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  • चीन दौरे से पहले ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान संकट सुलझाने में शी जिनपिंग की जरूरत नहीं

    चीन दौरे से पहले ट्रंप का बड़ा बयान, कहा- ईरान संकट सुलझाने में शी जिनपिंग की जरूरत नहीं

    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आज तीन दिवसीय चीन दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस यात्रा के दौरान उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कई अहम वैश्विक मुद्दों पर द्विपक्षीय बातचीत होगी। हालांकि बीजिंग रवाना होने से पहले ट्रंप ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान संकट को हल करने के लिए उन्हें शी जिनपिंग की किसी मदद की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ईरान को अब सही रास्ता चुनना होगा, नहीं तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

    चीन दौरे पर हाई-प्रोफाइल डेलिगेशन
    13 से 15 मई तक चलने वाले इस दौरे में ट्रंप के साथ अमेरिका का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी चीन जा रहा है। इसमें उनके परिवार के सदस्य एरिक ट्रंप और लारा ट्रंप के अलावा कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। डेलिगेशन में विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी पीट हेगसेथ, और अन्य कूटनीतिक व सुरक्षा सलाहकार जैसे जेमीसन ग्रीर, स्टीफन मिलर, स्टीवन चेउंग, जेम्स ब्लेयर और अन्य प्रमुख नाम शामिल हैं।

    ईरान मुद्दा प्राथमिकता में नहीं
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि चीन में शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत का मुख्य फोकस ईरान मुद्दा नहीं होगा, हालांकि इस पर चर्चा जरूर होगी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हो चुकी है और किसी भी समझौते का उद्देश्य अमेरिका और ईरान दोनों देशों के हित में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि “हम सिर्फ अच्छी डील करेंगे।”

    रूस-यूक्रेन युद्ध पर दावा
    ट्रंप ने यह भी दावा किया कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध जल्द ही समाप्त होने की दिशा में है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वैश्विक हालात में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि चीन दौरे के दौरान ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात से वैश्विक राजनीति और खासकर ईरान संकट पर क्या नई दिशा निकलती है।

  • ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से बदलेगा वैश्विक शक्ति संतुलन? ईरान, रूस और रेयर अर्थ पर टिकी दुनिया की नजर

    ट्रंप-शी जिनपिंग मुलाकात से बदलेगा वैश्विक शक्ति संतुलन? ईरान, रूस और रेयर अर्थ पर टिकी दुनिया की नजर



    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा को लेकर वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान, रूस और रेयर अर्थ जैसे मुद्दों पर अमेरिका-चीन के बीच तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरे में ईरान से जुड़ा तेल व्यापार, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति और चीन द्वारा रूस को दिए जा रहे समर्थन जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिका की नजर चीन के रेयर अर्थ मिनरल्स पर भी है, जो वैश्विक तकनीकी उद्योग के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और अमेरिका के बीच यह बातचीत केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर वैश्विक शक्ति संतुलन पर भी पड़ेगा। खासकर ईरान संकट और यूक्रेन युद्ध जैसे मुद्दे इस बैठक को और जटिल बना रहे हैं।

    भारत के दृष्टिकोण से यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका और चीन दोनों ही उसकी रणनीतिक साझेदारी और सुरक्षा नीति पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डालते हैं। दोनों देशों के रिश्तों में किसी भी बदलाव का असर भारत की कूटनीति और क्षेत्रीय रणनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।

    कुल मिलाकर, ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात सिर्फ एक कूटनीतिक बैठक नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति के कई बड़े समीकरणों को प्रभावित करने वाला अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

  • चीन में भ्रष्टाचार पर ‘ड्रैगन’ का बड़ा वार, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा; रिश्वतखोरी ने छीनी सत्ता और सम्मान

    चीन में भ्रष्टाचार पर ‘ड्रैगन’ का बड़ा वार, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा; रिश्वतखोरी ने छीनी सत्ता और सम्मान


    नई दिल्ली। चीन में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को बड़ा झटका लगा है। चीनी सैन्य अदालत ने पूर्व रक्षा मंत्री वेई फेंगहे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार के मामले में मौत की सजा सुनाई है। हालांकि दोनों को दो साल की मोहलत भी दी गई है।

    सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक वेई फेंगहे को रिश्वत लेने का दोषी पाया गया, जबकि ली शांगफू पर रिश्वत लेने और देने दोनों के आरोप साबित हुए। दोनों नेताओं को पहले ही 2024 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित किया जा चुका था।

    शी जिनपिंग के करीबी रहे दोनों नेता
    रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों पूर्व मंत्री चीन की शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य रह चुके हैं। वेई फेंगहे ने 2018 से 2023 तक रक्षा मंत्री के तौर पर काम किया था, जबकि ली शांगफू ने उनके बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी। दोनों नेताओं का संबंध चीन की रणनीतिक पीपल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फ़ोर्स से भी रहा है, जिसे राष्ट्रपति जिनपिंग के सैन्य सुधार कार्यक्रम के तहत मजबूत किया गया था।

    भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई
    2012 में सत्ता संभालने के बाद से शी जिनपिंग लगातार भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चला रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान के तहत अब तक लाखों अधिकारियों और कई वरिष्ठ सैन्य अफसरों पर कार्रवाई की जा चुकी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की सेना और कम्युनिस्ट पार्टी में बढ़ते भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।

  • अमेरिका-चीन हाई-लेवल डिप्लोमेसी पर संकट की छाया: ट्रम्प-जिनपिंग मीटिंग टली, होर्मुज तनाव से वैश्विक कूटनीति पर असर

    अमेरिका-चीन हाई-लेवल डिप्लोमेसी पर संकट की छाया: ट्रम्प-जिनपिंग मीटिंग टली, होर्मुज तनाव से वैश्विक कूटनीति पर असर


    नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच होने वाली संभावित उच्च स्तरीय बैठक को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-हॉर्मुज संकट के बीच यह अहम मुलाकात फिलहाल टाल दी गई है। यह बैठक पहले अप्रैल में प्रस्तावित थी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही थी, लेकिन हालात बदलने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया।

    चीन के लिए क्यों अहम है यह बैठक?
    चीन इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण अवसर मान रहा है क्योंकि यह दुनिया की दो सबसे बड़ी आर्थिक और सैन्य शक्तियों के बीच लंबे समय तक स्थिर संबंध बनाने की दिशा तय कर सकती है।

    लेकिन बीजिंग के अंदर इस पर एकमत नहीं है। सरकार के भीतर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच आगे रणनीति क्या होनी चाहिए।

    सबसे बड़ी चिंता: होर्मुज स्ट्रेट
    सबसे गंभीर मुद्दा Strait of Hormuz को लेकर है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से चीन अपनी लगभग एक-तिहाई तेल और गैस आपूर्ति पूरी करता है।अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या मार्ग बाधित होता है, तो इसका सीधा असर चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ेगा और अमेरिका-चीन वार्ता भी प्रभावित हो सकती है।

    ट्रम्प की यात्रा पर भी असर
    चीनी अधिकारियों के अनुसार, अगर मिडिल ईस्ट संकट जारी रहता है तो ट्रम्प की संभावित चीन यात्रा सामान्य राजनयिक दौरे जैसी नहीं रह जाएगी।एक चीनी अधिकारी के मुताबिक, यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन और भविष्य की अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।

    बड़ा संकेत क्या है?
    विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बैठक सिर्फ एक डिप्लोमैटिक इवेंट नहीं बल्कि आने वाले वर्षों में अमेरिका-चीन रिश्तों की दिशा तय करने वाला मोड़ हो सकती है—चाहे भविष्य में किसी भी देश में सत्ता परिवर्तन क्यों न हो।

  • होर्मुज पर पहली बार खुलकर बोला चीन, अमेरिका-ईरान दोनों को दी नसीहत-क्या कहा बीजिंग ने?

    होर्मुज पर पहली बार खुलकर बोला चीन, अमेरिका-ईरान दोनों को दी नसीहत-क्या कहा बीजिंग ने?

    बीजिंग। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच China ने पहली बार खुलकर Strait of Hormuz को लेकर अपना रुख सामने रखा है। चीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए साफ किया कि यहां जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहनी चाहिए।

    चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman से फोन पर बातचीत में कहा कि होर्मुज को फिर से सामान्य नौवहन के लिए खोला जाना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि यह कदम न केवल क्षेत्रीय देशों बल्कि पूरी दुनिया के साझा हितों से जुड़ा हुआ है।

    गौरतलब है कि Iran द्वारा होर्मुज बंद करने और United States की ओर से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी के बाद यह चीन का पहला आधिकारिक बयान है। इस टकराव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला है, खासकर एशियाई देशों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

    चीन, जो ईरानी तेल का बड़ा आयातक है, लंबे समय तक चलने वाले इस संघर्ष से चिंतित है। शी जिनपिंग ने कहा कि चीन क्षेत्र में शांति, विकास और सहयोग पर आधारित व्यवस्था का समर्थन करता है, ताकि स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

    इस बयान की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि चीन ने 2023 में Saudi Arabia और ईरान के बीच रिश्तों को बहाल कराने में अहम भूमिका निभाई थी, जिसे पश्चिम एशिया में बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया था।

    इसी बीच चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी कार्रवाई पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय के प्रवक्ता Guo Jiakun ने एक चीनी-सम्बद्ध मालवाहक जहाज को अमेरिकी नौसेना द्वारा रोके जाने और उस पर गोलीबारी की घटना पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्षों को जिम्मेदारी दिखानी चाहिए और हालात को और बिगड़ने से बचाना चाहिए।

    भारतीय झंडे वाले जहाजों पर कथित हमलों को लेकर पूछे गए सवाल पर भी चीन ने दोहराया कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय मार्ग है और इसे सुरक्षित तथा खुला रखना सभी देशों के हित में है।

    चीन ने साफ संकेत दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर क्षेत्र में तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने की दिशा में काम करने को तैयार है।

  • चीन की सेना में 'परमाणु' भूचाल: राष्ट्रपति जिनपिंग के सबसे खास जनरल पर जासूसी का आरोप, अमेरिका को डेटा लीक करने की आशंका

    चीन की सेना में 'परमाणु' भूचाल: राष्ट्रपति जिनपिंग के सबसे खास जनरल पर जासूसी का आरोप, अमेरिका को डेटा लीक करने की आशंका


    नई दिल्ली । चीन की कम्युनिस्ट पार्टी CPC और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के भीतर उस समय हड़कंप मच गया, जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सबसे वफादार माने जाने वाले जनरल झांग यूक्सिया के खिलाफ जांच की आधिकारिक पुष्टि हुई। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के उपाध्यक्ष और चीन के रक्षा उद्योग के कद्दावर नेता झांग यूक्सिया पर ‘अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन’ का आरोप लगा है। इस हाई-प्रोफाइल जांच के दायरे में जनरल लियू जेनली भी शामिल हैं, जो ज्वाइंट स्टाफ डिपार्टमेंट के चीफ हैं।

    परमाणु जासूसी की सनसनीखेज रिपोर्ट अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट ने इस मामले में आग में घी डालने का काम किया है। रिपोर्ट के मुताबिक जनरल झांग पर आरोप है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम की ‘अति-गोपनीय और तकनीकी जानकारियां’ अमेरिका को मुहैया कराई हैं। हालांकि, चीन के रक्षा मंत्रालय ने जासूसी के आरोपों पर चुप्पी साध रखी है लेकिन बंद कमरों में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को इस डेटा लीक के बारे में ब्रीफिंग दी गई है। परमाणु जासूसी के अलावा, झांग पर सैन्य खरीद में भारी रिश्वत लेने, पदोन्नति के बदले पैसे वसूलने और सेना के भीतर अपना एक समानांतर ‘राजनीतिक गुट बनाने के भी गंभीर आरोप हैं।

    जिनपिंग का क्लीनअप ऑपरेशन या सुरक्षा में सेंध विशेषज्ञ इस कार्रवाई को शी जिनपिंग द्वारा सेना पर अपनी पकड़ और अधिक मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। इससे पहले पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू को भी इसी तरह अचानक बर्खास्त किया गया था। जांच की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि झांग के कार्यकाल में नियुक्त हुए दर्जनों अधिकारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। 2023 से अब तक चीन की सेना के करीब 50 से अधिक शीर्ष अधिकारी पद से हटाए जा चुके हैं या लापता हैं।

    अंतरराष्ट्रीय अटकलें और संदेह वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताया है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का परमाणु कार्यक्रम इतना सख्त होता है कि वहां से डेटा लीक करना लगभग असंभव है, इसलिए यह मामला महज भ्रष्टाचार या सत्ता संघर्ष का भी हो सकता है। सोशल मीडिया पर सैनिकों की झड़प और गिरफ्तारी के अपुष्ट दावे तैर रहे हैं। यदि परमाणु जासूसी के आरोप सच साबित होते हैं, तो यह न केवल चीन की आंतरिक सुरक्षा बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शक्ति संतुलन को बदल कर रख देगा।

  • जिनपिंग बनने जा रहे 'शांति दूत'; चीन की मदद से सुधरेंगे उत्तर और दक्षिण कोरिया के रिश्ते?

    जिनपिंग बनने जा रहे 'शांति दूत'; चीन की मदद से सुधरेंगे उत्तर और दक्षिण कोरिया के रिश्ते?


    वीजिंग। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एक महत्वपूर्ण अपील की है। उत्तर कोरिया के परमाणु संकट को सुलझाने और दोनों कोरियाई देशों के बीच बढ़ती शत्रुता को कम करने के लिए उन्होंने चीन से शांति मध्यस्थ की भूमिका निभाने का आग्रह किया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग ने बुधवार को कहा कि उन्होंने उत्तर कोरियाई परमाणु संकट के समाधान और दोनों कोरियाई देशों के बीच शत्रुता कम करने में मदद के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मध्यस्थता करने का अनुरोध किया है।
    म्योंग ने कहा कि उन्होंने यह अनुरोध दोनों नेताओं के इस सप्ताह की शुरुआत में बीजिंग में हुए शिखर सम्मेलन के दौरान किया था।

    दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ने अपने बयान में कहा कि हम प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उत्तर कोरिया के साथ हमारे सभी संपर्क चैनल पूरी तरह से बंद हैं, इसलिए हम बिल्कुल संवाद नहीं कर पा रहे हैं। मैंने उनसे कहा कि चीन का शांति के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाना अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हमारे प्रयासों की सराहना की और कहा कि धैर्य रखने की जरूरत है।

    चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और प्रमुख कूटनीतिक समर्थक है। दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने बार-बार चीन से अपने प्रभाव का उपयोग करके उत्तर कोरिया को लंबे समय से ठप पड़ी कूटनीति को फिर से शुरू करने या परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए मनाने का आग्रह किया है।

    चीन ने उत्तर कोरिया से जुड़े मुद्दों में शामिल सभी पक्षों से संयम बरतने का आह्वान किया है। उसने हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत प्रतिबंधित हथियारों के परीक्षणों के बावजूद उत्तर कोरिया पर प्रतिबंध कड़े करने के अमेरिका और अन्य देशों के प्रयासों को रोक दिया है।

    उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया और अमेरिका के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया है और 2019 में उसके नेता किम जोंग उन की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उच्च स्तरीय परमाणु कूटनीति विफल होने के बाद से अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करने के कदम उठाए हैं।