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  • एमपी में 33.2 इंच बारिश, मानसून को 11 दिन बाकी, 22 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना

    एमपी में 33.2 इंच बारिश, मानसून को 11 दिन बाकी, 22 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के अब 11 दिन ही बाकी हैं और प्रदेश में अब तक औसतन 33.2 इंच बारिश रिकॉर्ड हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 89.3 प्रतिशत है। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिन प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि मानसून के अंतिम सप्ताह में कुछ जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। ऐसे में सीजन खत्म होने तक प्रदेश का कुल बारिश का कोटा पूरा होने की उम्मीद बनी हुई है।

    हालांकि, प्रदेश के सभी हिस्सों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के ज्यादातर जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा अब भी पीछे है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर में अब तक सामान्य बारिश का 80 प्रतिशत पानी भी नहीं गिरा है। इन जिलों को सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अगले दिनों में लगातार तीन से चार दिन अच्छी बारिश की जरूरत होगी।

    इसके उलट मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे से दोगुना पानी गिर चुका है। वहीं भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई है। प्रदेश के बाकी 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।

    22 सितंबर तक हल्की बारिश का अनुमान

    मौसम विभाग ने अगले चार दिन यानी 22 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस समय पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम सक्रिय है। इसके असर से पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है।

    मौसम की अगली गतिविधि भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के संकेत हैं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस सिस्टम के बनने और आगे बढ़ने से मध्य प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बदलाव की स्थिति बन सकती है।

    मानसून की विदाई का समय नजदीक होने के बावजूद प्रदेश में अभी बारिश की संभावनाएं बनी हुई हैं। ऐसे में अंतिम सप्ताह में यदि कुछ जिलों में अच्छी बारिश होती है तो जिन इलाकों में फिलहाल बारिश का आंकड़ा कम है, वहां सामान्य के करीब पहुंचने की उम्मीद बढ़ सकती है।

  • मानसून की विदाई से पहले MP में फिर होगी बारिश, अब तक 33.1 इंच गिरा पानी, कोटे का 88.7% पूरा

    मानसून की विदाई से पहले MP में फिर होगी बारिश, अब तक 33.1 इंच गिरा पानी, कोटे का 88.7% पूरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब अंतिम दौर में है, लेकिन विदाई से पहले एक और बारिश का दौर प्रदेश को मिल सकता है। इस मानसूनी सीजन में अब तक औसतन 33.1 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य कोटे 37.3 इंच का 88.7% है। प्रदेश के 23 जिलों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जबकि 32 जिलों में बारिश अब भी औसत से कम है।

    मौसम केंद्र (IMD) के मुताबिक फिलहाल 20 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। हालांकि, 21 सितंबर के बाद चक्रवात या लो प्रेशर एरिया की गतिविधि बनने पर कुछ हिस्सों में बारिश का दौर तेज हो सकता है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में अच्छी बारिश की संभावना जताई गई है।

    अभी दो सिस्टम, लेकिन असर सीमित

    प्रदेश के ऊपरी हिस्से से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ अरब सागर में लो प्रेशर एरिया भी सक्रिय है। फिलहाल दोनों सिस्टम का प्रदेश में व्यापक असर दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय मौसम तंत्र सक्रिय होने से कुछ जिलों में तेज बारिश जरूर हो सकती है।

    पिछले 24 घंटे में झाबुआ के शाहपुरा में करीब 3 इंच और दतिया के सेंवढ़ा में 4 इंच पानी गिरा। बुधवार को भोपाल, सीहोर समेत कुछ अन्य जिलों में भी बारिश हुई।

    21 सितंबर के बाद बन सकता है नया दौर

    मौसम विभाग के अनुसार 20 सितंबर तक प्रदेश में भारी बारिश की स्थिति नहीं है, लेकिन इसके बाद मौसम में बदलाव के संकेत हैं। 21 सितंबर के बाद चक्रवात और लो प्रेशर एरिया की गतिविधियां सक्रिय हो सकती हैं। इसके असर से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश होने की संभावना है।

    मानसून का आधिकारिक सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस लिहाज से अब मानसून की विदाई में 13 दिन बाकी हैं। हालांकि, प्रदेश के कुछ जिलों से मानसून अक्टूबर के पहले सप्ताह तक भी विदा हो सकता है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस बार मानसून समय पर विदा हो सकता है। इससे पहले प्रदेश में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।

    अक्टूबर की बारिश मानसूनी आंकड़े में नहीं जुड़ेगी

    मध्य प्रदेश में मानसूनी बारिश की गणना 1 जून से 30 सितंबर के बीच होती है। इसलिए अक्टूबर में मानसून की विदाई के बाद होने वाली बारिश को मानसूनी सीजन के आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाएगा। कई बार मानसून अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक प्रदेश से पूरी तरह विदा होता है।

    फिलहाल प्रदेश में औसत बारिश का आंकड़ा 33.1 इंच है, जबकि सामान्य बारिश 37.3 इंच है। यानी सामान्य कोटे तक पहुंचने के लिए करीब 4.2 इंच बारिश और जरूरी है।

    पूर्वी MP में कमी घटकर 1% तक पहुंची

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग आते हैं। यहां कुल मिलाकर बारिश सामान्य से 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 3% से 25% तक कम बारिश हुई है।

    पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से के बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार आया है। कई जिलों में भारी बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात भी बने, जिससे सीजन की बारिश का औसत ऊपर आया। एक समय पूर्वी हिस्सा सामान्य से बेहतर स्थिति में पहुंच गया था, लेकिन बुधवार तक यह आंकड़ा फिर माइनस 1% हो गया।

    पश्चिमी हिस्से में ज्यादा जिले पिछड़े

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 3% से 49% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इनमें आलीराजपुर की स्थिति सबसे कमजोर जिलों में बनी हुई है, जबकि प्रदेश के कई पूर्वी और उत्तरी जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश


    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    अब नजर 21 सितंबर के बाद बनने वाली मौसम प्रणालियों पर है। यदि इनका असर प्रदेश पर व्यापक रहा तो मानसून के अंतिम दिनों में बारिश का आंकड़ा सामान्य कोटे के और करीब पहुंच सकता है।

  • MP में मानसून की विदाई से पहले फिर होगी बारिश, 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम

    MP में मानसून की विदाई से पहले फिर होगी बारिश, 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर बारिश का दौर तेज हो सकता है। मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जो मजबूत रहा तो प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा हो सकता है; अभी सामान्य औसत 37.3 इंच के मुकाबले 33 इंच बारिश हुई है।

    88.5% बारिश, लक्ष्य तक पहुंचने 4.3 इंच बाकी

    प्रदेश में मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 14 दिन बाकी हैं। मंगलवार तक 33 इंच यानी सामान्य बारिश की 88.5% बारिश हो चुकी है। सामान्य औसत 37.3 इंच है, ऐसे में सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी 4.3 इंच बारिश और चाहिए।

    मौसम विभाग के अनुसार मानसूनी सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस अवधि में होने वाली बारिश ही मानसून के आंकड़ों में शामिल की जाती है। हालांकि कई बार मानसून अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक विदा होता है। इस बार सितंबर के आखिरी हिस्से में इसकी विदाई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में उससे पहले होने वाली बारिश प्रदेश के कुल आंकड़े को सामान्य के करीब ले जा सकती है।

    17 से 21 सितंबर के बीच बारिश का जोर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार 17 से 19 सितंबर के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां अधिक व्यापक हो सकती हैं। वहीं, 18 से 21 सितंबर तक पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।

    इसके बाद 19 सितंबर के बाद बनने वाला नया सिस्टम प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इसकी ताकत अच्छी रही और इसका प्रभाव व्यापक रहा तो मानसून के बचे दिनों में होने वाली बारिश से प्रदेश सामान्य बारिश के आंकड़े को छू सकता है।

    मंगलवार को लो प्रेशर एक्टिव, लेकिन तेज बारिश नहीं

    मंगलवार को पश्चिमी मध्य प्रदेश में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ की गतिविधि भी देखने को मिली, लेकिन इसका असर तेज बारिश के रूप में सामने नहीं आया। प्रदेश के किसी भी जिले में भारी बारिश दर्ज नहीं हुई।

    भोपाल में दिनभर धूप खिली रही। इंदौर और उज्जैन में भी मौसम लगभग ऐसा ही रहा। यानी सिस्टम सक्रिय होने के बावजूद मंगलवार को प्रदेश में बारिश का जोर देखने को नहीं मिला।

    18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    अब तक प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं।

    इन जिलों में सामान्य से अधिक पानी गिर चुका है। ऐसे में मानसून के बचे दिनों में यहां होने वाली बारिश को अतिरिक्त बारिश के तौर पर देखा जाएगा।

    37 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे

    दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले अभी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे हैं। इनमें आलीराजपुर की स्थिति सबसे कमजोर है, जहां सामान्य की आधी बारिश भी अब तक नहीं हुई है।

    इसके विपरीत निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है। इस तरह प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण काफी असमान रहा है। अब निगाह 19 सितंबर के बाद सक्रिय होने वाले संभावित सिस्टम पर है कि वह कितनी व्यापक बारिश कराता है और प्रदेश को मानसून के सामान्य आंकड़े के कितने करीब पहुंचाता है।

  • MP में मानसून के 15 दिन बाकी, 37 जिलों में अब भी कोटा अधूरा, आलीराजपुर सबसे पीछे

    MP में मानसून के 15 दिन बाकी, 37 जिलों में अब भी कोटा अधूरा, आलीराजपुर सबसे पीछे


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का समय करीब आ रहा है, लेकिन बारिश का आंकड़ा अब भी सामान्य से नीचे है। सीजन में अब तक 834.4 मिमी यानी 32.8 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य 886.6 मिमी यानी 34.9 इंच से 2.1 इंच कम है। प्रदेश में ओवरऑल बारिश 6% कम है और 37 जिलों में अभी औसत बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है।

    दूसरी ओर, भोपाल, ग्वालियर समेत 18 जिले औसत से आगे निकल चुके हैं। सबसे ज्यादा अंतर आलीराजपुर में है, जहां औसत की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा पानी गिर चुका है।

    पूर्वी MP ने संभाला आंकड़ा, पश्चिमी हिस्सा अब भी पीछे
    इस मानसून में प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का प्रदर्शन पश्चिम की तुलना में बेहतर रहा है। जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में कई जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी गिरा है। सागर संभाग के निवाड़ी में औसत से 49%, मऊगंज में 44%, सतना में 34% और मैहर में 29% ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है।

    इंच में देखें तो मऊगंज में 54.9 इंच बारिश दर्ज की गई है। सतना में भी 50 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। इसके उलट इंदौर संभाग के आलीराजपुर में अब तक सिर्फ 16 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। हालांकि, पूर्वी हिस्से का ओवरऑल आंकड़ा भी सोमवार तक सामान्य से 1% कम हो गया। यहां बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 2% से 25% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिम के कई जिलों में 2 से 49% तक कमी
    पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी ज्यादा बनी हुई है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 2% से 49% तक कम बारिश हुई है। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश और कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बनने के बावजूद पूरे प्रदेश का बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर नहीं पहुंच पाया।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इस सूची में पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों के जिले शामिल हैं, लेकिन अधिक बारिश वाले जिलों में पूर्वी मध्य प्रदेश का दबदबा साफ दिखाई देता है।

    चार दिन भारी बारिश के आसार नहीं
    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, अगले चार दिनों में प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है। पिछले चार दिनों से भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में भारी बारिश का दौर चला था। सोमवार को भी कुछ जिलों में तेज बारिश रिकॉर्ड हुई, लेकिन मंगलवार से सिस्टम कमजोर होने की संभावना है। इसके चलते 15 से 17 सितंबर तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, 15 सितंबर से प्रदेश में बारिश की तीव्रता और प्रसार में धीरे-धीरे कमी आने का पूर्वानुमान है। सात दिन के पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना बनी रहेगी।

    पिछले सप्ताह की बारिश से बदला तस्वीर का अंतर
    पिछले एक सप्ताह में कई जिलों में हुई तेज बारिश ने प्रदेश के बारिश के आंकड़े को काफी सुधारा है। कुछ स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात भी बने। इसका असर यह हुआ कि सीजन में पहली बार पूर्वी मध्य प्रदेश का आंकड़ा बेहतर स्थिति में पहुंचा था, हालांकि सोमवार तक यह फिर सामान्य से 1% नीचे आ गया।

    अब मानसून सीजन के करीब 15 दिन ही बाकी हैं। ऐसे में अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश यह तय करेगी कि प्रदेश का कुल आंकड़ा सामान्य के कितने करीब पहुंचता है। फिलहाल पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों की कमी और आलीराजपुर जैसे जिलों में बेहद कम बारिश पूरे प्रदेश के औसत पर असर डाल रही है।

  • MP में फिर सक्रिय मानसून: उज्जैन समेत 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 15 से कमजोर होगा सिस्टम

    MP में फिर सक्रिय मानसून: उज्जैन समेत 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, 15 से कमजोर होगा सिस्टम


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर तेज हो गई हैं। पश्चिमी हिस्से में सक्रिय तीन मौसमी सिस्टम के असर से रविवार को कई जिलों में तेज बारिश हुई। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर संभाग में बारिश का असर ज्यादा रहा। बड़वानी में नदी-नाले और तालाब उफान पर आ गए, जबकि मुरैना में चंबल नदी में नहाते समय पिता-पुत्र डूब गए। सोमवार को उज्जैन समेत 7 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। हालांकि 15 सितंबर के बाद बारिश की तीव्रता और दायरा घटने का अनुमान है।

    मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के अनुसार, प्रदेश में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) के साथ ट्रफ समेत तीन मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से अब तक अपेक्षाकृत कम बारिश वाले इंदौर और उज्जैन संभाग में भी अच्छी बारिश हुई है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 14 सितंबर को भी कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

    बड़वानी में तालाब ओवरफ्लो, बांध के गेट खोले

    रविवार को भोपाल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। बड़वानी के सेंधवा क्षेत्र में नदी-नाले और तालाब उफान पर रहे। रलावती में जिले का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया।

    टीकमगढ़ में तेज बारिश के बाद बान सुजारा बांध के चार गेट खोलने पड़े। हरदा के वन क्षेत्र में लाखादेह की पहाड़ी नदी भी उफान पर रही। इंदौर के महू, ओंकारेश्वर, रतलाम समेत कई क्षेत्रों में तेज बारिश दर्ज की गई। शाजापुर के मक्सी, झाबुआ के पेटलावद, खरगोन के कसरावद और खंडवा में भी मूसलधार बारिश हुई।

    चंबल में पिता-पुत्र डूबे

    मुरैना में रविवार को चंबल नदी में नहाने के दौरान पिता और पुत्र डूब गए। दोनों बाबू महाराज मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। हादसे के बाद उनकी तलाश की गई।

    सोमवार को इन 7 जिलों में भारी बारिश

    मौसम विभाग ने सोमवार को उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, राजगढ़, गुना और श्योपुर में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने का अनुमान है।

    14 सितंबर को भी पश्चिमी MP में असर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, 14 सितंबर को पश्चिमी मध्य प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है। निम्न दबाव क्षेत्र के राजस्थान-गुजरात की ओर बढ़ने के दौरान पश्चिमी जिलों में इसका असर बना रह सकता है।

    हालांकि 15 सितंबर के बाद प्रदेश में बारिश की तीव्रता और इसका प्रसार धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। अगले सात दिनों के पूर्वानुमान में पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।

    32 जिलों में 2% से 52% तक बारिश कम

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा 1% तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2% से 25% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बनने से बारिश का आंकड़ा तेजी से सुधरा था। इसके चलते सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्से की स्थिति बेहतर हुई थी, लेकिन रविवार तक यह आंकड़ा फिर 1% कम पर पहुंच गया।

    पश्चिमी हिस्से में आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7% से 52% तक कम बारिश हुई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    IMD के आंकड़ों के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • एमपी के 18 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, धार-बड़वानी में रहेगा ज्यादा असर

    एमपी के 18 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, धार-बड़वानी में रहेगा ज्यादा असर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। पश्चिमी हिस्से, खासकर इंदौर और उज्जैन संभाग में मानसूनी सिस्टम का असर ज्यादा रहने वाला है। शनिवार को इंदौर, धार, बड़वानी, रतलाम और भोपाल समेत कई जिलों में तेज बारिश हुई। सतना के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर भी बढ़ गया। मौसम केंद्र (IMD) ने रविवार को 18 जिलों में अति भारी और भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    अगले 24 घंटे में धार और बड़वानी में अति भारी बारिश होने की संभावना है। वहीं इंदौर, उज्जैन, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, देवास, हरदा, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ और आलीराजपुर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, राजगढ़, विदिशा, नीमच, आगर-मालवा, शाजापुर, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    बंगाल की खाड़ी का लो प्रेशर सिस्टम सक्रिय

    मौसम विभाग के अनुसार, इस समय बंगाल की खाड़ी की ओर निम्न दाब क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) सक्रिय है। इसके साथ मानसून ट्रफ प्रदेश के दक्षिणी हिस्से से होकर गुजर रही है। दोनों सिस्टम के असर से प्रदेश में अगले दो दिन बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में सिस्टम का प्रभाव ज्यादा रहने के आसार हैं।

    पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा सुधरा

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग की औसत बारिश अब करीब 1% कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में औसत से 2% से 26% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    हालांकि, पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश के आंकड़े में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे सीजन की बारिश का अंतर कम हुआ। आंकड़ों के लिहाज से पहली बार पूर्वी हिस्सा बेहतर स्थिति में पहुंचा था, हालांकि बुधवार तक यहां बारिश का आंकड़ा फिर करीब 1% कम रहा।

    पश्चिमी हिस्से के 22 जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 22 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    IMD के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है।

  • MP के 15 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, इंदौर-जबलपुर समेत 4 संभागों में रहेगा असर

    MP के 15 जिलों में आज भारी बारिश की चेतावनी, इंदौर-जबलपुर समेत 4 संभागों में रहेगा असर


    भोपाल। ब्रेक के बाद फिर सक्रिय हुए मानसूनी सिस्टम ने मध्यप्रदेश में बारिश का दौर शुरू कर दिया है। शुक्रवार को भोपाल, दमोह, टीकमगढ़, विदिशा समेत कई जिलों में बारिश हुई। भोपाल में तेज आंधी के साथ हुई बारिश के दौरान विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम रह गई, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। वहीं, दमोह के निचले इलाकों में पानी भर गया।

    शनिवार को मौसम विभाग ने प्रदेश के 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इनमें उज्जैन, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, देवास, हरदा, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट और छतरपुर शामिल हैं। मौसम का असर अगले तीन दिन तक बने रहने की संभावना है।

    41 जिलों में हल्की से तेज बारिश के आसार

    मौसम केंद्र के मुताबिक भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, आलीराजपुर, बुरहानपुर, झाबुआ, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, रतलाम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश हो सकती है।

    3-4 दिन के ब्रेक से बढ़ी गर्मी-उमस

    प्रदेश के कई जिलों में पिछले तीन से चार दिन से बारिश नहीं हुई थी। इसके चलते गर्मी और उमस का असर बढ़ गया था। अब बारिश का दौर शुरू होने से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है।

    सीजन में अब तक 31.5 इंच बारिश

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 801.3 मिमी यानी 31.5 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 868.6 मिमी यानी 34.2 इंच बारिश होती है। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक सामान्य से 2.7 इंच कम यानी 8% कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 1%, जबकि पश्चिमी हिस्से में 14% कम बारिश दर्ज की गई है।

    33 जिलों में 1 से 56% तक बारिश कम

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 1% कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले 3% से 26% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि, पिछले एक सप्ताह में बारिश के कारण स्थिति में काफी सुधार आया है। इस दौरान पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे बारिश का आंकड़ा सुधरा। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्से का आंकड़ा सामान्य के करीब पहुंचा है।

    वहीं पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 56% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    इन 22 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में अब तक सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • MP में 31.1 इंच तक गिर चुका पानी, 12 जिले सामान्य से आगे, 4 दिन रीवा-शहडोल में होगी तेज बारिश

    MP में 31.1 इंच तक गिर चुका पानी, 12 जिले सामान्य से आगे, 4 दिन रीवा-शहडोल में होगी तेज बारिश


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब तक सीजन के सामान्य बारिश के कोटे का 83.5% पूरा कर चुका है। प्रदेश में औसतन 31.1 इंच यानी 790.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है। भोपाल समेत 12 जिलों में बारिश सामान्य से अधिक है, जबकि 31 जिले अभी भी औसत से पीछे चल रहे हैं। अगले कुछ दिनों में बारिश का फोकस प्रदेश के पूर्वी हिस्से में रहने की संभावना है।

    12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    अब तक सामान्य से अधिक बारिश वाले जिलों में भोपाल, राजगढ़, शिवपुरी, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज और उमरिया शामिल हैं।

    वहीं उमरिया, अनूपपुर, आगर-मालवा, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, ग्वालियर, गुना, दतिया, खरगोन और बुरहानपुर में सामान्य बारिश का 90% से ज्यादा कोटा पूरा हो चुका है।

    पूर्वी MP में सबसे ज्यादा, पश्चिमी हिस्से में सबसे कम पानी

    पूरे मानसून सीजन में बारिश के लिहाज से प्रदेश के पूर्वी हिस्से की स्थिति बेहतर रही है। इसके उलट इंदौर-उज्जैन संभाग वाले पश्चिमी हिस्से में सबसे कम बारिश हुई है।

    जिलेवार आंकड़ों में मऊगंज सबसे आगे है, जहां अब तक करीब 53 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं आलीराजपुर में सबसे कम 13.6 इंच पानी गिरा है।

    11 सितंबर तक रीवा-शहडोल में बारिश

    मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के मुताबिक, 11 सितंबर तक रीवा और शहडोल संभाग में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में इस दौरान हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के अनुसार 12 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय होने पर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    सामान्य से 2 इंच कम, कुल कमी 6%

    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन में अब तक 790.8 मिमी यानी 31.1 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 840.6 मिमी यानी 33.1 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक करीब 2 इंच कम बारिश हुई है और ओवरऑल कमी 6% है।

    क्षेत्रवार देखें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से 1% ज्यादा, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा है।

    31 जिलों में 3% से 54% तक कमी

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश करीब 1% तक कम है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 3% से 23% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि, पिछले एक सप्ताह में पूर्वी हिस्से के आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस दौरान कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे बारिश का आंकड़ा तेजी से बढ़ा। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा बारिश के मामले में सामान्य से आगे पहुंचा है और सोमवार तक यहां 1% ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

    पश्चिमी हिस्से के कई जिले अब भी पीछे

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में स्थिति अभी भी कमजोर है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य के मुकाबले 7% से 54% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

  • MP: सागर-रीवा संभाग के 6 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, 4 दिन सक्रिय रहेंगे मानसूनी सिस्टम

    MP: सागर-रीवा संभाग के 6 जिलों में आज भारी बारिश का अलर्ट, 4 दिन सक्रिय रहेंगे मानसूनी सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय है। प्रदेश के ऊपरी हिस्से में दो मौसम प्रणालियां बनी हुई हैं, जिनके प्रभाव से अगले चार दिन तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। सोमवार को सागर और रीवा संभाग के 6 जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं मालवा-निमाड़ क्षेत्र यानी इंदौर और उज्जैन संभाग में हल्की बारिश होने की संभावना है।

    मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के मुताबिक, अगले 24 घंटे के दौरान निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर और दमोह में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    कलियासोत बांध के फिर खोले गए गेट

    प्रदेश के कई हिस्सों में रविवार को भी तेज बारिश हुई। भोपाल में कलियासोत बांध के दो गेट दोबारा खोलने पड़े। इससे एक दिन पहले शनिवार रात करीब 11 बजे बांध के चार गेट खोले गए थे। पानी छोड़े जाने के बाद रात 12 बजे इन्हें एक-एक करके बंद कर दिया गया था।

    उज्जैन में बारिश के चलते शनिवार देर रात महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाले मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक महाकाल द्वार गिर गया।

    शिवपुरी जिले के सिकराऊदा गांव के 21 वर्षीय राम रावत का शव गहलोनी के पास नदी किनारे मिला। वह शुक्रवार को रपटा पार करते समय तेज बहाव में बह गया था। शनिवार को SDERF की टीम ने पूरे दिन सर्च ऑपरेशन चलाया था, लेकिन युवक का पता नहीं चल पाया था। रविवार को नदी का जलस्तर घटने पर ग्रामीणों को उसका शव दिखाई दिया।

    खेतों में पानी भरा, सड़क पर पुल डूबा

    शाजापुर के अकोदिया में बारिश का सिलसिला कभी धीमा तो कभी तेज रहा। खेतों में पानी भरने से सोयाबीन की फसल को नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

    मुरैना के कैलारस में भी बारिश के बाद खेरली-पचोखरा रोड पर स्थित गुराह नाले का पुल पानी में डूब गया। जरूरी काम से आने-जाने वाले लोगों ने नाला पार करने के लिए बड़ी कढ़ाही जैसे बर्तन का सहारा लिया। वे इसमें बैठकर रस्सी के सहारे नाले के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंच रहे हैं।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 23 जिलों में अब तक औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।

    32 जिलों में सामान्य से 2% से 23% तक कम बारिश

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश 1% तक कम दर्ज की गई है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2% से 23% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। इस दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने, जिससे बारिश का आंकड़ा ऊपर आया। सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्सा आंकड़ों के लिहाज से बेहतर स्थिति में पहुंचा है और यहां बारिश का आंकड़ा 2% ज्यादा हो गया है।

    इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 1% से 54% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

  • एमपी में बारिश से नदियां उफान पर, तीन डैम के गेट खुले, आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में बारिश से नदियां उफान पर, तीन डैम के गेट खुले, आज 15 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून का असर अब पूर्वी हिस्से से आगे बढ़कर पश्चिमी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और नर्मदा समेत प्रदेश की कई नदियां उफान पर हैं। बरगी, भदभदा और कलियासोत डैम के गेट खोले जा चुके हैं। प्रदेश के 12 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि सीजन में अब तक बारिश का आंकड़ा 30 इंच से ज्यादा पहुंच गया है।

    रविवार को ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम का असर जनजीवन पर भी पड़ा है। शनिवार को सीधी के कैमूर पहाड़ स्थित मूड़ा घाटी में लैंडस्लाइड के बाद सीधी-उत्तर प्रदेश मार्ग बंद हो गया। बारिश के कारण सड़क पर बड़े पत्थर और पेड़ गिर गए। सड़क के नीचे 100 फीट से ज्यादा गहरी खाई होने के कारण इस हिस्से में दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है।

    छतरपुर में स्कूल बंद, उमरिया में महिला बही

    लगातार मूसलाधार बारिश के चलते छतरपुर में सभी स्कूल बंद रहे। लवकुशनगर में एक कच्चा मकान बारिश के बीच ढह गया। उमरिया में बाढ़ के पानी में एक महिला के बहने की घटना सामने आई है। मैहर में पुलों के ऊपर से पानी बहने के कारण मुकुंदपुर मार्ग बंद है।

    भोपाल में पहले भदभदा डैम के गेट खोले गए और अब कलियासोत डैम से भी पानी छोड़ा जा रहा है। इसके बाद कलियासोत नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    इन 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

    मौसम केंद्र भोपाल (IMD) ने रविवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह, पन्ना और सतना में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान है।

    6 सितंबर को भी सक्रिय रहेगा सिस्टम

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक 6 सितंबर को भी मानसूनी सिस्टम सक्रिय रहेगा। हालांकि इंदौर में इस दौरान तेज बारिश की संभावना नहीं है। इसके बाद 7, 8 और 9 सितंबर को भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से अधिक बारिश दर्ज हुई है।

    पूर्वी हिस्से में सुधरा बारिश का आंकड़ा

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 1% कम बताया गया है। वहीं बालाघाट, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 1% से 22% तक कम बारिश हुई है।

    हालांकि पिछले एक सप्ताह में स्थिति में काफी सुधार आया है। बीते सात दिनों से पूर्वी हिस्से के कई जिलों में लगातार बारिश और बाढ़ के हालात बने हुए हैं। इसका असर सीजन के आंकड़ों पर भी पड़ा है और पहली बार पूर्वी हिस्सा बारिश के मामले में बेहतर स्थिति में आया है। यहां बारिश का आंकड़ा अब सामान्य से 3% ज्यादा हो गया है।

    पश्चिमी हिस्से में 53% तक कम बारिश

    इसके उलट पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिले अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य के मुकाबले 2% से 53% तक कम बारिश दर्ज की गई है।