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  • बिहार में अपराध पर सख्ती की बड़ी तैयारी, 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट से तेज होगी सुनवाई और समयबद्ध मिलेगा न्याय

    बिहार में अपराध पर सख्ती की बड़ी तैयारी, 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट से तेज होगी सुनवाई और समयबद्ध मिलेगा न्याय

    नई दिल्ली ।  बिहार सरकार ने अपराध नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार जल्द ही 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी, ताकि गंभीर आपराधिक मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से लंबित मामलों की संख्या घटेगी, न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में अपराध से जुड़े मामलों के शीघ्र निष्पादन और प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम करना तथा अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सरकार का विश्वास है कि समय पर न्याय मिलने से आम लोगों का न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा।

    राज्य सरकार के अनुसार इन विशेष अदालतों के माध्यम से हत्या, लूट, दुष्कर्म, अपहरण और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी। लंबे समय से लंबित मामलों का तेजी से निपटारा होने पर अदालतों पर बढ़ता बोझ भी कम होगा और पीड़ित पक्ष को अपेक्षाकृत कम समय में न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे न्यायिक प्रणाली की कार्यक्षमता में भी सुधार आने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि अपराधियों के खिलाफ त्वरित फैसले और समयबद्ध सजा कानून के प्रति सम्मान और भय दोनों को मजबूत करेंगे। न्याय मिलने में होने वाली अनावश्यक देरी अक्सर पीड़ितों और गवाहों के लिए चुनौती बनती है। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    बिहार सरकार का कहना है कि न्यायिक सुधार केवल अदालतों की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध राज्य की कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से भी है। यदि गंभीर अपराधों का त्वरित निपटारा होगा तो अपराध करने वालों के बीच स्पष्ट संदेश जाएगा कि कानून का उल्लंघन करने पर शीघ्र कार्रवाई और सजा निश्चित है। इससे अपराध की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायता मिलने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का भी मानना है कि फास्ट ट्रैक अदालतें तभी अधिक प्रभावी साबित होंगी, जब इनके साथ पर्याप्त न्यायिक अधिकारी, अभियोजन तंत्र, पुलिस जांच और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए। समयबद्ध सुनवाई के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक होगा, ताकि मामलों के निस्तारण की गति बनी रहे और प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से आगे बढ़ सके।

    सरकार का उद्देश्य न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, तेज और भरोसेमंद बनाना है। 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि यह योजना निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लागू होती है तो इससे न केवल लंबित आपराधिक मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

  • मंदिरों के दान पर बढ़ेगी निगरानी: बिहार धार्मिक न्यास परिषद का बड़ा फैसला, अब हर तीन महीने होगी खातों की समीक्षा

    मंदिरों के दान पर बढ़ेगी निगरानी: बिहार धार्मिक न्यास परिषद का बड़ा फैसला, अब हर तीन महीने होगी खातों की समीक्षा


    पटना। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े गबन मामले के बाद बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने अपने अधीन आने वाले मंदिरों और मठों की वित्तीय निगरानी को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। परिषद ने अब सभी पंजीकृत मंदिरों और मठों से हर तीन महीने में आय-व्यय और खातों का विवरण लेने की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।

    परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर रणवीर नंदन ने बताया कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अधीन करीब 4,500 मंदिर और मठ आते हैं। अब तक इन सभी संस्थानों का वर्ष में एक बार ऑडिट कराया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत त्रैमासिक स्तर पर भी खातों की समीक्षा की जाएगी, ताकि दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

    अब हर तिमाही होगी वित्तीय निगरानी
    प्रो. रणवीर नंदन के अनुसार, वार्षिक ऑडिट में मंदिरों और मठों को प्राप्त दान, उसके उपयोग और खर्च का विस्तृत रिकॉर्ड जांचा जाता है। परिषद यह सुनिश्चित करती है कि दान की राशि का उपयोग केवल मंदिरों और मठों के रखरखाव, विकास और आवश्यक कार्यों पर ही किया जाए।

    उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत हर तीन महीने में खातों का विवरण लेने से किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता की समय रहते पहचान की जा सकेगी और निगरानी व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगी।

    प्रत्येक मंदिर की अपनी न्यास समिति
    परिषद अध्यक्ष ने बताया कि परिषद के अधीन आने वाले प्रत्येक मंदिर और मठ की अपनी अलग न्यास समिति होती है। यही समिति स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों और खर्च से जुड़े निर्णय लेती है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद की भूमिका निर्माण और अन्य कार्यों के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने तथा प्रशासनिक निगरानी बनाए रखने की होती है।

    पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में पहल
    परिषद का मानना है कि नियमित वित्तीय समीक्षा से दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा भी मजबूत होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम मंदिरों और मठों की वित्तीय व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया है।

    अयोध्या मामले के बाद बढ़ी सतर्कता
    अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला इन दिनों जांच के दायरे में है। शिकायत के आधार पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की जांच कर रहा है। इस प्रकरण में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि संबंधित ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

  • सुरक्षा घटाने के फैसले पर गरमाई सियासत, लालू यादव ने कहा- सब कुछ नीतीश कुमार ने ही करवाया

    सुरक्षा घटाने के फैसले पर गरमाई सियासत, लालू यादव ने कहा- सब कुछ नीतीश कुमार ने ही करवाया

    नई दिल्ली । बिहार की राजनीति में एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को नया मुद्दा दे दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं।

    बुधवार को लालू प्रसाद यादव ने अपनी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की सुरक्षा वापस लिए जाने के मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया दी। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया के पीछे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका रही है। लालू यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और अब सभी की निगाहें सत्ताधारी दल की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

    दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को विशेष सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध थी। सुरक्षा में बदलाव के फैसले के बाद दोनों नेताओं ने उन्हें उपलब्ध कराई गई नई सुरक्षा व्यवस्था स्वीकार करने के बजाय वापस करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही परिवार के अन्य प्रमुख सदस्यों ने भी सुरक्षा वापस कर दी। इस फैसले ने मामले को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में विधानसभा चुनावों से पहले ऐसे मुद्दे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनते जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था जैसे प्रशासनिक निर्णयों को भी राजनीतिक दृष्टि से देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित है, जबकि सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल निर्धारित नियमों और समीक्षा प्रक्रिया के आधार पर तय किए जाते हैं।

    इस बीच पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि यदि भविष्य में उनके साथ किसी प्रकार की अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उनके इस बयान ने विवाद को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। विपक्षी दल इस मामले को जनता के बीच प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं।

    आरजेडी लगातार इस फैसले का विरोध कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल सुरक्षा का मामला नहीं बल्कि राजनीतिक सम्मान और गरिमा से जुड़ा विषय है। पार्टी का आरोप है कि राज्य के वरिष्ठ नेताओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया है, वह उचित नहीं माना जा सकता। आरजेडी नेताओं ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग भी उठाई है।

    वहीं दूसरी ओर सरकार से जुड़े नेताओं का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण निर्धारित मानकों और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। उनके अनुसार इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक भावना या पक्षपात की गुंजाइश नहीं होती। हालांकि विपक्ष इन दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहा है और लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है।

    फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था का यह मुद्दा बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। साथ ही यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस विवाद पर आगे क्या रुख अपनाती हैं तथा राजनीतिक दल इसे किस तरह जनता के बीच लेकर जाते हैं।

  • Bihar: वैशाली में बंद गोदाम में छुपा रखी थी 70 लाख की प्रतिबंधित सिरप जब्त… 175 कार्टन जब्त

    Bihar: वैशाली में बंद गोदाम में छुपा रखी थी 70 लाख की प्रतिबंधित सिरप जब्त… 175 कार्टन जब्त


    वैशाली।
    बिहार (Bihar) के वैशाली जिले (Vaishali district) से नशे के अवैध कारोबार (Illegal Drug Trade) का एक बड़ा मामला सामने आया है. पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर औद्योगिक थाना क्षेत्र में स्थित सिपेट संस्था के पास एक बंद पड़े गोदाम में छापेमारी कर भारी मात्रा में प्रतिबंधित कफ सिरप (Banned Cough Syrup) बरामद किया है. इस कार्रवाई में पुलिस ने 175 कार्टन कफ सिरप जब्त किया है, जिसकी अनुमानित कीमत 60 से 70 लाख रुपये बताई जा रही है. बरामद की गई कुल मात्रा करीब 2100 लीटर है।


    गोदाम के अंदर कार्टन में छिपाकर रखी गई थी सिरप

    जानकारी के अनुसार पुलिस को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि इस इलाके में एक बंद गोदाम का इस्तेमाल अवैध रूप से नशीले पदार्थों के भंडारण के लिए किया जा रहा है. सूचना की पुष्टि होने के बाद सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई. टीम ने दंडाधिकारी की मौजूदगी में मौके पर पहुंचकर गोदाम की तलाशी ली. जब गोदाम को खोला गया तो अंदर रखे गए कार्टनों को देखकर पुलिस भी हैरान रह गई. वहां बड़ी संख्या में प्रतिबंधित कफ सिरप के कार्टन छिपाकर रखे गए थे।

    पुलिस ने सभी कार्टनों को जब्त कर लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है. हालांकि छापेमारी के दौरान मौके से किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हो सकी. लेकिन जांच में यह पता चला है कि इस गोदाम को पटना निवासी आकाश कुमार नाम के व्यक्ति ने लीज पर ले रखा था. प्रारंभिक जांच में उसके इस अवैध कारोबार में संलिप्त होने के संकेत मिले हैं, जिसके बाद उसके खिलाफ औद्योगिक थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।


    नशे के रूप में इस्तेमाल होती सिरफ

    सदर एसडीपीओ सुबोध कुमार ने बताया कि बरामद कफ सिरप की बड़ी खेप को नशे के रूप में अवैध इस्तेमाल के लिए जमा किया गया था. उन्होंने कहा कि पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है कि यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किन-किन लोगों तक पहुंचाया जाना था. इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध नशे के कारोबार को लेकर हड़कंप मच गया है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस पूरे रैकेट का खुलासा किया जाएगा और इसमें शामिल अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी.

  • बिहार में NEET के नाम पर चल रहा था ऑनलाइन ठगी का खेल, चार गिरफ्तार

    बिहार में NEET के नाम पर चल रहा था ऑनलाइन ठगी का खेल, चार गिरफ्तार


    मुजफ्फरपुर।
    देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (Medical Entrance Examination) NEET का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है. पिछले महीने ही पेपर लीक (Paper leak) के बाद परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे. मामला इतना बढ़ा कि परीक्षा को लेकर बड़े स्तर पर जांच शुरू हुई, कई गिरफ्तारियां हुईं और कई राज्यों में छापेमारी तक हुई. अब जबकि 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित होने जा रही है, उससे पहले बिहार (Bihar) से सामने आई एक घटना ने फिर अभ्यर्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है.

    मुजफ्फरपुर में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो NEET परीक्षा का कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के नाम पर छात्रों और उनके परिजनों से ऑनलाइन ठगी (Online Fraud) कर रहा था. गिरोह टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर युवाओं को अपने जाल में फंसा रहा था. पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इससे पहले गिरोह के मुख्य आरोपी को जेल भेजा जा चुका है. अब तक कुल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।


    टेलीग्राम पर बिक रहा था फर्जी पेपर

    पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया पर ऐसे ग्रुप और चैनल चला रहे थे, जहां NEET परीक्षा का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था. छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनके पास परीक्षा से पहले ही पेपर पहुंच जाएगा और इसके बदले मोटी रकम मांगी जाती थी. परीक्षा की तैयारी में जुटे हजारों छात्र और उनके परिवार बेहतर भविष्य की उम्मीद में ऐसे झांसों का शिकार बन जाते थे. आरोपियों ने इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर ठगी का पूरा नेटवर्क खड़ा कर लिया था।


    एक सूचना और खुल गई पूरी परत

    मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के अनुसार, 2 जून को पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से संचालित एक गिरोह NEET परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र तैयार कर उसे टेलीग्राम के जरिए बेच रहा है. सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बालूघाट स्थित एक किराये के मकान पर छापेमारी की. वहां से गिरोह के मुख्य आरोपी मनीष झा को गिरफ्तार किया गया. तलाशी के दौरान उसके कब्जे से चार मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद हुआ. शुरुआती जांच में ही कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे, जिसके बाद मामले की गंभीरता बढ़ गई।


    बनाई गई विशेष जांच टीम

    मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया. पुलिस अधीक्षक नगर के पर्यवेक्षण और एएसपी नगर-1 के नेतृत्व में टीम ने तकनीकी निगरानी और मानवीय सूचनाओं के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया. मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंकिंग लेनदेन की पड़ताल के बाद पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने में सफलता मिली. लगातार चलाए गए अभियान के दौरान नगर थाना क्षेत्र से हर्ष, अमन कुमार और कन्हैया कुमार उर्फ मानव को गिरफ्तार किया गया. वहीं सिकंदरपुर थाना क्षेत्र से हर्ष कनोडिया को दबोच लिया गया।


    पूछताछ में खुला ठगी का तरीका

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे टेलीग्राम के माध्यम से छात्रों और उनके अभिभावकों से संपर्क करते थे. उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता था कि परीक्षा से पहले असली प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा. आरोपी पहले कुछ नमूना सामग्री भेजते थे और फिर ऑनलाइन भुगतान की मांग करते थे. रकम मिलने के बाद या तो फर्जी प्रश्नपत्र भेज दिया जाता था या फिर संपर्क तोड़ दिया जाता था. जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से प्राप्त धनराशि मुख्य आरोपी तक पहुंचाई जाती थी, जो पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था।


    मोबाइल से मिले अहम सुराग

    गिरफ्तार आरोपियों के पास से तीन और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं. पुलिस अब इन उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है. माना जा रहा है कि इनके जरिए कई राज्यों के छात्रों और अभिभावकों से संपर्क किया गया था. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए हैं. पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है।


    21 जून की परीक्षा से पहले अलर्ट

    अब जबकि 21 जून को परीक्षा आयोजित होनी है, पुलिस और प्रशासन अभ्यर्थियों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि कोई भी संस्था, व्यक्ति या सोशल मीडिया चैनल परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा करता है तो उस पर भरोसा न करें. विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान सोशल मीडिया पर सक्रिय ऐसे गिरोह छात्रों की मानसिक स्थिति और भविष्य की चिंता का फायदा उठाते हैं. इसलिए किसी भी संदिग्ध संदेश, लिंक या ऑफर से बचना जरूरी है।


    पुलिस की चेतावनी

    पुलिस का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. मामले में अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. फिलहाल मुजफ्फरपुर पुलिस की कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि परीक्षा सीजन शुरू होते ही साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं. ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को किसी शॉर्टकट के बजाय अपनी मेहनत और तैयारी पर भरोसा करना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

  • चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

    चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । देश के सर्राफा और कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजारों से लेकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) तक चांदी के दाम दबाव में दिखाई दिए, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच बाजार की दिशा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हाल के दिनों में लगातार ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही चांदी में आई यह गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    5 जून 2026 के कारोबारी सत्र में देश के कई प्रमुख बाजारों में चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के सर्राफा बाजारों में चांदी के भाव पिछले सत्रों की तुलना में नीचे आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल स्थानीय मांग और आपूर्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी बड़ा प्रभाव है।

    कमोडिटी बाजार में भी चांदी के वायदा कारोबार पर दबाव साफ दिखाई दिया। MCX पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों में प्रति किलोग्राम कई हजार रुपये तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि विभिन्न एक्सपायरी और कॉन्ट्रैक्ट अवधि के अनुसार दरों में अंतर बना रहा, फिर भी पूरे बाजार में कमजोरी का रुख स्पष्ट दिखाई दिया।

    स्थानीय स्पॉट मार्केट में भी चांदी की कीमतें नरम रहीं। व्यापारियों के अनुसार हाल के उच्च स्तरों के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी का असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है। इसके कारण खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन निवेशकों के लिए बाजार की दिशा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसी धातुएं अपेक्षाकृत महंगी हो जाती हैं, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों को सुरक्षित रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

    भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है। हालांकि ऐसे समय में आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का व्यवहार अपेक्षाकृत सतर्क बना हुआ है।

    कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, अमेरिकी डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और बाजार के संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।

    चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट उन उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है जो निवेश या आभूषण खरीदारी की योजना बना रहे हैं। वहीं निवेशकों के लिए यह समय बाजार की गतिविधियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।

  • Bihar: पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव….., Z+ सुरक्षा हटी

    Bihar: पूर्व सीएम लालू यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बड़ा बदलाव….., Z+ सुरक्षा हटी


    पटना।
    बिहार (Bihar) के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav ) और राबड़ी देवी (Rabri Devi) की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. दोनों नेताओं को पहले Z+ श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त थी, लेकिन अब उनकी सुरक्षा में कटौती कर दी गई है. वहीं बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की Y+ कैटेगरी की सुरक्षा पहले की तरह जारी रहेगी. जानकारी के अनुसार, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी दोनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पहले उन्हें सुरक्षा खतरों को देखते हुए Z+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी, हाउस गार्ड और एस्कॉर्ट वाहन शामिल होते थे।

    हालांकि वर्तमान सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी शख्स की सुरक्षा उसके मौजूदा संवैधानिक पद और उपलब्ध खुफिया इनपुट के आधार पर तय की जाती है. चूंकि दोनों नेता लंबे समय से किसी सक्रिय प्रशासनिक या संवैधानिक पद पर नहीं हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

    दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की Y+ श्रेणी की सुरक्षा को बरकरार रखा गया है. सुरक्षा समिति का मानना है कि नेता प्रतिपक्ष का पद कैबिनेट मंत्री के समकक्ष होता है. इसके अलावा उनकी लगातार राजनीतिक गतिविधियों, जनसभाओं और दौरों को देखते हुए मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था जारी रखने का फैसला लिया गया है.

    पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक तेज प्रताप यादव की सुरक्षा में भी कटौती की गई है. पहले उन्हें Y कैटेगरी की सुरक्षा मिलती थी, लेकिन अब उन्हें केवल एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी यानी अंगरक्षक उपलब्ध कराया जाएगा. सुरक्षा में यह बदलाव मंत्री पद छोड़ने के बाद लागू होने वाले नियमों के तहत किया गया है।


    राजश्री यादव की सुरक्षा के लिए एक बॉडीगार्ड की तैनाती

    लालू यादव की बड़ी बेटी और सांसद मीसा भारती को अब तीन सुरक्षाकर्मियों का सुरक्षा कवर मिलेगा. यह व्यवस्था सांसदों के लिए निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत तय की गई है. वहीं तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री यादव को एक सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराया जाएगा. राजश्री का कोई राजनीतिक या संवैधानिक पद नहीं है, लेकिन परिवार की सार्वजनिक गतिविधियों और व्यक्तिगत सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें एक अंगरक्षक दिया गया है. इस तरह लालू परिवार के विभिन्न सदस्यों की सुरक्षा व्यवस्था को उनके वर्तमान पद और सुरक्षा मानकों के अनुरूप पुनर्गठित किया गया है।

  • शिक्षा और संस्कृति के संगम की ओर बड़ा कदम, सीबीएसई में मैथिली भाषा शामिल होने से बढ़ा भाषाई गौरव

    शिक्षा और संस्कृति के संगम की ओर बड़ा कदम, सीबीएसई में मैथिली भाषा शामिल होने से बढ़ा भाषाई गौरव

    नई दिल्ली । भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद शिक्षा और सांस्कृतिक जगत में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस फैसले को न केवल एक भाषाई उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि इसे क्षेत्रीय भाषाओं को नई पहचान और मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।

    इस निर्णय के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली भाषा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने की तैयारी की गई है। इसके बाद कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को मातृभाषा के रूप में मैथिली पढ़ने का अवसर मिलेगा। लंबे समय से क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा व्यवस्था में बेहतर स्थान देने की मांग उठती रही है और इस फैसले को उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    मैथिली भाषा भारतीय संस्कृति और साहित्य की समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। मिथिला क्षेत्र की पहचान केवल उसकी सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं रही, बल्कि भाषा और साहित्य के क्षेत्र में भी उसका विशेष योगदान रहा है। ऐसे में शिक्षा के शुरुआती स्तर पर बच्चों को अपनी मातृभाषा से जोड़ने का प्रयास भाषा संरक्षण के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

    इस फैसले को लेकर बिहार में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। इसे मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गौरव के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा यदि बच्चों की मातृभाषा में दी जाए तो उनकी समझने और सीखने की क्षमता अधिक प्रभावी होती है। यही वजह है कि नई शिक्षा व्यवस्था में मातृभाषा आधारित शिक्षा को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है।

    शिक्षा नीति में भी प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा के प्रयोग पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी जड़ों, संस्कृति और स्थानीय पहचान से जोड़ना है। माना जाता है कि जब बच्चे अपनी परिचित भाषा में शिक्षा प्राप्त करते हैं तो उनका बौद्धिक और भावनात्मक विकास अधिक सहज तरीके से होता है।

    मैथिली भाषा को मिला यह स्थान केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा और परंपराओं के अधिक करीब आ सकेंगी। साथ ही यह कदम अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जिससे भारत की भाषाई विविधता और अधिक मजबूत हो सकती है।

    भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती बल्कि समाज की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी होती है। ऐसे में मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में मिला यह नया स्थान आने वाले समय में भाषाई संरक्षण और सांस्कृतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।

  • बिहार में मिड-डे मील खाने से 60 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मची अफरा-तफरी

    बिहार में मिड-डे मील खाने से 60 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मची अफरा-तफरी



    नालंदा । Bihar के नालंदा जिले में मिड-डे मील खाने के बाद 60 से ज्यादा स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। यह मामला नगरनौसा प्रखंड के मध्य विद्यालय कैला का है, जहां बुधवार को बच्चों को दोपहर के भोजन में चावल और छोले परोसे गए थे। खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को तेज पेट दर्द, उल्टी, दस्त और चक्कर आने लगे। कई बच्चे स्कूल परिसर में ही बेहोश होकर गिर पड़े, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    स्थिति गंभीर होते ही स्कूल प्रशासन ने आनन-फानन में सभी बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरनौसा और चंडी रेफरल अस्पताल पहुंचाया। एक छात्रा की हालत ज्यादा खराब होने पर उसे बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर किया गया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक अस्पताल पहुंच गए। बच्चों की हालत देखकर कई परिजन रोते-बिलखते नजर आए।

    बीमार बच्चों में अमृता कुमारी, अंकुश कुमार, अनुराधा कुमारी, तमन्ना, निशु, मुस्कान, कृति, ऋषि, आरती, सिमरन, खुशी, आदित्य, प्रियांशु, प्रिय, दीपक, प्रीति, डॉली, सौरभ और किरण समेत कई छात्र-छात्राएं शामिल हैं।

    छात्राओं ने आरोप लगाया कि मिड-डे मील में परोसी गई सब्जी में दवा जैसी संदिग्ध गोली दिखाई दी थी। बच्चों का कहना है कि रोज की तरह इस बार भोजन परोसने से पहले शिक्षकों ने टेस्टिंग भी नहीं की थी। हालांकि, बच्चों की हालत बिगड़ने के बाद एक शिक्षक अमरेश ने खुद खाना चखकर जांच करने की कोशिश की, लेकिन कुछ देर बाद उनकी भी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें भी अस्पताल ले जाना पड़ा।

    घटना के बाद मिड-डे मील सप्लाई करने वाली संस्था Ekta Foundation पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने संस्था पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया गया है।

    स्कूल की प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी ने बताया कि भोजन शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही बच्चों की तबीयत खराब होने लगी थी। हालात बिगड़ते देख तुरंत स्वास्थ्य विभाग और अधिकारियों को सूचना दी गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • MP: देवास ब्लास्ट में गई 5 की जान, धूल का काम बताकर बिहार से बुलाए गए थे मजदूर

    MP: देवास ब्लास्ट में गई 5 की जान, धूल का काम बताकर बिहार से बुलाए गए थे मजदूर


    देवास।
    आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे (Agra-Mumbai National Highway) पर स्थित टोंककला इलाके की एक पटाखा फैक्ट्री (Firecracker factory) गुरुवार सुबह 11 बजे खंडहर में तब्दील हो गई. एक जोरदार धमाके के साथ उठी आग की लपटों ने वहाँ काम कर रहे दर्जनों मजदूरों को अपनी चपेट में ले लिया. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री की छत उड़ गई और घटनास्थल पर मानव अंग बिखरे पड़े मिले।

    शुरुआत में तीन मजदूरों की मौत की खबर आई थी, लेकिन देर रात अमलतास हॉस्पिटल में भर्ती दो और मजदूरों अमर और गुड्डू ने दम तोड़ दिया. दोनों 99% तक झुलस चुके थे. अस्पताल में भर्ती 25 अन्य घायलों का उपचार जारी है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है।


    आरोपी पर NSA और 4 के खिलाफ FIR

    जिलाधिकारी ऋतुराज सिंह ने फैक्ट्री संचालक अनिल मालवीय के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए ‘राष्ट्रीय सुरक्षा कानून’ (NSA) लगाया है. पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, लाइसेंस की शर्तों का घोर उल्लंघन किया गया था. टोंकखुर्द थाना पुलिस ने मामले में कुल 4 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है।


    ‘धूल का काम’ बताकर बिहार से लाए गए थे मजदूर

    हादसे में जीवित बचे बिहार के मजदूर नवीन कुमार ने रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती सुनाई. नवीन ने एक न्यूज एजेंसी को बताया, ”मजदूरों को 14000 रुपये महीने की तनख्वाह पर यह कहकर लाया गया था कि उन्हें केवल धूल से जुड़ा काम करना होगा, लेकिन उन्हें बारूद के साथ 25×25 के छोटे कमरे में झोंक दिया गया।

    नवीन ने धुएं और मलबे के बीच से अपने भाई निरंजन को जलते हुए बाहर निकाला. उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री में आग बुझाने का कोई इंतजाम नहीं था.


    भीषण गर्मी बनी धमाके की वजह?

    मजदूरों का आरोप है कि भीषण गर्मी के बावजूद बारूद वाले कमरे में पानी का छिड़काव नहीं किया गया. गौरतलब है कि देवास समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश इस समय ‘हीट ज़ोन’ में है. केंद्रीय संगठन (PESO) और फोरेंसिक टीमें अब इस बात की तकनीकी जांच कर रही हैं कि क्या अत्यधिक तापमान के कारण बारूद में स्वतः स्फोट हुआ।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये की सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज का ऐलान किया है. उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना.


    विपक्ष का हमला

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घटनास्थल का दौरा कर सरकार पर ‘बारूद माफिया’ को संरक्षण देने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि कृषि गोदामों में अवैध रूप से पटाखे जमा थे और कलेक्टर को निलंबित करने की मांग की।


    लाइसेंस पर सवाल

    जांच में सामने आया कि अनिल मालवीय को दिसंबर 2025 तक के लिए दो लाइसेंस जारी किए गए थे, जिनका हाल ही में 6 मई को नवीनीकरण हुआ था. प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि रिहायशी इलाके के पास इतनी खतरनाक यूनिट को अनुमति कैसे मिली.


    दिल्ली से सीधे इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री

    CM मोहन यादव ने नई दिल्ली से इंदौर पहुंचकर अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती घायलों से भेंट की. मुख्यमंत्री ने सर्वप्रथम एयरपोर्ट से चोइथराम हॉस्पिटल पहुंचकर देवास के हादसे के कारण घायल हुए नागरिकों से मुलाकात की और उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों को जरूरी निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने एमवाय अस्पताल में दाखिल घायलों से भी मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का हालचाल जाना. CM यादव ने सभी घायलों के समुचित उपचार के निर्देश चिकित्सा अधिकारियों को दिए. इस अवसर पर अन्य जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

    बता दें कि गुरुवार दोपहर इस हादसे की जानकारी मिलते होते ही सीएम यादव ने देवास जिला प्रशासन को हादसे से प्रभावित नागरिकों की हर संभव सहायता के निर्देश दिए थे. इसके साथ ही CM ने दिवंगत नागरिकों के परिजन को मध्यप्रदेश शासन की ओर से 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करने और घायलों का निःशुल्क इलाज करने का ऐलान किया।