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  • बंगाल में CAA लागू करने के लिए मोदी सरकार ने बनाई विशेष समिति, विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम

    बंगाल में CAA लागू करने के लिए मोदी सरकार ने बनाई विशेष समिति, विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम



    कोलकाता। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह कदम 2024 में अधिसूचित CAA नियमों के तहत बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    समिति का काम अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों के नागरिकता आवेदन की जांच और मंजूरी देना है। यह सुनिश्चित करेगी कि सभी आवेदन पूरी तरह से सही हों और आवेदक नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6B के अनुसार पात्र हों।

    समिति में शामिल अधिकारी
    केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार समिति का गठन इस प्रकार हुआ है:
    अध्यक्ष: डिप्टी रजिस्ट्रार जनरल, जनगणना कार्य निदेशालय, पश्चिम बंगाल

    प्रमुख सदस्य:
    सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) का उप सचिव स्तर का अधिकारी
    क्षेत्रीय विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRRO) द्वारा नामित अवर सचिव स्तर का अधिकारी
    राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), पश्चिम बंगाल का अवर सचिव स्तर का अधिकारी
    पश्चिम बंगाल के पोस्ट मास्टर जनरल या उनके द्वारा नामित डाक अधिकारी

    विशेष आमंत्रित सदस्य:
    पश्चिम बंगाल सरकार का प्रमुख सचिव (गृह) या अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) कार्यालय का प्रतिनिधि
    रेलवे के क्षेत्रीय मंडल रेल प्रबंधक (DRM) का प्रतिनिधि

    नागरिकता पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
    नियम 11A के तहत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के लोग जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए थे, नागरिकता के लिए पात्र हैं। इन आवेदकों को अपना आवेदन इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करना होगा।

    राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और मतुआ समुदाय
    यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में संवेदनशील है।

    मतुआ समुदाय: बांग्लादेश से आए लाखों मतुआ और बंगाली हिंदू लंबे समय से भारतीय नागरिकता की प्रतीक्षा कर रहे हैं और यह उनका बड़ा वोट बैंक है।

    टीएमसी का रुख: सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) का कहना है कि CAA लागू होने से मतुआ समुदाय के वोटिंग अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी ने समुदाय से CAA शिविरों से दूर रहने की अपील की है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया है कि वह बंगाल में CAA लागू नहीं होने देंगी।

    गृह मंत्रालय का उद्देश्य इस सशक्त समिति के माध्यम से पश्चिम बंगाल में CAA से जुड़ी भ्रम और लंबित आवेदनों के गतिरोध को दूर करना है।

  • देश की जेन-जी को भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा: पीएम मोदी

    देश की जेन-जी को भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा: पीएम मोदी


    नई दिल्ली। मालदा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मालदा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस सपने को साकार करने में पूर्वी भारत की भूमिका सबसे अहम है और अब यह क्षेत्र तेजी से विकास की राजनीति को अपना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों तक पूर्वी भारत को नफरत भ्रम और तुष्टिकरण की राजनीति में उलझाकर रखा गया जिससे यहां विकास की रफ्तार धीमी रही। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं और जनता विकास सुशासन और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रही है। पीएम मोदी ने दावा किया कि देश की जेन-जी भाजपा के विकास मॉडल पर सबसे ज्यादा भरोसा कर रही है क्योंकि युवा वर्ग को अवसर रोजगार और स्थायी भविष्य चाहिए।पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राजनीतिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा में पहली बार भाजपा सरकार बनी है त्रिपुरा कई वर्षों से भाजपा पर भरोसा जता रहा है और असम में लगातार पार्टी को मजबूत जनसमर्थन मिल रहा है। हाल ही में बिहार में भी भाजपा-एनडीए की सरकार बनी है। उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल में भी सुशासन की बारी है।

    पीएम मोदी ने दावा किया कि जहां-जहां वर्षों तक भाजपा को लेकर गलत जानकारी फैलाई गई वहां भी अब लोग सच्चाई समझ रहे हैं और पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस बार बंगाल की जनता भी भाजपा को विजयी बनाएगी।प्रधानमंत्री ने हालिया शहरी निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा को ऐतिहासिक जीत मिली है। खासतौर पर मुंबई की बृहन्मुंबई नगर निगमबीएमसी में पहली बार भाजपा को रिकॉर्ड सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि जिन जगहों पर कभी भाजपा की जीत को असंभव माना जाता था वहां भी अब अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है। पीएम मोदी ने यह भी बताया कि केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में भाजपा का मेयर बनना देश की बदलती राजनीतिक सोच का संकेत है।

    विपक्ष पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल के हर गरीब परिवार को पक्का घर मिले और केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ आम लोगों तक पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार केंद्र से भेजे गए गरीबों के पैसे का सही इस्तेमाल नहीं होने दे रही है।आयुष्मान भारत योजना का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल देश का एकमात्र राज्य है जहां यह योजना लागू नहीं की गई है। इससे गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा है और इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है।

    प्रधानमंत्री ने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना पर भी बात की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत देशभर में लाखों परिवारों ने अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बिल शून्य किया है और इसके लिए केंद्र सरकार ने हजारों करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल के लाखों परिवार भी इसका लाभ उठाएं लेकिन राज्य सरकार इस दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है।मालदा और पश्चिम बंगाल के विकास को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार बनने पर किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा किए जाएंगे। उन्होंने मालदा की ‘मैंगो इकोनॉमी’ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का वादा किया।

    जूट किसानों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि 2014 से पहले जूट का समर्थन मूल्य करीब 2400 रुपये था जो अब बढ़कर साढ़े 5500 रुपये से अधिक हो गया है। पहले दस वर्षों में जूट किसानों को केवल 400 करोड़ रुपये मिले थे जबकि पिछले 11 वर्षों में यह राशि बढ़कर 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुकी है। पीएम मोदी ने कहा कि यह बदलाव भाजपा की किसान-हितैषी नीतियों का प्रमाण है।

  • Nipah Virus Alert: बंगाल में हाई अलर्ट, 21 दिन का क्वारंटाइन अनिवार्य, सख्त गाइडलाइन जारी

    Nipah Virus Alert: बंगाल में हाई अलर्ट, 21 दिन का क्वारंटाइन अनिवार्य, सख्त गाइडलाइन जारी



    कोलकाता।
      निपाह वायरस के खतरे को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए कड़े और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह गाइडलाइन विशेषज्ञ डॉक्टरों की पांच सदस्यीय टीम द्वारा तैयार की गई है, जिसमें मरीजों, संदिग्धों, उनके संपर्क में आए लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अलग-अलग प्रोटोकॉल तय किए गए हैं।

    दिशानिर्देशों के अनुसार, निपाह संक्रमित या संदिग्ध मरीज के रक्त, लार, शरीर के तरल पदार्थ या छींक-खांसी की बूंदों के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को कम से कम 21 दिनों तक होम क्वारंटाइन में रहना अनिवार्य होगा।

    बंद या सीमित स्थान में संक्रमित व्यक्ति के साथ समय बिताने वालों को हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा जाएगा और उनकी कड़ी निगरानी की जाएगी।

    होम क्वारंटाइन में सख्त निगरानी
    क्वारंटाइन में रह रहे लोगों को दिन में दो बार स्वास्थ्य जांच करानी होगी। यदि बुखार, सिरदर्द, उलझन, खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा। ऐसे मरीजों को सीधे आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा ताकि संक्रमण आगे न फैले।

    कपड़े और वस्तुएं भी बन सकती हैं खतरा
    स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि संक्रमित मरीज के कपड़ों या उपयोग में लाई गई वस्तुओं के संपर्क में आने पर भी व्यक्ति को 21 दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा।

    मरीजों की देखभाल करने वाले लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को मास्क और पीपीई किट पहनकर ही काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

    दवा और जांच को लेकर अहम निर्देश
    निपाह वायरस की कोई पक्की दवा अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बिना लक्षण वाले लोगों को एहतियातन एंटीवायरल दवा दी जाएगी, जबकि लक्षण दिखने पर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर दो वैकल्पिक एंटीवायरल दवाओं से इलाज किया जाएगा।

    निपाह संक्रमण की पुष्टि के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट अनिवार्य किया गया है और रिपोर्ट लगातार निगरानी में रखी जाएगी।

    स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अलग नियम
    यदि कोई स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित मरीज के संपर्क में आता है लेकिन उसमें लक्षण नहीं हैं, तो वह पीपीई किट और मास्क पहनकर काम जारी रख सकता है। ऐसे स्वास्थ्यकर्मियों को क्वारंटाइन की जरूरत नहीं होगी, लेकिन उन्हें लगातार दो सप्ताह तक एंटीवायरल दवा लेने के निर्देश दिए गए हैं।

    राज्य सरकार ने आम लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सावधानी और सतर्कता जरूर बरतें। निपाह वायरस को फैलने से रोकने के लिए जारी किए गए ये कदम समय रहते संक्रमण की चेन तोड़ने में अहम साबित हो सकते हैं।

  • प. बंगाल में चुनावी हलचल… जहां ममता बनर्जी का सियासी उदय हुआ… वहां अब PM मोदी की रैली

    प. बंगाल में चुनावी हलचल… जहां ममता बनर्जी का सियासी उदय हुआ… वहां अब PM मोदी की रैली


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इस साल विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) है. चुनाव को लेकर सियासी हलचल बढ़ गई है. बंगाल की सियासत एक बार फिर उसी जगह पर आ गई है, जहां से कभी ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का सियासी उदय हुआ था. जी हां, सिंगूर (Singur) में पीएम मोदी (PM Modi) की रैली होने वाली है. यहीं से भाजपा को उम्मीद की किरण दिख रही है. सिंगूर वही जगह है, जहां कभी टाटा नैनो की फैक्ट्री हुआ करती थी. अब भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 जनवरी को होने वाली रैली के लिए इसी जगह को चुना है. पीएम मोदी की रैली से यहां के लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं।

    बात अक्टूबर 2008 की है. पश्चिम बंगाल के सिंगूर में करीब 1000 एकड़ उपजाऊ जमीन पर एक अजीब सी खामोशी छा गई. यह खामोशी टाटा ग्रुप के तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा की एक नाटकीय घोषणा के बाद आई थी. वह घोषणा थी टाटा के नैनो कार प्रोजेक्ट से जुड़ी. जी हां, खराब कारोबारी माहौल का हवाला देते हुए टाटा ने नैनो कार प्रोजेक्ट को सिंगूर से गुजरात के सानंद में शिफ्ट करने की घोषणा की. तब टाटा ने एक अच्छा एम (गुड एम) और एक बुरा एम (बैड एम) का जिक्र किया था. टाटा की नजर में शायद इसका अर्थ था बुरा एम मतलब ममता बनर्जी और अच्छा एम मतलब गुजरात के तब के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी. उन्होंने कहा था कि उनके सिर पर बंदूक तान दी गई थी और ट्रिगर दबा दिया गया था.

    अठारह साल बाद भी सिंगूर की वह जमीन ज्यादातर बंजर पड़ी है. खेती वापस शुरू नहीं हुई है. और सिंगूर एक प्रतीक बना हुआ है- खोए हुए मौके, राजनीतिक टकराव और अधूरे वादों का. दरअसल, सिंगूर विवाद के दौरान रतन टाटा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण पश्चिम बंगाल से टाटा मोटर्स का नैनो प्लांट हटाने का फैसला किया था. यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में भूमि अधिग्रहण और ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए किसान आंदोलन से जुड़ा था. इसी के बाद टाटा समूह को प्लांट गुजरात ले जाना पड़ा.


    सिंगूर के किसानों का दुख

    आज इस जमीन के ज़्यादातर हिस्से पर खेती के कोई निशान नहीं दिखते। जिन्होंने अपनी मर्जी से और बिना मर्ज़ी के ज़मीन दी थी, जिनकी जिंदगी सिंगूर आंदोलन से बदल गई थी. सिंगूर के रहने वाले कौशिक बाग अब 60 के दशक में हैं. उन्होंने बताया कि वह अपनी मर्ज़ी से जमीन देने वाले किसान थे. उन्होंने टाटा फैक्ट्री के लिए सरकार को छह बीघा जमीन दी थी. उन्होंने उस समय तीन महीने की ट्रेनिंग भी ली थी, इस उम्मीद में कि उन्हें रोजगार मिलेगा. लेकिन कुछ नहीं हुआ.


    जमीन मिली मगर अब खेती लायक नहीं

    हालांकि जमीन आखिरकार वापस मिल गई. कौशिक कहते हैं कि अब वह खेती के लायक नहीं रही. 18 साल की रुकावट के बाद अब उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा से बदलाव आ सकता है. हालांकि, कौशिक बाग अकेले नहीं हैं. श्यामापदो दास कहते हैं कि वह बिना मर्जी के जमीन देने वाले किसान थे, जिन्होंने तीन बीघा जमीन दी थी. उन्होंने आंदोलन के दौरान मीटिंग और रैलियों में हिस्सा लिया था, यह मानते हुए कि जमीन वापस मिल जाएगी और खेती फिर से शुरू हो जाएगी.


    सिंगूर की बंजर जमीन

    श्यामापदो दास आज कहते हैं कि खेतों में जंगली जानवर घूमते हैं और खेती असंभव है. पीछे मुड़कर देखें तो श्यामापदो का मानना​है कि सिंगूर एक राजनीतिक अखाड़ा बन गया था और आखिरकार किसानों के साथ धोखा हुआ. वहीं, स्वपन मित्रा कहते हैं कि उस समय उनके परिवार ने राजनीतिक आश्वासनों पर भरोसा किया था. स्वपन मित्रा के पिता ने एक बीघा जमीन दी थी.


    पीएम मोदी आने वाले हैं सिंगूर

    बहरहाल, इस इलाके को अब भी उम्मीद है, वह भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से. इस इलाके को आज भी स्थानीय लोग ‘टाटा की जमीन’ कहते हैं. आज उम्मीद एक अलग रूप में वापस आई है. कारण कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिंगूर आने वाले हैं. कई निवासियों के लिए, इस दौरे से पुनरुद्धार, पहचान और एक संभावित नई शुरुआत की उम्मीदें जुड़ी हैं।


    क्या है सिंगूर विवाद?

    कोलकाता से करीब 40 किलोमीटर दूर सिंगूर में नैनो परियोजना के लिए सरकार ने कुल 997.11 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था. मगर तृणमूल कांग्रेस और किसानों के संगठन कृषि जमीं जिबिका रक्षा कमेटी (केजेजेआरसी) का कहना था कि इसमें से 400 एकड़ जमीन किसानों से उनकी मर्जी के खिलाफ ली गई है, लिहाजा यह जमीन उन्हें लौटा दी जानी चाहिए. तब तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी इस मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गई थीं. इस दौरान हिंसा भी हुई थी. प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित रूप से संयंत्र के कर्मचारियों को डराए-धमकाए जाने की वजह से टाटा मोटर्स ने संयंत्र में कामकाज बंद कर दिया. बाद में टाटा ने नैनो प्रोजेक्ट को गुजरात शिफ्ट कर दिया. तब ममता बनर्जी विपक्ष में थीं।

  • SIR प्रक्रिया से डर या प्रशासनिक दबाव? ममता बनर्जी का दावा, 77 मौतें हो चुकीं

    SIR प्रक्रिया से डर या प्रशासनिक दबाव? ममता बनर्जी का दावा, 77 मौतें हो चुकीं


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR प्रक्रिया के कारण हुई मौतों के आरोप अब बढ़ते जा रहे हैं। राज्य के विभिन्न इलाकों से यह खबरें सामने आ रही हैं कि इस प्रक्रिया से जुड़े मानसिक दबाव और तनाव के कारण कुछ लोगों की मौत हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि SIR से जुड़ी चिंता के कारण राज्य में अब तक 77 मौतें हो चुकी हैं। उनके मुताबिक, यह स्थिति गंभीर होती जा रही है, और इससे लोगों के जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है।

    कोलकाता के विभिन्न हिस्सों और अन्य जिलों से सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि SIR के नोटिस मिलने के बाद मानसिक तनाव और चिंता की वजह से दो लोगों की मौत हो गई। इनमें से एक मामला उत्तर दिनाजपुर जिले के कालियागंज क्षेत्र का है जहां 50 वर्षीय लक्ष्मीकांत राय की सोमवार को अचानक मौत हो गई। उनके परिजनों का कहना है कि उन्हें हाल ही में SIR के तहत सुनवाई के लिए नोटिस मिला था जिसके बाद वे गहरे मानसिक दबाव में थे। राय के बेटे हीरू राय ने कहा नोटिस मिलने के बाद से पापा खाना-पीना छोड़ चुके थे और काम पर भी नहीं जा रहे थे। उन्हें डर था कि उनका नाम मतदाता सूची से हट सकता है और इस कारण उनका वोटिंग अधिकार छिन सकता है।

    दूसरी घटना उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट इलाके की है जहां अनीता बिस्वास नामक बुजुर्ग महिला की स्ट्रोक के कारण मौत हो गई। उनके परिवार का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के तहत सुनवाई में शामिल होने के बाद वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थीं। अनीता की मौत के बाद उनके बेटे काशीनाथ बिस्वास ने बताया कि उनकी मां का नाम 1995 की मतदाता सूची में था लेकिन 2002 की सूची में उनका नाम गायब था। 5 जनवरी को दस्तावेज जमा करने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से वह तनाव में रहने लगीं और अंतत स्ट्रोक के कारण उनकी मौत हो गई।

    इस पूरे मामले पर राजनीति भी गर्मा गई है। तृणमूल कांग्रेस के नेता निताई वैश्य ने चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया और इस प्रक्रिया को निरर्थक और दमनकारी बताया। वहीं बीजेपी युवा नेता गौरांग दास ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित करार दिया और कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक विरोध का हिस्सा है। पुलिस ने बताया कि इन मौतों का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा, लेकिन फिलहाल प्रशासन इस मुद्दे को लेकर कोई ठोस कदम उठाने में विफल नजर आ रहा है।

    कोलकाता में बूथ लेवल ऑफिसर कर्मचारियों ने भी प्रदर्शन किया है और आरोप लगाया है कि अत्यधिक काम के दबाव के कारण कई कर्मचारियों की भी मौत हो चुकी है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़पों की भी खबरें आईं। इसने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है और सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह प्रशासनिक प्रक्रिया आम नागरिकों पर अत्यधिक दबाव डाल रही है।

  • पश्चिम बंगाल: हुगली में नाबालिग से दरिंदगी, TMC नेता समेत दो गिरफ्तार; सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

    पश्चिम बंगाल: हुगली में नाबालिग से दरिंदगी, TMC नेता समेत दो गिरफ्तार; सुरक्षा पर फिर उठे सवाल


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के हुगली जिले से एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक बंद पड़ी फैक्ट्री के भीतर 16 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि राज्य की सियासत में भी उबाल ला दिया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस TMC का स्थानीय युवा नेता बताया जा रहा है।

    पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार यह वीभत्स घटना गुरुवार शाम की है जब उत्तरपाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बंद पड़ी हिंद मोटर फैक्ट्री के परिसर में पीड़िता अपनी एक सहेली के साथ गई थी। आरोप है कि वहाँ आरोपियों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर नाबालिग को बंधक बनाया और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में जांच शुरू की गई। शनिवार को पुलिस ने बताया कि इस मामले में पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दीपांकर अधिकारी उर्फ सोनाई और एक अन्य नाबालिग के रूप में हुई है।

    दीपांकर अधिकारी इलाके में टीएमसी का सक्रिय युवा चेहरा माना जाता है। वहीं दूसरा आरोपी कथित तौर पर पीड़िता का पूर्व परिचित बताया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भाजपा की वरिष्ठ नेता और विधायक अग्निमित्रा पॉल ने ममता बनर्जी सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि बंगाल में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। पॉल ने दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि एक महिला मुख्यमंत्री के शासन में इस तरह की आपराधिक गतिविधियां आम हो गई हैं।
    उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त सजा की मांग की है।दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले में खुद को कानून के साथ खड़ा बताया है। स्थानीय टीएमसी नेता निताई दासगुप्ता ने स्वीकार किया कि गिरफ्तार आरोपी उनकी पार्टी का सदस्य है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी तरह के अपराध का समर्थन नहीं करती। उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से आरोपी को तुरंत निष्कासित करने की मांग की है। टीएमसी नेता अजय शंकर ने भी दोहराया कि कानून अपना काम करेगा और जो भी दोषी होगा उसे कड़ी सजा भुगतनी होगी। फिलहाल पुलिस अन्य फरार संदिग्धों की तलाश में जुटी है और इलाके में तनाव को देखते हुए सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

  • मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र

    मेसी इवेंट विवाद में नया मोड़; पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास का इस्तीफा मुख्यमंत्री को भेजा पत्र


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार में खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने हाल ही में कोलकाता में हुए लियोनेल मेसी के GOAT टूर कार्यक्रम से जुड़ी घटनाओं को लेकर इस्तीफा दे दिया। मेसी के कार्यक्रम में कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुई अराजकता और तोड़फोड़ के बाद बिस्वास पर भारी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इस मुद्दे पर तनाव बढ़ने के बाद बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने खुद को खेल मंत्रालय की जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया।

    बिस्वास ने पत्र में कहा कि वे मेसी इवेंट की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। उनका यह कदम इस विवाद की गंभीरता को दर्शाता है और टीएमसी तृणमूल कांग्रेस पार्टी के लिए महत्वपूर्ण संदेश भेजता है खासकर आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बिस्वास के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है और अब खुद इस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने का निर्णय लिया है।

    इस विवाद के बाद राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल SIT का गठन किया है। SIT में चार वरिष्ठ आईपीएस अफसरों को शामिल किया गया है। मुख्य सचिव मनोज पंत ने बताया कि एसआईटी की जांच में कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में बिधाननगर के पुलिस उपायुक्त अनीश सरकार को निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही बंगाल के खेल सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और सॉल्ट लेक स्टेडियम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी के नंदन की सेवाएं वापस ले ली गई हैं।

    इस घटना के बाद टीएमसी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के विवाद या आलोचना से बचने के लिए पूरी तरह से पारदर्शी जांच करेगी। इस मामले में बिस्वास का इस्तीफा और जांच के आदेश इस बात का संकेत हैं कि ममता बनर्जी की सरकार आगामी चुनावों से पहले किसी भी तरह की अनावश्यक नकारात्मकता से बचना चाहती है। यह पूरा विवाद राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला सकता है जो आने वाले समय में चुनावी रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।

  • हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी को ठहराया मेसी के कोलकाता इवेंट में भगदड़ के लिए जिम्मेदारकहा गिरफ्तार हो राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त

    हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी को ठहराया मेसी के कोलकाता इवेंट में भगदड़ के लिए जिम्मेदारकहा गिरफ्तार हो राज्य के मुख्यमंत्री और पुलिस आयुक्त


    नई दिल्ली । लियोनेल मेसी के भारत दौरे के पहले दिन कोलकाता में आयोजित उनके कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने ममता बनर्जी की सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में वीआईपी कल्चर के चलते इस कार्यक्रम का संचालन सही तरीके से नहीं हो सकाजिससे अफरा-तफरी मच गई। सरमा ने यहां तक कहा कि राज्य के मुख्यमंत्रीगृहमंत्री और पुलिस आयुक्त को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

    सरमा ने आरोप लगाया कि बंगाल में ऐसे बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान भीड़ प्रबंधन की भारी नाकामी नजर आती है। उन्होंने कहा”दूसरे राज्यों में भीड़ को शांतिपूर्वक संभाला जाता हैलेकिन बंगाल में कुछ भी सुनिश्चित नहीं होता। यहां वीआईपी कल्चर का प्रभाव बहुत ज्यादा हैजो कार्यक्रमों को बर्बाद कर देता है।

    उनके अनुसारगुवाहाटी में गायक जुबिन गर्ग के निधन के बाद तीन दिनों तक 10 लाख लोग सड़कों पर थेलेकिन कोई हादसा नहीं हुआ। वहींमुंबई में विश्व कप फाइनल भी शांति से संपन्न हुआ था। सरमा ने कहा”बंगाल में कोई बड़ी घटना कभी भी घट सकती हैक्योंकि यहां हर चीज पर वीआईपी कल्चर हावी है।

    कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुए इस कार्यक्रम में हजारों प्रशंसक अपने पसंदीदा फुटबॉल आइकॉन मेसी की एक झलक पाने पहुंचे थे। लेकिन केवल 15 मिनट के कार्यक्रम के बाद मेसी वहां से चले गएजिससे दर्शकों में नाराजगी फैल गई। गुस्साए प्रशंसकों ने आयोजकों पर आरोप लगाते हुए पानी की बोतलें फेंकी। आयोजकों का कहना था कि कार्यक्रम लगभग 45 मिनट तक चलने वाला थालेकिन मेसी केवल 15 मिनट के बाद ही चले गए।

    इसके बाद प्रशंसकों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान टीएमसी नेताओं और वीआईपी लोगों के परिवारों ने मेसी को घेरे रखाजिससे आम दर्शकों को किसी भी प्रकार का सामान्य अनुभव नहीं मिला।हिमंत सरमा ने इस घटना की जिम्मेदारी राज्य सरकार की ठहराते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन सही ढंग से किया जाताअगर वहां पर कानून और व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जाता।

  • CAA से बाबरी तक, बंगाल में ध्रुवीकरण का सियासी खेल; इस चुनौती से कैसे निपटेगी TMC?

    CAA से बाबरी तक, बंगाल में ध्रुवीकरण का सियासी खेल; इस चुनौती से कैसे निपटेगी TMC?


    नई दिल्‍ली । सीएए से लेकर एनआरसी और एसआईआर से लेकर बाबरी तक पूरे पश्चिम बंगाल(West Bengal) का सियासी पारा हाई है. हिंदू-मुस्लिम (Hindu-Muslim)और बंगाली बनाम बाहरी(Bengalis versus outsiders) जैसे समीकरणों से इतर मुर्शिदाबाद जिले से निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir)के बाबरी प्लान ने बंगाल के चुनावी समर को दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा दिया है. इसी आधार पर दावा किया जा रहा है कि 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर होगी. 2019 में बीजेपी का मिशन बंगाल अधूरा रह गया था, इसलिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) हर हाल में सत्ता हासिल करना चाहती है.

    सीएए-एनआरसी और एसआईआर तक मुद्दे कई हैं…
    बीजेपी 10 सालों से आक्रामक होकर ममता बनर्जी को घेर रही है. एंटी इनकमबेंसी से इतर वो टीएमसी पर सनातन और हिंदुओं की अपेक्षा करने का आरोप लगाती आई है. ऐसे कुछ सवालों का जवाब ममता बनर्जी ने अपनी चुनावी रणनीति से दे चुकी हैं. बंगाल में मुसलमानों पर करम और हिंदुओं पर सितम करने जैसे आरोपों से जूझ रही टीएमसी सुप्रीमों ने ऐसे आरोप खारिज करने के लिए दुर्गा माता के मंत्र पढ़कर सुना चुकी हैं.

    सीएए, एनआरसी और बेटियों के बलात्कार और हत्या जैसे अपराधों यानी लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे पर भी बीजेपी टीएमसी को घेर रही है. कुल मिलाकर लाख टके का सवाल ये है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस नए ध्रुवीकरण वाले मुद्दे से कैसे निपटेंगी. बंगाल में 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं जो वामदलों की सफाए के बाद से टीएमसी को वोट करते आए हैं.

    टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर चुके हैं. हुमायूं ओवीसी की पार्टी एआईएमआईएम और अन्य दलों संग अलायंस करके चुनाव लड़ना चाह रहे हैं. ताकि बंगाल में किंग मेकर की भूमिका में आ सकें.

    पुराना कार्ड चलेगा?
    ध्रुवीकरण की कथित खेल को ध्यान में रखते हुए बीजेपी इस बार हर हाल में बंगाल में भगवा लहराना चाहती है. ये मुद्दा किसे फायदा करेगा और किसे बैकफायर करेगा इसका जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है. ममता बनर्जी और TMC हुमायूं कबीर को BJP की बी पार्टी बताकर काउंटर कर सकती हैं. वो पहले भी दावा करती रही हैं कि बीजेपी असदुद्दीन ओवैसी को मुसलमान वोटों का बंटवारा करने के लिए खड़ा करती है. ऐसे में चुनावी तारीखों का ऐलान होने से पहले ममता बनर्जी जनता से अपील कर रही हैं कि BJP को सत्ता से दूर रखने के लिए लोग केवल और केवल टीएमसी को चुने.

    SIR, पहचान की राजनीति और ‘बंगाली अस्मिता’
    TMC ध्रुवीकरण वाली चुनौती का सामना ‘बंगाली अस्मिता’ के कार्ड से कर सकती है. ये ‘ट्रंप’ कार्ड ‘दीदी’ का आजमाया हुआ नुस्खा है. 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने बड़े प्रभावी ढंग से इसका इस्तेमाल किया. बंगाली बनाम बाहरी का मुद्दा उठाकर अपना किला बचा चुकीं ममता बनर्जी अब शाकाहार और मांसाहार की जंग के सहारे नया नैरेटिव देने की कोशिश कर रही हैं.

    कुछ समय पहले भगवद्गीता पाठ के आयोजन स्थल के पास नॉनवेज बेचने पर एक शख्स के साथ मारपीट हुई थी. तब नैरेटिव गढ़ा गया कि बीजेपी देश को शाकाहार की ओर धकेल रही है, जो बहुलतावाद और बंगाल की पहचान के खिलाफ है. सूत्रों के मुताबिक एसआईआर और अन्य मुद्दों से मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ी है, जिससे उनके वोट टीएमसी के पक्ष में लामबंद हो सकते हैं. ऐसी खबरों के बीच सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा इसे लेकर कुछ कहना जल्दबाजी होगा.

  • छग के वरिष्ठ BJP नेता ने ताड़का’ और ‘सुरसा’ से की बंगाल की CM ममता बनर्जी की तुलना

    छग के वरिष्ठ BJP नेता ने ताड़का’ और ‘सुरसा’ से की बंगाल की CM ममता बनर्जी की तुलना


    रायपुर।
    छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party -BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर (Ajay Chandrakar) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) पर की गई टिप्पणी के लिए आलोचना की। उन्होंने बनर्जी की तुलना रामायण में वर्णित राक्षसी ‘ताड़का’ और ‘सुरसा’ से करते हुए कहा कि उनका राजनीतिक अंत निश्चित है। चंद्राकर ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि बनर्जी को भाजपा या उसके नेतृत्व के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

    जब उनसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की ओर से शाह पर की गई टिप्पणी के बारे में पूछा गया, तब उन्होंने कहा, ‘वह बंगाल के लिए ताड़का और सुरसा हैं। किसी देश के गृह मंत्री पर टिप्पणी करने से पहले सोचना चाहिए। बंगाल को उन्होंने (ममता ने) क्या दिया-यह सोचना चाहिए। माननीय गृह मंत्री ने कहा है कि घुसपैठिये इस देश का प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तय नहीं कर सकते। ममता जी धमकी नहीं दे सकतीं। वह जमाना लद गया। वह कांग्रेस को धमकी दे सकती हैं कि ‘इंडिया’ गठबंधन का नेतृत्व मैं करुंगी। भाजपा या भाजपा नेतृत्व को किसी तरह के अपशब्द कहने का उनको कोई अधिकार नहीं है। वह खुद ‘ताड़का’ और ‘सुरसा’ जैसी हैं, जिसका (राजनीतिक) वध निश्चित है।’

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 में होने वाले हैं। गुरुवार को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के कृष्णानगर में एक रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया था कि शाह मतदाता सूचियों से ‘डेढ़ करोड़ नाम’ हटाने की कोशिशों को सीधे तौर पर निर्देशित कर रहे हैं। ममता ने चेतावनी दी कि अगर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान एक भी पात्र मतदाता का नाम हटाया गया, तो वह अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ जाएंगी।

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘देश का गृहमंत्री खतरनाक है। उनकी आंखों में यह साफ दिखता है। एक आंख में ‘दुर्योधन’ दिखता है, और दूसरी में ‘दु:शासन’।’ बनर्जी ने आरोप लगाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले एसआईआर का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘वे वोटों के लिए इतने भूखे हैं कि उन्होंने अब एसआईआर शुरू कर दिया है। अगर किसी पात्र व्यक्ति का नाम कट गया, तो मैं तब तक धरना दूंगी, जब तक नाम जुड़ नहीं जाता। पश्चिम बंगाल में कोई निरुद्ध केंद्र नहीं बनेगा।’