इस स्कीम को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय चलाता है और इसका उद्देश्य छात्रों को ग्लोबल स्तर पर पढ़ाई का मौका देना है। इस स्कॉलरशिप के तहत ट्यूशन फीस, रहने का खर्च, ट्रैवल, वीजा और हेल्थ इंश्योरेंस तक का खर्च सरकार उठाती है।
कौन कर सकता है National Overseas Scholarship में आवेदन
इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन वही छात्र कर सकते हैं जो SC, डिनोटिफाइड/नोमैडिक ट्राइब्स, लैंडलेस लेबर या ट्रेडिशनल आर्टिजन कैटेगरी से आते हैं।
योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार के पास कम से कम 60% अंक होना जरूरी है। मास्टर्स के लिए ग्रेजुएशन और पीएचडी के लिए पोस्टग्रेजुएशन जरूरी है। उम्र सीमा 35 साल से कम होनी चाहिए और परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
सबसे जरूरी शर्त यह है कि छात्र के पास विदेश की टॉप 500 QS रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी से एडमिशन ऑफर होना चाहिए।
कैसे होता है चयन और कितनी मिलती है स्कॉलरशिप
इस योजना के तहत हर साल कुल 125 सीटें दी जाती हैं, जिसमें 30% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं।
चयन प्रक्रिया दो चरणों में होती है। पहले चरण में यूनिवर्सिटी की रैंकिंग के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। अगर रैंकिंग समान होती है तो उम्मीदवार के अंकों को देखा जाता है।
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इस स्कॉलरशिप के तहत छात्रों को पूरी फाइनेंशियल मदद मिलती है। पीएचडी के लिए 4 साल और मास्टर्स के लिए 3 साल तक सहायता दी जाती है।
कुल मिलाकर, यह स्कीम उन छात्रों के लिए सुनहरा मौका है जो विदेश में पढ़ाई का सपना देखते हैं लेकिन आर्थिक वजहों से पीछे रह जाते हैं।
