उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों में फायर सेफ्टी एक संवेदनशील विषय है और इसे किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने निर्देश दिए कि फायर सेफ्टी से जुड़े सभी मुद्दों की सूची तैयार कर, मरम्मत और नवीनीकरण कार्य जल्द से जल्द शुरू किए जाएं। साथ ही, आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता और कार्य की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
इसके अलावा उन्होंने 16 जिला चिकित्सालयों और क्रिटिकल केयर हेल्थ ब्लॉकों के लिए आवश्यक पदों की स्वीकृति संबंधी प्रस्ताव को प्राथमिकता से तैयार करने और समस्त औपचारिकताएं पूर्ण कर कैबिनेट अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस संबंध में उन्होंने कहा कि मानव संसाधन की कमी से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है, इसलिए समय रहते पदों की स्वीकृति और भर्ती प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए।
उप मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों में फर्नीचर और अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के साथ-साथ उपकरणों और संसाधनों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है, ताकि कॉलेजों का संचालन शुरू होते ही मरीजों और छात्रों को सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने अधिकारियों को सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए और कहा कि किसी भी तरह की देरी स्वास्थ्य सेवा के विस्तार में बाधा बन सकती है।
बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री संदीप यादव, आयुक्त श्री धनराजु एस सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि सभी योजनाओं और निर्माण कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा होती रहे और समय-समय पर आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि विभागीय लक्ष्य समय पर हासिल हो सकें।
