यह मामला न केवल अपनी संवेदनशीलता के लिए, बल्कि कानूनी इतिहास के लिए भी विशेष है। भोपाल की विशेष अदालत ने दोषी अतुल निहाले को अपहरण बलात्कार और हत्या, इन तीनों अलग-अलग धाराओं में ‘तिहरा मृत्युदंड सुनाया था। यानी उसे प्रत्येक जघन्य अपराध के लिए अलग से फांसी की सजा दी गई थी। भारतीय न्याय संहिता के लागू होने के बाद मध्यप्रदेश में यह अपनी तरह का पहला मामला है जहां किसी अपराधी को एक साथ तीन मृत्युदंड मिले हों।
क्या थी दिल दहला देने वाली वह घटना
घटना भोपाल के शाहजहांनाबाद क्षेत्र की है, जहां एक 5 वर्षीय मासूम बच्ची अचानक लापता हो गई थी। सघन तलाशी के बाद बच्ची का शव पड़ोस में रहने वाले मजदूर अतुल निहाले के घर में पानी की टंकी से बरामद हुआ था। जांच में यह बात सामने आई थी कि आरोपी ने बच्ची का अपहरण किया, उसके साथ हैवानियत की और पकड़े जाने के डर से उसकी बेरहमी से हत्या कर शव को छिपा दिया।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले को रेयरेस्ट ऑफ रेयर दुर्लभ से दुर्लभतम की श्रेणी में माना। न्यायालय ने कहा कि ऐसे जघन्य कृत्य समाज के लिए खतरा हैं और मासूमों की सुरक्षा के प्रति कोई भी समझौता नहीं किया जा सकता। आरोपी के परिजनों ने उसकी पृष्ठभूमि और कम उम्र का हवाला देकर सजा कम करने की गुहार लगाई थी जिसे अदालत ने अपराध की वीभत्सता को देखते हुए ठुकरा दिया। भोपाल पुलिस और अभियोजन पक्ष ने इस मामले में बेहद कम समय में वैज्ञानिक साक्ष्य और पुख्ता गवाह पेश किए थे, जिसकी बदौलत यह सजा बरकरार रह सकी। इस फैसले के बाद पीड़िता के परिवार और स्थानीय नागरिकों ने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया है।
