सीता नवमी पर करें ये विधि पूरी होगी हर मनोकामना जानिए 2026 की डेट और शुभ समय


नई दिल्ली । भारतीय परंपरा में बच्चों को नजर दोष से बचाने के लिए कई धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय बताए गए हैं और इनमें कालाष्टमी का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन भगवान काल भैरव को समर्पित होता है जिन्हें संकटों का नाश करने वाला और समय का स्वामी माना जाता है। मान्यता है कि कालाष्टमी के दिन किए गए उपाय नकारात्मक शक्तियों को दूर करते हैं और बच्चों को बुरी नजर से सुरक्षित रखते हैं। वर्ष 2026 में 10 अप्रैल को कालाष्टमी का व्रत मनाया जा रहा है और इस दिन किए गए सरल उपाय बेहद प्रभावी माने जाते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी हर महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आती है और इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा विशेष फलदायी होती है। काशी में काल भैरव को कोतवाल कहा जाता है और उन्हें सुरक्षा और न्याय का देवता माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से भय संकट और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष शास्त्र में भी इस दिन को तंत्र मंत्र और रक्षा उपायों के लिए अत्यंत शक्तिशाली माना गया है।

यदि आपके घर में छोटे बच्चे हैं और आपको लगता है कि उन्हें बार बार नजर लग जाती है तो कालाष्टमी के दिन कुछ आसान उपाय जरूर करने चाहिए। सबसे पहले घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाने के बाद उसकी लौ से काजल तैयार करें और इस काजल को बच्चे के माथे या कान के पीछे हल्का सा लगा दें। ऐसा करने से नजर दोष से बचाव होता है और बच्चे के चारों ओर एक सकारात्मक ऊर्जा का घेरा बनता है।

इसके अलावा आप मंदिर जाकर भगवान काल भैरव के चरणों में काला धागा अर्पित कर सकते हैं। इस धागे पर थोड़ा सा सिंदूर लगाकर इसे बच्चे के हाथ या गले में बांध दें। मान्यता है कि यह काला धागा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी नजर के प्रभाव को दूर करता है। इस दौरान ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं मंत्र का जाप करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है।

कालाष्टमी के दिन रात 9 बजे से 11 बजे के बीच पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है। इस समय की गई पूजा जल्दी फल देती है और भगवान काल भैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त इस दौरान व्रत रखते हैं दीप जलाते हैं और भगवान से अपने परिवार विशेषकर बच्चों की रक्षा की प्रार्थना करते हैं। यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है बल्कि यह विश्वास और आस्था का प्रतीक भी है। ऐसे उपाय लोगों को मानसिक शांति और सुरक्षा का एहसास देते हैं। हालांकि इन उपायों के साथ साथ बच्चों की देखभाल स्वच्छता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।

कालाष्टमी पर किए गए ये सरल उपाय न केवल परंपरा का हिस्सा हैं बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे विश्वास का प्रतीक भी हैं जो आज भी लोगों के जीवन में उतने ही प्रभावी माने जाते हैं।नई दिल्ली । हिंदू धर्म में वैशाख मास का विशेष महत्व होता है और इसी पावन महीने में सीता नवमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह दिन माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है जिन्हें त्याग धैर्य और आदर्श नारीत्व का प्रतीक माना जाता है। वर्ष 2026 में सीता नवमी 25 अप्रैल को मनाई जाएगी और इस दिन व्रत और पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 24 अप्रैल 2026 को रात 07 बजकर 21 मिनट पर होगी और इसका समापन 25 अप्रैल 2026 को शाम 06 बजकर 27 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार यह पर्व 25 अप्रैल को ही मनाया जाएगा। इस दिन कई शुभ मुहूर्त भी बन रहे हैं जो पूजा पाठ और व्रत के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगा जो साधना और ध्यान के लिए श्रेष्ठ है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 1 बजकर 10 मिनट तक रहेगा वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 52 मिनट से 3 बजकर 43 मिनट तक का समय सफलता और शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना गया है। इसके अलावा अमृत काल शाम 6 बजकर 29 मिनट से रात 8 बजकर 04 मिनट तक रहेगा जो विशेष रूप से पूजा के लिए अनुकूल है।

सीता नवमी का आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। माता सीता को देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है और उनकी पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और शांति का वास होता है। यह दिन विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्य और दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है।

पूजा विधि की बात करें तो इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। घर के मंदिर में माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। इसके बाद उन्हें पीले फूल शृंगार की सामग्री और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। श्रद्धा के साथ ‘श्री जानकी रामाभ्यां नमः’ मंत्र का 108 बार जप किया जाता है और सीता नवमी की कथा का पाठ किया जाता है। अंत में आरती कर भगवान से सुख समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है।

इस दिन ॐ सीतायै नमः और ॐ श्री सीता रामाय नमः जैसे मंत्रों का जाप करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन व्रत और पूजा करता है उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी कष्ट दूर होते हैं। सीता नवमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि यह नारी शक्ति सहनशीलता और समर्पण का भी प्रतीक है। यह दिन हमें जीवन में धैर्य और मर्यादा का महत्व सिखाता है और परिवार के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करता है।