चीन बॉर्डर के पास गरजीं तोपें, ‘अग्नि परीक्षा’ में इंडियन आर्मी और ITBP ने मिलकर दिखाया दम


नई दिल्ली। चीन सीमा के नजदीक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने 6 दिवसीय संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’ का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह अभ्यास 19 से 24 जनवरी तक पूर्वी सियांग जिले के सिगार में आयोजित किया गया, जिसका मकसद इंटर-फोर्स कोऑर्डिनेशन और युद्ध की तैयारी को और मजबूत करना था।

अग्नि परीक्षा: युद्धक्षेत्र की नई तैयारी
रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि यह अभ्यास दोनों बलों के बीच ऑपरेशनल इंटीग्रेशन और संयुक्त कौशल को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

इस अभ्यास में स्पीयर कोर के स्पीयरहेड गनर्स ने पैदल सेना रेजिमेंट और ITBP कर्मियों के साथ मिलकर इसे संचालित किया। यह अपनी तरह की पहली सहयोगात्मक गोलाबारी (Artillery firing) प्रशिक्षण पहल है।

तोपखाने की ताकत को समझना, लक्ष्य यही
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य था कि नॉन-आर्टिलरी (non-artillery) कर्मियों को तोपखाने के अभियानों और प्रक्रियाओं से परिचित कराकर युद्धक्षेत्र में तालमेल बढ़ाया जा सके।

कर्नल रावत ने कहा कि इससे पारंपरिक भूमिकाओं के बीच के अलगाव को तोड़ने में मदद मिलती है और गतिशील युद्ध परिदृश्यों में गोलाबारी के एकीकरण की समझ बढ़ती है।

आर्टिलरी फायरिंग का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान पैदल सेना और ITBP कर्मियों को अनुभवी गनर्स की देखरेख में स्वतंत्र रूप से कई तोपखाना फायरिंग अभ्यास करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
इस प्रक्रिया से आपसी विश्वास, समन्वय और तत्परता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

अग्नि परीक्षा का पहला चरण: भविष्य के युद्धक्षेत्र की तैयारी
लेफ्टिनेंट कर्नल रावत ने कहा कि यह अभ्यास भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए एकीकृत युद्ध क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

इस अभ्यास ने भारतीय सेना की ज्वाइंट कार्यकुशलता, मिशन-उन्मुख प्रशिक्षण और अंतर-एजेंसी सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया है।
चीन सीमा के पास यह अभ्यास भारतीय सेना और ITBP की तैयारी, एकता और युद्ध कौशल का एक मजबूत संदेश है। ‘अग्नि परीक्षा’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए हर स्तर पर तैयार है।