छोटी आदतें जो तनाव कम कर जीवन की गुणवत्ता बढ़ाएं


नई दिल्ली :तेज़ रफ्तार जिंदगी बढ़ता काम का दबाव और हर समय मोबाइल स्क्रीन से जुड़ी दिनचर्या ने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर चुनौती बना दिया है। तनाव बेचैनी अनिद्रा और चिड़चिड़ापन अब किसी एक उम्र या पेशे तक सीमित नहीं रहे। ऐसे समय में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ माइंडफुलनेस को संतुलित जीवन के लिए बेहद जरूरी मान रहे हैं। माइंडफुलनेस कोई जटिल साधना या धार्मिक अभ्यास नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाई जा सकने वाली एक सरल और व्यवहारिक आदत है।

क्या है माइंडफुलनेस और क्यों जरूरी
माइंडफुलनेस का अर्थ है वर्तमान क्षण में पूरी जागरूकता के साथ जीना। यानी जो काम आप कर रहे हैं उसे बिना जल्दबाज़ी और बिना मन भटकाए पूरी चेतना के साथ करना। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार मल्टीटास्किंग और भविष्य की चिंता दिमाग को थका देती है। माइंडफुलनेस व्यक्ति को वर्तमान में टिके रहना सिखाती है जिससे तनाव कम होता है भावनात्मक संतुलन बढ़ता है और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है।

सुबह की शुरुआत से करें माइंडफुलनेस
माइंडफुलनेस अपनाने के लिए अलग से लंबा समय निकालना जरूरी नहीं है। इसकी शुरुआत सुबह उठते ही की जा सकती है। जागने के बाद कुछ मिनट गहरी सांस लेकर अपने शरीर और मन की स्थिति को महसूस करना एक सरल अभ्यास है। इससे दिन की शुरुआत शांति और सजगता के साथ होती है।

खाने में भी लाएं सजगता
खाना खाते समय मोबाइल या टीवी से दूरी बनाना माइंडफुलनेस का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भोजन के स्वाद बनावट और खुशबू पर ध्यान देने से न केवल पाचन बेहतर होता है बल्कि भोजन से संतुष्टि भी बढ़ती है। यह आदत अनावश्यक ओवरईटिंग को भी रोकने में मदद करती है।

काम के दौरान माइंडफुल अप्रोच
ऑफिस या घर से काम करने वाले लोग अक्सर एक साथ कई काम करने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक समय में एक ही काम करें। ईमेल लिखते समय केवल उसी पर ध्यान दें और बीच बीच में छोटे ब्रेक लें। इससे मानसिक थकान कम होती है और कार्यक्षमता बढ़ती है।

डिजिटल डिटॉक्स भी है जरूरी
लगातार नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया अपडेट दिमाग को बेचैन रखते हैं। माइंडफुलनेस के लिए डिजिटल संतुलन बेहद जरूरी है। दिन में कुछ समय के लिए फोन साइलेंट करना सोशल मीडिया से दूरी बनाना और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना मानसिक शांति में सहायक होता है।

चलते फिरते भी संभव है माइंडफुलनेस
सुबह की वॉक या रोज़ के सफर को भी माइंडफुल बनाया जा सकता है। चलते समय अपने कदमों सांसों और आसपास के वातावरण पर ध्यान देना तनाव को कम करता है। यह अभ्यास खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनके पास योग या ध्यान के लिए लंबा समय नहीं होता।मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि माइंडफुलनेस कोई तात्कालिक समाधान नहीं बल्कि धीरे धीरे विकसित होने वाली आदत है। रोज़ कुछ मिनट का अभ्यास भी लंबे समय में मानसिक और भावनात्मक संतुलन को मजबूत करता है। बदलती जीवनशैली और बढ़ते मानसिक दबाव के दौर में माइंडफुलनेस अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बनती जा रही है।