BCCI Central Contract में बड़ा उलटफेर! क्या खत्म हो जाएगा 7 करोड़ वाला ग्रेड, विराट-रोहित की सैलरी में होगी भारी कटौती?




नई दिल्ली।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) अपने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है, जिससे ए प्लस ग्रेड हटने और 7 करोड़ रुपये सालाना वाली सैलरी खत्म होने की संभावना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बोर्ड अब सिर्फ A, B और C ग्रेड ही रखने पर विचार कर रहा है, जिससे टीम इंडिया के दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली और रोहित शर्मा की सैलरी में भारी कटौती होने की आशंका है।

7 करोड़ वाला ग्रेड हो सकता है खत्म
फिलहाल BCCI के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में चार कैटेगरी हैंए प्लस, A, B और C।
ए प्लस ग्रेड में खिलाड़ी को सालाना 7 करोड़ रुपये मिलते हैं।
A ग्रेड में 5 करोड़, B ग्रेड में 3 करोड़ और C ग्रेड में कम रिटेनर मिलता है।

अब BCCI ए प्लस ग्रेड को पूरी तरह समाप्त करने की योजना पर काम कर रहा है। अगर यह बदलाव लागू हुआ, तो 7 करोड़ रुपये वाली सैलरी इतिहास बन सकती है।

विराट-रोहित को बड़ा झटका?
रिपोर्ट्स के अनुसार, विराट कोहली और रोहित शर्मा को B ग्रेड में शिफ्ट किया जा सकता है।
अगर ऐसा हुआ, तो उनका सालाना रिटेनर 7 करोड़ से घटकर 3 करोड़ रह जाएगा, यानी दोनों की सैलरी में करीब 4 करोड़ रुपये की कटौती होगी।

बुमराह और जडेजा का क्या?
जसप्रीत बुमराह को A ग्रेड में रखा जा सकता है, जहां सैलरी 5 करोड़ है

इससे उन्हें 2 करोड़ रुपये कम मिलने का खतरा है।रवींद्र जडेजा को भी B ग्रेड में लाया जाने की संभावना है।
यह साफ नहीं है कि BCCI A ग्रेड की रकम में भी कोई बदलाव करेगा या नहीं, लेकिन अगर ऐसा हुआ, तो सभी ग्रेडों में रिटेनर को नई नीति के अनुरूप फिर से तय किया जा सकता है।

सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में कुल 34 खिलाड़ी
वर्तमान में BCCI ने कुल 34 खिलाड़ियों को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट दिया हुआ है, जिनमें से A Plus ग्रेड: विराट कोहली, रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह, रवींद्र जडेजा। A ग्रेड: मोहम्मद सिराज, केएल राहुल, शुभमन गिल, हार्दिक पंड्या, मोहम्मद शमी, ऋषभ पंत, B ग्रेड: सूर्यकुमार यादव, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, यशस्वी जायसवाल, श्रेयस अय्यर, C ग्रेड: रिंकू सिंह, तिलक वर्मा, ऋतुराज गायकवाड़, संजू सैमसन आदि युवा खिलाड़ी।

क्यों हो रहा बदलाव?
बीसीसीआई के इस कदम के पीछे परफॉर्मेंस-बेस्ड सिस्टम, फिटनेस, युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और वर्कलोड मैनेजमेंट जैसे कारण बताए जा रहे हैं। हालांकि बोर्ड की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वास्तव में 7 करोड़ वाले ए प्लस ग्रेड को हटाया जाता है या यह सिर्फ चर्चा तक सीमित रहता हैलेकिन इस कदम से भारतीय क्रिकेट की नीति में बड़ा बदलाव आ सकता है।