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  • प्याज, अदरक और लहसुन ने बिगाड़ा किचन का बजट, जानें अगस्त में क्या हुआ महंगा, महंगाई दर 4.82 फीसदी

    प्याज, अदरक और लहसुन ने बिगाड़ा किचन का बजट, जानें अगस्त में क्या हुआ महंगा, महंगाई दर 4.82 फीसदी


    नई दिल्ली।
    सब्जियों और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की कीमतों में बदलाव का असर अब आम लोगों की जेब पर दिखाई देने लगा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश की खुदरा महंगाई दर अगस्त 2026 में बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी। खास तौर पर अदरक, प्याज और लहसुन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने रसोई का बजट प्रभावित किया है।

    हालांकि, महंगाई बढ़ने के बीच कुछ जरूरी सामान और सब्जियां ऐसी भी रहीं, जिनकी कीमतों में कमी दर्ज की गई। टमाटर और आलू सस्ते हुए, जबकि कुछ अन्य वस्तुओं के दाम भी नीचे आए। आइए जानते हैं अगस्त में किन चीजों की कीमत बढ़ी और किन सामानों ने राहत दी।

    ये चीजें हुईं सबसे ज्यादा महंगी

    अगस्त के दौरान अदरक, प्याज और लहसुन की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली।

    • अदरक: कीमत में 73.82 फीसदी की बढ़ोतरी
    • प्याज: दाम 48.27 फीसदी बढ़े
    • लहसुन: कीमत 43.60 फीसदी बढ़ी
    • सोना, हीरा और प्लेटिनम के आभूषण: 35.53 फीसदी महंगे हुए

    अदरक की कीमतों में हाल के हफ्तों में भी तेजी देखी गई है। कई बाजारों में इसका भाव करीब 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। लहसुन भी करीब 200 से 400 रुपये किलो के स्तर पर बिक रहा है। वहीं कई खुदरा बाजारों में प्याज की कीमत करीब 50 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

    इन चीजों ने दी महंगाई में राहत

    महंगाई के बीच कुछ जरूरी सामान और सब्जियों के दाम कम होने से उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत भी मिली।

    • टमाटर: 31.09 फीसदी सस्ता हुआ
    • आलू: कीमत में 13.14 फीसदी की कमी
    • मोटर कार और जीप: 6.72 फीसदी सस्ती हुईं
    • भिंडी: दाम 5.41 फीसदी घटे
    • परवल और कुंदरू: कीमतों में 3.60 फीसदी की गिरावट

    जनवरी से अगस्त तक लगातार बढ़ी महंगाई

    साल 2026 में खुदरा महंगाई दर में लगातार बढ़ोतरी का रुझान देखने को मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महीनेवार खुदरा महंगाई दर इस प्रकार रही:

    महीना खुदरा महंगाई दर
    जनवरी 2.75%
    फरवरी 3.21%
    मार्च 3.40%
    अप्रैल 3.48%
    मई 3.93%
    जून 4.38%
    जुलाई 4.45%
    अगस्त 4.82%

    इन आंकड़ों से साफ है कि जनवरी 2026 में 2.75 फीसदी रही खुदरा महंगाई अगस्त तक बढ़कर 4.82 फीसदी पर पहुंच गई। यानी साल की शुरुआत के मुकाबले अगस्त में महंगाई दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। प्याज, अदरक और लहसुन जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है, हालांकि टमाटर और आलू जैसी सब्जियों में आई गिरावट कुछ राहत दे रही है।

  • IND vs AFG : दूसरा T-20 आज…. संजू की जगह वैभव सूर्यवंशी को मिल सकता है मौका

    IND vs AFG : दूसरा T-20 आज…. संजू की जगह वैभव सूर्यवंशी को मिल सकता है मौका


    नई दिल्ली।
    भारत और अफगानिस्तान (India vs Afghanistan) के बीच टी20 सीरीज (T20 Series) का दूसरा मुकाबला 15 सितंबर (मंगलवार) को खेला जाएगा. पहले मैच में टीम इंडिया (Team India) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अफगानिस्तान को 7 विकेट से मात दी और सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है. अब दूसरे मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा प्लेइंग-11 को लेकर है।

    पहले टी20 में संजू सैमसन (Sanju Samson) को ओपनिंग का मौका मिला था, लेकिन वह 8 गेंदों पर सिर्फ 10 रन बना सके. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या टीम मैनेजमेंट युवा वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) को मौका देने के लिए संजू को बाहर बैठा सकता है।

    वैभव पहले टी20 में प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं थे और संजू को प्राथमिकता दी गई थी. इस फैसले को लेकर पहले ही काफी चर्चा हुई थी. हालांकि, टीम मैनेजमेंट संजू सैमसन को दूसरे टी20 में एक और मौका जरूर देना चाहेगा.


    वैभव को मिलेगा मौका?

    15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने पिछले कुछ समय में अपनी बल्लेबाजी से खूब सुर्खियां बटोरी हैं. ऐसे में दूसरे टी20 में उन्हें मौका देने का फैसला टीम इंडिया के लिए एक बड़ा चयन फैसला होगा. अगर वैभव को शामिल किया जाता है तो वह अभिषेक शर्मा के साथ ओपनिंग करते नजर आ सकते हैं. वहीं विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी ईशान किशन को दी जा सकती है. इससे पहले वैभव को जिम्बाब्वे दौरे पर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का खिताब मिला था. वैभव सूर्यवंशी ने जुलाई 2026 में जिम्बाब्वे दौरे पर तीन पारियों में कुल 151 रन बनाए थे.।


    एक जीत और भारत के नाम सीरीज

    पहले टी20 में भारत ने 157 रनों के लक्ष्य को महज 13.4 ओवर में हासिल कर लिया था. अभिषेक शर्मा ने 32 गेंदों पर 82 रनों की तूफानी पारी खेली, जबकि ईशान किशन ने 42 रन बनाए। दूसरे टी20 में टीम मैनेजमेंट नीतीश कुमार रेड्डी की जगह वॉशिंगटन सुंदर को प्लेइंग-11 में शामिल किया जा सकता है. नीतीश कुमार रेड्डी ने पहले टी20 मुकाबले में 2 ओवर गेंदबाजी करके 30 रन दिए थे. वहीं चोटिल वरुण चक्रवर्ती की जगह रवि बिश्नोई को मौका मिलने की संभावना है।

    अब भारत की नजर दूसरे मैच में जीत दर्ज कर सीरीज अपने नाम करने पर होगी. वहीं क्रिकेट फैन्स की नजर इस बात पर टिकी है कि संजू को एक और मौका मिलेगा या फिर वैभव सूर्यवंशी की टीम इंडिया में वापसी होगी.


    भारत की संभावित प्लेइंग-11:
    अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह और रवि बिश्नोई.


    अफगानिस्तान की संभावित प्लेइंग-11:
    इब्राहिम जादरान (कप्तान), रहमानुल्लाह गुरबाज (विकेटकीपर), सेदिकुल्लाह अटल, दरविश रसूली, अजमतुल्लाह उमरजई, गुलबदिन नईब, मोहम्मद नबी, राशिद खान, मुजीब उर रहमान, नूर अहमद, फजलहक फारूकी।

  • Rajasthan : निकाय चुनावों में BJP का परचम…. 41% वार्ड जीतकर मजबूत की स्थिति, कांग्रेस 35% पर सिमटी

    Rajasthan : निकाय चुनावों में BJP का परचम…. 41% वार्ड जीतकर मजबूत की स्थिति, कांग्रेस 35% पर सिमटी


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) के नगर निकाय चुनावों (Municipal body elections) में बीजेपी (BJP) ने 41% वार्ड जीतकर राज्य में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है, जबकि कांग्रेस (Congress) 35% वार्डों पर सिमट गई है. BJP के लिए ये पिछले निकाय चुनावों के मुकाबले 5% की बढ़त है, जबकि कांग्रेस के हिस्से में लगभग 5% की गिरावट आई है. हालांकि, परिसीमन के कारण इस बार सीटों की तुलना करना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि परिसीमन (वार्डों की सीमा तय करने) की प्रक्रिया के कारण राजस्थान में नगर निकायों की सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।


    309 निकाय में हुआ चुनाव

    राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव तीन स्तरों- नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका/नगर पंचायत पर आयोजित किए गए. नगर निगम बड़े शहरों का संचालन करते हैं, जबकि परिषद और पालिकाएं कस्बों का प्रशासन देखती हैं. इस चुनाव में 40 वर्ष से कम उम्र के मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा शामिल था. 14 सितंबर की शाम 7 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, 10,244 में से 10 वार्डों के नतीजे आने बाकी थे. बीजेपी ने कांग्रेस पर 566 वार्डों की बढ़त हासिल की, जबकि निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीत लिए हैं।

    परिसीमन के बाद जुड़े 2,770 नए वार्ड
    साल 2019 और 2021 के बीच चार चरणों में हुए पिछले निकाय चुनावों की तुलना में इस बार चुनावी नक्शा काफी बड़ा था. परिसीमन प्रक्रिया की वजह से राज्य में 2,770 नए वार्ड जुड़े, जिससे कुल वार्डों में 37.1% की भारी वृद्धि हुई. पिछले चुनाव चक्र में कुल लगभग 7,474 वार्ड थे. जिनकी संख्या अब लगभग 10,244 हो गई है.


    BJP की 56.8% की जबरदस्त छलांग

    पिछले निकाय चुनाव में कांग्रेस के पास लगभग 3,042 वार्ड थे, बीजेपी के पास 2,666 और निर्दलीयों के पास 1,672 वार्ड थे. ताजा नतीजों में बीजेपी की सीटों की संख्या 2,666 से बढ़कर 4,179 हो गई, जो 56.8% की वृद्धि दिखाता है. वहीं, कांग्रेस की सीटें 3,042 से बढ़कर 3,613 हुईं, जिसमें केवल 18.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. उधर, निर्दलीयों की संख्या भी 1,672 से बढ़कर 2,273 हो गई, जो 35.9% की वृद्धि है।


    RLP और माकपा को भी मिला फायदा

    ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन चुनावों में बीजेपी ने 4,179 वार्ड (40.8%) जीतकर पहला स्थान हासिल किया, जबकि मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने 3,613 वार्ड (35.3%) जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया है. जबकि AAP, CPI (M) और हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी जैसे कई दलों ने भी अच्छी बढ़त हासिल की है।

    इन निकाय चुनाव में क्षेत्रीय दलों ने भी अपने आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार किया है. नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) 14 से बढ़कर 63 वार्डों पर पहुंच गई, जिसमें 350% का भारी उछाल आया. आरएलपी का प्रभाव मुख्य रूप से जाट बहुल पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में है. उधर, माकपा (CPI-M) 8 से बढ़कर 38 वार्डों पर पहुंची, जिसमें 375% की बढ़त रही. इसके विपरीत बहुजन समाज पार्टी (BSP) 24 से घटकर 19 वार्डों पर आ गई जो 20.8% की गिरावट है।


    कांग्रेस को 5.4% का नुकसान

    कुल वार्डों के अनुपात की बात करें तो तस्वीर बिल्कुल साफ है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास कुल वार्डों की 40.7% हिस्सेदारी थी जो अब गिरकर 35.3% रह गई है. यानी कांग्रेस को करीब 5.4 प्रतिशत अंकों का नुकसान हुआ है। वहीं, बीजेपी की हिस्सेदारी 35.7% से बढ़कर 40.8% हो गई है, यानी उसे 5.1 प्रतिशत लाभ मिला है. निर्दलीयों की हिस्सेदारी 22.4% से मामूली गिरकर 22.2% रही है।

    ये अंतर इसलिए बेहद अहम है, क्योंकि बीजेपी की बढ़त को सिर्फ नए वार्ड बनने से नहीं जोड़ा जा सकता. राज्य में कुल वार्डों की संख्या में 37.1% का इजाफा हुआ, लेकिन बीजेपी ने 56.8% की दर से सीटें बढ़ाईं. दूसरी तरफ, कांग्रेस की सीटों में बढ़ोतरी की दर सिर्फ 18.7% रही जो वार्ड विस्तार की दर से आधी थी. इसी कारण सीटों की कुल संख्या बढ़ने के बावजूद कुल हिस्सेदारी में कांग्रेस काफी पीछे छूट गई।

    वहीं, दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आई मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की सरकार के लिए ये नतीजा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. भारत के अधिकांश राज्यों की तरह राजस्थान में भी सत्ताधारी दल को प्रशासनिक मशीनरी, संगठन और राज्य स्तरीय विकास के प्रचार का स्वाभाविक लाभ मिलता है. निकाय चुनाव स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार चयन, आरक्षण, गुटबाजी और निर्दलीयों के प्रभाव से तय होते हैं।


    स्विंग स्टेट रहा है राजस्थान

    विधानसभा स्तर पर राजस्थान पारंपरिक रूप से एक ‘स्विंग स्टेट’ रहा है. पिछले निकाय चुनावों के वक्त राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. इस बार स्थिति पूरी तरह उलट गई और सत्ता में मौजूद बीजेपी सबसे आगे निकल गई. इसके बावजूद 3,613 वार्ड जीतकर कांग्रेस ने दिखाया है कि उसका जमीनी संगठन अभी-भी राज्य में पूरी तरह बरकरार है।

    बता दें कि शहरी इलाकों को पारंपरिक रूप से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. केंद्र सरकार के यूजीसी इक्विटी विनियमों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सक्रियता के चलते ये चुनाव बीजेपी के लिए एक कठिन परीक्षा माना जा रहा था. इन तमाम राजनीतिक गतिविधियों के बावजूद बीजेपी ने अपने शहरी आधार को बचाते हुए अपनी स्थिति को और ज्यादा मजबूत किया है।

  • UK दौरे पर CM विजय ने चार बड़े समझौते, 9000 नौकरियों की उम्मीद

    UK दौरे पर CM विजय ने चार बड़े समझौते, 9000 नौकरियों की उम्मीद


    लंदन। त
    मिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री विजय थलपति (Chief Minister Vijay Thalapathy) ने ब्रिटेन दौरे (UK visit) पर सोमवार को कम से कम चार निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए। राज्य सरकार के मुताबिक, इन समझौतों के तहत तमिलनाडु में करीब 12300 करोड़ रुपये का निवेश होगा और इनसे लगभग 9,000 नौकरियां पैदा होने की संभावना है। इनमें सबसे बड़ा समझौता संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल लिमिटेड के साथ हुआ है। इसके तहत कंपनी तमिलनाडु में 11,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।


    11 हजार करोड़ के निवेश से 7 हजार नौकरियां

    संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल के साथ हुए समझौते के तहत डिजाइन, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस परियोजना से करीब 7,000 नौकरियां पैदा होने की संभावना है।

    इसके अलावा विजय ने एक ब्रिटिश कंपनी के साथ 1,000 करोड़ रुपये के समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। यह समझौता अर्न्स्ट एंड यंग के जरिए चेन्नई में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) विकसित करने के लिए हुआ है। प्रस्तावित सेंटर आगामी GCC कॉरिडोर में बनाया जाएगा और इससे करीब 2,000 हाई-वैल्यू नौकरियां मिलने की उम्मीद है।


    चेन्नई और तिरुचिरापल्ली में भी निवेश

    एक अन्य समझौता स्वीडन स्थित सिग्मा टेक्नोलॉजी ग्रुप के साथ हुआ है। इसके तहत कंपनी चेन्नई और तिरुचिरापल्ली में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर का विस्तार करेगी। इससे करीब 600 हाई-वैल्यू नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। चौथा समझौता विल्सन पावर सॉल्यूशंस के साथ हुआ है। इसमें 300 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और तिरुवल्लूर जिले में करीब 400 नौकरियां पैदा होने की संभावना है।

    चार समझौतों का पूरा ब्योरा
    संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल लिमिटेड: 11,000 करोड़ रुपये का निवेश, करीब 7,000 नौकरियां
    ब्रिटिश कंपनी: 1,000 करोड़ रुपये का निवेश, करीब 2,000 हाई-वैल्यू नौकरियां
    सिग्मा टेक्नोलॉजी ग्रुप: चेन्नई और तिरुचिरापल्ली में GCC विस्तार, करीब 600 हाई-वैल्यू नौकरियां
    विल्सन पावर सॉल्यूशंस: 300 करोड़ रुपये का निवेश, करीब 400 नौकरियां

    किन क्षेत्रों पर है तमिलनाडु सरकार का फोकस?
    तमिलनाडु सरकार के मुताबिक, राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है।

    विजय के ब्रिटेन रवाना होने से पहले राज्य सरकार ने कहा था कि यूरोपीय कंपनियों ने तमिलनाडु में 8,491 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। इन निवेशों से 5,690 नौकरियां पैदा होने की संभावना बताई गई थी। ब्रिटेन यात्रा का उद्देश्य नए निवेश आकर्षित करने के साथ-साथ राज्य में पहले से मौजूद निवेश को मजबूत करना भी बताया गया था।

    यह दौरा भारत-ब्रिटेन कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के 15 जुलाई को लागू होने के बाद हुआ है। तमिलनाडु सरकार के मुताबिक, इस समझौते से कपड़ा, चमड़ा, फुटवियर, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए नए अवसर खुले हैं।

    सरकार का व्यापक लक्ष्य तमिलनाडु को एशिया का प्रमुख निवेश गंतव्य बनाना है। सरकार का यह भी दावा है कि TVK सरकार के पहले 100 दिनों में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।


    मोटर स्पोर्ट्स पर भी रहा फोकस

    ब्रिटेन दौरे के दौरान मोटर स्पोर्ट्स भी एजेंडे में रहा। विजय ने सिल्वरस्टोन रेसिंग सर्किट का दौरा किया और उस रेस को हरी झंडी दिखाई, जिसमें अभिनेता और रेसर अजित कुमार ने हिस्सा लिया। इस दौरे को तमिलनाडु में विश्वस्तरीय मोटर स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने की सरकार की योजना से भी जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य रेसिंग से जुड़े मैन्युफैक्चरिंग और अन्य संबद्ध उद्योगों में अवसर पैदा करना है।


    निवेश समझौतों को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल

    निवेश को लेकर सरकार के प्रयासों के बीच विपक्ष ने विजय के ब्रिटेन दौरे के कार्यक्रम और उनकी बैठकों की जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। इसके बाद पहली बार सत्तारूढ़ TVK ने बताया है कि निवेश से जुड़ी बैठकों की जानकारी पहले सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। TVK के प्रवक्ता पी. सत्य कुमार ने कहा कि तमिलनाडु फिलहाल प्रतिस्पर्धी संघवाद के माहौल में काम कर रहा है, जहां देश के अलग-अलग राज्य निवेश आकर्षित करने के लिए एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निवेश समझौतों की जानकारी MoU पर हस्ताक्षर होने के साथ जारी की जाएगी।

    ब्रिटेन दौरा अभी खत्म नहीं हुआ
    तमिलनाडु सरकार के मुताबिक निवेश जुटाने का अभियान अभी जारी है। विजय 16 सितंबर को ब्रिटेन से रवाना होने वाले हैं और मंगलवार को भी कुछ और निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। ब्रिटेन दौरे से अब तक 12,300 करोड़ रुपये के निवेश समझौते सामने आने के बाद अब इन समझौतों के वास्तविक परियोजनाओं, नौकरियों और तमिलनाडु में लंबे समय तक आर्थिक गतिविधियों में बदलने पर नजर रहेगी।

  • सहारा समूह में फंसे पैसों के रिफंड का इंतजार कर रहे निवेशकों को राहत… 20 लाख अटके क्लेम की प्रोसेसिंग शुरू

    सहारा समूह में फंसे पैसों के रिफंड का इंतजार कर रहे निवेशकों को राहत… 20 लाख अटके क्लेम की प्रोसेसिंग शुरू


    नई दिल्ली।
    सहारा समूह (Sahara Group) की चार सहकारी समितियों (Four Cooperative Societies) में फंसे पैसे के रिफंड का इंतजार कर रहे लाखों निवेशकों (Millions Investors) के लिए राहत भरी जरूरी खबर है। केंद्र सरकार ने CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल को फिर से एक्टिव कर दिया है। इसके साथ ही लंबे समय से अटके करीब 20 लाख क्लेम की जांच और प्रोसेसिंग दोबारा शुरू हो गई है। पोर्टल के मुताबिक सत्यापित और पात्र क्लेम पर ₹10 लाख तक रिफंड दिया जा रहा है। इससे पहले इसकी लिमिट केवल ₹50,000 तक थी।


    9,267 करोड़ रुपये रिफंड

    सहकारिता मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 41.56 लाख से अधिक जमाकर्ताओं को करीब 9,267 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं। यह राशि आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी गई है। अब लंबित आवेदनों की जांच कर पात्र निवेशकों को रिफंड देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    क्यों बंद हुई थी रिफंड की प्रकिया?
    सरकार के अनुसार नवंबर 2025 के बाद पोर्टल की IT इंफ्रास्ट्रक्चर, लाइसेंस, हार्डवेयर, AMC और कर्मचारियों से जुड़ी कुछ समस्याओं के कारण क्लेम की प्रोसेसिंग प्रभावित हुई थी। अब इन तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर पोर्टल बहाल किया गया है।


    45 दिन में पैसा आएगा?

    रिफंड व्यवस्था में पात्र क्लेम पूरा होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया को सामान्य तौर पर 45 दिनों के भीतर पूरा करने का प्रावधान बताया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि अप्लाई करते ही 45 दिन में पैसा खाते में आना तय है।

    पहले Aadhaar e-KYC, बैंक खाते की जानकारी, सदस्यता/जमा रिकॉर्ड और संबंधित सहकारी समिति के रिकॉर्ड का सत्यापन होता है। किसी तरह की कमी मिलने पर क्लेम अटक सकता है।


    क्लेम रिजेक्ट या Deficiency में गया है तो क्या करें?

    जिन निवेशकों के आवेदन में कमी बताई गई है, उनके लिए Resubmission Portal की सुविधा उपलब्ध है। ऐसे निवेशकों को बताई गई कमी दूर करके अपना दावा दोबारा जमा करना चाहिए। ध्यान रखें कि रिफंड के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति या वेबसाइट को OTP, बैंक डिटेल या अन्य संवेदनशील जानकारी न दें। आवेदन और स्टेटस के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें।


    31 दिसंबर 2026 तक जारी रहेगी प्रक्रिया

    सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद सहारा समितियों के जमाकर्ताओं को रिफंड देने की समयसीमा 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई है। ऐसे में आने वाले महीनों में लंबित क्लेम की प्रोसेसिंग और भुगतान महत्वपूर्ण रहेगा।


    किसी भी सहायता के लिए नीचे दिए नंबरों पर करें कॉल
    पोर्टल हेल्प डेस्क नंबर:

    01120909044 / 01120909045
    सोसायटी के नंबर:
    0522 6937100
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    0522 6931000
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    संपर्क का समय: सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक (केंद्र सरकार की छुट्टियों को छोड़कर)

  • मोहसिन नकवी के लिए ACC में दूसरा कार्यकाल आसान नहीं, BCCI समर्थन से दूर तो सदस्य बोर्ड भी नहीं दिखा रहे उत्साह

    मोहसिन नकवी के लिए ACC में दूसरा कार्यकाल आसान नहीं, BCCI समर्थन से दूर तो सदस्य बोर्ड भी नहीं दिखा रहे उत्साह

    नई दिल्ली । पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख मोहसिन नकवी के लिए एशियन क्रिकेट काउंसिल यानी ACC में दूसरा कार्यकाल हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा है। ACC चेयरमैन के तौर पर नकवी का मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2027 में समाप्त होगा। नियमों के तहत चेयरमैन के कार्यकाल को बढ़ाने का विकल्प मौजूद है, लेकिन इसके लिए सदस्य बोर्डों का समर्थन जरूरी होगा।

    ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नकवी को दोबारा ACC चेयरमैन बनाए जाने के लिए पर्याप्त समर्थन मिल पाएगा। मौजूदा परिस्थितियों में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI की तरफ से उनके समर्थन की संभावना कम मानी जा रही है। इसके अलावा ACC के अन्य सदस्य बोर्डों के बीच भी नकवी को एक और कार्यकाल देने को लेकर खास उत्साह दिखाई नहीं दे रहा है।

    ACC में चेयरमैन का पद दो साल के रोटेशन सिस्टम के तहत चलता है। इसी व्यवस्था के तहत मोहसिन नकवी ने 2025 में ACC की जिम्मेदारी संभाली थी। उनका मौजूदा कार्यकाल अप्रैल 2027 में पूरा होगा। ऐसे में उनके पास अब करीब सात महीने का समय बचा है। इसके बाद ACC को नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

    हालांकि नियमों में कार्यकाल बढ़ाने का विकल्प मौजूद है। इसके लिए सदस्य देशों के बीच सहमति और समर्थन महत्वपूर्ण होगा। इससे पहले जय शाह का ACC चेयरमैन के तौर पर कार्यकाल बढ़ाया जा चुका है। उन्होंने जनवरी 2021 में बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के तत्कालीन प्रमुख नजमुल हसन से यह जिम्मेदारी संभाली थी। बाद में सदस्य देशों की सहमति से उनका कार्यकाल 2024 तक बढ़ाया गया था। जय शाह का कार्यकाल चार साल तक चला।

    दिसंबर 2024 में जय शाह के ICC चेयरमैन बनने के बाद श्रीलंका के शम्मी सिल्वा ने कुछ समय के लिए ACC की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2025 में यह जिम्मेदारी पाकिस्तान के मोहसिन नकवी को मिली। अब अप्रैल 2027 में नकवी का कार्यकाल पूरा होने के बाद ACC के सामने अगले चेयरमैन के चयन का सवाल होगा।

    मोहसिन नकवी का नाम पिछले दो सीनियर एशिया कप के ट्रॉफी विवादों से भी जुड़ा रहा है। 2025 में पाकिस्तान को हराकर भारत ने पुरुष एशिया कप का खिताब जीता था। भारतीय टीम ने नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की थी। इसके बाद खिलाड़ियों ने चैंपियन बैनर के साथ जश्न मनाया और ट्रॉफी के बिना अपनी जीत का जश्न पूरा किया।

    महिला एशिया कप 2026 में भी भारत ने इसी तरह का रुख अपनाया। मैच के बाद भारतीय टीम ने काफी देर तक मैदान पर इंतजार किया। BCCI अधिकारियों के साथ चर्चा के बाद टीम ड्रेसिंग रूम लौट गई। इसके बाद भारतीय टीम की मौजूदगी के बिना पुरस्कार समारोह समाप्त हुआ।

    इन दोनों घटनाओं के बाद ACC चेयरमैन के तौर पर मोहसिन नकवी की भूमिका को लेकर चर्चा हुई। ऐसे माहौल में उनके अगले कार्यकाल के लिए BCCI का समर्थन मिलना मुश्किल माना जा रहा है।

    फिलहाल BCCI की ओर से मोहसिन नकवी के कार्यकाल या संभावित विस्तार को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। अप्रैल 2027 में जब नए ACC चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, तब सदस्य देशों का रुख महत्वपूर्ण होगा। मौजूदा समीकरणों में नकवी के लिए दूसरा कार्यकाल हासिल करना आसान नहीं दिख रहा है।

  • कार्नी की US से निवेश खींचने की तैयारी….. कनाड़ा इन्वेस्टमेंट समिट में जुटेंगे 300 दिग्गज सीईओ

    कार्नी की US से निवेश खींचने की तैयारी….. कनाड़ा इन्वेस्टमेंट समिट में जुटेंगे 300 दिग्गज सीईओ


    टोरंटो।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) चाहते हैं कि कारखाने और निवेश दक्षिण की ओर यानी अमेरिका (America) आएं। वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Canadian Prime Minister Mark Carney) को उम्मीद है कि वे अरबों डॉलर का निवेश उत्तर की ओर यानी कनाडा ((Canada) की तरफ ला सकते हैं।

    इस हफ्ते कार्नी के ‘कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट’ के लिए दुनिया की कुछ सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट कंपनियों के लगभग 300 सीईओ और सीनियर एग्जीक्यूटिव टोरंटो के यॉर्कविले इलाके में मौजूद ‘फोर सीजन्स’ होटल में इकट्ठा हो रहे हैं। ये निवेशक मिलकर 120 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। इससे उस पूंजी के बड़े पैमाने का पता चलता है जिसे कार्नी हासिल करना चाहते हैं, क्योंकि कनाडा अरबों डॉलर का नया निवेश आकर्षित करने और अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।


    पीएम कार्नी ने क्या कहा था?

    पिछले हफ्ते अल्बर्टा के बैनफ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्नी ने कहा, ‘कनाडा की पहचान सिर्फ अमेरिका के पड़ोस में होने तक सीमित नहीं है। हमारे पास वह सब कुछ है जिसकी दुनिया को जरूरत है।’ कार्नी ने कनाडा के विशाल ऊर्जा और जरूरी खनिजों के संसाधनों, वहां के पढ़े-लिखे वर्कफोर्स और उन ट्रेड एग्रीमेंट्स की ओर इशारा किया, जिनकी वजह से कनाडा में मौजूद कंपनियों को दुनिया भर में लगभग 1.5 अरब ग्राहकों तक पहुंच मिलती है।

    कनाडा को भरोसा है कि वह ट्रंप का सामना कर सकता है और अपने निवेश के स्रोतों में विविधता ला सकता है। लेकिन यह शिखर सम्मेलन कनाडा के लिए एक नाजुक समय पर हो रहा है। व्यापार वार्ता 21 अगस्त को विफल हो गई, जिसके बाद ट्रंप ने लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के कनाडाई सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। कनाडा ने जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद वाशिंगटन ने फिर से दबाव बढ़ाते हुए कुछ कनाडाई आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की और बड़े, दीर्घकालिक अमेरिकी सरकारी अनुबंधों से कनाडाई उत्पादों को बाहर करने की दिशा में कदम उठाए।

    ट्रंप के टैरिफ और मैन्युफैक्चरिंग को बॉर्डर के दक्षिण में ले जाने की कोशिशें उस चीज को कमजोर कर रही हैं, जो लंबे समय से विदेशी निवेशकों के लिए देश के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक थी। कॉन्टिनेंटल फ्री ट्रेड के तहत विशाल अमेरिकी बाजार तक भरोसेमंद पहुंच।


    वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने क्या कहा?

    जब पूछा गया कि क्या कनाडा ट्रंप के साथ ट्रेड डील के बिना लंबे समय तक टिक सकता है, तो वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने कहा कि ओटावा प्रभावित व्यवसायों और कर्मचारियों की मदद करने के लिए तैयार है। शैम्पेन ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया, ‘हमारे पास अपने उद्योगों और कर्मचारियों की मदद करने के लिए जरूरी संसाधन हैं – चाहे कितना भी समय लगे या जो कुछ भी करना पड़े।’

    सरकार ने सोमवार को यह भी कहा कि वह 1 अरब अमेरिकी डॉलर या उससे अधिक के निवेश के लिए कर संबंधी निर्णयों को प्राथमिकता देगी, जिससे बड़े निवेशकों को पूंजी लगाने से पहले अधिक निश्चितता मिलेगी।


    कनाडा पर दांव लगाने पर कार्नी ने क्या कहा?

    कार्नी वैश्विक निवेशकों से व्यापार युद्ध को नजरअंदाज करते हुए कनाडा पर दांव लगाने का आग्रह कर रहे हैं। साथ ही ट्रंप के नेतृत्व में तेजी से अप्रत्याशित होते जा रहे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कनाडा के कानून के शासन और विश्वसनीयता की तुलना स्पष्ट रूप से कर रहे हैं। कार्नी ने कहा, ‘निवेशकों को एक ऐसा देश मिलेगा जो कानून के शासन का सम्मान करता है और एक ऐसा देश जो भरोसेमंद है। दुनिया में ऐसा संयोजन बहुत कम देखने को मिलता है। यह एक आकर्षक संयोजन है।’

    इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक पूंजी को महत्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी, रक्षा, उन्नत विनिर्माण और ऊर्जा के क्षेत्र में प्रमुख परियोजनाओं के साथ जोड़ना है। सोमवार को एक बड़े निवेश की घोषणा की गई। बेल कनाडा ने कहा कि वह सस्केचेवान में पहले से निर्माणाधीन एआई डेटा-सेंटर परियोजना को चार गुना बढ़ाएगी, जिससे 1.2 गीगावाट की सुविधा का मार्ग प्रशस्त होगा और कुल अनुमानित पूंजी निवेश 50 अरब कनाडाई डॉलर (36 अरब अमेरिकी डॉलर) से अधिक हो जाएगा।

  • बिहार में UCC को लेकर एनडीए के घटक दलों का अलग-अलग रुख….

    बिहार में UCC को लेकर एनडीए के घटक दलों का अलग-अलग रुख….


    पटना।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के समान आचार संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड- Uniform Civil Code- UCC) को लेकर की गई घोषणा के बाद बिहार (Bihar) में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (National Democratic Alliance) के दलों का अलग-अलग रुख सामने आ रहा है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) साथ देने के मूड में है तो उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने ड्राफ्ट देखने के बाद फैसले की बात कही है। चिराग पासवान ने भी ड्राफ्ट देखने पर ही बात रखने का एलान किया है। लेकिन, सबसे बड़ा और कड़ा रुख जनता दल यूनाईटेड का है। जदयू ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के पुराने स्टैंड का हवाला देते हुए यूसीसी के खिलाफ बयान दिया है।


    जदयू विधायक बोले- लागू नहीं होने देंगे

    जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा या राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद का अब तक सीधा बयान नहीं आया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने सिर्फ इतना कहा है कि इसपर कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करेंगे। लेकिन, जनता दल यूनाईटेड के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने साफ शब्दाें में एलान किया कि इसे बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार है और जदयू के मुखिया नीतीश कुमार ने शुरुआत से ही यूसीसी का विरोध किया है। इसलिए, एनडीए सरकार में जदयू इसे लागू नहीं होने देगा।


    चिराग पासवान को देखना है ड्राफ्ट, तब बोलेंगे

    चिराग पासवान ने केंद्र की अपनी एनडीए सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर आंख बंद कर भरोसा नहीं है। एनडीए शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के अमित शाह के बयान के बाद चिराग ने कहा कि वह ड्राफ्ट देखे बगैर कुछ नहीं कह सकते। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रस्तावित यूसीसी का मसौदा पहले सार्वजनिक किया जाए, उसके सभी हितधारकों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाए और व्यापक विमर्श के बाद ही पार्टी अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी।


    उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी के अंदर विमर्श करना है

    केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुके और इस समय राज्यसभा के सांसद उपेंद्र कुशवाहा को अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अंदर यूसीसी पर विचार-विमर्श करना है। उन्होंने अमित शाह के बयान के बाद कहा कि क्या प्रस्ताव आता है, वह देखकर ही निर्णय होगा। मतलब, वह सीधे तौर पर अमित शाह के फैसले पर मुहर लगाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट आने के बाद वह पार्टी के अंदर उसपर विमर्श करेंगे, फिर निर्णय लेंगे।


    मांझी की पार्टी का रुख साफ, हम शाह के साथ

    केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का रुख इसपर सामने नहीं आया है, लेकिन उनके बेटे, बिहार सरकार के मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. संतोष सुमन ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह बयान दिया है तो वह हितकारी ही होगा। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू करने में हर्ज तो नहीं दिखता है, बस घटक दलों से इसपर विमर्श कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता देश के लिए दूरगामी तौर पर बेहतर ही होगा।


    गिरिराज सिंह के बयान से तल्खी, बाकी मौन स्वीकृत

    बिहार में यूसीसी लागू हो या नहीं, इसपर प्रदेश के पार्टी नेता चुप्पी साधे हैं। मौन स्वीकृति की बड़ी वजह यह है कि एनडीए के घटक दलों से तकरार न हो। चूंकि पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और देश के मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह का बयान है तो इसपर सभी की स्वीकृति स्वाभाविक है। इस बीच, हंगामा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के रुख को लेकर है। एनडीए के घटक दलों के अलग-अलग सुर के बीच गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति के तहत इसे आजादी के समय लागू नहीं होने दिया। गिरिराज ने कहा कि यूसीसी को लागू होने से रोक कर कांग्रेस ने देश को गर्त में धकेल दिया। गिरिराज सिंह के इस बयान के बाद यूसीसी के खिलाफ बोलने वाले एनडीए के दल असहज महसूस कर रहे हैं। इसलिए, ड्राफ्ट देखने की बात पर जोर दिया जा रहा है।

  • US: मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप को बड़ा झटका…. SC ने मेल मतपत्र प्रतिबंधों को किया खारिज

    US: मध्यावधि चुनाव से पहले ट्रंप को बड़ा झटका…. SC ने मेल मतपत्र प्रतिबंधों को किया खारिज


    न्यूयॉर्क।
    सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) के मेल मतपत्र प्रतिबंधों को फिलहाल खारिज कर दिया। इस निर्णय से राज्यों को अपनी पुरानी मेल मतपत्र प्रक्रियाओं को जारी रखने की अनुमति मिल गई है। यह फैसला मध्यावधि चुनावों (Mid-term elections) में मतदान शुरू होने के बीच आया है। ट्रंप प्रशासन कांग्रेस पर नियंत्रण के लिए नवंबर के चुनावों से पहले इन प्रतिबंधों को लागू करना चाहता था।

    डाक मतपत्र के मामले में जजों की राय क्या?
    जस्टिस सैमुअल एलिटो और जस्टिस क्लेरेंस थॉमस ने इस संक्षिप्त आदेश का विरोध किया। जस्टिस ब्रेट कवानुघ ने प्रतिबंधों को मध्यावधि चुनावों के लिए लागू न करने पर सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने बाद में ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला सुनाने का संकेत दिया। यह मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि देश का लगभग एक तिहाई हिस्सा मेल द्वारा मतदान करता है।


    2020 में मिली हार का कारण डाक मतपत्र को मानते हैं ट्रंप

    चुनाव अधिकारियों ने कहा कि मध्यावधि चुनावों से पहले पूर्ण बदलाव करना संभव नहीं था। अलाबामा, उत्तरी कैरोलिना और विस्कॉन्सिन ने पिछले सप्ताह ही मतदाताओं को मेल मतपत्र भेजना शुरू कर दिया था। उस समय भी नई प्रणाली सक्रिय नहीं थी। ट्रंप ने लंबे समय से मेल मतदान का विरोध किया है। उन्होंने 2020 के चुनाव में जो बाइडेन से अपनी हार के लिए इसे गलत तरीके से दोषी ठहराया था। हालांकि, वह खुद अक्सर इसी तरीके से मतदान करते रहे हैं, जिसमें इस साल भी शामिल है।


    ट्रंप प्रशासन की क्या थी योजना?

    ट्रंप प्रशासन की योजना में राज्यों को एक समान लिफाफा शैली अपनानी थी। उन्हें योग्य मतदाताओं की सूची एक ऑनलाइन माध्यम पर जमा करनी होती। पोस्टल सर्विस उन राज्यों को मतपत्र देने से मना कर सकती थी जो नियमों का पालन नहीं करते। एक व्हिसलब्लोअर रिपोर्ट ने इस प्रणाली पर चिंता जताई थी। रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन माध्यम ठीक से नहीं बना था। एक बार कोड त्रुटि से लाखों मेल मतपत्रों का पूरा समूह रद्द हो सकता था।


    प्रतिबंधों को क्यों चुनौती दी गई?

    डेमोक्रेटिक राज्य अधिकारियों और मतदान अधिकार समूहों ने इन प्रतिबंधों को अदालत में चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रपति के पास चुनाव नियम तय करने का सांविधानिक अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, ये नियम एक बड़े चुनाव की पूर्व संध्या पर मेल मतदान को लगभग समाप्त कर देंगे। निचली अदालतों ने ट्रंप की योजना को अवरुद्ध कर दिया था। इसमें राष्ट्रपति द्वारा नामित एक न्यायाधीश द्वारा जारी किया गया प्रारंभिक निषेधाज्ञा भी शामिल था।


    सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?

    ट्रंप प्रशासन ने निचली अदालतों के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। प्रशासन ने तर्क दिया कि पोस्टल सर्विस पर संघीय नियंत्रण उन्हें मेल मतपत्रों के लिए नियम तय करने की अनुमति देता है। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का पालन करना संभव था। संघीय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रारंभिक प्रक्रियात्मक निर्णय जीता था। हालांकि, जस्टिस ने योजना की वैधता पर स्पष्ट रूप से कोई फैसला नहीं सुनाया था।

  • किशाऊ बांध परियोजना को लेकर आज अमित शाह की मौजूदगी में 6 राज्यों के बीच होगा बड़ा समझौता

    किशाऊ बांध परियोजना को लेकर आज अमित शाह की मौजूदगी में 6 राज्यों के बीच होगा बड़ा समझौता


    चंडीगढ़/शिमला।
    किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना (Kishau Multipurpose Dam Project) को लेकर मंगलवार को छह राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (Memorandum) पर हस्ताक्षर होंगे। इससे हरियाणा (Haryana) को सिंचाई के लिए 836.39 क्यूसेक पानी मिलेगा। इस परियोजना के लिए हरियाणा को करीब 579 करोड़ रुपये का खर्च उठाना होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) की मौजूदगी में यह समझौता होगा, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी शामिल होंगे। इंजीनियर इन चीफ वीरेंद्र सिंह ने बताया कि यह समझौता हरियाणा को सिंचाई के क्षेत्र में दूरगामी लाभ देगा।

    किशाऊ बांध हिमाचल के सिरमौर और उत्तराखंड के देहरादून जिले की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। टोंस यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। परियोजना की कुल प्रस्तावित लागत करीब 15,624 करोड़ रुपये है। इसमें 12,096 करोड़ रुपये जल घटक पर खर्च होंगे, जिसका 90 फीसदी केंद्र सरकार वहन करेगी।


    हिमाचल की शर्तों पर समझौता

    मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि हिमाचल प्रदेश बिजली उत्पादन की लागत का वित्तीय बोझ नहीं उठाएगा। जून में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस पर सहमति बनी थी। दिल्ली और राजस्थान हिमाचल के बिजली घटक की लागत में हिस्सा देंगे। इसके बदले हिमाचल के हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को मिलेगा। नई व्यवस्था के तहत हिमाचल को परियोजना से 211 मेगावाट बिजली मिलेगी और करीब 600 करोड़ रुपये का वार्षिक लाभ होने का अनुमान है।