भाई वीरेंद्र ने दिनारा विधानसभा सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि वे और विजय मंडल एक साथ विधायक रहे हैं।
उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी के अंदर विजय मंडल का टिकट बचाने के लिए संघर्ष किया था और उनका मानना है कि टिकट कटना गलत फैसला था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने स्थानीय और मजबूत नेताओं को नजरअंदाज कर दूसरे जिलों से आए नेताओं को टिकट दिया, जिससे जमीनी पकड़ कमजोर हुई।
भाई वीरेंद्र ने कुछ नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा,
“पार्टी में कुछ लोग सिर्फ नाम के समाजवादी हैं।
उनके बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि RJD में अंदरूनी तनाव और असंतोष बढ़ रहा है। पार्टी नेतृत्व ने पहले ही हार के लिए वोट चोरी का आरोप लगाया था, लेकिन अब टिकट वितरण को लेकर उठ रहे सवालों से राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है।
गौरतलब है कि दिनारा सीट से विजय मंडल 2020 में RJD के टिकट पर विधायक चुने गए थे। उन्होंने LJP के प्रत्याशी राजेंद्र सिंह को 8,228 वोटों से हराया था। लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में RJD ने उनका टिकट काटकर शशि शंकर कुमार उर्फ राजेश यादव को उम्मीदवार बनाया, जिन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।
