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  • संसद की दो समितियों का पुनर्गठन…. TMC को बड़ा झटका, गंवा दिए चेयरमैन के पद

    संसद की दो समितियों का पुनर्गठन…. TMC को बड़ा झटका, गंवा दिए चेयरमैन के पद


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) की विभाग संबंधी स्थायी समितियों का पुनर्गठन (Standing Committees Reconstitution) किया गया है. इसमें तृणमूल कांग्रेस (TMC) को दो अहम समितियों की चेयरपर्सनशिप गंवानी पड़ी है. दरअसल, राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन (C.P. Radhakrishnan) और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने शनिवार को समितियों का पुनर्गठन किया।

    कॉमर्स से जुड़ी संसदीय समिति के नए चेयरपर्सन बीजेपी के सुधांशु त्रिवेदी बनाए गए हैं. उन्होंने TMC की डोला सेन की जगह ली है. वहीं, केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स समिति की चेयरपर्सन काकोली घोष दस्तीदार बनी हैं. उन्होंने अपनी पूर्व पार्टी सहयोगी कीर्ति आजाद की जगह ली है।


    TMC में टूट के बाद बदली तस्वीर

    दरअसल, संसदीय समितियों में यह बदलाव TMC में हुई टूट के बाद हुआ है. TMC के 20 बागी लोकसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है. इन सांसदों का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं. इन सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी का दामन थामा है. साथ ही NDA को समर्थन देने की बात कही है।

    TMC ने राज्यसभा के तहत आने वाली आठ समितियों में से किसी की भी चेयरपर्सनशिप नहीं मिलने पर आपत्ति जताई है. पार्टी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने इसे लेकर राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन को पत्र लिखा है.

    डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि राज्यसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है. इसके बाद कांग्रेस और TMC का स्थान है. उन्होंने कहा कि TMC को 2024-25 और 2025-26 में समितियों की चेयरपर्सनशिप मिली थी. अब ये जिम्मेदारियां उससे ले ली गई हैं।

    ओ’ब्रायन ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. उन्होंने 2019 का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भी TMC को चेयरपर्सनशिप से वंचित किया गया था. बाद में इसमें सुधार हुआ था. अब फिर वही स्थिति बन गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि संसद को एक गहरा और अंधेरा कक्ष बनाया जा रहा है. यह सभी बातें उन्होंने अपने लेटर में लिखी हैं]

    पुनर्गठन के दौरान कई समितियों के चेयरपर्सन को बरकरार रखा गया है. DMK के तिरुचि शिवा को फिर से उद्योग समिति का चेयरपर्सन बनाया गया है. कनिमोझी को खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण समिति की जिम्मेदारी मिली है।

    कांग्रेस के शशि थरूर विदेश मामलों की समिति के चेयरपर्सन बने रहेंगे. कांग्रेस के चरणजीत सिंह चन्नी भी कृषि समिति के चेयरपर्सन पद पर बने रहेंगे. कांग्रेस के मुकुल वासनिक को शिक्षा, महिला, बाल और युवा मामलों की समिति की जिम्मेदारी फिर मिली है. समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव पहले की ही तरह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण समिति के चेयरपर्सन की जिम्मेदारी संभालेगें।


    BJP समेत सहयोगी दलों के नेताओं को भी जिम्मेदारी

    बीजेपी के राधा मोहन सिंह रक्षा समिति की कमान संभालेंगे. अनुराग ठाकुर को कोयला, खान और इस्पात समिति का चेयरपर्सन फिर बनाया गया है. बीजेपी के भरतृहरि महताब वित्त समिति के प्रमुख बने रहेंगे. राधा मोहन दास अग्रवाल गृह मामलों की समिति के चेयरपर्सन बने रहेंगे. निशिकांत दुबे को संचार और सूचना प्रौद्योगिकी समिति की जिम्मेदारी फिर मिली है।

    JD(U) के संजय कुमार झा को परिवहन, पर्यटन और संस्कृति समिति का चेयरपर्सन फिर बनाया गया है. शिवसेना के श्रीरंग बारणे ऊर्जा समिति के प्रमुख बने रहेंगे. NCP के सुनील तटकरे को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस समिति का चेयरपर्सन बनाया गया है।

    दरअसल, संसद में विभाग संबंधी कुल 24 स्थायी समितियां हैं. इनमें आठ समितियां राज्यसभा के सभापति के तहत काम करती हैं. बाकी 16 समितियां लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशन और नियंत्रण में रहती हैं।

    इन समितियों का कार्यकाल एक साल का होता है. इसके बाद इनका दोबारा गठन किया जाता है. इस बार हुए पुनर्गठन में कई नए चेयरपर्सन बनाए गए हैं, जबकि कई पुराने चेयरपर्सन को फिर जिम्मेदारी दी गई है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने TMC के चार फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने से किया इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने TMC के चार फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने से किया इनकार

    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट को चार डेबिट-फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इन चार खातों में करीब 804 करोड़ रुपये की राशि मौजूद है। TMC गुट ने पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत से इन खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से भी मना कर दिया, जिसमें खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार किया गया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल मामले के गुण-दोष में नहीं जा रहा है, क्योंकि मुख्य मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में लंबित है। पीठ ने हाई कोर्ट से मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है। अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव चिह्न पर रोक लगाए जाने के बाद इन बैंक खातों में मौजूद राशि पर अधिकार किसका है, यह महत्वपूर्ण सवाल अभी न्यायिक निर्णय के लिए लंबित है। ऐसे में शीर्ष अदालत ने इस स्तर पर खातों को संचालित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती।

    यह मामला पहले फ्रीज किए गए तीन HDFC बैंक खातों से अलग है। TMC गुट ने जिन चार बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी, उन्हें डेबिट लेनदेन के लिए फ्रीज किया गया था। पार्टी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए इन खातों के संचालन की अनुमति मांगी थी। TMC गुट की ओर से कहा गया था कि खातों पर रोक के कारण पार्टी के कामकाज पर असर पड़ रहा है और इसलिए इन्हें संचालित करने की अनुमति दी जानी चाहिए। हालांकि, इस मांग पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया है।

    इससे पहले 27 अगस्त को कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले TMC गुट को करीब 804 करोड़ रुपये वाले इन चार बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया। शीर्ष अदालत ने अब हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। साथ ही लंबित मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया है। इस दौरान अदालत ने खातों में मौजूद राशि पर अधिकार को लेकर उठे सवाल को भी महत्वपूर्ण माना है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद चारों फ्रीज बैंक खातों को संचालित करने की मांग पर फिलहाल राहत नहीं मिली है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले के मूल विवाद पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। अदालत के अनुसार, खातों में मौजूद धन पर अधिकार किसका है, यह सवाल अभी लंबित है और संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के जरिए तय किया जाना बाकी है। 1 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केवल हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार किया और मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने का अनुरोध किया।

  • ‘अरे! कम से कम एक साल का समय दीजिए’; TMC के चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का तंज

    ‘अरे! कम से कम एक साल का समय दीजिए’; TMC के चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का तंज


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को समयसीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया है। इस आदेश पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने तंज कसा है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने व्यंग्य करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले में कम से कम एक साल का समय दिया जाना चाहिए था।

    दरअसल, TMC के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था के तहत मूल पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए।

    सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते में दलीलें पूरी करने को कहा

    सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दोनों गुटों को चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दलीलें और जरूरी दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। इसके बाद चुनाव आयोग को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के तीन महीने के भीतर विवाद पर फैसला करने का निर्देश दिया गया है। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए प्रभावी तौर पर करीब चार महीने की समयसीमा तय हुई है।

    पीठ ने कहा कि दोनों पक्ष चार सप्ताह के भीतर अपने हलफनामे, अतिरिक्त हलफनामे और अन्य जरूरी सामग्री रिकॉर्ड पर रखें। इसके बाद चुनाव आयोग मामले पर निर्णय लेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई असाधारण कठिनाई सामने आती है तो आयोग दोबारा अदालत का रुख कर सकता है।

    चुनाव आयोग ने मांगा था छह महीने का समय

    सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि ऐसे विवादों में बड़ी संख्या में दस्तावेज और हलफनामे जमा होते हैं, जिनकी जांच में समय लगता है। आयोग की ओर से मामले का फैसला करने के लिए छह महीने का समय मांगा गया था।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने की मांग स्वीकार नहीं की। पीठ ने तीन महीने की अवधि को पर्याप्त माना।

    क्या है पूरा विवाद?

    TMC में संगठनात्मक विवाद के बाद दो गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने विवाद का अंतिम निपटारा होने तक दोनों गुटों को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चिह्न के इस्तेमाल से रोकते हुए अंतरिम तौर पर अलग-अलग नाम और प्रतीक दिए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश इसी विवाद के अंतिम निपटारे की समयसीमा से जुड़ा है। अब दोनों पक्षों को चार सप्ताह में चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष पूरा करना होगा और उसके बाद आयोग को तीन महीने के भीतर अपना फैसला देना होगा।

  • ममता बनर्जी की पार्टी में बड़ी टूट, 100 से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल, उपचुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

    ममता बनर्जी की पार्टी में बड़ी टूट, 100 से ज्यादा नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल, उपचुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लिए उपचुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मालदा के महीष बाथानी क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े 100 से अधिक नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए। इनमें 13 पंचायत सदस्य, एक पंचायत समिति सदस्य, पार्टी के क्षेत्रीय अध्यक्ष, ब्लॉक उपाध्यक्ष और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल बताए गए हैं।

    यह दल-बदल ऐसे समय हुआ है जब पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं। महीष बाथानी क्षेत्र में रविवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में तृणमूल समर्थकों ने कांग्रेस का दामन थामा। इस दौरान कांग्रेस के जिला और प्रदेश स्तर के नेता तथा एक पूर्व विधायक भी मौजूद रहे।

    महीष बाथानी क्षेत्र को पहले कांग्रेस का मजबूत इलाका माना जाता था। हालांकि, ममता बनर्जी के राजनीतिक प्रभाव के बढ़ने के बाद यहां तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव मजबूत हुआ। अब बड़ी संख्या में तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं के कांग्रेस में जाने से क्षेत्र में राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    तृणमूल कांग्रेस छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले शराफत अली ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए कांग्रेस के साथ आना जरूरी है। उन्होंने क्षेत्रीय दल के तौर पर तृणमूल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कांग्रेस के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ संघर्ष करने की बात कही।

    पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर उपचुनाव होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के बाद खाली हुई है। दूसरी ओर रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के हुमायूं कबीर के नौदा सीट बरकरार रखने के कारण खाली हुई। रेजीनगर से उनके बेटे चुनाव मैदान में हैं।

    ममता बनर्जी के गुट ने रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, नंदीग्राम को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रही हैं। ममता बनर्जी के गुट की ओर से यह सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने की पेशकश किए जाने की बात सामने आई थी, जबकि रेजीनगर में समर्थन मांगे जाने का भी जिक्र हुआ। कांग्रेस ने दोनों सीटों पर समर्थन देने की मांग को स्वीकार नहीं किया।

    नंदीग्राम सीट पर ममता गुट के उम्मीदवार के तौर पर नामित संचिता प्रधान डे ने नाम वापस ले लिया है। इसके चलते इस सीट पर ममता गुट के पास फिलहाल कोई उम्मीदवार नहीं है।

    इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी मामला चल रहा है। चुनाव आयोग ने तृणमूल नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को फ्रीज किया हुआ है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को अंतिम फैसला लेने के लिए समयसीमा तय की है।

    अदालत ने संबंधित पक्षों को हलफनामे और अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर फैसला लेने को कहा गया है। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से समय लगने की दलील दी गई, जिस पर अदालत ने निर्धारित अवधि में फैसला लेने को कहा। अदालत ने इस प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद लेने का सुझाव भी दिया है।

  • TMC विधायक कुणाल घोष की कार पर हुगली में हमला, अंडे फेंके और शीशा तोड़ा; चार महीने में तीसरी घटना

    TMC विधायक कुणाल घोष की कार पर हुगली में हमला, अंडे फेंके और शीशा तोड़ा; चार महीने में तीसरी घटना

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में शनिवार को TMC विधायक कुणाल घोष की कार को भीड़ ने घेर लिया। कुणाल घोष श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की रैली में शामिल होने के लिए जा रहे थे। उत्तरपाड़ा में उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेरकर अंडे फेंके गए। हमले के दौरान कार का पीछे का शीशा भी टूट गया।

    घटना के सामने आए वीडियो में कुणाल घोष ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। कार की पिछली सीट पर भी कुछ लोग मौजूद थे। वीडियो में भीड़ की ओर से विरोध करते हुए ‘गो बैक’ के नारे लगाए जाने की बात सामने आई है। कुछ दृश्यों में कुणाल घोष अंडे फेंकने वाले लोगों के सामने हाथ जोड़ते हुए भी दिखाई दिए।

    हमले के बाद कुणाल घोष ने घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे जंगलराज बताते हुए कहा कि उनकी कार पर पत्थर और अंडे फेंके गए तथा रास्ता रोक दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। घोष के मुताबिक, वह कोलकाता लौट रहे हैं और लालबाजार या भवानी भवन जाकर शिकायत दर्ज कराएंगे।

    TMC नेताओं ने इस घटना के पीछे BJP के शामिल होने का आरोप लगाया है। पार्टी नेता असित मजूमदार ने कहा कि यह आम लोगों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पहले से सुनियोजित हमला था। वहीं उत्तरपाड़ा से BJP विधायक दीपांजन चक्रवर्ती ने घटना को लोगों का गुस्सा बताया।

    कुणाल घोष पर पिछले कुछ महीनों में विरोध और हमले की अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। 15 जून को कोलकाता के कालीघाट में ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान उन पर अंडा फेंका गया था। शिकायत के बाद पुलिस ने चंदन सिंह और रवि कोयल को गिरफ्तार किया था। बाद में दोनों को जमानत मिल गई थी।

    इसके अलावा अगस्त में कोलकाता के गरपार इलाके में कुणाल घोष के घर, क्लब और पार्टी ऑफिस में तोड़फोड़ का आरोप लगा था। उस समय वह घर पर मौजूद नहीं थे। घोष ने दावा किया था कि बाहर से लोगों को बुलाकर उन्हें निशाना बनाया गया और पार्टी ऑफिस के बाहर लगे ममता बनर्जी तथा उनके पोस्टर और बैनर फाड़े गए।

    पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ विरोध की कई घटनाओं का भी जिक्र सामने आया है। 28 मई को नॉर्थ 24 परगना में TMC सांसद सौगत रॉय की कार पर अंडे फेंके जाने और नारेबाजी की बात कही गई। 30 मई को सोनारपुर में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अंडे, पत्थर और जूते फेंके जाने का आरोप लगा था। सुरक्षाकर्मियों को उन्हें हेलमेट पहनाकर वहां से निकालना पड़ा था।

    6 जून को मदन मित्रा के काफिले पर अंडे फेंके जाने की घटना सामने आई। इसके बाद युवा नेता सौमित्र बनर्जी और पूर्व मंत्री उदयन गुहा के खिलाफ भी अंडे और जूते फेंके जाने की घटनाएं बताई गईं। 1 जुलाई को कृष्णनगर में TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर अंडे, सब्जियां और पत्थर फेंके जाने का आरोप लगा।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कुणाल घोष की ओर से ममता बनर्जी के सुरक्षा घेरे के बावजूद विरोध प्रदर्शन होने पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं मई 2026 में अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा Z+ से घटाकर Z किए जाने और कुणाल घोष की अतिरिक्त सुरक्षा को विधायक स्तर तक सीमित किए जाने की जानकारी दी गई है।

  • TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से अंतिम फैसले की समयसीमा बताने को कहा

    TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से अंतिम फैसले की समयसीमा बताने को कहा

    नई दिल्ली ।तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि वह दोनों गुटों के बीच चल रहे विवाद पर अंतिम फैसला लेने में कितना समय लेगा। अदालत ने विवाद का जल्द निपटारा किए जाने की जरूरत पर जोर दिया है।

    यह मामला ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है। उन्होंने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है।

    चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अंतरिम व्यवस्था के तहत अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है।

    सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने चुनाव आयोग से यह बताने को कहा है कि विवाद पर अंतिम निर्णय लेने के लिए उसे कितना समय चाहिए। अदालत में यह भी चर्चा हुई कि मामले की सुनवाई को तेज तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है, ताकि दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों पर जल्द निर्णय लिया जा सके।

    ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव को रोकने की मांग नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि पार्टी को उसके मूल नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

    सिब्बल ने इस विवाद को पार्टी की पहचान और अस्तित्व से जुड़ा विषय बताया। उनकी ओर से चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर भी सवाल उठाए गए और कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नाम और चिह्न फ्रीज किए जाने से संबंधित पक्ष के सामने प्रभावी कानूनी उपाय का सवाल पैदा होता है।

    विवाद की पृष्ठभूमि में तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो गुटों के बीच पार्टी के नाम, संगठनात्मक नियंत्रण और चुनाव चिह्न को लेकर दावे शामिल हैं। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फिलहाल मूल नाम और चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए वैकल्पिक नाम और चिह्न दिए हैं।

    आगामी उपचुनावों को देखते हुए यह विवाद महत्वपूर्ण हो गया है। दोनों गुटों के उम्मीदवारों को फिलहाल अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के तहत चुनाव प्रक्रिया में आगे बढ़ना होगा। ऐसे में अंतिम फैसला कब आता है, इस पर दोनों पक्षों की नजर बनी हुई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम निर्णय के लिए समयसीमा बताने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। उस सुनवाई में आयोग की ओर से विवाद के निपटारे में लगने वाले संभावित समय के बारे में अदालत को जानकारी दी जाएगी।

    फिलहाल TMC का मूल नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न अंतरिम रूप से फ्रीज है। अंतिम फैसला आने तक दोनों गुटों के लिए आवंटित वैकल्पिक नाम और चिह्न ही चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जाएंगे।

  • बंगाल: CID का दावा- जमीन घोटाले के 7 करोड़ TMC के खाते में आए…. अभिषेक बनर्जी के PA ने उगले राज

    बंगाल: CID का दावा- जमीन घोटाले के 7 करोड़ TMC के खाते में आए…. अभिषेक बनर्जी के PA ने उगले राज


    कोलकाता।
    ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हुए साल्बोनी जमीन घोटाले (Salboni land scam) में अब अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) और तृणमूल यूथ कांग्रेस का नाम भी शामिल हो गया है। इस मामले में आरोपियों से पूछताछ कर रही सीआईडी ने कोर्ट को बताया था कि जमीन घोटाले से मिली रकम तृणमूल के खातों में जमा की गई थी। एजेंसी का दावा है कि डायमंड हार्बर से सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कहने पर ही ये पैसे टीएमसी के खाते में डाले गए। सीआईडी का दावा है कि अभिषेक के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय ने पूछताछ के दौरान यह जानकारी दी है।

    आपको बता दें कि इस मामले में सुमित को तृणमूल के पूर्व MLA सुजय हाजरा और कई अन्य लोगों के साथ पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। सुमित को शनिवार को मिदनापुर कोर्ट में पेश किया गया।


    बेच दी गई सरकारी जमीन

    सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी की ओर से कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों से पता चला कि पूछताछ के दौरान सुमित ने बताया कि अभिषेक के कहने पर सांसद के ट्रेजरर टी. घोष नाम के एक व्यक्ति ने उसे तृणमूल कांग्रेस पार्टी फंड में जमा करने के लिए पैसे दिए थे। सुमित ने दावा किया कि उसने वह पैसा बैंक में जमा कर दिया था। उसने कहा कि उसे जमीन घोटाले से कोई पैसा नहीं मिला। आपको बता दें कि इस मामले में फर्जी कागजात का इस्तेमाल करके सरकारी जमीन बेची गई थी।

    इस महीने की शुरुआत में, तृणमूल के पूर्व MLA सुजय हाजरा के खिलाफ दायर चार्जशीट में CID ने एक पब्लिक सेक्टर बैंक अकाउंट नंबर का जिक्र किया और कोर्ट को बताया कि सुमित ने 2018 और 2021 के बीच उस खाते में किश्तों में लगभग 7 करोड़ जमा किए थे। CID ने चार्जशीट के साथ इससे जुड़े जरूरी दस्तावेज भी कोर्ट में जमा किए। जांच में पता चला कि कोलकाता की हरीश मुखर्जी रोड ब्रांच में मौजूद वह खाता पश्चिम बंगाल तृणमूल यूथ कांग्रेस के नाम पर रजिस्टर्ड था। सुमित ने उस खाते में इतनी बड़ी रकम क्यों जमा की? शनिवार को कोर्ट में इस बारे में पूछे जाने पर सुमित ने दावा किया कि उसने सांसद अभिषेक बनर्जी के कहने पर पार्टी फंड में पैसे जमा किए थे।


    अभिषेक बनर्जी से भी हो सकती है पूछताछ

    CID अधिकारियों का दावा है कि साल्बोनी में जमीन का फ्रॉड 2018 और 2021 के बीच हुआ था। चार्जशीट में CID ने अभिषेक के बॉडीगार्ड और सुजय के ड्राइवर के बयानों के आधार पर कहा है कि इन गवाहों ने सुजय और सुमित के बीच पैसों के लेन-देन को देखा था। CID का कहना है कि सुमित का अपना कोई ऑफिस नहीं है। वह अभिषेक बनर्जी के दफ्तर में ही रहता था। सुमित ने अपने बयान में सात करोड़ रुपये के लेन-देन के लिए अभिषेक बनर्जी को ही जिम्मेदार ठहराया है। CID अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर उसका बयान सही साबित होता है तो पैसे के स्रोत का पता लगाने के लिए अभिषेक बनर्जी से भी इस मामले में पूछताछ की जा सकती है।

  • ममता बनर्जी ने कांग्रेस से मांगी चुनावी मदद, नंदीग्राम छोड़ने की पेशकश के बावजूद दोनों सीटों पर गठबंधन से इनकार

    ममता बनर्जी ने कांग्रेस से मांगी चुनावी मदद, नंदीग्राम छोड़ने की पेशकश के बावजूद दोनों सीटों पर गठबंधन से इनकार

    नई दिल्ली । ममता बनर्जी के सामने पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा उपचुनावों को लेकर चुनौती बढ़ती दिखाई दे रही है। खबरों के अनुसार, उन्होंने नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की कोशिश की थी। इसके तहत नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने और रेजीनगर में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन देने की पेशकश किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, टीएमसी या कांग्रेस की ओर से इस बातचीत को लेकर अब तक आधिकारिक रूप से कोई पुष्टि नहीं की गई है।

    रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार शाम ममता बनर्जी ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से बातचीत की थी। बताया गया है कि बातचीत के दौरान उन्होंने उपचुनाव में साथ आने का प्रस्ताव रखा। ममता बनर्जी की ओर से नंदीग्राम में कांग्रेस के साथ चुनाव लड़ने और रेजीनगर सीट पर टीएमसी उम्मीदवार के लिए कांग्रेस का समर्थन मांगे जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही नंदीग्राम से टीएमसी उम्मीदवार का नाम वापस लेने की पेशकश किए जाने का भी दावा किया गया है।

    हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया। सामने आई जानकारी के मुताबिक, पार्टी ने टीएमसी के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार किया है। कांग्रेस की ओर से कथित तौर पर कहा गया है कि यदि टीएमसी गठबंधन चाहती है तो उसे नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर कांग्रेस का समर्थन करना होगा। टीएमसी शासन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कथित अत्याचारों को भी इस फैसले की वजह बताया गया है।

    ममता बनर्जी की ओर से कांग्रेस से संपर्क किए जाने की खबर ऐसे समय आई है, जब दोनों दल उपचुनाव में अलग-अलग मैदान में उतर रहे हैं। कांग्रेस ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल कफी को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, टीएमसी ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया है।

    नंदीग्राम सीट ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में वह इसी सीट से चुनाव हार गई थीं। आगामी उपचुनाव को लेकर ऐसी अटकलें भी थीं कि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से मैदान में उतर सकती हैं, लेकिन टीएमसी ने यहां संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया है। उनकी उम्मीदवारी को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं और उनके नाम को वर्ष 2014 के शिक्षक भर्ती घोटाले से जोड़कर चर्चा की जा रही है।

    इस बीच टीएमसी के भीतर बगावत का असर भी दोनों सीटों पर दिखाई दे रहा है। ऋताब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट ने नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउज्जमां शेख को उम्मीदवार बनाया गया है। यह गुट टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है।

    नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सीट छोड़ने के कारण उपचुनाव की स्थिति बनी है। इसी बीच टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी निर्वाचन आयोग में मामला चल रहा है। बताया जा रहा है कि आयोग 17 सितंबर से पहले इस पर फैसला ले सकता है।

    विधानसभा चुनाव में अविभाजित टीएमसी ने 80 सीटें जीती थीं। बाद में 60 से अधिक विधायकों के ऋताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के साथ चले जाने का दावा किया गया। ऐसे में उपचुनाव से पहले कांग्रेस से गठबंधन की कथित कोशिश और बागी गुट की सक्रियता ने ममता बनर्जी के सामने राजनीतिक चुनौती को और बढ़ा दिया है।

  • टीएमसी के 17 सांसद भाजपा में जा सकते हैं, यूसुफ पठान समेत तीन ने NDA को बाहर से समर्थन देने का किया ऐलान

    टीएमसी के 17 सांसद भाजपा में जा सकते हैं, यूसुफ पठान समेत तीन ने NDA को बाहर से समर्थन देने का किया ऐलान

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। टीएमसी छोड़कर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI में शामिल हुए बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया है कि गुट के 17 सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। उनके इस दावे के बाद यूसुफ पठान, सायोनी घोष समेत कई नेताओं को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, बागी गुट के एक अन्य नेता ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि भाजपा में शामिल होने की कोई योजना नहीं है।

    बसुनिया के अनुसार, 17 सांसद भाजपा में जाने की तैयारी कर रहे हैं और इस संबंध में प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा चुका है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दल बदल की प्रक्रिया दुर्गा पूजा के बाद हो सकती है। इससे पहले टीएमसी के 20 सांसद अलग होकर NCPI में शामिल हुए थे और उन्होंने NDA को समर्थन देने की घोषणा की थी।

    बागी गुट में शामिल अबू ताहेर खान ने बसुनिया के दावे पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि बसुनिया को पूरे गुट की ओर से बयान देने का अधिकार नहीं है। खान ने स्पष्ट किया कि वे भाजपा में नहीं जाएंगे और न ही NDA में शामिल होंगे। उन्होंने जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान और बहरामपुर के सांसद यूसुफ पठान का भी नाम लिया। उनके मुताबिक तीनों सांसद NDA को बाहर से समर्थन देंगे, लेकिन भाजपा या NDA का हिस्सा नहीं बनेंगे।

    अबू ताहेर खान ने यह भी स्पष्ट किया कि यूसुफ पठान, खलीलुर रहमान और उनके जैसे नेता भाजपा या NDA की बैठकों में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से विकास से जुड़े मुद्दों पर बुलाई जाने वाली बैठकों में शामिल होने पर उन्होंने सहमति जताई है।

    सायोनी घोष को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। बसुनिया ने 17 सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। ऐसे में यह तय नहीं है कि घोष उन सांसदों में शामिल हैं या नहीं। कुल 20 सांसदों के टीएमसी से अलग होने की बात सामने आई है, जिनमें से तीन ने भाजपा में शामिल नहीं होने और NDA को बाहर से समर्थन देने की बात कही है। इसलिए बाकी सांसदों को लेकर अलग-अलग दावे और अटकलें जारी हैं।

    यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में कोलकाता नगर निगम और हावड़ा नगर निगम समेत स्थानीय चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वह इन चुनावों में अपने दम पर मैदान में उतरेगी। पार्टी के सत्ता में आने के बाद राज्य में पहली बार होने वाले इन चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं।

    भाजपा की ओर से भी फिलहाल बागी सांसदों को पार्टी में शामिल करने की किसी तत्काल योजना से इनकार किया गया है। पार्टी प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार टीएमसी या NCPI से कोई भी व्यक्ति भाजपा में शामिल नहीं हो रहा है। उन्होंने टीएमसी शासन के दौरान इन नेताओं और सांसदों की भूमिका पर भी सवाल उठाया।

    इसी बीच आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों के उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। टीएमसी में सांसदों के अलावा विधायक स्तर पर भी टूट की चर्चा है। ऋताब्रत बनर्जी गुट के साथ 60 से अधिक विधायकों के होने का दावा किया जा रहा है। पार्टी ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में सांसदों के संभावित दल बदल को लेकर चल रही अटकलों के बीच आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • TMC Symbol Row: उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनीं, 16 सितंबर से पहले निर्णय की तैयारी

    TMC Symbol Row: उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की दलीलें सुनीं, 16 सितंबर से पहले निर्णय की तैयारी

    नई दिल्ली ।तृणमूल कांग्रेस के नाम, लोगो और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी गुट और बागी गुट के बीच चल रही खींचतान के बीच चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के प्रतिनिधिमंडलों से चर्चा की। आयोग ने दोनों गुटों के पांच-पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली बुलाया था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े दावों पर निर्णय ले सकता है।

    दोनों प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक राष्ट्रीय राजधानी स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट में हुई। बागी गुट के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई ऋतब्रत बनर्जी ने की। इस गुट के साथ बैठक का समय शनिवार सुबह 11 बजे निर्धारित किया गया था। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के प्रतिनिधिमंडल के साथ दोपहर 12 बजे चर्चा का समय तय किया गया।

    चुनाव आयोग के सचिव अश्वनी कुमार मोहल ने 9 सितंबर को दोनों गुटों को बैठक के लिए संदेश भेजा था। बैठक के लिए भेजे गए संदेश में मुलाकात के एजेंडे का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था। हालांकि, बैठक का मुख्य विषय दोनों पक्षों के पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर किए जा रहे दावों से संबंधित बताया गया।

    आयोग दोनों गुटों की ओर से प्रस्तुत किए गए तर्कों को सुनने के बाद इस संबंध में आगे का निर्णय ले सकता है। पार्टी के नाम, लोगो और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के दावों के बीच चुनाव आयोग की यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है।

    पश्चिम बंगाल की दो विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजिनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। नंदीग्राम पूर्वी मिदनापुर जिले में स्थित है। इन दोनों सीटों पर उपचुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो चुकी है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर निर्धारित है।

    ऐसे में चुनाव आयोग को उपचुनाव की अंतिम नामांकन तारीख से पहले पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े मामले पर फैसला लेना होगा। दोनों गुटों के दावों को लेकर आयोग की ओर से होने वाला निर्णय आगामी चुनाव प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

    उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी आगे बढ़ रही हैं। कांग्रेस ने नंदीग्राम और रेजिनगर दोनों विधानसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। वहीं हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी ने रेजिनगर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।

    टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के बीच जारी विवाद के बीच आयोग की ओर से प्रतिनिधिमंडलों को अलग-अलग समय पर बुलाकर उनकी बात सुनी गई। अब दोनों पक्षों के दावों और उनके पक्ष में दिए गए तर्कों पर विचार करने के बाद चुनाव आयोग को अपना निर्णय लेना है।

    इस पूरे मामले में 16 सितंबर की नामांकन अंतिम तारीख महत्वपूर्ण है। इसके बाद 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इसलिए चुनाव आयोग के फैसले का सीधा संबंध आगामी उपचुनाव की प्रक्रिया से भी जुड़ा हुआ है।