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  • नियमित जांच से कैंसर पर शुरुआती दौर में लगाया जा सकता है ब्रेक..

    नियमित जांच से कैंसर पर शुरुआती दौर में लगाया जा सकता है ब्रेक..


    नई दिल्ली। कैंसर आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में शामिल है। हालांकि मेडिकल साइंस में लगातार प्रगति हो रही है, लेकिन समय पर पहचान न होने के कारण यह बीमारी लाखों लोगों की जान ले लेती है। भारत में कैंसर के अधिकांश मामलों का पता तीसरे या चौथे स्टेज में चलता है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है और मृत्यु दर बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही समय पर जरूरी हेल्थ चेकअप कराए जाएं, तो कैंसर को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है।

    GLOBOCAN 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 14.1 लाख नए कैंसर मामले सामने आए, जबकि लगभग 9.2 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह लेट डायग्नोसिस है। शुरुआती स्टेज में कैंसर अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ता रहता है, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

    लेट डायग्नोसिस क्यों है खतरनाक
    जब कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच जाता है, तब यह शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका होता है। इस स्थिति में इलाज न केवल महंगा होता है बल्कि सफल होने की संभावना भी कम हो जाती है। यही कारण है कि डॉक्टर शुरुआती पहचान को कैंसर से लड़ाई का सबसे मजबूत हथियार मानते हैं।

    एक्सपर्ट द्वारा बताए गए 6 जरूरी हेल्थ चेकअप
    ब्लड टेस्ट
    सामान्य ब्लड जांच से शरीर में असामान्य बदलाव, संक्रमण या ट्यूमर मार्कर के संकेत मिल सकते हैं। यह शुरुआती चेतावनी का काम करता है।

    मैमोग्राफी
    महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी की सलाह दी जाती है।

    पैप स्मीयर टेस्ट
    यह सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान में सहायक होता है। समय पर जांच से इस कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है।

    अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन
    पेट, लिवर, किडनी और अन्य अंगों में होने वाले ट्यूमर की पहचान के लिए यह जांच महत्वपूर्ण होती है।

    कोलोनोस्कोपी
    यह जांच आंतों और कोलन कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाने में मदद करती है, खासकर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए।

    ओरल स्क्रीनिंग
    तंबाकू, गुटखा या धूम्रपान करने वालों के लिए मुंह और गले की नियमित जांच बेहद जरूरी होती है, जिससे ओरल कैंसर की समय रहते पहचान हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का डर पालने की बजाय जागरूकता और नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। संतुलित आहार, व्यायाम और समय-समय पर मेडिकल चेकअप से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।समय रहते पहचान न केवल इलाज को आसान बनाती है बल्कि जीवन को भी बचा सकती है।

  • चार बच्चों को बाइक पर कहां लो गया सचिन, वीडियो वायरल, सीमा हैदर ने पूछा….

    चार बच्चों को बाइक पर कहां लो गया सचिन, वीडियो वायरल, सीमा हैदर ने पूछा….

    नोयडा। पाकिस्तान से भारत आए सीमा हैदर को कई साल हो गए, लेकिन अब भी समय-समय पर सुर्खियों में बनी रहती हैं। उसके पति सचिन और सीमा, दोनों ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव हैं और फैंस के लिए वीडियोज, रील्स बनाते रहते हैं। हाल ही में सीमा हैदर ने एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें सचिन अपने चार बच्चों को बाइक पर बैठाए हुए नजर आ रहा है। वह सीमा और अपने चार बच्चों को बाइक पर बैठाता है फिर उसे स्टार्ट करके बच्चों की यूनिफॉर्म लेने के लिए निकल पड़ता है।

    वीडियो डालकर सीमा ने पूछा है कि आखिर सचिन चार बच्चों को लेकर कहां जा रहा है। वीडियो में सचिन चार बच्चों के बाइक पर दिखाई दे रहा है। एक बच्चा आगे बैठा है, जबकि तीन सचिन के पीछे बैठे हुए हैं। वहीं , पीछे मुड़कर सचिन सीमा और बाकियों से बाय-बाय भी कहता है। सचिन चारों बच्चों को बाइक पर बैठाकर स्कूल की ड्रेस दिलाने ले जा रहा है।

    वीडियो में सचिन कहता है, ”दोस्तों आज बच्चों को यूनिफॉर्म दिलाने के लिए जा रहे हैं, क्योंकि बच्चे पहले गए थे ट्यूशन, जिसकी वजह लेट हो गए। बच्चों को क्या दिलाकर लाते हैं, यह बच्चे ही बोलेंगे। इस पर बच्चे कहते हैं कि यूनिफॉर्म। इतना कहकर सचिन बाइक स्टार्ट करके बच्चों को यूनिफॉर्म दिलाने निकल पड़ता है।

    इंस्टाग्राम पर सचिन और बच्चों का यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है। सीमा हैदर ने लिखा है कि सारे बच्चे लेकर सचिन कहां जा रहा है। लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। मालूम हो कि सीमा हैदर इस समय प्रेग्नेंट हैं और जल्द ही छठे बच्चे की मां बनने वाली हैं। पिछले दिनों सीमा डॉक्टर के यहां से चेकअप भी करवाने गई थीं।

    कुछ साल पहले पब्जी गेम खेलते हुए सचिन मीणा और सीमा हैदर को प्यार हो गया था। सीमा पाकिस्तान में रहती थी, लेकिन सचिन के प्यार में उसने अपने पति को छोड़ दिया और नेपाल के रास्ते भारत चली आई। नेपाल में दोनों ने शादी भी की। सचिन सीमा के साथ ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा गांव में रहता है। यहां सीमा हैदर ने एक और बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद कुल पांच बच्चे हैं। चार बच्चे वह पाकिस्तान से लाई। अब फिर से सीमा हैदर प्रेग्नेंट है, जिसके बाद माना जा रहा है कि जल्द ही सचिन और सीमा के परिवार में खुशखबरी आ सकती है।

  • यूपी में शराब पीने वालों के लिए बड़ी खबर नई आबकारी नीति लागू होते ही महंगी हो जाएगी बोतल

    यूपी में शराब पीने वालों के लिए बड़ी खबर नई आबकारी नीति लागू होते ही महंगी हो जाएगी बोतल

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    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में एक अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू होने जा रही है और इसके साथ ही शराब पीने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है. प्रस्तावित नीति के तहत अंग्रेजी शराब की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. विभागीय सूत्रों के अनुसार लाइसेंस शुल्क में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का मसौदा तैयार कर मुख्यालय से लखनऊ भेज दिया गया है. इस प्रस्ताव को जनवरी महीने में मंजूरी मिलने की उम्मीद है.

    नई नीति में इस बार भी शराब दुकानों के नवीनीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. यानी मौजूदा लाइसेंसधारकों को राहत देते हुए टेंडर प्रक्रिया नहीं कराई जाएगी. इससे व्यापारियों को निरंतरता मिलेगी लेकिन बढ़ी हुई लाइसेंस फीस का असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. विभाग का मानना है कि शुल्क बढ़ोतरी से राजस्व में इजाफा होगा.

    पिछली नीति से अलग होगा असर

    गौरतलब है कि पिछले वर्ष लागू की गई आबकारी नीति में शराब की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी. लेकिन इस बार हालात अलग हैं. लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव के चलते शराब के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है. आबकारी विभाग की बैठकों में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई है.

    शराब की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी

    अनुमान लगाया जा रहा है कि नई नीति लागू होने के बाद अंग्रेजी शराब के क्वार्टर की कीमत में 15 से 20 रुपये तक का इजाफा हो सकता है. वहीं हाफ बोतल करीब 50 रुपये और फुल बोतल 100 रुपये तक महंगी हो सकती है. हालांकि अंतिम फैसला शासन की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा.

    राजस्व बढ़ेगा उपभोक्ता पर असर

    आबकारी विभाग का कहना है कि बढ़े हुए शुल्क से राज्य के राजस्व को मजबूती मिलेगी. वहीं आम उपभोक्ताओं के लिए यह नीति खर्च बढ़ाने वाली साबित हो सकती है. अब सभी की निगाहें जनवरी में होने वाले फैसले पर टिकी हैं.