दुर्लभ बीमारी से जूझ रही तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी पर हाई कोर्ट सख्त, दिल्ली AIIMS से मांगा जवाब, 23 जुलाई तक रिपोर्ट तलब


मध्य प्रदेश: हाई कोर्ट ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 जैसी दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय बच्ची के इलाज में कथित देरी को गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता और बच्ची की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए जवाब 23 जुलाई तक हर हाल में दाखिल किया जाना चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है।

इंदौर निवासी तीन वर्षीय अनिका शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में अनावश्यक देरी मरीज के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। सुनवाई के दौरान AIIMS की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय का अनुरोध किया, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से इसका विरोध किया गया। उनका कहना था कि इलाज के लिए आवश्यक धनराशि का बड़ा हिस्सा जुटाए जाने के बावजूद उपचार शुरू नहीं हो सका है।

इससे पहले भी अदालत केंद्र और राज्य सरकार से इस मामले में जानकारी मांग चुकी है। न्यायालय ने यह भी जानना चाहा था कि क्या राज्य सरकार बच्ची के उपचार में किसी प्रकार की आर्थिक या प्रशासनिक सहायता उपलब्ध करा सकती है। अदालत का मानना है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के मामलों में संबंधित संस्थाओं को समयबद्ध और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई करनी चाहिए।

याचिका के अनुसार बच्ची के इलाज के लिए लगभग 9.50 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। परिवार अब तक करीब 8 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर चुका है। इसमें केंद्र सरकार से स्वीकृत आर्थिक सहायता के अलावा सामाजिक संगठनों और विभिन्न दानदाताओं का सहयोग भी शामिल है। परिवार का कहना है कि उपचार में जितनी अधिक देरी होगी, बीमारी के बढ़ने का जोखिम उतना ही बढ़ता जाएगा।

मामले में बताया गया है कि उपचार के लिए एक विशेष जीवनरक्षक इंजेक्शन विदेश से मंगाना आवश्यक है। यह दवा अमेरिका से आयात की जानी है और इसके बिना उपचार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एसएमए जैसी बीमारी में समय पर इलाज अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि देरी होने पर मांसपेशियों की कार्यक्षमता लगातार प्रभावित होती जाती है और रोगी की स्थिति अधिक जटिल हो सकती है।

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक दुर्लभ आनुवंशिक न्यूरोमस्कुलर बीमारी है, जिसमें रीढ़ की हड्डी के मोटर न्यूरॉन्स धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। इसके कारण शरीर की मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और सांस लेने, निगलने तथा सामान्य गतिविधियां करने जैसी आवश्यक शारीरिक क्षमताएं भी प्रभावित हो सकती हैं। यही वजह है कि इस बीमारी में समय पर उपचार को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

अब सभी की निगाहें AIIMS की ओर से अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब और आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि न्यायालय के निर्देशों के बाद उपचार प्रक्रिया को लेकर स्थिति जल्द स्पष्ट होगी और बच्ची को आवश्यक चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे की कार्रवाई तेज होगी।