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  • बंगाल में सत्ता परिवर्तन तय? 191 सीटों पर BJP आगे, भवानीपुर में ममता vs सुवेंदु आमने-सामने

    बंगाल में सत्ता परिवर्तन तय? 191 सीटों पर BJP आगे, भवानीपुर में ममता vs सुवेंदु आमने-सामने


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच सियासी तस्वीर तेजी से बदलती दिख रही है। 293 सीटों पर जारी काउंटिंग के शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी बढ़त बना ली है और 191 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस 88 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। अब तक BJP 7 सीटें जीत चुकी है, जबकि TMC के खाते में 1 सीट आई है।

    सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। यहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करीब 7 हजार वोटों से आगे चल रही हैं, जबकि उनके सामने सुवेंदु अधिकारी चुनौती बने हुए हैं। दोनों नेता काउंटिंग सेंटर पहुंच चुके हैं, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और भारी पुलिस बल तैनात है।

    काउंटिंग के दौरान कुछ देर के लिए भवानीपुर के सखावत मेमोरियल सेंटर पर गिनती करीब 45 मिनट तक रुकी रही, हालांकि बाद में प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई।

    इस बीच कई सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज कर ली है, जिनमें मेदिनीपुर, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, मोंटेश्वर और आसनसोल दक्षिण जैसी अहम सीटें शामिल हैं। कोलकाता के साल्ट लेक स्थित BJP दफ्तर में जश्न का माहौल है और कार्यकर्ता जीत का जश्न मना रहे हैं।

    दूसरी तरफ, चुनावी माहौल में तनाव भी देखने को मिल रहा है। आसनसोल के चुरुलिया इलाके में TMC कार्यालय में आगजनी की घटना सामने आई है, जिसका आरोप बीजेपी पर लगाया गया है। वहीं TMC उम्मीदवारों ने कुछ बूथों पर EVM गड़बड़ी के आरोप भी लगाए हैं।

    नंदीग्राम सीट पर भी सुवेंदु अधिकारी मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं और हजारों वोटों से आगे चल रहे हैं।

    अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो करीब 15 साल बाद पश्चिम बंगाल की सत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यह न सिर्फ राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय सियासत पर भी बड़ा असर डाल सकता है।

  • बंगाल में सत्ता बदलाव का बड़ा असर! झारखंड के अवैध कारोबार पर कसेगा शिकंजा, सियासत में भी हलचल

    बंगाल में सत्ता बदलाव का बड़ा असर! झारखंड के अवैध कारोबार पर कसेगा शिकंजा, सियासत में भी हलचल


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन के संकेतों ने न सिर्फ राज्य की राजनीति बदली है, बल्कि इसका असर पड़ोसी Jharkhand तक देखने को मिल सकता है। करीब 15 साल बाद बन रहे नए सियासी समीकरणों के बीच अवैध कारोबार और सीमा से जुड़ी गतिविधियों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    माना जा रहा है कि नई सरकार के आने के बाद अवैध नेटवर्क पर सख्ती बढ़ सकती है। खासतौर पर Bharatiya Janata Party की संभावित नीतियों को देखते हुए ऐसे कारोबार में शामिल लोगों के बीच डर का माहौल बनना शुरू हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन गतिविधियों पर लगाम लगाने को सरकार प्राथमिकता दे सकती है।

    झारखंड लंबे समय से पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश  से जुड़े अवैध कारोबार के लिए एक “ट्रांजिट कॉरिडोर” के रूप में देखा जाता रहा है। राज्य के कई जिले जैसे साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, जामताड़ा, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम पश्चिम बंगाल से सटे होने के कारण इन गतिविधियों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

    अब अगर बंगाल में सख्ती बढ़ती है, तो इन जिलों में चल रहे अवैध नेटवर्क पर सीधा असर पड़ सकता है। इससे झारखंड की राजनीति भी प्रभावित हो सकती है, जहां मौजूदा महागठबंधन सरकार पर दबाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बदलाव सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पूर्वी भारत की सुरक्षा और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नई नीतियां जमीन पर कितनी तेजी से लागू होती हैं और उनका वास्तविक असर क्या पड़ता है।

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  • पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़ा सियासी दावा, ममता बनर्जी बोलीं-शाम तक पलट जाएगा पूरा रिजल्ट

    पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़ा सियासी दावा, ममता बनर्जी बोलीं-शाम तक पलट जाएगा पूरा रिजल्ट

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच राज्य की राजनीति एक बार फिर बेहद गरम हो गई है। शुरुआती रुझानों के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया है कि अंतिम परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं और शाम तक पूरा राजनीतिक समीकरण पलट जाएगा। उनके इस बयान के बाद राज्य में चुनावी माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।

    मतगणना के शुरुआती चरणों में कुछ सीटों पर अलग-अलग रुझान सामने आए हैं, जिससे सभी राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज हो गई हैं। इसी बीच ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि शुरुआती आंकड़ों को जानबूझकर इस तरह दिखाया जा रहा है जिससे एक खास राजनीतिक दल को बढ़त मिलती हुई प्रतीत हो।

    उन्होंने इसे एक रणनीतिक प्रयास बताया है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के मनोबल को प्रभावित करना हो सकता है।

    मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि किसी भी स्थिति में मतगणना केंद्र न छोड़ा जाए और पूरी प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जाए। उनका कहना है कि असली तस्वीर अंतिम राउंड की गिनती के बाद ही सामने आएगी और तब तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक केवल शुरुआती राउंड की गिनती हुई है, जबकि पूरी मतगणना प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। ऐसे में किसी भी तरह का अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। ममता बनर्जी के अनुसार, जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा, स्थिति बदलती जाएगी और टीएमसी की स्थिति मजबूत होती नजर आएगी।

    इसके साथ ही उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान कई जगहों पर अनियमितताएं देखने को मिली हैं। उनके अनुसार कुछ स्थानों पर मतगणना में देरी और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण स्थिति को प्रभावित करने की कोशिश की गई है। हालांकि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे शांत रहें और पूरी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखें।

    राज्य के राजनीतिक माहौल में इस बयान के बाद नई बहस शुरू हो गई है। जहां एक तरफ टीएमसी समर्थक इस बयान को आत्मविश्वास के रूप में देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इसे दबाव बनाने की रणनीति बता रहे हैं। मतगणना के हर राउंड के साथ राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है और सभी की नजरें अंतिम परिणाम पर टिकी हुई हैं।

    फिलहाल पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और हर ओर मतगणना को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। यह चुनाव केवल सीटों का मुकाबला नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई भी बन गया है, जिसका अंतिम फैसला आने वाले घंटों में साफ हो जाएगा।

  • अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम

    अमित शाह का बड़ा ऐलान: सत्ता में आते ही खत्म करेंगे टीएमसी का सिंडिकेट सिस्टम

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली, जब एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य की मौजूदा सरकार और सत्ताधारी दल पर गंभीर आरोप लगाए। अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया कि राज्य में जनता अब बदलाव चाहती है और मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ माहौल बनता जा रहा है।

    अमित शाह ने अपने भाषण में कहा कि पहले चरण के मतदान के बाद राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है और विपक्ष को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार कई क्षेत्रों में जनता ने मौजूदा सरकार के खिलाफ मतदान किया है, जो आने वाले समय में बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता अब एक नई दिशा और नई सरकार चाहती है।

    अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विशेष रूप से टीएमसी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में एक प्रकार की सिंडिकेट व्यवस्था सक्रिय है, जो प्रशासन और विकास कार्यों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में भाजपा को सत्ता मिलती है, तो इस तरह की व्यवस्थाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा और पारदर्शी शासन स्थापित किया जाएगा।

    अमित शाह ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी सत्ता में आने पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाएगी। उनके अनुसार राज्य में कानून व्यवस्था को बेहतर बनाना और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाना प्राथमिकता होगी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद राज्य में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    अपने भाषण में उन्होंने महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार बनने पर महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी और युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी योजनाएं लागू की जाएंगी, जिससे राज्य में आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सके।

    किसानों की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को लेकर भी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है और बाजार व्यवस्था में असंतुलन की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नई सरकार बनने पर किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी और उनकी आय बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

    इसके अलावा उन्होंने राज्य में अधूरे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि कई परियोजनाएं लंबे समय से पूरी नहीं हो पाई हैं। उन्होंने वादा किया कि यदि भाजपा को अवसर मिलता है, तो इन लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा ताकि जनता को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    पूरे भाषण में अमित शाह ने मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि राज्य में एक नए प्रशासनिक मॉडल की जरूरत है, जो पारदर्शिता, विकास और सुशासन पर आधारित हो। उनके इस बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले चुनावी माहौल को और अधिक गरमा दिया है।

  • ममता का दावा 100 सीटें जीतने का, अमित शाह बोले- BJP जीतेगी 110 सीटें, बंगाल में सियासी जंग तेज

    ममता का दावा 100 सीटें जीतने का, अमित शाह बोले- BJP जीतेगी 110 सीटें, बंगाल में सियासी जंग तेज


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्म है और दूसरे चरण के मतदान से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। दोनों दलों ने पहले चरण के मतदान को लेकर अलग-अलग बड़े दावे किए हैं।

    तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि पहले चरण में उनकी पार्टी ने 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बना ली है। भवानीपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि टीएमसी इस चुनाव में भारी जीत की ओर बढ़ रही है और अगर जनता का समर्थन मिला तो पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिलेगा।

    ममता बनर्जी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी चुनावी दबाव में है और उनके खिलाफ केंद्र सरकार पूरी ताकत झोंक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को कमजोर करने के लिए बड़ी संख्या में हेलीकॉप्टर केंद्रीय बल और जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि इसके बावजूद भाजपा उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी। भवानीपुर सीट का जिक्र करते हुए ममता ने कहा कि वे इस क्षेत्र से तीन बार जीत चुकी हैं और इस बार भी जनता का भरोसा उनके साथ है।

    वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए दावा किया कि पहले चरण की 142 सीटों में से भाजपा 110 सीटों पर आगे है। मिदनापुर की रैली में बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह परिणाम भाजपा के लिए बड़ी जीत का संकेत है और राज्य में परिवर्तन तय है।

    अमित शाह ने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी और राज्य को भयमुक्त बनाया जाएगा। उन्होंने ममता सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना दक्षिण कोलकाता लॉ कॉलेज की घटना और संदेशखाली में महिलाओं पर कथित अत्याचार जैसे मामलों का उल्लेख किया।

    शाह ने यह भी कहा कि महिला मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता बनर्जी राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही हैं। इसके अलावा उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार बनने पर मतुआ समुदाय को नागरिकता देने का काम किया जाएगा।

  • मुझ पर 36 केस, ममता पर मेहरबानी क्‍यों? राहुल गांधी ने मोदी सरकार और TMC दोनों पर साधा निशाना

    मुझ पर 36 केस, ममता पर मेहरबानी क्‍यों? राहुल गांधी ने मोदी सरकार और TMC दोनों पर साधा निशाना


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हुगली जिले के सेरामपुर में आयोजित रैली में केंद्र सरकार BJP-RSS और ममता बनर्जी की TMC पर एक साथ तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में उन्होंने सवाल उठाया कि उनके खिलाफ 36 केस दर्ज किए गए और ED ने 55 घंटे पूछताछ की लेकिन ममता बनर्जी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    राहुल गांधी ने दावा किया कि इसका कारण यह है कि ममता बनर्जी BJP से सीधे तौर पर मुकाबला नहीं करतीं इसलिए उन्हें केंद्र से राहत मिलती है। रैली में राहुल ने कहा कि देश में दो विचारधाराओं के बीच संघर्ष चल रहा है। एक ओर कांग्रेस है जो संविधान एकता और भाईचारे की बात करती है जबकि दूसरी ओर BJP है जो उनके अनुसार नफरत और हिंसा फैलाने का काम करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS और BJP समाज में विभाजन पैदा करते हैं और धर्म के नाम पर लोगों को बांटते हैं।

    कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि इसका उद्देश्य देश में प्रेम और सद्भाव का संदेश फैलाना था। वहीं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्राओं को भारत तोड़ो यात्रा बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार देश को बांटने की राजनीति कर रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी पर हमला जारी रखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते में उन्होंने देश के हितों से समझौता किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील में कृषि छोटे उद्योग ऊर्जा क्षेत्र और देश का डेटा प्रभावित हुआ। राहुल ने यह भी कहा कि कोई भी मजबूत प्रधानमंत्री दबाव में आकर ऐसा फैसला नहीं लेता।

    ममता बनर्जी पर सवाल उठाते हुए राहुल ने अपने खिलाफ कार्रवाई का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उन पर कई राज्यों में केस चल रहे हैं उनसे लंबी पूछताछ हुई यहां तक कि उनकी लोकसभा सदस्यता भी चली गई। इसके मुकाबले उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ न तो ED और न ही CBI ने कोई ठोस कार्रवाई की।

    बंगाल की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए राहुल गांधी ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में नौकरी पाने के लिए TMC से जुड़ाव जरूरी हो गया है। उन्होंने हिंदुस्तान मोटर्स की बंद फैक्ट्री का उदाहरण देते हुए कहा कि जो बंगाल कभी औद्योगिक रूप से मजबूत था वह अब पिछड़ गया है।

    इसके अलावा उन्होंने शारदा और रोज वैली जैसे पोंजी घोटालों कोयला तस्करी और अवैध खनन का मुद्दा उठाया। राहुल ने आरोप लगाया कि राज्य में हर काम के लिए गुंडा टैक्स देना पड़ता है जिससे आम जनता परेशान है।

  • पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाया, अमित शाह ने कांग्रेस और टीएमसी पर साधा निशाना

    पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाया, अमित शाह ने कांग्रेस और टीएमसी पर साधा निशाना


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक सरगर्मी लगातार तेज होती जा रही है। दम दम उत्तर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने अपने संबोधन में राज्य की राजनीतिक स्थिति और आगामी मतदान को लेकर कई महत्वपूर्ण दावे किए, जिससे चुनावी माहौल और अधिक गरम हो गया है।

    सभा के दौरान उन्होंने दावा किया कि इस बार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है और मौजूदा नेतृत्व को जनता का समर्थन कम होता दिख रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव की ओर देख रही है और आगामी चुनाव परिणाम इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

    अपने संबोधन में उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भी निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में उसका प्रभाव काफी कमजोर हो चुका है। उनके अनुसार, कांग्रेस लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने में असफल रही है और इस बार भी उसके लिए स्थिति अनुकूल नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी राज्य में अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने में संघर्ष कर रही है।

    सभा में दिए गए भाषण के दौरान राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने विपक्षी नेताओं की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक विमर्श में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी के साथ बयान देना आवश्यक है ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान बना रहे।

    इसके अलावा उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि राज्य में कई मुद्दों पर जनता असंतोष व्यक्त कर रही है और यह आगामी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे मतदान के दिन सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और अपने मताधिकार का प्रयोग करें।

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के बयान चुनावी माहौल में मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास माने जाते हैं। पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तीव्र है और विभिन्न दल अपनी रणनीति के तहत मतदाताओं को आकर्षित करने में जुटे हुए हैं।

    चुनाव आयोग की निगरानी में राज्य में मतदान प्रक्रिया की तैयारी चल रही है और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर प्रचार अभियान को अंतिम चरण में पहुंचा रहे हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक परिदृश्य लगातार बदलता दिखाई दे रहा है।

    आने वाले दिनों में मतदान और उसके बाद के परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे। फिलहाल सभी दल अंतिम चरण के प्रचार में पूरी ताकत लगा रहे हैं और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं।

  • लिकर लॉकडाउन से कारोबार को बड़ा झटका, 1400 करोड़ तक नुकसान का अनुमान, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़े

    लिकर लॉकडाउन से कारोबार को बड़ा झटका, 1400 करोड़ तक नुकसान का अनुमान, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़े

    नई दिल्ली।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के चलते लागू की गई शराबबंदी ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान लगाए गए इस प्रतिबंध को लेकर सत्ताधारी दल और चुनावी व्यवस्था से जुड़े निर्णयों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इस फैसले ने न केवल राजनीतिक बहस को तेज किया है बल्कि राज्य के कारोबारी वर्ग पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    निर्णय के अनुसार राज्य में शराब की बिक्री और परोसने पर 20 अप्रैल से लेकर 29 अप्रैल तक अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध लागू किया गया है। इस अवधि में कुल मिलाकर लगभग साढ़े नौ दिन तक शराब की बिक्री पर रोक रहेगी। मतदान के चरणों और मतगणना के आसपास के समय को देखते हुए यह प्रतिबंध लागू किया गया है, हालांकि बीच में कुछ दिनों के लिए सीमित राहत भी दी गई है।

    इस फैसले का असर राज्य के व्यापारिक ढांचे पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है। अनुमान के अनुसार इस अवधि में सरकार को लगभग 1400 करोड़ रुपये तक के राजस्व नुकसान की संभावना है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राज्य की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला बताया जा रहा है। पूरे राज्य में हजारों की संख्या में शराब की दुकानें और बार संचालित होते हैं, जिनका दैनिक कारोबार करोड़ों रुपये में होता है। ऐसे में लंबे समय तक पाबंदी से कारोबार ठप होने की स्थिति बन गई है।

    इस निर्णय का असर केवल शराब उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर वे व्यवसाय जो बार और खाद्य सेवाओं पर निर्भर हैं, उन्हें ग्राहकों की कमी और बिक्री में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।

    शराब कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले से ही स्टॉक और बिक्री को लेकर कई तरह की पाबंदियां लागू थीं और अब लंबे समय की बंदी से उनका व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा। उनका यह भी कहना है कि अलग-अलग चरणों में लागू नियमों के कारण स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

    वहीं इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्ताधारी दल के नेताओं का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया के नाम पर ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं जो आम जनता और छोटे कारोबारियों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय राजनीतिक रूप से प्रभावित प्रतीत होते हैं और इसका असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।

    दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रतिबंध निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।

     पश्चिम बंगाल में लागू यह शराबबंदी अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रह गई है बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। इससे जहां एक ओर राज्य का राजस्व प्रभावित होने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर चुनावी माहौल और भी अधिक गर्म हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती नई दिल्ली।

  • बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत, हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला, बोले- 29 से पहले सरेंडर करो, वरना..

    बंगाल चुनाव से पहले गरमाई सियासत, हिमंत बिस्वा सरमा का तीखा हमला, बोले- 29 से पहले सरेंडर करो, वरना..


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग में अब कुछ ही दिन शेष हैं। 23 तारीख को पहले चरण का मतदान होना है, जबकि दूसरे चरण के लिए 29 तारीख तय की गई है। इसके साथ ही तमिलनाडु में भी 23 को एक ही चरण में मतदान होगा। वहीं 4 मई को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    बंगाल में बनेगी भाजपा सरकार- हिमंत बिस्वा सरमा
    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत का बड़ा दावा किया है। पश्चिम बर्धमान जिले के गौरबाजार में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि इस बार राज्य में भाजपा की सरकार बनना 100 प्रतिशत तय है। उन्होंने पार्टी की संभावनाओं को लेकर पूरा भरोसा जताया।

    चुनावी मंच से दी सख्त चेतावनी
    पांडुआ में जनसभा को संबोधित करते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने तीखा बयान दिया। उन्होंने टीएमसी के कथित सिंडिकेट पर निशाना साधते हुए कहा, 29 तारीख से पहले सरेंडर कर दो, नहीं तो बाद में जेल जाना पड़ेगा। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।

    गौरव वल्लभ का दावा, भवानीपुर से हारेंगी ममता बनर्जी

    भाजपा नेता गौरव वल्लभ ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव हार सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों में टीएमसी सरकार ने मां, माटी और मानुष के साथ विश्वासघात किया है और राज्य में अराजकता का माहौल बना रहा।

    भाजपा नेताओं का डबल इंजन सरकार पर जोर
    भाजपा सांसद गुलाम अली खटाना ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता डबल इंजन सरकार बनाने का मन बना चुकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि 29 अप्रैल से पहले आरोपियों को सरेंडर कर देना चाहिए, अन्यथा 4 मई के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • West Bengal. चुनाव से पहले TMC ने किया SIR में काटे गए 90 लाख नाम फिर जोड़ने का ऐलान

    West Bengal. चुनाव से पहले TMC ने किया SIR में काटे गए 90 लाख नाम फिर जोड़ने का ऐलान


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) की तारीखें नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी हमले तेज होते दिख रहे हैं। भाजपा (BJP) ने जहां आज चुनावी घोषणा पत्र (Election Manifesto) में लोक लुभावन वादे कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बड़े वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश की है, वहीं TMC महासचिव और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के हिन्दू कार्ड पर नया दांव चल दिया है। इतना ही नहीं बनर्जी ने चुनावों से पहले एक बड़ा ऐलान भी कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर उनकी पार्टी टीएमसी फिर से सत्ता में आती है तो SIR में काटे गए सभी 90 लाख लोगों के नाम फिर से मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे।

    एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स में अभिषेक बनर्जी ने इसका ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतादाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग और भाजपा यह कहे कि जिन 90 लाख लोगों के नाम काटे गए हैं, वे सभी बांग्लादेशी थे।


    63% नाम हिंदुओं के काटे गए

    AITC के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा, “…मैं यह भरोसा दिलाता हूँ कि जब TMC फिर जीतेगी, तो वोटर लिस्ट से हटाए गए सभी लोगों के नाम वापस जोड़ दिए जाएँगे।” उन्होंने कहा, “BJP और चुनाव आयोग को यह कहना चाहिए कि जिन 90 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे सभी बांग्लादेशी थे।” बनर्जी ने कहा, “उनके बयानों के अनुसार, इनमें से 63% नाम हिंदुओं के थे, तो फिर वे भी ज़रूर बांग्लादेशी या रोहिंग्या होंगे…यानी 90 में से 57 लाख हिन्दू बांग्लादेशी रोहिंग्या हैं।”


    6 माह में UCC लागू करेंगे: BJP

    बता दें कि बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने पर छह महीने के भीतर राज्य में समान नागरिक संहिता लागू (यूसीसी) लागू की जाएगी और ‘बंगाल के सपूत’ को मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही ‘राम राज्य’ स्थापित किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ जारी करते हुए कहा कि घुसपैठ और तुष्टीकरण के खिलाफ भाजपा के रुख को कल्याणकारी प्रयासों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के इस आरोप को भी खारिज किया कि भाजपा पश्चिम बंगाल के लोगों की खान-पान की आदतों में दखल देगी। दूसरी तरफ, अभिषेक बनर्जी 63 फीसदी हिन्दू मतदाताओं के नाम काटे जाने के बहाने भाजपा को हिन्दू विरोधी ठहराने की कोशिश कर रहे हैं और टीएमसी के पक्ष में ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं।