ब्राह्मण होना योग्यता नहीं, हिंदू होना जरूरी’ RSS प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान, अंग्रेजी और राजनीति पर भी रखी दो टूक


नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर मुंबई में आयोजित व्याख्यानमाला के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने सरसंघचालक पद जाति भाषा राजनीति और राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघ प्रमुख बनने के लिए ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है बल्कि कोई भी हिंदू चाहे वह ब्राह्मण हो क्षत्रिय वैश्य शूद्र या फिर एससी-एसटी वर्ग से सरसंघचालक बन सकता है।

कार्यक्रम के दौरान सवालों के जवाब देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि RSS में पद जाति के आधार पर नहीं बल्कि काम और समर्पण के आधार पर तय होते हैं। उन्होंने कहा संघ में यह नहीं देखा जाता कि कौन किस जाति से है। जो काम करेगा वही आगे बढ़ेगा। एससी-एसटी होना अयोग्यता नहीं है और ब्राह्मण होना कोई विशेष योग्यता नहीं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संघ का नेतृत्व किसी जातीय पहचान से नहीं बल्कि हिंदू समाज की एकता से जुड़ा है।

भाषा को लेकर भी संघ प्रमुख ने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी कभी भी RSS की भाषा नहीं बनेगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। अंग्रेजी का उपयोग केवल आवश्यकता पड़ने पर किया जाएगा। संघ भारतीय भाषाओं विशेषकर हिंदी को प्राथमिकता देता है और आगे भी सिर्फ भारतीय भाषाओं में ही काम करेगा।

राजनीति को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर मोहन भागवत ने कहा कि RSS सरकार नहीं चलाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS और BJP दो अलग-अलग संगठन हैं। संघ का राजनीति से सीधा कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ ने पहले ही तय कर लिया है कि उसका काम केवल समाज को जोड़ना है न कि सत्ता या शासन चलाना। स्वयंसेवक भले ही अलग-अलग क्षेत्रों में हों लेकिन संगठन का उद्देश्य सामाजिक एकता तक ही सीमित है।

संघ की शुरुआत को याद करते हुए भागवत ने कहा कि प्रारंभिक दौर में संघ एक छोटी ब्राह्मण बस्ती से शुरू हुआ था इसलिए उस समय पदाधिकारी ब्राह्मण थे। इसी कारण लोगों में यह धारणा बनी कि संघ ब्राह्मणों का संगठन है। लेकिन जैसे-जैसे संघ का विस्तार हुआ यह धारणा स्वतः टूटती चली गई। आज संघ में हर जाति और वर्ग के लोग सक्रिय हैं।

अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर संघ प्रमुख ने सरकार से और सख्त कदम उठाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि पहले इस दिशा में काम नहीं हो रहा था लेकिन अब पहचान और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू हुई है। जनगणना और SIR जैसी प्रक्रियाओं से ऐसे लोग सामने आते हैं जो भारत के नागरिक नहीं हैं। उन्होंने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना प्रशासन को देने की अपील की। भागवत ने कहा कि घुसपैठियों को रोजगार नहीं मिलना चाहिए जबकि देश के नागरिकों को चाहे वे किसी भी धर्म के हों काम मिलना चाहिए।

बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि वहां करीब 1.25 करोड़ हिंदू रहते हैं। यदि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का निर्णय लेते हैं तो पूरी दुनिया के हिंदू उनके समर्थन में खड़े होंगे। भाषा विवाद को उन्होंने स्थानीय बीमारी” बताते हुए कहा कि इसे फैलने नहीं देना चाहिए। संघ के विस्तार को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि अब संघ जाति के आधार पर नहीं बल्कि भौगोलिक आधार पर फैलता है। हर बस्ती हर मंडल और हर गांव तक संघ का काम पहुंच रहा है। इसी कारण आज संघ में सभी जातियों और वर्गों की सहभागिता स्वाभाविक रूप से देखने को मिलती है।