदाता और 116 तृतीय लिंग मतदाता हैं।

  • तमिलनाडु और बंगाल से 8 आतंकी गिरफ्तार, दिल्ली में बड़े हमले की कर रहे थे प्लानिंग

    तमिलनाडु और बंगाल से 8 आतंकी गिरफ्तार, दिल्ली में बड़े हमले की कर रहे थे प्लानिंग


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) में आतंकी हमले (Terrorist attacks) का अलर्ट जारी है. इस बीच बड़ी आतंकी साजिश बेनकाब हुई है. पुलिस ने बड़े आतंकी हमले की प्लानिंग बनाने वाले 8 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है. ये आरोपी पाकिस्तान (Pakistan) की ISI और बांग्लादेश (Bangladesh) के आतंकी संगठनों (Terrorist Organizations) के इशारे पर काम कर रहे थे.

    दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के एक ऑपरेशन के तहत, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से इन 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. अब पुलिस इन आरोपियों को अब दिल्ली लेकर आ रही है. गिरफ्तार हुए आरोपियों में बांग्लादेश के नागरिक भी शामिल हैं. उनके पास से 8 मोबाइल फोन और 16 सिम कार्ड भी बरामद हुए हैं. आरोपियों के नाम मिजानुर रहमान, मोहम्मद शबत, उमर, मोहम्मद लितान, मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद उज्जल हैं।

    बताया जा रहा है कि ये लोग फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर रहे थे. पुलिस ने पश्चिम बंगाल से भी 2 आरोपी गिरफ्तार किए हैं, इनमें एक बांग्लादेशी नागरिक शामिल है. इस आतंकी मॉड्यूल ने 8 फरवरी को दिल्ली के अलग-अलग इलाकों और मेट्रो में भड़काऊ पोस्टर लगाए थे, जिनमें कश्मीर से जुड़ी बातें भी लिखी गई थीं. भड़काऊ पोस्टर में FREE KASHMIR जैसी बातें लिखी हुई थीं.

    जब दिल्ली पुलिस ने पोस्टर को लेकर जांच शुरू की तो इस आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ. इसके बाद पुलिस ने इन सभी को तिरुप्पुर जिले के उथुकुली (2), पल्लडम (3) और तिरुमुरुगनपूंडी (1) स्थित गारमेंट यूनिट्स से गिरफ्तार किया.


    दिल्ली में बड़े आतंकी हमले का अलर्ट

    हाल ही में जानकारी मिली कि पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा दिल्ली में बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने वाला है. संगठन भीड़भाड़ वाले इलाके और धार्मिक स्थलों को निशाना बना सकता है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा भारत के बड़े शहरों में IED ब्लास्ट की साजिश रच रहा है.


    लाल किला-चांदनी चौक में कड़ी सुरक्षा

    आतंकी हमले के हाई अलर्ट के बाद पुरानी दिल्ली में लाल किला के आसपास और चांदनी चौक की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं. भीड़भाड़ वाले इलाकों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. पुलिस ने स्थानीय लोगों और व्यापारियों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने के निर्देश दिए हैं.

  • Tamil Nadu में भाजपा को झटका… अन्नामलाई ने चुनाव से पहले प्रभारी पद से दिया इस्तीफा

    Tamil Nadu में भाजपा को झटका… अन्नामलाई ने चुनाव से पहले प्रभारी पद से दिया इस्तीफा


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu:) की सियासत में बड़ी हलचल मच गई है। भाजपा (BJP) के पूर्व अध्यक्ष के अन्नामलाई (Annamalai) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने पिता की बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए तमिलनाडु के छह विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव प्रभारी पद से इस्तीफा (Resignation Post Election In-charge) लिया। अन्नामलाई ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने इस निर्णय की जानकारी तमिलनाडु भाजपा नेतृत्व को दे दी है और उनकी स्थिति को समझते हुए वह इस समय अपने पिता के पास रहना चाहते हैं।

    अन्नामलाई ने कहा, “मेरे पिता डायलिसिस पर हैं और उनके इलाज और देखभाल का जिम्मा लेना मेरी प्राथमिकता है। इस कारण से मैं फिलहाल यात्रा करने की स्थिति में नहीं हूं। मैंने पार्टी नेतृत्व से अनुरोध किया है कि वे इन छह विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी किसी अन्य नेता को सौंप दें।”

    अन्नामलाई को जिन छह विधानसभा क्षेत्रों का चुनाव प्रभारी बनाया गया था, वे हैं – सिंगानल्लूर, विरुगमबाक्कम (चेन्नई), करैक्कुडी, श्रीवैकुंटम, मदुरै (दक्षिण), और पद्मनाभपुरम (कन्याकुमारी)। अन्नामलाई ने यह भी स्पष्ट किया कि वे भविष्य में पार्टी की किसी भी जिम्मेदारी को निभाने के लिए तैयार हैं। साथ ही, उन्होंने कहा कि पार्टी उनके स्थान पर किसी अन्य नेता को नियुक्त कर सकती है।

    अन्नामलाई के इस्तीफे के बाद राजनीतिक सियासत भी तेज हो गई। किल्लियूर के कांग्रेस विधायक राजेश कुमार ने इस फैसले पर तंज कसते हुए कहा, “उन्हें चुनावी बुखार चढ़ गया था, और इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दे दिया। मुझे लगता है कि चुनावी हार के डर से ही उन्होंने यह कदम उठाया है।” उन्होंने कहा, “कन्याकुमारी में भाजपा का कमल नहीं खिलेगा, चाहे वे कोई भी कदम उठाएं।”

  • प्रधानमंत्री मोदी ने भारत रत्न डॉ. एम.जी. रामचंद्रन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत रत्न डॉ. एम.जी. रामचंद्रन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न डॉ. एम.जी. रामचंद्रनजिन्हें एमजीआर के नाम से भी जाना जाता हैको उनकी जन्‍म जयंती के अवसर पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने अपने बयान में एमजीआर की बहुआयामी विरासत की सराहना करते हुए उनकी तमिलनाडु के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया। एमजीआर ने न केवल राज्य के विकास में अहम योगदान दियाबल्कि तमिल संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में भी अपना योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि एमजीआर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उन्होंने तमिलनाडु की प्रगति में एमजीआर के योगदान को उत्कृष्ट बताया और तमिल संस्कृति को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका को उल्लेखनीय करार दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके दृष्टिकोण और आदर्शों को समाज के लिए साकार करने के लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।

    एमजीआर का जीवन राजनीतिफिल्म और समाज सेवा के क्षेत्र में प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने तमिलनाडु में शिक्षास्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल कीजो आज भी लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही हैं। उनके नेतृत्व में तमिलनाडु ने औद्योगिक विकासआर्थिक सुदृढ़ता और सामाजिक उत्थान में नए आयाम हासिल किए। प्रधानमंत्री ने एमजीआर की छवि को केवल एक राजनीतिक नेता तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बताया कि एमजीआर ने तमिल संस्कृति और भाषा को व्यापक रूप से फैलाने में भी योगदान दियाजिससे तमिल साहित्यकला और सांस्कृतिक पहचान का वैश्विक स्तर पर सम्मान बढ़ा। उनके प्रयासों की वजह से तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत आज अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित महसूस कराती है।

    एमजीआर की जयंती पर प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि केवल उनके योगदान को याद करने तक सीमित नहीं हैबल्कि यह नागरिकों और युवा पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरित होने का संदेश भी देती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि एमजीआर का दृष्टिकोणउनकी सामाजिक सोच और तमिलनाडु के प्रति उनका समर्पण आज भी हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि ने एमजीआर की याद और उनके योगदान को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया। उनके जीवन की उपलब्धियां न केवल तमिलनाडुबल्कि पूरे भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

  • उत्तर भारत की लड़कियों को पढ़ाई से रोका जाता है, बस घर के काम करवाए जाते हैं, दयानिधि मारन का विवादित बयान

    उत्तर भारत की लड़कियों को पढ़ाई से रोका जाता है, बस घर के काम करवाए जाते हैं, दयानिधि मारन का विवादित बयान


    नई दिल्ली। डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने हाल ही में एक विवादास्पद बयान देकर उत्तर और दक्षिण भारत में महिला शिक्षा और सशक्तिकरण पर बहस छेड़ दी है। चेन्नई के कैद-ए-मिल्लत महिला विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मारन ने कहा कि उत्तर भारत में अक्सर लड़कियों को घर में रोका जाता है और उन्हें केवल घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है, जबकि उन्हें पढ़ाई या नौकरी के अवसर नहीं मिलते।

    मारन ने दक्षिण भारत के मॉडल की भी जमकर तारीफ की।

    उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाई और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और उनकी द्रविड़ियन सरकार की सराहना करते हुए बताया कि उनके नेतृत्व में लड़कियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने भी हिस्सा लिया और छात्राओं को लैपटॉप वितरित किए।

    मारन ने कहा, हम चाहते हैं कि हमारी लड़कियां पढ़ें, शिक्षित बनें और अपने भविष्य में सशक्त हों। वहीं, उत्तर भारत में लड़कियों को केवल घर के कामकाज तक सीमित रखा जाता है।

    उन्होंने तमिलनाडु को भारत का सबसे उन्नत प्रदेश बताते हुए द्रविड़ियन मॉडल की विशेष प्रशंसा की।

    आंकड़े बताते हैं अंतर
    2011 की जनगणना के अनुसार, तमिलनाडु में 7 साल से ऊपर की उम्र की महिला साक्षरता दर 73.44% है। वहीं उत्तर भारत के राज्यों में यह दर कम है:

    उत्तर प्रदेश – 57.18%

    हरियाणा – 65.94%

    राजस्थान – 52.12%

    हिमाचल प्रदेश – 75.93%

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतर सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक कारणों से उत्पन्न होता है।

    राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
    मारन के बयान पर उत्तर और दक्षिण भारत में तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं।

    कुछ लोगों ने इसे विभाजनकारी टिप्पणी कहा, जबकि अन्य ने महिला शिक्षा और समान अवसरों पर बहस को बढ़ावा देने की बात कही। सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बयान पर बहस तेज हो गई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि दयानिधि मारन का बयान केवल विवाद नहीं, बल्कि भारत में महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक समानता के मुद्दों पर नई बहस को जन्म देने वाला कदम है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इसकी प्रतिक्रियाएं अभी भी सामने आ रही हैं और यह मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन चुका है।

  • स्टेन स्वामी का मेमोरियल पर दिए बयान पर फ‍िर चर्चा में आए जस्‍ट‍िस स्‍वाम‍िनाथन ?

    स्टेन स्वामी का मेमोरियल पर दिए बयान पर फ‍िर चर्चा में आए जस्‍ट‍िस स्‍वाम‍िनाथन ?

    चैन्‍नई। तमिलनाडु में मंदिर में दीप जलाने के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और केंद्र में विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आए जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन ने एक और अहम फैसला सुनाया है। मद्रास हाई कोर्ट में जस्टिस स्वामीनाथन ने 1755 में अंग्रेजों के खिलाफ लड़े नथम कनवाई युद्ध की याद में स्मारक स्तूप बनाने का रास्ता साफ कर दिया है।
    यह फैसला 18वीं सदी में गुलामी के दौर में भारतीयों के प्रतिरोध की एक प्रेरक इतिहास को उदाहरण बनाता है।

    जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन की तरफ से यह फैसला नथम के तहसीलदार द्वारा इस स्मारक को अनुमति न दिए जाने के बाद आया है। तहसीलदार द्वारा अनुमति न मिलने के बाद एक याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में रिट दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वामीनाथन ने इस बात पर चिंता जताई कि आज की पीढ़ी को भारत के औपनिवेशिक शासन का इतिहास पता नहीं है, न ही उन्हें इस गुलामी से मुक्त कराने के लिए लड़ी गई लड़ाइयों के बारे में ही जानकारी है।

    जस्टिस ने कहा, “राज्य में अगर स्टैन स्वामी की याद में पत्थर का स्तंभ लगाया जा सकता है, उसके लिए अनुमति कि आवश्यकता नहीं पड़ी, तो निश्चित रूप से नथन कनवाई युद्ध की स्मृति में स्तूप स्थापित करने किए भी किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।”

    गौरतलब है कि अदालत ने जिन स्टेन स्वामी का जिक्र हुआ है वह जेसुइट पादरी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता थे। इनका नाम भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा से भी जोड़ा जाता है, 2021 में इनकी मौत के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याद में एक स्मृति स्तंभ बनाने की अनुमति दी थी।
    क्या हुआ था नथम कनवाई युद्ध में?

    इस स्मारक को बनाने के लिए याचिका लेकर आए वकील ने तथ्य रखा कि वर्ष 1755 में नथम कनवाई इलाके में मेलूर कल्लर समुदाय और ब्रिटिश सेना के बीच में एक भीषण युद्ध हुआ था। इस युद्ध में कल्लर समुदाय विजयी रहा था। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह युद्ध कोइलकुड़ी के तिरुमोगुर मंदिर की वजह से हुआ था। इस मंदिर से ब्रिटिश सैनिकों ने कर्नल अलेक्जेंडर हेरॉन के नेतृत्व में पीतल की मूर्तियां और अन्य कीमती सामान लूट लिया था। इसके बाद जुटे कल्लर समुदाय ने युद्ध के जरिए इन मूर्तियों को वापस पा लिया।