उज्जैन में पप्पू यादव का बड़ा हमला: “बंगाल में BJP जीती नहीं, जिताई गई”, चुनाव नतीजों पर उठाए गंभीर सवाल



नई दिल्ली। उज्जैन में दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजों को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया है। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव “जीता नहीं, जिताया गया है”। उनके मुताबिक करीब 100 सीटों पर गड़बड़ी कर जीत हासिल की गई और अब भाजपा कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं।

पप्पू यादव ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और राष्ट्रीय जांच एजेंसी जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया गया। साथ ही उन्होंने भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि हालात ऐसे थे जैसे युद्ध जैसी स्थिति बना दी गई हो।

वोटिंग प्रतिशत को लेकर भी उन्होंने गंभीर शंका जताई। उनका कहना था कि एक बूथ पर सीमित समय में जितने वोट पड़ सकते हैं, उससे कहीं ज्यादा प्रतिशत दर्ज किया गया, जो जांच का विषय है। उन्होंने मांग की कि दोपहर 2 बजे के बाद की सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए और सभी सीटों की गिनती सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में दोबारा कराई जाए। उन्होंने कहा कि अगर ममता बनर्जी हारती हैं तो वे जनादेश स्वीकार करेंगे।

उज्जैन प्रवास के दौरान पप्पू यादव ने महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन कर देश में शांति और मानवता की रक्षा के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि दुनिया युद्ध की ओर बढ़ रही है और ऐसे समय में नफरत नहीं, बल्कि प्रेम और एकता की जरूरत है। उन्होंने नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच पप्पू यादव ने विपक्षी दलों को एकजुट होने की सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि छोटी पार्टियों को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर नहीं लड़ना चाहिए, बल्कि 2027 और 2029 के चुनावों के लिए एक मजबूत गठबंधन बनाना जरूरी है। उनका मानना है कि बिखरा हुआ विपक्ष भाजपा के सामने कमजोर पड़ता है।

अपने बयान में उन्होंने कई क्षेत्रीय नेताओं और दलों के कमजोर पड़ने का जिक्र करते हुए कहा कि अब विपक्ष को नई रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई जगहों पर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर हमले हुए, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।

पप्पू यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर उनके आरोपों ने चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी ओर सियासी बयानबाजी का दौर भी तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।