मकर संक्रांति कब है 2026: जानें कब मनाई जाएगी और किन चीजों का करें दान


नई दिल्ली । मकर संक्रांति हिंदू धर्म में एक बेहद महत्वपूर्ण और खास त्योहार है, जो हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से पौष माह में आता है और इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं जिसे देवताओं का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य की उपासना दान और विशेष रूप से गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान का महत्व होता है।

मकर संक्रांति कब है 2026

पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026, बुधवार को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन का विशेष पुण्य काल दोपहर 3:13 बजे से शुरू होकर लगभग 2 घंटे 32 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किए गए स्नान, दान, सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने और जप-तप का विशेष महत्व है।

मकर संक्रांति पर किन चीजों का करें दान

मकर संक्रांति का दिन विशेष रूप से दान के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दिन दान करने से न केवल पुण्य मिलता है बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन निम्नलिखित चीजों का दान करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को खुशहाली मिलती है तिल: तिल का दान बहुत शुभ माना जाता है और यह शरीर को निरोगी बनाता है।

गुड़: गुड़ का दान करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। खिचड़ी: खिचड़ी का दान करना और उसका सेवन करना विशेष रूप से इस दिन शुभ माना जाता है। चावल और उड़द: चावल और उड़द का दान करना भी मकर संक्रांति के दिन फलदायी होता है।हल्दी और नमक: हल्दी और नमक का दान भी पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। धान: धान का दान करने से अनर्थ और दरिद्रता का नाश होता है। इसके अलावा इस दिन दीन-हीन और गरीबों को वस्त्र, वस्तुएं, अन्न और अन्य जरूरी सामान दान करने का भी महत्व है।

मकर संक्रांति का महत्व

मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के उत्तरायण होने के कारण विशेष रूप से महत्व रखता है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन से सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक शक्ति और ऊर्जा लेकर आती हैं। यही कारण है कि इस दिन को शुभ कार्यों की शुरुआत और दान-पुण्य के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है।

स्नान-दान का महत्व

मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। साथ ही सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना और विशेष रूप से मंत्रों का जाप करना पुण्यदायी होता है। मकर संक्रांति का पर्व एक नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता लेकर आता है, जो जीवन को उज्जवल और समृद्ध बनाता है।