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  • उज्जैन के फ्रीगंज में आधी रात धधकी ड्राई फ्रूट्स की दुकान, तीन दमकलों ने आधे घंटे में पाया काबू

    उज्जैन के फ्रीगंज में आधी रात धधकी ड्राई फ्रूट्स की दुकान, तीन दमकलों ने आधे घंटे में पाया काबू


    उज्जैन । उज्जैन के व्यस्त फ्रीगंज क्षेत्र में सोमवार देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक ड्राई फ्रूट्स और किराना सामान की दुकान में अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया और आसपास के क्षेत्र में धुएं का गुबार फैल गया। रात के सन्नाटे में उठती लपटों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। राहत की बात यह रही कि समय रहते दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और बड़ी दुर्घटना होने से पहले ही आग पर काबू पा लिया गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात क्षेत्र से गुजर रहे एक दमकलकर्मी की नजर दुकान से निकल रहे धुएं और आग की लपटों पर पड़ी। उन्होंने बिना समय गंवाए फायर कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां और एक पानी का टैंकर घटनास्थल पर पहुंच गए। दमकलकर्मियों ने तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया और करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया।

    दमकल विभाग की सतर्कता के कारण आग आसपास की दुकानों तक नहीं फैल सकी। जिस दुकान में आग लगी थी, उसके आसपास कपड़े और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान मौजूद थे। यदि आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता तो पूरा बाजार इसकी चपेट में आ सकता था और करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका थी। दमकल कर्मियों की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।

    प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि फायर विभाग और संबंधित अधिकारी मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। आग से दुकान में हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि ड्राई फ्रूट्स और किराना सामान होने के कारण आग तेजी से फैली, जिससे दुकान के अंदर रखा काफी सामान प्रभावित हुआ।

    फ्रीगंज क्षेत्र में इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले सितंबर 2025 में घनालाल की चाल स्थित एक सूने मकान में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लगी थी। उस हादसे में करीब आठ लाख रुपये नकद, जेवर और घरेलू सामान जलकर राख हो गया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने एक बार फिर बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा और विद्युत व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि दुकानों और व्यावसायिक परिसरों में नियमित रूप से विद्युत वायरिंग की जांच, ओवरलोडिंग से बचाव और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। फायर विभाग ने भी व्यापारियों से अपील की है कि वे समय-समय पर अपने बिजली के उपकरणों और वायरिंग की जांच कराएं तथा सुरक्षा मानकों का पालन करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

  • बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे कार्तिक आर्यन, नंदी के कान में कही मनोकामना; भस्म आरती में शामिल हुए ओडिशा के मंत्री

    बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे कार्तिक आर्यन, नंदी के कान में कही मनोकामना; भस्म आरती में शामिल हुए ओडिशा के मंत्री


    उज्जैन । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार देर रात आस्था और श्रद्धा का विशेष माहौल देखने को मिला। बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन भगवान महाकाल के दरबार पहुंचे और रात्रिकालीन शयन आरती में शामिल होकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने बाबा महाकाल से देश-दुनिया की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। वहीं मंगलवार तड़के ओडिशा सरकार के राज्य मंत्री गोकुला नंदा ने भी प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए।

    कार्तिक आर्यन साधारण वेशभूषा में नीली जींस और सफेद शर्ट पहनकर महाकाल मंदिर पहुंचे। उन्होंने नंदी हॉल में श्रद्धाभाव से हाथ जोड़कर शयन आरती में हिस्सा लिया। पूरे समय अभिनेता पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ आरती में शामिल रहे। आरती के बाद उन्होंने परंपरा के अनुसार नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कही और भगवान महाकाल के चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    जैसे ही मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं और प्रशंसकों की नजर कार्तिक आर्यन पर पड़ी, उन्हें देखने और उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साह बढ़ गया। हालांकि अभिनेता ने पूरी सादगी और शांत भाव से दर्शन किए तथा किसी तरह की औपचारिकता के बिना मंदिर से रवाना हो गए। उनकी मौजूदगी से मंदिर परिसर में कुछ देर तक खासा उत्साह बना रहा।

    कार्तिक आर्यन इन दिनों अपनी आगामी फिल्मों को लेकर भी चर्चा में हैं। उनकी आने वाली फिल्मों में फैंटेसी कॉमेडी ‘नागजिला’, एक देशभक्ति आधारित एक्शन ड्रामा और निर्देशक कबीर खान की स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म शामिल है। ‘चंदू चैंपियन’ के बाद यह उनकी अगली स्पोर्ट्स फिल्म होगी, जिसका प्रशंसकों को बेसब्री से इंतजार है।

    इधर मंगलवार तड़के ओडिशा सरकार के मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन विकास तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गोकुला नंदा भी महाकाल मंदिर पहुंचे। उन्होंने प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर विधि-विधान से भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की और देश तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की।

    दर्शन के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से इंजीनियर शिवकांत पांडे ने राज्य मंत्री का सम्मान किया। उन्हें बाबा महाकाल का प्रसाद और सम्मान स्वरूप स्मृति-चिह्न भेंट किया गया।

    श्रावण मास के दौरान महाकाल मंदिर में देशभर से श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति, कलाकार और खिलाड़ी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार रात अभिनेता कार्तिक आर्यन और मंगलवार सुबह ओडिशा के राज्य मंत्री की मौजूदगी ने श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण पैदा किया। महाकाल मंदिर में इन दिनों भक्ति, आस्था और धार्मिक उल्लास का माहौल चरम पर है।

  • बाबा महाकाल को चढ़े दुनिया के सबसे महंगे आम, 2.70 लाख रुपए किलो वाला मियाज़ाकी भी भोग में शामिल

    बाबा महाकाल को चढ़े दुनिया के सबसे महंगे आम, 2.70 लाख रुपए किलो वाला मियाज़ाकी भी भोग में शामिल


    उज्जैन । श्रावण मास में उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का एक अनोखा और आकर्षक दृश्य देखने को मिला। जबलपुर निवासी एवं महाकाल हाइब्रिड फार्म के संचालक संकल्प सिंह परिहार अपनी पत्नी रानी सिंह परिहार के साथ बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे और उन्होंने भगवान को दुनिया की सबसे दुर्लभ तथा महंगी किस्मों के आम भोग स्वरूप अर्पित किए। इस बार भोग में कुल आठ विदेशी और प्रीमियम वैरायटी के आम शामिल रहे, जिनमें जापान का चर्चित मियाज़ाकी आम सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बना।

    संकल्प सिंह परिहार और उनकी पत्नी ने विधि-विधान से भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना करने के बाद लगभग पांच किलोग्राम वजन के आठ अलग-अलग प्रीमियम आम अर्पित किए। श्रद्धालुओं के अनुसार यह परंपरा पिछले 12 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। वर्ष 2014 से वे अपने बगीचे की पहली और सबसे श्रेष्ठ उपज सबसे पहले बाबा महाकाल को समर्पित करते हैं। उनका मानना है कि उनके 12 एकड़ में फैले महाकाल हाइब्रिड फार्म की सफलता बाबा महाकाल के आशीर्वाद का ही परिणाम है।

    इस बार चढ़ाए गए आमों में सबसे खास जापान के मियाज़ाकी प्रांत में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध किस्म मियाज़ाकी रही। इसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब 2.70 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है। यह आम अपने गहरे लाल रंग, बेहतरीन मिठास, सुगंध और पोषण गुणों के कारण पूरी दुनिया में बेहद लोकप्रिय है। इसमें सामान्य आमों की तुलना में अधिक प्राकृतिक शर्करा, एंटीऑक्सीडेंट, बीटा-कैरोटीन और फोलिक एसिड पाया जाता है, जो इसे बेहद खास बनाता है।

    मियाज़ाकी के अलावा भोग में ऑस्ट्रेलिया की R2E2, अमेरिका, मलेशिया और भारत की प्रीमियम किस्मों के आम भी शामिल रहे। इनमें भारत की लोकप्रिय मल्लिका वैरायटी भी प्रमुख रही। सभी आमों का चयन विशेष रूप से उनके स्वाद, गुणवत्ता और दुर्लभता को ध्यान में रखकर किया गया।

    रानी सिंह परिहार ने बताया कि उनके लिए यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गहरी आस्था का विषय है। उन्होंने कहा कि उनके फार्म का नाम भी महाकाल हाइब्रिड फार्म है और वे बाबा महाकाल को ही अपने बगीचे का वास्तविक स्वामी मानते हैं। इसी कारण हर वर्ष श्रावण मास में पहली और सबसे अच्छी फसल भगवान को अर्पित की जाती है। उनका विश्वास है कि महाकाल के आशीर्वाद से ही उनका बगीचा निरंतर प्रगति कर रहा है।

    श्रावण मास में बाबा महाकाल के दरबार में देश-विदेश से श्रद्धालु अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार विशेष भेंट लेकर पहुंचते हैं। इस बार दुनिया के सबसे महंगे आमों का भोग चर्चा का विषय बन गया। मंदिर में दर्शन करने आए श्रद्धालुओं ने भी इस अनोखी भेंट को आस्था और भक्ति का प्रतीक बताया।

    श्रावण के पावन अवसर पर महाकाल के चरणों में समर्पित यह विशेष भोग एक बार फिर यह संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा में भेंट का मूल्य नहीं, बल्कि भाव का महत्व सबसे बड़ा होता है।

  • सोमवार की भस्म आरती में दिव्य आभा से आलोकित हुए बाबा महाकाल पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में दिए अलौकिक दर्शन

    सोमवार की भस्म आरती में दिव्य आभा से आलोकित हुए बाबा महाकाल पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप में दिए अलौकिक दर्शन


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा परिसर हर हर महादेव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। गर्भगृह में विराजित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन किया गया जिसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक संपन्न हुआ। इसके पश्चात दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से ज्योतिर्लिंग का अभिषेक किया गया। इस पावन अनुष्ठान के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया और उपस्थित श्रद्धालु शिव भक्ति में भाव विभोर नजर आए।

    पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। प्रथम घंटा बजाकर वैदिक मंत्रों के बीच हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के पश्चात बाबा महाकाल के मस्तक पर भांग चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर उन्हें दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक श्रृंगार के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते दिखाई दिए। पूरे अनुष्ठान के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बना रहा।

    श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म रमाने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट रजत मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों से सजाया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों से सुसज्जित बाबा महाकाल का राजाधिराज स्वरूप अत्यंत मनोहारी दिखाई दिया। इसके बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया तथा विशेष आरती संपन्न हुई। इस दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

    भस्म आरती में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दर्शन कर सुख समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। सनातन परंपरा में यह मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल मंदिर की भस्म आरती को विश्वभर के श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ देखते हैं।

    सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। ऐसे में इस दिन आयोजित भस्म आरती का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है जहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत स्वरूप मानी जाती है। बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और भव्य श्रृंगार ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि आस्था और विश्वास से जुड़ी यह परंपरा आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई है।

  • रविवार भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत त्रिनेत्र और त्रिशूल से हुआ अलौकिक श्रृंगार

    रविवार भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत त्रिनेत्र और त्रिशूल से हुआ अलौकिक श्रृंगार

     


    उज्जैन उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में रविवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही विधि-विधान से भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और शिव स्तुति के बीच पूरा मंदिर शिवमय वातावरण में डूब गया।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का राजाधिराज स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया। बाबा के मस्तक पर रजत त्रिनेत्र, त्रिपुंड और त्रिशूल सुशोभित किए गए। इसके साथ ही रजत जड़ित आभूषण, शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित कर दिव्य स्वरूप सजाया गया। अलौकिक श्रृंगार ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल को भांग, चंदन और सिंदूर अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती कर विशेष भोग लगाया गया। गर्भगृह में विराजमान माता पार्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना भी की गई। नंदी महाराज का पूजन कर संपूर्ण आराधना संपन्न हुई।

    महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। इस दिव्य अनुष्ठान का साक्षी बनने के लिए देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में भाग लिया और बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना की।

  • शुक्रवार भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत चंद्र-त्रिशूल मुकुट से हुआ अलौकिक श्रृंगार

    शुक्रवार भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, रजत चंद्र-त्रिशूल मुकुट से हुआ अलौकिक श्रृंगार


    इंदौर । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। निर्धारित परंपरा के अनुसार सबसे पहले मंदिर के कपाट खोले गए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन-अर्चन की प्रक्रिया संपन्न हुई। इसके बाद भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक कर विशेष श्रृंगार किया गया।

    भस्म आरती की शुरुआत सभा मंडप में वीरभद्रजी के कान में स्वस्तिवाचन से हुई। घंटी बजाकर भगवान से आज्ञा लेने के बाद सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए। गर्भगृह के कपाट खुलने पर पुजारियों ने भगवान का पूर्व श्रृंगार उतारकर विधि-विधान से पूजन किया। जलाभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। इसके पश्चात कर्पूर आरती की गई।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार रजत चंद्र, त्रिशूल मुकुट और रजत आभूषणों से किया गया। उन्हें रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पमालाएं धारण कराई गईं। साथ ही भांग, चंदन, ड्राय फ्रूट और पवित्र भस्म अर्पित की गई। अंत में फल और मिष्ठान का भोग लगाकर आरती संपन्न हुई।

    नंदी हाल में भी नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। भस्म आरती के दौरान महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं।

    भस्म आरती में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की। पूरे मंदिर परिसर में शिवभक्ति, वैदिक मंत्रों और हर-हर महादेव के जयघोष से आध्यात्मिक वातावरण गूंज उठा।

  • महाकाल दरबार में अलौकिक छटा: पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप शृंगार, भस्म आरती में भावविभोर हुए श्रद्धालु

    महाकाल दरबार में अलौकिक छटा: पंचामृत अभिषेक के बाद राजा स्वरूप शृंगार, भस्म आरती में भावविभोर हुए श्रद्धालु


    इंदौर । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान आस्था, श्रद्धा और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही भगवान महाकाल के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

    प्रातः चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले भगवान महाकाल का विधि-विधान से हरी ओम जल द्वारा अभिषेक किया गया। इसके पश्चात दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष पूजन संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के बीच संपन्न इस अनुष्ठान ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का अत्यंत आकर्षक राजा स्वरूप शृंगार किया गया। इस दौरान रजत चंद्र, रजत त्रिशूल, त्रिपुण्ड और ड्रायफ्रूट से अलंकरण किया गया। भगवान को रजत का मुकुट, रजत की मुण्डमाल, रुद्राक्ष की मालाएं तथा सुगंधित पुष्पों से बनी विशेष मालाएं पहनाई गईं। दिव्य शृंगार के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत मनोहारी और आकर्षक दिखाई दिया, जिसके दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

    नंदी हाल में विराजमान नंदी महाराज का भी विधिवत स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल, मिष्ठान और अन्य नैवेद्य अर्पित किए गए। मंदिर परिसर में शंख, घंटा, झांझ, मंजीरा और डमरू की गूंज के बीच वातावरण पूरी तरह शिवमय हो गया। भक्ति संगीत और वैदिक मंत्रों के साथ संपन्न हुई भस्म आरती ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।

    भस्म आरती के दौरान महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल अपने निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि प्रतिदिन तड़के होने वाली इस अनूठी आरती के दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

    मंगलवार की भस्म आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक दर्शन कर भगवान महाकाल से सुख, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की। सावन से पहले बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए आने वाले दिनों में मंदिर में और अधिक भीड़ उमड़ने की संभावना जताई जा रही है।

  • उज्जैन का काल भैरव मंदिर क्यों है दुनिया भर में प्रसिद्ध, जानिए शराब के भोग और अनोखी मान्यता का रहस्य

    उज्जैन का काल भैरव मंदिर क्यों है दुनिया भर में प्रसिद्ध, जानिए शराब के भोग और अनोखी मान्यता का रहस्य


    नई दिल्ली। धार्मिक नगरी उज्जैन अपने विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के साथ साथ अनेक प्राचीन और रहस्यमयी मंदिरों के लिए भी जानी जाती है। इन्हीं में से एक है बाबा काल भैरव का प्राचीन मंदिर जहां सदियों से चली आ रही एक ऐसी परंपरा आज भी निभाई जाती है जो पहली बार सुनने वाले को हैरान कर देती है। यहां भगवान को पेड़े लड्डू या मिठाई का नहीं बल्कि मदिरा का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु फूल माला और प्रसाद के साथ शराब की बोतल लेकर मंदिर पहुंचते हैं और इसे बाबा काल भैरव को श्रद्धा भाव से अर्पित करते हैं। यही अनूठी परंपरा इस मंदिर को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में विशेष पहचान दिलाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काल भैरव भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप माने जाते हैं। तंत्र साधना और शैव परंपरा में उनका विशेष महत्व है। तांत्रिक मान्यता के अनुसार काल भैरव की पूजा में मदिरा का भोग स्वीकार्य माना गया है। इसी कारण इस मंदिर में वर्ष भर श्रद्धालु बाबा को मदिरा अर्पित करते हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह परंपरा कई सौ वर्षों से लगातार चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और विधि विधान के साथ निभाई जाती है।

    इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण वह रहस्यमयी दृश्य है जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन यहां पहुंचते हैं। जब कोई भक्त मदिरा अर्पित करता है तो मंदिर के पुजारी उसे एक छोटी धातु की थाली या पात्र में लेकर बाबा काल भैरव की प्रतिमा के मुख से लगाते हैं। कुछ ही क्षणों में पूरा पात्र खाली हो जाता है और ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रतिमा स्वयं भोग ग्रहण कर रही हो। प्रतिमा में कोई स्पष्ट छेद या पाइप दिखाई नहीं देता फिर भी मदिरा गायब हो जाती है। वर्षों से यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल और आस्था का विषय बना हुआ है। इस रहस्य को लेकर अनेक तरह की चर्चाएं होती रही हैं लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह बाबा काल भैरव की दिव्य कृपा और चमत्कार का प्रतीक है।

    मंदिर के बाहर का वातावरण भी अन्य धार्मिक स्थलों से अलग दिखाई देता है। जहां अधिकांश मंदिरों के बाहर फूल माला नारियल और मिठाई की दुकानें होती हैं वहीं यहां पूजा सामग्री के साथ मदिरा की अधिकृत बोतलें भी उपलब्ध रहती हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग के लिए बोतल खरीदते हैं और मंदिर में अर्पित करते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार भोग अर्पित करने के बाद शेष मदिरा को प्रसाद स्वरूप श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है जिसे लोग आस्था के साथ ग्रहण करते हैं।

    काल भैरव को उज्जैन नगरी का कोतवाल या रक्षक भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि महाकालेश्वर के दर्शन के साथ काल भैरव के दर्शन किए बिना उज्जैन की धार्मिक यात्रा पूर्ण नहीं मानी जाती। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले बाबा महाकाल के दर्शन करते हैं और फिर काल भैरव मंदिर पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। विशेष अवसरों पर यहां दूरदराज के राज्यों और विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    काल भैरव मंदिर केवल अपनी अनोखी परंपरा के कारण ही नहीं बल्कि आस्था और आध्यात्मिक विश्वास के केंद्र के रूप में भी प्रसिद्ध है। यहां आने वाले भक्तों के लिए मदिरा का भोग किसी सामान्य वस्तु का अर्पण नहीं बल्कि धार्मिक परंपरा और श्रद्धा का प्रतीक है। यही वजह है कि उज्जैन का यह प्राचीन मंदिर आज भी देश के सबसे अनूठे और चर्चित धार्मिक स्थलों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है।

  • MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह

    MP: राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह


    भोपाल।
    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता (Senior Congress leader) दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह राम मंदिर में चढ़ावे और दान की चोरी के मुद्दे को लेकर दो अक्टूबर (गांधी जयंती) से उज्जैन के महाकाल मंदिर (Mahakal Temple) से अयोध्या (Ayodhya) तक ‘गैर-राजनीतिक’ पदयात्रा करेंगे। सिंह ने इस बात की घोषणा भोपाल में अपने सरकारी आवास के बाहर एक बैनर लगाने के दौरान कही। उन्होंने कहा कि मैंने अपने घर के बाहर एक बैनर लगाया है, जिस पर लिखा है चंदा चोरों का प्रवेश वर्जित है। आगे उन्होंने कहा कि अब यह बैनर सभी मंदिरों के बाहर लगना चाहिए कि चंदा चोरों से सावधान।

    दरअसल सिंह ने अपने घर के बार जो बैनर लगाया उस पर लिखा है, ‘जय सिया राम। हमारी आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समूचे देश के द्वारा दिए गए चंदा के चोरों एवं चढ़ावा चोरों का मेरे निवास पर प्रवेश निषेध है।’ इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत में वाद दायर कर राम मंदिर के लिए दिया गया अपना चंदा वापस मांगेंगे क्योंकि उनके धन का दुरुपयोग हुआ है।


    ‘पदयात्रा में हर दिन चलूंगा 10 से 15 किमी पैदल’

    कांग्रेस नेता ने कहा, ‘राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी के विरोध में मैं दो अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा शुरू करूंगा। यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। इसमें किसी दल का झंडा नहीं रहेगा। भगवान राम में आस्था रखने वाले और राम मंदिर में दान देने वाले सभी लोग इसमें शामिल हो सकते हैं।’ एक प्रश्न के उत्तर में सिंह ने कहा कि यात्रा की दूरी करीब एक हजार किलोमीटर है और वह प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलेंगे।


    ‘आडवाणी की रथयात्रा के दौरान दिया था चंदा’

    पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने कहा, ‘मैंने लालकृष्ण आडवाणी (वरिष्ठ भाजपा नेता) की रथयात्रा के दौरान चंदा दिया था क्योंकि मुझे भगवान राम और मंदिर पर आस्था है। उस पहले अभियान में एकत्र किए गए चंदे का आज तक कोई हिसाब नहीं दिया गया। उच्चतम न्यायालय के फैसले (जिससे मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ) के बाद फिर से चंदा अभियान चलाया गया।’


    ‘मुकदमा दायर करते हुए वापस मांगूंगा चंदा’

    उन्होंने कहा, ‘मैंने तय किया है कि अयोध्या में मुकदमा दायर करूंगा कि मेरे द्वारा दिया गया चंदा गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। मैं अपना चंदा वापस चाहता हूं।’ सिंह का यह बयान राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की कथित चोरी के आरोपों के संदर्भ में आया, जिनकी जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा है।


    ‘महाकाल मंदिर के पास की जमीन RSS को दी गई थी’

    सिंह ने दावा किया कि जब दूसरी बार विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने चंदा अभियान चलाया तो उन्होंने संगठन पर भरोसा नहीं होने के कारण उसमें योगदान नहीं दिया और सीधे 1 लाख 11 हजार रुपए का दान किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह राम मंदिर में चढ़ावे और कीमती सामान की चोरी हुई है, उसी तरह उज्जैन में भी महाकाल मंदिर के पास की एक बहुमूल्य भूमि भाजपा की सुंदरलाल पटवा सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दे दी थी।


    ‘होटल के लिए अब उस स्कूल को गिराया जा रहा’
    सिंह ने आगे कहा, ‘मेरी सरकार आने के बाद मैंने इस पर आपत्ति जताई थी।’ उन्होंने आरोप लगाया कि अब वहां संचालित एक स्कूल को होटल बनाने के लिए गिराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वहां ठहरने वाले लोगों को स्वत: वीआईपी दर्शन की सुविधा मिल जाती है और संबंधित संगठन वहां से मिले दान का उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसकी भी जांच की मांग की जाएगी।

  • बारिश बनी आफत मध्य प्रदेश के कई जिले जलमग्न शिप्रा उफान पर मकान बहे खेत डूबे अगले 24 घंटे बेहद भारी

    बारिश बनी आफत मध्य प्रदेश के कई जिले जलमग्न शिप्रा उफान पर मकान बहे खेत डूबे अगले 24 घंटे बेहद भारी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और लगातार हो रही तेज बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। उज्जैन से लेकर पांढुर्णा खरगोन बालाघाट और ग्वालियर तक बारिश ने तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। नदियां उफान पर हैं सड़कें जलमग्न हो गई हैं खेतों में पानी भर गया है और कई इलाकों में लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटे को बेहद संवेदनशील बताते हुए कई जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

    उज्जैन में लगातार हुई मूसलाधार बारिश के कारण शिप्रा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। नदी किनारे बने कई मंदिर पानी में डूब गए जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इसी दौरान गांवड़ी लोढ़ा क्षेत्र में एक सहायक सचिव बाइक सहित तेज बहाव में बह गए जिनकी तलाश के लिए राहत और बचाव दल लगातार अभियान चला रहा है। एक अन्य घटना में पुलिया पार करते समय एक युवक मोटरसाइकिल सहित तेज धारा में बह गया लेकिन उसने पेड़ की टहनियों का सहारा लेकर अपनी जान बचा ली। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है जिसने लोगों को झकझोर दिया।

    इंदौर में भी बारिश का असर गंभीर रहा जहां दो दिन पहले पानी में बहे एक व्यक्ति का शव काफी तलाश के बाद बरामद किया गया। पांढुर्णा जिले में नदी के किनारे बने कई कच्चे मकान तेज बहाव में ढह गए जबकि घरेलू सामान और पशु भी पानी में बह गए। खरगोन के कसरावद क्षेत्र में कुछ घंटों की तेज बारिश ने खेतों और सड़कों को जलमग्न कर दिया। बालाघाट के कई वार्डों में जलभराव के कारण लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया। ग्वालियर रतलाम और अन्य जिलों में भी लगातार बारिश का दौर जारी है।

    मौसम विभाग के अनुसार खंडवा और हरदा में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है। धार बड़वानी खरगोन देवास बुरहानपुर और बैतूल सहित कई जिलों में भी अत्यधिक वर्षा होने का अनुमान है। वहीं उज्जैन रतलाम राजगढ़ रायसेन नर्मदापुरम सागर छिंदवाड़ा बालाघाट डिंडौरी और अनूपपुर सहित अनेक जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। विभाग का कहना है कि कुछ स्थानों पर चार से आठ इंच तक बारिश दर्ज हो सकती है जिससे नदियों और जलाशयों का जलस्तर और बढ़ सकता है।

    प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी नालों और पुलियाओं को पार करने का प्रयास न करें तथा मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। राहत और बचाव दल लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

    मानसून की यह सक्रियता कृषि के लिए राहत लेकर आई है लेकिन कई क्षेत्रों में यह बारिश अब संकट का रूप ले चुकी है। यदि अगले कुछ दिनों तक वर्षा का यही सिलसिला जारी रहा तो बाढ़ और जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में नागरिकों की सतर्कता और प्रशासन की सक्रियता ही संभावित नुकसान को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी।