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  • West Bengal Election 2026: क्या चौथी बार सत्ता में लौटेंगी ममता बनर्जी या BJP बदलेगी 15 साल का खेल?

    West Bengal Election 2026: क्या चौथी बार सत्ता में लौटेंगी ममता बनर्जी या BJP बदलेगी 15 साल का खेल?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी माहौल तेज हो गया है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं और इस बार उनकी नजर लगातार चौथी जीत पर है। अगर वह इस चुनाव में जीत हासिल करती हैं, तो वह राज्य की पहली ऐसी नेता बन जाएंगी जो लगातार चार बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाएंगी।

    15 साल की सत्ता और नया चुनावी इम्तिहान
    ममता बनर्जी ने साल 2011 में 34 साल पुराने वामपंथी शासन को खत्म कर सत्ता संभाली थी। इसके बाद 2016 और 2021 में भी उनकी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने जीत दर्ज की। अब 2026 का चुनाव उनके लिए एक बड़ा इम्तिहान माना जा रहा है, क्योंकि इतने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद जनता के बीच असंतोष भी एक बड़ा फैक्टर बन सकता है। चुनाव आयोग के मुताबिक इस बार मतदान दो चरणों में होगा: 23 अप्रैल 29 अप्रैल जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। पिछली बार की तुलना में इस बार कम चरणों में चुनाव कराए जा रहे हैं। लगातार 15 साल से सत्ता में रहने के कारण एंटी-इनकम्बेंसी एक बड़ी चुनौती बन सकती है। लोगों के बीच कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और विकास जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    वोटर लिस्ट विवाद
    इस चुनाव में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। करीब 63 लाख वोटरों के नाम हटाए गए लाखों नाम अभी भी जांच में यह मुद्दा चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। बीते कुछ सालों में TMC सरकार पर कई घोटालों के आरोप लगे हैं, जैसे शिक्षक भर्ती घोटाला, राशन (PDS) घोटाला, तस्करी से जुड़े मामले इन मुद्दों पर विपक्ष लगातार हमलावर है। राज्य में वक्फ कानून और अन्य मुद्दों को लेकर भी विवाद बढ़ा है, जिससे सामाजिक और राजनीतिक माहौल प्रभावित हुआ है।

    BJP की बढ़ती चुनौती
    इस बार BJP ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में हैृ। 2021 के मुकाबले पार्टी इस बार ज्यादा आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरी है। चुनाव से पहले ममता सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं लक्ष्मी भंडार योजना की राशि बढ़ाई बेरोजगार युवाओं के लिए आर्थिक मदद सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) पुजारियों और मुअज्जिनों के मानदेय में बढ़ोतरी इन योजनाओं के जरिए ममता बनर्जी अलग-अलग वर्गों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही हैं।

    क्या फिर बनेगी सरकार?
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी अब भी राज्य की सबसे मजबूत नेता हैं, लेकिन इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा कठिन है। शहरी इलाकों में नाराजगी और भ्रष्टाचार के आरोप चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। बंगाल चुनाव 2026 सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक भविष्य की बड़ी परीक्षा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह चौथी बार जीतकर इतिहास रचती हैं या इस बार बंगाल की सत्ता में बदलाव आता है।

  • शिवराज सिंह चौहान का तीखा हमला: ममता बनर्जी पर निशाना, कहा– ‘प्रधानमंत्री’ शब्द से रोकी केंद्र की योजनाएं, हम बदलेंगे किसानों का भाग्य

    शिवराज सिंह चौहान का तीखा हमला: ममता बनर्जी पर निशाना, कहा– ‘प्रधानमंत्री’ शब्द से रोकी केंद्र की योजनाएं, हम बदलेंगे किसानों का भाग्य


    नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखे तेवर अपनाए। प्रश्नकाल के दौरान शिवराज ने कहा कि बंगाल की सरकार को जनहित से ज्यादा राजनीति प्यारी है। उन्होंने कहा, “विपक्ष तख्तियां लेकर हाय-हाय करता रहे, लेकिन दुनिया भारत की कृषि नीतियों की तारीफ कर रही है। जलने वाले जला करें, हम किसानों का भाग्य बदलकर रहेंगे।”

    नाम की राजनीति: ‘प्रधानमंत्री’ शब्द पर आपत्ति
    शिवराज सिंह ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री कृषि धन धान्य योजना और अन्य महत्वपूर्ण केंद्र योजनाएं केवल इसलिए लागू नहीं की गईं क्योंकि इनके नाम में ‘प्रधानमंत्री’ जुड़ा हुआ है। उन्होंने इसे किसानों के साथ “खुला अन्याय और पाप” करार दिया। उनका कहना था कि यह नीतियों को रोककर आम जनता और किसानों के हक पर हमला है।

    वोट बैंक बनाम किसानों की भलाई
    केंद्रीय मंत्री ने सदन में यह भी कहा कि टीएमसी सरकार को मिट्टी की उर्वरता, किसानों की आय और जनता के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने बंगाल में प्राकृतिक खेती मिशन के ठंडे बस्ते में डालने को इसका प्रमाण बताया। शिवराज ने कहा कि ममता सरकार केवल अपने वोट बैंक को साधने में लगी है और किसानों के हित की परवाह नहीं करती।

    चीन को पीछे छोड़ भारत का रिकॉर्ड
    शिवराज सिंह चौहान ने गर्व से बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पछाड़ दिया है। देश का खाद्यान्न उत्पादन 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “एक समय था जब हम अनाज मांगते थे, आज हमारी फसलें इतनी हैं कि भंडार भर गए हैं। यह भाजपा सरकार की कृषि नीतियों की सफलता है।”

    शिवराज का यह बयान राज्य में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है। विपक्ष ने केंद्र की योजनाओं को रोकने का आरोप ममता बनर्जी पर लगाया है, जबकि भाजपा इसे किसानों की भलाई और विकास की सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

  • पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले TMC और EC में बढ़ा टकराव, धरने पर बैठी CM ममता…टेंट में गुजारी रात

    पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले TMC और EC में बढ़ा टकराव, धरने पर बैठी CM ममता…टेंट में गुजारी रात


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) ने शुक्रवार को एसआईआर (SIR) के बाद राज्य की मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के विरोध में सेंट्रल कोलकाता में धरना शुरू कर दिया. जिससे विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) से कुछ सप्ताह पहले टीएमसी और चुनाव आयोग के बीच टकराव और बढ़ गया है. उन्होंने नाटकीय रूप से सड़क की राजनीति में वापसी की है, इस स्ट्रीट पॉलिटिक्स के दम पर ही ममता ने राजनीति में अपनी पहचान बनाई थी।

    धरना शुरू करते हुए, बनर्जी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर ‘बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने’ की साजिश रचने का आरोप लगाया। टीएमसी सुप्रीमो ने विरोध प्रदर्शन की शुरुआत में कहा, ‘मैं बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के बीजेपी-चुनाव आयोग के षड्यंत्र का पर्दाफाश करूंगी।

    पहले दिन का धरना दोपहर करीब 2.15 बजे शुरू हुआ था. शुक्रवार रात को भी ममता बनर्जी टेंट में ही रहीं. उन्होंने बाकी नेताओं को घर भेज दिया था. प्रोटेस्ट शनिवार को दोबारा शुरू होगा। ममता के इस धरने की अपडेट्स देते हुए डेरेक ओ ब्रायन (TMC के राज्यसभा सांसद) ने लिखा, ‘ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रहे धरने का पहला दिन (शुक्रवार) खत्म हो गया है. हमारी नेता ने हम सभी को घर पर जाकर आराम करने के लिए कहा है. रात में, वह सेंट्रल कोलकाता में धरना स्थल पर सड़क पर एक टेंट में रहेंगी. दीदी तो दीदी हैं.’


    बंगाल SIR में कितने नाम कटे

    28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 63.66 लाख नाम, यानी मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत, हटा दिए गए हैं, जिससे मतदाता आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ा अधिक रह गया है. इसके अतिरिक्त, 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को ‘न्यायिक जांच के अधीन’ श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता का फैसला किया जाएगा.

    टीएमसी ने आरोप लगाया है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक रूप से प्रेरित है और इससे 1.2 करोड़ से अधिक मतदाता प्रभावित हो सकते हैं, इस आरोप को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है. धरने के दौरान बनर्जी ने दावा किया, ‘कई लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है, लेकिन वे जिंदा हैं. मैं उन्हें मंच पर लाऊंगी। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि विरोध प्रदर्शन कब तक चलेगा, जबकि यह चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के राज्य के प्रस्तावित दौरे से ठीक दो दिन पहले हो रहा है।


    ममता की जन-योद्धा वाली छवि

    कोलकाता के मेट्रो चैनल एरिया में हो रहा ये धरना ममता बनर्जी की आंदोलनकारी राजनीति के लिए गहरा राजनीतिक प्रतीक है. मुख्यमंत्री बनने से बहुत पहले, सेंट्रल कोलकाता के फुटपाथ वे मंच थे जहां उन्होंने तत्कालीन प्रभावशाली वाम मोर्चे के खिलाफ एक जन-योद्धा के रूप में अपनी छवि बनाई थी।

    फिर 4 दिसंबर, 2006 को उन्होंने टाटा मोटर्स परियोजना के लिए सिंगूर में कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में उसी स्थान पर 26 दिनों की भूख हड़ताल शुरू की, जिससे आंदोलन एक राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बन गया जिसने आखिरकार टीएमसी को 2011 के विधानसभा चुनावों में वाम मोर्चा को सत्ता से बेदखल करने में मदद की, जिससे उसका 34 साल का शासन समाप्त हो गया।

    मुख्यमंत्री बनने के बाद भी, बनर्जी समय-समय पर आंदोलन की राजनीति में लौटती रही हैं, विशेष रूप से फरवरी 2019 में, जब उन्होंने केंद्र पर संघवाद को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए धरना दिया था, जब सीबीआई ने शारदा चिट फंड जांच में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ करने की कोशिश की थी।

  • पश्चिम बंगाल में TMC की पकड़ मजबूत, BJP को 42% वोट शेयर के बावजूद बड़ा झटका?

    पश्चिम बंगाल में TMC की पकड़ मजबूत, BJP को 42% वोट शेयर के बावजूद बड़ा झटका?


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल गरम है और इसी बीच ताजे सर्वे ने राज्य की राजनीति का नया रुख सामने ला दिया है। सर्वे के अनुसार अगर आज लोकसभा चुनाव होते, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) 2024 के अपने प्रदर्शन को दोहरा सकती है और लगभग सभी सीटें बरकरार रख सकती है। हालांकि भाजपा के लिए भी एक अच्छी खबर है, क्योंकि सर्वे में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA का वोट शेयर 39% से बढ़कर 42% तक पहुंचने की संभावना दिखाई गई है। यह तीन प्रतिशत की बढ़त भाजपा के लिए सकारात्मक मानी जा रही है, लेकिन इस बढ़त के बावजूद बंगाल में बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन की तस्वीर अभी साफ नहीं दिखती।

    विशेष रूप से यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव सिर्फ दो महीने दूर हैं। ऐसे में यह सर्वे राज्य की जनता के मौजूदा राजनीतिक मूड का संकेत माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक चुनावी नतीजे कई कारकों पर निर्भर करते हैं। फिर भी, सर्वे यह साफ करता है कि बंगाल में अब मुकाबला पूरी तरह TMC और BJP के बीच द्विध्रुवीय होता जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी तेज हुआ है और यह राज्य अब साफ तौर पर TMC और BJP के बीच टकराव की दिशा में बढ़ रहा है। अगर पिछले सर्वे को देखा जाए तो फरवरी 2024 में TMC को 22 सीटें और BJP को 19 सीटें मिलने का अनुमान था। बाद में अगस्त 2024 में TMC के 32 और BJP के 8 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। अब ताजे सर्वे में भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है, लेकिन फिर भी TMC की पकड़ मजबूत दिखती है और ममता बनर्जी की छवि बंगाल में एक प्रमुख राजनीतिक धुरी बनी हुई है।

    सर्वे के मुताबिक, BJP के वोट शेयर में बढ़ोतरी के बावजूद वह बंगाल में कोई बड़ा उलटफेर करने की स्थिति में नहीं दिख रही। तृणमूल कांग्रेस की मजबूत सामाजिक और क्षेत्रीय जड़ों के कारण भद्रलोक और ग्रामीण इलाकों में उसकी पकड़ अभी भी टेढ़ी खाई बनी हुई है। वहीं BJP धीरे-धीरे अपना आधार बढ़ा रही है, खासकर कुछ खास इलाकों में जहां पार्टी का संगठन मजबूत हो रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि यदि चुनाव तक इसी तरह का जनाधार बना रहता है तो बंगाल में कमल का फूल खिलाने का भाजपा का सपना अधूरा रह सकता है। वहीं, ममता बनर्जी के लिए यह सर्वे एक राहत भरा संकेत है कि उनकी पार्टी के प्रति लोगों की विश्वास की लहर अभी भी कायम है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि भाजपा की बढ़ती ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण और वोट शेयर के बदलाव भविष्य में किसी भी मोड़ पर निर्णायक साबित हो सकते हैं।

    अगले कुछ हफ्तों में चुनावी प्रचार, घोषणापत्र, गठबंधन रणनीति और स्थानीय मुद्दों का प्रभाव नतीजों को बदल सकता है। फिलहाल सर्वे यह संकेत दे रहा है कि बंगाल में TMC का प्रभाव अभी भी मजबूत है और BJP को बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन के लिए अभी और मेहनत करनी होगी। ऐसे में बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य पर नजरें टिके हुए हैं, क्योंकि आने वाले चुनावी माहौल में हर छोटा-सा बदलाव भी बड़े नतीजे ला सकता है।

  • अमित मालवीय के खिलाफ FIR को लेकर सियासी घमासान TMC नेता की शिकायत पर जांच शुरू

    अमित मालवीय के खिलाफ FIR को लेकर सियासी घमासान TMC नेता की शिकायत पर जांच शुरू


    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी भाजपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी के आईटी सेल के राष्ट्रीय प्रभारी अमित मालवीय एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में आ गए हैं। पश्चिम बंगाल के नरेंद्रपुर थाने में उनके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप लगाया गया है कि उनके पोस्ट से राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और इससे देश की एकता और संप्रभुता को खतरा उत्पन्न हो सकता है। यह शिकायत अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस टीएमसी के राज्य महासचिव और प्रवक्ता तन्मय घोष की ओर से की गई है।

    टीएमसी नेता ने क्यों दर्ज कराई शिकायत

    तन्मय घोष ने अपनी शिकायत में दावा किया है कि अमित मालवीय ने 19 दिसंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जो पोस्ट साझा किया उसकी भाषा और संदर्भ बेहद आपत्तिजनक है। शिकायत के अनुसार यह पोस्ट लोगों को उकसाने वाला है और राज्य की शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। टीएमसी नेता का आरोप है कि पोस्ट के जरिए सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल सरकार सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाना बनाया गया है जिससे समाज में भय और अविश्वास का माहौल बन सकता है।

    कानूनी कार्रवाई की मांग

    शिकायत पत्र में तन्मय घोष ने पुलिस से मांग की है कि अमित मालवीय के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता समेत अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि इस तरह के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट समाज को बांटने का काम करते हैं और इन्हें नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकता है। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा नेता जानबूझकर संवेदनशील मुद्दों को उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।

    पुलिस ने क्या कहा जांच जारी
    नरेंद्रपुर थाना पुलिस के अनुसार उन्हें शिकायत प्राप्त हो चुकी है और उसकी पुष्टि भी कर ली गई है। फिलहाल इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस का कहना है कि संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट की सामग्री की गहन जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। प्रारंभिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला एफआईआर दर्ज करने योग्य है या नहीं।

    किस पोस्ट पर मचा विवाद

    विवादित पोस्ट में अमित मालवीय ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुई एक तोड़फोड़ की घटना का जिक्र किया था। उन्होंने दावा किया था कि इस्लामी भीड़ ने बंगाली कला और संस्कृति के ऐतिहासिक केंद्र छायानाट भवन को नुकसान पहुंचाया है। इसके साथ ही उन्होंने चरमपंथ पर चिंता जताते हुए पश्चिम बंगाल की मौजूदा स्थिति को गंभीर बताया और ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। इसी बयान को लेकर अब बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

  • TMC सांसद की सिगरेट पीते वीडियो ने मचाई हलचल BJP ने ममता बनर्जी से मांगा जवाब

    TMC सांसद की सिगरेट पीते वीडियो ने मचाई हलचल BJP ने ममता बनर्जी से मांगा जवाब


    नई दिल्ली । लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस TMC के सांसद कीर्ति आजाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है जिसमें वह सदन के अंदर ई-सिगरेट पीते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में कीर्ति आजाद कैमरे की ओर कई बार देख रहे हैं और फिर चुपके से अपना हाथ मुंह के पास ले जाते हैं जिससे यह संकेत मिलता है कि वह ई-सिगरेट की कश ले रहे हैं। हालांकि वीडियो में ई-सिगरेट या धुआं स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता।

    भाजपा ने इस वीडियो पर त्वरित प्रतिक्रिया दी है और ममता बनर्जी से सवाल किया है कि उनके सांसद ने सदन के अंदर इस तरह का व्यवहार क्यों किया। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने वीडियो को शेयर करते हुए कहा यह व्यक्ति मानो संसद के अंदर नियमों और कानूनों को नजरअंदाज करने में कोई शर्म महसूस नहीं करता। उन्होंने कहा सदन में इस तरह का व्यवहार बिल्कुल अस्वीकार्य है। ममता बनर्जी को इस पर जवाब देना चाहिए।

    इस वीडियो के वायरल होने के बाद भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखित शिकायत सौंपते हुए इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि कीर्ति आजाद लंबे समय से सदन में ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे हैं जो सदन के नियमों के खिलाफ है।

    यह घटना तब सामने आई जब पिछले हफ्ते लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान अनुराग ठाकुर ने एक TMC सांसद द्वारा ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाया था। हालांकि उन्होंने उस वक्त सांसद का नाम नहीं लिया था लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया कि वह कीर्ति आजाद की ओर इशारा कर रहे थे। भाजपा ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए कहा है कि संसद जैसे प्रतिष्ठित स्थल पर इस तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि लोकसभा अध्यक्ष इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं और ममता बनर्जी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।

  • मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित ‘बाबरी शैली’ मस्जिद पर सियासी हलचल, हुमायूं कबीर का बड़ा दावा-65 फुट से ऊंची होगी इमारत

    मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित ‘बाबरी शैली’ मस्जिद पर सियासी हलचल, हुमायूं कबीर का बड़ा दावा-65 फुट से ऊंची होगी इमारत


    नई दिल्ली / मुर्शिदाबाद /पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर धार्मिक और सियासी मुद्दों का मेल चर्चा का विषय बन गया है। तृणमूल कांग्रेस TMC से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद शैली की मस्जिद को लेकर कई अहम दावे किए हैं। उनका कहना है कि यह मस्जिद पहले से ज्यादा ऊंची चौड़ी और भव्य होगी जिसकी ऊंचाई 65 फुट से भी अधिक रखी जाएगी। कबीर के इन बयानों ने न केवल राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर नजरें टिक गई हैं।समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में हुमायूं कबीर ने कहा कि मस्जिद के निर्माण के लिए अब तक 5 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जुटाई जा चुकी है। इसके अलावा निर्माण सामग्री भी आ चुकी है जिसकी अनुमानित कीमत डेढ़ से दो करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जिस मॉडल पर यह मस्जिद बनाई जा रही है वह पहले की तुलना में अधिक ऊंचा और चौड़ा होगा ताकि इसे एक भव्य धार्मिक संरचना के रूप में विकसित किया जा सके।

    हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद में इस मस्जिद की नींव रखी थी। इसके बाद से ही राजनीतिक विवाद तेज हो गया। माना जा रहा है कि इस कदम से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नाराज हुईं जिसके बाद टीएमसी ने कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया। हालांकि पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। कबीर का कहना है कि उन्होंने यह कदम सामाजिक और धार्मिक भावना के तहत उठाया है न कि किसी राजनीतिक उकसावे के लिए।राजनीतिक भविष्य को लेकर हुमायूं कबीर ने यह भी ऐलान किया है कि वह 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी की घोषणा करेंगे। उनके अनुसार यह घोषणा दोपहर 12 से 1 बजे के बीच की जाएगी। माना जा रहा है कि नई पार्टी के जरिए कबीर राज्य की राजनीति में एक नया विकल्प पेश करने की कोशिश करेंगे खासकर अल्पसंख्यक समुदाय के मुद्दों को लेकर।

    इसी बीच सांसद असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन AIMIM की पश्चिम बंगाल इकाई ने हुमायूं कबीर के साथ संभावित गठबंधन के संकेत दिए हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी ने कहा कि कबीर से बातचीत चल रही है और आने वाले विधानसभा चुनावों में कुछ सीटों पर तालमेल की संभावना तलाशी जा रही है। सोलंकी के अनुसार कबीर अल्पसंख्यकों की आवाज के रूप में उभरे हैं और AIMIM उनके साथ राजनीतिक सहयोग पर विचार कर रही है।हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला AIMIM के राष्ट्रीय नेतृत्व यानी असदुद्दीन ओवैसी द्वारा लिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय स्तर पर AIMIM ने फिलहाल किसी भी औपचारिक गठबंधन से इनकार किया है जिससे सियासी तस्वीर और जटिल हो गई है।

    हुमायूं कबीर ने एसआईआर Special Intensive Revision जैसे मुद्दों पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि इसका मुर्शिदाबाद में कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उनका दावा है कि स्थानीय स्तर पर जनता उनके साथ है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक लाभ उन्हें मिलेगा।कुल मिलाकर बाबरी मस्जिद शैली की इस प्रस्तावित मस्जिद ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। धार्मिक भावनाओं राजनीतिक गठजोड़ और आगामी चुनावों के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और भी तूल पकड़ सकता है।

  • मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

    मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार में खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने हाल ही में कोलकाता में हुए लियोनेल मेसी के GOAT टूर कार्यक्रम से जुड़ी घटनाओं को लेकर इस्तीफा दे दिया। मेसी के कार्यक्रम में कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुई अराजकता और तोड़फोड़ के बाद बिस्वास पर भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस मुद्दे पर तनाव बढ़ने के बाद बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने खुद को खेल मंत्रालय की जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया।

    बिस्वास ने पत्र में कहा कि वे मेसी इवेंट की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। उनका यह कदम इस विवाद की गंभीरता को दर्शाता है और टीएमसी तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण संदेश भेजता है खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिस्वास के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है और अब खुद इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया है।

    इस विवाद के बाद राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल SIT का गठन किया है। SIT में चार वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को शामिल किया गया है। मुख्य सचिव मनोज पंत ने बताया कि एसआईटी की जांच में कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में बिधाननगर के पुलिस उपायुक्त अनीश सरकार को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही बंगाल के खेल सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और सॉल्ट लेक स्टेडियम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी के नंदन की सेवाएं वापस ले ली गई हैं।

    इस घटना के बाद टीएमसी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के विवाद या आलोचना से बचने के लिए पूरी तरह से पारदर्शी जांच करेगी। इस मामले में बिस्वास का इस्तीफा और जांच के आदेश इस बात का संकेत हैं कि ममता बनर्जी की सरकार आगामी चुनावों से पहले किसी भी तरह की अनावश्यक नकारात्मकता से बचना चाहती है। यह पूरा विवाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है जो आने वाले समय में चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।

  • हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी को ठहराया मेसी के कोलकाता इवेंट में भगदड़ के लिए जिम्मेदारकहा गिरफ्तार हो राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त

    हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी को ठहराया मेसी के कोलकाता इवेंट में भगदड़ के लिए जिम्मेदारकहा गिरफ्तार हो राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त


    नई दिल्ली । लियोनेल मेसी के भारत दौरे के पहले दिन कोलकाता में आयोजित उनके कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी की सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में वीआईपी कल्चर के चलते इस कार्यक्रम का संचालन सही तरीके से नहीं हो सकाजिससे अफरा-तफरी मच गई। सरमा ने यहां तक कहा कि राज्य के मुख्यमंत्रीगृहमंत्री और पुलिस आयुक्त को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

    सरमा ने आरोप लगाया कि बंगाल में ऐसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान भीड़ प्रबंधन की भारी नाकामी नजर आती है। उन्होंने कहा”दूसरे राज्यों में भीड़ को शांतिपूर्वक संभाला जाता हैलेकिन बंगाल में कुछ भी सुनिश्चित नहीं होता। यहां वीआईपी कल्चर का प्रभाव बहुत ज्यादा हैजो कार्यक्रमों को बर्बाद कर देता है।

    उनके अनुसारगुवाहाटी में गायक जुबिन गर्ग के निधन के बाद तीन दिनों तक 10 लाख लोग सड़कों पर थेलेकिन कोई हादसा नहीं हुआ। वहींमुंबई में विश्व कप फाइनल भी शांति से संपन्न हुआ था। सरमा ने कहा”बंगाल में कोई बड़ी घटना कभी भी घट सकती हैक्योंकि यहां हर चीज पर वीआईपी कल्चर हावी है।

    कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुए इस कार्यक्रम में हजारों प्रशंसक अपने पसंदीदा फुटबॉल आइकॉन मेसी की एक झलक पाने पहुंचे थे। लेकिन केवल 15 मिनट के कार्यक्रम के बाद मेसी वहां से चले गएजिससे दर्शकों में नाराजगी फैल गई। गुस्साए प्रशंसकों ने आयोजकों पर आरोप लगाते हुए पानी की बोतलें फेंकी। आयोजकों का कहना था कि कार्यक्रम लगभग 45 मिनट तक चलने वाला थालेकिन मेसी केवल 15 मिनट के बाद ही चले गए।

    इसके बाद प्रशंसकों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान टीएमसी नेताओं और वीआईपी लोगों के परिवारों ने मेसी को घेरे रखाजिससे आम दर्शकों को किसी भी प्रकार का सामान्य अनुभव नहीं मिला।हिमंत सरमा ने इस घटना की जिम्मेदारी राज्य सरकार की ठहराते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन सही ढंग से किया जाताअगर वहां पर कानून और व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जाता।

  • हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद निर्माण के लिए जुटाए 5 करोड़ रुपये और सोने के गहने

    हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद निर्माण के लिए जुटाए 5 करोड़ रुपये और सोने के गहने


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल(West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee)की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायक हुमायूं कबीर(Humayun Kabir) मुर्शिदाबाद जिले में “बाबरी मस्जिद”(Babri Masjid) के अपने सपने को साकार करने के लिए देश-विदेश से भारी मात्रा में चंदा प्राप्त कर रहे हैं। 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की 33वीं बरसी पर आधारशिला रखे जाने के बाद से, अब तक लगभग 5 करोड़ की राशि जुटाई जा चुकी है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, हुमायूं कबीर ने बताया कि उन्हें एक ही व्यक्ति से 1 करोड़ का चंदा देने का वादा किया गया था, जो अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। वह पश्चिम बंगाल इस्लामिक फाउंडेशन ऑफ इंडिया (WBIFI) द्वारा विदेशी फंडिंग प्राप्त करने के लिए बैंकिंग प्रावधान स्थापित किए जाने के बाद विदेशों से और अधिक धन प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे हैं।

    उन्होंने बेहद आत्मविश्वास से कहा, “हमें कतर, सऊदी अरब, बांग्लादेश और इंग्लैंड सहित विदेशों से दान के लिए फोन आ रहे हैं।” पूर्व टीएमसी विधायक को न केवल बाबरी मस्जिद के अपने सपने पर भरोसा है, बल्कि आधारशिला समारोह में मिले भारी समर्थन के बाद अपनी नई राजनीतिक पारी पर भी पूरा भरोसा है।

    23 बीघा भूमि पर बाबरी मस्जिद के निर्माण का प्रभारी डब्ल्यूबीआईएफआई की समिति के सदस्यों द्वारा प्रतिदिन शाम को दान बक्सों से जमा किए गए धन के ट्रंक गिने जाते हैं। गुरुवार को ही 23,01,495 की राशि के साथ एक सोने की अंगूठी, एक सोने की नथ और सोने की बालियां एकत्र की गईं।

    पार्टी द्वारा निलंबित किए जाने के बावजूद, हुमायूं कबीर का राजनीति छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। वास्तव में, वह बंगाल की राजनीति में एक बड़ी भूमिका निभाने को लेकर आश्वस्त हैं। उन्होंने दावा किया, “चुनाव के बाद मैं किंगमेकर बनूंगा। मेरे बिना कोई सरकार नहीं बना सकता।” भरतपुर से विधायक कबीर 17 दिसंबर को पश्चिम बंगाल विधानसभा में मौजूद रहेंगे, लेकिन उनका इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया, “मुझे यह महीना खत्म कर लेने दीजिए, मैं इस्तीफे के बारे में जनवरी में सोचूंगा।”

    वह 22 दिसंबर को अपनी नई पार्टी शुरू करने के लिए तैयार हैं, हालांकि उन्होंने अभी तक नाम का खुलासा नहीं किया है। कबीर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी, एआईएमआईएम के साथ गठबंधन की उम्मीद कर रहे थे, जो सफल नहीं हो सका। वह मुर्शिदाबाद जिले में कांग्रेस और वाम मोर्चा के साथ सीट शेयरिंग का फॉर्मूला बनाना चाहते हैं, जिसकी घोषणा वह अपनी पार्टी के गठन के बाद करेंगे।

    इस बीच, टीएमसी ने कबीर के ‘बाबरी मस्जिद’ एजेंडे से दूरी बना ली है। टीएमसी का कहना है कि यह पार्टी की समावेशी राजनीति की विचारधारा के अनुरूप नहीं है। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समुदाय के लगभग 30 प्रतिशत मतदाता हैं, जबकि हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय में शामिल मतुआ बंगाल में 17 प्रतिशत हैं। इनके वोट भाजपा और टीएमसी के बीच विभाजित हैं।

    जिस दिन मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखी गई थी, टीएमसी ने एकता दिवस का आयोजन किया था। इसके माध्यम से पार्टी ने सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खड़े होने का स्पष्ट संदेश दिया।

    टीएमसी ने मुर्शिदाबाद में आधारशिला समारोह से कुछ दिन पहले कबीर को दूसरी बार पार्टी से निष्कासित कर दिया था। कांग्रेस से टीएमसी में शामिल हुए कबीर ने सत्ताधारी सरकार के पहले कार्यकाल में जूनियर कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया था, इससे पहले उन्हें 2015 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद वह 2018 में भाजपा में शामिल हो गए, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी से चुनाव हार गए। 6 साल का निष्कासन पूरा होने के बाद कबीर टीएमसी में फिर से शामिल हो गए थे।