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  • युवाओं में अचानक मौत की वजह क्या? 25 अस्पतालों की स्टडी में सामने आए ये बड़े जोखिम

    युवाओं में अचानक मौत की वजह क्या? 25 अस्पतालों की स्टडी में सामने आए ये बड़े जोखिम


    नई दिल्ली। जिम में कसरत करते हुए या डांस के दौरान अचानक किसी युवा की मौत की खबर अक्सर लोगों को हैरान कर देती है. देखने में पूरी तरह फिट नजर आने वाले व्यक्ति के साथ आखिर ऐसा कैसे हो सकता है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के एक अध्ययन ने इस सवाल से जुड़े कई अहम संकेत दिए हैं. शोधकर्ताओं के मुताबिक कम उम्र में दिल का दौरा और रक्त के थक्के बनने के पीछे कई जोखिम कारक जिम्मेदार हो सकते हैं. इनमें पहले रक्त का थक्का बनना परिवार में ऐसी समस्या का इतिहास दूसरी बीमारियां और धूम्रपान जैसे कारण प्रमुख हैं.

    यह अध्ययन आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने देश के 25 बड़े अस्पतालों में किया. शोध में 18 से 45 वर्ष की उम्र के 767 मरीजों को शामिल किया गया. खास बात यह रही कि अध्ययन में ऐसे मरीजों को देखा गया जिन्हें समय पर इलाज मिलने के बाद बचा लिया गया था. इसका उद्देश्य यह समझना था कि अपेक्षाकृत कम उम्र में दिल का दौरा पड़ने या शरीर में रक्त के थक्के बनने के पीछे कौन से कारक भूमिका निभा सकते हैं.

    अध्ययन में सामने आया कि जिन लोगों को पहले भी रक्त का थक्का बनने की समस्या हो चुकी थी उनमें दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बहुत अधिक पाया गया. ऐसे लोगों में यह खतरा करीब 60 गुना तक ज्यादा देखा गया. वहीं जिन मरीजों को पहले से कोई दूसरी बीमारी थी उनमें दिल के दौरे का जोखिम 4.6 गुना अधिक पाया गया.

    धूम्रपान करने वालों के लिए भी अध्ययन में गंभीर चेतावनी सामने आई. ऐसे लोगों में दिल के दौरे का खतरा 3.5 गुना अधिक पाया गया. इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में पहले किसी सदस्य को रक्त का थक्का बनने की समस्या रही थी उनमें भी दिल के दौरे का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में करीब 3.3 गुना ज्यादा पाया गया.

    शोध में कोविड से जुड़ी जानकारी भी सामने आई. जिन लोगों को कोविड संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था उनमें रक्त का थक्का बनने की समस्या देखी गई. हालांकि अध्ययन के मुताबिक कोविड वैक्सीन से लोगों को इस तरह का नुकसान होने का प्रमाण नहीं मिला.

    अध्ययन में शामिल 767 मरीजों में 432 यानी करीब 56.3 प्रतिशत लोगों को दिल का दौरा पड़ा था. वहीं 198 यानी करीब 25.8 प्रतिशत मरीजों में दिमाग की नस में रक्त का प्रवाह रुकने से जुड़ी समस्या सामने आई. दोनों तरह के मामलों को मिलाकर यह संख्या अध्ययन में शामिल मरीजों का बड़ा हिस्सा थी.

    उम्र के लिहाज से भी अध्ययन महत्वपूर्ण है. कुल मरीजों में 614 यानी करीब 80.1 प्रतिशत की उम्र 31 से 45 वर्ष के बीच थी. इसका मतलब यह है कि ऐसे जोखिम केवल बहुत अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं हैं. युवाओं में भी यदि पहले से कोई जोखिम मौजूद है तो उसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

    विशेषज्ञों के मुताबिक इसका मतलब यह नहीं है कि जिम जाना या डांस करना अपने आप में खतरनाक है. नियमित शारीरिक गतिविधि सामान्य तौर पर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है. लेकिन जिन लोगों में पहले से हृदय संबंधी जोखिम या रक्त के थक्के से जुड़ी समस्या का इतिहास है उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.

    इस अध्ययन से एक अहम संदेश यह मिलता है कि अचानक होने वाली घटनाओं के पीछे कई बार पहले से मौजूद जोखिम छिपे हो सकते हैं. इसलिए शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है. खासकर धूम्रपान करने वालों और परिवार में ऐसी बीमारी का इतिहास रखने वाले लोगों को अपनी सेहत को लेकर ज्यादा सतर्क रहना चाहिए.

  • बड़े स्टार नहीं बड़ा बजट नहीं फिर भी बॉक्स ऑफिस पर छाई हनुमान अंश, 26वें दिन 50 करोड़ पार

    बड़े स्टार नहीं बड़ा बजट नहीं फिर भी बॉक्स ऑफिस पर छाई हनुमान अंश, 26वें दिन 50 करोड़ पार


    नई दिल्ली। बॉक्स ऑफिस पर इस समय फिल्म हनुमान अंश की सफलता ने सभी को हैरान कर दिया है. अगस्त में रिलीज हुई इस फिल्म ने शुरुआत में बेहद धीमी रफ्तार पकड़ी लेकिन बाद में इसकी कमाई ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि बड़े बजट की फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया. करीब 2 करोड़ रुपये की लागत में तैयार हुई हनुमान अंश ने 26 दिनों में 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन कर लिया है. कम बजट और बिना बड़े सितारों वाली इस फिल्म की कमाई को इंडस्ट्री में एक बड़ी मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है.

    हनुमान अंश 7 अगस्त को देशभर में 355 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई थी. रिलीज के पहले दिन फिल्म ने केवल 10 लाख रुपये की कमाई की थी. शुरुआती आंकड़ों को देखकर ऐसा नहीं लग रहा था कि फिल्म आगे चलकर इतना बड़ा कारोबार कर पाएगी. पहले 15 दिनों तक भी फिल्म की रफ्तार काफी सुस्त रही. कई दिनों में इसकी कमाई महज कुछ लाख रुपये तक सीमित रही.

    इसके बाद फिल्म की कहानी पूरी तरह बदल गई. तीसरे शनिवार को हनुमान अंश की कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिला और फिल्म ने करीब 85 लाख रुपये जुटाए. अगले दिन रविवार को इसकी कमाई सीधे 2.20 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. शुरुआती दो हफ्तों में जहां फिल्म करीब 40 लाख रुपये ही कमा पाई थी वहीं तीसरे हफ्ते में इसने लगभग 10 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया. इसके साथ ही फिल्म की कुल कमाई करीब 10.40 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

    फिल्म की असली रफ्तार तीसरे हफ्ते के बाद देखने को मिली. उस समय सिनेमाघरों में कई दूसरी बड़ी फिल्में भी मौजूद थीं और उन्हें ज्यादा स्क्रीन मिली हुई थीं. इसके बावजूद हनुमान अंश ने दर्शकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर ली. 21वें दिन के बाद फिल्म की कमाई में लगातार तेजी देखने को मिली.

    चौथे हफ्ते में फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा प्रदर्शन किया जिसकी शायद किसी ने उम्मीद नहीं की थी. कई दिनों में फिल्म ने 6 से 7 करोड़ रुपये तक की कमाई की. चौथे रविवार को तो फिल्म ने करीब 12 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया. अकेले चौथे हफ्ते में हनुमान अंश ने लगभग 43.23 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया.

    26वें दिन फिल्म ने 50 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया. इसके बाद चौथे मंगलवार को भी फिल्म ने करीब 8 करोड़ रुपये की कमाई की और इसकी कुल नेट कमाई 53.63 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. महज 2 करोड़ रुपये के बजट से बनी इस फिल्म का यह कारोबार करीब 25 गुना से ज्यादा बैठता है.

    हनुमान अंश की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि फिल्म को शुरुआत में दर्शकों का बहुत बड़ा समर्थन नहीं मिला था. लेकिन धीरे धीरे माउथ पब्लिसिटी ने माहौल बदल दिया. फिल्म की कहानी और विषय ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचना शुरू किया और कम स्क्रीन के बावजूद इसकी कमाई बढ़ती चली गई.

    फिल्म की यह सफलता बताती है कि बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ बड़ा बजट या बड़े सितारे ही सफलता की गारंटी नहीं होते. मजबूत कहानी और दर्शकों से जुड़ाव भी किसी फिल्म को लंबी रेस का खिलाड़ी बना सकता है. अगर हनुमान अंश की रफ्तार आने वाले दिनों में भी बनी रहती है तो इसके 100 करोड़ रुपये के आंकड़े की ओर बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है.

  • क्रिटिकल मिनरल्स पर मिलकर काम करेंगे भारत-अमेरिका, जी20 बैठक में हुई बड़ी डील

    क्रिटिकल मिनरल्स पर मिलकर काम करेंगे भारत-अमेरिका, जी20 बैठक में हुई बड़ी डील


    एशविले।
    भारत और अमेरिका (India and America) ने अपने लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक संबंधों के तहत महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई है। यह सहमति वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) और अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट (US Treasury Secretary Scott Bessent) के बीच हुई बातचीत के बाद बनी है।

    दोनों नेताओं की मुलाकात सोमवार को नॉर्थ कैरोलिना (North Carolina) के एशविले में जी20 वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक (G 20 Meeting) के दौरान हुई। इस बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला को भारत-अमेरिका आर्थिक संवाद के केंद्र में रखा गया। दोनों पक्षों ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को स्वीकार किया और कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता जताई।

    केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण ने अमेरिकी वित्त मंत्री बेसेंट को इस साल के अंत में नई दिल्ली आने का न्योता दिया, ताकि भारत-अमेरिका आर्थिक और वित्तीय साझेदारी बैठक हो सके। इस प्रस्तावित दौरे से दोनों सरकारों को आर्थिक और वित्तीय सहयोग की समीक्षा करने और उन क्षेत्रों की पहचान करने का एक और मौका मिलेगा, जिनमें साझेदारी का विस्तार किया जा सकता है।

    भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार, बेसेंट ने जी7 प्लस ढांचे में भारत की भूमिका की सराहना की। उन्होंने महत्वपूर्ण खनिजों पर जी7 के नेतृत्व वाले संवादों में भारत की भागीदारी का भी स्वागत किया।


    महत्वपूर्ण खनिजों पर दोनों देश क्यों साथ आए?

    मंत्रालय ने बताया कि ये चर्चाएं आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने और शोध व तकनीक साझा करने के उद्देश्य से की जा रही हैं। महत्वपूर्ण खनिज प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और रणनीतिक चर्चाओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। एशविले में हुई बैठक ने भारत और अमेरिका को इस मुद्दे को अपनी व्यापक वित्तीय और आर्थिक साझेदारी से जोड़ने का अवसर दिया।

    सीतारमण-बेसेंट की बैठक ने इस बात को भी रेखांकित किया कि दोनों सरकारें आर्थिक मामलों पर नियमित उच्च-स्तरीय संपर्क बनाए रखने को कितना महत्व देती हैं। उनकी यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक गवर्नर वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और विकास व वित्तीय सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करने के लिए एशविले में जुटे थे।


    भारत के लिए यह सहयोग क्यों अहम है?

    भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिज संवादों में भागीदारी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ मिलकर आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा, शोध और तकनीक पर काम करने का एक अवसर प्रदान करती है। अमेरिका के लिए, भारत की भागीदारी इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संसाधनों से जुड़े प्रयासों में एक बड़ी अर्थव्यवस्था और एक महत्वपूर्ण उभरते बाजार को जोड़ती है।

    वित्त मंत्री बेसेंट को दिया गया न्योता इस बात का भी संकेत है कि आर्थिक और वित्तीय साझेदारी नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच जुड़ाव का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनी रहेगी। यह व्यवस्था दोनों देशों को मंत्रिस्तरीय स्तर पर व्यापक आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा करने की अनुमति देती है।


    नई दिल्ली में बैठक कब होगी?

    इस साल के अंत में नई दिल्ली में प्रस्तावित बैठक एशविले वार्ता के बाद इन परामर्शों को जारी रखेगी। वित्त मंत्रालय ने नई दिल्ली बैठक की कोई तारीख नहीं बताई। उसने यह भी खुलासा नहीं किया कि दोनों देश महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर किन विशिष्ट पहलों को आगे बढ़ा सकते हैं।


    महत्वपूर्ण खनिज आखिर क्यों जरूरी हैं?

    महत्वपूर्ण खनिजों का उपयोग कई उद्योगों में होता है, जिनमें स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, रक्षा विनिर्माण और उन्नत तकनीक शामिल हैं। सरकारें अब अपने स्रोतों में विविधता लाने और केंद्रित आपूर्ति श्रृंखला के कारण होने वाले व्यवधानों के जोखिम को कम करने पर तेजी से ध्यान दे रही हैं।

  • देश में फिर सक्रिय हुआ मानसून…. 19 राज्यों में एक सप्ताह भारी बारिश के आसार… अलर्ट जारी

    देश में फिर सक्रिय हुआ मानसून…. 19 राज्यों में एक सप्ताह भारी बारिश के आसार… अलर्ट जारी


    नई दिल्ली।
    दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) एक बार फिर देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिया हुआ है। इसके प्रभाव से उत्तराखंड से लेकर ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश हुई है। उत्तराखंड में अलग-अलग घटनाओं में 3 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई है, जबकि असम के गुवाहाटी में भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन सदस्य समेत चार जिंदा दफन हो गए। मौसम विभाग ने सक्रिय मानसून के चलते 7 सितंबर तक हिमाचल प्रदेश और हरियाणा समेत कम से कम 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी (Heavy rain warning) दी है। छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में तेज बारिश होने की संभावना है।


    भूस्खलन के कारण जनहानि

    हल्द्वानी से मिली जानकारी के मुताबिक, अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक के वडयूड़ा गांव में सोमवार रात भूस्खलन की चपेट में आए घर में सो रही एक महिला और उसके दो बच्चों की दबने से मौत हो गई। जिले के धार की तूनी क्षेत्र में देर रात पहाड़ी से आए मलबे की चपेट में आने से दो लोगों की जान चली गई, जबकि भीमताल बाईपास पर नाले में बहने से चार साल की बच्ची की जान चली गई।


    नदी के उफान में बह गईं मां-बेटी

    देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में मंगलवार तड़के बरसाती रपटे में आए तेज बहाव से दो गाड़ियां बह गई। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोगों को बचा लिया गया। कोटद्वार में कोल्हू नदी के उफान में महिला और उसकी एक साल की बेटी बह गई।


    उत्तराखंड में नदियां उफनाई, रास्ते बंद

    उत्तराखंड में कई नदियां उफान पर हैं। ऊधमसिंह नगर जिले में बारिश से सभी नदियों का जल स्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नानकसागर बांध से 4000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शारदा नदी का जलस्तर मंगलवार को एक लाख क्यूसेक से अधिक होने के कारण बैराज पर चार पहिया वाहनों का संचालन रोक दिया गया। दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 1,48,813 क्यूसेक दर्ज किया गया।


    जम्मू-कश्मीर में बारिश से कई रास्ते बाधित

    जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में मंगलवार को भारी बारिश हुई। पुंछ जिले में कई नाले उफान पर आ गए। पुंछ-मेंढर मार्ग पर गांव मंगनाड़ में मंगनाड़ नाले के उफान पर आने से मार्ग करीब दो घंटे बाधित रहा। इससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कठुआ जिले के बिलावर और रामकोट क्षेत्रों में भी बारिश हुई। पिछले 24 घंटे में कठुआ में 73 मिलीमीटर, कटड़ा में 62, पुंछ में 38.5 मिमी बारिश हुई।


    नदी का जलस्तर बढ़ा, 6 बच्चों समेत 10 फंसे

    जम्मू-कश्मीर के ही राजोरी जिले में मंगलवार को हुई भारी बारिश के बीच विभिन्न इलाकों में नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इसी दौरान बढून क्षेत्र में जमौला नदी में जलस्तर बढ़ने से 6 बच्चों समेत 10 लोग नदी के बीच फंस गए। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने तत्काल संयुक्त बचाव अभियान चलाकर सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जमौला नदी में पानी बढ़ने से कुछ लोग अचानक उसमें फंस गए थे। पुलिस जवानों और एसडीआरएफ टीम ने तुरंत पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। संयुक्त टीम ने सावधानीपूर्वक कार्रवाई करते हुए नदी में फंसे 10 लोगों, जिनमें 6 बच्चे भी शामिल थे, को सुरक्षित बाहर निकाला।


    कालका-शिमला ट्रैक 13 तक बंद

    हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर ब्रिज नंबर 57 के पास मिट्टी बहने से नैरो गेज ट्रेनों का संचालन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने इस ट्रैक पर चलने वाली सभी ट्रेनों को 13 सितंबर तक रद्द कर दिया है। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और ट्रैक को सुरक्षित बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।

  • मेडल से भरी झोली फिर भी नौकरी नहीं, थ्रोबॉल चैंपियन अमरदीप की कहानी ने CM सोरेन का खींचा ध्यान

    मेडल से भरी झोली फिर भी नौकरी नहीं, थ्रोबॉल चैंपियन अमरदीप की कहानी ने CM सोरेन का खींचा ध्यान


    नई दिल्ली। झारखंड के 29 वर्षीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करते हुए चार गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं लेकिन इन उपलब्धियों के बावजूद उनकी जिंदगी आज भी संघर्षों से गुजर रही है। सरकारी नौकरी और प्रोत्साहन राशि नहीं मिलने के कारण अमरदीप को परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जी बेचनी पड़ रही है। इसके अलावा वह कैब भी चलाते हैं। खिलाड़ी की स्थिति सामने आने के बाद अब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले का संज्ञान लिया है और खेल विभाग को इस पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    अमरदीप ने कम उम्र से ही थ्रोबॉल को अपना करियर बनाया। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और लगातार शानदार प्रदर्शन किया। वर्ष 2015 में मलेशिया में आयोजित एशियन जूनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप में उन्होंने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद वर्ष 2017 में काठमांडू में हुई इंडो नेपाल थ्रोबॉल चैंपियनशिप में भी वह स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे। वर्ष 2019 में बेंगलुरु में आयोजित साउथ एशियन थ्रोबॉल चैंपियनशिप में भी उन्होंने गोल्ड अपने नाम किया। वर्ष 2026 में रांची में आयोजित प्रतियोगिता में एक बार फिर अमरदीप ने स्वर्ण पदक हासिल किया। इस तरह उनके खाते में देश के लिए चार अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल हैं।

    इतनी बड़ी खेल उपलब्धियों के बावजूद अमरदीप को सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि वह वर्ष 2016 से प्रोत्साहन राशि के लिए सरकारी स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। वहीं वर्ष 2020 से नौकरी के लिए कोशिश शुरू की थी लेकिन इसी दौरान कोरोना महामारी के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई। वर्ष 2022 के बाद उन्होंने फिर लगातार प्रयास किए लेकिन अब तक उन्हें सफलता नहीं मिली। उनका दावा है कि नौकरी और कैश अवॉर्ड से जुड़े उनके आवेदन अभी भी लंबित हैं।

    अमरदीप का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या सरकार के सामने रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह राज्य के पूर्व खेल मंत्री हफीजुल हसन से भी मुलाकात कर चुके हैं। उनका कहना है कि उनके कई साथी खिलाड़ी दूसरे राज्यों से हैं और वहां उन्हें सरकारी नौकरी सहित कई सुविधाएं मिली हैं। इसके मुकाबले झारखंड में उन्हें अब तक अपने आवेदन पर राहत का इंतजार है।

    परिवार की आर्थिक स्थिति भी अमरदीप के संघर्ष को और मुश्किल बना देती है। उनके पिता सब्जी बेचकर परिवार का खर्च चलाते हैं और अमरदीप भी उनके काम में हाथ बंटाते हैं। उनकी मां गृहिणी हैं और वह करीब 35 किलो सब्जी सिर पर रखकर घर-घर बेचती हैं। बड़े भाई फास्ट फूड का स्टॉल चलाकर परिवार की आमदनी में सहयोग करते हैं। अमरदीप खुद भी जरूरत पड़ने पर कैब चलाते हैं। कई बार रात में कैब चलाने के बाद सुबह अभ्यास के लिए पहुंचना उनके लिए चुनौती बन जाता है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए भी अमरदीप को आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ा। मलेशिया जाने के दौरान उन्हें करीब 65 हजार रुपये का कर्ज लेना पड़ा था। झारखंड थ्रोबॉल एसोसिएशन ने भी उनके खर्च में मदद की और करीब आधी राशि का भार उठाया। इसके बावजूद आर्थिक कठिनाइयों के बीच अमरदीप ने खेल से नाता नहीं तोड़ा है।

    अब उनकी कहानी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खेल विभाग को मामले को देखने और जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद खेल मंत्री सुदिव्य सोनू ने भी कहा कि सरकार मौजूदा खेल नीति के आधार पर अमरदीप को नौकरी देने की संभावनाएं तलाश रही है। साथ ही रोजगार के दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।

    अमरदीप का संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। वह अक्टूबर 2026 के आखिर में श्रीलंका में होने वाली प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं। एक ओर देश के लिए पदक जीतने का जुनून कायम है तो दूसरी ओर परिवार चलाने की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है। अमरदीप की कहानी उन खिलाड़ियों की चुनौती को सामने लाती है जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के लिए पदक तो जीतते हैं लेकिन अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए उन्हें आज भी संघर्ष करना पड़ता है।

  • नेपाल त्रासदी: मलबे से अब भी निकल रहे शव, अब तक 1093 लोगों की मौत, 4 हजार से ज्यादा लापता

    नेपाल त्रासदी: मलबे से अब भी निकल रहे शव, अब तक 1093 लोगों की मौत, 4 हजार से ज्यादा लापता


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में आई भीषण बाढ़ (Severe floods) और भूस्खलन (Landslides) ने भारी तबाही मचाई है. हादसे के आठवें दिन भी राहत और बचाव का काम जारी है. मलबे के बीच से अब भी लोगों को बाहर निकाला जा रहा है. नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार रात 8 बजे तक इस आपदा में 1093 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, चार हजार से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

    दरअसल, यह हादसा 26 अगस्त को उत्तरी नेपाल में हुआ था. तेज बारिश के बाद कई इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई. इसके साथ ही बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ. देखते ही देखते पानी और मलबे ने गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया. कई जगहों पर घर, सड़कें और दूसरी इमारतें मलबे में दब गईं।


    तीन महीने के लिए घोषित किया गया आपदा क्षेत्र

    नेपाल सरकार ने प्रभावित इलाके को कम से कम तीन महीने के लिए आपदा संकट क्षेत्र घोषित किया है. सरकार का कहना है कि इससे राहत और बचाव के लिए जरूरी संसाधन तेजी से पहुंचाए जा सकेंगे. साथ ही राहत टीमों की तैनाती भी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।

    सरकार अब बचाव के साथ राहत और पुनर्वास पर भी जोर दे रही है. प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी और बचाव दल लगाए गए हैं. टीमें लगातार मलबे में लोगों की तलाश कर रही हैं. लापता लोगों के परिवार अभी भी अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।


    हेलीकॉप्टर से दिखी तबाही की तस्वीर

    चीन मीडिया ग्रुप (CMG) के एक रिपोर्टर ने सोमवार को हेलीकॉप्टर से प्रभावित इलाके का जायजा लिया. यह इलाका चीन-नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग-रसुवा सीमा चौकी के नेपाली हिस्से में है. आसमान से ली गई तस्वीरों में तबाही का बड़ा मंजर दिखाई दिया।

    इस रिपोर्ट के मुताबिक, सीमा चौकी के पास नेपाल की तरफ कई गांव और छोटे कस्बे पूरी तरह तबाह हो गए हैं. कई गाड़ियां और इमारतें गहरे मलबे में दब गई हैं. जहां कभी लोगों की आवाजाही रहती थी, वहां अब चारों तरफ मिट्टी और मलबा नजर आ रहा है. कीचड़ से क्षेत्र में दलदल जैसे हालात बन गए हैं.

    तबाही से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में स्याब्रुबेंसी भी शामिल है. यह शहर सीमा चौकी से सीधी दूरी में 10 किलोमीटर से भी कम दूर है. आपदा से पहले यहां काफी चहल-पहल रहती थी. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं।

    हेलीकॉप्टर से इलाके का जायजा लेने वाले रिपोर्टर का कहना है कि शहर में आम लोगों की मौजूदगी बेहद कम दिखाई दी. वहां सिर्फ राहत और बचाव दल के सदस्य नजर आए. ये टीमें मलबे में जिंदगी की तलाश कर रही हैं।

    आठ दिन बीतने के बाद भी बचाव अभियान थमा नहीं है. मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश लगातार जारी है. हर गुजरते दिन के साथ चुनौती बढ़ रही है. इसके बावजूद रेस्क्यू टीम का सर्च ऑपरेशन जारी है. चार हजार से ज्यादा लोगों के लापता होने से उनके परिवारों की चिंता बढ़ी हुई है।


    नेपाल बाढ़ में लापता पांच लोगों के शव भारत में मिले

    नेपाल में आई अचानक बाढ़ में बहकर लापता हुए पांच नेपाली नागरिकों के शव उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में गंडक नदी से बरामद हुए. मंगलवार को सभी शवों को सोनौली बॉर्डर पर नेपाल पुलिस को सौंप दिया गया. मृतकों में दो महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं. ये शव कुशीनगर के बरवा पट्टी और खड्डा इलाके से मिले थे. शवों को शाम करीब 4 बजे सोनौली लाया गया. इसके बाद नेपाल के बेलहिया थाने के प्रभारी सब-इंस्पेक्टर हरिराम डांगी को सौंप दिया गया।

    अधिकारियों के मुताबिक, शवों को नेपाल के बुटवल ले जाया गया है. वहां नेपाल पुलिस मृतकों की पहचान करेगी. इसके बाद शवों को उनके परिवारों को सौंपा जाएगा. नेपाल में लगातार हो रही बारिश और अचानक आई बाढ़ के कारण कई लोग बह गए हैं. सीमा से लगे भारतीय इलाकों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

    नेपाल और उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण महाराजगंज में कई नदियों का जलस्तर बढ़ गया है. वाल्मीकिनगर के गंडक बैराज से 1,50,200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है. महाराजगंज में पिछले 24 घंटे में 33.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. जिले में अब तक कुल 655.5 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है।

    मंगलवार दोपहर 2 बजे गंडक नदी का अपस्ट्रीम जलस्तर 355.30 फीट और डाउनस्ट्रीम जलस्तर 352.60 फीट दर्ज किया गया. रोहिन नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है. हालांकि महाव नाला खतरे के निशान से ऊपर है. इसका जलस्तर नौ फीट पहुंच गया है. खतरे का निशान पांच फीट है. राप्ती, चंदन और प्यास नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है. हालांकि ये नदियां अभी खतरे के निशान से नीचे हैं।

    अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर रख रहा है. एसडीएम, तहसील अधिकारियों, सिंचाई विभाग और बाढ़ नियंत्रण अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. निचले और संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव की तैयारी पूरी रखने को कहा गया है.महाराजगंज और नेपाल से लगे इलाकों में सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं।

  • संन्यास के बाद फ्रेंचाइजी क्रिकेट में धमाकेदार वापसी बेन स्टोक्स बने BBL के सबसे महंगे खिलाड़ी

    संन्यास के बाद फ्रेंचाइजी क्रिकेट में धमाकेदार वापसी बेन स्टोक्स बने BBL के सबसे महंगे खिलाड़ी


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स ने फ्रेंचाइजी क्रिकेट में वापसी करते हुए बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। स्टोक्स आगामी बिग बैश लीग यानी BBL के 2026-27 सीजन में एडिलेड स्ट्राइकर्स की ओर से खेलते नजर आएंगे। खास बात यह है कि उन्हें साइन करने के साथ ही स्टोक्स BBL इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बन गए हैं। उनकी डील ने विदेशी खिलाड़ियों की कीमत को लेकर लीग में नया बेंचमार्क तैयार कर दिया है। स्टोक्स पूरे सीजन के लिए टीम के साथ उपलब्ध रहेंगे और स्ट्राइकर्स को उनसे बल्ले और गेंद दोनों से मैच जिताने वाले प्रदर्शन की उम्मीद होगी।

    स्टोक्स का BBL से रिश्ता नया नहीं है। वह इससे पहले 2014-15 सीजन में मेलबर्न रेनेगेड्स के लिए खेल चुके हैं। उस दौरान उन्होंने चार मुकाबलों में हिस्सा लिया था। इसके बाद लंबे समय तक वह इस लीग से दूर रहे। अब करीब 12 साल बाद उनकी BBL में वापसी होने जा रही है। कई फ्रेंचाइजियां उन्हें अपनी टीम में शामिल करना चाहती थीं लेकिन अंत में एडिलेड स्ट्राइकर्स ने बाजी मार ली। टीम ने उनके साथ एक साल का करार किया है।

    BBL में हाल ही में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बदलाव किया गया है। लीग ने डायरेक्ट साइनिंग मॉडल को फिर से लागू किया है जिसके तहत फ्रेंचाइजियों को खिलाड़ियों को सीधे साइन करने और उनके लिए अधिक राशि खर्च करने की स्वतंत्रता मिलती है। इस नए सिस्टम के तहत स्टोक्स पूरे सीजन के लिए साइन किए जाने वाले पहले विदेशी खिलाड़ी बने हैं। रिपोर्ट के अनुसार उनकी डील करीब 3.5 करोड़ रुपये यानी लगभग 3 लाख 60 हजार अमेरिकी डॉलर की है। यह रकम पिछले प्लैटिनम स्तर के करीब 2.84 करोड़ रुपये के शीर्ष बैंड से भी अधिक है।

    एडिलेड स्ट्राइकर्स के कोच और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन ने स्टोक्स को क्रिकेट इतिहास के महान ऑलराउंडरों में शामिल बताया है। उनका मानना है कि स्टोक्स बड़े मुकाबलों में दबाव झेलने और मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। स्टोक्स ने भी ऑस्ट्रेलिया में खेलने को लेकर उत्साह जताया है और कहा है कि वह एडिलेड स्ट्राइकर्स के साथ जुड़ने के मौके को गंवाना नहीं चाहते थे। उनका पहला मुकाबला 16 दिसंबर को सिडनी थंडर के खिलाफ कैनबरा में होगा जबकि 23 दिसंबर को वह एडिलेड ओवल में अपनी नई टीम के घरेलू मैदान पर पहली बार उतरेंगे।

    स्टोक्स के लिए यह वापसी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने जून 2026 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। इसके बाद अब उनका फोकस फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से उन्होंने नियमित T20 क्रिकेट भी नहीं खेला है। आखिरी बार वह 2024 में द हंड्रेड में T20 क्रिकेट खेलते नजर आए थे जहां उन्हें हैमस्ट्रिंग चोट का सामना करना पड़ा था।

    IPL में भी स्टोक्स की मांग काफी ज्यादा रही है। वह तीन अलग-अलग टीमों का हिस्सा रह चुके हैं। 2017 में राइजिंग पुणे सुपरजायंट ने उन्हें 14.5 करोड़ रुपये में खरीदा था और वह उस समय IPL इतिहास के सबसे महंगे विदेशी खिलाड़ी बने थे। इसके बाद 2023 में चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें 16.25 करोड़ रुपये में अपने साथ जोड़ा। हालांकि चोट के कारण वह उस सीजन केवल दो मैच खेल सके। स्टोक्स के दोनों T20 शतक भी IPL में ही आए हैं।

    ऑस्ट्रेलिया में स्टोक्स की सबसे यादगार T20 पारियों में से एक 2022 T20 वर्ल्ड कप फाइनल की रही जब उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ नाबाद 52 रन बनाकर इंग्लैंड को चैंपियन बनाया था। अब BBL में उनकी वापसी पर सभी की नजरें होंगी। एडिलेड स्ट्राइकर्स को उम्मीद होगी कि स्टोक्स की पूरे सीजन उपलब्धता टीम को खिताब की मजबूत दावेदार बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • अमेरिका में निचले सदन में दिसंबर तक फंडिंग वाला बिल पारित…. शटडाउन का संकट टला?

    अमेरिका में निचले सदन में दिसंबर तक फंडिंग वाला बिल पारित…. शटडाउन का संकट टला?


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी संसद (American Parliament) के निचले सदन प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स-House of Representatives) ने मंगलवार को एक अस्थायी विधेयक (Provisional Bill) पारित किया। इसका मकसद संघीय सरकार के कामकाज के लिए दिसंबर की शुरुआत तक धन उपलब्ध कराना है। यह कदम इसलिए उठाया गया है, ताकि सांसदों के दोबारा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान सरकार का कामकाज बंद (शटडाउन-Shutdown) न हो।

    सांसदों के लिए सितंबर के आखिर में खत्म हो रहे वित्त वर्ष से पहले यह कदम उठाना जरूरी था। ऐसा नहीं करने पर सरकारी कामकाज के लिए पैसा खत्म हो सकता था। सांसद नहीं चाहते थे कि चुनाव प्रचार के दौरान सरकार के कामकाज को लेकर कोई संकट खड़ा हो। पिछले साल भी सरकार के कामकाज के लंबे समय तक बंद रहने से बड़ा संकट पैदा हुआ था।

    प्रतिनिधि सभा ने 370-48 वोट से विधेयक (Short-Term Funding Bill) पारित किया। सीनेट इसे पहले ही भारी बहुमत से मंजूर कर चुका है। अब यह विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा। उनकी मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा।

    प्रतिनिधि सभा की विनियोग समिति के अध्यक्ष सांसद टॉम कोल ने कहा कि इससे देश और लोगों को यह भरोसा मिलेगा कि सरकार का कामकाज चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि इससे यह भी तय रहेगा कि सेना के जवानों को उनका वेतन मिलता रहेगा।


    पिछले साल कितने लंबे शटडाउन हुए थे?

    पिछली शरद ऋतु में रिकॉर्ड 43 दिनों तक सरकारी कामकाज बंद रहा था। दोनों पार्टियों में उस टैक्स क्रेडिट को जारी रखने को लेकर सहमति नहीं बनी थी, जिसकी समय सीमा खत्म हो रही थी। यह टैक्स क्रेडिट अफोर्डेबल केयर एक्ट के तहत मिलने वाली स्वास्थ्य बीमा योजनाओं की लागत कम करता है।

    इसके बाद गृह सुरक्षा विभाग का कामकाज भी बंद हुआ था। यह शटडाउन 76 दिनों तक चला। बाद में सांसदों ने विभाग के बड़े हिस्से के लिए फंडिंग पर सहमति बना ली। हालांकि, आव्रजन कानून लागू करने से जुड़े कामों के लिए फंडिंग नहीं दी गई।


    सांसद इस बार क्या चाहते थे?

    सांसद नहीं चाहते थे कि चुनाव से पहले फिर ऐसी स्थिति बने। उन्होंने हाल के गतिरोध के लिए एक-दूसरे की पार्टी को जिम्मेदार ठहराया। प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष माइक जॉनसन ने वोटिंग से पहले पत्रकारों से कहा कि वे एक और डेमोक्रेटिक शटडाउन के खतरे से बचेंगे।

    वोटिंग के बाद जॉनसन ने कहा कि प्रतिनिधि सभा ने अपना काम कर दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को शक था कि रिपब्लिकन बहुमत अपने अंदर के मतभेदों को दूर कर पाएगा या नहीं। इसके बावजूद समर्थन जुटाया गया। उन्होंने कहा कि वे जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं और काम पूरा कर रहे हैं।


    डेमोक्रेट्स ने विधेयक का समर्थन क्यों किया?

    प्रतिनिधि सभा की विनियोग समिति में डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख सांसद रोजा डेलॉरो ने मंगलवार सुबह बंद कमरे में हुई बैठक में अपने साथी डेमोक्रेट सांसदों से बिल के पक्ष में वोट करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक उस प्रस्ताव से काफी बेहतर है, जिसे इस साल की गर्मियों की शुरुआत में प्रतिनिधि सभा ने लगभग पार्टी लाइन के आधार पर पारित किया था।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि विधेयक गृह सुरक्षा विभाग को बॉर्डर पेट्रोल के लिए पैसा ट्रांसफर करने से रोकता है। यह उस प्रस्तावित नियम को भी टालता है, जिसके तहत ट्रंप प्रशासन में राजनीतिक नियुक्ति पाने वाले अधिकारियों को उन संघीय अनुदानों को रोकने की ज्यादा ताकत मिल जाती, जिन्हें वे राष्ट्रपति के एजेंडे के मुताबिक नहीं मानते।

    ये बदलाव सीनेट ने अपने विधेयक के संस्करण को मंजूरी देते समय किए थे। डेमोक्रेट्स को चिंता है कि प्रशासन अनुदानों से जुड़े इस प्रस्तावित नियम का इस्तेमाल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले राज्यों से पैसा दूर करने के लिए कर सकता है। डेलॉरो ने नियम को टालने को एक अहम पहला कदम बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस नीति को लागू होने से रोकने के लिए अभी और काम करना होगा।

    डेलॉरो ने कहा कि किसी समुदाय को आपदा राहत मिलेगी या नहीं, यह इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि उसने पिछले चुनाव में किसे वोट दिया था।


    विधेयक में कितने समय की फंडिंग है?

    यह अस्थायी विधेयक संघीय एजेंसियों को आम तौर पर मौजूदा स्तर पर 11 दिसंबर तक फंडिंग देगा। इससे सांसदों को पूरे साल के लिए फंडिंग वाले विधेयक पर सहमति बनाने के लिए और समय मिलेगा। हालांकि, इस पर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना आसान नहीं होगा

    रिपब्लिकन सैन्य खर्च के लिए सैकड़ों अरब डॉलर की अतिरिक्त फंडिंग चाहते हैं। इसके साथ ही वे रक्षा से जुड़े नहीं ज्यादातर कार्यक्रमों के खर्च में कटौती करना चाहते हैं। डेमोक्रेट्स का कहना है कि वे इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर सकते। उनका जोर ऐसी द्विदलीय व्यवस्था पर है, जिसमें घरेलू कार्यक्रमों को भी रक्षा कार्यक्रमों के बराबर महत्व और फंडिंग मिले।

  • PM मोदी के जन्मदिन के बहाने देश को मथने की तैयारी… BJP शुरू करेगी जनसंपर्क अभियान

    PM मोदी के जन्मदिन के बहाने देश को मथने की तैयारी… BJP शुरू करेगी जनसंपर्क अभियान


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के जन्मदिन के बहाने भाजपा (BJP) ने जनसंपर्क यात्राओं और एक महीने के सेवा संकल्प अभियान (Service Pledge Campaign) के तहत पूरे देश को मथने, कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और लोगों से सीधा संवाद करने की व्यापक तैयारी की है।

    योजना के तहत पीएम की जन्मभूमि वडनगर और कर्मभूमि वाराणसी से अलग-अलग यात्रा निकालने की है। इन यात्राओं से जुड़ी टीमें देश के अलग-अलग हिस्सों में बतौर लोकसेवक मोदी की उपलब्धियों की जानकारी देगी। इन यात्राओं से अछूते हिस्से में सेवा संकल्प अभियान के तहत रैलियां, रक्तदान, स्वास्थ्य जांच शिविर के जरिये लोगों से संपर्क साधा जाएगा। सेवा संकल्प अभियान का तानाबाना सोमवार देर रात तक पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन, गृह मंत्री अमित शाह, महासचिव स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े समेत कई वरिष्ठ नेताओं की बैठक में बुना गया।


    ये है यात्रा का खाका

    17 सितंबर से वडनगर और वाराणसी से शुरू हो रही यात्रा देश के विभिन्न हिस्से से गुजरते हुए 17 अक्तूबर को क्रमश: वाराणसी और वडनगर पहुंचेगी। दोनों यात्रा प्रतिदिन सौ किमी के सफर के साथ अलग-अलग तीन-तीन हजार किमी क्षेत्र को कवर करेगी। प्रतिदिन कम से कम चार कार्यक्रम करेगी।

  • ईरान-अमेरिका जंग में तेजी के बीच कच्चे तेल के दामों में भारी इजाफा

    ईरान-अमेरिका जंग में तेजी के बीच कच्चे तेल के दामों में भारी इजाफा


    तेहरान।
    पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel) के सस्ता होने की उम्मीद कर रहे लोगों के लिए बुरी खबर है। ईरान और अमेरिका में जंग (Iran -America War) तेज हो गई है। मिसाइलों की बारिश ने क्रूड की कीमतों (Crude oil Prices) में आग लगा दी है। अब इंटरनेशन बेंचमार्क (International benchmark) ब्रेंट क्रूड तेजी से 100 डॉलर प्रति बैरल की ओर भाग रहा है। ऐसे में दुनिया भर में एक बार फिर ऊर्जा संकट के और बढ़ने के खतरे बढ़ गए हैं।

    बुधवार सुबह कारोबार शुरू होते ही कच्चे तेल की कीमतों में करीब 1.5% से अधिक की बढ़ोतरी हुई। यह उछाल मंगलवार के तेज उछाल के बाद आया है, जब दोनों तरह के तेल 4 डॉलर से ज्यादा महंगे हो गए थे। ब्लूमबर्ग के अनुसार वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का दाम सुबह 7 बजे के 1.61 डॉलर प्रति बैरल चढ़कर 91.83 डॉलर पर कारोबार कर रहा था और अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 1.91 डॉलर प्रति बैरल चढ़कर 96.56 डॉलर पर था।


    अमेरिका-ईरान के बीच रातभर मिसाइलों की बारिश

    अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने पलटवार किया। दोनों देशों के बीच हफ्तों में यह सबसे गंभीर झड़प है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ये हमले ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की उन हालिया हरकतों के जवाब में किए गए, जिसमें उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में व्यापारिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर हमले की कोशिश की थी।


    होर्मुज पर संकट गहरा

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमलों से होर्मुज के रास्ते और भी ज्यादा बंद हो जाएंगे। गौरतलब है कि इसी रास्ते से दुनिया की कुल पांचवीं तेल खपत गुजरती थी, लेकिन अब ईरान ने इसे व्यावसायिक जहाजों के लिए प्रभावी रूप से बंद कर दिया है।


    ईरान की जवाबी कार्रवाई और नए हमले

    IRGC ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और दावा किया कि बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक मारे गए। ईरानी मीडिया के मुताबिक, बहरीन में अमेरिकी बेस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमला किया गया। जॉर्डन की सेना ने 13 में से 10 मिसाइलें हवा में ही नष्ट कर दीं। अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक किसी भी नुकसान की पुष्टि नहीं की है। कुवैत ने भी दुश्मन ड्रोन गतिविधि के खिलाफ अपनी सेना तैनात कर दी है।


    टैंकरों पर हमले

    पिछले सप्ताहांत (जुलाई के बाद पहली बार) झड़पें तेज हुईं। सोमवार को होर्मुज से निकलते दो टैंकरों पर भी हमले हुए, जिससे तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है और कारोबारी वैकल्पिक रास्ते तलाशने पर मजबूर हैं।