संसद में स्पीकर यूटी खादर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, मंत्री एचके पाटिल, प्रियांक खरगे, सलीम अहमद और बसवराज होरट्टी सहित कई नेता राज्यपाल का इंतजार कर रहे थे।
क्या है वजह?
राज्यपाल और सरकार के बीच संवैधानिक परंपरा और भाषण के कंटेंट को लेकर विवाद चल रहा है। गहलोत का कहना है कि सरकार के तैयार किए गए भाषण के 11 पैराग्राफ में बदलाव जरूरी हैं। इनमें केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना वाले हिस्से शामिल हैं। गहलोत ने इन हिस्सों को पूरी तरह हटाने की मांग की, जबकि सरकार केवल भाषा में सीमित बदलाव करने को तैयार थी।
कर्नाटक के लॉ और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने राज्यपाल से मुलाकात की और कहा कि संविधान के अनुच्छेद 176(1) के तहत राज्यपाल का संयुक्त सत्र को संबोधित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अगर भाषण में आपत्तिजनक भाषा है तो सरकार संशोधन कर सकती है, लेकिन पूरा पैराग्राफ हटाना स्वीकार्य नहीं।
ये मामला और बड़ा हो सकता है
कर्नाटक की घटना के पहले तमिलनाडु में भी 20 जनवरी को राज्यपाल आरएन रवि विधानसभा सत्र बीच में छोड़कर बाहर चले गए थे। दोनों राज्यों में राज्यपाल-सरकार की टकराहट राजनीतिक और संवैधानिक बहस को तेज कर रही है।
