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  • यूपी सरकार का बड़ा फैसला: 16 लाख कर्मचारियों का DA 60% हुआ

    यूपी सरकार का बड़ा फैसला: 16 लाख कर्मचारियों का DA 60% हुआ



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते (DA) में 2% की बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही अब राज्य कर्मचारियों का DA बढ़कर 58% से 60% हो गया है।यह निर्णय करीब 16 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशन से जुड़े कर्मियों को सीधे लाभ देगा।

    कब से मिलेगा फायदा?
    सरकारी आदेश के अनुसार:

    बढ़ा हुआ DA 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा

    इसका भुगतान मई 2026 की सैलरी के साथ नकद किया जाएगा

    जनवरी से अप्रैल 2026 तक का बकाया (arrears) अलग से दिया जाएगा

    किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?
    यह बढ़ोतरी इन सभी श्रेणियों पर लागू होगी:

    नियमित राज्य कर्मचारी

    सहायता प्राप्त शिक्षण एवं तकनीकी संस्थानों के कर्मचारी

    शहरी स्थानीय निकायों के कर्मचारी

    UGC वेतनमान में कार्यरत अधिकारी

    रिटायर कर्मचारियों के लिए खास प्रावधान
    सरकार ने रिटायरमेंट से जुड़े मामलों पर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं:

    जिनकी सेवा आदेश से पहले या बीच में समाप्त हुई है

    जो आने वाले 6 महीनों में रिटायर होंगे

    उन्हें DA का पूरा बकाया नकद (cash) में दिया जाएगा

    यह फैसला क्यों अहम है?
    महंगाई बढ़ने के बीच DA बढ़ोतरी:

    कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ाएगी

    राज्य अर्थव्यवस्था में खपत (consumption) को सपोर्ट करेगी

    केंद्र सरकार के DA संशोधन के बाद एक “aligning step” माना जा रहा है

  • सड़क पर नमाज पर रोक के बाद सियासत गरमाई, पूर्व डीजीपी बृजलाल ने योगी फैसले का किया समर्थन

    सड़क पर नमाज पर रोक के बाद सियासत गरमाई, पूर्व डीजीपी बृजलाल ने योगी फैसले का किया समर्थन


    नई दिल्ली ।  उत्तर प्रदेश में सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर लगाए गए प्रतिबंध के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है, जहां इस निर्णय पर समर्थन और विरोध दोनों ही स्वर तेज हो गए हैं। राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक और वर्तमान राज्यसभा सांसद बृजलाल ने इस फैसले का समर्थन करते हुए इसे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की ऐसी गतिविधि, जिससे यातायात या आम जनजीवन प्रभावित होता है, उसे नियंत्रित करना आवश्यक है ताकि समाज में शांति और अनुशासन बना रहे।

    बृजलाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि समय के साथ सरकारों की प्राथमिकताएं और प्रशासनिक दृष्टिकोण बदलते रहे हैं, और पहले के दौर में कई बार सरकारी और आधिकारिक परिसरों में धार्मिक आयोजनों को लेकर अलग तरह की परंपराएं देखने को मिलती थीं। उनके अनुसार, विभिन्न राजनीतिक कालखंडों में धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर सरकारी स्तर पर अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए गए, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर भी असर पड़ता रहा है।

    इस पूरे मुद्दे ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर बहस को जन्म दे दिया है। वर्तमान सरकार का कहना है कि सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी प्रकार की भीड़ या आयोजन, चाहे वह किसी भी धर्म से संबंधित हो, यदि यातायात या सामान्य व्यवस्था को प्रभावित करता है, तो उसे अनुमति नहीं दी जाएगी। हालांकि, धार्मिक गतिविधियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और निर्धारित स्थानों पर आयोजन की अनुमति देने की बात भी कही गई है, जिससे धार्मिक स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में धार्मिक संवेदनशीलता और सार्वजनिक नीति के संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। इसी कारण विभिन्न राजनीतिक दल इस विषय पर अपने-अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं। एक ओर सरकार इसे व्यवस्था सुधार और कानून पालन का हिस्सा बता रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी और कुछ सामाजिक संगठन इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।

    इस बीच बृजलाल के बयान ने इस बहस को और तेज कर दिया है, क्योंकि उन्होंने न केवल वर्तमान नीति का समर्थन किया है, बल्कि पिछले प्रशासनिक और राजनीतिक दौरों की तुलना करते हुए यह संकेत देने की कोशिश की है कि समय के साथ शासन शैली में बड़ा बदलाव आया है। उनके अनुसार, प्रशासन का मुख्य उद्देश्य किसी भी प्रकार के सामाजिक तनाव को रोकना और सभी समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखना होना चाहिए।

    फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले समय में यह बहस और अधिक गहराने की संभावना है, क्योंकि धार्मिक आयोजनों और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर नीति निर्धारण हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है।

  • योगी कार्यकाल में कानून-व्यवस्था का दावा मजबूत: मुठभेड़ों और गिरफ्तारी के आंकड़े बने सुर्खियां

    योगी कार्यकाल में कानून-व्यवस्था का दावा मजबूत: मुठभेड़ों और गिरफ्तारी के आंकड़े बने सुर्खियां

    नई दिल्ली /उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर किए गए पुलिस अभियानों के आंकड़े एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। सामने आए विवरण के अनुसार इस अवधि में राज्यभर में हजारों मुठभेड़ की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें बड़ी संख्या में अपराधियों की गिरफ्तारी, कई के घायल होने और कुछ मामलों में गंभीर परिणाम देखने को मिले। औसतन हर दिन कई मुठभेड़ होने का दावा किया गया है, जो प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिसिंग मॉडल पर व्यापक बहस को जन्म देता है।

    आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में पुलिस ने संगठित अपराध, गिरोहबंदी और गंभीर आपराधिक गतिविधियों पर लगातार कार्रवाई की है। हजारों मामलों में पुलिस और अपराधियों के बीच टकराव की स्थिति बनी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही कई अपराधी घायल भी हुए, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य में सक्रिय और आक्रामक रणनीति अपनाई गई है। इन कार्रवाइयों के दौरान पुलिस बल को भी नुकसान हुआ, जिसमें कुछ कर्मियों की जान जाने और कई के घायल होने की घटनाएं शामिल रहीं।

    प्रदेश के विभिन्न जोनों में इन कार्रवाइयों का स्तर अलग-अलग रहा। कुछ क्षेत्रों में मुठभेड़ों की संख्या अधिक दर्ज की गई, जबकि कुछ जगहों पर तुलनात्मक रूप से कम घटनाएं सामने आईं। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जोन इस तरह की कार्रवाइयों में अधिक सक्रिय दिखाई दिए, जहां अपराधियों पर लगातार दबाव बनाए रखने के प्रयास किए गए। इन अभियानों में बड़े अपराधियों को पकड़ने और उनकी गतिविधियों को रोकने पर विशेष जोर दिया गया।

    इन आंकड़ों के साथ यह भी दावा किया जा रहा है कि पुलिस की सख्ती के चलते संगठित अपराध पर नियंत्रण में मदद मिली है और कई आपराधिक नेटवर्क प्रदेश छोड़ने या निष्क्रिय होने को मजबूर हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि कठोर कार्रवाई और कानूनी प्रावधानों के प्रभावी उपयोग से अपराधियों में भय का माहौल बना है। वहीं दूसरी ओर, इस तरह की कार्रवाइयों को लेकर समय-समय पर मानवाधिकार और पुलिसिंग के तरीकों पर सवाल भी उठते रहे हैं, जिससे यह मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित न रहकर सामाजिक और कानूनी बहस का हिस्सा बन गया है।

    कुल मिलाकर, पिछले नौ वर्षों में सामने आए ये आंकड़े उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर एक व्यापक तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें एक तरफ अपराध पर नियंत्रण और पुलिस की सक्रिय भूमिका दिखाई देती है, तो दूसरी तरफ इस रणनीति की प्रकृति और प्रभाव पर अलग-अलग राय भी मौजूद हैं। यह पूरा विषय राज्य में सुरक्षा व्यवस्था के बदलते स्वरूप और उसके परिणामों को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • मुख्यमंत्री योगी का जनता से सीधा संवाद, फरियादियों को दिया भरोसा- हर पीड़ित को मिलेगा न्याय

    मुख्यमंत्री योगी का जनता से सीधा संवाद, फरियादियों को दिया भरोसा- हर पीड़ित को मिलेगा न्याय

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर अपनी जनसुनवाई व्यवस्था ‘जनता दर्शन’ के माध्यम से आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया। व्यस्त सरकारी कार्यक्रमों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हर व्यक्ति की बात गंभीरता से सुनी और भरोसा दिलाया कि सरकार जनता की सेवा, सुरक्षा और सुशासन के संकल्प के साथ पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का संवेदनशील और सहज व्यवहार लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

    जनता दर्शन में पहुंचे फरियादियों ने भूमि विवाद, कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधाओं और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का तय समय सीमा के भीतर निष्पक्ष और प्रभावी समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पीड़ित व्यक्ति को न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ना चाहिए और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि हर जरूरतमंद तक राहत पहुंचे। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से मामलों की निगरानी करने के निर्देश भी दिए।

    कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा भावुक क्षण भी सामने आया जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। बिहार से आई एक महिला मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची थीं। जब मुख्यमंत्री उनके पास पहुंचे और उनकी समस्या के बारे में पूछा तो महिला ने बताया कि उन्हें कोई परेशानी नहीं है, वह केवल मुख्यमंत्री के दर्शन करने आई हैं। महिला की इस बात पर मुख्यमंत्री मुस्कुराए और आत्मीयता के साथ उनका अभिवादन किया। इसके बाद उन्होंने महिला और वहां मौजूद अन्य लोगों से भीषण गर्मी में सावधानी बरतने और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखने की अपील की। मुख्यमंत्री का यह सहज व्यवहार कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि गरीबों, जरूरतमंदों और पात्र लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुंचना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से भूमि कब्जाने वाले भू-माफियाओं और दबंग तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक मशीनरी का उद्देश्य केवल फाइलों का निस्तारण नहीं बल्कि लोगों को वास्तविक राहत पहुंचाना होना चाहिए।

    जनता दर्शन कार्यक्रम लंबे समय से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली का अहम हिस्सा रहा है। इस मंच के जरिए आम नागरिक सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचा पाते हैं। कार्यक्रम में अक्सर ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जहां लोग अपनी समस्याओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री के प्रति विश्वास और समर्थन भी व्यक्त करते हैं। यही कारण है कि जनता दर्शन केवल शिकायत सुनने का मंच नहीं बल्कि सरकार और जनता के बीच संवाद का एक मजबूत माध्यम बन चुका है।

    सोमवार को आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सरकार प्रशासनिक स्तर पर सक्रियता बनाए रखने के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता दे रही है। जनता की समस्याओं के समाधान के साथ मुख्यमंत्री का सहज व्यवहार और संवेदनशील संवाद लोगों के बीच सकारात्मक संदेश छोड़ गया।

  • एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट

    एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट


    नई दिल्ली। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून सामान्य समय से पहले 26 मई के आसपास केरल पहुंच सकता है, लेकिन इसके बावजूद देश में मौसम का मिजाज चिंताजनक बना हुआ है। अमेरिकी एजेंसी NOAA की रिपोर्ट के अनुसार इस साल सुपर अल-नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे मानसून कमजोर रह सकता है और देश के कई हिस्सों में सूखा व भीषण गर्मी बढ़ सकती है।

    अल-नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने से मानसूनी हवाओं की दिशा प्रभावित होती है, जिससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम होने और तापमान बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण इस बार बारिश सामान्य से कम और गर्मी अधिक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून केरल से 1 जून के बजाय 26 मई के आसपास प्रवेश कर सकता है, लेकिन इसके बाद अलग-अलग राज्यों में इसकी गति अलग-अलग रहेगी। अनुमान के अनुसार राजस्थान में 20 जून, मध्य प्रदेश में 12 जून, उत्तर प्रदेश में 18 जून और बिहार में 8 से 10 जून के बीच मानसून पहुंच सकता है।

    फिलहाल देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का असर जारी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड और विदर्भ में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है, जहां तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। कई इलाकों में रात के समय भी लू चलने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश के भोपाल में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जिससे सड़कों का डामर तक पिघलने की स्थिति बन गई। वहीं राजस्थान के फलौदी में 44.8 डिग्री और महाराष्ट्र के अमरावती में 45.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिससे कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    इसके साथ ही मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान के अलर्ट भी जारी किए हैं। झारखंड में ऑरेंज अलर्ट, बिहार और हरियाणा के कुछ जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी है, जबकि जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।

    वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र में हीटवेव का असर अगले एक सप्ताह तक जारी रहने की आशंका है। कई राज्यों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
     

  • यूपी में 18 जून तक मानसून की दस्तक संभव, भीषण गर्मी और लू से बढ़ी परेशानी

    यूपी में 18 जून तक मानसून की दस्तक संभव, भीषण गर्मी और लू से बढ़ी परेशानी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मानसून इस बार 18 जून के आसपास दस्तक दे सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून केरल में 26 मई के करीब पहुंचेगा और वहां से आगे बढ़ते हुए 18 जून तक गोरखपुर के रास्ते यूपी में प्रवेश कर सकता है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों ने इसे संभावित तारीख बताया है और स्पष्टता मानसून की वास्तविक गति के आधार पर ही आएगी।

    लखनऊ स्थित मौसम वैज्ञानिक Atul Kumar Singh ने बताया कि मौजूदा मौसम परिस्थितियों को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि जब मानसून केरल से आगे बढ़ेगा, तभी इसकी सटीक तारीख तय की जा सकेगी।

    फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है और तेज धूप के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गर्मी का असर तेज है और कई जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। झांसी और ललितपुर सहित करीब 8 जिलों में लू चलने की चेतावनी दी गई है।

    पिछले 24 घंटों में कुछ जिलों में हल्की बारिश जरूर दर्ज की गई है, लेकिन उससे गर्मी में कोई खास राहत नहीं मिली। बांदा प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान 47 डिग्री तक भी जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म हो चुका है, जिसके कारण अब दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म रहेंगी। हीटवेव की स्थिति और तेज होने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग ने यह भी बताया कि इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इसके पीछे प्रशांत महासागर में अल नीनो जैसी परिस्थितियों का प्रभाव और उत्तरी गोलार्ध में कम बर्फबारी को कारण माना जा रहा है, जिससे वर्षा प्रभावित हो सकती है।

    हालांकि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में मानसून अपेक्षाकृत बेहतर रहा था और सामान्य से 10 से 15 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई थी। लेकिन इस बार मौसम पैटर्न बदलने से बारिश कम होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे कृषि और जलस्तर पर असर पड़ सकता है।

  • यूपी में पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही नेताओं का ‘ई-रिक्शा और साइकिल मोड’, विधायक से सांसद तक दिखा अनोखा बदलाव

    यूपी में पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही नेताओं का ‘ई-रिक्शा और साइकिल मोड’, विधायक से सांसद तक दिखा अनोखा बदलाव



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। शुक्रवार से लागू नए रेट के बाद लखनऊ में पेट्रोल 97.53 रुपए और डीजल 90.81 रुपए प्रति लीटर हो गया है। बढ़ती कीमतों के बीच नेताओं और अफसरों ने ईंधन बचाने के लिए नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं।

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बढ़ते दामों को लेकर तंज कसा है। उन्होंने X पर लिखा कि आगे बढ़ना है तो साइकिल ही बेहतर विकल्प है, और साइकिल से बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

    वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री की ईंधन बचत की अपील का असर यूपी में साफ नजर आ रहा है। रामपुर में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने गुरुवार को 4 ई-रिक्शा खरीदे हैं और अब वह गनर के साथ इन्हीं ई-रिक्शा से कार्यक्रमों में जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनके ई-रिक्शा उनके घर पर ही रहते हैं और शहर में आने-जाने के लिए उनका उपयोग किया जा रहा है।

    गोरखपुर में सांसद रवि किशन ने भी कार पूलिंग कर उदाहरण पेश किया। उन्होंने कुशीनगर सांसद विजय दुबे के साथ इलेक्ट्रिक कार में 25 किलोमीटर की दूरी तय की और खजनी पहुंचे। इस दौरान रवि किशन ने वीडियो बनाकर बताया कि पीएम मोदी की अपील के बाद ईंधन बचाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

    प्रदेश सरकार के कई मंत्री और अफसर भी इस अभियान में शामिल होते दिखे। लखनऊ में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अपनी फ्लीट छोड़कर बुलेट से सचिवालय पहुंचे। फिरोजाबाद में डीएम और उनका स्टाफ करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर ऑफिस पहुंचे। मुरादाबाद में कमिश्नर ऑन्जनेय कुमार सिंह ने साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंचकर संदेश दिया कि ऊर्जा बचत जरूरी है।

    प्रयागराज में मेयर गणेश केसरवानी भी घर से साइकिल चलाकर नगर निगम पहुंचे और उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना भविष्य के लिए जरूरी है।

    यूपी सरकार ने भी ऊर्जा बचत को लेकर सख्त फैसले लिए हैं। नए निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अफसरों के काफिले में 50 प्रतिशत कटौती की जाएगी। सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन या मेट्रो/बस का उपयोग अनिवार्य होगा। साथ ही सरकारी बैठकें, सेमिनार और वर्कशॉप वर्चुअल आयोजित करने पर जोर दिया जाएगा।

  • UP में आंधी-बारिश ने मचाई तबाही. अब तक 111 लोगों की मौत, 170 पशुओं की भी गई जान

    UP में आंधी-बारिश ने मचाई तबाही. अब तक 111 लोगों की मौत, 170 पशुओं की भी गई जान


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आंधी, तेज बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है. राज्य के कई जिलों में आए भीषण तूफान (Severe Storms) और खराब मौसम (Bad Weather) के कारण अब तक कम से कम 111 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 72 लोग घायल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा 170 पशुओं की मौत और 227 घरों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है।

    गुरुवार को राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि 13 मई को हुए खराब मौसम के कारण राज्य के 26 जिलों से मौतों की सूचना मिली है. तेज हवाओं के चलते कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और मकानों को नुकसान पहुंचा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों तक 24 घंटे के अंदर राहत सामग्री और आर्थिक सहायता पहुंचाई जाए. उन्होंने सभी मंडलायुक्तों और जिला मजिस्ट्रेटों से घटनाओं का पूरी संवेदनशीलता के साथ सत्यापन करने और पीड़ित परिवारों से सीधा संपर्क स्थापित कर हर संभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है.

    राहत आयुक्त कार्यालय ने बताया कि राज्य स्तर से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जिला प्रशासन के साथ सीधे समन्वय के जरिए राहत कार्य संचालित किए जा रहे हैं. प्रभावित जिलों को आवश्यक धनराशि भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि राहत और बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।


    प्रयागराज में सबसे ज्यादा तबाही

    प्रयागराज जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, गुरुवार सुबह तक तूफान और बारिश के कारण 17 लोगों की मौत की सूचना थी. बाद में अन्य क्षेत्रों से भी जानकारी आने के बाद प्रशासन ने बुधवार की घटनाओं में कुल 24 लोगों की मौत की पुष्टि की. तेज हवाओं और बारिश के चलते कई ग्रामीण इलाकों में मकानों को नुकसान पहुंचा और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई. प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य जारी है।


    भदोही में 16 लोगों की मौत

    भदोही जिले में तूफान से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कुंवर वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि कई क्षेत्रों में तेज आंधी के कारण पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए. कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।


    फतेहपुर में दीवार गिरने और हादसों में गई जान

    फतेहपुर जिले में तूफान और बारिश से जुड़ी घटनाओं में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 16 लोग घायल हो गए. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि खागा तहसील में पांच महिलाओं सहित आठ लोगों की मौत हुई. वहीं सदर तहसील में एक घर की दीवार गिरने से एक महिला की जान चली गई. घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में कराया जा रहा है।


    प्रतापगढ़ में शेड और दीवार गिरने से मौतें

    प्रतापगढ़ जिले में तेज हवाओं और बारिश के बीच दीवार गिरने, सीमेंटेड शेड ढहने और बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई. पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि लालगंज कोतवाली क्षेत्र के ओझा का पुरवा गांव में एक सीमेंटेड शेड गिरने से भीम यादव (25) मलबे के नीचे दब गए और उनकी मौत हो गई. उन्होंने बताया कि बघराई थाना क्षेत्र के सरी स्वामी गांव में दीवार गिरने से भूषण पांडे (56) की मौत हुई. इसके अलावा नारंगपुर गांव की शांति देवी (46) और छत्रपुर शिवाला रघना गांव के लाल बहादुर (44) की भी तूफान से जुड़ी घटनाओं में जान चली गई।


    कानपुर देहात में बिजली गिरने से युवती की मौत

    कानपुर देहात जिले में बारिश से संबंधित घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई. पुलिस सूत्रों के अनुसार, रसूलाबाद क्षेत्र के भौथारी गांव में भारी बारिश के दौरान 19 वर्षीय रुचि बकरियों के साथ नीम के पेड़ के नीचे खड़ी थी, तभी बिजली गिरने से उसकी मौत हो गई. इस घटना में कई बकरियों की भी मौत हो गई. पास में खड़ा एक 60 वर्षीय व्यक्ति भी घायल हो गया. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) दुष्यंत कुमार ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों से मानव और पशुधन नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है और सरकारी नियमों के अनुसार सहायता दी जाएगी।


    देवरिया और सोनभद्र में भी हादसे

    देवरिया जिले के भीमपुर गौरा गांव निवासी कोमल यादव (62) की बिजली गिरने से मौत हो गई. इस घटना में दो अन्य लोग घायल हुए हैं. एक अन्य घटना में नेरुअरी गांव निवासी रामनाथ प्रसाद (65) की भी बिजली गिरने से मौत हो गई. वहीं सोनभद्र जिले में माधव सिंह (38) की तेज बारिश और तूफान के दौरान उखड़े पेड़ के नीचे दबने से मौत हो गई.


    CM योगी ने दिए सख्त निर्देश

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है. साथ ही राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों को नुकसान का सर्वेक्षण कर सरकार को जल्द रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है. राज्य सरकार का कहना है कि राहत और पुनर्वास कार्य तेजी से जारी हैं और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

  • महोबा में तेज रफ्तार डंपर का कहर, दो ममेरे भाइयों की दर्दनाक मौत, चालक फरार

    महोबा में तेज रफ्तार डंपर का कहर, दो ममेरे भाइयों की दर्दनाक मौत, चालक फरार



    नई दिल्ली। महोबा में तेज रफ्तार डंपर ने बाइक सवार दो ममेरे भाइयों को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया, जबकि पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के लवकुशनगर क्षेत्र के ग्राम प्रकाश बम्हौरी निवासी 21 वर्षीय रामनरेश अपने 19 वर्षीय ममेरे भाई नवाब के साथ महोबा डीजल लेने आए थे। दोनों मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे बाइक से वापस अपने गांव लौट रहे थे।

    इसी दौरान शहर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पसवारा के पास स्थित इंडस वैली पब्लिक स्कूल के समीप तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। दोनों ने हेलमेट नहीं पहन रखा था, जिससे सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    प्रभारी निरीक्षक शहर कोतवाली मनीष पांडेय ने बताया कि डंपर चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया है, जिसकी तलाश के लिए टीम लगाई गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • धामपुर शुगर मिल के संस्थापक विजय कुमार गोयल का निधन, किडनी दान जैसी मिसाल से समाज में छोड़ी अमिट छाप

    धामपुर शुगर मिल के संस्थापक विजय कुमार गोयल का निधन, किडनी दान जैसी मिसाल से समाज में छोड़ी अमिट छाप





    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले स्थित धामपुर शुगर मिल्स (DSM) के संस्थापक और वरिष्ठ उद्योगपति कुंवर विजय कुमार गोयल का 86 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से उद्योग जगत और स्थानीय क्षेत्र में शोक की लहर है।

    विजय कुमार गोयल को उत्तर भारत के चीनी उद्योग का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता था। उन्होंने धामपुर शुगर मिल सहित कई शुगर यूनिट्स की स्थापना की और गन्ना उत्पादन व चीनी उद्योग में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया। उनके नेतृत्व में यह उद्योग न सिर्फ मजबूत हुआ बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिला। उन्हें उनके योगदान के लिए “चीनी उद्योग का भीष्म पितामह” भी कहा जाता था।

    गोयल केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी भी थे। उनके जीवन की सबसे प्रेरणादायक घटना तब सामने आई जब उन्होंने एक अनजान व्यक्ति को अपनी एक किडनी दान कर दी थी। बताया जाता है कि उन्होंने अखबार में एक मेधावी इंजीनियर की गंभीर हालत के बारे में पढ़ने के बाद बिना किसी को बताए हैदराबाद जाकर किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया था। यह घटना उनके निस्वार्थ स्वभाव का बड़ा उदाहरण मानी जाती है।

    उनके परिवार और कर्मचारियों के अनुसार, विजय कुमार गोयल हमेशा अपने उद्योग से जुड़े लोगों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए काम करते रहे। वे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा, खेल और विकास में विशेष रुचि लेते थे। उन्होंने स्क्वैश जैसे खेलों के लिए सुविधाएं भी विकसित कराईं, जिससे कई युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिला।

    गोयल को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। उनका पूरा जीवन उद्योग, सेवा और मानवता के समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

    उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पुत्र गौतम गोयल ने मुखाग्नि दी। उद्योग जगत के कई दिग्गजों, कर्मचारियों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    विजय कुमार गोयल का निधन न केवल एक उद्योगपति की विदाई है, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व का अंत है जिसने अपने काम और सेवा दोनों से समाज में गहरी छाप छोड़ी।