मध्यप्रदेश में हीटवेव का इमरजेंसी अलर्ट: इंसान ही नहीं, जानवर भी गर्मी से बेहाल


मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। नौतपा शुरू होने से पहले ही कई शहरों में तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। सबसे अधिक तापमान खजुराहो में 47.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जिससे यह प्रदेश का सबसे गर्म शहर बन गया है। तेज धूप और तपन के कारण सड़कें सुनसान हो गई हैं और लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। राजधानी Bhopal में भी तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

 6 जिलों में हीटवेव का इमरजेंसी अलर्ट
भीषण गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने राज्य के 6 जिलों—सतना, रीवा, मैहर, टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर—में इमरजेंसी हीटवेव अलर्ट जारी किया है। लोगों के मोबाइल फोन पर लगातार चेतावनी संदेश भेजे जा रहे हैं, जिनमें उन्हें धूप से बचने, सावधानी बरतने और बिना जरूरत बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है।

इंसानों के साथ जानवर भी बेहाल, वन विहार में विशेष इंतजाम
गर्मी का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जानवर भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। भोपाल के Van Vihar National Park में शेर, बाघ और तेंदुओं को राहत देने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। जानवरों के बाड़ों में कूलर लगाए गए हैं, ग्रीन नेट और पर्दों से छांव की व्यवस्था की गई है। साथ ही, लगातार पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है ताकि जानवरों को गर्मी से राहत मिल सके।

 जिलों में हालत गंभीर, सड़कों पर सन्नाटा
सतना में दोपहर 12 बजे तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि सिंगरौली में 43 डिग्री के आसपास तापमान दर्ज किया गया। दोपहर होते ही सड़कों पर सन्नाटा छा गया। रीवा में सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों को परेशान कर दिया है। वहीं रतलाम में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच गया, जहां टंकियों का पानी तक गर्म होकर जलन पैदा कर रहा है।

 स्वास्थ्य पर असर और प्रशासन की चेतावनी
मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें। लगातार बढ़ती गर्मी से शरीर में डिहाइड्रेशन, चक्कर और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।

मध्य प्रदेश में इस समय भीषण लू ने जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। जहां एक तरफ तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहा है, वहीं प्रशासन और वन विभाग लगातार राहत उपायों में जुटे हैं। आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है।