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  • West Asia की जंग से दुनिया दो खेमों में विभाजित…. ट्रंप के सैन्य अभियान की घोषणा से गहरी हुई चिंता की लकीरें

    West Asia की जंग से दुनिया दो खेमों में विभाजित…. ट्रंप के सैन्य अभियान की घोषणा से गहरी हुई चिंता की लकीरें


    वॉशिंगटन।
    पश्चिम एशिया (West Asia) में भड़की भीषण जंग ने पूरी दुनिया को दो स्पष्ट कूटनीतिक ध्रुवों में विभाजित कर दिया है। शनिवार सुबह जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) के मिसाइल उद्योग (Missile Industry) व उसकी नौसेना को नेस्तनाबूद करने के लिए बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की, तो वैश्विक राजनीति की लकीरें और गहरी हो गईं। ईरान में हुए मिसाइल हमलों के बाद वाशिंगटन (Washington) ने इसे ईरानी शासन से खतरों को खत्म करने का मिशन बताया है। इस्त्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू (Israeli PM Benjamin Netanyahu) ने भी इसे अस्तित्व की रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे ईरानी जनता को अपना भाग्य खुद चुनने का अवसर मिलेगा। संघर्ष शुरू होने के बाद भारत के कश्मीर से लेकर जर्मनी व ब्रिटेन तक कहीं इसके विरोध तो कहीं पक्ष में प्रदर्शन हुए हैं।

    ईरान के हमले की कई इस्लामी देशों ने भी आलोचना की है और अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमले का समर्थन किया है। यूक्रेन, कतर, यूएई, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब आदि देशों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। यूएई ने ईरान के हमले को कायराना हरकत करार देते हुए जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही है, जबकि सऊदी अरब ने इसके गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। यूक्रेन ने भी इस तनाव के लिए सीधे तौर पर ईरान के आंतरिक दमन और हालिया महीनों में प्रदर्शनकारियों पर हुई हिंसा को जिम्मेदार ठहराया है।


    शांति की अपील वाले देश

    यूरोपीय संघ, जर्मनी, फ्रांस व ब्रिटेन ने ईरान से अंधाधुंध सैन्य कार्रवाई रोकने व वार्ता दोबारा शुरू करने की अपील की। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ब्रिटेन के पीएम कीर स्टारमर ने संयुक्त बयान में कहा, हम पश्चिम एशियाई देशों पर ईरानी हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। बेल्जियम ने कहा, ईरानी जनता अपनी सरकार के फैसलों की कीमत न चुकाए।


    रूस-चीन ईरान के पक्ष में

    कई ताकतवर देश ईरान के समर्थन में भी उतरे हैं। इनमें रूस, चीन, ओमान, तुर्किये व नॉर्वे शामिल हैं। रूस ने अमेरिका पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वाशिंगटन ने ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ता का इस्तेमाल केवल अपने सैन्य हमलों को छिपाने के लिए किया। रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा, शांतिदूत (ट्रंप) ने एक बार फिर अपना चेहरा दिखाया है। चीन ने भी सैन्य कार्रवाई तत्काल रोकने व ईरान की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की मांग की है।

    ब्राजील की सरकार ने ईरान में हमलों की कड़ी निंदा की और क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई। विदेश मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि ये हमले ऐसे समय में हुए, जब बातचीत की प्रक्रिया चल रही थी, जिसे शांति का एकमात्र व्यवहारिक रास्ता बताया गया। ब्राजील ने स्पष्ट किया कि विवादों के समाधान के लिए संवाद ही वैध और टिकाऊ माध्यम है।


    ईरान आतंक का प्रमुख स्रोत : कार्नी

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने पश्चिम एशिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और आतंक का मुख्य स्रोत है। उसे किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल करने या विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कार्नी ने कहा, ईरान का मानवाधिकार रिकॉर्ड दुनिया में सबसे खराब रिकॉर्डों में से एक है।

    कार्नी ने कहा, कनाडा और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदार लगातार ईरानी शासन से उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की अपील करते रहे हैं। उन्होंने कन्नानास्किस में हुए जी7 शिखर सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र की ओर से प्रतिबंधों की पुनः बहाली का भी उल्लेख किया। कार्नी ने मुंबई में नवाचार प्रदर्शनी में हिस्सा लिया और विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं से मुलाकात की। कार्नी ने शनिवार को मुंबई में भारत-कनाडा टैलेंट एंड इनोवेशन स्ट्रैटेजी की शुरुआत की।

  • दुनिया का सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाला देश… यहां 1 कप चाय से भी बेहद कम कीमत..

    दुनिया का सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाला देश… यहां 1 कप चाय से भी बेहद कम कीमत..


    नई दिल्ली।
    दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल (Cheapest Petrol) बेचने वाले देशों की लिस्ट में बड़े चौंकाने वाले तथ्य हैं। इन देशों में पेट्रोल की कीमत भारतीय नजरिए से न सिर्फ बहुत कम है, बल्कि कई में तो पेट्रोल की कीमत (Petrol-Price) भारत में बिकने वाले एक कप चाय (One Cup Tea) से भी सस्ती है। लीबिया (Libya) दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाला देश है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत मात्र 2.15 रुपये है। यानी कए कप चाय की कीमत में करीब 5 लीटर पेट्रोल यहां मिल रहा है। भारत के अधिकतर शहरों में एक कप चाय की कीमत 10 से 15 रुपये के बीच है।

    इस लिस्ट में ईरान दूसरे स्थान पर है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत केवल 2.59 रुपये है। जबकि, सबसे महंगा तेल हांगकांग में 340.53 रुपये लीटर है। यह जानकारी ग्लोबलपेट्रोलप्राइसेज डॉट कॉम के 9 फरवरी 2026 के आंकड़ों पर आधारित है।


    दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले टॉप-10 देश

    देश और पेट्रोल की अनुमानित कीमत (₹)
    1. लीबिया ₹2.15
    2. ईरान ₹2.59
    3. वेनेजुएला ₹3.17
    4. अंगोला ₹29.63
    5. कुवैत ₹30.98
    6. अल्जीरिया ₹32.89
    7. तुर्कमेनिस्तान ₹38.78
    8. मिस्र ₹40.65
    9. कजाकिस्तान ₹45.06
    10. कतर ₹46.02
    स्रोत: globalpetrolprices.com


    आज पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बदलाव नहीं

    अगर भारत की बात करें तो आज ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम जारी कर दी हैं। पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बदलवा नहीं हुआ है। देश में सबसे सस्ता पेट्रोल आज भी पोर्ट ब्लेयर में ₹82.46 प्रति लीटर और डीजल ₹78.05 प्रति लीटर है। बता दें मार्च 2024 में पेट्रोल-डीजल के दाम ₹2 प्रति लीटर घटाए गए थे। इसके बाद अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    भारत में सबसे सस्ता पेट्रोल बेचने वाले शहर
    पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹82.46 प्रति लीटर
    ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹90.87 प्रति लीटर
    सिलवासा, दादरा और नगर हवेली: ₹92.37 प्रति लीटर
    दमन, दमन और दीव: ₹92.55 प्रति लीटर
    हरिद्वार, उत्तराखंड: ₹92.78 प्रति लीटर
    रुद्रपुर, उत्तराखंड: ₹92.94 प्रति लीटर
    उना, हिमाचल प्रदेश: ₹93.27 प्रति लीटर
    देहरादून, उत्तराखंड: ₹93.35 प्रति लीटर
    नैनीताल, उत्तराखंड: ₹93.41 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल

    भारत में सबसे सस्ता डीजल बेचने वाले शहर
    पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹78.05 प्रति लीटर
    इटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹80.38 प्रति लीटर
    जम्मू, जम्मू और कश्मीर: ₹81.32 प्रति लीटर
    संबा, जम्मू और कश्मीर: ₹81.58 प्रति लीटर
    कठुआ, जम्मू और कश्मीर: ₹81.97 प्रति लीटर
    उधमपुर, जम्मू और कश्मीर: ₹82.15 प्रति लीटर
    चंडीगढ़: ₹82.44 प्रति लीटर
    राजौरी, जम्मू और कश्मीर: ₹82.64 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल

  • निमोनिया का खतरा बढ़ा, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में जानिए बचाव के उपाय

    निमोनिया का खतरा बढ़ा, खासकर बच्चों और बुजुर्गों में जानिए बचाव के उपाय



    नई दिल्ली। सर्दियों के शुरू होते ही निमोनिया का खतरा बढ़ जाता है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में। हर साल लाखों लोग निमोनिया से प्रभावित होते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। डॉ. सूर्यकान्त (विभागाध्यक्ष, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, केजीएमयू, लखनऊ) के अनुसार, निमोनिया की पहचान, बचाव और समय पर उपचार बहुत जरूरी है क्योंकि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में यह मृत्यु का प्रमुख कारण बन सकता है 
    निमोनिया में एक या दोनों फेफड़ों के हिस्सों में सूजन आ जाती है और उनमें पानी भरने लगता है। यह अधिकतर संक्रमण के कारण होता है, लेकिन केमिकल, एस्पिरेशन (गले/खाने की नली से फेफड़ों में सामग्री चला जाना) और अन्य कारणों से भी हो सकता है। इसके मुख्य कारण बैक्टीरिया, वायरस, फंगस और परजीवी रोगाणु हैं, जबकि टीबी भी निमोनिया का एक बड़ा कारण बन सकता है। समय पर सही इलाज न मिलने पर निमोनिया जानलेवा साबित हो सकता है और भारत में संक्रामक रोगों से होने वाली मौतों में लगभग 20% मौतें निमोनिया की वजह से होती हैं।

    निमोनिया किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में जोखिम अधिक रहता है, जैसे धूम्रपान, शराब, नशे की आदत वाले, डायलिसिस कराने वाले मरीज, हृदय/फेफड़े/लिवर की बीमारी वाले, मधुमेह, गंभीर गुर्दा रोग, बुजुर्ग, नवजात, कैंसर या एड्स के मरीज। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, बलगम, सीने में दर्द, सांस फूलना और कुछ मरीजों में दस्त, उल्टी, चक्कर, मतिभ्रम, भूख न लगना और जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं।

    डॉक्टर अक्सर खून की जांच, बलगम की जांच और छाती का एक्स-रे कराकर निमोनिया की पुष्टि करते हैं।

    निमोनिया तीन मुख्य रास्तों से फैलता है: खांसने या छींकने से श्वास मार्ग, अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती मरीजों में IV लाइन या पेसमेकर के माध्यम से खून के रास्ते, और एस्पिरेशन के जरिए जब मुंह या गले की सामग्री फेफड़ों में चली जाती है। इसलिए संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छता, मास्क, और सही उपचार जरूरी है।

    निमोनिया से बचाव संभव है।

    ठंड से बचें, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को गर्म कपड़े पहनाएं और बाहर कम समय बिताएं। शुगर और अन्य बीमारियों का नियंत्रण रखें और नियमित जांच करवाते रहें। 65 वर्ष से ऊपर या बीमार लोगों को न्यूमोकोकल और फ्लू वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए, क्योंकि ये टीके फेफड़ों के संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। अस्पताल में संक्रमण से बचने के लिए हाथों को सही तरीके से धोना, नेबुलाइजर और ऑक्सीजन उपकरणों का उचित स्टरलाइजेशन, एंडोट्रैकेल ट्यूब की सफाई और IV लाइन को नियमित बदलवाना आवश्यक है।
    नवजात और छोटे बच्चों को सर्दियों में नहलाने से बचाएं, बिना कपड़ों के खुले में न जाने दें, टीकाकरण और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें और उन्हें ठंड, धूल-धुएं और खांसी-जुकाम से दूर रखें। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं, हरी सब्जियां और फल खाएं, फास्ट फूड से बचें और योग व प्राणायाम करें। इन सावधानियों से आप निमोनिया के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
  • मंदी से जूझ रही दुनिया… मगर भारत ने मारी जबरदस्त छलांग.. जानें बंपर GDP ग्रोथ की असल कहानी!

    मंदी से जूझ रही दुनिया… मगर भारत ने मारी जबरदस्त छलांग.. जानें बंपर GDP ग्रोथ की असल कहानी!


    नई दिल्ली।
    दुनिया के प्रमुख देश (Worlds Major Countries) आर्थिक मंदी (Economic Recession) की मार से जूझ रहे हैं। अमेरिका (America) में ट्रंप की नई टैरिफ नीतियों (Trump’s new Tariff Policies) ने महंगाई को भड़का दिया है, यूरोप की अर्थव्यवस्था ठहराव की कगार पर है और चीन की विकास दर नीचे लुढ़क रही है। वैश्विक विकास दर 2025 में 2.3% तक गिरने का अनुमान है, जो 2008 की मंदी के बाद का सबसे कमजोर दौर हो सकता है। लेकिन इसी तूफान के बीच भारत (India) एक अलग ही रंग दिखा रहा है। जुलाई-सितंबर तिमाही (Q2 FY26) में GDP ग्रोथ 8.2% पर पहुंच गई। यह छह तिमाहियों का उच्चतम स्तर है। इसने पूर्वानुमानों (7.2%) को भी पीछे छोड़ दिया है। आइए, इस बंपर ग्रोथ की असली कहानी समझते हैं।


    वैश्विक मंदी का खतरा

    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में वैश्विक GDP ग्रोथ 3.2% रहने का अनुमान है, जो 2024 के 3.3% से भी कम है। कारण? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने टैरिफ की बाढ़ ला दी। उन्होंने भारत और ब्राजील जैसे बड़े देशों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया है। इससे अमेरिकी विकास दर 1.8% पर सिमट गई, और मंदी की संभावना 40% तक पहुंच गई।

    यूरोप में तो हाल और बुरा है। जर्मनी की अर्थव्यवस्था (-0.2%) ऊर्जा संकट और कमजोर निर्यात की वजह से लगातार दूसरे साल सिकुड़ रही है। चीन की ग्रोथ 4% के आसपास ठहर गई, रियल एस्टेट संकट और कमजोर घरेलू मांग से जूझ रही है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की रिपोर्ट कहती है कि व्यापारिक अनिश्चितता ऐतिहासिक उच्च स्तर पर है, जिससे वैश्विक व्यापार 2025 में 40% गिर सकता है।

    वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के 2025 के जीडीपी विकास अनुमान चिंताजनक हैं, जहां अमेरिका की विकास दर टैरिफ नीतियों से प्रेरित महंगाई और मंदी के खतरे के कारण 2% पर सिमटने का अनुमान है। चीन की अर्थव्यवस्था रियल एस्टेट संकट और कमजोर निर्यात के बोझ तले 4.8% की दर से बढ़ेगी, जबकि यूरोपीय संघ ऊर्जा संकट और आर्थिक ठहराव की चुनौतियों से जूझते हुए मात्र 1.2% का विकास दर्ज करेगा। जापान जनसंख्या संकुचन और निवेश की कमी के कारण 0.9% पर रुकेगा और वैश्विक औसत 3.2% रहने की संभावना है, जो व्यापार युद्धों तथा अनिश्चितताओं से प्रभावित होकर 2008 के बाद का सबसे कमजोर दौर साबित हो सकता है। ये अनुमान आईएमएफ की नवीनतम रिपोर्ट पर आधारित हैं, जो दर्शाते हैं कि वैश्विक सहयोग की कमी से विकास की गति धीमी पड़ रही है।


    भारत का ‘कमाल’: 8.2% ग्रोथ का जादू कैसे हुआ?

    राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आंकड़ों के अनुसार, Q2 FY26 में रीयल GDP ग्रोथ 8.2% रही, जबकि GVA (ग्रॉस वैल्यू एडेड) 8.1% रहा। जुलाई-सितंबर तिमाही की यह वृद्धि दर पिछली छह तिमाहियों में सबसे अधिक है। इससे पहले उच्चतम वृद्धि 8.4 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2023-24 की जनवरी-मार्च तिमाही में दर्ज की गई थी। इस तीव्र वृद्धि ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में बरकरार रखा है। इसी दौरान चीन की अर्थव्यवस्था 4.8 प्रतिशत बढ़ी है। इसके साथ वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में भारत की अर्थव्यवस्था आठ प्रतिशत की दर से बढ़ी है। पिछले साल की समान अवधि में इसकी वृद्धि दर 6.1 प्रतिशत रही थी। पहली छमाही के बेहतर प्रदर्शन के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष के वृद्धि लक्ष्य से भी आगे निकल सकती है। जनवरी में पेश आर्थिक समीक्षा में इसके में 6.3-6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था। लेकिन सवाल वही: वैश्विक तूफान में यह चमत्कार कैसे?

    ग्रामीण मांग का सुपरचार्ज: भारत की 40% उपभोग मांग ग्रामीण इलाकों से आती है। अच्छे माॉनसून (2025 में 106% औसत वर्षा) ने खेती को बूस्ट दिया- खाद्यान्न उत्पादन 5% बढ़ा। नतीजा? ट्रैक्टर बिक्री अक्टूबर में 11 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची और दो-पहिया वाहनों की ग्रामीण बिक्री 51.8% उछली। न्यूल्सनआईक्यू के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण FMCG बिक्री 12% बढ़ी। यह ‘बॉटम-अप’ ग्रोथ है। यानी किसान अमीर, तो बाजार चमकदार।

    सरकारी खर्च का इंजन: केंद्र सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) बजट का 24.5% Q1 में ही खर्च हो गया, जो पिछले साल के 16.3% से दोगुना है। हाईवे, रेलवे, और बंदरगाहों पर निवेश ने निर्माण क्षेत्र को 7% ग्रोथ दी। IMF कहता है कि इसी इंफ्रास्ट्रक्चर पुश ने नौकरियां पैदा कीं और आय बढ़ाईं।

    विनिर्माण का उभार: मैन्युफैक्चरिंग PMI अक्टूबर में 59.2 पर पहुंचा- 57.5 से ऊपर था। ‘मेक इन इंडिया’ और PLI स्कीम्स ने स्मार्टफोन, ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को उकसाया। उत्पादन और नए ऑर्डर में तेजी आई, भले ही US टैरिफ्स का साया हो। निर्यात 6.3% बढ़ा।

    सेवाओं का डिजिटल जादू: IT और कंसल्टिंग निर्यात 10% GDP का योगदान दे रहे हैं। डिजिटल इंडिया ने UPI ट्रांजेक्शन को 50% बूस्ट दिया। सेवाओं की ग्रोथ दोगुनी (10% से ऊपर) रही, जो वैश्विक मंदी में भी मजबूत बनी।


    सेवा क्षेत्र का भी प्रदर्शन काफी अच्छा रहा

    आंकड़ों के मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र ने पिछली तिमाही में 9.1 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दिखाई जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 2.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। इस दौरान सेवा क्षेत्र का भी प्रदर्शन काफी अच्छा रहा। बैंकिंग, रियल एस्टेट और अन्य सेवाओं में 10.2 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई जो एक साल पहले 7.2 प्रतिशत थी। हालांकि दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। कृषि क्षेत्र का उत्पादन गिरकर 3.5 प्रतिशत रहा जो एक साल पहले की समान अवधि में 4.1 प्रतिशत था।

    दूसरी तिमाही में स्थिर कीमतों पर जीडीपी 48.63 लाख करोड़ रुपये और मौजूदा बाजार मूल्य पर जीडीपी 85.25 लाख करोड़ रुपये रही। इसके साथ पहली छमाही में स्थिर कीमतों पर जीडीपी आठ प्रतिशत बढ़कर 96.52 लाख करोड़ रुपये और मौजूदा बाजार मूल्य पर जीडीपी 8.8 प्रतिशत बढ़कर 171.30 लाख करोड़ रुपये रहा। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने इन आंकड़ों पर कहा कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था के इस वित्त वर्ष में चार लाख करोड़ डॉलर से अधिक हो जाने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 20224-25 के अंत में जीडीपी का आकार 3.9 लाख करोड़ डॉलर था।


    वृद्धि दर उम्मीदों से अधिक रही

    वास्तविक निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) ने 7.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। सकल स्थायी पूंजी निर्माण 7.3 प्रतिशत बढ़ा। दूसरी तिमाही में जीडीपी के अनुमान में उपयोग की गई विभिन्न गणना पद्धतियों के बीच अंतर 1.62 लाख करोड़ रुपये का रहा। रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि सितंबर तिमाही की वृद्धि दर उम्मीदों से अधिक रही है। इससे दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति समीक्षा में दर कटौती की संभावना कम हो गई है।

    हालांकि नायर ने कहा, “अमेरिका की तरफ से लगाए गए उच्च शुल्क और केंद्र सरकार की सीमित पूंजीगत व्यय की गुंजाइश को देखते हुए वृद्धि की रफ्तार धीमी हो सकती है। इसके बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि सात प्रतिशत से अधिक रहने की ही संभावना है।” डेलॉयट की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि जीएसटी सुधार और त्योहारी खरीद तीसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों को गति देंगे और पूरे वित्त वर्ष की वृद्धि दर के अनुमान में महत्वपूर्ण सुधार हो सकता है।

    आंकड़ों के आकलन की नई पद्धति लागू की जा रही
    क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि जीडीपी गणना के लिए 2011-12 के बजाय 2022-23 को नया आधार वर्ष स्वीकार किए जाने के बाद अर्थव्यवस्था की बेहतर तस्वीर सामने आ पाएगी लेकिन इससे मौजूदा अनुमानों से थोड़ा विचलन भी हो सकता है। दरअसल सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय आर्थिक आंकड़ों की गणना के लिए 2022-23 को नए आधार वर्ष के रूप में संशोधित करने की तैयारी में है।

    मंत्रालय ने कहा कि तिमाही जीडीपी के प्रारंभिक अनुमानों में आगे चलकर संशोधन किए जाएंगे, क्योंकि मौजूदा एवं स्थिर कीमतों पर आंकड़ों के आकलन की नई पद्धति लागू की जा रही है। बयान के मुताबिक, नई शृंखला के आधार पर अगली तिमाही के जीडीपी आंकड़े 27 फरवरी, 2026 को जारी किए जाएंगे।