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  • जबलपुर में छेड़खानी के विवाद ने लिया हिंसक रूप, बुजुर्ग पर लाठियों से हमला, इलाज के दौरान तोड़ा दम

    जबलपुर में छेड़खानी के विवाद ने लिया हिंसक रूप, बुजुर्ग पर लाठियों से हमला, इलाज के दौरान तोड़ा दम

    जबलपुर । जबलपुर के पनागर थाना क्षेत्र में महिला के साथ कथित छेड़खानी का विरोध करना उसके बुजुर्ग ससुर को भारी पड़ गया। महिला की शिकायत के बाद आरोपी को समझाने पहुंचे 75 वर्षीय प्यारेलाल चक्रवर्ती पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया। इस मारपीट में उन्हें गंभीर चोटें आईं और कई दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 30 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले में हत्या की धाराएं बढ़ाते हुए पिता और उसके दो बेटों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल की गई लाठियां भी जब्त की हैं।

    पुलिस के मुताबिक घटना 22 अक्टूबर की सुबह की है। पनागर थाना क्षेत्र में रहने वाली 25 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वह सुबह करीब 5 बजे किसी काम से घर से बाहर गई थी। काम पूरा करने के बाद जब वह वापस लौट रही थी तभी गांव के रहने वाले राजेश चक्रवर्ती ने कथित तौर पर गलत नीयत से उसका हाथ पकड़ लिया। महिला ने विरोध करते हुए अपना हाथ छुड़ाया। आरोप है कि इस दौरान राजेश ने उसका मंगलसूत्र भी तोड़ दिया। घटना से परेशान महिला घर पहुंची और अपने पति के साथ सास और ससुर को पूरी बात बताई।

    महिला की शिकायत सुनने के बाद उसके ससुर प्यारेलाल चक्रवर्ती आरोपी राजेश को समझाने के लिए पहुंचे थे। परिवार को उम्मीद थी कि बातचीत के जरिए विवाद सुलझ जाएगा लेकिन मामला शांत होने के बजाय बढ़ गया। पुलिस के अनुसार इस दौरान राजेश के साथ उसका भाई भागचंद चक्रवर्ती और पिता कालीचरण चक्रवर्ती भी मौजूद थे। तीनों ने पहले प्यारेलाल के साथ गाली-गलौज की और फिर कथित तौर पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

    हमले में प्यारेलाल के सिर के अलावा हाथ-पैर और पीठ पर गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। चोटों की गंभीरता को देखते हुए उनका इलाज लगातार जारी था। परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द स्वस्थ होकर घर लौटेंगे लेकिन 30 अक्टूबर की शाम करीब 6:30 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार में शोक का माहौल है।

    पुलिस को 31 अक्टूबर को अस्पताल से उनकी मौत की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। शुरुआत में मारपीट और चोटों से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था लेकिन घायल बुजुर्ग की मौत होने के बाद पुलिस ने प्रकरण में हत्या की धाराएं बढ़ा दीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई।

    पुलिस ने पूछताछ के लिए कालीचरण चक्रवर्ती उम्र 75 वर्ष उसके बेटे भागचंद चक्रवर्ती उम्र 42 वर्ष और राजेश चक्रवर्ती उम्र 32 वर्ष को हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद शनिवार और रविवार की दरमियानी रात तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई लाठियां भी जब्त कर ली हैं। फिलहाल मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।

  • जबलपुर में सूर्या हाफ मैराथन का काउंटडाउन शुरू, 10 हजार से ज्यादा धावक दौड़कर देंगे फिटनेस और स्वच्छता का संदेश

    जबलपुर में सूर्या हाफ मैराथन का काउंटडाउन शुरू, 10 हजार से ज्यादा धावक दौड़कर देंगे फिटनेस और स्वच्छता का संदेश


    जबलपुर । जबलपुर में सूर्या हाफ मैराथन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। आगामी 22 नवंबर को आयोजित होने वाली इस बड़ी खेल प्रतियोगिता से पहले रविवार सुबह धावकों ने ट्रायल रन में हिस्सा लिया। सुबह करीब 6 बजे पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम यानी राइट टाउन स्टेडियम से दौड़ की शुरुआत हुई। भारतीय सेना और नगर निगम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली इस मैराथन को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है। ट्रायल रन के जरिए आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं को परखने के साथ ही धावकों को दौड़ के मार्ग और तैयारियों से परिचित कराने का प्रयास किया गया।

    सूर्या हाफ मैराथन का उद्देश्य केवल एक खेल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं है बल्कि शहरवासियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। इस आयोजन के माध्यम से खेल और फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ स्वच्छता और अनुशासन का संदेश दिया जाएगा। आयोजकों को उम्मीद है कि 22 नवंबर को होने वाली मुख्य मैराथन में 10 हजार से अधिक धावक शामिल होंगे। इतनी बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की मौजूदगी को देखते हुए आयोजन की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    ट्रायल रन के दौरान आयोजन से जुड़े लोगों ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। धावकों की आवाजाही और दौड़ के दौरान सामने आने वाली संभावित चुनौतियों को समझने की कोशिश की गई। मुख्य आयोजन में किसी तरह की अव्यवस्था न हो इसके लिए सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर पहले से योजना तैयार की जा रही है। खास तौर पर धावकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है ताकि दौड़ के दौरान किसी भी प्रतिभागी को परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इसी सिलसिले में महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू की अध्यक्षता में तैयारियों की समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में भारतीय सेना के कर्नल सीएस मैनी यातायात विभाग के डीएसपी शुक्ला और नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान मैराथन के आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने धावकों की सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर आवश्यक इंतजाम करने पर जोर दिया। इसके अलावा दौड़ के मार्ग पर पेयजल की उपलब्धता और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की रणनीति पर भी विचार किया गया।

    मैराथन का आयोजन पंडित रविशंकर शुक्ल स्टेडियम से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेगा। निर्धारित रूट के अनुसार धावक अशोका होटल चौक तीनपत्ती चौक और महाराणा प्रताप चौक होते हुए नौदरा ब्रिज पहुंचेंगे। इसके बाद रसल चौक जबलपुर हॉस्पिटल ब्लूम चौक और नवभारत प्रेस से गुजरते हुए पंकज होटल तथा गौमाता चौक की ओर बढ़ेंगे। यहां से दौड़ वापस राइट टाउन स्टेडियम पहुंचेगी। इस मार्ग को लेकर यातायात प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों को व्यवस्थित करने की तैयारी की जा रही है।

    सूर्या हाफ मैराथन के आयोजन से जबलपुर को खेल और फिटनेस के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। सेना और नगर निगम की संयुक्त पहल से शहर के युवाओं और आम नागरिकों को दौड़ने तथा नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। ट्रायल रन के बाद अब मुख्य आयोजन की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। 22 नवंबर को हजारों धावकों की भागीदारी के साथ जबलपुर की सड़कों पर खेल भावना और उत्साह का नजारा देखने को मिल सकता है।

  • पंचकूला के स्कूल में 6 साल की बच्ची पर खौफनाक हमला, तीसरी के छात्र ने ईंट से सिर पर किए कई वार, स्टाफ पर FIR

    पंचकूला के स्कूल में 6 साल की बच्ची पर खौफनाक हमला, तीसरी के छात्र ने ईंट से सिर पर किए कई वार, स्टाफ पर FIR


    पंचकूला । हरियाणा के पंचकूला के एक प्रसिद्ध स्कूल में छह साल की KG की छात्रा के साथ हुई हिंसक घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले करीब आठ साल के छात्र ने बच्ची पर हमला किया। उसने पहले बच्ची को बेंच पर पटका और फिर बाल पकड़कर जमीन पर घसीटा। इसके बाद ईंट से उसके सिर और चेहरे पर कई वार किए। करीब 96 सेकेंड तक चली यह घटना कक्षा में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। बच्ची को गंभीर हालत में चंडीगढ़ के PGI में भर्ती कराया गया था। परिवार के मुताबिक अब उसकी हालत में सुधार है। घटना के बाद पुलिस ने स्कूल स्टाफ के खिलाफ FIR दर्ज की है और स्कूल प्रबंधन की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।

    यह घटना गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे की बताई जा रही है। मामले का पता उस समय चला जब स्कूल की छुट्टी के बाद बच्ची को लेने ऑटो चालक पहुंचा। बच्ची वहां नहीं मिली तो उसने परिजनों को इसकी जानकारी दी। परिवार के लोग तुरंत स्कूल पहुंचे और बच्ची की तलाश शुरू की। बच्ची के चाचा के मुताबिक जिस छात्र पर हमला करने का आरोप है उसी ने परिवार को बताया कि बच्ची ऊपर कमरे में पड़ी है। परिजन जब वहां पहुंचे तो बच्ची खून से लथपथ हालत में मिली। उसे देखकर उसके पिता की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गए।

    परिजन बच्ची को पहले अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए चंडीगढ़ PGI रेफर कर दिया। परिवार के अनुसार बच्ची का इलाज जारी है और उसकी स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। 31 अक्टूबर की रात उसने अपनी मां के हाथ से खाना भी खाया। परिवार ने बच्ची के जल्द स्वस्थ होने की कामना करने वाले लोगों का आभार जताया है।

    स्कूल के CCTV फुटेज में हमले की गंभीरता सामने आई है। फुटेज के मुताबिक छात्र ने बच्ची को पकड़कर बेंच पर सिर के बल पटका। इसके बाद उसके बाल पकड़कर नीचे गिराया और सिर तथा पेट पर लात मारी। फिर वह कक्षा के दूसरे हिस्से से ईंट लेकर आया और बच्ची पर हमला करने लगा। वीडियो में वह बार बार ईंट से उसके सिर और चेहरे पर वार करता दिखाई देता है। बच्ची जमीन पर पड़ी दर्द से परेशान होती रही। हमले के दौरान छात्र ने उसे दोबारा बाल पकड़कर घसीटा और जाते समय भी सिर पर लात मारी। घटना के दृश्य बेहद विचलित करने वाले हैं इसलिए उनका प्रदर्शन नहीं किया जा रहा है।

    मामले की जानकारी मिलने के बाद सेक्टर-20 थाना पुलिस स्कूल पहुंची। थाना प्रभारी यशदीप और जांच अधिकारी प्रदीप कुमार ने स्कूल प्रबंधन से पूछताछ की है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय कक्षा में निगरानी की व्यवस्था कैसी थी और बच्ची पर हमला होने के दौरान स्कूल स्टाफ कहां था। पंचकूला की DCP अदिति सिंह के मुताबिक मामले में स्कूल की लापरवाही सामने आई है और स्टाफ के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हमला करने वाले नाबालिग छात्र की काउंसिलिंग विशेषज्ञों से कराई जा रही है। पुलिस उसके माता-पिता से भी पूछताछ कर रही है ताकि घटना की परिस्थितियों और बच्चे की पारिवारिक पृष्ठभूमि को समझा जा सके।

    हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज देखना तक मुश्किल है। मामले की जांच के लिए मुख्यालय स्तर पर कमेटी बनाई गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाए जाएंगे। घटना के बाद स्कूल के बाहर अभिभावकों ने भी नाराजगी जताई और प्रबंधन के खिलाफ विरोध किया। अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि इतनी गंभीर घटना स्कूल परिसर में कैसे हुई और बच्ची की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था कहां चूक गई।
  • ग्वालियर में महिला की हत्या की गुत्थी उलझी, विकृत चेहरे से AI भी नहीं बना सका स्केच, अब गुमशुदा महिलाओं का रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस

    ग्वालियर में महिला की हत्या की गुत्थी उलझी, विकृत चेहरे से AI भी नहीं बना सका स्केच, अब गुमशुदा महिलाओं का रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस


    ग्वालियर । ग्वालियर में रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में मिली अज्ञात महिला की हत्या का मामला 18 दिन से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अनसुलझा है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मृतका की पहचान करना है। इसके लिए आधुनिक तकनीक से लेकर फॉरेंसिक जांच तक का सहारा लिया गया लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली। मृतका की उम्र करीब 35 से 40 साल के बीच आंकी गई है। उसके सिर पर गंभीर चोट के निशान मिले थे। पहचान के प्रयासों में नाकामी मिलने के बाद अब ग्वालियर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी आठ जिलों से गुमशुदा महिलाओं का रिकॉर्ड मांगा है। पुलिस इन जानकारियों का मिलान मृतका के हुलिए से कर रही है ताकि उसकी पहचान सामने आ सके।

    मामला महाराजपुरा थाना क्षेत्र के महू जमार गांव का है। 13 अक्टूबर की सुबह रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में एक महिला का शव मिला था। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। शव की स्थिति और सिर पर गंभीर चोट के निशान देखकर हत्या की आशंका सामने आई। पुलिस के अनुसार महिला की पहचान छिपाने के उद्देश्य से शव को सुनसान जगह पर फेंका गया हो सकता है। हालांकि हत्या के पीछे की वजह और वारदात को अंजाम देने वालों के बारे में अभी कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है।

    मृतका की पहचान के लिए पुलिस ने कई स्तर पर प्रयास किए। फॉरेंसिक और तकनीकी टीम को जांच में लगाया गया। पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से महिला के चेहरे का संभावित स्केच तैयार कराने की कोशिश भी की। लेकिन शव ज्यादा डीकंपोज हो जाने और चेहरा विकृत होने के कारण तकनीक से सटीक चेहरा तैयार नहीं हो सका। इस वजह से पुलिस को पहचान की दिशा में अपेक्षित मदद नहीं मिल पाई।

    घटनास्थल और आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की गई। पुलिस अब तक 150 से ज्यादा कैमरों के फुटेज खंगाल चुकी है। इन फुटेज के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की गई कि वारदात के आसपास कोई संदिग्ध व्यक्ति या वाहन वहां से गुजरा था या नहीं। इसके बावजूद अभी तक ऐसा कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला है जिससे मृतका की पहचान या संदिग्धों तक पहुंचा जा सके।

    इसके बाद पुलिस ने संभाग के दूसरे जिलों से भी मदद लेने का फैसला किया। ग्वालियर एसपी की ओर से ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी आठ जिलों के पुलिस अधीक्षकों को आधिकारिक पत्र भेजा गया है। इसमें पिछले कुछ दिनों में लापता हुई 35 से 40 साल की महिलाओं की सूची और उनसे जुड़ा पूरा विवरण मांगा गया है। पुलिस का प्रयास है कि गुमशुदगी की रिपोर्ट में दर्ज हुलिए और अन्य जानकारियों का मृतका से मिलान किया जा सके। इससे महिला की पहचान होने के साथ उसके परिवार और आखिरी बार देखे जाने से जुड़ी अहम जानकारी भी मिल सकती है।

    मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए मृतका का पैनल पोस्टमार्टम कराया गया है। इससे मौत के वास्तविक कारण और समय के बारे में अधिक सटीक जानकारी मिलने की उम्मीद है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पुलिस तकनीकी सर्विलांस सीसीटीवी फुटेज और अलग-अलग जिलों से मिल रही गुमशुदा महिलाओं की जानकारी को जोड़कर मामले की कड़ियां तलाश रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच लगातार जारी है और सभी संभावित पहलुओं पर काम किया जा रहा है। अधिकारियों ने जल्द ही मामले का खुलासा करने और आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया है। फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि रेलवे ट्रैक के पास मिली महिला कौन थी और उसकी हत्या किसने की। जब तक मृतका की पहचान नहीं होती तब तक इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना रहेगा।

  • अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या में 13.5% की बड़ी गिरावट, मास्टर्स प्रोग्राम से सबसे ज्यादा छात्र हुए कम

    अमेरिका में भारतीय छात्रों की संख्या में 13.5% की बड़ी गिरावट, मास्टर्स प्रोग्राम से सबसे ज्यादा छात्र हुए कम

    नई दिल्ली । अमेरिका में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में एक साल के भीतर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में अमेरिका में सक्रिय भारतीय छात्रों की संख्या घटकर 3,16,893 रह गई। अक्टूबर 2025 में यह आंकड़ा 3,66,258 था। इस तरह एक साल के दौरान भारतीय छात्रों की संख्या में 49,365 की कमी आई है, जो लगभग 13.5 प्रतिशत की गिरावट दर्शाती है। हालांकि, इस कमी के बावजूद अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के सबसे बड़े समूह के रूप में भारत की स्थिति बरकरार है।

    स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर इंफॉर्मेशन सिस्टम (एसईवीआईएस) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सभी देशों के सक्रिय अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या भी घटी है। अक्टूबर 2025 में यह संख्या 12,83,240 थी, जो अक्टूबर 2026 में घटकर 11,92,572 रह गई। इस प्रकार कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में लगभग 7.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। भारतीय छात्रों की संख्या में आई गिरावट इस समग्र कमी से अधिक रही है।

    अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के दूसरे सबसे बड़े समूह चीन से आने वाले विद्यार्थियों का है। इस श्रेणी में भी एक साल के दौरान कमी दर्ज की गई। अक्टूबर 2025 में चीन के 2,45,038 सक्रिय छात्र अमेरिका में थे, जबकि अक्टूबर 2026 में यह संख्या घटकर 2,20,157 रह गई। इस तरह चीनी छात्रों की संख्या में लगभग 10.2 प्रतिशत की गिरावट आई है।

    अंतरराष्ट्रीय छात्रों के कुल आंकड़ों में भारत की हिस्सेदारी भी कम हुई है। अक्टूबर 2025 में अमेरिका में सक्रिय विदेशी छात्रों में भारतीय विद्यार्थियों की हिस्सेदारी लगभग 28.5 प्रतिशत थी। अक्टूबर 2026 में यह घटकर करीब 26.6 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद भारत सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्र भेजने वाला देश बना हुआ है।

    भारतीय छात्रों की संख्या में सबसे ज्यादा कमी मास्टर्स यानी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सामने आई है। अक्टूबर 2025 में अमेरिका के मास्टर्स प्रोग्राम में 2,92,929 भारतीय छात्र नामांकित थे। अक्टूबर 2026 में यह संख्या घटकर 2,34,034 रह गई। इस स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय विद्यार्थियों का बड़ा हिस्सा अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए मास्टर्स पाठ्यक्रमों को चुनता रहा है, इसलिए इस श्रेणी में आई कमी कुल आंकड़ों को भी प्रभावित कर रही है।

    हालांकि, डॉक्टोरल यानी पीएचडी स्तर पर इसके विपरीत रुझान देखने को मिला है। अक्टूबर 2025 में इस स्तर पर भारतीय छात्रों की संख्या 28,609 थी, जो अक्टूबर 2026 में बढ़कर 41,729 हो गई। यानी पीएचडी में भारतीय विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ा है। वहीं, स्नातक यानी बैचलर स्तर पर छात्रों की संख्या 38,522 से घटकर 36,011 रह गई।

    आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में अमेरिका में सक्रिय भारतीय छात्रों में 1,95,341 पुरुष और 1,21,552 महिला विद्यार्थी शामिल थे। एसईवीआईएस के आंकड़ों में उन विद्यार्थियों को शामिल किया जाता है जिनका रिकॉर्ड संबंधित सिस्टम में सक्रिय रहता है। इसमें ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) के तहत रहने वाले छात्र भी शामिल हैं। इसलिए ये आंकड़े किसी एक महीने की स्थिति बताते हैं, न कि पूरे वर्ष अमेरिका पहुंचे विद्यार्थियों की कुल संख्या।

    छात्रों की संख्या में गिरावट ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका में छात्र वीजा से जुड़ी जांच प्रक्रिया सख्त हुई है। ओपीटी और एसटीईएम एक्सटेंशन पर नई फीस लगाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। इसके साथ ही कानूनी आव्रजन के विभिन्न रास्तों को लेकर नियमों और प्रक्रियाओं में सख्ती बढ़ाई जा रही है। इन परिस्थितियों के बीच भारतीय मूल के नेताओं के एक गैर-लाभकारी नेटवर्क ने 30 अक्टूबर को जारी बयान में अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या घटने की बात कही। संगठन ने इस रुझान को मौजूदा चुनावी माहौल में भारत-विरोधी बयानबाजी से भी जोड़ा है।

    दक्षिण एशिया के अन्य देशों से आने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है। नेपाल के सक्रिय छात्रों की संख्या अक्टूबर 2025 में 35,273 थी, जो अक्टूबर 2026 में घटकर 33,992 रह गई। इस तरह अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की संख्या घटने का रुझान कई देशों में दिखाई दे रहा है, जबकि भारतीय छात्रों के मामले में मास्टर्स स्तर की गिरावट सबसे प्रमुख बदलाव बनकर सामने आई है।

  • वाराणसी में जुटेंगे दुनिया के दार्शनिक विचारक, अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी में डॉ. प्रीति अदाणी देंगी अहम संबोधन

    वाराणसी में जुटेंगे दुनिया के दार्शनिक विचारक, अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी में डॉ. प्रीति अदाणी देंगी अहम संबोधन

    नई दिल्ली । दुनिया की प्राचीन दार्शनिक और सभ्यतागत परंपराओं के बीच संवाद को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 2 से 4 नवंबर 2026 तक अंतरराष्ट्रीय ‘अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के विचारक, शिक्षाविद, विशेषज्ञ और ज्ञान परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधि एक मंच पर जुटेंगे। कार्यक्रम में अदाणी फाउंडेशन की संस्थापक एवं चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी भी शामिल होंगी और अपने विचार रखेंगी। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग सभ्यताओं के दार्शनिक दृष्टिकोण को एक साथ लाकर वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है।

    इस सम्मेलन में प्राचीन दर्शन और आधुनिक तकनीक के बीच संबंधों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि नई तकनीक विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं के बीच संवाद को किस तरह आसान बना सकती है। इसके साथ ही ज्ञान की अलग-अलग परंपराओं के बीच आपसी समझ और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा होगी।

    इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए वाराणसी को चुना जाना भी विशेष महत्व रखता है। गंगा नदी के किनारे बसा यह शहर दुनिया के सबसे प्राचीन और लगातार आबाद रहने वाले नगरों में शामिल है। सदियों से वाराणसी शिक्षा, दर्शन, आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां हिंदू, बौद्ध और जैन ज्ञान परंपराओं का ऐतिहासिक जुड़ाव भी देखने को मिलता है। ऐसे में विभिन्न सभ्यताओं के विचारों पर चर्चा के लिए इस शहर को उपयुक्त स्थान माना गया है।

    संगोष्ठी का आधार यह विचार है कि वर्तमान समय में दुनिया जिन जटिल समस्याओं से गुजर रही है, उनका समाधान केवल वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से संभव नहीं है। भू-राजनीतिक तनाव, पर्यावरणीय संकट और तेजी से बदलती तकनीक जैसी चुनौतियों के बीच नैतिक मूल्यों, जिम्मेदार नेतृत्व और सांस्कृतिक समझ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में इन विषयों को दार्शनिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाएगा।

    कार्यक्रम के दौरान यूनानी दार्शनिक अरस्तू और चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के विचारों के साथ हिंदू, बौद्ध, जैन, कैथोलिक और इस्लामी परंपराओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। विभिन्न विचारधाराओं में मौजूद समानताओं और उनके बीच के अंतर पर विशेषज्ञ अपनी बात रखेंगे। विशेष रूप से सद्गुण आधारित नैतिकता, सुशासन और सत्ता तथा शक्ति के उचित एवं नैतिक इस्तेमाल जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

    आयोजन के मुख्य सत्र 2 और 3 नवंबर को होंगे। इन सत्रों में विशेषज्ञों के व्याख्यान, विषय आधारित चर्चाएं और तुलनात्मक दर्शन से जुड़े संवाद आयोजित किए जाएंगे। वैश्विक शासन व्यवस्था और शांति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार रखे जाएंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक, खासकर एआई आधारित भाषा और संवाद उपकरणों के इस्तेमाल पर चर्चा होगी। इन तकनीकों के माध्यम से अलग-अलग भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान और विचारों तक पहुंच आसान बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

    सम्मेलन का अंतिम दिन यानी 4 नवंबर सांस्कृतिक भ्रमण और ऐतिहासिक विरासत को समझने के लिए निर्धारित किया गया है। इस दौरान प्रतिभागी गंगा घाटों का भ्रमण करेंगे और गंगा आरती में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रमुख मंदिरों के दर्शन तथा बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल सारनाथ की यात्रा भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

    इस तरह तीन दिवसीय संगोष्ठी में एक ओर प्राचीन दार्शनिक विचारों और नैतिक मूल्यों पर चर्चा होगी, तो दूसरी ओर आधुनिक दुनिया की चुनौतियों के समाधान में उनकी प्रासंगिकता समझने का प्रयास किया जाएगा। सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों को वाराणसी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से देखने का अवसर भी मिलेगा।

  • भूमध्य सागर में भारतीय नौसेना की मौजूदगी बढ़ी, आईएनएस त्रिशूल ग्रीस के सूदा बे पहुंचा…

    भूमध्य सागर में भारतीय नौसेना की मौजूदगी बढ़ी, आईएनएस त्रिशूल ग्रीस के सूदा बे पहुंचा…


    नई दिल्ली ।
    भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल से लैस युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल भूमध्य सागर में अपनी तैनाती के तहत 31 अक्टूबर को ग्रीस के सूदा बे बंदरगाह पहुंचा। इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत और ग्रीस की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग को मजबूत करना और दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों के बीच पेशेवर संपर्क बढ़ाना है। इस पड़ाव के दौरान कई सैन्य और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    ग्रीस में प्रवास के दौरान आईएनएस त्रिशूल के चालक दल के सदस्य वहां की नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों और एथेंस स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक गतिविधियों से जुड़े पेशेवर विषयों पर चर्चा होगी। साथ ही भारतीय और ग्रीक नौसैनिकों को एक-दूसरे के युद्धपोतों का निरीक्षण करने का अवसर मिलेगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के कामकाज, संचालन प्रक्रियाओं और क्षमताओं को समझना है।

    इस यात्रा में सैन्य गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक संपर्क को भी महत्व दिया गया है। इसके तहत दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम और आपसी संवाद के अवसर उपलब्ध होंगे। इससे एक-दूसरे की परंपराओं और कार्यशैली को समझने में मदद मिलेगी। इस तरह बंदरगाह पर होने वाला यह पड़ाव केवल औपचारिक नौसैनिक यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का अवसर भी बनेगा।

    आईएनएस त्रिशूल के जवान सूदा बे स्थित नौसैनिक सहायता केंद्र (एनएसए) और नाटो के समुद्री अवरोधन अभियान प्रशिक्षण केंद्र (एनएमआईओटीसी) की सुविधाओं का भी परिचय प्राप्त करेंगे। इन केंद्रों के दौरे के दौरान भारतीय नौसैनिक वहां उपलब्ध व्यवस्थाओं और प्रशिक्षण गतिविधियों को करीब से देख सकेंगे। इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित समुद्री प्रशिक्षण और सहायता संबंधी व्यवस्थाओं की जानकारी मिलेगी।

    यात्रा के दौरान युद्धपोत का चालक दल सूदा बे स्थित युद्ध समाधि स्थल पर भी पहुंचेगा। यहां सैनिकों की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इसके अलावा आईएनएस त्रिशूल को बंदरगाह पर आम लोगों के अवलोकन के लिए भी खोला जाएगा। इससे स्थानीय नागरिकों को भारतीय नौसेना के युद्धपोत को देखने और उसके बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

    ग्रीस पहुंचने से पहले आईएनएस त्रिशूल ब्रिटेन में भी नौसैनिक गतिविधियों का हिस्सा रहा है। भारतीय नौसेना के इस युद्धपोत ने ब्रिटेन की रॉयल नेवी के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास कोंकण-26 में भाग लिया था। इसके लिए आईएनएस त्रिशूल 8 अक्टूबर को ब्रिटेन के प्लायमाउथ बंदरगाह पहुंचा था। यहां 15 अक्टूबर तक दोनों देशों की नौसेनाओं ने संयुक्त अभ्यास किया।

    कोंकण-26 के दौरान समुद्र में जहाजों के बीच तालमेल, हवाई गतिविधियों और पानी के नीचे पनडुब्बियों से निपटने से संबंधित परिचालन क्षमताओं का अभ्यास किया गया। इसमें दोनों नौसेनाओं ने अलग-अलग परिस्थितियों में एक साथ काम करने की अपनी क्षमता को परखा। यह वार्षिक अभ्यास भारत और ब्रिटेन के बीच दो दशक से अधिक समय से जारी नौसैनिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    समय के साथ इस अभ्यास का दायरा और जटिलता बढ़ी है। इसमें अब ऐसी गतिविधियां भी शामिल हैं, जिनके तहत दोनों देशों की नौसेनाओं को विभिन्न समुद्री परिस्थितियों में समन्वय के साथ काम करना होता है। ब्रिटेन के बाद ग्रीस में आईएनएस त्रिशूल की मौजूदगी भारतीय नौसेना की अंतरराष्ट्रीय समुद्री गतिविधियों और विभिन्न देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है।

  • घर के सामने खेलते-खेलते लापता हुआ 3 साल का रितेश, 365 दिन बाद भी नहीं मिला सुराग, मां की टूटने लगी उम्मीद

    घर के सामने खेलते-खेलते लापता हुआ 3 साल का रितेश, 365 दिन बाद भी नहीं मिला सुराग, मां की टूटने लगी उम्मीद


    ग्वालियर। ग्वालियर के मोहनपुर गांव से एक साल पहले रहस्यमय तरीके से लापता हुआ मासूम रितेश पाल आज भी पुलिस और परिवार के लिए अनसुलझी पहेली बना हुआ है। 1 नवंबर 2025 को घर के सामने दूसरे बच्चों के साथ खेलते समय गायब हुए रितेश की तलाश में पुलिस ने कई स्तर पर जांच की। जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई और परिवार के कई सदस्यों से पूछताछ भी हुई। इसके बावजूद एक साल बीतने के बाद भी बच्चे का कोई पता नहीं चल सका है। बेटे की राह देख रही मां सपना पाल की उम्मीद अब धीरे-धीरे टूटने लगी है। उनका कहना है कि हर दिन इस इंतजार में गुजरता है कि कहीं बेटा वापस लौट आए और मां कहकर उन्हें पुकारे।

    सपना पाल ने अपने दर्द को बयां करते हुए कहा कि बेटे के बिना बीता यह एक साल उनके लिए जिंदगी का सबसे मुश्किल समय रहा है। एक मां के लिए अपने छोटे बच्चे से दूर रहना कितना तकलीफदेह होता है इसे वही महसूस कर सकती है। सपना का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत से ही परिवार के लोगों पर शक किया और उनसे लगातार पूछताछ करती रही। उनका कहना है कि परिवार का शायद ही कोई सदस्य बचा हो जिससे पुलिस ने सवाल जवाब न किए हों। सपना ने यह भी आरोप लगाया कि यदि किसी बड़े परिवार या कारोबारी का बच्चा लापता होता तो उसकी तलाश में ज्यादा गंभीरता दिखाई जाती। हालांकि ये उनके व्यक्तिगत आरोप हैं।

    रितेश के लापता होने की घटना 1 नवंबर 2025 की दोपहर की है। उस समय उसकी उम्र करीब तीन साल थी। वह मुरार क्षेत्र के मोहनपुर में काली माता मंदिर के पास स्थित झोपड़ी के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। दोपहर करीब 12:30 बजे तक वह वहीं मौजूद था। लगभग एक बजे जब उसकी मां सपना उसे दूध पिलाने के लिए बाहर पहुंचीं तो वह वहां नहीं मिला। परिवार ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद देर शाम मुरार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने तलाश शुरू की लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया।

    बच्चे के गायब होने के बाद शुरुआती आशंका जताई गई थी कि वह खेलते हुए आसपास के जंगल में चला गया होगा। इसके बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया। दस से अधिक टीमें बनाई गईं और सौ से ज्यादा जवानों ने इलाके में तलाश की। जंगल के रास्तों और आसपास के स्थानों को खंगाला गया। ड्रोन कैमरों की मदद से भी निगरानी की गई। जमीन से लेकर आसमान तक तलाश की गई लेकिन रितेश का कोई पता नहीं चला।

    जांच के दौरान पुलिस ने परिवार के हालात और आपसी संबंधों को भी ध्यान में रखा। सपना और रितेश के पिता दलबीर सिंह के बीच मनमुटाव चल रहा था और दोनों करीब आठ महीने से अलग रह रहे थे। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा पिता के साथ जबकि छोटा बेटा रितेश मां के पास रह रहा था। पुलिस ने मां और पिता के अलावा मामा मामी ताऊ और बाबा सहित परिवार के कई लोगों से पूछताछ की। इसके बावजूद जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।

    पुलिस ने धार्मिक और पारिवारिक पहलुओं से भी जानकारी जुटाने की कोशिश की। दोनों परिवारों को गिरगांव महादेव मंदिर में शपथ लेने के लिए कहा गया था। 2 दिसंबर 2025 को दोनों पक्ष वहां पहुंचे और बच्चे के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही। इसके बाद भी कोई नया सुराग नहीं मिला। पति पत्नी के बीच विवाद को देखते हुए पुलिस ने किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका की आशंका पर भी जांच की लेकिन यह पहलू भी बेनतीजा रहा।

    इस मामले में रितेश के पिता दलबीर सिंह ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया था कि बच्चा मां के पास है। हालांकि अदालत ने याचिका खारिज कर दी। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि मामले में कई पहलुओं पर जांच की जा चुकी है और तलाश अब भी जारी है। प्रभारी एसपी जयराज कुबेर के मुताबिक फिलहाल कोई नया इनपुट नहीं मिला है लेकिन पुराने इनपुट के आधार पर छानबीन की जा रही है। पुलिस की एक टीम मामले से जुड़े लोगों पर नजर रखे हुए है। एक साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रितेश कहां है और वह अपनी मां के पास कब लौटेगा।

  • चेकिंग से बचने की कोशिश पड़ी भारी, नशे में कार दौड़ा रहे युवक की गाड़ी पेड़ से भिड़ी, पुलिस ने हिरासत में लिया

    चेकिंग से बचने की कोशिश पड़ी भारी, नशे में कार दौड़ा रहे युवक की गाड़ी पेड़ से भिड़ी, पुलिस ने हिरासत में लिया


    इंदौर । इंदौर में पुलिस की चेकिंग से बचने की कोशिश एक कार चालक को भारी पड़ गई। कनाडिया थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात पुलिस की नाकेबंदी देखकर नशे में धुत कार चालक ने अचानक यू-टर्न ले लिया। वह चेकिंग पॉइंट से करीब 300 मीटर पहले तेज रफ्तार में गाड़ी मोड़ने लगा। इसी दौरान कार अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और दोनों एयरबैग खुल गए। गनीमत रही कि एयरबैग खुलने से चालक को गंभीर चोट नहीं आई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे कार से बाहर निकाला और हिरासत में ले लिया। पुलिस ने उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और शराब के नशे में ड्राइविंग करने के मामले दर्ज किए हैं।

    पुलिस के मुताबिक शनिवार देर रात बायपास पर केटू होटल के पास ब्रिज के नीचे वाहनों की जांच के लिए चेकिंग पॉइंट बनाया गया था। यहां पुलिसकर्मी बैरिकेड्स लगाकर आने जाने वाले वाहनों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान राऊ निवासी हुजैफा पिता अब्दुल कय्यूब अपनी कार लेकर वहां पहुंचा। सामने पुलिस की चेकिंग और बैरिकेड्स देखकर वह घबरा गया। पुलिस के मुताबिक पकड़े जाने से बचने के लिए उसने चेकिंग स्थल तक पहुंचने के बजाय करीब 300 मीटर पहले ही कार को अचानक मोड़ दिया।

    तेज रफ्तार में अचानक यू-टर्न लेने के कारण चालक कार पर नियंत्रण नहीं रख सका। गाड़ी सड़क किनारे लगे पेड़ से जा टकराई। टक्कर के बाद कार के एयरबैग खुल गए। इससे चालक को गंभीर चोट लगने से बचाव हुआ। दुर्घटना की आवाज सुनकर और कार को टकराते देखकर मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने चालक को बाहर निकाला और उससे पूछताछ की। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान चालक के शराब के नशे में होने की बात सामने आई। इसके बाद उसके परिजनों को भी घटना की सूचना दी गई।

    पुलिस ने हुजैफा के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और शराब के नशे में गाड़ी चलाने से संबंधित बीएनएस की विभिन्न धाराओं में दो अलग-अलग अपराध दर्ज किए हैं। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस की चेकिंग से बचने के लिए अचानक दिशा बदलना न केवल चालक के लिए खतरनाक साबित हो सकता है बल्कि सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों की जान भी जोखिम में डाल सकता है। इस घटना में एयरबैग खुलने से चालक की जान बच गई लेकिन कार की हालत देखकर टक्कर की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    इधर शहर के विजयनगर थाना क्षेत्र में भी रविवार अलसुबह सड़क हादसा हुआ। रेडिसन चौराहे पर दो कारों के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों कारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। हालांकि पुलिस के मुताबिक इस दुर्घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आई। हादसे के बाद एक कार में सवार युवक और युवती अपनी गाड़ी मौके पर छोड़कर चले गए। पुलिस अब इस मामले में भी जानकारी जुटा रही है और दोनों घटनाओं में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

    लगातार हो रहे ऐसे हादसे एक बार फिर तेज रफ्तार और नशे में वाहन चलाने के खतरों को सामने लाते हैं। यातायात नियमों का पालन करना और शराब पीने के बाद वाहन न चलाना सड़क पर अपनी और दूसरों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

  • इंदौर के 4 बड़े चौराहों पर बदलेगा ट्रैफिक का पूरा सिस्टम, लेफ्ट टर्न रहेगा फ्री और रॉन्ग साइड चलने वालों पर लगेगी रोक

    इंदौर के 4 बड़े चौराहों पर बदलेगा ट्रैफिक का पूरा सिस्टम, लेफ्ट टर्न रहेगा फ्री और रॉन्ग साइड चलने वालों पर लगेगी रोक


    इंदौर । इंदौर शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अब चार प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक का नया पैटर्न लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। हाईकोर्ट की ओर से गठित समिति ने शहर के रसोमा चौराहा एलआईजी चौराहा लेंटर्न चौराहा और हुकुमचंद घंटाघर चौराहे को टेस्ट प्रोजेक्ट के लिए चुना है। इन स्थानों पर लेफ्ट टर्न को पूरी तरह फ्री रखने और रॉन्ग साइड से आने वाले वाहनों पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही यातायात की रफ्तार में बाधा बनने वाले स्पीड ब्रेकर भी हटाए जा रहे हैं। समिति का मानना है कि इन बदलावों से चौराहों पर वाहनों की आवाजाही आसान होगी और बार बार लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिल सकती है।

    शनिवार को हाईकोर्ट के अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति की पहली बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था और प्रमुख चौराहों पर लगने वाले जाम की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने माना कि कई चौराहों पर लेफ्ट टर्न की ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इसकी वजह से दूसरे रास्तों से निकलने वाले वाहन भी फंस जाते हैं और पूरे चौराहे पर यातायात प्रभावित होता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए चार स्थानों पर नई व्यवस्था का परीक्षण करने का निर्णय लिया गया।

    अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी के मुताबिक इन चारों चौराहों पर लेफ्ट टर्न की ओर सबसे ज्यादा जाम की स्थिति बनती है। इसलिए इस रास्ते को बाधा मुक्त रखने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए रॉन्ग साइड से आने वाले वाहनों को रोकना जरूरी माना गया है। कई बार वाहन चालक कम दूरी तय करने या जल्दी निकलने के चक्कर में गलत दिशा से वाहन ले आते हैं। इससे सामने से आने वाले वाहनों का रास्ता बाधित होता है और दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। नई व्यवस्था के तहत ऐसे वाहनों पर नियंत्रण किया जाएगा ताकि चौराहों पर यातायात व्यवस्थित तरीके से चल सके।

    समिति ने चौराहों पर लगे स्पीड ब्रेकर को भी जाम की एक वजह माना है। इनके कारण वाहनों की गति अचानक कम होती है और पीछे चल रहे वाहनों की कतार बढ़ने लगती है। ऐसे में चयनित स्थानों पर स्पीड ब्रेकर हटाने का काम भी किया जा रहा है। हालांकि यह पूरा प्रयोग फिलहाल परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। समिति इसके परिणामों पर नजर रखेगी और यह आकलन करेगी कि नई व्यवस्था से वास्तव में जाम कम हो रहा है या नहीं। यदि चारों चौराहों पर इसका सकारात्मक असर दिखाई देता है तो शहर के दूसरे प्रमुख चौराहों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जा सकती है।

    बैठक में यातायात सुधार के पुराने प्रयासों की समीक्षा करने पर भी सहमति बनी। इसके लिए हाईकोर्ट की ओर से पहले गठित समिति की रिपोर्ट मंगाई गई है। वर्तमान समिति उस रिपोर्ट में दिए गए सुझावों और उन पर हुई कार्रवाई का आकलन करेगी। इसके अलावा शहर में हर महीने यातायात जागरूकता अभियान चलाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना और गलत दिशा में वाहन चलाने जैसी आदतों पर रोक लगाना है।

    समिति में अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी के साथ शासकीय अधिवक्ता डॉ. अमित भाटिया कलेक्टर शिवम वर्मा नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल इंदौर स्मार्ट सिटी के सीईओ डीसीपी ट्रैफिक और आईआईटी दिल्ली के सिविल इंजीनियर अंशुल अग्रवाल शामिल हैं। समिति की अगली बैठक 10 नवंबर को होगी। वहीं इंदौर की यातायात व्यवस्था से जुड़ी याचिकाओं पर हाईकोर्ट में 30 नवंबर को सुनवाई प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस दौरान समिति शहर में किए जा रहे सुधारों और चार चौराहों पर शुरू किए गए टेस्ट प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट पेश कर सकती है। अब इन बदलावों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वाहन चालक नियमों का कितना पालन करते हैं और प्रशासन नई व्यवस्था को कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाता है।