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  • MP में 15-16 अक्टूबर को करवट बदलेगा मौसम, 9 जिलों में बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में रातें रहेंगी ठंडी

    MP में 15-16 अक्टूबर को करवट बदलेगा मौसम, 9 जिलों में बारिश की संभावना, भोपाल-इंदौर में रातें रहेंगी ठंडी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 15 और 16 अक्टूबर को एक बार फिर मौसम बदलने की संभावना है। ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग के नौ जिलों में आंधी, गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। इससे पहले 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहने का अनुमान है। भोपाल-इंदौर सहित कई शहरों में रात के समय ठंडक रहेगी, जबकि दिन में धूप के कारण गर्मी महसूस होगी।

    मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार, आगामी दिनों में प्रदेश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय हो रहे नए मौसम तंत्र का असर दिखाई दे सकता है। ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में बारिश की संभावना जताई गई है। उज्जैन और जबलपुर समेत अन्य शहरों में भी रात में ठंडक और दिन में गर्मी का मिला-जुला मौसम बना रह सकता है।

    पश्चिमी विक्षोभ और नए सिस्टम से बदलेगा मौसम

    मौसम विभाग के मुताबिक, सोमवार को पहले सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण का असर समाप्त हो गया। अब उत्तर भारत में एक पश्चिमी विक्षोभ और नए चक्रवाती सिस्टम के सक्रिय होने से मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम बदल सकता है। इसी के चलते 15 और 16 अक्टूबर को बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनने का अनुमान है।

    मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर

    मध्य प्रदेश से मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन अलग-अलग मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से बारिश का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है। पिछले एक सप्ताह के दौरान पूर्वी हिस्से के कई जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। हालांकि, रविवार और सोमवार को प्रदेश में कहीं भी आंधी-बारिश रिकॉर्ड नहीं हुई।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की मौसमी स्थितियां देखने को मिली हैं। इस साल भी इसी तरह का रुख बना हुआ है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के साथ धूप तेज रही, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस हो रही है। इस बार प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।

    सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा पानी

    जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच का 95.9 प्रतिशत है। इस तरह प्रदेश में औसत के मुकाबले लगभग 1.5 इंच कम पानी गिरा।

    प्रदेश में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम रही। क्षेत्रवार आंकड़ों में पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी बरसा।

    पूर्वी क्षेत्र के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम वर्षा हुई।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य बारिश का लक्ष्य पूरा हो गया। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    इसके विपरीत 30 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से कम रहा। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

    इस तरह अक्टूबर में प्रदेश का मौसम धूप, रात की ठंडक और बीच-बीच में बारिश के बीच बदलता रहने का अनुमान है। अगले दिनों में मौसम प्रणालियों की सक्रियता के आधार पर बारिश की स्थिति में बदलाव हो सकता है।

  • उत्तर भारत में ओलावृष्टि और बर्फबारी से बदला मौसम… पूरब और दक्षिण में बारिश का दौर जारी

    उत्तर भारत में ओलावृष्टि और बर्फबारी से बदला मौसम… पूरब और दक्षिण में बारिश का दौर जारी


    नई दिल्ली।
    उत्तर भारत (North India) के पहाड़ी व मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorms) और बर्फबारी (Snowfall) से मौसम (Weather Change) में अचानक बदलाव आया है, वहीं पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में जोरदार बारिश (Rain) का सिलसिला जारी है। पिछले 24 घंटों के दौरान बिहार में भारी दर्ज की गई है और कई क्षेत्रों में 12 से 20 सेमीटर तक पानी बरसने से फसलों को नुकसान हुआ है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमोत्तर उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चली हैं।

    मौसम विभाग के मुताबि, मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और वायुमंडलीय हलचल के प्रभाव से आया है। हिमाचल प्रदेश के मनाली सहित ऊझी घाटी में शनिवार दोपहर बाद बारिश हुई। रोहतांग सहित कुंजम दर्रा, बारालाचा व शिंकुला सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई है। यहां शुक्रवार रात को भी फाहे गिरे थे। बारिश और बर्फबारी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और जनजातीय क्षेत्र कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान गिरकर 1.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। राज्य में 16 अक्तूबर तक मौसम खराब रहने का अनुमान है। इस दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी व मध्य पर्वतीय इलाकों में बारिश हो सकती है। 13 और 14 अक्तूबर को कुछ स्थानों पर अंधड़ का यलो अलर्ट जारी किया गया है।

    आदि कैलाश में फिर हुई बर्फबारी
    उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में शनिवार को भी ताजा हिमपात हुआ। बर्फबारी होने से कैलाश पर्वत के दर्शन नहीं हुए। इससे यात्रियों को निराश लौटना पड़ा। दोपहर बाद मौसम खुलने से 100 से अधिक यात्रियों ने आदि कैलाश के दर्शन किए। आदि कैलाश क्षेत्र में अब भी तीन से चार फीट बर्फ जमा है। लगातार हो रही बर्फबारी से आदि कैलाश में तापमान माइनस दो से माइनस तीन डिग्री पहुंच गया है। इससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है।


    मलबा आने से तीन घंटे रुकी केदारनाथ यात्रा

    रुद्रप्रयाग में केदारनाथ पैदल मार्ग पर चीरबासा में मलबा और पत्थर आने से शनिवार सुबह छह बजे से नौ बजे तक यात्रियों की आवाजाही रोकनी पड़ी। सुरक्षा के मद्देनजर गौरीकुंड और सोनप्रयाग में यात्रियों को रोका गया। सुबह नौ बजे मार्ग खुलने के बाद आवाजाही सुचारु करा दी गई। बीते दिन हुई तेज बारिश के बाद रात में चीरबासा में मलबा आने से पैदल मार्ग अवरुद्ध हो गया था।


    अभी बदला रहेगा मौसम का मिजाज :

    उत्तर भारत के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित मैदानी राज्यों में 16 अक्तबर तक रुक-रुक कर बारिश, आंधी और बिजली गिरने का अनुमान है। वहीं, 11 अक्तूबर तथा 14-15 अक्तूबर को यहां कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजधानी दिल्ली में 16 अक्तूबर के बीच छिटपुट बारिश होगी।

  • मौसम की मार…. 40 फीसदी तक घटी सेब की पैदावार….. आसमान पर कीमतें

    मौसम की मार…. 40 फीसदी तक घटी सेब की पैदावार….. आसमान पर कीमतें


    श्रीनगर।
    सेब (Apples) इस बार महंगा बिकेगा। देश के दो शीर्ष उत्पादक राज्यों जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में सेब की पैदावार तेजी से घटी है। हिमाचल में पिछले साल के 4.07 लाख टन के मुकाबले इस साल सिर्फ 3.87 लाख टन सेब बाजार में पहुंचा है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में हालत और खराब है, जहां उत्पादन 40 फीसदी तक घटा है।

    दोनों राज्यों में सेब उत्पादन पर प्रतिकूल मौसम की मार पड़ी है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से सर्वाधिक प्रभावित कुछ क्षेत्रों में उत्पादन 50 फीसदी तक कम हुआ है। सामान्य वर्षों में 20 से 22 लाख टन उत्पादन होता था, मगर इस बार इसके 14 से 15 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्पादन घटने से मंडियों में आपूर्ति घटी है और बेहतर गुणवत्ता वाले सेब के भाव चढ़ गए हैं। दोनों ही राज्यों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से ठंड के घंटे कम हुए। हिमाचल में इस बार ड्रॉपिंग भी अधिक रही और सेब सीजन 15 दिन देरी से शुरू हुआ। पिछले साल प्रदेश में सात लाख टन सेब उत्पादन हुआ था। इस साल उत्पादन इससे बहुत कम रह सकता है। 


    शोपियां व ऊपरी इलाकों में फसल को 55% तक नुकसान

    जम्मू-कश्मीर उद्यान विभाग के अनुसार दक्षिण कश्मीर के शोपियां के ऊपरी इलाके हीरपोरा, केलर, जैनपोरा और कुलगाम के डीएच पोरा व फ्रिसल में मई-जून की बेमौसम ओलावृष्टि और तेज हवा से फसल को 45 से 55 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ।

    बडगाम के खानसाहिब, चरार-ए-शरीफ और पुलवामा के त्राल व राजपोरा के पारंपरिक बागानों में परागण के समय लगातार बारिश और कम धूप के कारण फल तेजी से गिरे। इससे पैदावार आधी रह गई।


    जलवायु परिवर्तन का असर

    सेब उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। बदलते मौसम में आधुनिक तकनीक व नए रूट स्टॉक अपनाना जरूरी है। जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती है, जो उत्पादन घटने का बड़ा कारण है।
    -जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री, हिमाचल प्रदेश

    आपूर्ति में भारी कमी
    सोपोर फ्रूट मंडी के फल व्यापारी हाजी मुश्ताक अहमद ने कहा, मंडियों में रोजाना आने वाली गाड़ियों की संख्या कम है। खासकर शोपियां और कुलगाम की ओर से ए ग्रेड माल की भारी कमी है।

  • MP में अक्टूबर की शुरुआत में बदला मौसम, दिन में गर्मी, रात में बढ़ी ठंडक

    MP में अक्टूबर की शुरुआत में बदला मौसम, दिन में गर्मी, रात में बढ़ी ठंडक


    भोपाल। मानसून की विदाई की शुरुआत के साथ मध्यप्रदेश में मौसम का मिजाज बदल गया है। बारिश थमने के बाद दिन में गर्मी का असर बढ़ रहा है, जबकि रातें ठंडी होने लगी हैं। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री से नीचे पहुंच गया है, वहीं बड़वानी और धार में दिन का तापमान 35 डिग्री के पार दर्ज हो रहा है।

    दक्षिण-पश्चिम मानसून का पीरियड 30 सितंबर को खत्म हो चुका है। इसके बाद प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश नहीं हुई है। अब मौसम में दिन-रात के तापमान का अंतर बढ़ने लगा है। मौसम विभाग के अनुसार, अक्टूबर के पहले पखवाड़े में इसी तरह का मौसम बना रहने की संभावना है।

    अमरकंटक सबसे ठंडा, कई शहरों में रात का पारा 20° से नीचे

    बीती रात प्रदेश में अमरकंटक सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 17.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। शाजापुर में 17.3, धार में 17.5, इंदौर और पचमढ़ी में 17.6 तथा भोपाल और उज्जैन में न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस रहा।

    दूसरी ओर, दिन में गर्मी का असर बना हुआ है। पचमढ़ी और अमरकंटक में अधिकतम तापमान 29 डिग्री से नीचे चल रहा है, जबकि बड़वानी, धार, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम में दिन का तापमान 35 डिग्री के पार पहुंच गया है। यानी प्रदेश में एक ही समय पर कहीं रातें ठंडी हो रही हैं तो कहीं दिन में गर्मी का असर तेज है।

    अक्टूबर के पहले पखवाड़े में ऐसा ही रहेगा मौसम

    मौसम विभाग के अनुसार, 30 सितंबर के बाद करीब 15 दिन मौसम के बदलाव वाले होते हैं। अक्टूबर के पहले पखवाड़े में रात के तापमान में गिरावट शुरू हो जाती है, लेकिन दिन में धूप और गर्मी का असर बना रहता है। इस बार भी प्रदेश में इसी तरह का मौसम देखने को मिल रहा है।

    अगले तीन दिन यानी 3, 4 और 5 अक्टूबर को प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं है। इस दौरान ज्यादातर इलाकों में तेज धूप खिली रहेगी। इसके बाद 6 अक्टूबर को पूर्वी और उत्तरी हिस्से के कुछ जिलों में हल्की बारिश हो सकती है।

    उज्जैन और ग्वालियर-चंबल से मानसून की वापसी संभव

    IMD मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, मानसून की वापसी रेखा फिलहाल पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से गुजर रही है। मध्यप्रदेश में यह रेखा ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग के ऊपर बनी हुई है। ऐसे में प्रदेश से मानसून की वापसी इन्हीं इलाकों से शुरू होने की संभावना है।

    इसके बाद मानसून इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से विदा हो सकता है। अगले 2-3 दिन में वापसी की शुरुआत होने और 10 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश से मानसून के लौटने की संभावना है।

    6 अक्टूबर को इन जिलों में हल्की बारिश के आसार

    मौसम विशेषज्ञ नायक के मुताबिक, अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ इलाकों में हल्की बारिश भी हो सकती है।

    6 अक्टूबर को टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर में हल्की बारिश का अनुमान है। इससे पहले 3, 4 और 5 अक्टूबर को कहीं भी बारिश होने का अनुमान नहीं है।

    प्रदेश में अब तक सामान्य से 4% कम बारिश

    इस मानसूनी सीजन में मध्यप्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम है। ओवरऑल प्रदेश में सामान्य से 4% कम पानी गिरा है।

    क्षेत्रवार देखें तो पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से 4% अधिक बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा 4% ज्यादा है।

    हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी हिस्से में स्थिति और कमजोर रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% तक कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

  • देश में फिर बदला मौसम का मिजाज…. आज इन राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट

    देश में फिर बदला मौसम का मिजाज…. आज इन राज्यों में आंधी-बारिश का अलर्ट


    नई दिल्ली।
    पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) उत्तर भारत (North India) में सक्रिय होने के कारण जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) से उत्तराखंड तक पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदान में भारी बारिश जारी है। इससे पारा 10 डिग्री तक गिरा है। केदारनाथ मार्ग (Kedarnath Route) में लगातार दूसरे दिन भूस्खलन के बाद यात्रा रोक दी गई है। चट्टान की चपेट में आने से एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि रास्ते पर मलबा आने से 1,500 से अधिक श्रद्धालु फंस गए, जिन्हें मुश्किल से सुरक्षित निकाल कर गौरीकुंड पहुंचाया गया। मौसम विभाग ने मौजूदा हालात पर सोमवार आधी रात के बाद करीब ढाई बजे अपडेट दिया। इसके मुताबिक उत्तरी अंडमान सागर और उससे सटे म्यांमार तट पर बना गहरा निम्न दबाव पिछले 6 घंटों में 13 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा है।


    अगले दो दिनों में कैसा रहेगा मिजाज

    मौसम विभाग ने बताया कि 28 सितंबर को भारतीय समयानुसार रात करीब 1930 बजे से 2130 बजे के बीच गहरा निम्न दबाव का क्षेत्र क्यैकटो के पूर्व में म्यांमार तट को पार कर गया। इस दौरान हवा की गति 50-60 किमी प्रति घंटे रही। इसके बाद, यह उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ गया। अगले दो दिनों के दौरान निम्न दबाव का क्षेत्र तटीय म्यांमार और उससे सटे पूर्वी मध्य और उत्तरपूर्वी बंगाल की खाड़ी और दक्षिणपूर्वी बांग्लादेश में उत्तर-उत्तरपश्चिम की ओर बढ़ते रहने की संभावना है।


    निम्न दबाव का क्षेत्र अब कमजोर, मौसम विभाग चक्रवाती हवा पर क्या बोला?

    मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के ऊपर बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब कमजोर हो गया है, लेकिन चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अभी भी बना हुआ है। वहीं, एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके चलते ही सोमवार को उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, राजस्थान, बिहार और अंडमान-निकोबार में गरज के साथ बौछारें पड़ीं। वहीं, मराठवाड़ा, ओडिशा, पूर्वी असम, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश हुई।


    आज नौ राज्यों में आंधी-बारिश के आसार

    उत्तर-पश्चिम समेत पूर्वी भारत के नौ से अधिक राज्यों में मंगलवार को आंधी-तूफान के साथ बारिश होने की संभावना है और बुधवार से राहत की उम्मीद है, लेकिन उमस बढ़ सकती है।


    जम्मू-कश्मीर-लद्दाख

    29 सितंबर और 2-4 अक्तूबर को बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है।


    उत्तराखंड

    29 सितंबर से 4 अक्तूबर के दौरान कहीं-कहीं बारिश और आंधी-तूफान के साथ बिजली गिर सकती है।


    हिमाचल प्रदेश

    29 सितंबर को प्रदेश के कुछ इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने के आसार


    पंजाब-हरियाणा-चंडीगढ़

    29 सितंबर को कुछ जगहों पर आंधी-तूफान के साथ बारिश और बिजली गिरने की संभावना


    दिल्ली-पूर्वी राजस्थान-पश्चिमी यूपी

    छिटपुट स्थानों पर तेज हवाओं के साथ बारिश और वज्रपात संभव को कहीं-कहीं बारिश के साथ


    पूर्वी उत्तर प्रदेश

    29-30 सितंबर को कहीं-कहीं बारिश के साथ तेज हवा और बिजली गिर सकती है।


    पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण सड़कें बंद

    हिमाचल प्रदेश में सोमवार को लगातार तीसरे दिन किन्नौर, लाहौल स्पीति और चंबा के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई, जबकि राजधानी शिमला, धर्मशाला समेत अन्य जिलों में बादल बरसे। प्रदेश के अधिकतम तापमान में आठ से दस डिग्री की गिरावट आने से मौसम में ठंडक बढ़ गई है। प्रदेश में 61 सड़कों पर वाहनों की आवाजाही ठप रही। 49 बिजली ट्रांसफार्मर भी बंद रहे।


    फसलों को संभावित नुकसान से ग्रामीण चिंतित

    उत्तराखंड की व्यास घाटी में आदि कैलाश, नाभीढांग, कुटी में दो से पांच फीट बर्फ की सफेद चादर बिछ गई है इससे कुटी से आदि कैलाश को जोड़ने वाला यात्रा मार्ग बंद हो गया है। व्यास घाटी आदि कैलाश में पांच फीट तक बर्फ होने से जहां पर्यटक खुश हो गए। वहीं, फसलों को संभावित नुकसान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी।


    बिहार में कई नदियां उफान पर

    नेपाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी बारिश से बिहार में गंडक, कोसी, बागमती नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी भर गया है। सुपौल और पश्चिम चंपारण जिले में करीब 82,000 लोग प्रभावित हुए हैं।


    उत्तर भारत में बढ़ेगी उत्तर-पश्चिमी हवा

    आईएमडी के अनुसार, जम्मू के आसपास बना पश्चिमी विक्षोभ अगले 36 घंटों में पहाड़ों से आगे निकल जाएगा। इसके बाद मंगलवार से निचले स्तरों पर तेज उत्तर-पश्चिमी हवाएं चलने लगेंगी, जिससे मौसम साफ होगा।


    नेपाल में देखते-देखते ढही इमारत

    नेपाल में लगातार जारी बारिश के बीच बांगलुंग में नगर पालिका भवन ढहने का वीडियो सामने आया है। नदी के कटाव के कारण इमारत का एक हिस्सा धराशायी हो गया और देखते ही देखते इमारत नदी में समा गई। उधर, पानी बढ़ने से नारायणी नदी में बंधे एक क्रूज शिप की रस्सी टूट गई। शिप करीब 100 मीटर तक नदी के बहाव के साथ बहता चला गया और पुल के पिलर से टकरा गया। नेपाल के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति एक बार फिर विकराल हो गई है।


    दिल्ली-एनसीआर

    मनांग में 7,126 मीटर ऊंची हिमलुंग हिमाल चोटी के बेस कैंप पर रविवार को हुए हिमस्खलन में मृतकों की संख्या चार हो गई है। सोमवार को दो और शव मिले। 8 लोग अब भी लापता हैं। लापता 22 लोगों में से 10 से संपर्क स्थापित कर लिया गया है। लगातार बर्फबारी, बारिश और खराब मौसम के चलते खोज एवं बचाव कार्य में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

  • एमपी में फिर बदला मौसम, 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, निवाड़ी-टीकमगढ़ समेत 4 में ऑरेंज अलर्ट

    एमपी में फिर बदला मौसम, 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, निवाड़ी-टीकमगढ़ समेत 4 में ऑरेंज अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर अभी थमा नहीं है। मौसम विभाग ने शनिवार को जबलपुर और रीवा समेत 18 जिलों में अति भारी या भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सतना में ऑरेंज अलर्ट है। तेज बारिश की आशंका को देखते हुए सतना में नर्सरी से कक्षा 8वीं और मैहर में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के स्कूल शनिवार को बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।

    18 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, अगले 24 घंटे में भिंड, दतिया, पन्ना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, दमोह, कटनी, मैहर, उमरिया, शहडोल, जबलपुर, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सतना में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अगले 48 घंटे बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    सतना-मैहर में स्कूलों की छुट्टी

    मूसलधार बारिश की चेतावनी को देखते हुए सतना जिले में शनिवार को नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। इसी तरह मैहर जिले में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूल बंद रहेंगे।

    इन जिलों में बूंदाबांदी के आसार

    प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा और मंदसौर में बूंदाबांदी का अनुमान है।

    इसके अलावा शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, पांढुर्णा, अनूपपुर, सागर और पन्ना में भी बूंदाबांदी हो सकती है।

    अगले 48 घंटे अहम, निचले इलाकों में सावधानी

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार सितंबर के आखिरी सप्ताह में मध्य प्रदेश का मौसम फिर सक्रिय है। गहरे अवदाब की तीव्रता लगातार कम हो रही है, लेकिन इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और इससे जुड़ी नमी के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का दौर बना हुआ है।

    उन्होंने बताया कि अगले 48 घंटे खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन, किसान और आम लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए। नदी-नालों, पुल-पुलियों और निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।

    मानसून की विदाई में अब 5 दिन बाकी

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य समय 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है। यानी मानसून की विदाई में अब पांच दिन बाकी हैं। आने वाले दिनों में प्रदेश से मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।

    सामान्य से 2.2 इंच कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 880.5 मिमी यानी 34.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। यह सामान्य बारिश 937.9 मिमी यानी 36.9 इंच से 2.2 इंच कम है।

    प्रदेश में ओवरऑल सामान्य से 6% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा सामान्य के बराबर है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य के बराबर पहुंच गया है। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 21% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में इन आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। शुक्रवार को भी प्रदेश के पूर्वी हिस्से का आंकड़ा सामान्य के बराबर आ गया।

    पश्चिमी हिस्से में 8 से 50% तक कमी

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 8% से 50% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • मौसम ने फिर ली करवट… बना दमदार वेटर सिस्टम… कई राज्यों में होगी झमाझम बारिश

    मौसम ने फिर ली करवट… बना दमदार वेटर सिस्टम… कई राज्यों में होगी झमाझम बारिश


    नई दिल्ली।
    देश के कई हिस्सों में मौसम फिर करवट (Change Weather) लेने वाला है. बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) में बना सिस्टम अब मजबूत हो रहा है और इसका असर पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में दिखाई देने लगा है. इस वेदर सिस्टम (Weather system) का ओडिशा (Odisha) में सबसे ज्यादा असर होने का अनुमान है, जहां अगले दो दिनों के लिए बेहद भारी बारिश का अलर्ट है. दूसरी ओर दिल्ली-NCR में मंगलवार को मौसम फिलहाल साफ रहने वाला है, लेकिन सप्ताह के दूसरे हिस्से में बारिश और गरज-चमक का दौर बढ़ सकता है. यूपी के अलग-अलग इलाकों में भी मौसम के इस बदलाव का असर दिखेगा।

    बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम हिस्से में बना कम दबाव का क्षेत्र अब डिप्रेशन में बदल चुका है. इसके अगले 24 घंटे में और मजबूत होकर डीप डिप्रेशन में बदलने की संभावना है. इसके बाद यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की शुरुआती घंटों के बीच उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तट को पार कर सकता है. इस वेदर सिस्टम का सबसे ज्यादा असर ओडिशा में देखने को मिल सकता है।


    दिल्ली-NCR में आज बारिश से राहत

    दिल्ली-NCR में मंगलवार यानी 22 सितंबर को फिलहाल भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है. आईएमडी के 22 सितंबर के अपडेट में दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ के लिए आज से 24 सितंबर तक कोई चेतावनी नहीं है. 25 से 27 सितंबर के लिए गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जरूर जताई गई है. यानी मंगलवार को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद में बड़े पैमाने पर बारिश की उम्मीद नहीं है. हालांकि सप्ताह के आखिर में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।


    यूपी में कब बदलेगा मौसम?

    पूर्वी उत्तर प्रदेश में 24 सितंबर से मौसम की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. मौसम विभाग के मुताबिक 24 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बन सकती है, जबकि 25 सितंबर से भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है. 26 से 28 सितंबर तक भी पूर्वी यूपी में भारी बारिश और गरज-चमक का अलर्ट है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 सितंबर से मौसम में बदलाव शुरू हो सकता है. यहां 25 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना है, जबकि 26 से 28 सितंबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है।


    पहाड़ों में होगी सामान्य बारिश

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून समेत चमोली, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, उत्तरकाशी, नैनीताल समेत कई जिलों में 22 से 25 सितंबर के दौरान बाारिश होने की संभावना है. मौसम विभाग के मुताबिक 25-26 सितंबर के दौरान बारिश का दायरा बढ़कर कई स्थानों तक पहुंच सकता है. इस दौरान गरज-चमक के साथ कई जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है. वहीं, हिमाचल प्रदेश में आज कुछ जगहों पर हल्की बारिश हो सकती है, जबकि आने वाले दिनों में मौसम सामान्य ही रहेगा।


    ओडिशा में सबसे ज्यादा असर
    मौसम विभाग ने 23 और 24 सितंबर को ओडिशा के कई हिस्सों में बेहद भारी बारिश की चेतावनी दी है. 25 सितंबर को भी भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि 26 सितंबर को कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना है. 23 सितंबर को कंधमाल, गजपति, गंजाम और पुरी में 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बेहद भारी बारिश का अलर्ट है. इसके लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है. 24 सितंबर को कालाहांडी, कंधमाल और रायगड़ा में भी बेहद भारी बारिश का रेड अलर्ट है. मौसम का असर अगले कुछ दिनों तक बना रह सकता है. भारी बारिश के साथ कुछ इलाकों में जलभराव और दूसरी परेशानियां बढ़ सकती हैं।


    तेज हवाओं से समुद्र में उठेंगी ल​हरें

    बंगाल की खाड़ी में बने वेदर सिस्टम के मजबूत होने का असर समुद्र पर भी दिखेगा. दक्षिण ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तट के आसपास 23 से 24 सितंबर के बीच तेज हवाएं चल सकती हैं. पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 23 सितंबर को हवा की रफ्तार करीब 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. ऐसे में समुद्र में जाने वाले लोगों और मछुआरों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।


    केरल समेत इन राज्यों में भी बारिश

    केरल में भी इस सप्ताह मौसम नम रहने का अनुमान है. 21 से 25 सितंबर के बीच कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. पथनमथिट्टा, कोट्टायम, अलप्पुझा, एर्नाकुलम, इडुक्की और त्रिशूर में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है. जिन इलाकों में जलभराव या भूस्खलन का खतरा रहता है, वहां लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन की सलाह मानने को कहा गया है।


    बंगाल से पूर्वोत्तरी राज्यों तक बारिश

    असम और मेघालय में 22 सितंबर को गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना है. 23 से 25 सितंबर के बीच यहां भारी बारिश हो सकती है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी 22 सितंबर को गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं का असर दिख सकता है. 23 और 24 सितंबर को भारी बारिश और 25 सितंबर को बहुत भारी बारिश की संभावना है।

  • MP में 23 सितंबर से फि‍र बरसेंगे बादल, 24-25 को सिस्टम रहेगा स्ट्रॉन्ग, भारी बारिश की संभावना

    MP में 23 सितंबर से फि‍र बरसेंगे बादल, 24-25 को सिस्टम रहेगा स्ट्रॉन्ग, भारी बारिश की संभावना


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 23 सितंबर से एक बार फिर तेज बारिश का दौर शुरू होने के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 24 और 25 सितंबर को सिस्टम की सक्रियता सबसे ज्यादा रहेगी। इन दो दिनों में 17 जिलों में अति भारी या भारी बारिश हो सकती है, जबकि भोपाल-नर्मदापुरम संभाग में भी इसका असर देखने को मिलेगा।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में बारिश की वजह लो प्रेशर एरिया यानी निम्न दाब क्षेत्र है। इसके प्रभाव से 23 सितंबर से कुछ जिलों में बारिश शुरू होगी। 24 और 25 सितंबर को सिस्टम के स्ट्रॉन्ग रहने की संभावना है। पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में इसका असर ज्यादा रहने का अनुमान है। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग के लिए भी बारिश को लेकर अलर्ट है।

    प्रदेश में अब तक औसतन 33.7 इंच बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। अगले कुछ दिनों में तेज बारिश होने से कुल बारिश के आंकड़े में और सुधार होने की उम्मीद है। दक्षिण-पश्चिम मानसून सितंबर के आखिरी सप्ताह से प्रदेश से विदा होना शुरू हो जाएगा। ऐसे में विदाई से पहले बारिश का यह दौर कई इलाकों के लिए अहम माना जा रहा है।

    भोपाल-नर्मदापुरम में भी दिखा बारिश का असर

    इससे पहले रविवार रात भोपाल के कई इलाकों में तेज बारिश हुई। नर्मदापुरम में तेज हवा चलने के बाद करीब पौन घंटे तक बारिश हुई। फेफरताल में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। बिजली गुल रहने के कारण शहर का करीब 40 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहा।

    बारिश और तेज हवा का असर शहर के गणेश पंडालों पर भी पड़ा। रसूलिया, आशुतोष नगर और हरदा रोड स्थित महाराणा प्रताप मार्केट में बने गणेश पंडालों को नुकसान पहुंचा।

    सोमवार को भी भोपाल समेत प्रदेश के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। दिनभर बादल छाए रहे। रात में कोलार इलाके में भी हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई।

    प्रदेश में सामान्य से 6% कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में अब तक 856.8 मिमी यानी 33.7 इंच बारिश हो चुकी है। प्रदेश में इस अवधि तक सामान्य बारिश 922.6 मिमी यानी 36.3 इंच होनी चाहिए थी। इस लिहाज से अब तक 2.6 इंच बारिश कम हुई है। ओवरऑल प्रदेश में सामान्य से 6% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से 2% और पश्चिमी हिस्से में 10% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग शामिल हैं। यहां औसत की तुलना में करीब 2% तक बारिश कम हुई है।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 23% तक कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। सोमवार को प्रदेश का कुल बारिश का अंतर माइनस 2% तक आ गया था।

    पश्चिमी हिस्से के कई जिलों में ज्यादा कमी

    पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य से काफी नीचे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7% से 49% तक कम बारिश हुई है। स्रोत सूची में खंडवा का नाम दो बार दर्ज है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    प्रदेश के 23 जिलों में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    मानसून की विदाई से पहले 23 सितंबर से शुरू होने वाला बारिश का नया दौर प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में और सुधार कर सकता है। खासकर 24 और 25 सितंबर को सिस्टम की सक्रियता बढ़ने से पूर्वी मध्यप्रदेश के साथ भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में भी बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

  • MP में 24 सितंबर से फिर तेज बारिश के आसार, मानसून का आखिरी दौर, अब तक 33.9 इंच बरसात

    MP में 24 सितंबर से फिर तेज बारिश के आसार, मानसून का आखिरी दौर, अब तक 33.9 इंच बरसात


    भोपाल। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले मध्यप्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर सक्रिय होने जा रहा है। मौसम केंद्र (IMD) के अनुसार 24 सितंबर से प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश हो सकती है, जबकि इससे पहले हल्की बारिश और रिमझिम का दौर जारी रहेगा। प्रदेश में अब तक औसतन 33.9 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे का करीब 91% है।

    बारिश के नए दौर की वजह बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसम तंत्र है। मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार तक लो प्रेशर एरिया उत्तर अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में सक्रिय था। रविवार को यह आगे बढ़ गया। इसके पश्चिम-उत्तर दिशा में बढ़ने के साथ धीरे-धीरे मजबूत होने की संभावना है। इसके 21 सितंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर डिप्रेशन और 22 सितंबर को डीप डिप्रेशन में बदलने का अनुमान है।

    23 सितंबर से बढ़ेगी सक्रियता, 24 से भारी बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार इस सिस्टम का असर 23 सितंबर की सुबह से बढ़ना शुरू हो सकता है। इसके बाद मध्यप्रदेश में भी बारिश की गतिविधियां तेज होने का अनुमान है। 24 सितंबर से कई जिलों में तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    इस दिन छतरपुर, सतना, दमोह, डिंडौरी, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मानसून की विदाई से पहले बनने वाला यह सिस्टम प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की कमी को कुछ हद तक पूरा कर सकता है।

    32 जिलों में 5 से 49% तक कम बारिश

    प्रदेश में अब तक हुई बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो 32 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से 5% से 49% तक कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य से 1% तक कम है।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 24% तक कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि पिछले एक सप्ताह में इन जिलों की स्थिति में सुधार हुआ है। रविवार तक बारिश का आंकड़ा माइनस 2% तक पहुंच गया था।

    पश्चिमी हिस्से के इन जिलों में बारिश की कमी

    पश्चिमी मध्यप्रदेश में भी कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 5% से 49% तक कम पानी गिरा है। ऐसे में 24 सितंबर से शुरू होने वाला बारिश का दौर इन क्षेत्रों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 23 जिलों में अब तक औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    इस तरह मानसून की विदाई से पहले आने वाला नया मौसम सिस्टम प्रदेश के बारिश के आंकड़ों में और सुधार कर सकता है। फिलहाल 23 सितंबर से गतिविधि बढ़ने और 24 सितंबर से कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

  • MP में सितंबर के आखिरी सप्ताह होगी तेज बारिश, अगले 4 दिन भोपाल-इंदौर-उज्जैन समेत कई जिलों में गिरेगा पानी

    MP में सितंबर के आखिरी सप्ताह होगी तेज बारिश, अगले 4 दिन भोपाल-इंदौर-उज्जैन समेत कई जिलों में गिरेगा पानी


    भोपाल। दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले मध्य प्रदेश में एक बार फिर बारिश का दौर तेज हो सकता है। उत्तर अंडमान सागर में बन रहा निम्न दाब क्षेत्र प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर सकता है। अगले चार दिनों में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। ताजा मौसम पूर्वानुमान में सितंबर के आखिरी सप्ताह में बारिश की गतिविधियां बढ़ने और 24-25 सितंबर को भारी बारिश के आसार भी जताए गए हैं।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक नए सिस्टम की दिशा और उसकी तीव्रता ही तय करेगी कि इसका प्रदेश पर कितना असर पड़ेगा। 23 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं था, हालांकि सिस्टम की गतिविधियों के आधार पर मौसम के पूर्वानुमान में बदलाव संभव है। IMD के ताजा बुलेटिन में भी 19 से 23 सितंबर के दौरान गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियों तथा इसके बाद 24 और 25 सितंबर को भारी बारिश की संभावना बताई गई है।

    भोपाल में दो बांधों के गेट खोले

    इससे पहले शनिवार को भोपाल और आसपास के इलाकों में रातभर बारिश के बाद भदभदा डैम का एक और कलियासोत डैम के दो गेट खोलने पड़े। उधर ब्यावरा में लगातार बारिश के कारण नदी-नालों में उफान आ गया। अजनार नदी का पानी पुल के ऊपर से बहने लगा, जिससे आसपास के इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए।

    आगर जिले में भी कई स्थानों पर तेज बारिश दर्ज की गई। नलखेड़ा में मां बगलामुखी मंदिर के सामने से गुजर रहे नाले में पानी का बहाव इतना बढ़ गया कि एक कार बह गई। इस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। शहडोल में आकाशीय बिजली गिरने से 2 लोगों की जान चली गई।

    45 जिलों में कहीं तेज, कहीं हल्की बारिश

    शनिवार को मध्य प्रदेश के 45 जिलों में बारिश दर्ज की गई। इनमें शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, सतना, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, पांढुर्णा, भोपाल, राजगढ़, सीहोर, विदिशा, रायसेन, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, उज्जैन, देवास, रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खंडवा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, सागर और दमोह शामिल हैं।

    विदिशा के लटेरी में सबसे ज्यादा 4.2 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई। गुना के कुंभराज में 4 इंच और आगर-मालवा के नलखेड़ा में 92 मिमी यानी 3.7 इंच बारिश हुई। आगर के ही बड़ौद में 2.9 इंच, गुना के राघौगढ़ में 2.8 इंच और राजगढ़ के खिलचीपुर में ढाई इंच बारिश दर्ज की गई।

    32 जिलों में अब भी 5 से 48% कम बारिश

    पूरे मानसूनी सीजन की स्थिति देखें तो मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 1% तक कम रही है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 24% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात भी बने। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्से की बारिश की स्थिति बेहतर हुई थी, लेकिन शनिवार तक यह आंकड़ा फिर माइनस 2% हो गया।

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के 23 जिलों में भी बारिश सामान्य से कम है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा समेत इन जिलों में औसत से 5% से 48% तक कम पानी गिरा है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    इसके उलट प्रदेश के 23 जिलों में मानसून सीजन के दौरान औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    मानसून अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और देश के कुछ हिस्सों से इसकी वापसी भी शुरू हो गई है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक गरज-चमक के साथ बारिश का दौर बना रहने और सितंबर के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।