परमाणु जासूसी की सनसनीखेज रिपोर्ट अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट ने इस मामले में आग में घी डालने का काम किया है। रिपोर्ट के मुताबिक जनरल झांग पर आरोप है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियार कार्यक्रम की ‘अति-गोपनीय और तकनीकी जानकारियां’ अमेरिका को मुहैया कराई हैं। हालांकि, चीन के रक्षा मंत्रालय ने जासूसी के आरोपों पर चुप्पी साध रखी है लेकिन बंद कमरों में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को इस डेटा लीक के बारे में ब्रीफिंग दी गई है। परमाणु जासूसी के अलावा, झांग पर सैन्य खरीद में भारी रिश्वत लेने, पदोन्नति के बदले पैसे वसूलने और सेना के भीतर अपना एक समानांतर ‘राजनीतिक गुट बनाने के भी गंभीर आरोप हैं।
जिनपिंग का क्लीनअप ऑपरेशन या सुरक्षा में सेंध विशेषज्ञ इस कार्रवाई को शी जिनपिंग द्वारा सेना पर अपनी पकड़ और अधिक मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। इससे पहले पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू को भी इसी तरह अचानक बर्खास्त किया गया था। जांच की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि झांग के कार्यकाल में नियुक्त हुए दर्जनों अधिकारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। 2023 से अब तक चीन की सेना के करीब 50 से अधिक शीर्ष अधिकारी पद से हटाए जा चुके हैं या लापता हैं।
अंतरराष्ट्रीय अटकलें और संदेह वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताया है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का परमाणु कार्यक्रम इतना सख्त होता है कि वहां से डेटा लीक करना लगभग असंभव है, इसलिए यह मामला महज भ्रष्टाचार या सत्ता संघर्ष का भी हो सकता है। सोशल मीडिया पर सैनिकों की झड़प और गिरफ्तारी के अपुष्ट दावे तैर रहे हैं। यदि परमाणु जासूसी के आरोप सच साबित होते हैं, तो यह न केवल चीन की आंतरिक सुरक्षा बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शक्ति संतुलन को बदल कर रख देगा।
