इंदौर दूषित पानी कांड: 24 मौतों में से 15 गंदे पानी से. MGM कॉलेज की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा. 5 माह का मासूम भी शिकार


इंदौर । देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी कांड ने प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में फैले इस जलजनित संक्रमण ने अब तक 24 लोगों की जान ले ली है। इस दर्दनाक सूची में मात्र 5 महीने का एक मासूम बच्चा भी शामिल है. जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।इस मामले में अब एमजीएम मेडिकल कॉलेज की विशेष टीम द्वारा तैयार की गई डेथ एनालिसिस रिपोर्ट सामने आई है. जिसमें चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। टीम ने कुल 21 मौतों का विस्तृत डेथ ऑडिट किया. जबकि बाकी मामलों की जानकारी अलग से संकलित की गई। रिपोर्ट के अनुसार. 15 लोगों की मौत सीधे तौर पर दूषित पानी के सेवन और उससे फैले उल्टी-दस्त जैसे संक्रमण के कारण हुई है। इस तथ्य की पुष्टि खुद शासन स्तर पर भी कर दी गई है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2 मौतें उस समय हुई थीं. जब क्षेत्र में महामारी जैसे हालात शुरू भी नहीं हुए थे। वहीं 4 लोगों की मौत अन्य चिकित्सकीय कारणों से होना सामने आया है। कुछ मामलों में मौत का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका. जिस पर आगे जांच की जरूरत बताई गई है। एमजीएम कॉलेज की यह रिपोर्ट कलेक्टर शिवम वर्मा को सौंप दी गई है. जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार. 29 दिसंबर से अब तक इस दूषित पानी की चपेट में 436 से अधिक लोग आ चुके हैं। इनमें से अधिकांश मरीजों का इलाज कर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. लेकिन हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। फिलहाल 33 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं. जिनमें से 8 की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। चिंता की बात यह है कि मंगलवार को भी 5 नए मरीज सामने आए हैं. जिससे संक्रमण के पूरी तरह थमने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में पेयजल पाइपलाइन में लंबे समय से लीकेज था. जिसके चलते सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिल गया। लोगों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या की शिकायत कई बार संबंधित विभागों से की. लेकिन समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यदि शुरुआत में ही पाइपलाइन की मरम्मत और जल की जांच कर ली जाती. तो इतनी बड़ी त्रासदी को रोका जा सकता था।यह मामला न सिर्फ इंदौर की स्वच्छता की छवि पर सवाल खड़े करता है. बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगे की कार्रवाई. जिम्मेदारों की जवाबदेही और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।