भोपाल में कर्मचारी मोर्चा: दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी सत्याग्रह पर, महिला कर्मचारी भी शामिल


भोपाल में सरकारी कर्मचारियों ने अपने अधिकारों और मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। स्थायी दैनिक वेतनभोगी और अंशकालीन कर्मचारी एकजुट होकर सतपुड़ा गेट पर सत्याग्रह पर बैठे हैं। आंदोलन में महिला कर्मचारी भी शामिल हैं। यह आंदोलन कर्मचारियों की पांच सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा है जो लंबे समय से प्रतीक्षित थे।

प्रांत अध्यक्ष अशोक पांडे के अनुसार कर्मचारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं: पहला उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर के आदेशानुसार सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए या उन्हें नियमित किया जाए। दूसरा शासन द्वारा अस्थाई पदों को सांख्येत्तर घोषित करने वाले आदेश दिनांक 22 दिसंबर 2025 को निरस्त किया जाए। तीसरा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित किया जाए ताकि उनके अधिकार सुनिश्चित हो सकें। चौथा अंशकालीन कर्मचारियों को श्रमायुक्त द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन या कलेक्टर दर के अनुसार वेतन भुगतान किया जाए। पांचवा अस्थाई कर्मचारियों को पेंशन सुविधा का लाभ प्रदान किया जाए।

सत्याग्रह में शामिल कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी आवाज़ सुनी नहीं जा रही और उनकी न्यायसंगत मांगों को अनदेखा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की अनदेखी और समय पर समाधान न मिलने के कारण उन्हें मजबूर होकर सड़क पर आंदोलन करना पड़ा है। महिला कर्मचारी भी इस आंदोलन में शामिल होकर यह संदेश दे रही हैं कि कर्मचारियों की समस्याएं केवल पुरुष कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं बल्कि सभी वर्गों को समान अधिकार मिलने चाहिए।स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा दृष्टि से सत्याग्रह स्थल पर विशेष व्यवस्था की है। हालांकि कर्मचारियों का आंदोलन शांतिपूर्ण है लेकिन इसका असर प्रशासन पर निश्चित रूप से पड़ेगा। कर्मचारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी जायज़ मांगों को मान्यता दिलाना है न कि किसी तरह का विवाद खड़ा करना।

इससे पहले भी विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की समान मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया था लेकिन इसे लागू करने में ढिलाई बरती गई। अब कर्मचारियों ने सत्याग्रह के माध्यम से सीधे सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचने का निर्णय लिया है।सत्याग्रह में भाग लेने वाले कर्मचारी मानते हैं कि यह आंदोलन उनके अधिकारों की लड़ाई है और यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो आगे और बड़े पैमाने पर आंदोलन की संभावना भी बनी हुई है। कर्मचारी मंच इस आंदोलन को लंबी लड़ाई के रूप में तैयार कर रहा है और इसका असर न केवल भोपाल बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी दिखाई देगा।