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  • बंगाल में BJP की बढ़त के पीछे अमित शाह की रणनीति बनी सबसे बड़ा फैक्टर, चुनावी खेल पूरी तरह बदला

    बंगाल में BJP की बढ़त के पीछे अमित शाह की रणनीति बनी सबसे बड़ा फैक्टर, चुनावी खेल पूरी तरह बदला

    नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों ने इस बार राज्य की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। शुरुआती आंकड़ों में भाजपा कई सीटों पर आगे दिखाई दे रही है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक ध्यान जिस बात पर जा रहा है, वह है भाजपा की रणनीतिक तैयारी और उसके पीछे माने जा रहे प्रमुख नेतृत्व की भूमिका।

    चुनाव से काफी पहले ही राज्य में पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर काम शुरू कर दिया था। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया और स्थानीय मुद्दों को गहराई से समझने पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य यह था कि पार्टी केवल बड़े मंचों तक सीमित न रहे, बल्कि सीधे मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर सके।

    इस पूरी रणनीति के केंद्र में एक स्पष्ट योजना दिखाई दी, जिसमें जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करना और अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावशाली चेहरों को आगे लाना शामिल था। इससे पार्टी को उन इलाकों में भी समर्थन मिलने लगा, जहां पहले उसकी स्थिति कमजोर मानी जाती थी।

    चुनावी अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लगातार जनता के बीच रखा गया। इनमें कानून व्यवस्था, सुरक्षा, भ्रष्टाचार और विकास से जुड़े विषय प्रमुख रहे। साथ ही रोजगार और निवेश को लेकर भी मजबूत संदेश दिया गया, जिससे युवाओं और शहरी वर्ग तक पहुंच बनाने में मदद मिली।

    अभियान के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को भी एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में सामने रखा गया। कई जनसभाओं में यह बात प्रमुखता से उठाई गई कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है। इसके साथ ही विकास मॉडल को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई, जिसमें भविष्य की दिशा को लेकर अलग दृष्टिकोण पेश किया गया।

    पूरे चुनावी अभियान के दौरान संगठनात्मक स्तर पर लगातार निगरानी और समन्वय बनाए रखा गया। रणनीति केवल चुनावी रैलियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे हर स्तर पर लागू किया गया। कार्यकर्ताओं को लगातार दिशा-निर्देश दिए जाते रहे, जिससे अभियान में निरंतरता बनी रही।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में भाजपा की बढ़त केवल किसी एक कारण से नहीं है, बल्कि यह कई स्तरों पर की गई तैयारियों का परिणाम है। संगठन की मजबूती, जमीनी संपर्क और मुद्दों की स्पष्टता ने इस स्थिति को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    फिलहाल रुझानों में भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। हालांकि अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी, लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है और आगे आने वाले समय में इसके असर और भी गहरे दिखाई दे सकते हैं।

  • पीएम मोदी का पुराना बयान फिर बना चर्चा का केंद्र, बंगाल चुनाव रुझानों ने बढ़ाया सियासी तनाव

    पीएम मोदी का पुराना बयान फिर बना चर्चा का केंद्र, बंगाल चुनाव रुझानों ने बढ़ाया सियासी तनाव

    नई दिल्ली।पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनाव की मतगणना के बीच राजनीतिक माहौल लगातार बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। जैसे-जैसे शुरुआती रुझान सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं और नए विश्लेषणों का दौर शुरू हो गया है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना बयान अचानक फिर से सुर्खियों में आ गया है, जिसने पूरे राजनीतिक वातावरण को और अधिक गर्म कर दिया है।

    यह बयान उस समय दिया गया था जब बिहार में भाजपा को बड़ी जीत मिली थी। उस अवसर पर प्रधानमंत्री ने राजनीतिक संकेतों के तौर पर कहा था कि बिहार की जीत का असर केवल उसी राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव आगे चलकर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है। उस समय इसे एक राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा गया था, लेकिन अब जब बंगाल में मतगणना के शुरुआती रुझान सामने आ रहे हैं, तो वही बयान फिर से चर्चा का विषय बन गया है।

    वर्तमान रुझानों में कई सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प स्थिति में पहुंच गया है। कुछ क्षेत्रों में एक दल मजबूत बढ़त बनाए हुए है, तो कुछ जगहों पर कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। इस स्थिति ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को और अधिक जटिल बना दिया है। हर राउंड की गिनती के साथ तस्वीर बदलती जा रही है, जिससे किसी भी नतीजे पर अभी अंतिम राय बनाना मुश्किल हो गया है।

    राज्य के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। मतदाताओं का रुझान अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग दिशा में जाता हुआ नजर आ रहा है, जिससे यह चुनाव और भी रोमांचक बन गया है। राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह चुनाव वास्तव में किसी बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है या फिर अंतिम परिणाम कुछ और ही तस्वीर पेश करेंगे।

    इसी बीच पीएम मोदी का पुराना बयान फिर से वायरल होने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। समर्थक और विरोधी दोनों ही इसे अपने-अपने नजरिए से समझाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोग इसे पहले से दी गई राजनीतिक रणनीति का संकेत मान रहे हैं, तो कुछ इसे केवल एक सामान्य राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं। लेकिन मौजूदा माहौल ने इस बयान को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

    प्रशासन की ओर से भी मतगणना प्रक्रिया के दौरान पूरी सतर्कता बरती जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या तनाव की स्थिति उत्पन्न न हो। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि परिणाम घोषित होने तक पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो।

    फिलहाल पूरे राज्य की निगाहें अंतिम परिणामों पर टिकी हुई हैं। जैसे-जैसे गिनती आगे बढ़ेगी, राजनीतिक तस्वीर और अधिक स्पष्ट होती जाएगी। लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है, जहां हर बयान और हर रुझान का अपना अलग राजनीतिक महत्व बन गया है।

  • पश्चिम बंगालः कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना आज …. CAPF की 200 कंपनियां तैनात

    पश्चिम बंगालः कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना आज …. CAPF की 200 कंपनियां तैनात


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 (West Bengal Assembly Election 2026) की मतगणना (Vote Counting) को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि काउंटिंग के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि व्यापक सुरक्षा इंतजामों के बीच मतगणना पूरी तरह पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से कराई जाएगी। वोटों की गिनती से पहले हुई कई बैठकों में अग्रवाल ने साफ किया कि चुनाव आयोग ने कोई भी कसर नहीं छोड़ी है।

    पूरे राज्य में मतगणना केंद्रों (Counting centres) की सुरक्षा के लिए तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 200 कंपनियों को मतगणना केंद्रों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। इसके अलावा राज्य पुलिस, राज्य सशस्त्र पुलिस और CAPF मिलकर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। मतगणना केंद्रों के बाहर सभी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरे भी लगाए गए हैं।


    तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू

    मनोज अग्रवाल ने कहा, ‘सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। तीन-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। रिटर्निंग ऑफिसर (RO), असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (ARO), मतगणना एजेंट और सुपरवाइजर पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें कई बार प्रशिक्षण दिया जा चुका है। किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई संभावना नहीं है, सब कुछ नियमों के अनुसार ही होगा।’ उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर किसी स्तर पर लापरवाही या शरारत पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि मतगणना केंद्र के अंदर मौजूद कोई भी व्यक्ति अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी करता है, तो उसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। उन्होंने राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों, एजेंटों और आम जनता से अपील की कि वे शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखें, ताकि मतगणना बिना किसी बाधा के पूरी हो सके। अग्रवाल ने बताया कि चुनाव आयोग ने जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस महानिदेशक और अन्य सीनियर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें की हैं, ताकि किसी भी संभावित अशांति को पहले ही रोका जा सके। उन्होंने कहा कि पहले और दूसरे चरण के मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए थे और उम्मीद है कि मतगणना भी उसी तरह शांतिपूर्ण होगी।

  • पश्चिम बंगाल: मुस्लिम बहुल सीटों पर टिके हैं चुनाव के नतीजे, 85 क्षेत्रों में 30% आबादी निर्णायक भूमिका में

    पश्चिम बंगाल: मुस्लिम बहुल सीटों पर टिके हैं चुनाव के नतीजे, 85 क्षेत्रों में 30% आबादी निर्णायक भूमिका में


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के 2026 विधानसभा चुनाव (2026 Assembly Elections) के नतीजे राज्य के जनसांख्यिकीय गणित, खासकर ‘मुस्लिम बहुल’ सीटों (Muslim-majority seats) पर टिके हैं। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा में सत्ता की चाबी उन निर्वाचन क्षेत्रों में छिपी है, जहां अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 2021 में इस वोट बैंक के बंपर समर्थन से सत्ता बचाने वाली ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) क्या इस बार बहुकोणीय मुकाबले में अपना एकाधिकार कायम रख पाएगी?


    2021 का एकतरफा समीकरण और टीएमसी का क्लीन स्वीप

    भारत की चुनावी प्रणाली में, अगर किसी निर्वाचन क्षेत्र में एक ही समुदाय की 30% से अधिक सघन आबादी हो, तो वह नतीजे तय करने की ताकत रखती है। आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 89 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 30% के महत्वपूर्ण मानक को पार करती है। कुछ अनुमानों के अनुसार राज्य की कुल 294 सीटों में से लगभग 85 से 110 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी इस 30% के महत्वपूर्ण वैचारिक और सांख्यिकीय मानक के पार है। वहीं करीब 112 निर्वाचन क्षेत्रों में यह 25% से अधिक है।

    पश्चिम बंगाल के राजनीति इतिहास पर गौर करें तो इन क्षेत्रों पर दशकों तक वाम मोर्चे और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का निर्विवाद राजनीतिक एकाधिकार रहा था। हालांकि, 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद से, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने इस विशाल अल्पसंख्यक वोट बैंक पर अपना एकछत्र रणनीतिक प्रभुत्व स्थापित कर लिया, जिसने उन्हें 2011, 2016 और 2021 में लगातार तीन बार भारी बहुमत के साथ सत्ता में बनाए रखा।

    2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने 30% से अधिक मुस्लिम आबादी वाली करीब 85 में से 75 सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज करते हुए लगभग क्लीन स्वीप किया था। ‘एक्सिस माय इंडिया’ के 2021 एग्जिट पोल के अनुसार, उस दौरान लगभग 75% मुस्लिम मतदाताओं ने एकजुट होकर टीएमसी को वोट दिया था। इसी एकमुश्त समर्थन ने भाजपा के आक्रामक अभियान को रोक दिया था। 2021 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर टीएमसी ने दबदबा दिखाया था। मुर्शिदाबाद की 22 में से 20 सीटों पर टीएमसी जीती, दो सीटें बीजेपी को मिलीं। कांग्रेस और लेफ्ट का खाता नहीं खुला। मालदा की 12 सीटों में टीएमसी ने आठ और बीजेपी ने चार सीटें जीतीं। उत्तर दिनाजपुर में टीएमसी को सात और बीजेपी को दो सीटें मिलीं। बीरभूम की 11 में से 10 सीटें टीएमसी ने जीतीं, एक बीजेपी के पास गई। दक्षिण 24 परगना की 31 में से 30 सीटों पर टीएमसी ने जीत दर्ज की।


    भाजपा के लिए यह दीवार अभेद्य क्यों?

    भाजपा के लिए ये मुस्लिम बहुल सीटें एक दीवार की तरह काम करती हैं। 2021 में, 30% से अधिक मुस्लिम आबादी वाली इन सीटों पर भाजपा केवल एक सीट जीत सकी थी। इसके विपरीत, जिन सीटों पर मुस्लिम आबादी 10% तक थी, वहां भाजपा का ‘स्ट्राइक रेट’ 42% था (77 में से 33 सीटें जीतीं)। जैसे-जैसे मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ा, भाजपा का प्रदर्शन गिरता गया।

    2026: बहुकोणीय मुकाबला और वोटों के बिखराव का खतरा

    2026 का परिदृश्य 2021 के सीधे दो दलों के मुकाबले से पूरी तरह अलग और जटिल है। इस बार अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर टीएमसी के वोट बैंक में सेंधमारी के कई मोर्चे खुल गए हैं:

    वाम-आईएसएफ गठबंधन: वाम मोर्चे ने पीरजादा अब्बास सिद्दीकी की ‘इंडियन सेक्युलर फ्रंट’ (ISF) से गठबंधन किया है। 2026 में आईएसएफ को गठबंधन के तहत 30 सीटें आवंटित की गई हैं। आईएसएफ दक्षिण 24 परगना (जैसे भांगड़) में टीएमसी को सीधी चुनौती दे रही है।

    कांग्रेस का स्वतंत्र अभियान: दशकों बाद कांग्रेस बिना वामदलों के समर्थन के अकेले चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस का मुख्य लक्ष्य मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अपने पुराने गढ़ वापस पाना है (जैसे मालतीपुर में मौसमी नूर की उम्मीदवारी), जो टीएमसी के आधार में सीधे सेंध लगाएगी।

    एआईएमआईएम की एंट्री: उत्तर दिनाजपुर जैसे उर्दू/सुरजापुरी भाषी बेल्ट में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी आक्रामक प्रयास कर रही है।


    मार्जिन की राजनीति और भाजपा का गणित

    भाजपा को बंगाल जीतने के लिए इस मुस्लिम किले को भेदना होगा या हिंदू बहुल सीटों पर भारी बढ़त बनानी होगी। चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, यदि स्वतंत्र रूप से लड़ रही कांग्रेस या आईएसएफ इन अल्पसंख्यक सीटों पर केवल 5% से 10% वोटों का भी बिखराव करने में सफल होते हैं, तो टीएमसी का वोट शेयर कम हो जाएगा। इस त्रिकोणीय लड़ाई का सीधा गणितात्मक लाभ भाजपा को मिलेगा, जो अपने 38% के स्थिर बहुसंख्यक (हिंदू) वोट बैंक पर मजबूती से टिकी हुई है।


    क्या होगा इस बार?

    चुनाव आयोग के’विशेष सघन पुनरीक्षण (एआईआर) अभियान के कारण मतदाता सूची से नाम कटने और नागरिकता खोने के डर ने इस बार मुस्लिम बहुल सीटों पर 96% तक का अभूतपूर्व मतदान सुनिश्चित किया है। चाणक्य स्ट्रेटीजीज के एग्जिट पोल के अनुसार, 71% मुस्लिम मतदाता टीएमसी के साथ मजबूती से लामबंद दिख रहे हैं।

    अगर यह एकमुश्त मतदान वास्तविकता में परिवर्तित होता है, तो टीएमसी लगातार चौथी बार सरकार बना सकती है। लेकिन अगर कांग्रेस, आईएसएफ और अन्य दलों के कारण इस वोट बैंक में जरा भी सेंधमारी हुई है, तो चुनाव परिणाम एक त्रिशंकु विधानसभा की ओर बढ़ सकते हैं। ऐसे में, मालदा और मुर्शिदाबाद में कांग्रेस और आईएसएफ द्वारा जीती गई चंद सीटें अगली सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका निभाएंगी।

  • फाल्टा विधानसभा में दोबारा वोटिंग: डर, टकराव और आरोपों के बाद चुनाव आयोग का सख्त कदम

    फाल्टा विधानसभा में दोबारा वोटिंग: डर, टकराव और आरोपों के बाद चुनाव आयोग का सख्त कदम

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां मतदान प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया गया है। इस फैसले के तहत सभी 285 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान होगा, जिससे यह सीट राज्य की सबसे विवादित चुनावी सीटों में शामिल हो गई है।

    मामला तब और गंभीर हो गया जब मतदान के दौरान मतदाताओं को डराने-धमकाने, बूथों के अंदर अनधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी और मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने जैसे आरोप सामने आए। इन घटनाओं ने चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया और कई जगहों पर झड़प और अफरा-तफरी की स्थिति भी देखने को मिली।

    रिपोर्टों के अनुसार, मतदान के दिन कई बूथों पर हालात इतने बिगड़ गए कि मतदाता अपने मताधिकार का सही ढंग से उपयोग नहीं कर सके। कुछ स्थानों पर लोगों को वोट डालने से रोके जाने की शिकायतें भी सामने आईं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए। इसी आधार पर पूरे क्षेत्र में री-पोलिंग का निर्णय लिया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान चुनावी माहौल में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप भी तेज रहे। एक ओर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर सख्त रुख अपनाया गया, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जिससे तनाव और बढ़ गया।

    स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से भारी सुरक्षा बलों की तैनाती का निर्णय लिया गया है। दोबारा मतदान के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए अतिरिक्त निगरानी, वेबकास्टिंग और सूक्ष्म पर्यवेक्षण की व्यवस्था की जा रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

    स्थानीय स्तर पर यह मामला सिर्फ चुनावी विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक टकराव और शक्ति प्रदर्शन का केंद्र भी बन गया है। आरोपों और जवाबी आरोपों के बीच माहौल लगातार गरमाता गया, जिससे आम मतदाताओं में असहजता और चिंता का माहौल बन गया।

    अब जबकि सभी बूथों पर दोबारा मतदान की घोषणा हो चुकी है, प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बार प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और व्यवस्थित रहती है, ताकि मतदाताओं का भरोसा बहाल किया जा सके।

    फाल्टा की यह स्थिति यह दर्शाती है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी न केवल व्यवस्था को प्रभावित करती है, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर देती है। अब पूरा ध्यान इस बात पर है कि दोबारा मतदान में हालात कितने सुधरते हैं और क्या मतदाता बिना किसी डर के अपने अधिकार का उपयोग कर पाते हैं।

  • पश्चिम बंगाल में Exit Poll से BJP में उत्साह….. दलितों के साथ मुसलमानों का वोट भी मिला

    पश्चिम बंगाल में Exit Poll से BJP में उत्साह….. दलितों के साथ मुसलमानों का वोट भी मिला


    कोलकाता।
    ज्यादातर एग्जिट पोल्स (Exit Polls) में इस बार पश्चिम बंगाल (West Bengal) में भाजपा (BJP) की जीत का अनुमान लगाया गया है। गुरुवार को सामने आए टुडेज चाणक्य के एग्जिट पोल (Todays Chanakya Exit Poll) में भाजपा को बंपर जीत मिलती दिख रही। बीजेपी को 192 तो टीएमसी (TMC) को 100 सीटें मिल सकती हैं। दोनों के बीच 10 फीसदी वोट शेयर का अंतर रह सकता है। सर्वे में दावा किया गया है कि इस बार भाजपा को पश्चिम बंगाल में मुसलमानों का भी वोट मिल रहा, जबकि 67 फीसदी दलित भी भाजपा पर भरोसा जता रहे।

    टुडेज चाणक्य एग्जिट पोल के अनुसार, भाजपा को आठ फीसदी मुस्लिम वोट मिल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस को 71 फीसदी वोट मुस्लिमों का मिल सकता है। 67 फीसदी दलित वोट भाजपा को, जबकि 22 फीसदी टीएमसी को मिलने का अनुमान है। 61 फीसदी ओबीसी वोट भाजपा के खाते में जा सकते हैं, जबकि 27 फीसदी वोट टीएमसी को मिल सकता है। 53 फीसदी एसटी वोट भाजपा को और 40 फीसदी टीएमसी को मिल सकता है। वहीं, इसमें तीन फीसदी प्लस माइनस मार्जिन दिया गया है।

    भाजपा 48 फीसदी वोटों के साथ इस बार राज्य में 192 सीटें जीत सकती है। इसमें मार्जिन 11 सीटों का दिया गया है, जबकि तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा सकता है। ममता बनर्जी की पार्टी महज 100 सीटों पर सिमट सकती है। उसे 38 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है। वहीं, 14 फीसदी वोट अन्य के खाते में जा सकते हैं, जोकि सीटों में कन्वर्ट होकर दो होंगे। इसमें भी मार्जिन दो का रखा गया है।


    ममता ने उठाए एग्जिट पोल पर सवाल

    ममता बनर्जी ने विभिन्न एग्जिट पोल्स पर सवाल उठाते हुए टीएमसी की बड़ी जीत का दावा किया। बनर्जी ने भरोसा जताया कि चार मई को बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद TMC ही सरकार बनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी गिनती के दौरान किसी भी तरह का खेल नहीं होने देगी। बनर्जी ने एक वीडियो संदेश में कहा, “एग्जिट पोल भाजपा के दफ्तर से आए हैं। ये आंकड़े मनगढ़ंत हैं, जिनका मकसद TMC कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराना है।”

    ज्यादातर बंगाल एग्जिट पोल्स में भाजपा की जीत का अनुमान है। मैट्रिज के अनुसार, टीएमसी को 125-140 सीटें मिल सकती हैं, जबकि भाजपा 146-161 सीटें जीत सकती है। इसके अलावा, पी मार्क्यू के अनुसार, भाजपा को 150-175 सीटें, टीएमसी को 118-138 सीटें मिल सकती हैं। पोल डायरी के अनुसार, भाजपा 142-171 और टीएमसी 99-127 सीटें जीत सकती है। वहीं, पीपुल्स पल्स एग्जिट पोल ने बताया है कि टीएमसी की जीत होगी और उसे 177-187 सीटें मिल सकती हैं। भाजपा को 95-110 सीटें मिलेंगी।

  • पश्चिम बंगाल में गरजे मोदी, घुसपैठियों को दी चेतावनी…… बोले- दूसरे फेज से पहले देश छोड़ दो वरना….

    पश्चिम बंगाल में गरजे मोदी, घुसपैठियों को दी चेतावनी…… बोले- दूसरे फेज से पहले देश छोड़ दो वरना….


    कोलकाता।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने रविवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के दूसरे चरण के मतदान से पहले घुसपैठियों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मैं घुसपैठियों को चेतावनी देता हूं कि वे बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले देश को छोड़ दें, वरना परिणाम आने के बाद उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल चुनाव के पहले चरण में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) का अहंकार चकनाचूर हो गया, दूसरे चरण में भाजपा की जीत सुनिश्चित होगी।

    पीएम मोदी ने चुनावी रैली में कहा, ”तृणमूल कांग्रेस के शासन में छोटे से छोटा नेता और गुंडे भी खुद को सरकार समझते हैं। भाजपा को वोट दीजिए, मैं आपको तृणमूल कांग्रेस के ‘महा जंगलराज’ से मुक्ति दिलाऊंगा। तृणमूल कांग्रेस की ‘निर्मम सरकार’ बंगाल की महिलाओं पर अत्याचार करने वाले गुंडों के साथ खड़ी है। अब यह कहने का समय आ गया है कि इसे और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”संदेशखलि के पीड़ित एवं आर जी कर अस्पताल की पीड़िता की मां को चुनाव में टिकट देने के फैसले में बंगाल की महिलाओं के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता झलकती है। बंगाल की नई भाजपा सरकार महिलाओं के साथ बलात्कार और उन्हें प्रताड़ित करने वाले बदमाशों को चार मई के बाद न्याय के कठघरे में लाएगी।” वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि मैं मतुआ नामशुद्र समुदाय के सदस्यों के समक्ष यह प्रतिज्ञा करता हूं कि उन्हें सीएए के माध्यम से नागरिकता प्राप्त होगी।

    इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार राज्य सचिवालय से नहीं बल्कि पार्टी द्वारा संरक्षित गुंडों और अपराधियों द्वारा चलाई जा रही है। चुनाव प्रचार समाप्त होने से एक दिन पहले, हुगली जिले के आरामबाग में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार चलाने के लिए टीएमसी की ”असामाजिक तत्वों पर निर्भरता” के कारण अक्सर कलकत्ता उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा है। मोदी ने कहा, ”टीएमसी की ‘निर्मम सरकार’ नबान्न (राज्य सचिवालय) से नहीं चलती। इसे गुंडे और अपराधी चलाते हैं, और सरकार को पटरी पर लाने के लिए उच्च न्यायालय और देश की शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी है।”

    उन्होंने वादा किया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने पर पहली कैबिनेट बैठक में केंद्र की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के कार्यान्वयन को मंजूरी दी जाएगी। ममता बनर्जी प्रशासन की विश्वसनीयता ”पूरी तरह से खत्म” होने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री ने दावा किया कि केवल भाजपा ही ऐसी सरकार बना सकती है जो राज्य के लोगों को न्याय और सुरक्षा प्रदान करेगी। राज्य के आलू किसानों की ”दुर्दशा” के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि टीएमसी सरकार से जुड़ा ‘सिंडिकेट राज’ उपज को कम दाम पर खरीदकर कहीं और ऊंचे दाम पर बेचता है। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि टीएमसी के शासनकाल में राज्य भर में महिलाओं के खिलाफ हिंसक अपराध अपने चरम पर पहुंच गए। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर ”अपराधियों को संरक्षण देने” का आरोप लगाया, जिसके चलते अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।

  • लिकर लॉकडाउन से कारोबार को बड़ा झटका, 1400 करोड़ तक नुकसान का अनुमान, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़े

    लिकर लॉकडाउन से कारोबार को बड़ा झटका, 1400 करोड़ तक नुकसान का अनुमान, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़े

    नई दिल्ली।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के चलते लागू की गई शराबबंदी ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान लगाए गए इस प्रतिबंध को लेकर सत्ताधारी दल और चुनावी व्यवस्था से जुड़े निर्णयों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। इस फैसले ने न केवल राजनीतिक बहस को तेज किया है बल्कि राज्य के कारोबारी वर्ग पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    निर्णय के अनुसार राज्य में शराब की बिक्री और परोसने पर 20 अप्रैल से लेकर 29 अप्रैल तक अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध लागू किया गया है। इस अवधि में कुल मिलाकर लगभग साढ़े नौ दिन तक शराब की बिक्री पर रोक रहेगी। मतदान के चरणों और मतगणना के आसपास के समय को देखते हुए यह प्रतिबंध लागू किया गया है, हालांकि बीच में कुछ दिनों के लिए सीमित राहत भी दी गई है।

    इस फैसले का असर राज्य के व्यापारिक ढांचे पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है। अनुमान के अनुसार इस अवधि में सरकार को लगभग 1400 करोड़ रुपये तक के राजस्व नुकसान की संभावना है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राज्य की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला बताया जा रहा है। पूरे राज्य में हजारों की संख्या में शराब की दुकानें और बार संचालित होते हैं, जिनका दैनिक कारोबार करोड़ों रुपये में होता है। ऐसे में लंबे समय तक पाबंदी से कारोबार ठप होने की स्थिति बन गई है।

    इस निर्णय का असर केवल शराब उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। खासकर वे व्यवसाय जो बार और खाद्य सेवाओं पर निर्भर हैं, उन्हें ग्राहकों की कमी और बिक्री में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है।

    शराब कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले से ही स्टॉक और बिक्री को लेकर कई तरह की पाबंदियां लागू थीं और अब लंबे समय की बंदी से उनका व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा। उनका यह भी कहना है कि अलग-अलग चरणों में लागू नियमों के कारण स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।

    वहीं इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सत्ताधारी दल के नेताओं का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया के नाम पर ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं जो आम जनता और छोटे कारोबारियों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। उनका कहना है कि यह निर्णय राजनीतिक रूप से प्रभावित प्रतीत होते हैं और इसका असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।

    दूसरी ओर विपक्षी दलों का कहना है कि यह प्रतिबंध निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।

     पश्चिम बंगाल में लागू यह शराबबंदी अब केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं रह गई है बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। इससे जहां एक ओर राज्य का राजस्व प्रभावित होने की आशंका है, वहीं दूसरी ओर चुनावी माहौल और भी अधिक गर्म हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती नई दिल्ली।

  • बंगाल में बदलाव की हुंकार सीएम मोहन यादव बोले जंगलराज से मुक्ति दिलाएगी भाजपा

    बंगाल में बदलाव की हुंकार सीएम मोहन यादव बोले जंगलराज से मुक्ति दिलाएगी भाजपा

    कोलकाता/भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में जोरदार चुनाव प्रचार किया। उन्होंने कमरहाटी क्षेत्र के वार्ड 24 और 112 में घर घर पहुंचकर लोगों से मुलाकात की और दुकानों पर जाकर आम नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में बदलाव और विकास के नाम पर भाजपा को समर्थन देने की अपील की।

    कोलकाता में जनसंपर्क अभियान के दौरान डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अब पश्चिम बंगाल की जनता ठहराव नहीं बल्कि विकास चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य विकास की दौड़ में पीछे छूटता जा रहा है जबकि देश के अन्य राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार बंगाल को फिर से प्रगति के रास्ते पर लाने के लिए भाजपा की सरकार बनना जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि बंगाल अब जंगलराज से मुक्ति चाहता है और यहां की जनता बदलाव के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आगामी चुनाव में जनता प्रचंड बहुमत से भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में लाने का मन बना चुकी है। उन्होंने भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल को विकास और समृद्धि का प्रतीक बताते हुए लोगों से इसे चुनने का आग्रह किया।

    इस दौरान उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का भी जिक्र किया और कहा कि देश के कई राज्यों में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। मध्यप्रदेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां भी विकास की गति लगातार बढ़ी है और इसी मॉडल को बंगाल में भी लागू किया जा सकता है।

    जनसंपर्क के दौरान मुख्यमंत्री ने स्थानीय नागरिकों की समस्याएं भी सुनीं और भरोसा दिलाया कि भाजपा की सरकार बनने पर जनकल्याण योजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षाओं को पूरा करना ही उनकी प्राथमिकता है और इसके लिए मजबूत और स्थिर सरकार जरूरी है।

    डॉ. मोहन यादव का यह दौरा दो दिनों का बताया जा रहा है जिसमें वे विभिन्न क्षेत्रों में जनसभाएं और संपर्क अभियान चला रहे हैं। राजनीतिक रूप से यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए भाजपा बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

  • ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल

    ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राज्य को तीन हिस्सों में बांटने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों को बिहार और ओडिशा में मिलाने की योजना है, जिससे बंगालियों को परेशान किया जाएगा।

    परिसीमन के जरिए राज्य विभाजन का आरोप
    बांकुरा जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा परिसीमन विधेयक के जरिए पश्चिम बंगाल की सीमाओं में बदलाव करना चाहती है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से राज्य के कुछ हिस्सों का दूसरे राज्यों में विलय किया जा सकता है।

    केंद्रीय बलों पर महिलाओं के अपमान का आरोप
    मुख्यमंत्री ने चुनाव के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।

    टीएमसी सरकार गिराने के लिए ‘1000 करोड़ की साजिश’ का दावा
    ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील करने का आरोप लगाया। उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के एक वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भाजपा नेताओं से संपर्क और अल्पसंख्यक वोटों को बांटने की बात सामने आई है।

    SIR को बताया ‘देश का सबसे बड़ा घोटाला’
    मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को हाल के समय का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो केंद्र के सभी जनविरोधी कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा।

    सत्ता परिवर्तन का दावा
    ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि 2026 में केंद्र सरकार सत्ता से बाहर हो जाएगी। इसके बाद नई सरकार जनहित में फैसले लेगी और मौजूदा नीतियों में बदलाव किया जाएगा।