Tag: Ujjain

  • सुरेश रैना ने पत्नी संग किए बाबा महाकाल के दर्शन, तड़के भस्म आरती में शामिल होकर लिया आशीर्वाद

    सुरेश रैना ने पत्नी संग किए बाबा महाकाल के दर्शन, तड़के भस्म आरती में शामिल होकर लिया आशीर्वाद


    नई दिल्ली। पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना रविवार, 27 सितंबर को मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी पत्नी के साथ भगवान महाकाल के दर्शन किए और सुबह आयोजित होने वाली दिव्य भस्म आरती में भाग लिया। इस दौरान रैना पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए। क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचान बनाने वाले रैना ने महाकाल के दरबार में पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    सुरेश रैना रविवार तड़के अपनी पत्नी के साथ महाकाल मंदिर पहुंचे। दोनों ने मंदिर में होने वाली प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल की आराधना की। इस दौरान उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर आरती के दर्शन किए। बताया गया कि रैना ने लगभग दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर इस धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया और बाबा महाकाल की भक्ति में समय बिताया।

    महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन सुबह होने वाली भस्म आरती विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखती है। इस आरती में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। भगवान महाकाल के भक्तों के लिए भस्म आरती के दर्शन को विशेष पुण्यदायी और आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है। सुरेश रैना भी अपनी पत्नी के साथ इसी धार्मिक आयोजन में शामिल हुए और भगवान के समक्ष पूजा-अर्चना की।

    आरती के दौरान रैना का पूरा ध्यान धार्मिक अनुष्ठान पर केंद्रित रहा। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर भगवान महाकाल के दर्शन किए। सुबह के समय मंदिर परिसर में होने वाले इस आयोजन में श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हैं। रैना की उज्जैन यात्रा भी इसी धार्मिक आस्था और दर्शन से जुड़ी रही।

    भस्म आरती संपन्न होने के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति की ओर से सुरेश रैना का स्वागत और सम्मान किया गया। मंदिर में उनके आगमन के अवसर पर उन्हें सम्मानित किया गया। इस तरह उनकी मंदिर यात्रा का समापन भगवान महाकाल के दर्शन और मंदिर समिति की ओर से किए गए सम्मान के साथ हुआ।

    उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजनों और विशेष आरतियों के दौरान मंदिर में भक्तों की विशेष आस्था देखने को मिलती है। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश के प्रमुख धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल है, जिसमें भाग लेने के लिए श्रद्धालु पहले से दर्शन की व्यवस्था करते हैं।

    सुरेश रैना की उज्जैन यात्रा के दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रहीं। दोनों ने एक साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए और भस्म आरती में हिस्सा लिया। क्रिकेट से जुड़े अपने सार्वजनिक जीवन के अलावा रैना की यह यात्रा धार्मिक आस्था से जुड़ी रही। भगवान महाकाल के दरबार में पहुंचकर उन्होंने पूजा-अर्चना की और आध्यात्मिक वातावरण में समय बिताया।

  • उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर पर खुद गेती चलाकर शुरुआत की

    उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने पैतृक घर पर खुद गेती चलाकर शुरुआत की

    उज्जैन: में सिंहस्थ की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक मकान तक पहुंच गई है। रविवार को मुख्यमंत्री ने अपने पैतृक घर के प्रभावित हिस्से पर खुद गेती चलाकर सड़क चौड़ीकरण के काम की शुरुआत की। इस दौरान उनके बचपन से जुड़ा यह मकान भी विकास योजना के दायरे में आया।

    जिस घर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बचपन बीता, उसी मकान का हिस्सा अब प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए हटाया जा रहा है। यह घर उनके परिवार की पुरानी स्मृतियों से जुड़ा रहा है। ऐसे में मकान के प्रभावित हिस्से को खुद हटाने की शुरुआत करना इस पूरी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा।

    सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए उज्जैन में सड़क और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मार्गों के चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। इसी क्रम में खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक जाने वाले मार्ग को चौड़ा किया जाना है।

    करीब 730 मीटर लंबे इस मार्ग की प्रस्तावित चौड़ाई 15 मीटर रखी गई है। सड़क चौड़ीकरण और इससे जुड़े विकास कार्य पर लगभग 9.80 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इस मार्ग को चौड़ा करने की कार्रवाई सिंहस्थ के दौरान यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।

    प्रस्तावित चौड़ीकरण की जद में कई भवन आए हैं। इनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पैतृक मकान भी शामिल है। रविवार को मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने मकान के प्रभावित हिस्से पर गेती चलाकर इस काम की शुरुआत की। इस दौरान घर और उससे जुड़ी पुरानी स्मृतियों का भावनात्मक पक्ष भी सामने आया।

    पैतृक घर किसी भी व्यक्ति के लिए सिर्फ एक इमारत नहीं होता। उसमें परिवार के साथ बिताया समय, बचपन की यादें और जीवन के शुरुआती दौर से जुड़ी कई स्मृतियां होती हैं। मुख्यमंत्री के मामले में भी यह मकान उनके बचपन से जुड़ा रहा है। ऐसे में सड़क चौड़ीकरण के लिए इसके हिस्से को हटाने की प्रक्रिया सामान्य निर्माण कार्य से अलग भावनात्मक संदर्भ रखती है।

    हालांकि सड़क चौड़ीकरण का काम सार्वजनिक सुविधा और आगामी सिंहस्थ की तैयारियों से जुड़ा है। इसी योजना के तहत खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक मार्ग को निर्धारित चौड़ाई में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए प्रभावित भवनों के हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    रविवार की कार्रवाई में मुख्यमंत्री का अपने ही पैतृक मकान पर गेती चलाना इस बात को भी रेखांकित करता है कि प्रस्तावित सड़क परियोजना का असर उनके परिवार की संपत्ति पर भी पड़ा है। जिस घर से उनका बचपन जुड़ा रहा, उसी के हिस्से को उन्होंने स्वयं हटाने की शुरुआत की।

    उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का यह काम शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़ा है। 730 मीटर लंबे मार्ग को 15 मीटर चौड़ा करने की योजना पर लगभग 9.80 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मुख्यमंत्री के पैतृक मकान पर रविवार को गेती चलने के साथ इस हिस्से में चौड़ीकरण की कार्रवाई ने एक अलग मानवीय पहलू भी सामने रखा।

  • उज्जैन दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाकाल मंदिर में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण, जानें पूरा कार्यक्रम

    उज्जैन दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाकाल मंदिर में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण, जानें पूरा कार्यक्रम

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार, 27 सितंबर को उज्जैन के दौरे पर हैं। इस दौरान वे शहर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में विकास कार्यों का भूमिपूजन, लोकार्पण और अन्य गतिविधियां निर्धारित हैं। इसके साथ ही वे सिंगल क्लिक के माध्यम से विकास कार्यों की सौगात देंगे। उज्जैन में कार्यक्रम पूरे करने के बाद मुख्यमंत्री भोपाल के लिए रवाना होंगे, जहां शाम को भी उनके कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

    मुख्यमंत्री का उज्जैन दौरा सुबह से ही शुरू हो गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे सुबह 7 बजे दशहरा मैदान पहुंचे। यहां सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद सुबह 7:55 बजे मुख्यमंत्री वीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचे। सुबह के कार्यक्रम पूरे होने के बाद दिन के अन्य आयोजनों की तैयारियां की गईं।

    मुख्यमंत्री का अगला प्रमुख कार्यक्रम महाकाल मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा। निर्धारित समय के अनुसार, वे सुबह 10:45 बजे महाकाल मंदिर के पार्किंग परिसर में अन्न क्षेत्र के सामने पहुंचेंगे। इसके बाद सुबह 10:50 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान विकास कार्यों से जुड़े भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन करेंगे और तैयार कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। इसके अलावा, सिंगल क्लिक के माध्यम से विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया जाएगा। इस आयोजन में प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को सुनने का कार्यक्रम भी शामिल है। धार्मिक नगरी उज्जैन में आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    महाकाल मंदिर परिसर में निर्धारित कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12:40 बजे वीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचेंगे। यहां से आगे के कार्यक्रमों में शामिल होने की तैयारी करेंगे। इसके बाद दोपहर 2 बजे वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शाजापुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव से जुड़ेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की ऑनलाइन सहभागिता निर्धारित है।

    दोपहर 2:20 बजे मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से उज्जैन हेलीपैड पहुंचेंगे। इसके बाद दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे के बीच हेलीकॉप्टर से भोपाल के स्टेट हैंगर के लिए रवाना होंगे। राजधानी पहुंचने के बाद उनका अगला कार्यक्रम पार्टी कार्यालय में निर्धारित है। दोपहर 3:25 बजे वे कार से पार्टी कार्यालय पहुंचेंगे और 3:30 बजे स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां का कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री अपने निवास के लिए रवाना होंगे।

    मुख्यमंत्री का दिन का कार्यक्रम यहीं समाप्त नहीं होगा। शाम 6:30 बजे वे भोपाल के रविंद्र भवन पहुंचेंगे। यहां निर्धारित स्थानीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वे कार से वापस अपने निवास के लिए रवाना होंगे।

    इस प्रकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 27 सितंबर का कार्यक्रम उज्जैन और भोपाल के बीच निर्धारित है। उज्जैन में विकास कार्यों के भूमिपूजन, लोकार्पण और धार्मिक नगरी से जुड़े आयोजनों में भाग लेने के बाद वे राजधानी में शाम के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। पूरे दिन के दौरे में धार्मिक, विकासात्मक, कृषि और संगठनात्मक गतिविधियां उनके कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी।

  • उज्जैन: सड़क चौड़ीकरण की जद में आया CM यादव और उनकी बहन का मकान… जानें क्या बोले परिजन?

    उज्जैन: सड़क चौड़ीकरण की जद में आया CM यादव और उनकी बहन का मकान… जानें क्या बोले परिजन?


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में सिंहस्थ महाकुम्भ 2028 (Simhastha Mahakumbh 2028) की तैयारी के सिलसिले में उज्जैन (Ujjain) में बड़े पैमाने पर सड़कों के चौड़ीकरण (Road widening) का काम चल रहा है। अब इस काम की जद में राज्य के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) और उनकी बड़ी बहन व निगम सभापति कलावती यादव (Kalavati Yadav) का पैतृक मकान का भी आ गया है। जिसके बाद नगर निगम की टीम ने उनके मकानों की नप्ती कर लाल निशान लगा दिए हैं। उधर सीएम के परिजन भी शहर के विकास के लिए अपने मकान के प्रभावित हिस्से को तोड़ने के लिए तैयार हैं।

    बता दें कि उज्जैन में साल 2028 में लगने वाले सिंहस्थ महाकुम्भ को देखते हुए उज्जैन की प्रमुख सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। इसमे इंदौर रोड सहित कई स्थानों पर पुल के निर्माण किए जा रहे हैं, वहीं शहर के भीतर करीब 62 प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा शहर के सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी डैम और खान डायवर्सन सहित कई बड़े प्रोजेक्ट भी सिंहस्थ की तैयारियों का हिस्सा हैं। इसी के तहत शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर करीब 29 किमी लंबे घाट भी विकसित किए जा रहे है।


    730 मीटर लंबी रोड को 15 मीटर चौड़ा किया जाना बाकी

    इसके साथ ही उज्जैन में कई मंदिरों व मस्जिदों सहित कई धर्म स्थलों के कुछ हिस्सों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है, इसमे कंठाल, तेलीवाड़ा, सर्राफा, पाटनी बाजार जैसे कुछ इलाकों में सड़कों का चौड़ीकरण पूरा हो चुका है। अब खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक जाने वाली 730 मीटर लंबी रोड को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इसकी जद में 272 इमारतें आ रही हैं। इनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पैतृक मकान और उनकी बड़ी बहन नगर निगम सभापति कलावती यादव का घर भी शामिल है।


    1974 में बना था मकान, CM का बचपन बीता

    प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दादा रामचंद्र यादव ने 1974 में यह मकान बनवाया था और इस मकान में ही उनके दोनों बेटे पूनमचंद्र यादव और शंकरलाल यादव सहित सभी परिजनों का बचपन बीता। पूनमचंद्र यादव के 5 बच्चे हैं। इनमें नंदलाल यादव, नारायण यादव, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बेटी ग्यारसी बाई और उज्जैन की नगर निगम सभापति कलावती यादव शामिल हैं। फिलहाल, इस मकान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चाचा शंकरलाल यादव का परिवार रहता है। सड़क चौड़ीकरण में इस मकान के साथ कलावती यादव के मकान का भी करीब 15 फीट हिस्सा आ रहा है।

    ‘शहर के विकास के लिए प्रभावित हिस्से को तोड़ने को तैयार’
    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की बहन और निगम सभापति कलावती यादव का कहना है कि वे शहर के विकास के लिए अपने मकान के प्रभावित हिस्से को तोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक सड़क चौड़ीकरण में हमारा पैतृक मकान भी आ रहा है। इस इलाके में रहने वाले सभी लोग हमारे परिवार जैसे हैं। किसी के साथ भाजपा-कांग्रेस, हिंदू-मुस्लिम के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। जिन नागरिकों के मकान प्रभावित हो रहे हैं, उनकी समस्याओं को अधिकारियों से चर्चा कर दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।

  • MP: उज्जैन पहुंचे संत बम-बम भोला, खड़े हनुमान जी के दर्शन किए, प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की

    MP: उज्जैन पहुंचे संत बम-बम भोला, खड़े हनुमान जी के दर्शन किए, प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) स्थित खड़े हनुमान मंदिर (Khade Hanuman Temple) इन दिनों आस्था और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। प्रतिमा को लेकर चल रही प्रक्रिया के बीच मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में साधु-संतों की मौजूदगी भी लगातार देखी जा रही है। इसी क्रम में संत ‘बम-बम भोला’ (Saint ‘Bam-Bam Bhola’) खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया और भगवान हनुमान के दर्शन किए।


    बोले- धर्म की तुलना विज्ञान से न करें
    दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में संत ‘बम-बम भोला’ ने कहा कि धर्म और विज्ञान की तुलना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में AI और ड्रोन जैसी तकनीकें आ चुकी हैं, लेकिन उनके अनुसार धर्म और सनातन परंपरा को विकास की बहस से अलग समझना चाहिए। उन्होंने खड़े हनुमान की प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग की और कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े स्थानों को लेकर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।


    मंदिर के आसपास कथित अतिक्रमण का मुद्दा उठाया

    संत ने मंदिर के सामने मस्जिद की ओर से कथित अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए इसे हटाने की मांग भी उठाई। उन्होंने मुस्लिम समाज से भाईचारे का परिचय देते हुए इस कथित अतिक्रमण को हटाने की अपील की। यह आरोप संत के बयान के रूप में सामने आया है। ऐसे दावे की प्रशासनिक पुष्टि या अतिक्रमण की कानूनी स्थिति को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने वाली जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।


    मंदिर में बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

    खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रही चर्चा के बीच यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग मंदिर पहुंच रहे हैं और हनुमान चालीसा, सुंदरकांड तथा धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।

    खड़े हनुमान की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया से जोड़कर विवाद सामने आया था। प्रशासन ने बाद में कहा कि प्रतिमा को लेकर विशेषज्ञों की जांच और संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों से सहमति के बाद ही आगे फैसला लिया जाएगा। फिलहाल खड़े हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, संतों की मौजूदगी और प्रतिमा को लेकर जारी चर्चा ने इसे उज्जैन के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में ला दिया है।

  • उज्जैन में विकास कार्यों का सीएम मोहन यादव ने लिया जायजा, अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश

    उज्जैन में विकास कार्यों का सीएम मोहन यादव ने लिया जायजा, अधिकारियों को समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा करने के निर्देश

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को उज्जैन में चल रहे विभिन्न निर्माण और विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने नीलगंगा रोड क्षेत्र में पहुंचकर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों से परियोजनाओं से जुड़ी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के साथ निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

    उज्जैन में आगामी सिंहस्थ को देखते हुए शहर के बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर आवागमन को सुगम बनाना और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान इन कार्यों की प्रगति और उनकी गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं को देखा।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन शहर के मध्य स्थित बाबा महाकाल के मुख्य मार्ग का चौड़ीकरण शहर के विकास और सौंदर्यीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस मार्ग के चौड़ीकरण से स्थानीय यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ आने वाले समय में श्रद्धालुओं के आवागमन को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में प्रमुख मार्गों का विकास और उनका बेहतर प्रबंधन आवश्यक है। चौड़े और व्यवस्थित मार्ग श्रद्धालुओं के आवागमन को आसान बनाने में मदद करेंगे और उज्जैन आने वाले लोगों के अनुभव को बेहतर बनाने में भी भूमिका निभाएंगे।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों से संबंधित अधिकारियों से प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि काम केवल समय पर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता भी निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए लगातार निगरानी रखने पर भी जोर दिया गया।

    उज्जैन में सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण और अन्य अधोसंरचना से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। शहर के प्रमुख मार्गों को बेहतर बनाने की दिशा में कई परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। इनका उद्देश्य आयोजन के दौरान बढ़ने वाले यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करना है।

    मुख्यमंत्री ने मार्ग चौड़ीकरण के लिए प्रशासन के साथ स्वेच्छा से सहयोग करने वाले स्थानीय नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने सहयोग करने वाले लोगों का हृदय से अभिनंदन करते हुए कहा कि विकास कार्यों में स्थानीय नागरिकों की सहभागिता महत्वपूर्ण है। शहर के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने में नागरिक सहयोग की भूमिका को उन्होंने सराहा।

    निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्यों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने परियोजनाओं की प्रगति पर नियमित नजर रखने और निर्धारित गुणवत्ता के अनुसार काम पूरा कराने पर जोर दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि निर्माण कार्यों के कारण आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।

    सिंहस्थ के मद्देनजर उज्जैन में अधोसंरचना विकास पर लगातार जोर दिया जा रहा है। सड़क, मार्ग चौड़ीकरण और अन्य सुविधाओं से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री के निरीक्षण का उद्देश्य भी चल रहे कार्यों की स्थिति जानना और उन्हें तय मानकों के अनुसार आगे बढ़ाना रहा।

    मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों के सामने निर्माण कार्यों को समयसीमा और गुणवत्ता के साथ पूरा करने की जिम्मेदारी और महत्वपूर्ण हो गई है। उज्जैन में जारी विकास कार्यों से आने वाले समय में शहर की यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं के आवागमन को बेहतर बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • MP: उज्जैन में शिप्रा और महाकाल महालोक में एकसाथ जले 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड

    MP: उज्जैन में शिप्रा और महाकाल महालोक में एकसाथ जले 33.27 लाख दीये, बना वर्ल्ड रिकॉर्ड


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में गुरुवार शाम शिप्रा नदी (Shipra River) के घाटों से लेकर महाकाल महालोक (Mahakal Mahalok) तक ऐसा दीपोत्सव हुआ, जिसमें एक साथ लाखों दीये प्रज्ज्वलित किए गए. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के जन्मदिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में शिप्रा तट और महाकाल महालोक में कुल 33 लाख 27 हजार दीये एक साथ जलाए गए.

    आयोजकों के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर एक साथ दीप प्रज्ज्वलित कर विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. यह आयोजन ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत के तौर पर किया गया. उज्जैन के रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह मौजूद रहे. सभी ने उज्जैनवासियों के साथ मिलकर दीप प्रज्ज्वलित किए।

    कार्यक्रम के लिए शाम 7 बजे का समय तय किया गया था. सायरन बजते ही शिप्रा नदी के अलग-अलग घाटों और महाकाल महालोक में एक साथ दीप प्रज्ज्वलन शुरू हुआ. इस दौरान 25 हजार से अधिक वॉलंटियर्स के साथ श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक भी शामिल हुए. कुछ ही देर में शिप्रा के घाटों पर दूर तक दीयों की कतारें दिखाई देने लगीं. रामघाट, दत्त अखाड़ा, केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट और भूखी माता घाट समेत अलग-अलग स्थान रोशनी से जगमगा उठे. महाकाल महालोक में भी दीप प्रज्ज्वलित किए गए. दीयों की रोशनी के बीच शिप्रा तट का नजारा काफी आकर्षक नजर आया. बड़ी संख्या में लोग इस सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन का हिस्सा बने. आयोजन में शामिल लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।


    रामघाट पर मुख्यमंत्री ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’

    उज्जैन के रामघाट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया. उनके साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह भी मौजूद रहे. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अन्य अतिथियों ने शिप्रा आरती में हिस्सा लिया. मां शिप्रा की आराधना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की गई. आयोजन से जुड़े लोगों के मुताबिक, दीप प्रज्ज्वलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों के दौरान राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र सेवा से जोड़कर देखा गया. इसी भाव के साथ उज्जैन में ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया गया।

    उज्जैन में शिप्रा के विभिन्न घाटों और महाकाल महालोक में कुल 33 लाख 27 हजार दीये प्रज्ज्वलित किए गए. इस सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन को आयोजकों ने विश्व रिकॉर्ड बताया है. इससे पहले कार्यक्रम के लिए 25 लाख से ज्यादा दीये जलाने की तैयारी की गई थी, लेकिन अंतिम आयोजन में यह संख्या 33.27 लाख तक पहुंची. दीप प्रज्ज्वलन के दौरान बड़ी संख्या में वॉलंटियर्स की भूमिका रही. घाटों पर पहले से दीयों को व्यवस्थित किया गया था. सायरन बजने के बाद सभी ने एक साथ दीप जलाना शुरू किया, जिससे कुछ ही समय में पूरा आयोजन क्षेत्र रोशनी से भर गया।

    यह दीपोत्सव सिर्फ उज्जैन तक सीमित नहीं रहा. आयोजन के तहत मध्य प्रदेश के सभी जिलों और 845 आइकॉनिक प्लेस पर भी एक साथ दीये प्रज्ज्वलित किए गए. आयोजकों के अनुसार, पूरे प्रदेश में कुल 3 करोड़ 55 लाख दीये जलाए गए. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में प्रदेशभर के अलग-अलग स्थानों को दीपों से सजाया गया. उज्जैन इसका मुख्य केंद्र रहा, जहां शिप्रा तट और महाकाल महालोक में एक साथ 33 लाख 27 हजार दीये जलाए गए।


    घाटों से महाकाल महालोक तक रोशनी

    शाम होते ही उज्जैन के प्रमुख घाटों का दृश्य बदल गया. रामघाट, दत्त अखाड़ा, केदारेश्वर घाट, सुनहरी घाट और भूखी माता घाट पर दीयों की कतारें नजर आईं. दूसरी तरफ महाकाल महालोक भी दीपों की रोशनी से जगमगा उठा. हजारों श्रद्धालुओं और नागरिकों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में एक साथ दीप प्रज्ज्वलित करने का दृश्य लोगों के लिए खास आकर्षण रहा. 25 हजार से अधिक वॉलंटियर्स ने इस आयोजन में हिस्सा लिया. उज्जैन में हुए इस दीपोत्सव के साथ आयोजकों के अनुसार विश्व रिकॉर्ड बनाया गया. वहीं पूरे मध्य प्रदेश में 845 आइकॉनिक प्लेस समेत अलग-अलग स्थानों पर 3.55 करोड़ दीये प्रज्ज्वलित किए गए. इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के जरिए प्रदेशभर में सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन किया गया।

  • NHAI सदस्य विपिनेश शर्मा ने मध्य प्रदेश में उज्जैन-गरोठ और तेजाजी नगर-बलवाड़ा हाईवे परियोजनाओं का निरीक्षण किया

    NHAI सदस्य विपिनेश शर्मा ने मध्य प्रदेश में उज्जैन-गरोठ और तेजाजी नगर-बलवाड़ा हाईवे परियोजनाओं का निरीक्षण किया

    मध्य प्रदेश: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के सदस्य परियोजना विपिनेश शर्मा ने मध्य प्रदेश के दौरे के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने करीब 140 किलोमीटर लंबे उज्जैन-गरोठ कॉरिडोर के तीनों पैकेजों और इंदौर से खंडवा के बीच निर्माणाधीन 33.4 किलोमीटर लंबे तेजाजी नगर-बलवाड़ा प्रोजेक्ट का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति, गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था और परियोजनाओं से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

    उज्जैन-गरोठ परियोजना के निर्माणाधीन पैकेज-1 के निरीक्षण के दौरान शर्मा ने अलग-अलग निर्माण गतिविधियों की स्थिति देखी। उन्होंने निर्माणाधीन RE Wall समेत विभिन्न संरचनात्मक कार्यों का जायजा लिया और निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार काम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष जोर देते हुए स्पष्ट किया कि इस स्तर पर किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।

    शर्मा ने अधिकारियों और संबंधित एजेंसी को निर्धारित समयसीमा के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। उन्होंने कार्यस्थल पर पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रखने, जरूरी सुरक्षा प्रबंधों को बनाए रखने और निर्माण गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उनके निरीक्षण में परियोजना की प्रगति के साथ काम की गुणवत्ता और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन को प्रमुखता दी गई।

    उज्जैन-गरोठ परियोजना के दो पूर्ण हो चुके पैकेजों का भी उन्होंने निरीक्षण किया। इस दौरान हाईवे की मौजूदा स्थिति, यातायात व्यवस्था और सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की गई। शर्मा ने हाईवे पर मौजूद अतिक्रमण को लेकर आपत्ति जताई और संबंधित अधिकारियों को इन्हें प्राथमिकता के आधार पर जल्द हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने हाईवे को पूरी तरह अतिक्रमण-मुक्त बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी और नियमित पेट्रोलिंग पर भी जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि यह एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे है, इसलिए यातायात प्रबंधन और सड़क उपयोगकर्ताओं की सुविधा से जुड़े निर्धारित मानकों का प्रभावी तरीके से पालन होना चाहिए। निरीक्षण के दौरान हाईवे पर लगाए गए CCTV कैमरों से होने वाली निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। शर्मा ने कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर विभिन्न स्थानों पर कैमरों के माध्यम से की जा रही निगरानी की जानकारी ली और अधिकारियों को लगातार प्रभावी निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए।

    शर्मा ने हाईवे पेट्रोलिंग वाहनों और NHAI एम्बुलेंस की उपलब्धता तथा उनके संचालन की व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में सड़क उपयोगकर्ताओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी व्यवस्थाएं हमेशा तैयार और प्रभावी रहनी चाहिए। उन्होंने नियमित निगरानी के साथ त्वरित रिस्पॉन्स व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

    इसके बाद उन्होंने इंदौर से खंडवा के बीच निर्माणाधीन 33.4 किलोमीटर लंबे तेजाजी नगर-बलवाड़ा प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। इस दौरान परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्सों और निर्माणाधीन टनल का जायजा लिया गया। उन्होंने टनल निर्माण की प्रगति तथा साइट पर चल रहे विभिन्न कार्यों की स्थिति की समीक्षा की।

    शर्मा ने निर्माण कार्यों में गति बनाए रखने के साथ बेहतर समन्वय और निरंतर मॉनिटरिंग पर जोर दिया। उन्होंने निर्धारित तकनीकी प्रक्रियाओं और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए परियोजना के काम को व्यवस्थित एवं प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के साथ उन्होंने प्रगति और कार्ययोजना के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा भी की।

    निरीक्षण के दौरान उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, अधिकारियों के बीच प्रभावी समन्वय और परियोजना की नियमित समीक्षा के जरिए निर्माण गतिविधियों को गति देने पर भी जोर दिया गया।

  • ‘प्रतिमा हटाई तो करूंगी अनशन’, उज्जैन पहुंचीं हर्षा रिछारिया, खड़े हनुमान के किए दर्शन

    ‘प्रतिमा हटाई तो करूंगी अनशन’, उज्जैन पहुंचीं हर्षा रिछारिया, खड़े हनुमान के किए दर्शन


    उज्जैन। खड़े हनुमान की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण के लिए दूसरी जगह शिफ्ट करने का मामला लगातार चर्चा में है। इसी बीच प्रयागराज कुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया उज्जैन पहुंचीं और खड़े हनुमान मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने प्रतिमा को मौजूदा स्थान से हटाने की कोशिश का विरोध करते हुए कहा कि यदि प्रतिमा हटाई गई तो वे अनशन पर बैठेंगी।

    मीडिया से बातचीत में हर्षा रिछारिया ने कहा कि विकास और सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हिंदू समाज पहले ही कई मंदिरों को लेकर काफी कुछ स्वीकार कर चुका है। ऐसे में प्रशासन को कम से कम खड़े हनुमान मंदिर को छोड़ देना चाहिए और प्रतिमा को उसके वर्तमान स्थान पर ही रहने देना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि यदि प्रतिमा को हटाने की कोशिश की गई तो वे इसका विरोध करेंगी। हर्षा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रतिमा हटाई गई तो वह अनशन करेंगी।

    तीन बार हटाने की कोशिश, नहीं हिली प्रतिमा

    दरअसल, उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के काम के दौरान खड़े हनुमान की प्रतिमा को दूसरी जगह स्थापित करने की तैयारी की गई थी। नई जगह मंदिर का ढांचा भी तैयार किया जा चुका है। योजना के मुताबिक प्रतिमा को वहां स्थापित किया जाना था, लेकिन अब तक खड़े हनुमान अपनी पुरानी जगह पर ही विराजमान हैं।

    बताया गया है कि प्रतिमा को तीन बार हटाने की कोशिश की जा चुकी है, लेकिन वह अपनी जगह से नहीं हिली। विवाद का एक प्रमुख कारण प्रतिमा की दिशा भी बताई जा रही है। वर्तमान में खड़े हनुमान की प्रतिमा दक्षिणमुखी है, जबकि नई जगह पर प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर होने की बात सामने आई है। इसी को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में विरोध है।

    50 फीट चौड़ी हो चुकी है सड़क

    उज्जैन शहर में सड़क चौड़ीकरण के प्रोजेक्ट के तहत कई पुराने निर्माण हटाए गए हैं। कान्थल चौराहे से छतरी चौक तक सड़क को 50 फीट चौड़ा किया गया है। इसी प्रक्रिया के बीच खड़े हनुमान की प्रतिमा सड़क के बीच दिखाई दे रही है और इसे दूसरी जगह शिफ्ट करने को लेकर विवाद बना हुआ है।

    अब हर्षा रिछारिया के मंदिर पहुंचने से यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दर्शन के बाद उन्होंने प्रतिमा को हटाने की कोशिश होने पर अनशन करने की चेतावनी दी है।

  • MP: उज्जैन में प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान जी प्रतिमा… श्रद्धालु मान रहे चमत्कार

    MP: उज्जैन में प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी टस से मस नहीं हुई खड़े हनुमान जी प्रतिमा… श्रद्धालु मान रहे चमत्कार


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस कारण उज्जैन के प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी (Standing Hanuman Ji) के मंदिर को हटाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन की टीमों ने मंदिर का ढांचा तोड़ दिया है लेकिन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टस से मस होने का नाम नहीं ले रही है। प्रशासन की तमाम कोशिशें विफल रही हैं। इसको श्रद्धालु चमत्कार मान रहे हैं। विरोध में हिंदूवादी संगठनों और भक्तों ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ कर मूर्तिं को हटाने का विरोध किया। अब तकनीकी जांच की बात कही जा रही है।


    सिहस्थ के मद्देनजर चौड़ी की जा रही सड़क

    अधिकारियों ने बताया कि उज्जैन में सिहस्थ 2028 की तैयारियों के मद्देनजर सड़क का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इस चौड़ीकरण की हद में खड़े हनुमान जी के मंदिर का कुछ हिस्सा आ रहा है जिसे प्रसासन हटाने में लगा हुआ है। यह क्षेत्र कंठाल चौराहे से लेकर गोपाल मंदिर तक के मार्ग में है। मंदिर का ढांचा हटाने के बाद प्रशासन खड़े हनुमान जी की मूर्ति को बिना नुकसान पहुंचाए हटाना चाहता है।


    तमाम कोशिशें बेकार, टस से मस नहीं हुई प्रतिमा

    बताया जाता है कि बीते एक हफ्ते के भीतर प्रशासन की टीमों ने तीन बार हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की कोशिशें की लेकिन मूर्ति टस से मस नहीं हुई। अब श्रद्धालु, संत और हिंदूवादी संगठन इसे चमत्कार मान रहे हैं। लोग प्रशासन से मूर्ति को नहीं हटाने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मौजूदा वक्त में हनुमान जी की प्रतिमा दक्षिण दिशा की ओर है जबकि प्रशासन ने टंकी चौराहे पर मंदिर के लिए जो जगह दी है वहां प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर होगा।


    जैसे पता चल कि प्रशासन आने वाला है, लग गया जमावड़ा

    श्रद्धालुओं का कहना है कि इससे मंदिर के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व पर असर पड़ सकता है। बताया जाता है कि मंगलवार को बाबा महाकाल की राजसी सवारी के बाद खबरें फैलीं कि प्रशासन की टीम एक बार फिर मूर्ति को हटाने के लिए पहुंच सकती है। इसके बाद लोगों का जमावड़ा लगने लगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता और महामंडलेश्वर शैलेशानंद मंदिर पहुंच गए।


    हनुमानजी से मत उलझो, मिट जाओगे…

    भारी भीड़ के बीच भक्तों ने मंदिर के सामने हनुमान चालीसा का पाठ किया। लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हो गए। नारेबाजी करते हुए लोगों ने हनुमान जी की प्रतिमा को किसी भी सूरत में नहीं हटाने देने की चेतावनी दी। हिंदूवादी नेता रूपेश ठाकुर ने सरकार विकास के नाम पर 60 मंदिर हटा चुकी है। मैं सरकार से दो-टूक कहना चाहता हूं कि अटल विहारी वाजपेयी ने कहा था श्री राम जी मत उलझो मिट जाओगे। आज हम कहते हैं हनुमानजी से मत उलझो, मिट जाओगे।


    बढ़ रहा आक्रोश, विरोध प्रदर्शन होगा तेज

    रूपेश ठाकुर ने आगे कहा कि महापौर और पार्षद को इस्तीफा दे देना चाहिए। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों का कहना है कि उनका विरोध और तेज होगा। मौजूदा वक्त में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा टेंट में विराजमान है। वहीं प्रशासन दिन प्रति दिन बढ़ते लोगों के आक्रोश के कारण कोई मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता है। प्रशासन खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने की कोशिशें कर रहा है। इसके लिए बेहद सावधानी बरती जा रही है।


    पुरातत्व विभाग की टीम भी लौटी

    प्रशासन की ओर से तमाम कोशिशें की जा चुकी हैं लेकिन मूर्ति हिलने का नाम नहीं ले रही है। इतना ही नहीं एक बार पुरातत्व विभाग की टीम भी लौट चुकी है। आलम यह कि खड़े हनुमान जी के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। नगर निगम की ओर से प्रतिमा को शिफ्ट करने के प्रयास सफल नहीं होने की खबरें ट्रेंड कर रही हैं। अब खड़े हनुमान जी मंदिर का मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया। अब मूर्ति की तकनीकी जांच की बात सामने आ रही है।