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  • हानिया आमिर का वायरल वीडियो देख सोशल मीडिया पर मचा हंगामा, बोलने के अंदाज पर यूजर्स ने लगाए नशे में होने के आरोप

    हानिया आमिर का वायरल वीडियो देख सोशल मीडिया पर मचा हंगामा, बोलने के अंदाज पर यूजर्स ने लगाए नशे में होने के आरोप


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तानी अभिनेत्री हानिया आमिर इन दिनों एक वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। सामने आए वीडियो में अभिनेत्री अपने हेयरस्टाइलिंग सेशन के दौरान टीम के साथ नजर आ रही हैं। इस दौरान उनके बोलने के अंदाज और हाव-भाव को देखकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके नशे में होने का दावा किया है। हालांकि, अब तक ऐसी किसी भी बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही अभिनेत्री या उनकी टीम की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।

    वायरल हो रही क्लिप में हानिया आमिर अपने बाल तैयार करवाती दिखाई देती हैं। वीडियो में एक महिला उन्हें विग पहनाने में मदद करती नजर आती है। इस दौरान अभिनेत्री अपनी टीम के साथ हंसी-मजाक करती हैं और विग को लेकर अपनी पसंद भी बताती दिखाई देती हैं। बातचीत के दौरान वह ‘हैप्पी हैलोवीन’ भी कहती हैं। वीडियो का यही हिस्सा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

    वीडियो सामने आने के बाद कुछ यूजर्स ने हानिया के बोलने के तरीके और उनके हाव-भाव को सामान्य से अलग बताते हुए सवाल उठाए। कुछ लोगों ने अनुमान लगाया कि उन्होंने शराब पी रखी थी, जबकि कुछ अन्य यूजर्स ने इससे भी आगे बढ़कर नशे से जुड़े अलग-अलग दावे किए। हालांकि, केवल किसी वीडियो में बोलने के अंदाज या व्यवहार के आधार पर किसी व्यक्ति के नशे में होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।

    सोशल मीडिया पर हानिया आमिर को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं हैं। एक तरफ कुछ यूजर्स वीडियो को लेकर अभिनेत्री पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके प्रशंसक उनके समर्थन में सामने आए हैं। फैंस का कहना है कि हानिया वीडियो में अपनी टीम के साथ हंसी-मजाक करती दिखाई दे रही हैं और उनके इस व्यवहार को तुरंत नशे से जोड़ना उचित नहीं है।

    प्रशंसकों ने यह भी कहा कि किसी छोटे वीडियो क्लिप से पूरी परिस्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। वीडियो किस समय रिकॉर्ड किया गया और उस वक्त अभिनेत्री की वास्तविक स्थिति क्या थी, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे दावों को तथ्य के रूप में देखना सही नहीं होगा।

    हानिया आमिर पाकिस्तान की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं और सोशल मीडिया पर उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है। उनके वीडियो और तस्वीरें अक्सर इंटरनेट पर तेजी से वायरल होते हैं। यही वजह है कि इस बार भी कुछ सेकंड की क्लिप ने व्यापक चर्चा पैदा कर दी है।

    फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हानिया के नशे में होने का कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। अभिनेत्री या उनकी टीम ने भी वायरल वीडियो को लेकर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही शराब या नशे से जुड़ी बातें फिलहाल महज अटकलें हैं। जब तक हानिया या उनकी टीम की ओर से कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आता, तब तक वायरल क्लिप को लेकर किए जा रहे दावों को सावधानी के साथ देखना ही उचित होगा।

  • कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर कंगना रनौत का तंज, कपड़ों को लेकर उठाए सवाल और पूछा ऐसा क्यों किया

    कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन पर कंगना रनौत का तंज, कपड़ों को लेकर उठाए सवाल और पूछा ऐसा क्यों किया

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अभिनेत्री कृति सेनन के रक्षाबंधन से जुड़े एक विज्ञापन पर टिप्पणी करते हुए उसमें दिखाई गई ड्रेसिंग को लेकर सवाल उठाया है। कृति सेनन का यह विज्ञापन एक ज्वैलरी ब्रांड से जुड़ा है और इसमें रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हुए उन्हें दिखाया गया है।

    विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कृति सेनन की ड्रेस को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके पहनावे को लेकर आपत्ति जताई, जबकि कुछ ने इसे विज्ञापन की रचनात्मक प्रस्तुति का हिस्सा माना। इसी बीच कंगना रनौत ने भी इस विवाद पर अपनी राय सार्वजनिक की।

    कृति सेनन विज्ञापन में इंडो-वेस्टर्न अंदाज के परिधान में नजर आती हैं। विज्ञापन की थीम रक्षाबंधन से जुड़ी है और इसमें भाई-बहन के रिश्ते को त्योहार के संदर्भ में दिखाया गया है। हालांकि, कृति के कपड़ों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई और विज्ञापन का यह हिस्सा लोगों के बीच बहस का विषय बन गया।

    कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर साझा की गई अपनी पोस्ट में महिलाओं के पास मौजूद अलग-अलग फैशन विकल्पों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं वैश्विक फैशन को अपनाती हैं और उनके पास पारंपरिक भारतीय परिधानों से लेकर आधुनिक कपड़ों तक कई विकल्प मौजूद हैं।

    इसी संदर्भ में कंगना ने सवाल उठाया कि रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक त्योहार पर भाई को राखी बांधते समय बिकिनी या अंडरगारमेंट जैसे पहनावे का इस्तेमाल क्यों किया जाए। उन्होंने विज्ञापन की स्टाइलिंग को लेकर भी सवाल करते हुए पूछा कि जब महिलाओं के पास इतने विकल्प हैं तो इस तरह के परिधान को ही क्यों चुना गया।

    कंगना ने अपनी टिप्पणी में यह भी संकेत दिया कि विज्ञापन को जानबूझकर असामान्य तरीके से तैयार किया गया हो सकता है। उनकी इस प्रतिक्रिया के बाद कृति सेनन का विज्ञापन एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, कृति सेनन की ओर से कंगना की टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है।

    रक्षाबंधन भारतीय समाज में भाई और बहन के रिश्ते से जुड़ा प्रमुख त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी सुरक्षा तथा सम्मान का संकल्प लेने की परंपरा निभाता है। त्योहार के इसी भाव को ध्यान में रखते हुए कंपनियां हर साल आभूषण, कपड़े, मिठाई और अन्य उत्पादों से जुड़े विज्ञापन तैयार करती हैं।

    सेलिब्रिटी विज्ञापनों में पहनावे और प्रस्तुति को लेकर विवाद नया नहीं है। कई बार किसी विज्ञापन की थीम, ड्रेसिंग या विजुअल प्रस्तुति को लेकर दर्शकों की राय अलग-अलग होती है। सोशल मीडिया के दौर में ऐसी प्रतिक्रियाएं तेजी से सामने आती हैं और कुछ ही समय में विज्ञापन व्यापक चर्चा का विषय बन जाता है।

    कृति सेनन के मामले में भी यही देखने को मिला। एक तरफ विज्ञापन की रचनात्मकता और फैशन प्रस्तुति को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आईं, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक त्योहार के संदर्भ में पहनावे को लेकर सवाल उठाए गए। कंगना की टिप्पणी ने इस बहस को और व्यापक बना दिया है।

    कंगना रनौत पहले भी फिल्म, फैशन, सामाजिक विषयों और सार्वजनिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। उनके बयानों पर अक्सर समर्थन और आलोचना दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं आती हैं। इस बार भी उनकी टिप्पणी के बाद कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    फिलहाल विवाद का केंद्र विज्ञापन में कृति सेनन की ड्रेसिंग और रक्षाबंधन की पारंपरिक भावना के बीच तालमेल का सवाल है। कृति की ओर से इस टिप्पणी पर कोई स्पष्ट जवाब सामने आने के बाद ही इस मामले में आगे की तस्वीर साफ होगी।

  • गोलन हाइट्स पर पहले इजरायल को 'कब्जाधारी' बताया, फिर पलटे अमेरिकी राजदूत टॉम बराक

    गोलन हाइट्स पर पहले इजरायल को 'कब्जाधारी' बताया, फिर पलटे अमेरिकी राजदूत टॉम बराक


    नई दिल्ली। गोलन हाइट्स को लेकर अमेरिकी राजदूत टॉम बराक के बयान से नया विवाद खड़ा हो गया है। बराक ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा था कि इजरायल अब भी गोलन हाइट्स पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है। उनका यह बयान अमेरिका की मौजूदा नीति से अलग माना गया, क्योंकि 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दी थी। विवाद बढ़ने के बाद बराक ने रविवार को सफाई देते हुए कहा कि अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    बराक ने लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी और पत्रकार मारियो नौफल को दिए इंटरव्यू में गोलन हाइट्स का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि इजरायल अभी भी इस इलाके पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप नहीं है।

    1967 में इजरायल ने किया था कब्जा

    गोलन हाइट्स सीरिया का रणनीतिक क्षेत्र है। 1967 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान इजरायल ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया था। 1981 में इजरायल ने इसे अपने में मिला लिया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और अधिकांश देश आज भी इस कदम को मान्यता नहीं देते।

    अमेरिका का रुख हालांकि अलग रहा है। 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दी थी। यह इस मुद्दे पर दशकों पुरानी अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव था।

    विवाद बढ़ा तो बराक ने दी सफाई

    गोलन हाइट्स को लेकर दिए बयान के बाद अमेरिकी राजदूत सवालों के घेरे में आ गए। इजरायल की ओर से भी उनके बयान पर आपत्ति जताई गई। इसके बाद रविवार को बराक ने स्पष्ट किया कि उनके बयान का मतलब संयुक्त राष्ट्र के रुख का समर्थन करना नहीं था।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, बराक ने कहा कि 2019 में ट्रंप ने गोलन हाइट्स को लेकर जो अमेरिकी नीति तय की थी, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वह गोलन हाइट्स का उदाहरण दक्षिणी लेबनान की स्थिति को समझाने के लिए दे रहे थे। उनका कहना था कि बातचीत के जरिए हुए समझौते केवल नक्शे बदलने की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होते हैं।

    अमेरिकी सांसद और इजरायल ने जताई आपत्ति

    बराक के बयान पर रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अमेरिकी राजदूत ट्रंप के उस फैसले को भूल गए हैं, जिसमें गोलन हाइट्स को इजरायल का हिस्सा माना गया था।

    इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने भी बराक के बयान का विरोध किया और इसे ट्रंप की नीति के बिल्कुल विपरीत बताया।

    सीरिया एयरबेस पर भी बयान से विवाद

    टॉम बराक इसी इंटरव्यू में सीरिया के एक एयरबेस पर इजरायली हमले की आलोचना को लेकर भी चर्चा में आए। इजरायल ने मंगलवार को एयरबेस पर हमला किया था। उसका कहना था कि वह सीरिया में तुर्की की सैन्य मौजूदगी को रोकने के लिए की गई कार्रवाई थी।

    रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने रविवार को इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि इजरायल सीरिया में तुर्की की ऐसी सैन्य मौजूदगी स्वीकार नहीं करेगा, जिससे उसकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो।

    हिजबुल्लाह पर भी देनी पड़ी सफाई

    बराक का एक अन्य बयान भी विवाद का कारण बना। उन्होंने इजरायल-लेबनान मुद्दे पर कहा था कि बातचीत की मेज से हिजबुल्लाह और ईरान गायब हैं। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि वह दोनों को वार्ता में शामिल करने की बात कर रहे हैं।

    हालांकि, बराक ने बाद में स्पष्ट किया कि अमेरिका हिजबुल्लाह से बातचीत नहीं करता। उनका मकसद केवल यह बताना था कि इजरायल-लेबनान का मुद्दा जटिल है, क्योंकि हिजबुल्लाह को हथियार और आर्थिक मदद ईरान से मिलती है।

  • रामदेव और कंगना रनौत के बीच बढ़ी जुबानी जंग, योगगुरु ने विवाद बढ़ाने से इनकार करते हुए साधा तीखा निशाना

    रामदेव और कंगना रनौत के बीच बढ़ी जुबानी जंग, योगगुरु ने विवाद बढ़ाने से इनकार करते हुए साधा तीखा निशाना

    नई दिल्ली । योगगुरु रामदेव और बीजेपी सांसद कंगना रनौत के बीच पिछले कुछ दिनों से चल रही जुबानी जंग रविवार को एक बार फिर चर्चा में आ गई। कंगना की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदेव ने विवाद को आगे बढ़ाने से इनकार किया, लेकिन उनके बयान में कंगना पर तीखा तंज भी नजर आया। हरिद्वार में जब उनसे कंगना की टिप्पणी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह ऐसे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते जिन्हें वह ओछा मानते हैं।

    दोनों के बीच विवाद की शुरुआत कंगना रनौत के Gen-Z को लेकर दिए गए बयान से हुई थी। कंगना ने नई पीढ़ी के लिए ‘गटर जनरेशन’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया था। उनके इस बयान पर रामदेव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि युवाओं को इस तरह संबोधित करना उचित नहीं है और ऐसी सोच युवाओं के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है।

    रामदेव की टिप्पणी के बाद कंगना रनौत ने भी पलटवार किया था। उन्होंने रामदेव पर तंज कसते हुए अपनी प्रतिक्रिया में निजी और तीखे अंदाज का इस्तेमाल किया। इसके बाद दोनों के बीच बयानबाजी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।

    रविवार को जब रामदेव से कंगना की ताजा टिप्पणी पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे तौर पर उनका नाम लेने से बचते हुए कहा कि वह विवाद को बढ़ाना नहीं चाहते। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कंगना के लिए ओछे लोगों वाला बयान दिया। रामदेव ने अपने सामाजिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश उनके काम और योगदान से परिचित है।

    इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों की टिप्पणियां सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हुई हैं। मामला किसी औपचारिक राजनीतिक टकराव के बजाय व्यक्तिगत बयानबाजी से जुड़ा दिखाई दे रहा है, लेकिन कंगना बीजेपी की सांसद होने के कारण उनके बयानों और उनसे जुड़े विवादों को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जाता है।

    रामदेव ने इसी दौरान एक देश, एक चुनाव के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को संतों का समर्थन मिला है और इससे चुनावी प्रक्रिया को लेकर होने वाली बार-बार की गतिविधियों को कम करने में मदद मिल सकती है। उनका कहना था कि लगातार चुनावी गतिविधियों के कारण विकास कार्य प्रभावित होते हैं और एक साथ चुनाव कराने से व्यवस्था में स्थिरता आ सकती है।

    योगगुरु ने शिक्षा व्यवस्था का भी जिक्र किया और कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है। उनके अनुसार, चुनाव सुधारों के जरिए देश में विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

    रामदेव ने सामाजिक सम्मान और संविधान से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस तरह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्यों के अपमान को संविधान के खिलाफ माना जाता है, उसी तरह ब्राह्मणों के अपमान को लेकर भी समान दृष्टिकोण होना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों, मरीजों, सैनिकों और किसानों समेत विभिन्न वर्गों के साथ होने वाले अन्याय का उल्लेख करते हुए समान सम्मान और अधिकार की बात कही। उनका कहना था कि किसी भी समुदाय या वर्ग के अपमान को लेकर समान संवेदनशीलता जरूरी है।

    फिलहाल कंगना और रामदेव के बीच विवाद का केंद्र Gen-Z को लेकर हुई बयानबाजी है। रामदेव ने इसे आगे बढ़ाने से बचने की बात कही है, लेकिन उनकी ताजा टिप्पणी के बाद दोनों के बीच चल रहा यह विवाद एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में आ गया है।

  • 'वंदे मातरम' पर शर्मिला टैगोर के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, कहा- कला और कविता पर विचार सीमित न रखें

    'वंदे मातरम' पर शर्मिला टैगोर के बयान पर भड़कीं कंगना रनौत, कहा- कला और कविता पर विचार सीमित न रखें


    नई दिल्ली । 
    राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के गायन और उसके छंदों को लेकर शुरू हुई बहस में अब मनोरंजन जगत की दो प्रमुख हस्तियों के अलग-अलग विचार सामने आए हैं। वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर द्वारा ‘वंदे मातरम’ के छंदों को लेकर दिए गए बयान के बाद अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने उस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस विषय को लेकर दोनों कलाकारों की अलग-अलग सोच के बाद सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर नई चर्चा छिड़ गई है।

    पूरे विवाद की शुरुआत शर्मिला टैगोर के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को पर्याप्त और सर्वसमावेशी बताया था। उन्होंने कहा था कि शुरुआती दो छंदों के बाद के हिस्सों में जिन प्रतीकों और अभिव्यक्तियों का प्रयोग किया गया है, वे केवल एक ही ईश्वर में विश्वास रखने वाले लोगों या विभिन्न धर्मावलंबियों के लिए कहना थोड़ा असहज या मुश्किल हो सकता है। उनके अनुसार, देश की विविधता को ध्यान में रखते हुए प्रथम दो छंदों को गाना अधिक व्यावहारिक है।

    शर्मिला टैगोर की इस टिप्पणी पर असहमति जताते हुए कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि एक कलाकार के रूप में कला और कविता को देखने का नजरिया इतना सीमित नहीं होना चाहिए। किसी भी रचना या कविता में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द और प्रतीक रूपक की तरह होते हैं, जिनका उद्देश्य मनचाही भावना का संचार करना होता है। ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की चेतना और देशवासियों को प्रेरित करने वाली भावना है।

    कंगना रनौत ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह राष्ट्रगीत देश की आंतरिक शक्ति को जगाने का संदेश देता है। उन्होंने संकीर्ण सोच से बाहर निकलने का सुझाव देते हुए कहा कि किसी भी कलात्मक अभिव्यक्ति को हिंदू या मुस्लिम दृष्टिकोण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यदि कोई विचारधारा या धर्म किसी एक ही स्वरूप या अभिव्यक्ति तक सीमित है, तो यह उसका व्यक्तिगत या सीमित विषय हो सकता है, लेकिन इसे व्यापक राष्ट्रीय भावना पर लागू नहीं किया जा सकता।

    विभिन्न हिस्सों में इस विषय पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक ओर जहां कुछ लोग शर्मिला टैगोर के सुझाव को सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाला विचार मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई लोग कंगना रनौत के इस पक्ष का समर्थन कर रहे हैं कि राष्ट्रीय गीत की मूल आत्मा और स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक संदर्भ के साथ कोई समझौता या उसका सीमित आंकलन नहीं होना चाहिए।

    सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विषयों पर अक्सर इस प्रकार के अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं। ‘वंदे मातरम’ के छंदों को लेकर शुरू हुआ यह संवाद अब कलात्मक स्वतंत्रता, धार्मिक मान्यताओं और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़ी व्यापक बहस का रूप ले चुका है, जिस पर विभिन्न क्षेत्रों के लोग अपनी राय दे रहे हैं।

  • राखी सावंत संग बातचीत में सुनीता आहूजा ने खोले पारिवारिक राज, कोमल रानी स्वर्णकार के नाम पर मचा घमासान

    राखी सावंत संग बातचीत में सुनीता आहूजा ने खोले पारिवारिक राज, कोमल रानी स्वर्णकार के नाम पर मचा घमासान

    नई दिल्ली ।बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के बीच चल रहे पारिवारिक विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। हाल ही में सुनीता आहूजा और अभिनेत्री राखी सावंत के बीच हुई बातचीत के सार्वजनिक होने के बाद मनोरंजन जगत में हलचल तेज हो गई है। इस बातचीत के दौरान सुनीता ने दावा किया है कि यदि उन्होंने अपनी तलाक की अर्जी वापस नहीं ली होती तो गोविंदा अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार से शादी करने की योजना बना रहे थे।

    सुनीता आहूजा के इस सनसनीखेज दावे के सामने आने के बाद नवोदित अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार अचानक सुर्खियों में आ गई हैं। उत्तर प्रदेश से संबंध रखने वाली कोमल रानी स्वर्णकार फिल्म इंडस्ट्री में नई कलाकार के तौर पर कदम रख रही हैं। गोविंदा ने कुछ समय पहले ही अपनी आने वाली फिल्म रूपा के लिए कोमल को मुख्य अभिनेत्री के रूप में मीडिया के सामने पेश किया था। इसके अलावा यह भी चर्चा है कि वह अभिनेता के निर्माण में बन रही एक अन्य फिल्म दुनियादारी में भी नजर आ सकती हैं।

    पारिवारिक विवाद की शुरुआत पहले भी देखने को मिली थी जब सुनीता आहूजा ने एक साक्षात्कार में कुछ तीखी टिप्पणियां की थीं। उस समय उन्होंने किसी का नाम लिए बिना नाराजगी जताई थी। हालांकि बाद में जब गोविंदा सार्वजनिक रूप से अपनी नई फिल्म की सह-कलाकार के साथ नजर आने लगे तो सोशल मीडिया पर इन बयानों को कोमल रानी से जोड़कर देखा जाने लगा। अब राखी सावंत के साथ हुई बातचीत में सीधे तौर पर नाम सामने आने से यह मामला अधिक गरमा गया है।

    सुनीता आहूजा का कहना है कि वह लंबे समय से पारिवारिक स्थिति को लेकर चुप थीं, लेकिन अपने अधिकारों और सम्मान की अनदेखी होने पर उन्होंने अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि शादी के विचार तक बात पहुंच चुकी थी। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में बॉलीवुड के इस चर्चित परिवार के प्रशंसकों के बीच इस नए घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

    दूसरी ओर इस पूरे मामले और निजी जिंदगी से जुड़े आरोपों पर अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने मीडिया के समक्ष इस विषय पर चुप्पी साध रखी है। वहीं गोविंदा ने पूर्व में अपनी सह-कलाकार का बचाव करते हुए सुनीता के आरोपों का खंडन किया था और अपना पक्ष रखा था।

    गौरतलब है कि गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादी को लगभग 39 वर्ष हो चुके हैं और उनके दो बच्चे भी हैं। कुछ समय पूर्व कोर्ट परिसर के बाहर सुनीता आहूजा की मौजूदगी के बाद से दोनों के रिश्ते में दरार और कानूनी अलगाव की खबरें सामने आई थीं, हालांकि बाद में अर्जी वापस लेने की बात कही गई थी। फिलहाल इस नए खुलासे ने गोविंदा के निजी और व्यावसायिक जीवन से जुड़े विवाद को एक बार फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

  • अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने बाबा रामदेव के बयान पर किया तीखा पलटवार, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जताई आपत्ति

    अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने बाबा रामदेव के बयान पर किया तीखा पलटवार, सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए जताई आपत्ति


    नई दिल्ली ।
    भारतीय जनता पार्टी की सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत तथा योग गुरु बाबा रामदेव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। हाल ही में युवाओं और जेन जी श्रेणी के संदर्भ में दिए गए एक विवादित बयान को लेकर दोनों हस्तियों के बीच तीखी बयानबाजी सामने आई है। बाबा रामदेव द्वारा कंगना के अतीत और जीवनशैली को लेकर दिए गए वक्तव्य के बाद अभिनेत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन पर कड़ा पलटवार किया है।

    यह पूरा विवाद उस समय गहराया जब एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान बाबा रामदेव से कंगना रनौत के उस बयान के बारे में पूछा गया, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारी युवाओं के आचरण को लेकर टिप्पणी की थी। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए योग गुरु ने कहा था कि किसी को भी युवाओं के लिए अनुचित शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने अभिनेत्री के पिछले जीवन और कारनामों का उल्लेख करते हुए इस प्रकार के बयानों से बचने की सलाह दी थी।

    बाबा रामदेव के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कंगना रनौत ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक विस्तृत संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि उनके व्यक्तिगत जीवन, जवानी या निजी कक्ष के बारे में अफवाहों और गॉसिप के आधार पर अनुमान नहीं लगाया जाना चाहिए। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत आचरण और चरित्र के विषय में उन्हें सलाह देने की आवश्यकता नहीं है और उनका सार्वजनिक तथा व्यक्तिगत जीवन पूरी तरह से स्पष्ट है।

    अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में अतीत के कुछ कानूनी घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके खिलाफ झूठे दावों या भ्रामक प्रचार से संबंधित कोई अदालती आदेश मौजूद नहीं है। उन्होंने बल देकर कहा कि बिना पक्के तथ्यों और केवल अनुमानों के आधार पर किसी भी जनप्रतिनिधि या कलाकार के चरित्र पर टिप्पणी करना अनुचित है।

    उल्लेखनीय है कि यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब जंतर-मंतर पर आयोजित छात्र प्रदर्शनों के दौरान कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी। उस पोस्ट में उन्होंने सार्वजनिक आचरण की मर्यादा तोड़ने वाले कुछ प्रदर्शनकारियों के संदर्भ में कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था। हालांकि, चौतरफा आलोचना के बाद उन्होंने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी पूरी युवा पीढ़ी या सभी युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि केवल उन लोगों तक सीमित थी जिन्होंने मर्यादा का उल्लंघन किया था।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक हलकों में दोनों प्रमुख हस्तियों के बीच चल रहे इस वैचारिक टकराव की व्यापक चर्चा हो रही है। इस घटनाक्रम के बाद से सोशल मीडिया पर भी विभिन्न वर्गों द्वारा अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जिससे यह विषय लगातार चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।

  • 'अंधभक्त' कहे जाने पर ईशा कोपिकर और कंगना रनौत का पलटवार, राष्ट्रप्रेम और देशहित को बताया सर्वोपरि

    'अंधभक्त' कहे जाने पर ईशा कोपिकर और कंगना रनौत का पलटवार, राष्ट्रप्रेम और देशहित को बताया सर्वोपरि

    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर अक्सर अभिनेत्रियों और सार्वजनिक हस्तियों को अपनी बेबाक राय के कारण आलोचनाओं और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। हाल ही में अभिनेत्री ईशा कोपिकर को इंटरनेट पर ‘अंधभक्त’ कहकर निशाना बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में अपनी बात रखी। इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत भी ईशा कोपिकर के समर्थन में आगे आई हैं और उन्होंने इस विषय पर अपनी सहमति व्यक्त की है।

    यह विवाद तब शुरू हुआ था जब ईशा कोपिकर ने देश में चल रहे छात्र आंदोलनों के दौरान प्रधानमंत्री के प्रति आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले लोगों का विरोध किया था। उन्होंने ऐसे कृत्य को देशहित के खिलाफ बताते हुए अपनी असहमति दर्ज कराई थी। इसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। इसके जवाब में ईशा ने एक वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि यदि देश की भलाई सोचना और उसके प्रति निष्ठा रखना भक्ति है, तो वे इस शब्द को स्वीकार करने में संकोच नहीं करेंगी।

    ईशा कोपिकर के इस रुख की सराहना करते हुए कंगना रनौत ने उनके वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया। कंगना ने लिखा कि ईशा ने इस मुद्दे को बहुत ही स्पष्ट और तार्किक तरीके से जनता के सामने रखा है। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों का संदर्भ देते हुए कहा कि अपने अधिकारों, न्याय और राष्ट्र के प्रति आवाज उठाना हमेशा से उनके स्वभाव का हिस्सा रहा है। उन्होंने छात्र जीवन से लेकर अपने पेशेवर करियर तक में अनुचित बातों के खिलाफ हमेशा स्टैंड लिया है।

    कंगना रनौत ने आगे कहा कि अपने परिवार, समाज और देश के प्रति सम्मान और प्रेम रखना किसी भी नागरिक का स्वाभाविक गुण होना चाहिए। वे जिन भी लोगों और विचारों से प्रभावित होती हैं, उनके प्रति आदर भाव रखती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश और देशवासियों के प्रति निष्ठा को किसी नकारात्मक टैग से जोड़कर देखना अनुचित है। जब भी समाज में कुछ गलत होगा, तो उसके खिलाफ बोलना और जब कुछ अच्छा होगा, तो उसकी सराहना करना एक जिम्मेदार नागरिक का कर्तव्य है।

    ईशा कोपिकर ने भी अपने संदेश में यह साफ कर दिया था कि वे किसी राजनीतिक एजेंडे से प्रभावित होकर नहीं, बल्कि एक नागरिक के रूप में अपनी राय रखती हैं। वे गलत नीतियों का विरोध और सही कार्यों की प्रशंसा बिना किसी हिचकिचाहट के करती रहेंगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे देशहित में सोचने वालों के प्रति अपनी मानसिकता में बदलाव लाएं और रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा दें।

    इस घटनाक्रम के बाद मनोरंजन जगत और राजनीतिक क्षेत्रों में अभिव्यक्ति की आजादी और ऑनलाइन ट्रोलिंग को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी सोशल मीडिया यूजर्स इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि राष्ट्रप्रेम और व्यक्तिगत विचारों की अभिव्यक्ति को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय एक स्वतंत्र सोच के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • सुरेश मेनन के साथ बदसलूकी पर भड़के थे जैकी श्रॉफ, निर्माता को सबके सामने मांगनी पड़ी थी माफी

    सुरेश मेनन के साथ बदसलूकी पर भड़के थे जैकी श्रॉफ, निर्माता को सबके सामने मांगनी पड़ी थी माफी


    नई दिल्ली । 
    हिंदी सिनेमा जगत में अपनी विशिष्ट जीवनशैली और स्पष्टवादी रवैये के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ अभिनेता जैकी श्रॉफ से जुड़ा एक पुराना घटनाक्रम हाल ही में चर्चा में आया है। अपने शांत और सहयोगात्मक व्यवहार के लिए जाने जाने वाले इस कलाकार का एक समय ऐसा भी था जब सेट पर उनका प्रभाव और कड़ा रुख देखने को मिलता था। हास्य अभिनेता और कलाकार सुरेश मेनन ने एक कार्यक्रम के दौरान जैकी श्रॉफ के साथ हुए अपने एक विशेष संस्मरण को साझा किया है।

    घटना के बारे में विस्तार से बताते हुए सुरेश मेनन ने जानकारी दी कि अपने शुरुआती करियर के दौरान वे एक बड़े प्रोडक्शन हाउस की फिल्म में काम कर रहे थे। उसी दौरान उन्हें मुंबई में एक अन्य अनिवार्य शूटिंग प्रतिबद्धता के सिलसिले में कुछ समय की अनुमति चाहिए थी। जब उन्होंने इस संबंध में संबंधित निर्माता से केवल एक घंटे की छूट देने का अनुरोध किया, तो निर्माता ने इसे अनुशासनहीनता माना और उनके साथ अनुचित व्यवहार करते हुए उन्हें अचानक परियोजना से बाहर कर दिया।

    सुरेश मेनन के अनुसार, निर्माता ने न केवल उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया बल्कि बेहद अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए सेट से जाने को कह दिया। इस अचानक हुए अपमान और काम से निकाले जाने के कारण वे काफी परेशान हो गए थे और सेट के एक कोने में चुपचाप बैठ गए थे। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की भनक मुख्य भूमिका निभा रहे जैकी श्रॉफ को लग चुकी थी।

    जब जैकी श्रॉफ को अपने सहयोगी कलाकार के साथ हुई इस बदसलूकी के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत सुरेश मेनन को अपने पास बुलवाया। पूरा मामला समझने के बाद वे काफी नाराज हुए और उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया। जैकी श्रॉफ स्वयं सुरेश मेनन को साथ लेकर सीधे संबंधित निर्माता के पास पहुंचे और उनके इस दुर्व्यवहार का कड़ा विरोध दर्ज कराया।

    सेट पर मौजूद सभी लोगों के सामने जैकी श्रॉफ ने निर्माता को चेतावनी दी कि किसी भी जूनियर कलाकार या सहयोगी के साथ अपमानजनक व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने सह-कलाकारों के साथ ऐसा बर्ताव बर्दाश्त नहीं करेंगे। जैकी श्रॉफ के इस कड़े रुख के बाद निर्माता को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्हें सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी पड़ी। इसके बाद सुरेश मेनन को सम्मानपूर्वक काम जारी रखने की अनुमति दी गई।

    सिनेमा उद्योग के विश्लेषकों का मानना है कि मुंबई और मध्य प्रदेश जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले कई नए और जूनियर कलाकारों को अक्सर इस तरह की प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में स्थापित अभिनेताओं का अपने सह-कर्मियों के पक्ष में खड़ा होना एक मिसाल बनता है। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद एक बार फिर जैकी श्रॉफ के सहयोगी रवैये और उनके बिंदास व्यक्तित्व की सराहना की जा रही है।

  • सोनाक्षी सिन्हा की ट्रोलिंग पर भड़के शत्रुघ्न सिन्हा, बीजेपी आईटी सेल पर लगाए गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला

    सोनाक्षी सिन्हा की ट्रोलिंग पर भड़के शत्रुघ्न सिन्हा, बीजेपी आईटी सेल पर लगाए गंभीर आरोप, जानिए पूरा मामला


    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा को सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने के मुद्दे पर उनके पिता और तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने दावा किया है कि उनकी बेटी के खिलाफ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर किया जा रहा विरोध स्वाभाविक नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से सुनियोजित और प्रायोजित है। शत्रुघ्न सिन्हा ने इस प्रकार की गतिविधियों के पीछे सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल से जुड़े लोगों और उनकी नीतियों का समर्थन करने वाले समूहों को जिम्मेदार ठहराया है।

    एक समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि जो लोग उनकी बेटी को ट्रोल कर रहे हैं और विवाद खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं, वे पेशेवर और पेड ट्रोल्स हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन लोगों को स्वतंत्र रूप से अपनी राय व्यक्त करने की समझ नहीं होती, बल्कि उन्हें जो लिखित सामग्री दी जाती है, वे उसी के आधार पर अभियानों को अंजाम देते हैं। उन्होंने इसे एक बनावटी और राजनीतिक रूप से प्रेरित हमला करार दिया।

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोनाक्षी सिन्हा ने छात्र आंदोलनों और नागरिक अधिकारों से जुड़ी पहलों के समर्थन में अपनी बात रखी थी। इस दौरान जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रोके जाने और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कार्रवाई की उन्होंने खुलकर निंदा की थी। सोनाक्षी ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे युवाओं की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर संदेश साझा किए थे, जिसके बाद वे कुछ वर्गों के निशाने पर आ गईं।

    बेटी के रुख का समर्थन करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि सोनाक्षी ऐसे भ्रामक और नकारात्मक अभियानों पर ध्यान नहीं देती हैं। उन्होंने अपनी बेटी के मानसिक धैर्य और निडरता की तारीफ की। जब उनसे सवाल किया गया कि क्या सोनाक्षी भविष्य में सक्रिय राजनीति में कदम रख सकती हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस विषय पर पहले से कोई दावा नहीं कर सकते, हालांकि उन्होंने सोनाक्षी की क्षमताओं पर पूरा विश्वास व्यक्त किया।

    साक्षात्कार के दौरान शत्रुघ्न सिन्हा से यह भी पूछा गया कि क्या सोनाक्षी का समर्थन केवल चुनिंदा मुद्दों तक सीमित है। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बेटी ने विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के छात्रों से जुड़े विषयों पर भी समय-समय पर अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने राजनीतिक आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि जनहित के मुद्दों पर बोलना किसी भी नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और राजनीतिक बहसों के स्वरूप पर चर्चा को जन्म दे दिया है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में भी इस विषय को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। शत्रुघ्न सिन्हा के इस बयान के बाद आईटी सेल और ऑनलाइन ट्रोल्स की भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है।