नई टैक्स व्यवस्था, कॉरपोरेट और व्यक्तिगत टैक्स में बदलाव: वित्त मंत्रालय ने अपडेट दी


नई दिल्ली। बजट 2026-27 के पेश होने से ठीक पहले वित्त मंत्रालय ने पिछले बजट और वित्त अधिनियम 2025 के तहत किए गए अहम सुधारों का ब्योरा दिया। मंत्रालय ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि न्यू टैक्स रिजीम एनटीआरके तहत व्यक्तिगत और कॉरपोरेट टैक्स में बदलाव किए गए हैं।वित्त मंत्रालय के अनुसार नई व्यवस्था का मकसद टैक्स देने के बाद लोगों के हाथ में अधिक पैसा बचाना है। यह बदलाव वित्त वर्ष 2025-26 से लागू हो चुके हैं यानी आकलन वर्ष 2026-27 से इसका असर दिखेगा।

इनकम टैक्स बिल 2025 को भी वित्त मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम बताया। छह दशक पुराने प्रत्यक्ष कर कानून को बदलने के लिए यह बिल लाया गया है। इसका उद्देश्य टैक्सपेयर्स को राहत देना निवेशकों का भरोसा बनाए रखना और टैक्स व्यवस्था को आसान बनाना है।कॉरपोरेट टैक्स में बदलाव के तहत जो कंपनियां तय की गई छूट और कटौतियों का लाभ नहीं लेती हैं उनके लिए टैक्स दर 22 प्रतिशत रखी गई है। वहीं नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए एक निश्चित अवधि तक टैक्स दर 15 प्रतिशत तय की गई है।

व्यक्तिगत आयकर के मामले में भी नए टैक्स सिस्टम में स्लैब आसान और टैक्स दर कम कर दी गई हैं। छूट बढ़ाई गई है जिसके तहत 12 लाख रुपए तक की आय वाले लोगों को टैक्स नहीं देना होगा। सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपए तक बढ़ाई गई है क्योंकि उन्हें 75000 रुपए की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगी।फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत धारा 10 23एफई के फायदे भी बढ़ाए गए हैं। इसके अनुसार योग्य सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड अब 31 मार्च 2030 तक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश कर सकते हैं और उन्हें डिविडेंड ब्याज और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ एलटीसीजीपर टैक्स से छूट मिलेगी।

इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर आईएफएससीसे जुड़े नियमों और अतिरिक्त कामकाज की तारीख भी फाइनेंस एक्ट 2025 के जरिए लागू कर दी गई हैं जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हैं। इसके अलावा अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स एआईएफके लिए कराधान की स्पष्टता भी सुनिश्चित की गई है। अब प्रतिभूतियों से होने वाली आय पर टैक्स नियम स्पष्ट हैं जिससे निवेशकों को भरोसा मिलेगा।कुल मिलाकर वित्त मंत्रालय ने यह संदेश दिया है कि सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में टैक्स सुधार निवेश प्रोत्साहन और सरल वित्तीय नियमों के जरिए आम नागरिक और निवेशकों दोनों को लाभ पहुंचाने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। बजट 2026-27 के दौरान इन नीतियों को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।