नई दिल्ली। यूपी और एमपी के बाद अब बिहार में प्रतिबंधित कोरेक्स सिरप का अवैध नेटवर्क तेजी से पैर पसार रहा है। सोमवार को सीतामढ़ी जिले में एक ही दिन में 1500 बोतल सिरप बरामद की गई, जिसमें सोनबरसा से 700 और चकमहिला से 800 बोतल जब्त हुई। इस कार्रवाई ने प्रशासन और समाज दोनों को चौंका दिया है।
पुलिस ने दो छोटे धंधेबाजों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य सरगना अभी फरार है। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क नेपाल से संचालित हो रहा है और शराबबंदी के बाद युवा वर्ग सिरप, टैबलेट और इंजेक्शन के जरिए नशे की ओर बढ़ रहा है।
एसएसबी और एसटीएफ की सूचना पर छापेमारी में 8800 रुपये नकद, मोबाइल, बड़ी मात्रा में टैबलेट, इंजेक्शन और सैकड़ों बोतल सिरप बरामद हुए। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें हर महीने 15 हजार रुपये वेतन मिलता था और यह नेटवर्क लंबे समय से चल रहा है।
स्थानीय लोगों और पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, नगर थाना क्षेत्र में यह अवैध कारोबार कई दिनों से संचालित था, लेकिन पुलिस की निगरानी कमजोर रही। एक ही दिन में 1500 बोतल की बरामदगी ने पुलिस की सतर्कता और निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शराबबंदी के बाद नशे के इस नए रूप से युवा पीढ़ी बर्बादी की ओर बढ़ रही है, जबकि असली सरगना कानून की पकड़ से दूर है। फिलहाल पुलिस छोटे धंधेबाजों पर कार्रवाई कर रही है, लेकिन मुख्य सरगना फरार होने के कारण नेटवर्क सक्रिय बना हुआ है।
एसएसबी और एसटीएफ की छापेमारी में 8800 रुपये नकद, मोबाइल फोन, टैबलेट, इंजेक्शन और सैकड़ों बोतल प्रतिबंधित सिरप बरामद किए गए। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने स्वीकार किया कि वह दवाओं की बिक्री करता था और हर महीने उसे 15 हजार रुपये वेतन मिलता था।
