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  • हरिद्वार: संत रविदास जयंती की शोभायात्रा के बाद भड़की हिंसा, तोड़फोड़ और फायरिंग में दो लोगों की मौत… गांव में तनाव

    हरिद्वार: संत रविदास जयंती की शोभायात्रा के बाद भड़की हिंसा, तोड़फोड़ और फायरिंग में दो लोगों की मौत… गांव में तनाव


    हरिद्वार।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार जिले (Haridwar district) के भगवानपुर क्षेत्र (Bhagwanpur area) में संत रविदास जयंती (Sant Ravidas Jayanti) के अवसर पर निकाली गई शोभायात्रा के बाद हालात बेकाबू हो गए। एक ही समुदाय के दो गुटों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि एक पक्ष की ओर से की गई गोलीबारी में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने आरोपी पक्ष के घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। देर रात गांव में एक और शव मिलने से तनाव और बढ़ गया, जिसके चलते पुलिस ने एहतियातन अतिरिक्त बल तैनात कर दिया है।

    भगवानपुर थाना क्षेत्र के बिनारसी गांव में रविवार को रविदास जयंती को लेकर आयोजन किया गया था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद 27 वर्षीय आनंद, पुत्र लक्ष्मीचंद, अपने परिवार और कुछ परिचितों के साथ घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में, घर के सामने रहने वाले धर्मवीर और उसके साथ मौजूद लोगों से किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गई।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपित पक्ष ने लाइसेंसी और अवैध हथियारों का इस्तेमाल करते हुए फायरिंग की। इसमें आनंद, उसका भाई विकास, गगनदीप और योगेंद्र गोली लगने से घायल हो गए। आनंद की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। विकास को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि गगनदीप और योगेंद्र को रुड़की के अस्पताल ले जाया गया। गगनदीप के पैर में गोली लगने के कारण उसे हायर सेंटर रेफर किया गया है, वहीं योगेंद्र को छर्रे लगे हैं और उसका इलाज जारी है।


    आरोपियों का घर फूंका

    उधर, गांव में फायरिंग के बाद अफरातफरी मच गई। घटना से गुस्साए आनंद के घरवालों-परिचितों ने आरोपी के घर में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। मामले की जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची पर लोगों ने आनंद का शव नहीं उठने दिया। रात करीब साढ़े आठ बजे पुलिस ने लोगों को समझा-बुझाकर शव पोस्टमार्टम को भेजा। इस बीच, पुलिस को सूचना मिली की गांव में धर्मवीर पक्ष का 45 वर्षीय मांगेराम, बेसुध पड़ा है। पुलिस मौके पर पहुंची तो मांगेराम मृत पड़ा था। पुलिस के अनुसार प्रथमदृष्टया मांगेराम की मौत पिटाई से होना लग रही है। पुलिस ने मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया है।


    पुरानी रंजिश बनीं खून-खराबे की वजह

    बताया जा रहा है कि प्रधान पक्ष धर्मवीर और आनंद पक्ष के बीच पुरानी रंजिश के चलते दो साल से तनातनी बनी हुई थी। हालांकि दोनों ही पक्ष एक दूसरे के पड़ोसी होने के साथ-साथ एक ही समाज से हैं, लेकिन किसी ने भी इस तनातनी को गंभीरता से नहीं किया। रविवार को शाम को दोनों पक्ष फिर से आमने सामने आ गए। जिसके चलते मामूली कहासुनी हिंसक खूनी संघर्ष के रूप में सामने आई। जिसमें हुई फायरिंग में आनंद की मौके पर ही मौत हो गई। और तीन अन्य युवक घायल हो गए। उधर देर रात पुलिस ने बताया कि एक युवक 45 वर्षीय मांगेराम का शव क्षेत्र से ही बरामद किया गया है।


    चंद मिनटों में ही मातम में बदला खुशियां

    गांव में संत शिरोमणि जयंती पर्व को लेकर पिछले कई दिनों से गांव में तैयारियां चल रही थी। पूरे गांव में एक उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा था। रविवार को पर्व के मौके पर सुबह से ही लोग मंदिर में पूजा-अर्चना में परिवार सहित जुटे थे। धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई। भंडारे में बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित पहुंचे। पूरे गांव में उत्साह का माहौल था। लेकिन दिन ढलते ही पूरा माहौल मातम में बदल गया।

  • उज्जैन के तराना में फिर भड़की हिंसा: घरों पर पथराव, बस में आग, 300 पुलिस जवान तैनात

    उज्जैन के तराना में फिर भड़की हिंसा: घरों पर पथराव, बस में आग, 300 पुलिस जवान तैनात



    नई दिल्ली। उज्जैन जिले के तराना कस्बे में गुरुवार शाम शुरू हुआ विवाद शुक्रवार को हिंसक रूप ले गया। सोहेल ठाकुर पर हमले के बाद उपद्रवियों ने कई घरों पर पत्थरबाजी की और एक बस में आग लगा दी, जिससे इलाके में भय का माहौल बन गया। पुलिस-प्रशासन ने स्थिति को गंभीर मानते हुए पूरे कस्बे को छावनी में तब्दील कर दिया है।

    सोहेल ठाकुर पर हमला, माहौल हुआ तनावपूर्ण
    पुलिस के अनुसार गुरुवार शाम तराना में कुछ युवकों के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान सोहेल ठाकुर नामक युवक पर प्राणघातक हमला किया गया।

    इस घटना के विरोध में शुक्रवार को तनाव बढ़ा और कुछ शरारती तत्वों ने उग्र होकर हिंसा की।

    घरों पर पथराव, बस में आग
    उपद्रवियों ने मोहल्लों में घुसकर कई घरों पर पथराव किया, जिससे कई खिड़कियों के शीशे टूट गए। इसके बाद भीड़ ने एक बस में आग लगा दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    300 से ज्यादा जवान तैनात, ड्रोन और CCTV से निगरानी
    उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने खुद मोर्चा संभाला और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस ने सोहेल की शिकायत पर 6 लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला दर्ज किया है, जिनमें से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। एक आरोपी की तलाश अभी जारी है।

    शांति बहाल करने के लिए प्रशासन ने तराना में 300 से अधिक पुलिस जवान तैनात किए हैं। साथ ही ड्रोन कैमरा और CCTV फुटेज के जरिए संदिग्धों की पहचान की जा रही है।

    सोहेल की हालत स्थिर, अस्पताल में उपचार
    हमले में घायल सोहेल ठाकुर का इलाज जारी है। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी हालत अब खतरे से बाहर है।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

  • ईरान में उबाल: बढ़ते विरोध के आगे झुकी खामेनेई सरकार, सरकारी टीवी ने मानी हिंसा

    ईरान में उबाल: बढ़ते विरोध के आगे झुकी खामेनेई सरकार, सरकारी टीवी ने मानी हिंसा

    अंतरराष्ट्रीय मध्य पूर्व के देश ईरान में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. बीते करीब 12 दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा खुलकर सड़कों पर नजर आ रहा है.

    गुरुवार रात हालात और बिगड़ गए, जब राजधानी तेहरान समेत 100 से ज्यादा शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए.

    प्रदर्शनों के दौरान कई जगह आगजनी की घटनाएं हुईं. सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की खबरें सामने आईं. इसके साथ ही, कुछ इलाकों में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की भी सूचना मिली है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए. बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती के बावजूद हालात काबू में आते नहीं दिख रहे हैं.

    अमेरिका की चेतावनी और ईरान का जवाब

    इन घटनाओं के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की गई, तो इसका कड़ा जवाब दिया जाएगा. इस बयान के बाद ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि ईरान सरकार किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क है.

    सरकारी टीवी ने तोड़ी चुप्पी

    लंबे समय तक हालात पर चुप्पी साधे रखने के बाद अब ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार हिंसा की बात स्वीकार की है. एक कार्यक्रम के दौरान यह माना गया कि प्रदर्शनों के समय हिंसक घटनाएं हुई हैं और कुछ लोगों की जान भी गई है. यह स्वीकारोक्ति बताती है कि हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब उन्हें छिपाना संभव नहीं रहा.

    हालांकि, सरकार ने जनता के गुस्से को इन घटनाओं की वजह मानने से इनकार किया है. सरकारी टीवी का दावा है कि आगजनी और हिंसा के पीछे अमेरिका और इज़रायल से जुड़े ‘आतंकी एजेंट’ हैं. ईरानी शासन का कहना है कि देश में अशांति फैलाने के लिए बाहर से साजिश रची जा रही है. यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने अंदरूनी विरोध को विदेशी हस्तक्षेप बताया हो.

    आर्थिक संकट बना बड़ा कारण

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि देश में चल रहा आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जनता के गुस्से की बड़ी वजह हैं. आम लोगों का जीवन मुश्किल होता जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है. ऐसे हालात में सरकार के लिए स्थिति संभालना आसान नहीं रह गया है.

  • माओवादी संगठन को बड़ा झटका ‘पूना मार्गेम’ अभियान से प्रभावित होकर 26 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 64 लाख था इनाम

    माओवादी संगठन को बड़ा झटका ‘पूना मार्गेम’ अभियान से प्रभावित होकर 26 नक्सलियों ने किया सरेंडर, 64 लाख था इनाम


    सुकमा । छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में चलाए जा रहे पूना मार्गेम पुनर्वास से पुनर्जीवन अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। इस अभियान के तहत 26 माओवादी जिनमें 07 महिला कैडर भी शामिल हैं ने आत्मसमर्पण किया है। इस आत्मसमर्पण को माओवादी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि ये माओवादी लंबे समय से विभिन्न नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहे थे। इन माओवादियों पर कुल ₹64 लाख का इनाम घोषित था।

    आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान और उनका योगदान

    आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी पीएलजीए बटालियन दक्षिण बस्तर माड़ डिवीजन और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर क्षेत्र में सक्रिय रहे थे। इनमें से कुछ माओवादी सुकमा माड़ क्षेत्र और ओडिशा की सीमाओं पर हुई कई बड़ी नक्सली घटनाओं में शामिल रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में विभिन्न रैंक के लोग शामिल हैं जैसे CYPCM – 01,DVCM – 01, PPCM – 03,ACM – 03 पार्टी सदस्य 18 यह माओवादी आत्मसमर्पण अभियान न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में बदलाव ला रहा है बल्कि यह माओवादी संगठन के खिलाफ सुरक्षा बलों की एक बड़ी रणनीतिक सफलता भी है।

    पूना मार्गेम अभियान का उद्देश्य

    पूना मार्गेम अभियान का मुख्य उद्देश्य भटके हुए युवाओं को हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति सम्मानजनक और समाज में स्वीकार्य जीवन की ओर लौटने का अवसर देना है। इस अभियान के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत विशेष लाभ मिलेंगे जिसमें आर्थिक सहायता सुरक्षा आवास शिक्षा और रोजगार जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

    एसपी की अपील
    सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चह्वाण ने शेष माओवादियों से अपील करते हुए कहा हिंसा का रास्ता छोड़ें शांति और विकास का मार्ग अपनाएं। सरकार आत्मसमर्पण करने वालों के पुनर्वास और सुरक्षित भविष्य के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने नक्सलियों से अपील की कि वे सरकार द्वारा प्रदान किए जा रहे इस अवसर का लाभ उठाएं और समाज में अपना स्थान बनाएं।

    नक्सलवाद के खिलाफ एक और कदम

    पूना मार्गेम अभियान को नक्सलवाद के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस अभियान ने न केवल सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है बल्कि यह नक्सलियों के भीतर यह संदेश भी भेज रहा है कि अगर वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटते हैं तो उनके लिए बेहतर भविष्य की संभावना है।

  • 16 से 24 जनवरी भोपाल में महाभारत समागम: शांति और संवाद का वैश्विक संदेश

    16 से 24 जनवरी भोपाल में महाभारत समागम: शांति और संवाद का वैश्विक संदेश


    भोपाल । भोपाल का भारत भवन 16 से 24 जनवरी तक एक ऐतिहासिक महाभारत समागम का आयोजन करने जा रहा है जो न केवल भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों से जुड़ा होगा बल्कि शांति और संवाद का संदेश भी देगा। यह आयोजन वैश्विक स्तर पर बढ़ती हिंसा और युद्ध की समस्याओं के बीच एक महत्वपूर्ण पहल है जहां विभिन्न देशों के प्रतिष्ठित रंग समूह एकत्र होंगे। इस नौ दिवसीय महोत्सव में भारत के साथ-साथ इंडोनेशिया श्रीलंका और जापान जैसे देशों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे।

    इस महाभारत समागम के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में नाटक नृत्य-नाट्य कठपुतली कार्यशालाएं लोक और शास्त्रीय प्रस्तुतियां अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और इमर्सिव डोम थिएटर जैसे विविध रूपों में महाभारत के संदेशों को प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्य उद्देश्य होगा युद्ध के विरुद्ध शांति और संवाद का प्रबल संदेश देना। वीर भारत न्यास के आयोजन में देश और विदेश से कलाकार शांति के प्रयासों को सांस्कृतिक रूप में प्रस्तुत करेंगे।

    वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी के अनुसार यह आयोजन वैश्विक संघर्षों और सभ्यताओं के टकराव के वर्तमान दौर में एक मंच प्रदान करेगा जहां शांति और संवाद के जरिए एकजुटता का संदेश दिया जाएगा। भारत भवन को इस आयोजन के लिए एक आदर्श स्थल माना गया है क्योंकि यहां से शांति का संदेश दुनिया तक पहुंचाने की विशेष क्षमता है।

    महाभारत जिसे आम तौर पर एक युद्ध कथा के रूप में जाना जाता है इस आयोजन के जरिए केवल युद्ध की कथा नहीं बल्कि मानवता विवेक और करुणा की महागाथा के रूप में प्रस्तुत की जाएगी। श्री कृष्ण के संवाद आधारित प्रयासों को आज के समय की वैश्विक परिस्थितियों में प्रासंगिक माना गया है। यह आयोजन दर्शकों को यह समझाएगा कि युद्ध कभी समाधान नहीं हो सकता और संवाद और समझौते से ही समस्याओं का समाधान संभव है।

    आयोजन में महाभारत के महत्वपूर्ण पहलुओं को जीवन्त रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। नेपथ्य कला अस्त्र-शस्त्र चक्रव्यूह और पताकाओं की प्रदर्शनी महाभारत के दृश्य संसार को दर्शकों तक पहुंचाएगी। इसके अलावा महाभारत पर आधारित चित्र प्रदर्शनी और भारतीय कठपुतली कला भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा होंगी जो भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करेंगी।

    इस समागम में सभ्यताओं की सांस और भूली बिसरी सभ्यताएं जैसी पुस्तकों का लोकार्पण भी किया जाएगा जो सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगे। यह आयोजन न केवल भारतीय दर्शकों के लिए बल्कि अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए भी एक बेहतरीन अवसर होगा ताकि वे भारतीय महाकाव्य महाभारत के गहरे संदेशों को समझ सकें और शांति की दिशा में योगदान दे सकें।

  • रायगढ़ में महिला कॉन्स्टेबल के साथ हैवानियत वर्दी फाड़कर अर्धनग्न कर खेत में पीटा

    रायगढ़ में महिला कॉन्स्टेबल के साथ हैवानियत वर्दी फाड़कर अर्धनग्न कर खेत में पीटा

    रायगढ़ । छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है जिसमें प्रदर्शनकारियों ने एक महिला पुलिस कांस्टेबल के साथ बर्बरता की। यह घटना 27 दिसंबर को तमनार तहसील के गारे पेलमा-1 कोयला खदान के लिए आयोजित जनसुनवाई के विरोध में धरना प्रदर्शन के दौरान हुई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के दौरान महिला कांस्टेबल को भीड़ ने घेर लिया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया।

    विरोध प्रदर्शन के बीच अचानक स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने महिला कांस्टेबल की वर्दी फाड़ दी और उन्हें अर्धनग्न कर खेत में मारपीट की। यह घटना पूरी तरह से पुलिस की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली साबित हुई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे रायगढ़ जिले में हड़कंप मच गया।

    पुलिस ने इस शर्मनाक कृत्य को लेकर कार्रवाई की और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना ने न सिर्फ पुलिस बल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं बल्कि यह भी दर्शाया है कि कुछ लोगों के बीच कानून का उल्लंघन किस हद तक हो सकता है।इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने यह आश्वासन दिया कि ऐसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
    आंदोलन के कारण यह घटना रायगढ़ जिले में गहरे विरोध और घृणा का कारण बनी है। पुलिस अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे कानून और व्यवस्था का सम्मान करें और किसी भी प्रकार की हिंसा से बचें। छत्तीसगढ़ पुलिस और राज्य सरकार अब इस तरह के घटनाक्रमों को रोकने के लिए नए कदम उठाने की योजना बना रहे हैं।

  • बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    बांग्लादेश में जहां भीड़ ने ली थी जान, वहीं फिर खूनखराबा: मैमनसिंह में हिंदू युवक की हत्या

    नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की कड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। मैमनसिंह जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक हिंदू युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह वही इलाका है, जहां कुछ दिन पहले ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास को भीड़ ने बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला था।
    लगातार हो रही हत्याओं से पूरे क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है।

    ताजा मामले में बांग्लादेश के ग्रामीण अर्धसैनिक बल अंसार के सदस्य बजेंद्र बिस्वास की जान चली गई। सोमवार, 29 दिसंबर की शाम करीब 6:45 बजे भालुका उपजिला क्षेत्र स्थित लबीब ग्रुप की गारमेंट फैक्ट्री सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड में यह घटना हुई। बजेंद्र बिस्वास वहां सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात थे और फैक्ट्री परिसर में बने अंसार बैरक में अपने साथियों के साथ रहते थे।

    पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बातचीत के दौरान बजेंद्र के साथी नोमान मियां ने कथित तौर पर मजाक में सरकारी शॉटगन उनकी ओर तान दी। कुछ ही पलों बाद अचानक गोली चल गई, जो बजेंद्र की बाईं जांघ में जा लगी। गंभीर रूप से घायल बजेंद्र को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    घटना के बाद पुलिस ने आरोपी नोमान मियां को हिरासत में ले लिया और वारदात में इस्तेमाल की गई शॉटगन जब्त कर ली है। संबंधित थाने के प्रभारी मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है।

    गौर करने वाली बात यह है कि बीते दो हफ्तों में यह इसी इलाके में हिंदू समुदाय से जुड़ी तीसरी हत्या है। 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या और अब बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर मौत ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं से भालुका और आसपास के क्षेत्रों में तनाव गहराता जा रहा है, जबकि स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दावे कर रहा है।

  • उज्जैन में नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में आटो चालक गिरफ्तार, हिंसा और तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने संभाली स्थिति

    उज्जैन में नाबालिग से छेड़छाड़ मामले में आटो चालक गिरफ्तार, हिंसा और तोड़फोड़ के बाद पुलिस ने संभाली स्थिति


    उज्जैन । उज्जैन के महिदपुर रोड पर बुधवार को एक बड़ी घटना ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया। यहां के एक आटो चालक द्वारा एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ करने की घटना सामने आई। इस घटना के बाद गुस्साए स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए और आटो चालक के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लियालेकिन इसके बाद हुई हिंसा और तोड़फोड़ ने क्षेत्र में भारी तनाव पैदा कर दिया।

    आरोपित आटो चालक जुबेर मंसूरी को हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। संगठन ने आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद हिंसक भीड़ ने दुकानों में तोड़फोड़ की और कुछ दुकानों में आग लगा दी। इसके साथ ही संगठन ने मुस्लिम वाहन चालकों को स्कूलों से हटाने की भी मांग कीजिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई।

    घटना का विवरण

    पुलिस के अनुसारजुबेर मंसूरी नामक आटो चालक नियमित रूप से नाबालिगों को कोचिंग सेंटर ले जाता था। बुधवार को उसने एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ की। इस घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। हिंदूवादी संगठन के लोग आरोपित को पकड़कर पुलिस के हवाले करने से पहले उसे जमकर पीट भी चुके थे। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और उसके मोबाइल की जांच की। मोबाइल में 20 से अधिक महिलाओं के अश्लील वीडियो मिलेजिनमें से 12 महिलाएं महिदपुर क्षेत्र की थीं और बाकी आठ आसपास के क्षेत्रों से थीं।

    हिंसा और प्रदर्शन
    घटना के बाद गुस्साए लोग सड़क पर उतर आए और महिदपुर रोड को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपित का जुलूस निकालने और उसके मकान को तोड़ने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने मुस्लिम वाहन चालकों को स्कूलों से हटाने की भी मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की गई और आग लगा दी गईजिससे इलाके में भारी नुकसान हुआ। पुलिस ने तत्काल स्थिति को काबू में करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया। पुलिस के कड़े प्रयासों के बाद ही आरोपित का जुलूस निकाला गया और भारी भीड़ के बीच पुलिस ने उसे बचा लिया।

    पुलिस का बयान और जांच

    उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि पुलिस ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। उन्होंने कहा“हमारी प्राथमिकता शांति बनाए रखना है। हमने आरोपित को एक दिन की रिमांड पर लिया है और उसके मोबाइल से बरामद वीडियो की जांच की जा रही है।” पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपित के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है और जल्द ही मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहालइलाके में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस सतर्कता बरत रही है।

    यह घटना न केवल नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ के कारण चिंता का विषय हैबल्कि इसके बाद का हिंसा और तोड़फोड़ का सिलसिला भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। पुलिस को इलाके में शांति बनाए रखने के लिए कड़ी सुरक्षा तैनात करनी पड़ीऔर मामले की गहराई से जांच की जा रही है। यह घटना यह दर्शाती है कि समाज में सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति पर विचार करने की आवश्यकता हैखासकर नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर।

  • बालाघाट से माओवादी आतंक का सफाया आखिरी बचे दीपक और रोहित ने किया आत्मसमर्पण

    बालाघाट से माओवादी आतंक का सफाया आखिरी बचे दीपक और रोहित ने किया आत्मसमर्पण


    बालाघाट । 90 के दशक से माओवादी आतंक का शिकार रहे बालाघाट जिले से अब माओवादी गतिविधियों का पूर्ण रूप से सफाया हो गया है। गुरुवार कोमाओवादी संगठन के आखिरी सक्रिय सदस्य दीपक और रोहित ने अपने साथियों की तरह हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया। हालांकिपुलिस की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई हैलेकिन विश्वस्त सूत्रों के अनुसारदोनों माओवादी ने कोरका स्थित सीआरपीएफ कैंप में आत्मसमर्पण किया है। पुलिस अब समर्पण से जुड़ी आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है और जल्द ही इस बारे में आधिकारिक जानकारी देने के लिए एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर सकती है।

    माओवादी समस्या और बालाघाट का इतिहास

    बालाघाट जिला मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है और यहां 90 के दशक से माओवादियों की उपस्थिति काफी सक्रिय रही थी। इस क्षेत्र में माओवादी संगठन द्वारा हिंसक गतिविधियों को अंजाम दिया गयाजिससे इलाके में लाल आतंक का माहौल बन गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में माओवादियों द्वारा भय फैलाया गयाऔर स्थानीय प्रशासन और पुलिस की ताकत को चुनौती दी गई। इसके कारण न केवल प्रशासन को कठिनाइयों का सामना करना पड़ाबल्कि नागरिकों की जिंदगी भी प्रभावित हुई थी।

    माओवादी संगठन द्वारा इलाके में कई बार हमले किए गएजिसमें पुलिसकर्मियों और नागरिकों की जानें गईं। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय प्रशासन को माओवादी गतिविधियों को समाप्त करने के लिए गंभीर कदम उठाने पर मजबूर किया। समय-समय पर सुरक्षा बलों और माओवादी समूहों के बीच मुठभेड़ें होती रहींलेकिन अंततः यह प्रक्रिया धीरे-धीरे कमजोर पड़ती गई।

    समर्पण और माओवादी संगठन का कमजोर होना

    दीपक और रोहित का आत्मसमर्पण इस बात का प्रतीक है कि माओवादी संगठन अब बालाघाट में पूरी तरह से खत्म हो चुका है। कुछ समय पहले छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ इलाके में भी माओवादियों के एक बड़े समूह ने आत्मसमर्पण किया थाजिनमें एक करोड़ के इनामी माओवादी रामधेर भी शामिल था। इसके बाददीपक और रोहित के समर्पण की खबरें इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैली थींऔर यह माना जा रहा था कि बालाघाट से माओवादी गतिविधियों का अंत निकट है।

    दीपक और रोहित के समर्पण से यह साफ हो गया है कि माओवादी संगठन के अधिकांश सदस्य अब मुख्यधारा में लौट आए हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिकइन दोनों के समर्पण से माओवादी संगठन के स्थानीय नेटवर्क पर काफी असर पड़ा है। बालाघाट और आसपास के क्षेत्रों में अब माओवादी गतिविधियों का कोई विशेष खतरा नहीं रहा।

    पुलिस की रणनीति और समर्पण कार्यक्रम

    पुलिस ने माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने का अवसर देने के लिए समर्पण योजना की शुरुआत की थीजिसके तहत माओवादी संगठनों के सदस्य आत्मसमर्पण करने पर न केवल सुरक्षा प्रदान की जाती हैबल्कि उन्हें समाज में पुनः एकीकृत करने के प्रयास भी किए जाते हैं। इस योजना के तहत कई माओवादी अब आत्मसमर्पण कर चुके हैंऔर सरकार उन्हें पुनर्वासरोजगार और शिक्षा की सुविधाएं मुहैया करा रही है।

    दीपक और रोहित का आत्मसमर्पण इस योजना का ही एक हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि यह समर्पण केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि माओवादी संगठन के लिए भी एक बड़ा संदेश है। यह दिखाता है कि समय के साथ माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और सामाजिक विकास की ओर बढ़ने का समय आ गया है।

    आगे का रास्ता

    दीपक और रोहित के समर्पण के बादपुलिस प्रशासन ने सुरक्षा बलों को उच्चतम स्तर पर अलर्ट कर दिया है ताकि किसी भी प्रकार के विरोधी गतिविधियों को रोका जा सके। साथ हीपुलिस इस समर्पण को लेकर अब जल्द ही एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर रही हैजिसमें इस घटना की पूरी जानकारी दी जाएगी और आगे के कदमों पर भी चर्चा की जाएगी।

    यह कदम बालाघाट जिले के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ हैजहां माओवादी गतिविधियों का अंत हुआ है। इस समर्पण के बादप्रशासन और सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि इस इलाके में शांति और विकास की राह खुली है। साथ हीयह अन्य माओवादी क्षेत्रों के लिए भी एक संदेश है कि अगर वे हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटते हैंतो उन्हें पुनर्वास और समर्थन मिलेगा।

  • ओडिशा: मलकानगिरी में महिला की सिर कटी लाश से भड़की हिंसा, दो समुदायों में झड़प, सोशल मीडिया बैन

    ओडिशा: मलकानगिरी में महिला की सिर कटी लाश से भड़की हिंसा, दो समुदायों में झड़प, सोशल मीडिया बैन


    नई दिल्‍ली । ओडिशा सरकार ने मलकानगिरी जिले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और इंटरनेट सेवाओं पर लगी रोक एक बार फिर 18 घंटे के लिए बढ़ा दी है। अब यह प्रतिबंध 10 दिसंबर को दोपहर 12 बजे तक लागू रहेगा। जिले में एक महिला की सिर कटी लाश मिलने के बाद दो समुदायों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद यह कदम उठाया गया है। हिंसा में 163 मकान क्षतिग्रस्त हो गए तथा बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ।

    अफवाहें और भड़काऊ मैसेज रोकने के लिए राज्य सरकार ने पहले 8 दिसंबर शाम 6 बजे से 9 दिसंबर शाम 6 बजे तक 24 घंटे का पूर्ण इंटरनेट शटडाउन लागू किया था। अब इसे आगे बढ़ाया गया है। गृह विभाग की अधिसूचना में कहा गया है कि कुछ असामाजिक तत्व व्हाट्सएप, फेसबुक और X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर झूठे, भड़काऊ और उत्तेजक मैसेज प्रसारित कर रहे थे, जिससे सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।

    मलकांगिरी कलेक्टर ने सोमवार शाम संवाददाताओं को बताया- दोनों समुदायों के बीच बातचीत के बाद स्थिति अब शांतिपूर्ण है। दोनों पक्षों ने अपने-अपने प्रतिनिधि नामित कर दिए हैं। शांति समिति की बैठक होगी। हमें उम्मीद है कि जल्द ही पूर्ण सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी। प्रारंभिक आकलन के अनुसार हिंसा में 163 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने मृतका के परिजनों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि मंजूर की है। मृतका के बेटे को तत्काल राहत के रूप में पहले ही 30 हजार रुपये दे दिए गए हैं। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया।

    अभी तक नहीं मिला कटा सिर
    महिला का कटा सिर अभी तक नहीं मिला है। वैज्ञानिक टीम, स्निफर डॉग दस्ता और ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की टीम मौके पर पहुंच चुकी है और सिर की तलाश एवं सबूत जुटाने का काम जारी है। हिंसा प्रभावित इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और शांति समिति की बैठक के बाद सामान्य जनजीवन जल्द बहाल करने की कोशिश की जाएगी।

    किसकी है लाश और कैसे शुरू हुआ बवाल?
    चार दिसंबर को राखेलगुडा गांव के पास नदी के किनारे से 51 वर्षीय विधवा लेक पदियामी का धड़ बरामद होने के बाद क्षेत्र में तनाव व्याप्त हो गया था। यह झड़प रविवार दोपहर को हुई जब राखेलगुडा गांव के आदिवासियों ने कोरकुंडा सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बंगाली आबादी के इलाके एमवी-26 गांव पर कथित तौर पर हमला किया।

    पुलिस ने बताया कि भीड़ ने कम से कम एक दर्जन घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, कुछ वाहनों को नष्ट कर दिया तथा कम से कम चार घरों को आग लगा दी। अधिकारियों ने बताया कि दो गांवों में निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, जबकि समूचे मलकानगिरी में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं।

    मलकानगिरी बंगाली समाज के अध्यक्ष गौरांग कर्मकार के नेतृत्व में हजारों लोगों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और एमवी-26 गांव पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। संगठन ने प्रशासन को दी गई याचिका में कहा कि हमले के दौरान एमवी-26 गांव के अधिकांश निवासी भाग गए हैं।

    बड़ी संख्या में घुसपैठिये जिले में घुस आए
    एक अलग याचिका में जिला आदिवासी समाज महासंघ ने आरोप लगाया कि 1978 से 1980 के बीच बड़ी संख्या में घुसपैठिये जिले में घुस आए थे। उन्होंने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया और स्थानीय आदिवासियों का शोषण किया। इसमें मांग की गई कि पुलिस हत्या के आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करे और महिला का गायब सिर बरामद करे।

    जिला आदिवासी समाज महासंघ, मलकानगिरी के बैनर तले आदिवासियों ने एक याचिका में अवैध घुसपैठियों और महिला की हत्या करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत सरकार ने 1964 में मलकानगिरी जिले के 215 गांवों और नवरंगपुर जिले के उमरकोट और रायगढ़ के 65 गांवों में प्रवासी बंगाली परिवारों को बसाया था। ये बंगाली पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए थे।