ल्ली ईवी पॉलिसी 2026-2030 से परिवहन प्रणाली में बड़ा बदलाव और हरित भविष्य की ओर कदम


नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक नीति का मसौदा तैयार किया है। Delhi Electric Vehicle Policy 2026-2030 के तहत तैयार यह प्रस्ताव राजधानी के परिवहन ढांचे को अधिक स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मसौदे पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं ताकि इसे अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जा सके।

इस प्रस्तावित नीति का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के साथ-साथ चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना और बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन के कारण होता है, इसलिए परिवहन क्षेत्र में बदलाव बेहद जरूरी है। इसी दृष्टिकोण से नीति में सभी प्रकार के वाहनों को इलेक्ट्रिक तकनीक की ओर ले जाने की रूपरेखा तैयार की गई है।

मसौदे में यह भी प्रावधान किया गया है कि नागरिक और संबंधित हितधारक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं, जिसके बाद अंतिम नीति को लागू किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य नीति निर्माण को अधिक पारदर्शी और सहभागी बनाना है ताकि विभिन्न वर्गों की जरूरतों और सुझावों को शामिल किया जा सके।

नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन का विस्तृत ढांचा शामिल किया गया है। इसमें दोपहिया, तिपहिया और हल्के वाणिज्यिक वाहनों के लिए चरणबद्ध सब्सिडी देने का प्रस्ताव है, जिससे शुरुआती वर्षों में ईवी अपनाने की गति तेज हो सके। साथ ही पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप करने पर अतिरिक्त आर्थिक लाभ देने की भी योजना है, ताकि स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिल सके।

इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी या आंशिक छूट देने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे उपभोक्ताओं पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम हो सके। इस कदम से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने और बाजार में उनकी पहुंच आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए एक विशेष एजेंसी को नोडल जिम्मेदारी दी गई है, जो पूरे शहर में चार्जिंग स्टेशन की योजना, स्थापना और संचालन को व्यवस्थित करेगी। इसके साथ ही एक डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सिंगल विंडो सिस्टम विकसित करने की योजना भी है, जिससे चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया सरल और तेज हो सके।

नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वाहन निर्माता कंपनियों और डीलरशिप को चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इससे उपयोगकर्ताओं को अधिक सुविधाजनक और व्यापक चार्जिंग नेटवर्क उपलब्ध हो सकेगा।

बैटरी प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रीसाइक्लिंग और सुरक्षित निपटान प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए बैटरी ट्रैकिंग और संग्रहण प्रणाली लागू करने की योजना है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान को कम किया जा सके।

सरकार ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को भी चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत आने वाले वर्षों में बसों, सरकारी गाड़ियों और अन्य सार्वजनिक वाहनों को ईवी में बदलने की दिशा में काम किया जाएगा, जिससे बड़े स्तर पर उत्सर्जन में कमी लाई जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति राजधानी में परिवहन व्यवस्था को नए दौर में ले जाने की क्षमता रखती है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह न केवल प्रदूषण को कम करेगी बल्कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है।