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  • पोरसा में सराफा व्यापारी के बैग से कटकर निकले डेढ़ लाख, सीसीटीवी में दो संदिग्ध, UP के पिनाहट में दबिश

    पोरसा में सराफा व्यापारी के बैग से कटकर निकले डेढ़ लाख, सीसीटीवी में दो संदिग्ध, UP के पिनाहट में दबिश


    मुरैना । मुरैना के पोरसा कस्बे में सराफा व्यापारी के बैग से डेढ़ लाख रुपए चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कलकत्ता के दासपुर निवासी 38 वर्षीय सराफा व्यापारी शेख शाहरुल, जो लंबे समय से मुरैना में रहकर गहने बनाने का काम कर रहे हैं, शनिवार को पोरसा कस्बे में एक सराफा दुकान से पेमेंट लेकर वापस मुरैना लौट रहे थे। बताया गया है कि वे पोरसा के संतोष वर्मा की दुकान से डेढ़ लाख रुपए लेकर यात्री बस में सवार होने ही लगे थे कि तभी पीछे से दो लोग भी बस में चढ़े।

    इसी दौरान बदमाशों ने व्यापारी के बैग की चैन काटकर उसमें रखे 1.5 लाख रुपए निकाल लिए और घटनास्थल से फरार हो गए। घटना की जानकारी होते ही व्यापारी ने तुरंत बस से उतरकर पोरसा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पोरसा पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

    पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें दो संदिग्ध दिखाई दिए। दोनों की पहचान व्यापारी ने भी की है। CCTV फुटेज में दिख रहा है कि आरोपी शातिराना ढंग से बैग की चैन काटते हैं और रुपए निकालकर मौके से भागते हैं। यह वारदात एक ऐसे समय में हुई जब व्यापारी बस में चढ़ रहे थे, इसलिए बदमाशों को पुलिस ने “फुर्तीला और योजनाबद्ध” बताया है।

    एसडीओपी रवि भदौरिया ने बताया कि पोरसा में सराफा व्यापारियों से वसूली के दौरान यह घटना हुई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पोरसा से लगे उत्तर प्रदेश के पिनाहट इलाके में दबिश शुरू कर दी है। पुलिस टीम आरोपियों की तलाश में विभिन्न जगहों के CCTV फुटेज भी खंगाल रही है और स्थानीय स्तर पर पूछताछ भी की जा रही है।

    मामला बढ़ता देख व्यापारी और भी सावधान दिखे। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से मुरैना में सराफा व्यापारियों के लिए गहने बनाने का काम कर रहे हैं। इसी काम के भुगतान के लिए वह शनिवार को पोरसा पहुंचे थे और शाम करीब 4 बजे पैसा लेकर बस में चढ़ रहे थे। लेकिन इसी दौरान यह घटना घटी, जिससे उनके लिए आर्थिक नुकसान के साथ-साथ सुरक्षा की चिंता भी बढ़ गई।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी ने संदिग्धों को देखा हो या किसी भी तरह की जानकारी हो तो तुरंत थाने को सूचित करें। साथ ही यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि यात्रा के दौरान नकदी या महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को सुरक्षित रखें और बैग की चैन तथा लॉक का विशेष ध्यान रखें। पुलिस के अनुसार, इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन पिनाहट क्षेत्र में दबिश जारी है और जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • मौसम का नया सिस्टम एक्टिव, उत्तर भारत में बारिश की होगी एंट्री, कुछ राज्यों में लौटेगी सर्दी

    मौसम का नया सिस्टम एक्टिव, उत्तर भारत में बारिश की होगी एंट्री, कुछ राज्यों में लौटेगी सर्दी


    नई दिल्ली। उत्तर भारत के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में अगले तीन दिनों तक बारिश होने के संकेत मिले हैं। इस बदलाव से जहां कुछ इलाकों में ठंड से राहत मिली है, वहीं कई जगह ठिठुरन फिर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली और राजस्थान में आने वाले तीन दिन मौसम अस्थिर रहेंगे। पंजाब और हरियाणा में फिलहाल तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं के कारण ठंड का असर तेज हो गया है। शनिवार को यूपी के कई हिस्सों में कोहरा छाने की संभावना है और 1 से 3 फरवरी के बीच बारिश होने से सर्दी और तीखी हो सकती है।

    कश्मीर घाटी में सर्दी का सबसे कठिन दौर ‘चिल्ला-ए-कलां’ अब समाप्त हो चुका है। इसके बाद घाटी के अधिकतर इलाकों में रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक श्रीनगर में न्यूनतम तापमान 1.3 डिग्री सेल्सियस, कोनिबल में 1.0 डिग्री, पुलवामा में 0.1 डिग्री और कुलगाम में 1.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। कई स्थानों पर तापमान जमाव बिंदु से ऊपर पहुंचने के कारण कड़ाके की ठंड से कुछ राहत महसूस की जा रही है।

    पंजाब के अधिकांश इलाकों में शुक्रवार को रात का तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि हरियाणा में यह औसत के करीब बना रहा। मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल तापमान में बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं, लेकिन 1 फरवरी से पश्चिमी विक्षोभ के असर से दोनों राज्यों के कुछ हिस्सों में बारिश हो सकती है, जिससे हल्की ठंड लौट सकती है।

    राजधानी दिल्ली में भी शुक्रवार को मौसम थोड़ा नरम रहा। यहां अधिकतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस समय के औसत से 0.5 डिग्री अधिक है। हालांकि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी दी है कि यह राहत अस्थायी है और अगले तीन दिनों में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं।

    राजस्थान में भी मौसम एक बार फिर सक्रिय होने जा रहा है। मौसम विभाग जयपुर के अनुसार शनिवार से अजमेर, कोटा, जयपुर, भरतपुर संभाग और शेखावाटी क्षेत्र में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इन इलाकों में आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि 1 और 2 फरवरी को उत्तरी और पूर्वी राजस्थान के यही जिले बारिश से प्रभावित रहेंगे, जबकि जोधपुर और बीकानेर संभाग के अधिकांश क्षेत्रों में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं।

  • वाराणसी में AAP की पदयात्रा का भव्य समापन, संजय सिंह ने दी नफरत के खिलाफ मुद्दों की राजनीति की चुनौती

    वाराणसी में AAP की पदयात्रा का भव्य समापन, संजय सिंह ने दी नफरत के खिलाफ मुद्दों की राजनीति की चुनौती



    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) की “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” पदयात्रा ने 16 जनवरी से मिर्ज़ापुर से शुरू होकर सातवें और अंतिम दिन वाराणसी में जोरदार समापन किया। सात दिनों की इस यात्रा में युवाओं, मजदूरों, किसानों, बुनकरों, दलितों, पिछड़ों, महिलाओं और बेरोजगारों ने जोरदार समर्थन देकर इसे जनआंदोलन का रूप दिया। गुरुवार को सारनाथ में दर्शन के साथ पदयात्रा का समापन हुआ, जिसके बाद लाल बहादुर शास्त्री घाट, सिकरौल में विशाल जनसभा आयोजित की गई।
    समापन कार्यक्रम में AAP के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि “रोज़गार दो–सामाजिक न्याय दो” आंदोलन यहीं नहीं रुकेगा और फरवरी के अंत में चौथे चरण की पदयात्रा शुरू की जाएगी, जिसमें जनता की भागीदारी और बढ़ेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन नफरत के खिलाफ है और अब मुद्दों की राजनीति ही होगी।

    पदयात्रा के अंतिम दिन संजय सिंह के नेतृत्व में पदयात्रा 12 बजे सारनाथ से शुरू होकर सारनाथ मंदिर तक चली, जहां लोगों ने फूलों की वर्षा और नारों से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क, खाद और रोजगार जैसे असली मुद्दों को जानबूझकर हाशिये पर धकेला जा रहा है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि देश में नफरत की राजनीति इसलिए हो रही है ताकि जनता अपने सवाल न पूछ सके।

    संजय सिंह ने मिर्ज़ापुर से वाराणसी तक की यात्रा के दौरान बुलडोजर से घरों के तोड़े जाने, जमीनें छीने जाने और हजारों एकड़ जमीन पर कब्जे की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक आदमी अपनी जिंदगी की कमाई से घर बनाता है और सरकार एक मिनट में उसे उजाड़ देती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वाराणसी में पौराणिक मंदिरों, मूर्तियों और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा तक को नहीं बख्शा गया।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल करते हुए पूछा कि हर साल दो करोड़ नौकरियों का वादा करने वाली सरकार 12 साल में 24 करोड़ नौकरियां क्यों नहीं दे सकी।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश के दावे के बावजूद युवाओं को नौकरी नहीं मिली। AAP की मांग साफ है“नौकरी दो या 18 साल से ऊपर हर नौजवान को हर महीने 10,000 रुपये बेरोजगारी भत्ता दो।”

    सामाजिक न्याय पर उन्होंने कहा कि संविधान का सही पालन ही सामाजिक न्याय है, लेकिन आज दलितों, पिछड़ों और वंचितों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा कि नफरत की राजनीति खत्म होगी तो मुद्दों की राजनीति अपने आप मजबूत होगी।

    समापन में संजय सिंह ने कहा कि सारनाथ की धरती ने शांति और अहिंसा का संदेश दिया है और भारत तभी विश्व गुरु बनेगा जब यही रास्ता अपनाएगा। उन्होंने जनता से अपील की कि चौथे चरण की पदयात्रा में बड़ी संख्या में शामिल होकर इस संघर्ष को मजबूत करें।

    AAP उत्तर प्रदेश ने कहा कि “रोजगार दो–सामाजिक न्याय दो” केवल अभियान नहीं, बल्कि बेरोजगारी, अन्याय और नफरत की राजनीति के खिलाफ जनआंदोलन है, जिसे सड़क से लेकर सदन तक आगे बढ़ाया जाएगा।पदयात्रा का तीसरा चरण 22 जनवरी 2026 को वाराणसी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

  • दिल्ली-नोएडा की तर्ज पर पूरे यूपी में लागू होगा डबल हेलमेट नियम, जानें कितनी होगी जुर्माने की रकम

    दिल्ली-नोएडा की तर्ज पर पूरे यूपी में लागू होगा डबल हेलमेट नियम, जानें कितनी होगी जुर्माने की रकम


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए नया कदम उठाया है। अब सड़क पर बाइक और स्कूटी चलाने वाले सभी वाहन चालकों और उनके सवारों के लिए डबल हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम दिल्ली और नोएडा में लागू डबल हेलमेट नियम की तर्ज पर राज्यव्यापी प्रभावी होगा।

    क्यों जरूरी है डबल हेलमेट?
    बाइक और स्कूटी पर सवार लोगों की सुरक्षा बढ़ाने और सिर की चोटों से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    अधिकारियों के अनुसार, कई बार दुर्घटनाओं में सवार का सिर और चालक का सिर दोनों गंभीर रूप से घायल होते हैं, इसलिए केवल चालक के लिए हेलमेट पहनना पर्याप्त नहीं है।

    जुर्माना और दंड
    यदि कोई चालक या सवार डबल हेलमेट नहीं पहनता है, तो उसे 200 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि नियम के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, और यह नियम सभी सड़क और हाईवे पर लागू रहेगा।

    सरकार का उद्देश्य
    उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इस कदम से सड़क दुर्घटनाओं में मौत और गंभीर चोटों की संख्या में कमी आएगी। साथ ही यह सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेगा।

  • सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा

    सीवेज प्रदूषण पर NGT सख्त, MP-UP-राजस्थान से जवाब तलब, इंदौर में मौतें और भोपाल में 'ई-कोलाई' का खतरा


    नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की प्रधान पीठ ने नई दिल्ली में बुधवार को इंदौर, भोपाल और राजस्थान के शहरों में पेयजल में सीवेज की मिलावट से जुड़ी गंभीर समस्याओं पर स्वतः संज्ञान लिया। NGT ने मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की राज्य सरकारों से जवाब तलब किया है। ट्रिब्यूनल ने इंदौर में गंदे पानी के कारण मौतों और भोपाल में पेयजल में ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया मिलने के मामलों का हवाला दिया।
    मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इंदौर में गंदे पानी के सेवन से मौतें हुई हैं, जबकि भोपाल के कुछ इलाकों में ट्यूबवेल से रिसाव के कारण पेयजल में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। वहीं, राजस्थान के उदयपुर, जोधपुर, कोटा, बांसवाड़ा, जयपुर और अजमेर जैसे शहरों में पुरानी और जर्जर पाइपलाइन प्रणाली के चलते सीवेज के पानी का पेयजल में मिलना जारी है। ग्रेटर नोएडा में भी सीवेज मिला पानी पीने से कई लोग बीमार पड़े, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।
    एनजीटी ने इन घटनाओं को गंभीर पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला माना। पीठ ने संबंधित राज्य सरकारों, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से स्पष्ट जवाब तलब किया है। कहा गया है कि यह मामला पर्यावरणीय कानूनों का पालन सुनिश्चित करने, जिम्मेदारी तय करने और नागरिकों के सुरक्षित पेयजल के अधिकार की रक्षा के लिए विचाराधीन रहेगा।

    इसके अलावा, NGT ने मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के मामलों को भी संज्ञान में लिया। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क, रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और कोयला खदान परियोजनाओं के लिए 50 से 100 वर्ष पुराने लगभग 15 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं या काटे जाने का प्रस्ताव है। सिंगरौली, खंडवा, विदिशा, भोपाल और इंदौर में भारी संख्या में पेड़ों की कटाई से वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

    पीठ ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य वन विभागों को नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई तक शपथ पत्र के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करें। अगली सुनवाई 9 मार्च 2026 को होगी।

  • उत्तर भारत में सर्दी की मार, कोहरे और बर्फबारी से जीवन प्रभावित, शीतलहर के कारण अलर्ट जारी

    उत्तर भारत में सर्दी की मार, कोहरे और बर्फबारी से जीवन प्रभावित, शीतलहर के कारण अलर्ट जारी


    नई दिल्ली । उत्तर भारत के कई हिस्सों में सर्दी और कोहरे के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। दिल्ली उत्तर प्रदेश पंजाब हरियाणा और अन्य मैदानी इलाकों में घना कोहरा और शीतलहर ने दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग IMD के अनुसार अगले कुछ दिनों तक यह स्थिति बनी रहने की संभावना है।

    दिल्ली और उत्तर प्रदेश

    दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में इस समय घना कोहरा छाया हुआ है जिससे विजिबिलिटी बहुत कम हो गई है। राजधानी दिल्ली में न्यूनतम तापमान 8-9 डिग्री सेल्सियस के आसपास है जबकि अधिकतम तापमान 16-18 डिग्री तक पहुँच रहा है। कोहरे की वजह से हवाई और रेल यातायात पर भी असर पड़ा है कई उड़ानें देरी से चल रही हैं। इसके अलावा यूपी के लखनऊ वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया है। मौसम विभाग ने यूपी के लगभग 30 जिलों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है और 4-6 जनवरी तक यह स्थिति बनी रहने की संभावना जताई है।

    पंजाब और हरियाणा

    पंजाब और हरियाणा में भी घना कोहरा और शीतलहर जारी है। यहां विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम हो गई है। मौसम विभाग ने इन राज्यों में शीतलहर की स्थिति को 6 जनवरी तक जारी रहने का अनुमान जताया है। न्यूनतम तापमान इन क्षेत्रों में सामान्य से काफी नीचे जा चुका है और ठंड के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश

    जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का सिलसिला जारी है। गुलमर्ग सोनमर्ग पहलगाम और अन्य ऊपरी इलाकों में नए साल के मौके पर ताजा बर्फबारी हुई है जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। जम्मू-कश्मीर में ‘चिल्लई कलां’ के दौरान कड़ाके की ठंड ने तापमान को और नीचे गिरा दिया है लेकिन पर्यटक बर्फबारी का आनंद ले रहे हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश के मनाली रोहतांग पास लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम बर्फबारी हो रही है जिससे ठंड का असर बढ़ा है लेकिन पर्यटकों की भीड़ बनी हुई है।

    कोहरा और ठंड की चुनौती

    उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से 30 से अधिक जिलों में घना कोहरा छाया रहेगा और शीतलहर के कारण सामान्य जनजीवन में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। मौसम विभाग ने लखनऊ समेत कई जिलों में अगले तीन दिनों के लिए शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। घना कोहरा और शीतलहर का प्रभाव कृषि ट्रांसपोर्ट और दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ा है और इससे बचने के लिए लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।अगले कुछ दिनों तक मौसम में कोई खास राहत की उम्मीद नहीं जताई गई है इसलिए उत्तर भारत के लोग खासकर यात्री और स्कूलों के छात्र अपनी यात्रा और अन्य गतिविधियों को लेकर सतर्क रहें।

  • UP में जायके और जाति का अनोखा मेल.. चर्चा में सपा की 'बाटी-चोखा' की दावत

    UP में जायके और जाति का अनोखा मेल.. चर्चा में सपा की 'बाटी-चोखा' की दावत


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजनीति में इन दिनों जायके और जाति का एक अनोखा मेल देखने को मिल रहा है। नए साल के पहले दिन समाजवादी पार्टी (सपा) (Samajwadi Party – SP) के मुख्यालय में आयोजित ‘बाटी-चोखा’ की दावत ने राज्य में एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। यह दावत सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के भीतर चल रहे ‘ब्राह्मण बनाम संगठन’ विवाद पर कटाक्ष के रूप में देखी जा रही है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, नए साल के अवसर पर आयोजित इस भोज में शामिल कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “बाटी-चोखा हमारे प्रदेश की संस्कृति का हिस्सा है, इसे आपसी झगड़ों और राजनीति में बदनाम नहीं किया जाना चाहिए। सभी को बिना किसी पाबंदी के एक साथ बैठकर भोजन करना चाहिए।”

    सपा प्रमुख का यह बयान भाजपा के उन ब्राह्मण विधायकों और विधान पार्षदों (MLCs) के समर्थन में माना जा रहा है, जिन्हें हाल ही में एक ऐसी ही दावत में शामिल होने के लिए अपनी ही पार्टी से चेतावनी मिली थी। सपा सूत्रों के अनुसार, इस भोज का मकसद सत्तारूढ़ दल को यह संदेश देना था कि खाने-पीने और सामाजिक मेलजोल पर किसी भी तरह की जातिगत बंदिश गलत है।


    क्या है पूरा विवाद?

    इस सियासी दावत की पटकथा लगभग एक सप्ताह पहले लिखी गई थी। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी के कई ब्राह्मण विधायकों और एमएलसी को चेतावनी जारी की थी। ये नेता पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लोकप्रिय व्यंजन ‘बाटी-चोखा’ के बहाने आयोजित एक सामुदायिक बैठक और डिनर में शामिल हुए थे। भाजपा ने इसे जाति आधारित गतिविधि और अनुशासनहीनता के तौर पर देखा था। हालांकि, पूर्व सांसद ब्रजभूषण शरण सिंह जैसे नेताओं ने अपनी ही पार्टी के इस रुख का विरोध करते हुए कहा था कि जब दल खुद जाति सम्मेलन करते हैं, तो विधायकों के साथ बैठने पर आपत्ति क्यों है।

    जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव ने ‘बाटी-चोखा’ के जरिए दो निशाने साधे हैं। भाजपा के भीतर जो ब्राह्मण नेता संगठन की सख्ती से नाराज हैं, उनके प्रति सहानुभूति दिखाकर सपा उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। वहीं, बाटी-चोखा पूर्वी यूपी की पहचान है। इसके जरिए सपा खुद को आम जनता की परंपराओं के करीब और भाजपा को कठोर दिखाने की कोशिश कर रही है।

  • CM योगी की नई नीति ने बदली UP की तस्वीर… रोजगार बढ़े…. कमाई में भी इजाफा

    CM योगी की नई नीति ने बदली UP की तस्वीर… रोजगार बढ़े…. कमाई में भी इजाफा


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath Government) द्वारा लागू की गई नई आबकारी नीति (New excise policy) ने राज्य के राजस्व, सुरक्षा और औद्योगिक निवेश की तस्वीर बदल दी है। साल 2025 आबकारी विभाग के लिए संरचनात्मक सुधारों और तकनीकी बदलावों का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और ‘ई-गवर्नेंस’ के समन्वय ने इस क्षेत्र में पारदर्शिता के साथ-साथ रिकॉर्ड तोड़ कमाई सुनिश्चित की है।

    नई आबकारी नीति के तहत विभाग की पूरी कार्यप्रणाली को ‘टेक्नोलॉजी ड्रिवेन’ बनाया गया है। अब शराब की दुकानों का आवंटन पूरी तरह से ई-लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई है। इसके अलावा, लेबल की मंजूरी, एमआरपी का निर्धारण और निर्यात परमिट जैसी सभी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर दिया गया है।

    निगरानी को सख्त करने के लिए उत्पादन इकाइयों और डिस्टिलरीज में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही, शराब ले जाने वाले टैंकरों में डिजिटल लॉक और जीपीएस (GPS) अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि रास्ते में मिलावट या चोरी की संभावना को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।


    राजस्व में 15% से ज्यादा की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

    योगी सरकार की नीतियों का सीधा असर सरकारी खजाने पर दिख रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 तक राज्य को कुल 35,144.11 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व प्राप्त हुआ है। यह पिछले वर्ष (2024-25) की इसी अवधि के मुकाबले 15.59 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने पिछले साल की तुलना में केवल आठ महीनों में 4,741.77 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय दर्ज की है।


    एथेनॉल उत्पादन में यूपी बना नंबर-1

    उत्तर प्रदेश अब देश के एक बड़े एथेनॉल हब के रूप में उभरा है। इस साल राज्य में एथेनॉल का उत्पादन 182 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इसमें से 105.25 करोड़ लीटर एथेनॉल की खपत राज्य के भीतर हुई, जबकि 40.96 करोड़ लीटर अन्य राज्यों को निर्यात किया गया। इससे न केवल उद्योगों को मजबूती मिली है, बल्कि गन्ना किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है।


    अवैध शराब के खिलाफ एक्शन

    अवैध शराब के कारोबार को जड़ से मिटाने के लिए सरकार ने इस साल व्यापक अभियान चलाया। प्रदेश भर में कुल 79,990 मामले दर्ज किए गए और लगभग 20.86 लाख लीटर अवैध शराब जब्त की गई। इस कार्रवाई के तहत 15,085 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 2,755 को जेल भेजा गया। जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘यूपी एक्साइज सिटीजन ऐप’ और टोल-फ्री नंबर (14405) भी जारी किया गया है।


    निवेश और रोजगार के नए अवसर

    ‘इन्वेस्ट यूपी’ के माध्यम से आबकारी क्षेत्र में अब तक 35,378 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों वाले 140 एमओयू (MoU) साइन किए गए हैं। वर्तमान में 35 परियोजनाएं धरातल पर काम कर रही हैं, जिनमें 4,045 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है। इन परियोजनाओं ने सीधे तौर पर 5,000 से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान किया है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को $1 ट्रिलियन (एक ट्रिलियन डॉलर) बनाने के लक्ष्य में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

  • यूपी के भोजपुर में ‘रोहिंग्या’ संदिग्धों को मिला सरकारी आवास और राशन जांच एजेंसियां सतर्क

    यूपी के भोजपुर में ‘रोहिंग्या’ संदिग्धों को मिला सरकारी आवास और राशन जांच एजेंसियां सतर्क


    मेरठ । भोजपुर उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के भोजपुर क्षेत्र के रानी नागल गांव में सरकारी योजनाओं का गड़बड़ तरीके से वितरण किए जाने का मामला सामने आया है। गांव में रह रहे घूमंतू परिवारों को बिना उचित प्रक्रिया के मुफ्त राशन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ और वोटर बनाने की कोशिश की गई है। इन परिवारों में से कुछ को रोहिंग्या माना जा रहा है जिनके खिलाफ खुफिया विभाग और पुलिस की जांच अब तेज़ हो गई है।

    सरकारी योजनाओं का बंदरबांट

    रानी नागल में कुछ परिवारों को सरकारी योजनाओं का फायदा गलत तरीके से दिया गया है। यह परिवार मूलतः घूमंतू समुदाय से हैं और इनका नाम असल में रजिस्टर्ड वोटर सूची में नहीं था। शिकायतों के बाद यह सामने आया कि इन परिवारों को राशन कार्ड प्रधानमंत्री आवास योजना का घर और आधार कार्ड भी जारी कर दिया गया था। इसके अलावा वोटर लिस्ट में इनका नाम जोड़ने के लिए फर्जी तरीके से प्रक्रिया की जा रही थी जिसमें केवल महिलाओं ने ही अपनी गणना प्रपत्र भरे थे।

    गांव छोड़ने पर मजबूर हुए लोग

    गांव में हो रही इस गड़बड़ी के उजागर होते ही कई परिवारों ने गांव छोड़ दिया और भागने को मजबूर हो गए। इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी के बाद खुफिया विभाग की टीम गांव में पहुंची और मामले की गहन जांच शुरू की। रानी नागल के पूर्व प्रधान सईदुल ने डीएम अनुज सिंह और एसएसपी सतपाल अंतिल से इस मामले की शिकायत की थी। इसके बाद एसडीएम सदर डॉ. राम तोहन मीणा द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि 2018 में कुल 92 घूमंतू लोग गांव में पहुंचे थे और इनकी फर्जी वोटर बनने की प्रक्रिया चल रही थी।

    किसी और के नाम पर आवास देना

    इन घूमंतू परिवारों में से दस परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों में रह रहे हैं। इस योजना के तहत ये आवास ग्राम समाज की भूमि पर बने थे लेकिन सवाल उठता है कि क्या इन आवासों का नाम इन परिवारों के नाम पर दर्ज किया गया या फिर किसी और के नाम पर इन्हें आवास दिया गया। यह मामला अब जांच का विषय बन चुका है। जांच में यह भी सामने आया कि इन परिवारों के पास राशन कार्ड भी हैं और उनके आधार कार्ड भी बनवाए गए हैं। इस संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही खुफिया विभाग ने तुरंत अपनी टीम भेजी और मामले की गहरी जांच शुरू कर दी।

    पुलिस और खुफिया विभाग की जांच

    भोजपुर पुलिस ने भी इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस गड़बड़ी में किसकी भूमिका है। एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही इस पर कोई बयान दिया जा सकेगा। फिलहाल खुफिया विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी पूरी स्थिति की जांच कर रहे हैं और मामले के सभी पहलुओं को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं।

    फर्जी वोटर बनाने की कोशिश

    गांव में फर्जी वोटर बनाने की प्रक्रिया का खुलासा होने के बाद जांच टीम ने यह पुष्टि की कि 92 लोगों में से केवल 10 परिवारों ने ही वोटर बनने के लिए अपना गणना प्रपत्र भरा था और इन सभी ने इसे केवल महिलाओं के नाम से भरा था। इस प्रक्रिया में भी कई असंगतियां पाई गईं और यही कारण है कि जांच की दिशा और तेज़ कर दी गई है। रानी नागल गांव में हो रही इस सरकारी योजनाओं की गड़बड़ी से सवाल उठ रहे हैं कि क्या अधिकारियों ने इन गतिविधियों पर सही समय पर नजर नहीं रखी। यह मामला न केवल भ्रष्टाचार और सरकारी प्रणाली की नाकामी को उजागर करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि गलत तरीके से योजनाओं का लाभ उठाने की कोशिश की जा रही थी। खुफिया विभाग और पुलिस की जांच अब यह निर्धारित करेगी कि इन गतिविधियों में कितनी साजिश शामिल थी और इसके पीछे कौन लोग थे।

  • उत्तर प्रदेश में भूतों ने एक रात में बनाया शिव मंदिर जानिए इसके रहस्यमयी इतिहास के बारे में

    उत्तर प्रदेश में भूतों ने एक रात में बनाया शिव मंदिर जानिए इसके रहस्यमयी इतिहास के बारे में


    नई दिल्ली । भारत में भगवान शिव के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं जिनसे जुड़ी कई रहस्यमयी और दिलचस्प मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें से कई मंदिरों का संबंध देवताओं ऋषि-मुनियों या प्रमुख धार्मिक हस्तियों से होता है। मगर उत्तर प्रदेश में स्थित एक शिव मंदिर के निर्माण को लेकर एक अनोखी और हैरान करने वाली मान्यता है जिसमें दावा किया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण भूतों ने किया था। खास बात यह है कि मंदिर की संरचना और इसकी ईंटें इतनी अद्वितीय हैं कि इस पर यकीन करना काफी मुश्किल हो सकता है।

    यह मंदिर उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में स्थित है और इसके निर्माण से जुड़ी किंवदंती काफी पुरानी है। यह माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सिर्फ एक रात में हुआ था। जब गांव में भूतों की कहानी प्रचलित हुई तो लोगों का ध्यान इस मंदिर की ओर आकर्षित हुआ। खास बात यह है कि मंदिर की सभी ईंटें एक ही रंग की हैं जो आमतौर पर देखने में बहुत ही असामान्य होती हैं। कहा जाता है कि रात के अंधेरे में भूतों ने मिलकर इस मंदिर का निर्माण किया और सुबह होते ही मंदिर पूरी तरह से तैयार था।

    मंदिर के निर्माण के समय की कहानी काफी दिलचस्प और रहस्यमयी मानी जाती है। किंवदंती के अनुसार गांव में एक पुराना शिव मंदिर था लेकिन वह काफी जर्जर हो चुका था और उसकी स्थिति बहुत ही खराब थी। गांव के लोग चाहते थे कि इस मंदिर को फिर से नया रूप मिले लेकिन इसके लिए किसी तरह का कोई प्रयास नहीं हो पा रहा था। एक रात जब गांव में कोई नहीं था तो भूतों ने रात भर मेहनत करके इस मंदिर का निर्माण किया। सुबह होते ही गांववाले यह देख कर हैरान रह गए कि एक रात में मंदिर बनकर तैयार हो गया था।

    मंदिर के निर्माण को लेकर जितनी भी कथाएं प्रचलित हैं वे सभी काफी रोमांचक और रहस्यमयी हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह मंदिर भगवान शिव की कृपा से बना है और भूतों ने उनकी प्रेरणा से इस मंदिर का निर्माण किया। वहीं कुछ लोग इसे एक अद्वितीय घटना मानते हैं जो बिना किसी भौतिक कारण के घटित हुई। मंदिर की ईंटों के रंग की विशेषता भी इस घटना को और अधिक रहस्यमयी बनाती है। मंदिर की दीवारें और छत पर उकेरी गई आकृतियाँ भी काफी असामान्य हैं और इन्हें देखकर कोई भी यह कह सकता है कि यह कुछ अलौकिक शक्तियों का काम है।

    मंदिर के अंदर शिवलिंग की स्थापना है और वहां पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु आते रहते हैं। भक्तों का मानना है कि इस मंदिर में शिवजी की विशेष कृपा है और यहां आने से उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं। मंदिर का माहौल बहुत ही शांत और ध्यानमग्न है जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है।

    इस मंदिर का इतिहास न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह रहस्यों और किंवदंतियों से भी भरा हुआ है। जो लोग इस मंदिर का दौरा करते हैं वे इसके रहस्यमयी इतिहास और उसकी अनकही कहानियों के बारे में सुनकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं। हालांकि इस मंदिर के निर्माण के सही कारणों का पता लगाना संभव नहीं हो पाया है लेकिन यह कहानी आज भी लोगों में एक जिज्ञासा और आकर्षण का कारण बन चुकी है।

    कुल मिलाकर यह मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि इसकी रहस्यमयी उत्पत्ति और निर्माण की कहानी इसे एक अनोखा स्थान बनाती है। यह स्थान उन लोगों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन चुका है जो रहस्य इतिहास और धर्म के बीच के कनेक्शन को समझने में रुचि रखते हैं।