पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव, निर्यात में गिरावट से व्यापार घाटा 39.5 अरब डॉलर पहुंचा, आयात निर्भरता बनी बड़ी चुनौती

नई दिल्ली । पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बाहरी क्षेत्र का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश का व्यापार घाटा बढ़कर 39.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 22 प्रतिशत अधिक है। आयात में तेज वृद्धि और निर्यात में गिरावट ने आर्थिक संतुलन को प्रभावित किया है, जिससे विदेशी मुद्रा प्रबंधन और बाहरी वित्तीय स्थिरता को लेकर नई चुनौतियां सामने आई हैं।

आंकड़ों के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष के दौरान पाकिस्तान का कुल आयात बढ़कर 69.6 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात घटकर 30.1 अरब डॉलर पर सिमट गया। आयात में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि निर्यात में करीब 6 प्रतिशत की कमी आई। दोनों के बीच बढ़ते अंतर ने व्यापार घाटे को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

केवल जून महीने के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले रहे। महीने-दर-महीने आधार पर व्यापार घाटा लगभग 57 प्रतिशत बढ़कर 4.53 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस दौरान निर्यात में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि आयात में 26 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि घरेलू मांग बढ़ने के साथ आयात का दबाव लगातार मजबूत हो रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का व्यापार घाटा केवल अल्पकालिक समस्या नहीं बल्कि संरचनात्मक चुनौती बन चुका है। देश की अर्थव्यवस्था ऊर्जा, मशीनरी और औद्योगिक कच्चे माल जैसे आवश्यक उत्पादों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। दूसरी ओर निर्यात का आधार अभी भी सीमित है और उच्च मूल्य वाले उत्पादों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।

कपड़ा उद्योग अब भी पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बना हुआ है। हालांकि इस क्षेत्र से होने वाली आय में बहुत सीमित वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निर्यात क्षेत्र अपेक्षित गति से विस्तार नहीं कर पा रहा। वैश्विक प्रतिस्पर्धा, उत्पादन लागत और मांग में उतार-चढ़ाव जैसे कारकों का असर भी निर्यात प्रदर्शन पर दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार के साथ आयात की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन निर्यात उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहा। यही असंतुलन व्यापार घाटे को लगातार बढ़ा रहा है। यदि निर्यात क्षमता में सुधार नहीं हुआ तो बाहरी भुगतान संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

व्यापार और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी निर्यात में लगातार कमजोरी को अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकेत बताया है। उनका मानना है कि निर्यात आधारित उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने, उत्पादन लागत कम करने और नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के लिए प्रभावी नीतिगत कदम उठाने की आवश्यकता है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान के लिए आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती आयात पर निर्भरता कम करना और निर्यात आधारित विकास मॉडल को मजबूत बनाना होगी। यदि व्यापार असंतुलन इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर आर्थिक वृद्धि, विदेशी निवेश, मुद्रा विनिमय दर और समग्र वित्तीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।