खेल मंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि फॉर्मूला 1 की वापसी को लेकर ट्रैक और तकनीकी स्तर की कई अहम बाधाएं दूर कर ली गई हैं। उनके अनुसार अगले छह महीनों में बाकी तैयारियों को भी पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार चाहती है कि लंबे अंतराल के बाद भारत एक बार फिर दुनिया के सबसे तेज और रोमांचक रेसिंग इवेंट की मेजबानी करे। उन्होंने कहा कि इस दिशा में संबंधित एजेंसियां और खेल मंत्रालय मिलकर तेजी से काम कर रहे हैं ताकि समयसीमा के भीतर सभी व्यवस्थाएं पूरी हो सकें।
भारत में पहले भी फॉर्मूला 1 का आयोजन हो चुका है, जब 2011 से 2013 के बीच ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में इंडियन ग्रां प्री का आयोजन किया गया था। यह ट्रैक प्रसिद्ध डिजाइनर हरमन टिल्के द्वारा तैयार किया गया था और इसे दुनिया के बेहतरीन रेसिंग ट्रैकों में गिना जाता है। शुरुआती तीन सीजन में सेबेस्टियन वेट्टल ने रेड बुल रेसिंग के लिए लगातार जीत दर्ज कर दबदबा बनाया था, जिससे भारत में इस खेल को काफी लोकप्रियता मिली थी।
हालांकि 2013 के बाद यह आयोजन भारत में बंद हो गया था। इसके पीछे मुख्य कारण टैक्स संबंधी विवाद, आयोजन की भारी लागत और प्रशासनिक चुनौतियां बताई जाती हैं। इसके बाद यह रेस फॉर्मूला 1 कैलेंडर से पूरी तरह बाहर हो गई। अब सरकार का दावा है कि पुराने अनुभवों से सीख लेते हुए नए मॉडल पर काम किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजन स्थायी रूप से भारत में हो सकें।
खेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल फॉर्मूला 1 ही नहीं बल्कि अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों जैसे मोटोजीपी को भी भारत में लाने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं। सरकार का मानना है कि इससे देश में खेल संस्कृति मजबूत होगी, युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और भारत की वैश्विक पहचान और भी सशक्त होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत में फॉर्मूला 1 की वापसी होती है तो इससे खेल पर्यटन, रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को बड़ा फायदा मिलेगा। साथ ही, भारत वैश्विक खेल मानचित्र पर एक बार फिर मजबूत उपस्थिति दर्ज कर सकेगा। खेल प्रेमियों में इस घोषणा के बाद उत्साह देखा जा रहा है और सभी को आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत में फॉर्मूला 1 की वापसी की तैयारियां चल रही हैं और 2027 से पहले रेस दोबारा हो सकती है। सरकार ट्रैक और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही है, जिससे भारत फिर से इंटरनेशनल मोटरस्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बन सके।
