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  • ढाबा संचालक को उम्रकैद: महिला से दुष्कर्म और जातिसूचक प्रताड़ना के मामले में उज्जैन कोर्ट का बड़ा फैसला

    ढाबा संचालक को उम्रकैद: महिला से दुष्कर्म और जातिसूचक प्रताड़ना के मामले में उज्जैन कोर्ट का बड़ा फैसला


    मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले में वर्ष 2024 में सामने आए दुष्कर्म और अत्याचार के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। महिला के साथ दुष्कर्म करने और जातिसूचक अपमान करने के मामले में दोषी पाए गए आरोपी को अदालत ने कठोर दंड देते हुए समाज में ऐसे अपराधों के प्रति सख्त संदेश दिया है।

    मीडिया सेल प्रभारी कुलदीप सिंह भदौरिया के अनुसार यह घटना 15 सितंबर 2024 की है। पीड़िता अपने एक परिचित युवक के साथ मोटरसाइकिल से महिदपुर क्षेत्र स्थित घड़ी वाले बाबा के दर्शन करने गई थी। दर्शन के बाद दोनों रात करीब 10 बजे माकड़ौन थाना क्षेत्र में स्थित एक ढाबे पर भोजन करने पहुंचे। यह ढाबा आरोपी लाखन सिंह गुर्जर द्वारा संचालित किया जाता था।

    अभियोजन के अनुसार भोजन करने के बाद जब दोनों ने बिल का भुगतान करना चाहा तो आरोपी ने पैसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने दोनों पर रात में वहीं रुकने का दबाव बनाया। जब पीड़िता और उसके साथी ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए दोनों को अपमानित भी किया।

    मामले में यह भी सामने आया कि आरोपी ने हथियार दिखाकर पीड़िता के साथी को वहां से भगा दिया। इसके बाद उसने महिला के साथ जबरन दुष्कर्म किया और घटना की जानकारी किसी को देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। घटना के बाद पीड़िता ने साहस दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

    पुलिस ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर जांच पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य पेश किए, जिन्हें न्यायालय ने स्वीकार करते हुए आरोपी को दोषी माना।

    मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी लाखन सिंह गुर्जर (37), निवासी ग्राम झिरनिया, थाना माकड़ौन, जिला उज्जैन को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(वी) के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई तथा 6 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया।

    इस फैसले को महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। न्यायालय के निर्णय ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध और जातिगत अत्याचार जैसे गंभीर मामलों में कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा।

  • महाकाल की शरण में पहुंचे युजवेंद्र चहल, भस्म आरती में हुए शामिल; बोले- यह अनुभव शब्दों से परे

    महाकाल की शरण में पहुंचे युजवेंद्र चहल, भस्म आरती में हुए शामिल; बोले- यह अनुभव शब्दों से परे


    मध्यप्रदेश । भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल शुक्रवार सुबह धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। चहल ने तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती में भाग लिया और करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर में रहकर पूजा-अर्चना की। उनके मंदिर पहुंचने की खबर मिलते ही श्रद्धालुओं और क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह देखने को मिला।

    जानकारी के अनुसार, युजवेंद्र चहल सुबह करीब 3 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती का दर्शन किया। आरती के दौरान चहल पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। महाकाल मंदिर की आध्यात्मिक और दिव्य वातावरण ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया।

    भस्म आरती में शामिल होने के बाद चहल ने नंदी महाराज का पूजन और अभिषेक किया। परंपरा के अनुसार उन्होंने नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना भी कही। इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को जल अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों के माध्यम से उन्होंने विशेष पूजा कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया।

    दर्शन और पूजन के उपरांत श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से युजवेंद्र चहल का सम्मान किया गया। मंदिर प्रशासन ने उन्हें बाबा महाकाल का प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया।

    महाकाल के दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में युजवेंद्र चहल ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उन्हें जो आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ है, उसे शब्दों में व्यक्त करना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। चहल ने यह भी कहा कि जब भी उन्हें बाबा महाकाल का बुलावा मिलेगा, वे दोबारा उज्जैन आकर दर्शन अवश्य करेंगे।

    गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। क्रिकेट, फिल्म और राजनीति जगत की कई नामचीन हस्तियां भी समय-समय पर बाबा महाकाल के दरबार में मत्था टेकने आती रही हैं। अब इस कड़ी में भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल का नाम भी जुड़ गया है।

  • महाकाल नगरी में लापरवाही का वीडियो वायरल: ई-रिक्शा की छत पर बैठाकर घुमाया श्रद्धालु, पुलिस ने किया जब्त

    महाकाल नगरी में लापरवाही का वीडियो वायरल: ई-रिक्शा की छत पर बैठाकर घुमाया श्रद्धालु, पुलिस ने किया जब्त


    मध्यप्रदेश । उज्जैन में महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बीच यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क है। इसी बीच एक ई-रिक्शा चालक की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने न केवल यातायात नियमों की अनदेखी की बल्कि एक यात्री की जान भी जोखिम में डाल दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और संबंधित चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।

    वायरल वीडियो में ई-रिक्शा क्रमांक 4778 दिखाई दे रहा है, जिसमें निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई गई थीं। इतना ही नहीं, एक यात्री वाहन की छत पर बैठकर सफर करता नजर आया। सड़क पर चल रहे अन्य लोगों ने इस खतरनाक दृश्य का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।

    वीडियो सामने आने के बाद उज्जैन यातायात पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में वीडियो सही पाए जाने पर ई-रिक्शा को जब्त कर लिया गया और चालक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती थी।

    यातायात डीएसपी दिलीप परिहार ने बताया कि चालक द्वारा वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाना और यात्री को छत पर बैठाकर परिवहन करना गंभीर नियम उल्लंघन है। इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए वाहन का चालान तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

    पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    पुलिस ने श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से अपील की है कि यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें। कुछ समय बचाने या अधिक कमाई के लालच में नियमों की अनदेखी करना जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि वे ओवरलोड वाहनों में सफर न करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही दिखाई देने पर तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।

  • महाकाल मंदिर में गर्भगृह प्रवेश पर फिर विवाद, डिजिटल क्रिएटर की तस्वीरों से उठा VIP कल्चर का मुद्दा; सांसद फिरोजिया ने जताई नाराजगी

    महाकाल मंदिर में गर्भगृह प्रवेश पर फिर विवाद, डिजिटल क्रिएटर की तस्वीरों से उठा VIP कल्चर का मुद्दा; सांसद फिरोजिया ने जताई नाराजगी


    मध्यप्रदेश ।उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर गर्भगृह प्रवेश को लेकर विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरों ने मंदिर प्रशासन की व्यवस्था और आम श्रद्धालुओं के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है। तस्वीरों में दिल्ली निवासी डिजिटल क्रिएटर अक्षय आनंद अपनी पत्नी और मित्रों के साथ महाकाल मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने वीआईपी संस्कृति और दोहरे मापदंडों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार यह तस्वीरें 15 जून की बताई जा रही हैं। उस दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। इसी दौरान अक्षय आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गर्भगृह में दर्शन करते हुए तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरों में वे पारंपरिक धोती-सोला पहनकर गर्भगृह में मौजूद नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, गर्भगृह परिसर में फोटो भी खिंचवाई गईं, जबकि मंदिर परिसर में फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लागू है।

    तस्वीरें वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जब आम भक्तों को वर्षों से गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं है, तो कुछ चुनिंदा लोगों को विशेष सुविधा कैसे दी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे वीआईपी कल्चर का उदाहरण बताया।

    विवाद बढ़ने के बाद महाकाल मंदिर प्रशासन की ओर से सफाई भी सामने आई। मंदिर प्रशासक ने बताया कि अक्षय आनंद और उनके साथ मौजूद अन्य लोग हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के साथ मंदिर पहुंचे थे। इसी वजह से उन्हें गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। हालांकि इस स्पष्टीकरण के बाद भी लोगों की नाराजगी कम होती दिखाई नहीं दे रही है।

    मामले में उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने भी खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर में वीआईपी संस्कृति का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय है और वे इसके घोर विरोधी हैं। सांसद ने कहा कि वे स्वयं आज भी सामान्य श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर भगवान महाकाल के दर्शन करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी माताजी पिछले कई दशकों से नियमित रूप से महाकाल मंदिर जाती हैं और कभी किसी विशेष सुविधा का लाभ नहीं लेतीं।

    सांसद फिरोजिया ने कहा कि भगवान के दरबार में सभी समान हैं। यहां किसी राजा और रंक में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को भी चेताते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि अंततः सभी को भगवान महाकाल की शरण में ही जाना है।

    उन्होंने मांग की कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे के लिए महाकाल मंदिर का गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए, ताकि भक्त स्वयं जलाभिषेक और पूजन कर सकें। उन्होंने बताया कि इस विषय पर वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा कर चुके हैं।

    गौरतलब है कि महाकाल मंदिर का गर्भगृह जुलाई 2023 में श्रावण मास के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए आम श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया था। उस समय इसे अस्थायी व्यवस्था बताया गया था, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी गर्भगृह आम भक्तों के लिए नहीं खोला गया। अब वायरल तस्वीरों ने एक बार फिर मंदिर में वीआईपी व्यवस्था और श्रद्धालुओं के अधिकारों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

  • उज्जैन में महामंडलेश्वर ज्ञानदास की कार पर देर रात पथराव, बोले- लगातार परेशान किया गया तो भू-समाधि लेने को हो जाऊंगा मजबूर

    उज्जैन में महामंडलेश्वर ज्ञानदास की कार पर देर रात पथराव, बोले- लगातार परेशान किया गया तो भू-समाधि लेने को हो जाऊंगा मजबूर


    मध्य प्रदेश । धार्मिक नगरी उज्जैन में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात एक चिंताजनक घटना सामने आई, जब श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज की कार पर अज्ञात युवकों ने पथराव कर दिया। इस घटना में महामंडलेश्वर तो सुरक्षित बच गए, लेकिन उनकी स्कॉर्पियो वाहन के शीशे टूट गए। घटना के बाद उन्होंने महाकाल थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज देवास से लौटकर अपने सदावल रोड स्थित आश्रम जा रहे थे। रात करीब 12:30 बजे जब उनका वाहन हनुमानगढ़ी क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी कुछ अज्ञात युवकों ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि वाहन चालक ने सुरक्षा कारणों से गाड़ी नहीं रोकी और आगे बढ़ने की कोशिश की। इसी दौरान युवकों ने कार पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।

    अचानक हुए इस हमले से वाहन में सवार लोग घबरा गए। पथराव के कारण स्कॉर्पियो के आगे के कांच क्षतिग्रस्त हो गए। हालांकि सौभाग्य से वाहन में मौजूद किसी व्यक्ति को गंभीर चोट नहीं आई और महामंडलेश्वर भी पूरी तरह सुरक्षित रहे। घटना के बाद वे सीधे महाकाल थाने पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी।

    महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज ने घटना को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें परेशान करने की कोशिश की गई हो। उनका कहना है कि लगातार इस तरह की घटनाएं होने से वे मानसिक रूप से व्यथित हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यदि इसी तरह उन्हें परेशान किया जाता रहा तो उन्हें उज्जैन छोड़कर किसी अन्य तीर्थस्थल में जाना पड़ सकता है या फिर वे भू-समाधि लेने जैसा कठोर निर्णय लेने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

    महामंडलेश्वर के अनुसार हमलावरों की संख्या चार थी। पहले उन्होंने वाहन को रुकवाने की कोशिश की और जब वाहन नहीं रुका तो पथराव शुरू कर दिया। घटना रात के अंधेरे में हुई, इसलिए वे हमलावरों की पहचान नहीं कर सके। इससे पुलिस के सामने आरोपियों तक पहुंचने की चुनौती भी बढ़ गई है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। महाकाल थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर आसपास के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल और आसपास के मार्गों की रिकॉर्डिंग की जांच की जा रही है, ताकि संदिग्ध युवकों की पहचान कर जल्द से जल्द उन्हें पकड़ा जा सके।

    धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए देशभर में प्रसिद्ध उज्जैन में किसी संत-महात्मा के साथ इस प्रकार की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों और संत समाज ने भी घटना पर चिंता जताई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    फिलहाल पुलिस विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं संत समाज इस घटना को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग कर रहा है।

  • महिदपुर में CM मोहन यादव का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले- नौसिखिए को कमान दी, गाड़ी ठोके तो हम क्या करें

    महिदपुर में CM मोहन यादव का कांग्रेस पर तीखा हमला, बोले- नौसिखिए को कमान दी, गाड़ी ठोके तो हम क्या करें


    मध्य प्रदेश । उज्जैन जिले के महिदपुर और डेलनपुर क्षेत्र बुधवार को विकास और राजनीति दोनों के केंद्र बने रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यहां करीब 207 करोड़ रुपए की लागत से तैयार विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और जनता को समर्पण किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने जहां प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई, वहीं कांग्रेस पर भी जमकर राजनीतिक हमला बोला।

    मुख्यमंत्री ने महिदपुर में 188.42 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सामाकोटा बैराज का लोकार्पण किया। इस परियोजना से क्षेत्र के 18 गांवों के लगभग 11 हजार किसान परिवारों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। लंबे समय से पानी की समस्या झेल रहे किसानों के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से खेती अधिक लाभकारी बनेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    लोकार्पण कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक तेज बहादुर सिंह, विधायक सतीश मालवीय, महापौर मुकेश टटवाल सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा विभाग से जुड़े कई निर्माण कार्यों का भी लोकार्पण किया। इनमें महाविद्यालय भवन, कन्या विद्यालय भवन, विद्युत उपकेंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं।

    इससे पहले मुख्यमंत्री डेलनपुर बालाजी धाम पहुंचे, जहां उन्होंने नव निर्मित मंदिर में ध्वज स्थापना, कलश प्रतिष्ठा और श्री राम दरबार प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में भाग लिया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति और आदर्श शासन व्यवस्था के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के मन में रामराज्य जैसी व्यवस्था और भगवान श्रीराम जैसे आदर्श परिवार की कामना रहती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद अब चित्रकूट धाम को भी भव्य स्वरूप देने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने प्रदेश के उन सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित करने की बात कही, जहां भगवान श्रीराम के चरण पड़े थे।

    मुख्यमंत्री ने डेलनपुर बालाजी धाम के फर्श और बाउंड्री वॉल निर्माण की घोषणा भी की। साथ ही प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई योजनाओं पर जोर दिया।

    राजनीतिक रूप से कार्यक्रम उस समय चर्चा में आ गया जब मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर तीखे तंज कसे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने एक नौसिखिए को पार्टी की कमान सौंप दी है। यदि वह गाड़ी को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ले जाकर ठोक दे तो उसके लिए कोई और जिम्मेदार नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ने बिना नाम लिए कांग्रेस नेतृत्व और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर कटाक्ष किया। उन्होंने लाड़ली बहना योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के हित में कभी कोई ठोस काम नहीं किया, जबकि प्रदेश सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आने वाले समय में महिदपुर के डोंगला क्षेत्र की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी तथा यह क्षेत्र वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा। विकास कार्यों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच महिदपुर का यह कार्यक्रम प्रदेश की राजनीति और विकास दोनों के लिहाज से चर्चा का विषय बन गया।

  • उज्जैन में महामंडलेश्वर ज्ञानदास की कार पर हमला: देर रात चार युवकों ने किया पथराव, संत ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता

    उज्जैन में महामंडलेश्वर ज्ञानदास की कार पर हमला: देर रात चार युवकों ने किया पथराव, संत ने जताई सुरक्षा को लेकर चिंता


    मध्य प्रदेश । धार्मिक नगरी उज्जैन में मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात एक चिंताजनक घटना सामने आई, जब श्री पंच निर्मोही अणि अखाड़े के महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज की कार पर अज्ञात युवकों ने पथराव कर दिया। घटना में महामंडलेश्वर सुरक्षित रहे, लेकिन उनकी स्कॉर्पियो वाहन के कांच क्षतिग्रस्त हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

    जानकारी के अनुसार महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज देवास से अपने सदावल रोड स्थित आश्रम लौट रहे थे। रात करीब साढ़े बारह बजे जब उनका वाहन हनुमानगढ़ी क्षेत्र के पास पहुंचा, तभी कुछ अज्ञात युवकों ने उनकी कार को रोकने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि वाहन चालक ने सुरक्षा कारणों से कार नहीं रोकी और आगे बढ़ने का प्रयास किया। इसी दौरान युवकों ने कार पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।

    अचानक हुए इस हमले से वाहन के सामने के कांच टूट गए और कार को नुकसान पहुंचा। हालांकि सौभाग्य से महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज और वाहन में मौजूद अन्य लोगों को कोई शारीरिक चोट नहीं पहुंची। घटना के तुरंत बाद महामंडलेश्वर सीधे महाकाल थाने पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को दी।

    महामंडलेश्वर ज्ञानदास महाराज ने घटना पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है और इस प्रकार की घटनाएं संत समाज की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं लगातार होती रहीं तो उन्हें उज्जैन छोड़कर किसी अन्य तीर्थस्थल पर जाने या फिर कठोर आध्यात्मिक निर्णय लेने के लिए विवश होना पड़ सकता है। उनके इस बयान ने संत समाज और अनुयायियों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है।

    महामंडलेश्वर के अनुसार हमला करने वाले चार युवक थे। पहले उन्होंने वाहन को रुकवाने का प्रयास किया और जब वाहन नहीं रुका तो पथराव शुरू कर दिया। रात का समय और अंधेरा होने के कारण हमलावरों की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी। यही वजह है कि फिलहाल पुलिस अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हमलावरों की पहचान करने और घटना के पीछे की वजह जानने के लिए सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हमला पूर्व नियोजित था या फिर किसी अन्य कारण से यह घटना हुई।

    उज्जैन जैसे प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र में संतों की सुरक्षा को लेकर यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है। संत समाज और स्थानीय लोगों का मानना है कि दोषियों की शीघ्र पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और धार्मिक वातावरण प्रभावित न हो।

    फिलहाल पुलिस जांच जारी है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

  • महाकाल मंदिर में मुस्लिम युवक से मारपीट: आधार कार्ड देखने के बाद हुआ विवाद, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

    महाकाल मंदिर में मुस्लिम युवक से मारपीट: आधार कार्ड देखने के बाद हुआ विवाद, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो


    मध्य प्रदेश । विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे एक युवक के साथ हुई मारपीट की घटना ने उज्जैन में चर्चा का विषय बना दिया है। घटना उस समय हुई जब युवक मंदिर की चलित भस्मारती में शामिल होने के लिए कतार में खड़ा था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ लोग युवक से बहस करते और उसके साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर युवक को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और पूरे मामले की जानकारी जुटानी शुरू की।

    पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी क्षेत्र का रहने वाला 26 वर्षीय सरफराज शेख एक हिंदू युवती के साथ महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने आया था। दोनों देर रात मंदिर पहुंचे और चलित भस्मारती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की कतार में लग गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक ने माथे पर चंदन का त्रिपुंड लगाया हुआ था और ‘महाकाल’ भी लिखा हुआ था, जिससे वह सामान्य श्रद्धालुओं की तरह दिखाई दे रहा था।

    बताया जा रहा है कि कतार में खड़े कुछ लोगों को युवक पर संदेह हुआ। इसके बाद उसकी पहचान जानने के लिए आधार कार्ड देखा गया। आधार कार्ड में उसका नाम और पहचान सामने आने के बाद वहां मौजूद कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। देखते ही देखते कुछ लोगों ने युवक के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू कर दी।

    घटना के दौरान युवक अपनी बात रखने और खुद को छोड़ने की गुहार लगाता रहा, लेकिन माहौल लगातार गर्माता गया। आसपास मौजूद लोगों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस पूरे घटनाक्रम को वहां मौजूद कुछ लोगों ने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। बाद में यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मामला सार्वजनिक चर्चा में आ गया।

    सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस अधिकारियों ने युवक और उसके साथ आई युवती से पूछताछ की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों दर्शन करने के उद्देश्य से उज्जैन आए थे। पुलिस ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए दोनों के परिजनों को भी उज्जैन बुलाया है।

    महाकाल थाना पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। हालांकि वायरल वीडियो और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि कोई शिकायत प्राप्त होती है तो कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था, पहचान को लेकर उत्पन्न होने वाले विवादों और सोशल मीडिया के प्रभाव पर चर्चा का कारण बनी है। प्रशासन का प्रयास है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।

  • उन्हेल में युवक की खून से सनी लाश मिलने से सनसनी, घर के अंदर संदिग्ध हालत में मिला शव; हत्या की आशंका

    उन्हेल में युवक की खून से सनी लाश मिलने से सनसनी, घर के अंदर संदिग्ध हालत में मिला शव; हत्या की आशंका

    उज्जैन उज्जैन जिले के उन्हेल थाना क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई, जब एक युवक का शव उसके ही घर के अंदर खून से लथपथ हालत में मिला। घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई और पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। प्रथम दृष्टया मामला हत्या का प्रतीत होने पर पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर फोरेंसिक विशेषज्ञों और डॉग स्क्वाड की मदद से साक्ष्य जुटाए गए हैं।

    जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह उन्हेल थाना पुलिस को सूचना मिली कि क्षेत्र के एक मकान में एक व्यक्ति मृत अवस्था में पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घर के अंदर जाकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने देखा कि युवक का शव खून से सना हुआ था, जिससे मामला संदिग्ध नजर आया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देकर एक्सपर्ट टीम और डॉग स्क्वाड को बुलाया गया।

    पुलिस जांच में मृतक की पहचान विक्रम पिता अशोक, उम्र लगभग 35 वर्ष, निवासी नाग चबूतरा मंदिर के पीछे, उन्हेल के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विक्रम मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। उसके परिवार में पत्नी और एक बच्चा है। युवक की अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं आसपास के लोग भी घटना से स्तब्ध हैं।

    घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण करने के बाद पुलिस ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश तो नहीं है। आसपास के लोगों और परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकें।

    सीएसपी विक्रम सिंह अहिरवार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है, इसलिए पुलिस सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि घटनास्थल से कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की विवेचना जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और सभी तथ्यों के सामने आने के बाद ही घटना के कारणों तथा संभावित आरोपियों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग पुलिस जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।

  • नवजात के लिंग को लेकर अस्पताल में विवाद, परिजनों ने लगाया बच्चा बदलने का आरोप; पुलिस जांच में जुटी

    नवजात के लिंग को लेकर अस्पताल में विवाद, परिजनों ने लगाया बच्चा बदलने का आरोप; पुलिस जांच में जुटी

    उज्जैन उज्जैन में एक नवजात शिशु के लिंग को लेकर उत्पन्न विवाद ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला तब सामने आया जब एक परिवार ने आरोप लगाया कि डिलीवरी के बाद उन्हें पुत्र जन्म की सूचना दी गई थी, लेकिन बाद में इलाज के दौरान उन्हें बताया गया कि नवजात बच्ची है। इस विरोधाभास के बाद परिजनों ने बच्चा बदलने की आशंका जताते हुए अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला पुलिस तक पहुंच गया है और जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार लिम्बोदा निवासी सुनील कहार की पत्नी पायल की डिलीवरी बुधवार शाम तिवारी नर्सिंग होम में हुई थी। परिजनों का कहना है कि प्रसव के तुरंत बाद अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने उन्हें लड़का होने की जानकारी दी थी। परिवार में खुशी का माहौल बन गया और परिजनों ने अस्पताल कर्मचारियों को बधाई स्वरूप नकद राशि भी दी। सभी लोग पुत्र जन्म की सूचना से उत्साहित थे और उसी आधार पर रिश्तेदारों एवं परिचितों को भी जानकारी दे दी गई।

    बताया जा रहा है कि जन्म के कुछ समय बाद नवजात की तबीयत बिगड़ गई। चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। रात करीब आठ बजे नवजात को उपचार के लिए लोटस अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज शुरू हुआ। लेकिन अगले दिन सुबह जब परिजन अस्पताल पहुंचे और बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली, तो उन्हें बताया गया कि अस्पताल में एक बच्ची भर्ती है। यह सुनकर परिजन हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत आपत्ति दर्ज कराई।

    परिजनों का आरोप है कि यदि डिलीवरी के समय उन्हें लड़का होने की जानकारी दी गई थी, तो बाद में बच्ची होने की बात कैसे सामने आई। इसी आधार पर उन्होंने बच्चा बदलने की आशंका जताई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

    हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। लोटस अस्पताल के मैनेजर अनिरुद्ध का कहना है कि तिवारी नर्सिंग होम से जिस नवजात को रेफर किया गया था, वह जन्म से ही बच्ची थी। अस्पताल में भर्ती, उपचार और मेडिकल रिकॉर्ड की सभी प्रविष्टियां इसी तथ्य की पुष्टि करती हैं। उनका कहना है कि किसी प्रकार की अदला-बदली या अनियमितता नहीं हुई है।

    वहीं तिवारी नर्सिंग होम प्रबंधन ने भी अपने स्तर पर आरोपों को निराधार बताया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि डिलीवरी के दौरान मौजूद डॉक्टरों और स्टाफ से पूछताछ की गई है और सभी ने बच्ची के जन्म की पुष्टि की है। अस्पताल के अनुसार मेडिकल रिकॉर्ड, रेफरल दस्तावेज और उपलब्ध वीडियो फुटेज में भी यही तथ्य दर्ज है।

    मामले के तूल पकड़ने के बाद माधवनगर थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, रेफरल दस्तावेज और संबंधित कर्मचारियों के बयान एकत्र कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर परिजन बच्चा बदलने की आशंका जता रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रबंधन अपने रिकॉर्ड के आधार पर आरोपों को गलत बता रहा है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं, जिससे इस विवाद की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।