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  • उज्जैन में गुरकीरत सिंह मनोचा का अंतिम संस्कार, 21 दिन बाद पहुंचा पार्थिव शरीर, CM समेत जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि

    उज्जैन में गुरकीरत सिंह मनोचा का अंतिम संस्कार, 21 दिन बाद पहुंचा पार्थिव शरीर, CM समेत जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी छात्र गुरकीरत सिंह मनोचा का शुक्रवार को चक्रतीर्थ शमशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सांसद अनिल फिरोजिया और राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिजनों को सांत्वना दी।

    गौरतलब है कि गुरकीरत सिंह की 14 मार्च को कनाडा में हत्या कर दी गई थी। घटना के 21 दिन बाद शुक्रवार सुबह उनका पार्थिव शरीर उज्जैन स्थित घर लाया गया। जैसे ही शव घर पहुंचा, परिजन भावुक हो उठे और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। मां ने अहमदाबाद एयरपोर्ट से शव लाने वाले एंबुलेंस चालक का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया।

    सुबह करीब पौने 10 बजे अंतिम यात्रा घर से शुरू हुई। सबसे पहले गुरुद्वारे में अंतिम अरदास की गई, जिसके बाद चक्रतीर्थ स्थित विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में सिख समाज के लोग, रिश्तेदार और परिचित मौजूद रहे। पार्थिव शरीर गुरुवार शाम अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचा था, जहां आवश्यक कस्टम और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद रात करीब 9 बजे एंबुलेंस के जरिए उज्जैन के लिए रवाना किया गया।

    हमले में गई थी जान
    जानकारी के अनुसार, कनाडा के फोर्ट सेंट जॉन शहर में 14 मार्च को गुरकीरत सिंह पर पहले 10-12 युवकों ने हमला किया और फिर उस पर वाहन चढ़ा दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद से परिवार बेटे के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहा था, जो अब 21 दिन बाद पूरा हो सका।

  • उज्जैनः पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से, अधिकारियों ने मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा

    उज्जैनः पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से, अधिकारियों ने मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का लिया जायजा


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में पंचक्रोशी यात्रा 12 अप्रैल से प्रारंभ होगी। इसी के मद्देनजर शनिवार को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने पंचक्रोशी यात्रा मार्ग का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

    सर्वप्रथम संभागायुक्त आशीष सिंह, डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने पटनी बाजार स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर पूजन अर्चन किया और मंदिर परिसर में पानी की टंकी की सफाई, परिसर की साफ-सफाई , सीसीटीवी कैमरे, लाइट तथा एलईडी स्क्रीन की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

    इसके बाद अधिकारियों द्वारा बस से यात्रा कर उंडासा, पिंगलेश्वर, शनि मंदिर त्रिवेणी, करोहन, नलवा, अंबोदिया, पड़ाव व उप पड़ाव स्थलों का निरीक्षण किया गया। संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि पड़ाव स्थलों के बीच भी कुछ-कुछ स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था की जाए तथा जो भी बड़े खुले कुएं रास्ते में आ रहे हैं अथवा जहां नवीन पुल-पुलियाओं का निर्माण चल रहा है वहां सुरक्षा की दृष्टि से बैरिकेडिंग की जाए। साथ ही रात में अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था की जाए।

    पिंगलेश्वर में रेलवे ओवरब्रिज के नीचे सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। अस्थाई शौचालयों, लाइट , पेयजल के लिए टैंकर की व्यवस्था पर्याप्त संख्या में की जाए। त्रिवेणी में श्रद्धालुओं के स्नान के लिए शावर्स लगाए जाएं।

    अंबोदिया में व्यवस्थाओं के संबंध में ली गई बैठक में कलेक्टर सिंह ने निर्देश दिए कि वर्तमान में सिंहस्थ महापर्व के अंतर्गत निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं। पंचक्रोशी यात्रा के दौरान नये कार्य प्रारंभ न किये जाएं, वर्तमान में चल रहे कार्यों के तेज गति से पूर्ण करें। पंचक्रोशी यात्रा मार्ग में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। यात्रा मार्ग में कुछ स्थानों पर मुरम डाल कर समतलीकरण किया जाए। इसके अलावा जिन विभागों को यात्रा के संबंध में जो दायित्व सौंपे गए हैं, वे आगामी 05 अप्रैल तक सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर लें।

    पुलिस अधीक्षक शर्मा ने निर्देश दिए कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए। ड्यूटीरत अधिकारी व कर्मचारी अपनी शिफ्ट समाप्त होने पर रिलिवर के आने के पश्चात ही कर्तव्य स्थल छोड़ें, निर्धारित समय पर अपने कर्तव्य स्थल पर पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए यात्रा के सुखद अनुभव के लिए सभी मिलकर प्रयास करें।

  • मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद

    मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 (महाकुंभ) से पहले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद सामने आया है। इस पद पर दो दावे किए जा रहे हैं। 13 अखाड़े दो गुट में बंटे नजर आ रहे हैं। एक धड़ा निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मानता है, जबकि दूसरा महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को अध्यक्ष बता रहा है। एक जैसा नाम होने से असमंसज की स्थिति बनी है।

    दरअसल, उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर जहां एक और सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी पिछले छह महीनों से अध्यक्ष के रूप में उज्जैन आते-जाते रहे हैं। इस दौरान प्रशासन ने उन्हें शिप्रा नदी प्रोजेक्ट सहित मेले की तैयारियों की जानकारी भी दी, लेकिन अब साधु संतों में दो फाड़ दिखाई दे रही है। देश के 13 अखाड़े में से आठ अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है।

    रविवार को उज्जैन में मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़ा में संतों का समागम हुआ। इसमें बड़ी संख्या में संत मौजूद रहे। संतों के इस समागम में 13 में से आठ अखाड़ों के साधु संत शामिल हुए। खास बात यह रही कि यहां हरिद्वार से पहली बार आए महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव संत रविंद्र पुरी महाराज स्वागत सम्मान हुआ। ढोल-नगाड़ों के बीच संतों में उत्साह नजर आया। कार्यक्रम में महंत सत्यानंद महाराज (बड़ा उदासीन), महंत मंगलदास जी (नया अखाड़ा), महंत विनीत गिरी (महानिर्वाणी), महंत रामेश्वर दास, भगवान दास और दिग्विजय दास सहित विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत शामिल हुए।

    कार्यक्रम के बाद रविंद्र पुरी महाराज ने मीडिया से कहा कि वे खुद वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ में निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव हैं। उन्हें लिखित और चयनित दोनों रूपों में 13 में से आठ अखाड़े का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद चार संप्रदाय से मिलकर बनी है। इसमें संन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल शामिल है। इन चारों संप्रदाय के अखाड़े उनके नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद में शामिल हैं। इसीलिए वे खुद अखाड़ा परिषद के चुने गए अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 मे सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। सिंहस्थ कुंभ के आयोजन को लेकर हमारी समय समय पर अधिकारियों से सूक्ष्म चर्चा होती रहती है। हम लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे।


    इन अखाड़ों का समर्थन बताया

    देश के 13 अखाड़े में से 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है। इन अखाड़ों में 1- महानिर्वाणी अखाड़ा, 2- अटल अखाड़ा, 3-निर्मल अखाड़ा, 4- नया उदासी अखाड़ा, 5- बड़ा उदासीन अखाड़ा, 6-निर्वाणी अणि अखाड़ा, 7- दिगंबर अणि अखाड़ा और 8-निर्मोही अणि अखाड़ा शामिल है। इस प्रकार बहुमत के आधार पर अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज ही होंगे।

    इधर निरंजनी अखाड़े से जुड़े रविंद्र पूरी महाराज ने कहा कि कुम्भ आ रहा है, ऐसे कई संत अपने आप को अध्यक्ष बताएंगे। सर्वसम्मति से मुझे अध्यक्ष बनाया गया था। जब मैंने इस्तीफा दिया नहीं तो महानिर्वाणी वाले रविंद्र पूरी कैसे अध्यक्ष बन सकते है।

  • सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    सिंहस्थ-2028 में दुनिया देखेगी सनातन संस्कृति का वैभव: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन के राम घाट पर आयोजित विक्रमोत्सव-2026 और गुड़ी पड़वा सृष्टि आरंभ उत्सव के अवसर पर कहा कि उज्जैन का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व विश्व स्तर पर अनोखा है। उन्होंने कहा कि आगामी सिंहस्थ-2028 में पूरी दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव को देखेगी।

    उज्जैन का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
    उज्जैन प्राचीन अवंतिका और उज्जयिनी के नाम से विख्यात 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का धाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन का पावन शिप्रा तट और यह नगरी जीवन में आस्था और आध्यात्मिक संबल देती है। उन्होंने महान सम्राट विक्रमादित्य की गौरवगाथा का उल्लेख किया जिनके 32 पुतलियों वाले सिंहासन नवरत्नों की विद्वता और वीरता आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।

    सिंहस्थ-2028 की तैयारियाँ

    उज्जैन के सभी मार्गों को फोरलेन और सिक्सलेन बनाया जा रहा है। मां शिप्रा के तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे नवीन घाट विकसित किए जा रहे हैं। शहर को व्यापार और उद्योग के दृष्टिकोण से भी विकसित किया जा रहा है विक्रम उद्योगपुरी मेडिकल डिवाइस पार्क 12,500 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र और अतिरिक्त 5,000 एकड़ में नया पार्क तैयार। नए एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं से तीर्थाटन को नई ऊंचाई देने का प्रयास।

    सृष्टि आरंभ उत्सव की भव्य झलक

    कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पार्श्व गायक श्री विशाल मिश्रा के संगीत से हुई। भव्य ड्रोन-शो लेजर-शो और आतिशबाजी ने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया। उत्सव ने आस्था संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

    साहित्य और ज्ञान का विमोचन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ का विक्रम पंचांग 2083 संस्कृति संचालनालय का कला पंचांग विभिन्न ग्रंथों और मोनोग्राफ का विमोचन किया। विमोचित ग्रंथों में अष्टावक्र गीता नारद गीता ब्राह्मण गीता गर्भ गीता समेत महर्षियों और वीर भारत न्यास के विभिन्न ग्रंथ शामिल थे।

    राष्ट्रीय और स्थानीय गणमान्यजन उपस्थित

    राज्यसभा सांसद श्री बालयोगी उमेशनाथ जी महाराज विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा महापौर श्री मुकेश टटवाल नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव शोधपीठ निदेशक डॉ. श्रीराम तिवारी और अन्य गणमान्यजन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन को धार्मिक सांस्कृतिक औद्योगिक और वैश्विक पहचान का केंद्र बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों का विवरण दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सिंहस्थ-2028 में दुनिया सनातन संस्कृति के वैभव और उज्जैन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देखेगी।

  • मप्रः मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में किया नैवेद्य लोक का लोकार्पण

    मप्रः मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में किया नैवेद्य लोक का लोकार्पण


    – इंदौर की 56 दुकान की तर्ज पर 18 करोड़ की लागत से बने नैवेद्य लोक में स्वाद और सेहत” का मिलेगा अनुपम अनुभव

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महाकाल की नगरी उज्जैन के निवासियों को एक नयी सौगात मिली है। शहर के नानाखेड़ा बस स्टैंड के समीप स्थित नैवेद्य लोक का भव्य शुभारंभ गुरुवार देर शाम चैत्र नव वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मुख्य आतिथ्य में किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव के द्वारा वैदिक मंत्रों उचार और शंख ध्वनि के बीच फीता काटकर इंदौर की 56 दुकान की तर्ज पर 18 करोड़ रुपये की लागत से बनाये गये नैवेद्य लोक का शुभारंभ किया गया। उन्होंने प्रत्येक स्टॉल का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री दुकानदारों से भी मिले और यहां के कुछ व्यजंनों का स्वाद भी लिया। नैवेद्य लोक में शहर के प्रमुख और प्रसिद्ध रेस्टोरेंट और खाद्य प्रतिष्ठानों के द्वारा स्टॉल्स लगाई गई। इनमें “स्वाद और सेहत” का अनुपम समन्वय सुनिश्चित किया गया है। यहां उज्जैन के पारंपरिक एवं लोकप्रिय व्यंजनों के साथ-साथ मोटे अनाज (श्री अन्न) से निर्मित अत्यंत पौष्टिक एवं स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों को विशेष महत्व प्रदान किया गया है।

    नैवेद्य लोक में विभिन्न प्रकार के आकर्षक स्टॉल स्थापित
    नैवेद्य लोक में विभिन्न प्रकार के आकर्षक स्टॉल स्थापित है जिनमें प्रमुख रूप से हरे कृष्ण ऑर्गेनिक फार्मिंग द्वारा ऑर्गेनिक श्री अन्न एवं ताजा जैविक उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यहां स्वाद के साथ स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखते हुए निम्नलिखित व्यंजन आमजन के लिए उपलब्ध हैं: कोदो श्री अन्न की खिचड़ी, कोदो श्री अन्न की खीर, कोदो श्री अन्न की इडली, ज्वार का पोहा, रागी की सेव। फ्रेश बॉक्स आर्गेनिक द्वारा विशेष रूप से तैयार श्री अन्न आधारित व्यंजन एवं सेवाएं उपलब्ध रहेगी। इनमें हेल्दी सलाद, डाइट प्लान, आर्गेनिक ग्रॉसरी, आर्गेनिक ऑयल एवं घी शामिल है ।

    प्रसिद्ध कचरू भैया की कचौड़ी भी मिलेगी
    इसके अतिरिक्त गोपाल मंदिर स्थित मावा बाजार की प्रसिद्ध कचरू भैया की कचौड़ी (जो वर्ष 1968 से अपने अनुपम स्वाद के लिए विख्यात है) भी कुछ दिनों के लिए नैवेद्य लोक में उपलब्ध रहेगी, जिससे उज्जैनवासियों एवं आगंतुकों को पुरानी यादों का स्वाद भी प्राप्त होगा।

    ये सभी व्यंजन न केवल स्वादिष्ट हैं, अपितु उच्च पोषण मूल्य से युक्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे।नैवेद्य लोक का यह शुभारंभ उज्जैनवासियों के साथ ही महाकाल के दर्शनार्थ आने वाले लाखों श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए एक आकर्षक, सुलभ एवं स्वास्थ्यकर भोजन विकल्प प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कचरू भैया से मिलकर कहा कि अच्छा हुआ आपने यहां पर भी स्टाल प्रारंभ की है । अब नानाखेड़ा के लोगों को कचौड़ी के लिए पुराने शहर नहीं जाना पड़ेगा।

    कार्यक्रम में रागीनी मखड़ और डॉ. मखड़ और हरीहरेश्वर पोदार के संस्थान द्वारा सास्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गई।

    उल्लेखनीय है कि नैवेद्य लोक को उज्जैन विकास प्राधिकरण द्वारा शहर की एक आधुनिक एवं आकर्षक चौपाटी के रूप में विकसित किया गया है। कुल 28000 स्क्वेयर फीट के क्षेत्रफल में सर्वसुविधायुक्त नैवेद्य लोक परिसर का विकास किया गया है। नैवेद्य लोक में चौपाटी के लिये 34 दुकानें है, जिनका साईज क्रमशः 180 वर्गफीट, 120 वर्गफीट, 100 वर्गफीट, 92 वर्गफीट, 90 वर्गफीट एवं 62 वर्गफीट है। साथ ही यहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सुसज्जित ओपन थियेटर, साउण्ड सिस्टम, महिला, पुरुष, दिव्यांग जनों के उपयोगार्थ नवीन सेंसर उपकरण के साथ प्रसाधन कक्ष, सीसीटीवी कैमरा-सर्वर रूम, आपातकालीन विद्युत व्यवस्था के लिए डीजी सेट, पार्किग, अण्डरग्राउण्ड विद्युत व्यवस्था, अण्डरग्राउण्ड सीवरेज, लैण्ड स्केपिंग आदि सुविधायें विकसित की गई है।

    इस अवसर पर सांसद अनिल फिरोजिया, राज्य सभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निमग अध्यक्ष कलावती यादव, संजय अग्रवाल, जगदीश अग्रवाल, रूप पमनानी एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

  • मप्रः हिन्दू नव वर्ष के पहले दिन उज्जैन को मिली अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्विमिंग पुल की सौगात

    मप्रः हिन्दू नव वर्ष के पहले दिन उज्जैन को मिली अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्विमिंग पुल की सौगात


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार देर शाम उज्जैन में नगर निगम द्वारा नवनिर्मित तरणताल का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विक्रम संवत 2083 हिन्दू नव वर्ष पहले दिन शहरवासियों को तरणताल की सौगात मिली है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आमजन को संबोधित करते हुए कहा कि नगर निगम के स्विमिंग पुल से शहरवासियों की कई यादें जुड़ी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्विमिंग पुल की सौगात मिली है तो इसका मेंटेनेंस बनाये रखना होगा। मुख्यमंत्री ने शुभारंभ अवसर पर आयोजित तैराकी स्पर्धा के विजेता बालक-बालिका वर्ग की टीम को 51-51 हजार रुपये पुरस्कार स्वरूप देने की घोषणा की। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव, पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती, संजय अग्रवाल, राजेश धाकड़ मौजूद थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नगर निगम द्वारा 8.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित तरणताल (स्विमिंग पुल) का करीब 2 साल पहले भूमि-पूजन किया गया था। आज अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्विमिंग पूल का लोकार्पण करते हुए अत्यधिक प्रसन्नता हुई है। इसके निर्माण से अब उज्जैन की प्रतिभाओं को नये पंख लगेंगे और भविष्य के लिये मजबूत नींव रखी जा सकेगी।

    उन्होंने कहा कि भगवान महाकाल की नगरी में क्षिप्रा में तैराकी करने का भी अपना अलग आंनद है। कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत भाषण महापौर मुकेश टटवाल ने दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत महापौर टटवाल और नगर निगम अध्यक्ष कलावती यादव, उज्जैन स्मार्ट सिटी के सीईओ संदीप शिवा, तैराकी संघ के अध्यक्ष राकेश तिवारी ने किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पूजन-अर्चन के बाद फीता काटकर लोकार्पण किया। इस अवसर पर आयोजित तैराकी स्पर्धा में प्रथम शिवोहम् तिवारी, द्वितिय आर्यन राजपूत, तृतीय समर्थ गेहलोत रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बालक वर्ग एवं बालिका वर्ग के खिलाडियों को 51-51 हजार रुपये देने की घोषणा की।

    उल्लेखनीय है की नगर निगम द्वारा उक्त तरणताल पुराने तरणताल के स्थान पर नया बनाया गया है। इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है। तरणताल का कुल क्षेत्रफल 25×50 मीटर है तथा इसकी गहराई 4.5 फीट से 6.15 फीट तक रखी गई है। इसके साथ ही बच्चों के लिए वार्मअप पुल भी निर्मित किया गया है जिसकी गहराई 2.5 फीट से 3 फीट रखी गई है। तरणताल में विजिटर गैलेरी बनाई गई है। जिसमें 200 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। इसी के साथ पार्किंग, फूड कोर्ट, सिटिंग चेयर, पार्क, आधुनिक फिल्टर प्लांट, शावर की सुविधा और वेटिंग रूम की भी सुविधा भी रहेगी। तरणताल का संचालन नगर पालिका निगम द्वारा किया जाएगा।

  • चैत्र नवरात्रि में उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर बनता है आस्था का महापर्व स्थल जहां पूरी होती हैं मन की हर मुराद

    चैत्र नवरात्रि में उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर बनता है आस्था का महापर्व स्थल जहां पूरी होती हैं मन की हर मुराद

    मध्य प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक नगर उज्जैन में स्थित हरसिद्धि माता मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है बल्कि यह आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्वास का एक अद्भुत संगम भी माना जाता है चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां भक्तों की अपार भीड़ उमड़ती है और पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से भर जाता है इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और इसका संबंध सम्राट विक्रमादित्य की आस्था और भक्ति से भी जुड़ा हुआ है

    हरसिद्धि माता मंदिर विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से कुछ ही दूरी पर स्थित है और इसकी ऐतिहासिकता हजारों वर्षों पुरानी बताई जाती है मान्यता है कि माता सती की दाहिनी कोहनी यहां गिरी थी जिसके कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे मंगल चंडी शक्ति स्थल के रूप में जाना जाता है यहां माता को विशेष सिद्धि प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है

    चैत्र नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा अर्चना का आयोजन होता है पहले दिन प्रातःकाल मंदिर के पट खोले जाते हैं और विधिवत पूजा की शुरुआत होती है शैलपुत्री माता की आराधना के साथ घट स्थापना की जाती है और इसके बाद नौ दिनों तक क्रमशः सभी नौ देवियों की पूजा की जाती है इस दौरान मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है और दूर दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं

    हरसिद्धि मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां की विशाल दीपमाला है जिसे सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित किया गया माना जाता है इस दीपमाला में लगभग 51 फीट ऊंचे दो दीप स्तंभ हैं जिनमें एक साथ 1011 दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं दीपों की यह ज्योति न केवल दृश्य रूप से आकर्षक होती है बल्कि इसे अत्यंत शुभ और पवित्र भी माना जाता है पहले यह दीपमाला केवल नवरात्रि के दौरान ही प्रज्वलित की जाती थी लेकिन अब श्रद्धालुओं की आस्था और बुकिंग के चलते इसे नियमित रूप से जलाया जाने लगा है

    भक्तों की मान्यता है कि संध्या आरती के समय जब दीपमाला प्रज्वलित होती है और भक्त माता के सामने अपनी मनोकामना रखते हैं तो वह अवश्य पूर्ण होती है इसी विश्वास के कारण नवरात्रि के दिनों में मंदिर में भारी भीड़ रहती है और श्रद्धालु विशेष रूप से दीप जलाने के लिए पहुंचते हैं

    सम्राट विक्रमादित्य को इस मंदिर का प्रमुख भक्त और संरक्षक माना जाता है कहा जाता है कि उन्होंने यहां माता की कठोर तपस्या की और माता ने उन्हें विशेष कृपा प्रदान की जिसके बाद वे महान और न्यायप्रिय शासक बने यह कथा आज भी लोगों को प्रेरित करती है और उनकी आस्था को और भी मजबूत बनाती है

    नवरात्रि के नौ दिनों में मंदिर का हर कोना भक्ति के रंग में रंगा रहता है भजन कीर्तन और मंत्रोच्चार से वातावरण गूंजता रहता है और श्रद्धालु माता की कृपा पाने के लिए पूरे मन से पूजा अर्चना करते हैं हरसिद्धि माता का यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था विश्वास और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है जहां हर भक्त अपनी मनोकामना लेकर आता है और उसे पूर्ण होने की आशा के साथ लौटता है

  • मध्यप्रदेश में गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से शुरू, 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन; बोनस के साथ समर्थन मूल्य ₹2625 प्रति क्विंटल

    मध्यप्रदेश में गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से शुरू, 19 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन; बोनस के साथ समर्थन मूल्य ₹2625 प्रति क्विंटल


    भोपाल। मध्यप्रदेश के मध्य प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी का कार्यक्रम जल्द शुरू होने जा रहा है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि इंदौर उज्जैन भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में गेहूँ खरीदी 1 अप्रैल से होगी जबकि शेष संभागों में यह 7 अप्रैल से शुरू होगी। खरीदी शासकीय कार्य दिवसों में सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक की जाएगी। मंत्री ने यह भी कहा कि इस वर्ष गेहूँ खरीदी पर किसानों को 40 रुपये अतिरिक्त बोनस भी मिलेगा। इसके साथ प्रदेश में गेहूँ की दर 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है।

    इस रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन हेतु कुल 19,04,651 किसानों ने पंजीयन कराया है जो पिछले वर्ष 15,44,000 से अधिक है। जिलेवार पंजीयन की बात करें तो इंदौर में 71,713 उज्जैन में 1,23,281 भोपाल में 37,129 और नर्मदापुर में 71,831 किसानों ने पंजीयन कराया है। अन्य जिलों में भी हजारों किसानों ने अपना पंजीयन कराया है जिससे इस वर्ष खरीदी की तैयारी मजबूत दिखाई दे रही है।

    मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित समय और केंद्रों पर पहुंचकर अपने गेहूँ का पंजीयन और विक्रय सुनिश्चित करें। राज्य सरकार ने किसानों को समर्थन मूल्य और बोनस का लाभ सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए हैं। इस कार्यक्रम से मध्यप्रदेश में गेहूँ उत्पादन करने वाले किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है और खरीदी के साथ ही रबी विपणन वर्ष का संचालन सुचारू रूप से होगा।

  • उज्जैन में 27 साल की काली नंद गिरी बनी देश की सबसे कम उम्र की महामंडलेश्वर: श्मशान और कार में करतीं तंत्र साधना, सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स

    उज्जैन में 27 साल की काली नंद गिरी बनी देश की सबसे कम उम्र की महामंडलेश्वर: श्मशान और कार में करतीं तंत्र साधना, सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स


    नई दिल्ली। उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक के दौरान चार नए महामंडलेश्वरों का पट्टाभिषेक हुआ। इनमें सबसे चर्चा में रही 27 साल की काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता, जिन्हें देश की सबसे कम उम्र की महामंडलेश्वर बनने का गौरव प्राप्त हुआ। वे किन्नर अखाड़े की पहली अघोरी महामंडलेश्वर मानी जा रही हैं।

    काली नंद गिरी का जीवन बेहद अद्भुत और साधना से जुड़ा है। उन्होंने बचपन में ही माता-पिता को छोड़कर संन्यास का रास्ता अपनाया। 6 साल की उम्र में तंत्र साधना सीखना शुरू किया और 12 साल की उम्र में काशी चली गईं। बाद में असम के कामाख्या धाम में अपने गुरु से तंत्र साधना का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़े की आचार्य डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के आशीर्वाद से उन्होंने अखाड़े से जुड़कर आध्यात्मिक साधना जारी रखी।

    महामंडलेश्वर बनने के बाद भी उनका जीवन बेहद अनोखा है। पिछले 18 सालों से वे देश-विदेश में भ्रमण करती आई हैं, उनका स्थायी आश्रम नहीं है और उनका निवास मुख्य रूप से श्मशान और अपनी कार में होता है। कार में मां काली का बड़ा चित्र, त्रिशूल और लगभग 70 सिद्ध नरमुंड रखे जाने का दावा किया जाता है।

    काली नंद गिरी 18 भाषाओं की जानकार हैं, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़, गुजराती, उड़िया, पंजाबी, असमिया और मराठी शामिल हैं। देश-विदेश की यात्राओं के दौरान उन्होंने ये भाषाएँ सीखी।

    महामंडलेश्वर बनने के बाद उनका सोशल मीडिया पर भी खासी लोकप्रियता है। उनके दो अकाउंट हैं, जिनमें कुल 60 लाख फॉलोअर्स हैं। वे नियमित रूप से तंत्र साधना से जुड़े वीडियो और अन्य आध्यात्मिक सामग्री साझा करती हैं, जिनके लाखों व्यूज मिलते हैं।

    इस अनोखे जीवन और साधना के कारण काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता ने न सिर्फ धार्मिक जगत में, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लाखों लोगों का ध्यान खींचा है। उनका कहना है कि महामंडलेश्वर बनने के बाद अब वे उज्जैन में अपना स्थायी आश्रम बनाएंगी, ताकि साधना और सेवा कार्य को और विस्तार दे सकें।

  • MP के युवक गुरकीरत सिंह की कनाडा में हत्या, परिवार ने इंसाफ और आर्थिक मदद की लगाई गुहार

    MP के युवक गुरकीरत सिंह की कनाडा में हत्या, परिवार ने इंसाफ और आर्थिक मदद की लगाई गुहार


    उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन निवासी गुरकीरत सिंह मनोचा का 14 मार्च 2026 को कनाडा के फोर्ट सेंट जॉन ब्रिटिश कोलंबिया में दुखद निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उनकी हत्या हुई है। गुरकीरत लगभग सवा वर्ष पूर्व उच्च शिक्षा के लिए कनाडा गए थे जहां वे नॉर्दर्न लाइट्स कॉलेज में बिजनेस मैनेजमेंट पोस्ट डिग्री डिप्लोमा प्रोग्राम कर रहे थे।

    परिवार के अनुसार 14 मार्च को कॉलेज में कुछ युवकों के बीच विवाद के दौरान गुरकीरत पर हमला किया गया जिससे उनकी मौत हो गई। कनाडा में उनके मित्र ने देर रात इस घटना की जानकारी उनके भाई प्रबकीरत सिंह मनोचा को फोन पर दी।

    गुरकीरत का परिवार उज्जैन में C 86 पार्श्वनाथ सिटी देवास रोड में रहता है। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों ने मुख्यमंत्रीमोहन यादव  को भी जानकारी दी।

    कनाडा पुलिस द्वारा मामले की जांच जारी है। शव की वापसी में लगभग 40 50 लाख रुपये का खर्च अनुमानित है जिसके लिए परिवार ने आर्थिक मदद की भी गुहार लगाई है। परिजन चाहते हैं कि शव जल्द मिले या उन्हें वहां पहुंचने का कोई माध्यम उपलब्ध कराया जाए।

    परिवार के अनुसार हत्या का कारण कॉलेज में चुनावी गुटबाजी थी। मृतक सरल सौम्य और शांत स्वभाव का था। उनके भाई प्रबकीरत ने कहा कि गुरकीरत ने जीवन में कभी विवाद या अपशब्द का प्रयोग नहीं किया।

    उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया भी लगातार परिजनों से संपर्क में हैं और शव की वापसी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रयासरत हैं। परिवार ने प्रदेश और केंद्र सरकार से अपील की है कि जल्द से जल्द शव की वापसी कराई जाए और दोषियों को कड़ी सजा मिले।