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  • अन्नू कपूर के ‘दूधिया बदन’ वाले कमेंट पर तमन्ना भाटिया ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं ऐसी बातों को तवज्जो देने से नहीं बढ़ेंगे आगे

    अन्नू कपूर के ‘दूधिया बदन’ वाले कमेंट पर तमन्ना भाटिया ने तोड़ी चुप्पी, बोलीं ऐसी बातों को तवज्जो देने से नहीं बढ़ेंगे आगे

    नई दिल्ली । अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने अन्नू कपूर की ओर से उनके लिए इस्तेमाल किए गए ‘दूधिया बदन’ शब्द पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस टिप्पणी को लेकर पहले सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी और अन्नू कपूर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। अब तमन्ना ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा है कि ऐसी टिप्पणियों को जरूरत से ज्यादा महत्व देने से आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस तरह की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने काम और अभिनय पर केंद्रित रहना पसंद करती हैं।

    तमन्ना से एक बातचीत के दौरान उनके रंग-रूप को लेकर की गई टिप्पणी के बारे में सवाल पूछा गया। उनसे जानना चाहा गया कि क्या वह चाहती हैं कि करियर के इस पड़ाव पर लोग उन्हें किसी अलग नजरिए से देखें। इसके जवाब में अभिनेत्री ने अपने काम के प्रति दृष्टिकोण साझा किया और बताया कि एक रचनात्मक व्यक्ति के लिए यह समझना जरूरी है कि उसे दूसरों की कही बातों में से क्या सुनना चाहिए और किन बातों को नजरअंदाज करना चाहिए।

    तमन्ना ने कहा कि किसी भी रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति के लिए सुनने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। लेकिन केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह पहचानना भी जरूरी है कि किस बात को महत्व देना है और किसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देना है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी टिप्पणियों को जरूरत से ज्यादा तवज्जो दी जाए, तो आगे बढ़ने में मुश्किल हो सकती है। इसी वजह से वह इन बातों को देखना भी पसंद नहीं करतीं।

    अभिनेत्री के मुताबिक, उनका ध्यान अपने काम, अपनी रचनात्मकता और अभिनय करियर पर रहता है। वह अपने काम को एक सेवा की तरह करना चाहती हैं। उनका मानना है कि जब कोई काम सही भावना और उद्देश्य के साथ किया जाता है, तो वह लोगों तक पहुंचता है। तमन्ना ने इस बातचीत में अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि वह बाहरी टिप्पणियों के बजाय अपने काम की गुणवत्ता पर ध्यान देती हैं।

    यह विवाद वर्ष 2025 में शुरू हुआ था, जब एक पॉडकास्ट में अन्नू कपूर से तमन्ना भाटिया के बारे में सवाल किया गया। उनसे पूछा गया था कि क्या उन्हें अभिनेत्री पसंद हैं। इसके जवाब में अन्नू कपूर ने ‘दूधिया बदन’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रतिक्रिया दी और उनकी टिप्पणी की आलोचना भी हुई।

    बाद में अन्नू कपूर ने अपने बयान पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि भाषा को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हो सकती हैं। उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों पर समाज की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए अपनी बात रखी थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यदि उनकी टिप्पणी से तमन्ना को बुरा लगा हो, तो वह माफी मांगने के लिए तैयार हैं। उनके इस स्पष्टीकरण के बावजूद यह मामला चर्चा में बना रहा।

    तमन्ना भाटिया ने वर्ष 2005 में आई फिल्म ‘चांद सा रोशन चेहरा’ से हिंदी सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत की थी। उस फिल्म में उनके साथ समीर अफताब नजर आए थे। फिल्म में काम करने के समय तमन्ना की उम्र करीब 15 साल थी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम किया और अभिनय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

    अन्नू कपूर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए तमन्ना ने किसी तरह के विवाद को बढ़ाने के बजाय अपने काम को प्राथमिकता देने की बात कही है। उनका जवाब इस बात पर केंद्रित रहा कि सार्वजनिक जीवन में लोगों की राय से अधिक जरूरी अपने लक्ष्य और काम पर ध्यान बनाए रखना है।

  • दलेर मेहंदी विवाद में मंत्री सुबोध उनियाल का दोटूक बयान, बोले- माफी मांगने का सवाल नहीं, मीका सिंह के दावे खारिज

    दलेर मेहंदी विवाद में मंत्री सुबोध उनियाल का दोटूक बयान, बोले- माफी मांगने का सवाल नहीं, मीका सिंह के दावे खारिज

    नई दिल्ली । पंजाबी गायक दलेर मेहंदी और उत्तराखंड के मंत्री सुबोध उनियाल के बीच कुंजापुरी मेले में हुई घटना को लेकर विवाद जारी है। अब मंत्री ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने दलेर मेहंदी से माफी नहीं मांगी है। उन्होंने इस दावे को भी खारिज किया कि विवाद के बाद उन्होंने गायक से माफी मांगकर मामला खत्म करने की कोशिश की थी। इस मुद्दे पर दलेर मेहंदी के भाई और गायक मीका सिंह पहले ही नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।

    एक बातचीत के दौरान जब सुबोध उनियाल से पूछा गया कि क्या उन्होंने दलेर मेहंदी से माफी मांगी है, तो उन्होंने इससे साफ इनकार किया। मंत्री ने कहा कि उनके लिए माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने सवाल किया कि आखिर उन्होंने कौन-सा अपराध किया है, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि वह पूरे मामले में अपनी गलती स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

    मंत्री ने दलेर मेहंदी की तबीयत को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि गायक की तबीयत खराब थी, तो उन्हें कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चाहिए था। अगर वह कार्यक्रम में पहुंचे भी थे, तो आयोजकों और वहां मौजूद लोगों को अपनी स्थिति के बारे में पहले जानकारी देनी चाहिए थी। सुबोध उनियाल ने कहा कि किसी व्यक्ति की तबीयत खराब है या नहीं, यह उसके चेहरे से पता नहीं चलता। इसलिए कलाकार को अपनी परेशानी के बारे में पहले से बताना चाहिए था, ताकि आयोजक उसी के अनुसार व्यवस्था कर सकें।

    सुबोध उनियाल ने इस मामले में जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि माफी उसी व्यक्ति को मांगनी चाहिए, जिसने गलती की हो। उन्होंने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गायक को कार्यक्रम के लिए भुगतान किया गया था, लेकिन उनकी प्रस्तुति दर्शकों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही। मंत्री ने इसी आधार पर अपनी ओर से माफी मांगने की जरूरत से इनकार किया।

    विवाद की शुरुआत उत्तराखंड के कुंजापुरी मेले में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के दौरान हुई थी। कार्यक्रम में सुबोध उनियाल ने मंच पर गायक की परफॉर्मेंस को लेकर आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दलेर मेहंदी ठीक से प्रस्तुति नहीं दे रहे थे, शराब पीकर आए थे और लिप-सिंक कर रहे थे। इन आरोपों के बाद मामला तूल पकड़ गया और गायक के समर्थकों के बीच भी नाराजगी देखने को मिली।

    दलेर मेहंदी के भाई मीका सिंह ने अपने भाई का बचाव करते हुए मंत्री से माफी मांगने की मांग की थी। मीका सिंह की टीम की ओर से यह दावा भी किया गया था कि सुबोध उनियाल ने दलेर मेहंदी से माफी मांग ली है। हालांकि, मंत्री के ताजा बयान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। दोनों पक्षों के बयानों के कारण विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

    मामले को शांत कराने के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी दलेर मेहंदी और मीका सिंह से बातचीत की थी। मुख्यमंत्री ने मंत्री की ओर से माफी मांगी थी। इसके बावजूद सुबोध उनियाल ने खुद माफी मांगने की बात से इनकार किया है। ऐसे में कुंजापुरी मेले में हुई घटना को लेकर विवाद अभी पूरी तरह समाप्त होता नजर नहीं आ रहा है।

  • दलेर मेहंदी विवाद में मीका सिंह ने मांगी मंत्री सुबोध उनियाल से माफी, सीएम धामी ने फोन कर बातचीत से गलतफहमी दूर करने की अपील की

    दलेर मेहंदी विवाद में मीका सिंह ने मांगी मंत्री सुबोध उनियाल से माफी, सीएम धामी ने फोन कर बातचीत से गलतफहमी दूर करने की अपील की

    नई दिल्ली । गायक दलेर मेहंदी के एक कार्यक्रम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब उनके भाई और गायक मीका सिंह तथा उत्तराखंड के मंत्री सुबोध उनियाल के बीच माफी की मांग तक पहुंच गया है। मीका सिंह अपने भाई पर नशे की हालत में कार्यक्रम करने का आरोप लगाए जाने से नाराज हैं। उन्होंने मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। इस बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीका सिंह से फोन पर बातचीत की और कहा कि किसी भी तरह की गलतफहमी को आपसी संवाद और सौहार्द से दूर किया जाना चाहिए।

    यह विवाद नवरात्रि के दौरान मां कुंजापुरी से जुड़े एक धार्मिक आयोजन में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति को लेकर सामने आया। मीका सिंह का कहना है कि उनके भाई ने कार्यक्रम में करीब एक घंटा 30 मिनट तक प्रस्तुति दी थी और वहां मौजूद कई लोग उनके साथ नाच रहे थे। इसके बावजूद दलेर मेहंदी पर नशे में कार्यक्रम करने का आरोप लगाया गया। मीका ने इस आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरे मामले को समझने के लिए कार्यक्रम का वीडियो देखा जाना चाहिए।

    मीका सिंह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से मामले में कार्रवाई करने की मांग भी की थी। उनका कहना है कि कलाकारों की गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी पर आरोप लगाने से पहले तथ्यों को समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि वह उत्तराखंड आकर बिना किसी शुल्क के कार्यक्रम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन इससे पहले मंत्री सुबोध उनियाल को दलेर मेहंदी से माफी मांगनी चाहिए।

    विवाद में उस समय नया मोड़ आया, जब भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी विनय गोयल ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह दलेर मेहंदी के प्रशंसक हैं, लेकिन धार्मिक आयोजन में सामने आए दृश्य श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाले हो सकते हैं। उनके अनुसार, यदि दलेर मेहंदी की तबीयत ठीक नहीं थी, तो आयोजकों को इसकी जानकारी पहले ही दी जानी चाहिए थी। उन्होंने मां कुंजापुरी के सम्मान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस मामले में समझौता नहीं किया जा सकता।

    विनय गोयल ने दलेर मेहंदी से माफी मांगने की बात कही। साथ ही मीका सिंह को चुनौती दी कि यदि वह अपने भाई के समर्थन में खड़े हैं, तो उत्तराखंड आकर निशुल्क कार्यक्रम करें। इस बयान के जवाब में मीका ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह उत्तराखंड में मुफ्त प्रस्तुति देने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले मंत्री को दलेर मेहंदी से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने वीडियो साझा करने की बात कहते हुए सवाल किया कि यदि वीडियो में मंत्री सुबोध उनियाल नशे की हालत में दिखाई दें, तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। मीका ने यह भी पूछा कि क्या नियम और जवाबदेही सभी के लिए समान नहीं होने चाहिए।

    दूसरी ओर, सुबोध उनियाल इस मामले में अपने रुख पर कायम बताए गए हैं। उन्होंने दलेर मेहंदी पर लगाए गए आरोप के संदर्भ में सवाल उठाया कि उन्होंने किस तरह का नशा किया था और इसकी जांच के लिए चिकित्सकीय परीक्षण कराना जरूरी क्यों माना जाए। इस बयान के बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद और चर्चा में आ गया है। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि से संबंधित कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विवाद को शांत करने की कोशिश करते हुए मीका सिंह से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी से जुड़े विषय पर चर्चा के दौरान किसी भी प्रकार की गलतफहमी को आपसी बातचीत और सौहार्द के जरिए दूर किया जाना चाहिए। धामी ने उत्तराखंड की ‘अतिथि देवो भवः’ परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में सभी कलाकारों का हमेशा स्वागत और सम्मान किया जाता है। फिलहाल, मीका सिंह मंत्री से माफी की मांग पर कायम हैं, जबकि मुख्यमंत्री ने विवाद को संवाद के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया है।

  • रिलीज से पहले सनी देओल की ‘सूर्या’ पर विवाद, डॉक्टरों की छवि और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर IMA ने उठाए सवाल

    रिलीज से पहले सनी देओल की ‘सूर्या’ पर विवाद, डॉक्टरों की छवि और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर IMA ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली । अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या – अंत से आरंभ तक’ रिलीज से पहले विवादों में आ गई है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने फिल्म में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को जिस तरह दिखाए जाने की बात सामने आई है, उस पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि फिल्म की प्रचार सामग्री मेडिकल पेशे की छवि को प्रभावित कर सकती है। इस मामले में आईएमए ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर फिल्म के प्रचार से जुड़ी सामग्री की समीक्षा कराने की मांग की है।

    आईएमए के मुताबिक, फिल्म में चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा को जिस तरह प्रस्तुत किया गया है, उससे पूरे मेडिकल पेशे के प्रति लोगों के मन में नकारात्मक धारणा बन सकती है। संगठन को आशंका है कि ऐसी प्रस्तुति डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिष्ठा, सुरक्षा तथा जनता के भरोसे पर असर डाल सकती है। इसी वजह से एसोसिएशन चाहता है कि फिल्म की रिलीज से पहले संबंधित सामग्री की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।

    संगठन ने अपने पत्र में चार प्रमुख चिंताओं को सामने रखा है। पहली चिंता चिकित्सा पेशे को अनुचित रूप से बदनाम किए जाने और उसकी साख को नुकसान पहुंचने की है। दूसरी चिंता फिल्म में स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा दिखाए जाने से जुड़ी है। तीसरा मुद्दा डॉक्टरों और दूसरे स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा का है। वहीं, चौथी चिंता डॉक्टरों और मरीजों के बीच लंबे समय से बने भरोसे पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर है।

    आईएमए का कहना है कि यदि प्रचार सामग्री के जरिए भ्रष्टाचार को पूरे चिकित्सा क्षेत्र की सामान्य स्थिति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो इससे लोगों की धारणा प्रभावित हो सकती है। संगठन ने इस बात पर भी जोर दिया है कि स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति हिंसा को दिखाने के संभावित प्रभावों पर ध्यान देना जरूरी है। उसके अनुसार, चिकित्सा सेवाओं से जुड़े लोगों की सुरक्षा और मरीजों का डॉक्टरों पर विश्वास स्वास्थ्य व्यवस्था के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

    मेडिकल संगठन ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि फिल्म में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के चित्रण के साथ-साथ उसके प्रचार से जुड़ी सामग्री की निष्पक्ष जांच कराई जाए। आईएमए ने यह भी कहा है कि यदि समीक्षा के दौरान उसकी आशंकाएं सही पाई जाती हैं, तो फिल्म निर्माताओं से आवश्यक बदलाव कराने पर विचार किया जाना चाहिए। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संगठन ने समीक्षा की मांग उठाई है। फिल्म में बदलाव को लेकर किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिल्म का टीजर 19 अक्टूबर को सनी देओल के 69वें जन्मदिन के अवसर पर जारी किया गया था। इसमें अभिनेता एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। कहानी में उनकी जिंदगी बेटी की मौत के बाद बदल जाती है। इसके बाद वह मामले की जांच शुरू करते हैं और इस प्रक्रिया में चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का पर्दाफाश करने की कोशिश करते हैं। कहानी का यही पहलू चिकित्सा पेशे के चित्रण को लेकर उठे विवाद के केंद्र में है।

    ‘सूर्या – अंत से आरंभ तक’ का निर्देशन एम. पद्मकुमार ने किया है। फिल्म का निर्माण दीपक मुकुत, हेमंत मुकुत और लोकेश मुकुत ने किया है। यह वर्ष 2018 में आई मलयालम क्राइम थ्रिलर ‘जोसेफ’ का हिंदी रूपांतरण है, जिसकी कहानी शाही कबीर ने लिखी थी। फिल्म को वास्तविक घटनाओं पर आधारित बताया जा रहा है। इसमें सनी देओल मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म की निर्धारित रिलीज तारीख 20 नवंबर 2026 है। अब देखना होगा कि आईएमए की मांग पर क्या कदम उठाए जाते हैं और विवाद का फिल्म की रिलीज से पहले क्या असर पड़ता है।

  • दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद को हटाने के नोटिस पर विवाद, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र से की कार्रवाई वापस लेने की मांग

    दिल्ली की रेस कोर्स मस्जिद को हटाने के नोटिस पर विवाद, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र से की कार्रवाई वापस लेने की मांग


    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली की ऐतिहासिक रेस कोर्स मस्जिद को हटाने के लिए जारी नोटिस के बाद विवाद गहरा गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए केंद्र सरकार से नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की है। बोर्ड का कहना है कि मस्जिद की ऐतिहासिक पहचान और कानूनी स्थिति से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं। उसने सरकार से धार्मिक स्थलों के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने की अपील भी की है।

    इस मामले में बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने बयान जारी कर नोटिस का विरोध किया। उनके अनुसार, संबंधित सरकारी एजेंसी लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस की ओर से मस्जिद को हटाने के लिए कार्रवाई की गई है। बोर्ड ने केंद्र सरकार से इस नोटिस को निरस्त कर वापस लेने की मांग की है। हालांकि, नोटिस जारी होने के पीछे सरकारी पक्ष की विस्तृत दलील और मस्जिद की जमीन को लेकर आधिकारिक स्थिति की पूरी जानकारी उपलब्ध विवरण में सामने नहीं आई है।

    डॉ. इलियास ने आरोप लगाया कि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद से दिल्ली की प्राचीन और ऐतिहासिक मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग आधारों पर इन धार्मिक स्थलों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। रेस कोर्स मस्जिद के मामले में भी सरकारी जमीन पर निर्माण होने का दावा किया जा रहा है। बोर्ड का कहना है कि मस्जिद के ऐतिहासिक अस्तित्व और कानूनी स्थिति के समर्थन में सरकारी रिकॉर्ड के कई दस्तावेज मौजूद हैं। ये आरोप बोर्ड के प्रवक्ता ने लगाए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

    मस्जिद की ऐतिहासिक और धार्मिक अहमियत का उल्लेख करते हुए बोर्ड ने कहा कि यह केवल पूजा का प्राचीन स्थल नहीं है, बल्कि दिल्ली के इतिहास से भी जुड़ी हुई है। प्रवक्ता के अनुसार, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी एनडीएमसी ने मस्जिद को अपनी ऐतिहासिक इमारतों की सूची में शामिल किया है। इसके अतिरिक्त, मस्जिद का उल्लेख वक्फ से जुड़े रिकॉर्ड में भी होने का दावा किया गया है।

    बोर्ड के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि रेस कोर्स मस्जिद को वर्ष 1977 में दिल्ली के राजपत्र में शामिल किया गया था। उनके मुताबिक, भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की वेबसाइट पर भी मस्जिद को सूचीबद्ध किया गया है, जहां उसकी संपत्ति की पहचान से संबंधित जानकारी दर्ज है। इन रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बोर्ड ने मस्जिद के ऐतिहासिक दर्जे और उसके अस्तित्व से जुड़े पक्ष को महत्वपूर्ण बताया है।

    डॉ. इलियास के बयान के अनुसार, मस्जिद ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित की गई थी और इसे ऐतिहासिक स्मारक के रूप में संरक्षित घोषित किए जाने की बात भी कही गई है। उन्होंने यह भी बताया कि मस्जिद के इमाम को वक्फ बोर्ड की ओर से वेतन दिया जाता है। बोर्ड इन तथ्यों को मस्जिद की धार्मिक और प्रशासनिक पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण आधार के रूप में पेश कर रहा है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र मस्जिद को हटाने के लिए जारी नोटिस और उसकी जमीन की कानूनी स्थिति है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप कर नोटिस वापस लेने की मांग की है। दूसरी ओर, मस्जिद की भूमि, सरकारी रिकॉर्ड और नोटिस के आधार को लेकर संबंधित विभागों की विस्तृत स्थिति सामने आने के बाद ही मामले के सभी पहलुओं का स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा।

  • शिवपुरी के सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य पर महिला शिक्षिकाओं को परेशान करने के आरोप, पैर पकड़कर माफी मांगने का वीडियो वायरल

    शिवपुरी के सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य पर महिला शिक्षिकाओं को परेशान करने के आरोप, पैर पकड़कर माफी मांगने का वीडियो वायरल

    मध्य प्रदेश”: के शिवपुरी जिले के कोलारस स्थित सीएम राइज स्कूल के प्राचार्य राकेश कुलश्रेष्ठ से जुड़ा एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वीडियो में प्राचार्य एक महिला के पैर पकड़कर माफी मांगते दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम के साथ महिला अतिथि शिक्षिकाओं की ओर से लगाए गए अनुचित व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली घटना की पूरी परिस्थितियों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।

    महिला शिक्षिका का आरोप है कि प्राचार्य खाली पीरियड के दौरान उन्हें अपने साथ बाहर घूमने के लिए कहते थे। वायरल वीडियो में शिक्षिका कथित तौर पर प्राचार्य से कहती सुनाई देती हैं कि उन्होंने ऐसा एक बार नहीं, बल्कि तीन बार कहा था। शिक्षिका के मुताबिक, स्कूल में खाली समय को लेकर दिए गए इस निर्देश से वह असहज थीं। मामले को लेकर स्कूल परिसर में विवाद होने और शिक्षिका की ओर से पुलिस थाने जाने की बात कहे जाने का भी उल्लेख किया गया है।

    वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम के अनुसार, जब महिला शिक्षिका ने थाने जाने की बात कही, तो प्राचार्य उनके पैर पकड़कर माफी मांगते नजर आए। इस दृश्य के सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि विवाद किन परिस्थितियों में हुआ था और माफी मांगने की नौबत क्यों आई। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर पूरे मामले के सभी पहलुओं या आरोपों की सत्यता का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    वीडियो में महिला शिक्षिका एक अन्य शिक्षिका का जिक्र करते हुए यह भी कहती सुनाई देती हैं कि उन्होंने पहले महिला एवं बाल विकास विभाग के समक्ष अपने बयान बदलकर प्राचार्य को बचाया था। शिक्षिका कथित तौर पर यह मांग भी करती हैं कि स्कूल में भविष्य में इस तरह का व्यवहार दोबारा नहीं होना चाहिए। यह बयान मामले में पहले हुई किसी शिकायत या विभागीय प्रक्रिया की ओर संकेत करता है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में उस प्रक्रिया के आधिकारिक निष्कर्षों का विवरण नहीं दिया गया है।

    मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, दोनों महिला शिक्षिकाओं को बाद में नौकरी छोड़नी पड़ी। आरोप है कि प्राचार्य महिला शिक्षिकाओं को अकेले में बुलाते थे और खाली पीरियड के दौरान अपने साथ समय बिताने का दबाव बनाते थे। शिक्षिकाओं की ओर से कथित अनुचित टिप्पणियों और मानसिक परेशानी की शिकायत भी सामने आई है। हालांकि, नौकरी छोड़ने के कारणों और परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध विवरण में नहीं है।

    दूसरी ओर, प्राचार्य राकेश कुलश्रेष्ठ ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि आरोप लगाने वाली दोनों महिलाओं ने झूठी शिकायतें की थीं और बाद में नौकरी छोड़कर चली गईं। इस तरह मामले में शिकायतकर्ता पक्ष के आरोप और प्राचार्य का पक्ष एक-दूसरे से अलग हैं। वायरल वीडियो ने विवाद को सार्वजनिक चर्चा में ला दिया है, लेकिन पूरे घटनाक्रम को स्पष्ट करने के लिए संबंधित पक्षों के बयान, शिकायतों के रिकॉर्ड और किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    शिक्षण संस्थानों में कार्यरत महिला कर्मचारियों की गरिमा, सुरक्षित वातावरण और शिकायतों के निष्पक्ष निपटारे का मुद्दा इस मामले के केंद्र में है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपों को स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई और जांच से जुड़ी आधिकारिक जानकारी का सामने आना जरूरी है।

  • दलेर मेहंदी पर शराब पीकर स्टेज पर आने के आरोप से भड़के मीका सिंह, बोले- सबूत मिला तो छोड़ दूंगा सिंगिंग

    दलेर मेहंदी पर शराब पीकर स्टेज पर आने के आरोप से भड़के मीका सिंह, बोले- सबूत मिला तो छोड़ दूंगा सिंगिंग

    नई दिल्ली । मशहूर गायक मीका सिंह अपने बड़े भाई और लोकप्रिय सिंगर दलेर मेहंदी के समर्थन में सामने आए हैं। उत्तराखंड में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी पर शराब पीकर मंच पर आने के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों पर नाराजगी जताते हुए मीका सिंह ने कहा कि यदि कोई यह साबित कर दे कि उनके भाई शराब पीते हैं, तो वह गायकी छोड़ देंगे। उन्होंने मीडिया में प्रकाशित खबरों पर सवाल उठाते हुए तथ्यों की पुष्टि के बाद ही समाचार प्रसारित करने की अपील की है।

    मीका सिंह ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में दलेर मेहंदी को लेकर सामने आई खबरों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके भाई पिछले करीब 30 वर्षों से सुपरस्टार हैं। मीका ने सवाल उठाया कि जब किसी ने उन्हें शराब पीते हुए नहीं देखा, तो उनके मंच पर नशे की हालत में होने का दावा किस आधार पर किया गया। उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण किसी कलाकार के बारे में इस तरह की बात फैलाना उचित नहीं है।

    मीका ने कलाकारों की व्यावसायिक जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार तबीयत खराब होने के बावजूद कलाकार अपने कार्यक्रम का वादा निभाने के लिए मंच पर पहुंचते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी कलाकार को 104 डिग्री बुखार हो और दो दिन बाद उसका कार्यक्रम निर्धारित हो, तब भी वह अपनी प्रतिबद्धता पूरी करने का प्रयास करता है। उनके मुताबिक, कार्यक्रम का बजट छोटा हो या बड़ा, कलाकार अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करते हैं। मीका का मानना है कि दलेर मेहंदी ने भी अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता के कारण कार्यक्रम में प्रस्तुति दी होगी।

    उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले उससे जुड़े तथ्यों की जांच की जाए। मीका ने कहा कि बिना सबूत लगाए गए आरोपों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए और न ही उन्हें सत्यता की पुष्टि किए बिना आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने दशहरा की शुभकामनाएं देते हुए जिम्मेदार और निष्पक्ष पत्रकारिता पर जोर दिया।

    मीका ने कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी के साथ हुए व्यवहार पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी सम्मानित मंत्री की मौजूदगी में किसी कलाकार पर सार्वजनिक रूप से शराब पीने का आरोप लगाया जाता है, तो खबर प्रकाशित करने से पहले उसकी पुष्टि करना और संबंधित कलाकार को अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी नहीं है क्या। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बैंड कोल्डप्ले का उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय कलाकार के साथ भी मंच पर ऐसा व्यवहार किया जाएगा।

    मीका ने यह भी कहा कि वह अपने भाई को अच्छी तरह जानते हैं और उनके अनुसार दलेर मेहंदी शराब नहीं पीते। उन्होंने बताया कि उनके भाई पिछले दो वर्षों से बीमार हैं और अभी भी स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। इसके बावजूद वह अपने बैंड के साथ प्रस्तुतियां दे रहे हैं। मीका ने यह मुद्दा भी उठाया कि आजकल कई गायक बैकिंग ट्रैक का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनके काम को लेकर उसी तरह के सवाल नहीं उठाए जाते। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी देश के बड़े गायकों में शामिल हैं और उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि बिना पुष्टि प्रकाशित की गई खबर किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।

    यह विवाद 18 अक्टूबर को उत्तराखंड के टिहरी जिले में आयोजित कुंजापुरी मेले के दौरान सामने आया था। नवरात्र के समय आयोजित होने वाले इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में दलेर मेहंदी प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री और स्थानीय विधायक सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति रुकवा दी और दर्शकों के सामने उन्हें फटकार लगाई। मंत्री ने आरोप लगाया कि दलेर मेहंदी देवी दुर्गा के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में शराब पीकर मंच पर आए थे। इसके बाद मामला चर्चा में आ गया और मीका सिंह ने अपने भाई के समर्थन में सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी।

  • भारत में स्टारलिंक को लेकर विवाद, अमेरिका में 36.6 करोड़ डॉलर के चुनावी चंदे पर घिरे एलन मस्क

    भारत में स्टारलिंक को लेकर विवाद, अमेरिका में 36.6 करोड़ डॉलर के चुनावी चंदे पर घिरे एलन मस्क


    नई दिल्‍ली । दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में अपनी कंपनी स्टारलिंक की जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच अमेरिका में उनके भारी राजनीतिक चंदे को लेकर बहस तेज हो गई है। अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने आरोप लगाया है कि मस्क रिपब्लिकन पार्टी को चुनावी बढ़त दिलाने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च कर रहे हैं, जिससे राजनीति में अरबपतियों के बढ़ते प्रभाव पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने 2026 के अमेरिकी चुनाव चक्र में करीब 36.6 करोड़ डॉलर का राजनीतिक चंदा दिया है। इसमें जुलाई के बाद से कम से कम 27.6 करोड़ डॉलर शामिल हैं। सैंडर्स का आरोप है कि इतनी बड़ी रकम खर्च करके मस्क रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस में अपना नियंत्रण बनाए रखने में मदद करना चाहते हैं।

    ट्रंप की जीत के लिए 29 करोड़ डॉलर खर्च करने का दावा

    बर्नी सैंडर्स के मुताबिक, एलन मस्क ने 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत के लिए करीब 29 करोड़ डॉलर खर्च किए थे। सैंडर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि ट्रंप की जीत के बाद मस्क की संपत्ति में 696 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि मस्क अब दुनिया के पहले खरबपति बन गए हैं।

    हालांकि, ये आंकड़े और संपत्ति में बढ़ोतरी को लेकर सैंडर्स के दावे हैं। उनकी आलोचना का मुख्य आधार यह है कि बेहद अमीर कारोबारी चुनावी अभियानों में भारी रकम लगाकर राजनीतिक व्यवस्था पर असाधारण प्रभाव हासिल कर सकते हैं।

    सैंडर्स ने आरोप लगाया कि मस्क 3 नवंबर को होने वाले 2026 के मध्यावधि चुनाव में भी रिपब्लिकन उम्मीदवारों की मदद के लिए बड़ी रकम खर्च कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में नारा दिया, ‘मस्क को रोको, कुलीनतंत्र को रोको।’ उनका कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक फैसलों पर कुछ अमीर लोगों का प्रभाव बढ़ना चिंता का विषय है।

    रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में कहां खर्च हुआ पैसा?

    मस्क के राजनीतिक चंदे का बड़ा हिस्सा उन संगठनों को मिला है, जो अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उनके योगदान का ब्योरा इस प्रकार है।

    सीनेट लीडरशिप फंड: रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवारों के समर्थन में काम करने वाले इस संगठन को करीब 15.8 करोड़ डॉलर दिए गए।
    अमेरिका पीएसी: मस्क के अपने राजनीतिक संगठन को लगभग 7.6 करोड़ डॉलर का योगदान मिला।
    कांग्रेसनल लीडरशिप फंड: प्रतिनिधि सभा के चुनावों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले इस संगठन को करीब 2 करोड़ डॉलर दिए गए।

    इन संगठनों के माध्यम से राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार, विज्ञापन तथा मतदाताओं तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। बड़ी रकम के योगदान से चुनावी अभियानों को संसाधन मिलते हैं, हालांकि इससे किसी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित नहीं होती।

    मध्यावधि चुनाव में ट्रंप के प्रभाव की परीक्षा

    अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों के लिए मुकाबला होगा। रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस में अपना बहुमत बनाए रखने की कोशिश करेगी, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल करना चाहती है।

    ऐसे में मस्क की ओर से रिपब्लिकन समर्थक संगठनों को दिए गए बड़े चंदे पर बहस तेज हो गई है। आलोचकों का तर्क है कि चुनावी अभियानों में अरबपतियों की बड़ी वित्तीय हिस्सेदारी से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और नीतिगत फैसलों पर उनके प्रभाव को लेकर असमानता बढ़ सकती है।

    क्या है कुलीनतंत्र, जिस पर सैंडर्स ने उठाए सवाल?

    कुलीनतंत्र यानी ओलिगार्की ऐसी व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें राजनीतिक शक्ति कुछ चुनिंदा अमीर या प्रभावशाली लोगों के हाथों में केंद्रित हो जाती है। बर्नी सैंडर्स लंबे समय से इस विचार की आलोचना करते रहे हैं कि अरबपतियों की विशाल संपत्ति उन्हें चुनावों और सरकारी नीतियों को प्रभावित करने की असाधारण क्षमता देती है।

    चुनावी अभियानों में बड़ी रकम खर्च करने वाले दानदाता विज्ञापन, प्रचार और मतदाताओं तक पहुंच बनाने के प्रयासों को वित्तीय मदद दे सकते हैं। इससे उनके समर्थन वाले उम्मीदवारों और मुद्दों को अधिक दृश्यता मिल सकती है। हालांकि, राजनीतिक चंदा देना अपने आप में किसी उम्मीदवार या दल पर नियंत्रण साबित नहीं करता।

    भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर भी चर्चा

    अमेरिका में राजनीतिक चंदे पर उठे सवालों के बीच भारत में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की कारोबारी योजनाएं भी चर्चा में हैं। कंपनी भारतीय सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में सेवाएं शुरू करना चाहती है और इसके लिए जरूरी नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजर रही है।

    भारत में दूरसंचार और सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, नियमों और बाजार में कंपनियों की भूमिका को लेकर बहस होती रही है। वहीं, अमेरिका में मस्क के राजनीतिक योगदान को लेकर सैंडर्स की आलोचना ने अरबपतियों के चुनावी प्रभाव पर नई चर्चा छेड़ दी है।

    दोनों मामलों का संदर्भ अलग है, लेकिन इनके केंद्र में बड़ी कंपनियों और अत्यधिक संपत्ति वाले कारोबारियों की भूमिका है। जहां भारत में स्टारलिंक की कारोबारी योजनाओं के लिए नियामकीय मंजूरी अहम है, वहीं अमेरिका में मस्क के चुनावी चंदे ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बड़े दानदाताओं के प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

  • बंगला साहिब गुरुद्वारे में हंगामे पर विवाद, केजरीवाल समेत ‘आप’ नेताओं के खिलाफ DSGMC ने दी शिकायत

    बंगला साहिब गुरुद्वारे में हंगामे पर विवाद, केजरीवाल समेत ‘आप’ नेताओं के खिलाफ DSGMC ने दी शिकायत

    नई दिल्ली। दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे में कथित हंगामे और घटना से जुड़े भ्रामक वीडियो प्रसारित करने के मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। कमेटी ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारे के पवित्र परिसर में राजनीतिक नारे लगाए, जिससे धार्मिक माहौल प्रभावित हुआ। उसने पुलिस से मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

    DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के नेतृत्व में कमेटी के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को नई दिल्ली जिला के पुलिस उपायुक्त कार्यालय में शिकायत सौंपी। कमेटी ने पुलिस को घटना से संबंधित वीडियो भी उपलब्ध कराए हैं।

    गुरुद्वारे की मर्यादा भंग करने का आरोप

    दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अपनी शिकायत में कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पवित्र परिसर के भीतर राजनीतिक नारे लगाए। कमेटी के मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों से गुरुद्वारे का धार्मिक वातावरण प्रभावित हुआ और गुरु घर की पवित्रता एवं मर्यादा का उल्लंघन हुआ।

    कमेटी ने मामले में दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही घटना से जुड़े वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले की भी जांच की मांग उठाई गई है।

    पुलिस के गुरुद्वारे में प्रवेश पर ‘आप’ ने उठाए सवाल

    इस विवाद को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुद्वारे में पुलिस के प्रवेश की निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि गुरुद्वारों के दरवाजे जरूरतमंद लोगों को आश्रय देने के लिए हमेशा खुले रहते हैं।

    वहीं, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए गुरुद्वारे के भीतर दाखिल हुई थी। इस मुद्दे पर रविवार शाम आप कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक जरनैल सिंह ने प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका पर भाजपा का पक्ष लेने का आरोप लगाया।

    कालका बोले- मुख्य दरबार हॉल में नहीं गई थी पुलिस

    DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने पुलिस के प्रवेश को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पहुंचे पुलिसकर्मियों ने गुरुद्वारे के मुख्य दरबार हॉल में प्रवेश नहीं किया था। उनके मुताबिक, पुलिस ने परिसर के भीतर से गुजरने वाले रास्ते का इस्तेमाल किया था।

    हालांकि, कालका ने यह भी कहा कि पुलिसकर्मियों को वर्दी में गुरुद्वारा परिसर के भीतर प्रवेश नहीं करना चाहिए था। इस तरह उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति भी जाहिर की।

    पुलिस ने वीडियो दुर्भावनापूर्ण मंशा से प्रसारित करने की बात कही

    नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मामले में स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने कहा था कि पुलिसकर्मी उस साझा रास्ते से गुजर रहे थे, जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु जूते उतारने के स्थान तक पहुंचने के लिए करते हैं।

    पुलिस उपायुक्त ने आरोप लगाया कि घटना से संबंधित वीडियो दुर्भावनापूर्ण मंशा से प्रसारित किए गए। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया।

    फिलहाल, बंगला साहिब गुरुद्वारे की घटना को लेकर DSGMC और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। कमेटी की शिकायत के बाद अब मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

  • बागेश्वर धाम विवाद: बयान पर सवाल उठाने के बाद धमकी का दावा, साध्वी हर्षा बोलीं- मुझे डराने की कोशिश न करें

    बागेश्वर धाम विवाद: बयान पर सवाल उठाने के बाद धमकी का दावा, साध्वी हर्षा बोलीं- मुझे डराने की कोशिश न करें


    भोपाल।
    बागेश्वर धाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच साध्वी हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने एक नया वीडियो जारी कर लगातार धमकियां मिलने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें गंदे कमेंट, मैसेज, ई-मेल और धमकियां भेजी जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह इन धमकियों से डरने वाली नहीं हैं और अपनी कही बात पर अब भी कायम हैं।

    साध्वी हर्षा ने कहा कि यदि उन्हें कुछ होता है तो इसकी आशंका उन लोगों पर जाएगी, जिनके श्रद्धालुओं की ओर से उन्हें धमकियां दिए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो में उन्होंने किसी व्यक्ति, संत, आश्रम या संस्था का नाम नहीं लिया है। धमकी मिलने के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर उठाया था सवाल

    विवाद की शुरुआत साध्वी हर्षा के उस वीडियो से हुई थी, जिसमें उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयान पर सवाल उठाए थे।

    धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं, खासकर महिलाओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यदि कोई महिला अकेले धाम आती है तो उसे किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि धाम के मंदिर और हॉल की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली जा सकती है, लेकिन करीब पांच किलोमीटर के पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं है।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से लंबे समय तक धाम में नहीं रुकने तथा अपनी सुरक्षा और सामान का स्वयं ध्यान रखने की अपील भी की थी।

    हर्षा ने पूछा- फिर भरोसा किस पर करें?

    धीरेंद्र शास्त्री के इसी बयान पर साध्वी हर्षा ने सवाल उठाया था कि जब धाम के प्रमुख स्वयं अपने सेवादारों को लेकर श्रद्धालुओं को सावधान कर रहे हैं, तो परिवार अपने बच्चों और महिलाओं को वहां भेजते समय आखिर किस आधार पर भरोसा करें।

    उन्होंने लोगों से अपील की थी कि दर्शन के बाद ज्यादा समय तक धाम में न रुकें और वापस अपने घर लौट जाएं। नए वीडियो में हर्षा ने कहा कि वह अपनी इस सलाह से पीछे नहीं हटेंगी।

    कुंभ के दौरान भी धमकी मिलने का किया दावा

    साध्वी हर्षा ने नए वीडियो में कुंभ के दौरान भी धमकियां मिलने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने डरकर पीछे हटने के बजाय अपनी बात रखी थी। उनका कहना है कि अब भी धमकियों के बावजूद वह अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटेंगी।

    उन्होंने कहा कि वह किसी के खिलाफ अपशब्द नहीं बोल रही हैं। किसी मुद्दे पर जो बात उन्हें सही या गलत लगती है, उस पर अपनी राय रखना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि धमकियों के जरिए उन्हें डराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।