बीजिंग। चीन (China) ने ताइवान (Taiwan.) के आसपास बड़ा हवाई क्षेत्र (Large Airfield) नागरिक विमानों के लिए बंद कर दिया है। इस बार प्रतिबंधित क्षेत्र ताइवान से दोगुना बड़ा है। अधिकारियों ने इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (US Federal Aviation Administration.- FAA) ने 27 मार्च को विमान चालकों के लिए एक नोटिस (NOTAM) जारी किया, जो कुछ घंटों बाद प्रभावी हो गया। यह नोटिस 6 मई तक, यानी कुल 40 दिनों तक लागू रहेगा। प्रतिबंधित क्षेत्र 73000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जो ताइवान के कुल क्षेत्रफल (36,197 वर्ग किलोमीटर) से लगभग दोगुना है। यह क्षेत्र ताइवान से कुछ सौ किलोमीटर उत्तर में स्थित है और पीले सागर तथा पूर्वी चीन सागर के ऊपर फैला हुआ है।
हालांकि चीन ने इस प्रतिबंध का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सैन्य उपयोग के अलावा कोई अन्य उद्देश्य नहीं हो सकता। एएफपी को दिए गए बयान में सुरक्षा विशेषज्ञ बेंजामिन ब्लैंडिन ने कहा कि इस तरह के हवाई क्षेत्र प्रतिबंध का सैन्य उपयोग के अलावा कोई अन्य संभावित उपयोग नहीं है। यह मिसाइल परीक्षण, हवाई अभ्यास या अन्य सैन्य गतिविधियों के लिए हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब चीन ने इतने बड़े भौगोलिक क्षेत्र को इतने लंबे समय तक अचानक प्रतिबंधित किया है।
विमानन और रक्षा सलाहकार एनएक्सटी के जेवियर टाइटेलमैन ने भी इस प्रतिबंध को ‘असामान्य’ बताया। उन्होंने कहा कि इसकी अवधि, आकार और ऊंचाई पर किसी भी प्रकार की सीमा न होने के कारण यह सामान्य NOTAM से अलग है। आमतौर पर NOTAM सैन्य अभ्यास, आग या ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटनाओं के लिए जारी किए जाते हैं।
नागरिक विमानों पर प्रतिबंध, सैन्य विमानों पर नहीं
टाइटेलमैन ने बताया कि इस क्षेत्र को केवल नागरिक उड्डयन के लिए बंद किया गया है। सैन्य विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन इस प्रतिबंध से प्रभावित नहीं होंगे। इसका मतलब है कि चीन सरकार ने अपने सैन्य उपयोग के लिए यह क्षेत्र आरक्षित कर लिया है। प्रतिबंध दो क्षेत्रों पर पीले सागर में (चीन-दक्षिण कोरिया के बीच) और तीन क्षेत्रों पर पीले सागर व पूर्वी चीन सागर के बीच (चीन-जापान के बीच) लागू है। इन प्रतिबंधित क्षेत्रों के बीच लगभग 100 किलोमीटर चौड़े हवाई गलियारे छोड़े गए हैं, जिससे शंघाई तक नागरिक विमानों की आवाजाही संभव हो सके।
क्या है ताइवान का आरोप?
ताइवान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने आरोप लगाया है कि चीन मध्य पूर्व में अमेरिका के व्यस्त होने का फायदा उठाते हुए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर रहा है। अधिकारी ने कहा कि चीन का मकसद अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों को डराना और हिंद-प्रशांत में अमेरिकी सैन्य प्रभाव को कमजोर करना है। सुरक्षा विशेषज्ञ बेंजामिन ब्लैंडिन ने इसे चीन की ‘पहुंच से इनकार’ की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यह चीन द्वारा अपने पड़ोसी देशों की भूमि और समुद्री सीमाओं पर दबाव बढ़ाने और कब्जा करने के निरंतर प्रयासों का एक हिस्सा है।
