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  • यूपी में पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही नेताओं का ‘ई-रिक्शा और साइकिल मोड’, विधायक से सांसद तक दिखा अनोखा बदलाव

    यूपी में पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही नेताओं का ‘ई-रिक्शा और साइकिल मोड’, विधायक से सांसद तक दिखा अनोखा बदलाव



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। शुक्रवार से लागू नए रेट के बाद लखनऊ में पेट्रोल 97.53 रुपए और डीजल 90.81 रुपए प्रति लीटर हो गया है। बढ़ती कीमतों के बीच नेताओं और अफसरों ने ईंधन बचाने के लिए नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं।

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बढ़ते दामों को लेकर तंज कसा है। उन्होंने X पर लिखा कि आगे बढ़ना है तो साइकिल ही बेहतर विकल्प है, और साइकिल से बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

    वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री की ईंधन बचत की अपील का असर यूपी में साफ नजर आ रहा है। रामपुर में भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने गुरुवार को 4 ई-रिक्शा खरीदे हैं और अब वह गनर के साथ इन्हीं ई-रिक्शा से कार्यक्रमों में जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनके ई-रिक्शा उनके घर पर ही रहते हैं और शहर में आने-जाने के लिए उनका उपयोग किया जा रहा है।

    गोरखपुर में सांसद रवि किशन ने भी कार पूलिंग कर उदाहरण पेश किया। उन्होंने कुशीनगर सांसद विजय दुबे के साथ इलेक्ट्रिक कार में 25 किलोमीटर की दूरी तय की और खजनी पहुंचे। इस दौरान रवि किशन ने वीडियो बनाकर बताया कि पीएम मोदी की अपील के बाद ईंधन बचाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

    प्रदेश सरकार के कई मंत्री और अफसर भी इस अभियान में शामिल होते दिखे। लखनऊ में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अपनी फ्लीट छोड़कर बुलेट से सचिवालय पहुंचे। फिरोजाबाद में डीएम और उनका स्टाफ करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर ऑफिस पहुंचे। मुरादाबाद में कमिश्नर ऑन्जनेय कुमार सिंह ने साइकिल चलाकर कार्यालय पहुंचकर संदेश दिया कि ऊर्जा बचत जरूरी है।

    प्रयागराज में मेयर गणेश केसरवानी भी घर से साइकिल चलाकर नगर निगम पहुंचे और उन्होंने कहा कि ईंधन की बचत, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलन और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना भविष्य के लिए जरूरी है।

    यूपी सरकार ने भी ऊर्जा बचत को लेकर सख्त फैसले लिए हैं। नए निर्देशों के अनुसार मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अफसरों के काफिले में 50 प्रतिशत कटौती की जाएगी। सप्ताह में एक दिन सार्वजनिक परिवहन या मेट्रो/बस का उपयोग अनिवार्य होगा। साथ ही सरकारी बैठकें, सेमिनार और वर्कशॉप वर्चुअल आयोजित करने पर जोर दिया जाएगा।

  • UP में आंधी-बारिश ने मचाई तबाही. अब तक 111 लोगों की मौत, 170 पशुओं की भी गई जान

    UP में आंधी-बारिश ने मचाई तबाही. अब तक 111 लोगों की मौत, 170 पशुओं की भी गई जान


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आंधी, तेज बारिश, ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है. राज्य के कई जिलों में आए भीषण तूफान (Severe Storms) और खराब मौसम (Bad Weather) के कारण अब तक कम से कम 111 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 72 लोग घायल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा 170 पशुओं की मौत और 227 घरों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है।

    गुरुवार को राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि 13 मई को हुए खराब मौसम के कारण राज्य के 26 जिलों से मौतों की सूचना मिली है. तेज हवाओं के चलते कई इलाकों में पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे गिर गए और मकानों को नुकसान पहुंचा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित परिवारों तक 24 घंटे के अंदर राहत सामग्री और आर्थिक सहायता पहुंचाई जाए. उन्होंने सभी मंडलायुक्तों और जिला मजिस्ट्रेटों से घटनाओं का पूरी संवेदनशीलता के साथ सत्यापन करने और पीड़ित परिवारों से सीधा संपर्क स्थापित कर हर संभव मदद उपलब्ध कराने को कहा है.

    राहत आयुक्त कार्यालय ने बताया कि राज्य स्तर से हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जिला प्रशासन के साथ सीधे समन्वय के जरिए राहत कार्य संचालित किए जा रहे हैं. प्रभावित जिलों को आवश्यक धनराशि भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि राहत और बचाव कार्यों में कोई बाधा न आए।


    प्रयागराज में सबसे ज्यादा तबाही

    प्रयागराज जिला प्रशासन द्वारा जारी सूची के अनुसार, गुरुवार सुबह तक तूफान और बारिश के कारण 17 लोगों की मौत की सूचना थी. बाद में अन्य क्षेत्रों से भी जानकारी आने के बाद प्रशासन ने बुधवार की घटनाओं में कुल 24 लोगों की मौत की पुष्टि की. तेज हवाओं और बारिश के चलते कई ग्रामीण इलाकों में मकानों को नुकसान पहुंचा और बिजली व्यवस्था भी प्रभावित हुई. प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य जारी है।


    भदोही में 16 लोगों की मौत

    भदोही जिले में तूफान से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट कुंवर वीरेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि कई क्षेत्रों में तेज आंधी के कारण पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए. कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।


    फतेहपुर में दीवार गिरने और हादसों में गई जान

    फतेहपुर जिले में तूफान और बारिश से जुड़ी घटनाओं में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 16 लोग घायल हो गए. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि खागा तहसील में पांच महिलाओं सहित आठ लोगों की मौत हुई. वहीं सदर तहसील में एक घर की दीवार गिरने से एक महिला की जान चली गई. घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में कराया जा रहा है।


    प्रतापगढ़ में शेड और दीवार गिरने से मौतें

    प्रतापगढ़ जिले में तेज हवाओं और बारिश के बीच दीवार गिरने, सीमेंटेड शेड ढहने और बिजली गिरने की अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई. पुलिस अधीक्षक दीपक भूकर ने बताया कि लालगंज कोतवाली क्षेत्र के ओझा का पुरवा गांव में एक सीमेंटेड शेड गिरने से भीम यादव (25) मलबे के नीचे दब गए और उनकी मौत हो गई. उन्होंने बताया कि बघराई थाना क्षेत्र के सरी स्वामी गांव में दीवार गिरने से भूषण पांडे (56) की मौत हुई. इसके अलावा नारंगपुर गांव की शांति देवी (46) और छत्रपुर शिवाला रघना गांव के लाल बहादुर (44) की भी तूफान से जुड़ी घटनाओं में जान चली गई।


    कानपुर देहात में बिजली गिरने से युवती की मौत

    कानपुर देहात जिले में बारिश से संबंधित घटनाओं में दो लोगों की मौत हुई. पुलिस सूत्रों के अनुसार, रसूलाबाद क्षेत्र के भौथारी गांव में भारी बारिश के दौरान 19 वर्षीय रुचि बकरियों के साथ नीम के पेड़ के नीचे खड़ी थी, तभी बिजली गिरने से उसकी मौत हो गई. इस घटना में कई बकरियों की भी मौत हो गई. पास में खड़ा एक 60 वर्षीय व्यक्ति भी घायल हो गया. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) दुष्यंत कुमार ने बताया कि स्थानीय अधिकारियों से मानव और पशुधन नुकसान की रिपोर्ट मांगी गई है और सरकारी नियमों के अनुसार सहायता दी जाएगी।


    देवरिया और सोनभद्र में भी हादसे

    देवरिया जिले के भीमपुर गौरा गांव निवासी कोमल यादव (62) की बिजली गिरने से मौत हो गई. इस घटना में दो अन्य लोग घायल हुए हैं. एक अन्य घटना में नेरुअरी गांव निवासी रामनाथ प्रसाद (65) की भी बिजली गिरने से मौत हो गई. वहीं सोनभद्र जिले में माधव सिंह (38) की तेज बारिश और तूफान के दौरान उखड़े पेड़ के नीचे दबने से मौत हो गई.


    CM योगी ने दिए सख्त निर्देश

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा है. साथ ही राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनियों को नुकसान का सर्वेक्षण कर सरकार को जल्द रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है. राज्य सरकार का कहना है कि राहत और पुनर्वास कार्य तेजी से जारी हैं और प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

  • महोबा में तेज रफ्तार डंपर का कहर, दो ममेरे भाइयों की दर्दनाक मौत, चालक फरार

    महोबा में तेज रफ्तार डंपर का कहर, दो ममेरे भाइयों की दर्दनाक मौत, चालक फरार



    नई दिल्ली। महोबा में तेज रफ्तार डंपर ने बाइक सवार दो ममेरे भाइयों को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया, जबकि पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के लवकुशनगर क्षेत्र के ग्राम प्रकाश बम्हौरी निवासी 21 वर्षीय रामनरेश अपने 19 वर्षीय ममेरे भाई नवाब के साथ महोबा डीजल लेने आए थे। दोनों मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे बाइक से वापस अपने गांव लौट रहे थे।

    इसी दौरान शहर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम पसवारा के पास स्थित इंडस वैली पब्लिक स्कूल के समीप तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। दोनों ने हेलमेट नहीं पहन रखा था, जिससे सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    घटना के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    प्रभारी निरीक्षक शहर कोतवाली मनीष पांडेय ने बताया कि डंपर चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया है, जिसकी तलाश के लिए टीम लगाई गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

  • धामपुर शुगर मिल के संस्थापक विजय कुमार गोयल का निधन, किडनी दान जैसी मिसाल से समाज में छोड़ी अमिट छाप

    धामपुर शुगर मिल के संस्थापक विजय कुमार गोयल का निधन, किडनी दान जैसी मिसाल से समाज में छोड़ी अमिट छाप





    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले स्थित धामपुर शुगर मिल्स (DSM) के संस्थापक और वरिष्ठ उद्योगपति कुंवर विजय कुमार गोयल का 86 वर्ष की आयु में दिल्ली में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और रविवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से उद्योग जगत और स्थानीय क्षेत्र में शोक की लहर है।

    विजय कुमार गोयल को उत्तर भारत के चीनी उद्योग का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता था। उन्होंने धामपुर शुगर मिल सहित कई शुगर यूनिट्स की स्थापना की और गन्ना उत्पादन व चीनी उद्योग में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया। उनके नेतृत्व में यह उद्योग न सिर्फ मजबूत हुआ बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिला। उन्हें उनके योगदान के लिए “चीनी उद्योग का भीष्म पितामह” भी कहा जाता था।

    गोयल केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी भी थे। उनके जीवन की सबसे प्रेरणादायक घटना तब सामने आई जब उन्होंने एक अनजान व्यक्ति को अपनी एक किडनी दान कर दी थी। बताया जाता है कि उन्होंने अखबार में एक मेधावी इंजीनियर की गंभीर हालत के बारे में पढ़ने के बाद बिना किसी को बताए हैदराबाद जाकर किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया था। यह घटना उनके निस्वार्थ स्वभाव का बड़ा उदाहरण मानी जाती है।

    उनके परिवार और कर्मचारियों के अनुसार, विजय कुमार गोयल हमेशा अपने उद्योग से जुड़े लोगों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए काम करते रहे। वे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा, खेल और विकास में विशेष रुचि लेते थे। उन्होंने स्क्वैश जैसे खेलों के लिए सुविधाएं भी विकसित कराईं, जिससे कई युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिला।

    गोयल को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। उनका पूरा जीवन उद्योग, सेवा और मानवता के समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

    उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पुत्र गौतम गोयल ने मुखाग्नि दी। उद्योग जगत के कई दिग्गजों, कर्मचारियों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

    विजय कुमार गोयल का निधन न केवल एक उद्योगपति की विदाई है, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व का अंत है जिसने अपने काम और सेवा दोनों से समाज में गहरी छाप छोड़ी।

  • यूपी : मुरादाबाद में चेतावनी वाले पोस्टरों से बढ़ा विवाद: ‘हिंदू सोसाइटी’ की अपील ने छेड़ी नई बहस

    यूपी : मुरादाबाद में चेतावनी वाले पोस्टरों से बढ़ा विवाद: ‘हिंदू सोसाइटी’ की अपील ने छेड़ी नई बहस


    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के लाजपत नगर स्थित श्रीराम सोसाइटी में घरों के बाहर लगाए गए ‘हिंदू सनातनी सोसाइटी’ लिखे पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन पोस्टरों की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद शहर में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। साथ ही, दो साल पहले शिव मंदिर वाली गली में लगे पलायन संबंधी पोस्टरों की घटना भी एक बार फिर लोगों को याद आ रही है।

    इस पूरे विवाद की वजह सोसाइटी में कुछ मकानों की खरीद-फरोख्त बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक, कुछ लोग अपने घर बेचना चाहते हैं और इन मकानों को खरीदने के लिए एक विशेष समुदाय के खरीदारों ने अधिक कीमत की पेशकश की है, जबकि अन्य खरीदार कम दाम दे रहे हैं। इसी स्थिति को लेकर सोसाइटी के कुछ निवासियों में यह आशंका पैदा हुई है कि नए समुदाय के आने से इलाके की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना बदल सकती है।

    विरोध का यह तरीका शनिवार को कुछ घरों से शुरू हुआ, जो रविवार तक बढ़कर 25 से ज्यादा घरों तक पहुंच गया। भगवान राम की तस्वीर वाले इन पोस्टरों में लिखा है कि यह क्षेत्र “पूर्णतः हिंदू सनातनी सोसाइटी” है और अन्य पक्ष के लोग यहां मकान न लें।

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क हो गया है। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने कटघर थाना पुलिस को मौके पर भेजकर लोगों से बातचीत करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि अब तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, पोस्टरों में सीधे किसी धर्म का नाम नहीं लिया गया है और ‘दूसरे पक्ष’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह मामला कानूनी दृष्टि से जटिल हो जाता है। फिलहाल, क्षेत्र में माहौल संवेदनशील जरूर है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

  • पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं, जिससे किसानों की मेहनत पानी में चली गई।

    पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं, जिससे किसानों की मेहनत पानी में चली गई।


    नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर रबी की मुख्य फसल गेहूं को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खेतों में जलभराव की स्थिति बन चुकी है, जिससे फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

    पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर के खरड़ इलाके में लगातार हो रही बारिश से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय किसानों ने बताया कि उनके खेतों में जलभराव की वजह से 10 से 12 एकड़ फसल प्रभावित हो चुकी है और यदि बारिश अगले कुछ दिनों तक जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है। संगरूर के किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण करीब 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। जमीन लीज पर लेने वाले किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि फसल बर्बाद होने के बावजूद उन्हें जमीन का किराया देना पड़ रहा है।

    बरनाला में भी ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान हरदीप सिंह ने बताया कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं लखबीर सिंह ने कहा कि फसलें पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं और स्थिति बेहद चिंताजनक है। किसानों का कहना है कि बिना किसी मदद के वे इस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएंगे और सरकार से त्वरित मुआवजे की आवश्यकता है।

    उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में भी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने तबाही मचा दी है। यहां खड़ी फसलें गिर गई हैं और कट चुकी फसल भी पानी में भीगकर खराब हो गई है। एक किसान ने बताया कि उसकी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, साथ ही सरसों की फसल भी नष्ट हो गई है। अन्य किसानों ने कहा कि सारी फसलें पानी में गिरकर खराब हो गई हैं और यदि सरकार से कोई सहायता मिलती है तो उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।

    कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि रबी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रही है। किसान आर्थिक दबाव में हैं और कई परिवार कर्ज में डूबने की स्थिति में हैं। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों से किसानों को त्वरित मुआवजा देने और राहत कार्यों को शीघ्र प्रभावी बनाने की अपील की जा रही है।

  • पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं,

    पंजाब और उत्तर प्रदेश में लगातार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसलें व्यापक स्तर पर भारी प्रभावित हुईं,


    नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर रबी की मुख्य फसल गेहूं को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में खेतों में जलभराव की स्थिति बन चुकी है, जिससे फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

    पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर के खरड़ इलाके में लगातार हो रही बारिश से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय किसानों ने बताया कि उनके खेतों में जलभराव की वजह से 10 से 12 एकड़ फसल प्रभावित हो चुकी है और यदि बारिश अगले कुछ दिनों तक जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है। संगरूर के किसानों का कहना है कि तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण करीब 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। जमीन लीज पर लेने वाले किसानों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि फसल बर्बाद होने के बावजूद उन्हें जमीन का किराया देना पड़ रहा है।

    बरनाला में भी ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसान हरदीप सिंह ने बताया कि बहुत बड़ा नुकसान हुआ है, वहीं लखबीर सिंह ने कहा कि फसलें पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं और स्थिति बेहद चिंताजनक है। किसानों का कहना है कि बिना किसी मदद के वे इस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएंगे और सरकार से त्वरित मुआवजे की आवश्यकता है।

    उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में भी बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने तबाही मचा दी है। यहां खड़ी फसलें गिर गई हैं और कट चुकी फसल भी पानी में भीगकर खराब हो गई है। एक किसान ने बताया कि उसकी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, साथ ही सरसों की फसल भी नष्ट हो गई है। अन्य किसानों ने कहा कि सारी फसलें पानी में गिरकर खराब हो गई हैं और यदि सरकार से कोई सहायता मिलती है तो उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।

    कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि रबी की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रही है। किसान आर्थिक दबाव में हैं और कई परिवार कर्ज में डूबने की स्थिति में हैं। स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकारों से किसानों को त्वरित मुआवजा देने और राहत कार्यों को शीघ्र प्रभावी बनाने की अपील की जा रही है।

  • नोएडा में गैस सिलेंडर संकट पर लोगों का फूटा गुस्सा, सेक्टर 18 मेट्रो स्टेशन के पास लगाया जाम

    नोएडा में गैस सिलेंडर संकट पर लोगों का फूटा गुस्सा, सेक्टर 18 मेट्रो स्टेशन के पास लगाया जाम


    नोएडा । उत्तर प्रदेश के नोएडा शहर में घरेलू गैस सिलेंडर की बढ़ती किल्लत को लेकर लोगों का गुस्सा गुरुवार को सड़कों पर दिखाई दिया। नाराज लोगों ने सेक्टर 18 मेट्रो स्टेशनके पास जोरदार प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम कर दी जिससे इलाके में कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हो गया।

    प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से गैस एजेंसियों पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। इसके कारण घरों में खाना बनाना तक मुश्किल हो गया है। लोगों का कहना है कि एजेंसियों पर सिलेंडर खत्म होने की बात कही जा रही है लेकिन दूसरी ओर खुलेआम कालाबाजारी की जा रही है और अधिक कीमत लेकर सिलेंडर बेचे जा रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कई उपभोक्ताओं ने गैस बुकिंग कराई थी लेकिन समय पर सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो रही है। इससे आम परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं ने भी प्रदर्शन में शामिल होकर प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की।

    जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को भरोसा दिलाया कि गैस एजेंसियों से बात कर समस्या का समाधान कराया जाएगा और यदि कहीं कालाबाजारी की शिकायत सही पाई जाती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे शांतिपूर्वक अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समस्या का जल्द समाधान किया जा सके और शहर में सामान्य व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

  • जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिला एरोड्रम लाइसेंस

    जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को मिला एरोड्रम लाइसेंस


    नई दिल्ली/नोएडा ।
    उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (वाईआईएपीएल) को एयरोड्रोम लाइसेंस मिल गया है। जेवर एयरपोर्ट को इसका लंबे समय से इंतजार था।

    नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में बताया कि विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर के जेवर में स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को एयरोड्रोम लाइसेंस दे दिया है। इससे पहले जेवर एयरपोर्ट को सिक्योरिटी क्लीयरेंस भी मिल चुका है।

    मंत्रालय के मुताबिक इस एयरपोर्ट को ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी कंपनी वाईआईएपीएल ने उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ सरकारी निजी कंपनी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत विकसित किया है। इसका कंसेशन पीरियड 1 अक्टूबर, 2021 को 40 साल के लिए शुरू हुआ।

    मंत्रालय के मुताबिक इस एयरपोर्ट को हर मौसम में ऑपरेशन के लिए पब्लिक यूज़ कैटेगरी के तहत लाइसेंस मिला है। इसमें 10/28 ओरिएंटेशन वाला रनवे है। इसका डाइमेंशन 3,900 m×45 m है, जिसे इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और एरोनॉटिकल ग्राउंड लाइटिंग (एजीएल) सिस्टम से सपोर्ट मिलता है, जिससे इसका 24×7 ऑपरेशन हो सकता हैं। एयरोड्रम में 24 कोड C और 02 कोड D/F एयरक्राफ्ट के लिए पार्किंग स्टैंड हैं। यह एआरएफएफ कैटेगरी 9 सुविधाओं से पूरी तरह लैस है, जो बोइंग 777-300ER जैसे वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट को हैंडल कर सकती हैं।

    उल्लेखनीय है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (एनआईए) को जेवर एयरपोर्ट के नाम से भी जाना जाता है। सरकार का लक्ष्य इसको देश के सबसे आधुनिक और बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल करना है। इस एयरपोर्ट को मल्टी-मॉडल कार्गो हब के साथ 4 फेज में डेवलप किया जा रहा है। इसमें पहले फेज में एक रनवे और एक टर्मिनल डेवलप होगा। इससे एयरपोर्ट की कैपेसिटी हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को हैंडल करने की होगी। इसके सभी फेज पूरे होने के बाद इस एयरपोर्ट पर हर साल 7 करोड़ यात्री आ सकेंगे, जो दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी यूपी के लिए एक बड़ा एविएशन हब बन जाएगा।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि जल्द ही एयरपोर्ट का उद्घाटन होगा। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इसके उद्घाटन करने का अनुरोध कर उद्घाटन कार्यक्रम की तिथि निश्चित की जाएगी।

    उन्होंने बताया कि यहां से एयर इंडिया, आकाशा और इंडिगो ने अपने विमानों को उड़ान भरने के लिए समझौता किया है। एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद इन एयरलाइंस कंपनियां यहां पर अपना स्टाफ की नियुक्तियां और अन्य तकनीकी सुविधाओं को लगाना शुरू कर देंगे। एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए पहले से ही सीआईएसएफ और यूपी पुलिस तैनात है। एयरपोर्ट से अच्छी कनेक्टिविटी देने के लिए विभिन्न मार्गों और साधनों पर कार्य हो रहा है। इसके शुरू होने से उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    उन्होंने बताया कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद यह देश ही नहीं एशिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल हो जाएगा। इसकी क्षमता प्रतिवर्ष करोड़ों यात्रियों को संभालने की होगी और यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक एविएशन नेटवर्क से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • UP की अर्थव्यवस्था का बड़ा पावरहाउस बना अयोध्या का भव्य राम मंदिर… बदली आर्थिक तस्वीर

    UP की अर्थव्यवस्था का बड़ा पावरहाउस बना अयोध्या का भव्य राम मंदिर… बदली आर्थिक तस्वीर


    लखनऊ।
    अयोध्या (Ayodhya) में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर (Lord Shri Ram Magnificent Temple ) के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद न केवल धार्मिक आस्था का सैलाब उमड़ा है, बल्कि इस पावन नगरी की आर्थिक तस्वीर भी पूरी तरह बदल गई है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) लखनऊ (Indian Institute of Management (IIM) Lucknow) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट ‘इकॉनमिक रेनेसांस ऑफ अयोध्या’ (अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण) में चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, अयोध्या अब केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा पावरहाउस (Uttar Pradesh’s Economy Major Powerhouse) बनकर उभरा है। मंदिर उद्घाटन के बाद शहर में पर्यटन, विदेशी निवेश, स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसरों में ऐसी वृद्धि हुई है जिसकी कल्पना कुछ वर्षों पहले तक असंभव थी।


    श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि

    आईआईएम की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या की स्थिति बेहद अलग थी। तब सालाना करीब 1.7 लाख श्रद्धालु ही अयोध्या पहुंचते थे और स्थानीय बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर था। लेकिन जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद तस्वीर जादुई रूप से बदली है। आंकड़ों के मुताबिक, पहले छह महीनों में ही 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। अब अनुमान है कि हर साल पांच से छह करोड़ आगंतुक स्थायी रूप से अयोध्या आएंगे। पर्यटकों की इस भारी संख्या से प्रदेश सरकार को मिलने वाले कर राजस्व में 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये की भारी बढ़त होने की संभावना जताई गई है।


    आतिथ्य क्षेत्र और एमएसएमई (MSME) का विस्तार

    प्रतिदिन औसतन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य (Hospitality) और सेवा क्षेत्र को नई संजीवनी दी है। रिपोर्ट बताती है कि अयोध्या में 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे शुरू हुए हैं। दुनिया भर के दिग्गज होटल समूहों जैसे ताज और मैरियट ने अयोध्या में अपनी विस्तार योजनाएं धरातल पर उतार दी हैं। इसके साथ ही, लगभग 6,000 नए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) स्थापित हुए हैं। अध्ययन का अनुमान है कि अगले चार-पांच वर्षों में अयोध्या में 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जो स्थानीय युवाओं के लिए वरदान साबित होंगे।


    स्थानीय दुकानदारों और प्रॉपर्टी की कीमतों में उछाल

    इस आर्थिक क्रांति का सबसे सीधा लाभ अयोध्या के छोटे व्यापारियों को मिला है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन दुकानदारों की औसत कमाई पहले मात्र 400 से 500 रुपये प्रतिदिन थी, वह अब बढ़कर 2,500 रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई है। इसके अलावा, मंदिर के आसपास की संपत्तियों (Real Estate) की कीमतों में 5 से 10 गुना तक का जबरदस्त उछाल आया है। कनेक्टिविटी बेहतर होने और अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनने से निवेश की गति और तेज हो गई है। आईआईएम की यह स्टडी स्पष्ट करती है कि अयोध्या का मॉडल अब देश के अन्य धार्मिक शहरों के लिए ‘इकॉनमिक ब्लूप्रिंट’ का काम करेगा।