गुब्बारे वाले टैंक और हेलीकॉप्टर की पेंटिंग: ईरान की डमी वॉरफेयर से उलझा इजरायल, करोड़ों की मिसाइलें बेकार?

नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट के युद्ध क्षेत्र में ईरान ने एक नई रणनीति अपनाई है। दावा किया जा रहा है कि उसने जमीन पर गुब्बारे वाले टैंक और विमानों की डमी पेंटिंग तैनात कर दी हैं जिससे इजरायल की महंगी मिसाइलें और रडार बेकार हो रही हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि इजरायल ने कई लक्ष्यों को नष्ट किया लेकिन वे असली हथियार नहीं बल्कि जमीन पर बनी पेंटिंग और डमी टैंक थे।

एक इजरायली मिसाइल की कीमत लगभग 3 मिलियन डॉलर यानी करीब 25 करोड़ रुपये होती है। वीडियो देखने वाले यूजर्स का कहना है कि अगर ये असली हेलीकॉप्टर या टैंक होते तो मिसाइल से मारे जाने के बाद उनके पंख या अन्य हिस्से उड़ते। लेकिन वीडियो में ये डमी स्थिर दिखाई दिए।

अखबारों और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने चीन से लगभग 9 लाख गुब्बारे वाले टैंक और मिसाइल लॉन्चर मंगवाए हैं। इन डमी टैंकों को लकड़ी रबर और थर्मल पेंट से तैयार किया गया है ताकि वे ऊपर से वास्तविक हथियारों जैसे दिखें। यह ऑप्टिकल इल्यूजन आधुनिक रडार और थर्मल सेंसर को भ्रमित करता है और दुश्मन को असली निशाना पहचानने में कठिनाई होती है।

हालांकि कई रक्षा विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह सत्य मानने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि आधुनिक मिसाइलों के थर्मल सेंसर और शैडो डिटेक्शन को केवल पेंटिंग और गुब्बारे से धोखा देना लगभग असंभव है। ईरान ने अपने असली लड़ाकू विमानों और टैंकों को अंडरग्राउंड सुरंगों में सुरक्षित रखा और ऊपर केवल नकली डमी रखी हैं।

धोखे की यह रणनीति युद्ध में नई नहीं है लेकिन ईरान ने इसे आधुनिक तकनीक के दौर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। इस चालाकी से इजरायल और अमेरिका के महंगे हथियार बेकार होने के साथ साथ उनके आर्थिक और रणनीतिक नुकसान की आशंका बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह रणनीति न केवल दुश्मन को भ्रमित करने के लिए बल्कि मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा भी है। कम खर्च में दुश्मन की मिसाइलें बेकार करना और अपने असली हथियारों को सुरक्षित रखना ईरान के लिए सस्ता लेकिन प्रभावी तरीका साबित हो रहा है।